ग्रहण 2027 कब है: 5 ग्रहण, सूतक, राशि असर
Trikaal Sandesh — Direct Answer
2027 में पांच ग्रहण पड़ेंगे: 6 फ़रवरी का वलयाकार सूर्य ग्रहण (भारत में अदृश्य), 21 फ़रवरी और 18 जुलाई के उपच्छाया चंद्र ग्रहण, 2 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण और 17 अगस्त का उपच्छाया चंद्र ग्रहण। दिल्ली में 2 अगस्त को आंशिक सूर्य ग्रहण 15:54 से 17:03 तक दिखेगा, सूतक सुबह 03:54 से।
Deep Dive Analysis
ग्रहण 2027 एक नज़र में
2027 के कैलेंडर में दो सूर्य ग्रहण और तीन चंद्र ग्रहण दर्ज हैं, यानी कुल पांच। इनमें से भारत से सबसे साफ़ दिखने वाला 2 अगस्त का सूर्य ग्रहण है, और वह भी दिल्ली में केवल आंशिक रूप में। बाकी चंद्र ग्रहण उपच्छाया वाले हैं, जिनमें चंद्रमा की चमक थोड़ी ही मंद पड़ती है। तारीख़ें त्रिकाल वाणी के ग्रहण-गोचर इंजन से दिल्ली NCR के लिए निकाली गई हैं। पूरे साल की तस्वीर के लिए 2027 की वार्षिक भविष्यवाणी और 2027 के बड़े गोचर साथ में पढ़ें।
2027 के पांच ग्रहणों की सूची
पहला ग्रहण 6 फ़रवरी का वलयाकार सूर्य ग्रहण है, जो मकर राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में बनेगा। दूसरा 21 फ़रवरी का उपच्छाया चंद्र ग्रहण है, सिंह राशि और मघा नक्षत्र में। तीसरा 18 जुलाई का उपच्छाया चंद्र ग्रहण है, मकर राशि और उत्तराषाढ़ा में। चौथा 2 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण है, कर्क राशि और पुष्य नक्षत्र में। पांचवां 17 अगस्त का उपच्छाया चंद्र ग्रहण है, मकर राशि और धनिष्ठा में, जो भारत से नहीं दिखेगा। आगे के हर खंड में एक-एक ग्रहण का विवरण है।
6 फ़रवरी 2027: वलयाकार सूर्य ग्रहण
यह वलयाकार सूर्य ग्रहण मकर राशि के धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा। विश्व स्तर पर इसकी अवधि लगभग 18:28 से 00:32 तक है और चरम क्षण लगभग 21:30 पर आता है। दिल्ली NCR से यह दिखाई नहीं देगा, क्योंकि उस समय सूर्य हमारे क्षितिज के नीचे रहता है। इसलिए भारत में सूतक नहीं माना जाएगा और मंदिर के सामान्य नियम चलते रहेंगे। फिर भी जो लोग ग्रहण की ऊर्जा पर साधना करते हैं, वे उस रात शांत जप कर सकते हैं। मकर की गोचर-स्थिति के लिए मकर राशि 2027 देखें।
21 फ़रवरी 2027: उपच्छाया चंद्र ग्रहण
यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण सिंह राशि के मघा नक्षत्र में होगा और दिल्ली से दिखाई देगा। उपच्छाया चरण लगभग 02:42 से 06:43 तक चलेगा और चरम लगभग 04:43 पर रहेगा। चूंकि यह छाया का हल्का चरण है, चंद्रमा पर कोई गहरा काला हिस्सा नहीं बनता और आंख से अंतर पकड़ना कठिन है। शास्त्र-परंपरा में उपच्छाया ग्रहण पर सूतक नहीं गिना जाता, इसलिए पूजा-पाठ और भोजन के नियम सामान्य रहेंगे। इस रात की चंद्र-स्थिति समझने के लिए चंद्र ग्रहण 2026 की मार्गदर्शिका उपयोगी है।
18 जुलाई 2027: उपच्छाया चंद्र ग्रहण
जुलाई का यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण मकर राशि के उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में बनेगा। दिल्ली में इसकी दृश्य अवधि रात लगभग 21:27 से 21:39 तक है, जिसका चरम 21:33 पर आता है। अवधि बहुत छोटी है और छाया इतनी हल्की कि इसे नंगी आंख से देख पाना संभव नहीं माना जाता। इस पर भी सूतक लागू नहीं होता। यह ग्रहण दो सप्ताह बाद आने वाले बड़े सूर्य ग्रहण की भूमिका जैसा है, इसलिए जिन्हें साधना का नियम रखना है वे इसी तारीख से तैयारी शुरू कर सकते हैं।
2 अगस्त 2027: पूर्ण सूर्य ग्रहण और दिल्ली का आंशिक दृश्य
यह साल का सबसे महत्वपूर्ण ग्रहण है। पूर्ण सूर्य ग्रहण कर्क राशि के पुष्य नक्षत्र में बनेगा, पर पूर्णता की पट्टी भारत से दूर रहती है। दिल्ली में यह केवल आंशिक दिखेगा: आरंभ 15:54, चरम 16:29 और समाप्ति 17:03। उस समय सूर्य का ढका हिस्सा बहुत थोड़ा है, मात्र 0.169 का परिमाण। भले ही ढकाव कम हो, पर दृश्य होने के कारण सूतक माना जाता है, जो सुबह 03:54 से लगेगा। राशि-फल और सूतक का पूरा विवरण आगे के खंडों में है, साथ ही कर्क राशि 2027 की स्थिति भी।
17 अगस्त 2027: उपच्छाया चंद्र ग्रहण
वर्ष का अंतिम ग्रहण 17 अगस्त का उपच्छाया चंद्र ग्रहण है, जो मकर राशि के धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा। यह भारत से दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक, स्नान-नियम या मंदिर-बंदी जैसी कोई बाध्यता नहीं बनती। इसे मात्र खगोलीय घटना की तरह दर्ज कीजिए। इसके बाद 2027 में कोई और ग्रहण नहीं है, और अगली श्रृंखला जनवरी 2028 में आरंभ होगी, और पूरे वर्ष का संदर्भ 2027 की वार्षिक भविष्यवाणी में मिलेगा। यदि आप ग्रहणों को राहु-केतु की धुरी के साथ जोड़कर पढ़ना चाहते हैं तो राहु क्या है और केतु क्या है पहले देख लें।
चंद्र ग्रहण क्यों लगता है
चंद्र ग्रहण का कारण शास्त्र में खगोलीय बताया गया है। बृहत्संहिता के अनुसार जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है तब चंद्र ग्रहण होता है।[1] यह तभी संभव है जब चंद्रमा सूर्य से सातवीं राशि में हो और उसका अक्षांश बहुत कम रहे, जिससे वह छाया की रेखा में आ जाए।[2] आसान शब्दों में, पूर्णिमा की रात जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में आते हैं, तब यह स्थिति बनती है, और चंद्र के शुभ योगों के लिए गजकेसरी योग देखा जा सकता है। हर पूर्णिमा पर ग्रहण इसलिए नहीं होता कि चंद्रमा की कक्षा थोड़ी झुकी हुई है।
सूर्य ग्रहण क्यों लगता है
सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन तब बनता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। बृहत्संहिता इसे बादल की उपमा देती है: जैसे बादल सूर्य को ढक लेता है, वैसे ही चंद्रमा उसे ढकता है, और इसी कारण अलग-अलग स्थानों से ग्रहण का दृश्य अलग दिखता है।[3] यही कारण है कि 2 अगस्त का ग्रहण विश्व में पूर्ण है, पर दिल्ली में आंशिक। दर्शक जितना पूर्णता की पट्टी से दूर होगा, सूर्य का उतना कम भाग ढकेगा। इसलिए ग्रहण का स्थानीय समय और परिमाण हमेशा अपने शहर के हिसाब से ही देखना चाहिए।
उपच्छाया ग्रहण क्या होता है
पृथ्वी की छाया के दो भाग होते हैं: गहरा भाग (प्रच्छाया) और हल्का बाहरी भाग (उपच्छाया)। जब चंद्रमा केवल हल्के भाग से गुज़रता है तो उपच्छाया चंद्र ग्रहण बनता है। इसमें चंद्र बिंब का रंग थोड़ा धूसर हो सकता है, पर कोई स्पष्ट हिस्सा कटा हुआ नहीं दिखता। 2027 के तीनों चंद्र ग्रहण इसी प्रकार के हैं। परंपरा में ग्रहण-नियम तभी लागू माने जाते हैं जब ग्रहण दिखाई दे, इसलिए उपच्छाया वाले ग्रहण में सूतक, मंदिर-बंदी और भोजन-निषेध की चिंता करने की आवश्यकता नहीं रहती। पिछले वर्ष के अनुभव के लिए ग्रहण ज्योतिष 2026 देखें।
वलयाकार, पूर्ण और आंशिक ग्रहण में अंतर
पूर्ण सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, वलयाकार में चंद्रमा दूर होने से छोटा दिखता है और सूर्य का किनारा अंगूठी की तरह चमकता रहता है, और आंशिक में सूर्य का केवल एक भाग ढकता है। 6 फ़रवरी का ग्रहण वलयाकार है, 2 अगस्त का पूर्ण है। दिल्ली जैसे शहर पूर्णता की पट्टी से बाहर होने पर दोनों को आंशिक ही देखते हैं। इसीलिए ग्रहण की तारीख़ के साथ अपने शहर का परिमाण पूछना ज़रूरी है। आगे की गोचर चर्चा के लिए 2027 के वक्री ग्रह भी देखें।
सूतक काल के नियम
सूतक ग्रहण से पहले का वह समय है जिसमें पूजा, भोजन पकाने और शुभ कार्यों से परहेज़ की परंपरा है। सामान्य गणना में सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक आरंभ माना जाता है। शर्त यह है कि ग्रहण आपके स्थान से दिखे। जो ग्रहण दिखता नहीं या केवल उपच्छाया वाला है, उसमें सूतक लागू नहीं होता। यह नियम इस पूरे वर्ष में बस एक ग्रहण पर काम करेगा, और वह है 2 अगस्त का। शुभ कार्यों की तारीख़ तय करते समय मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से जांच कर लें।
2 अगस्त 2027 का सूतक: समय की गणित
दिल्ली में ग्रहण का आरंभ 15:54 पर है। सूर्य ग्रहण के लिए 12 घंटे पहले गिनने पर सूतक 2 अगस्त की सुबह 03:54 से माना जाएगा और ग्रहण की समाप्ति 17:03 तक चलेगा। यानी पूरे दिन का बड़ा हिस्सा सूतक में आता है। इसका अर्थ यह नहीं कि सब कुछ रुक जाए। रोज़मर्रा की नौकरी, यात्रा और पढ़ाई सामान्य रहती हैं, बस पूजा-पाठ का समय और भोजन का प्रबंध पहले से तय कर लेना बेहतर है। ग्रहण के बाद स्नान और घर की शुद्धि करके सामान्य क्रम पर लौट आइए।
ग्रहण के समय क्या करें
ग्रहण के समय शांत मन से मंत्र-जप, ध्यान और भजन करना सबसे सरल और सुरक्षित मार्ग है। इस दौरान किया गया जप सामान्य दिनों से अधिक फल देने वाला माना गया है, और बृहत्संहिता में भी जप-नियम को शांति का अंग गिना गया है। अपने इष्ट मंत्र का जप करें, तुलसी का पत्ता पहले से खाद्य पदार्थों में रख लें और ग्रहण के बाद स्नान करें। जिनके पास समय की कमी हो वे 108 बार का एक छोटा जप भी कर सकते हैं। नियम इतना ही रखिए जितना आप निभा सकें, ताकि मन पर बोझ न बने, और उचित मंत्र के लिए उपाय कैलकुलेटर की सहायता लें।
ग्रहण के समय क्या न करें
परंपरा में ग्रहण-काल में नया भोजन पकाना, सोना और मंदिर की मूर्तियों का स्पर्श टाला जाता है। नए शुभ कार्य, जैसे गृह-प्रवेश या विवाह की बातचीत, ग्रहण के बाद की किसी शुभ तिथि पर रखें, जिसके लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर काम आता है। यदि भोजन पहले बन चुका है तो उसमें तुलसी रखकर सुरक्षित रखने की रीति है। ये नियम डर से नहीं, संयम से जुड़े हैं: ग्रहण का समय मन को भीतर लौटाने का अवसर है। जो नियम स्वास्थ्य के विपरीत पड़ें, जैसे बीमार या वृद्ध व्यक्ति का लंबा उपवास, उन्हें आवश्यकता अनुसार शिथिल कर देना ही समझदारी है।
गर्भवती महिलाएं और ग्रहण
गर्भवती महिलाओं के लिए ग्रहण के बारे में अनेक धारणाएं चलती हैं। 2027 में चूंकि दिल्ली में केवल 2 अगस्त का सूर्य ग्रहण ही दिखेगा और वह भी हल्का आंशिक है, इसलिए चिंता का कारण बहुत कम है। सरल सलाह यह है कि ग्रहण-काल में आराम करें, हल्का भोजन लें, शांत संगीत या मंत्र सुनें और धूप में सीधे सूर्य को न देखें। चिकित्सक की सलाह हर नियम से ऊपर रखें। ज्योतिष की सीख यहां आश्वासन की है: शांत मन ही सबसे अच्छा उपाय है, और उपाय कैलकुलेटर जैसे सरल साधन अतिरिक्त मार्गदर्शन दे सकते हैं।
राहु ग्रहण का कारण नहीं है
लोकप्रिय कथा में राहु को ग्रहण का कारण बताया जाता है, पर बृहत्संहिता स्पष्ट कहती है कि आचार्यों ने जो खगोलीय कारण बताया है उसमें राहु कारण नहीं है।[4] फिर भी परंपरा में राहु का नाम इसलिए जुड़ा रहा कि ब्रह्मा के वरदान की कथा के अनुसार ग्रहण के समय किए गए दान और हवन राहु को पोषण देते हैं।[5] इस प्रकार वैज्ञानिक दृष्टि और धार्मिक दृष्टि साथ-साथ चलती हैं: गणना खगोल से होती है, और उपासना राहु-केतु की भावना से। राहु का स्वरूप विस्तार से राहु क्या है में पढ़ें।
ग्रहण और राहु-केतु की धुरी
ग्रहण हमेशा उन्हीं बिंदुओं के पास बनते हैं जहां चंद्रमा की कक्षा सूर्य के पथ को काटती है, और ज्योतिष में यही बिंदु राहु और केतु कहलाते हैं। 2027 में राहु मकर और केतु कर्क में रहेंगे, इसलिए इस वर्ष के ग्रहण मुख्यतः मकर और कर्क की धुरी के आसपास बनते हैं, जो फ़रवरी, जुलाई और अगस्त की तारीख़ों में दिखता है। इस धुरी का राशि-वार विवरण राहु-केतु गोचर 2027 में है। सामान्य परिचय के लिए केतु क्या है और राहु-केतु गोचर 2026 उपयोगी हैं।
सूर्य ग्रहण सुरक्षित कैसे देखें
आंशिक सूर्य ग्रहण को नंगी आंख से देखना आंखों के लिए हानिकारक है, भले ही सूर्य का बहुत थोड़ा भाग ढका हो। केवल प्रमाणित ग्रहण-चश्मे (ISO 12312-2) का उपयोग करें। साधारण धूप के चश्मे, एक्स-रे फ़िल्म या फ़ोन कैमरे की स्क्रीन भरोसेमंद नहीं हैं। एक सुरक्षित विकल्प पिनहोल प्रोजेक्टर है, जिसमें कार्ड में छोटा छेद करके छाया को ज़मीन पर देखा जाता है। 2 अगस्त को दिल्ली में परिमाण केवल 0.169 है, इसलिए प्रभाव कम दिखेगा, पर आंख की सुरक्षा के नियम वही रहते हैं।
मकर राशि पर ग्रहणों का असर
2027 के पांच में से तीन ग्रहण मकर राशि में पड़ते हैं: 6 फ़रवरी, 18 जुलाई और 17 अगस्त। इसलिए मकर राशि और धनिष्ठा, उत्तराषाढ़ा तथा श्रवण से जुड़े जातकों को वर्ष में कई बार ग्रहण-ऊर्जा का स्पर्श मिलेगा। इसका अर्थ आमतौर पर निर्णयों में अतिरिक्त सोच-विचार और कामकाज की सीमाओं का नया मूल्यांकन होता है। चिंता की बात नहीं: इन तारीख़ों पर जप और संयम रखने से वही ऊर्जा स्थिरता में बदल सकती है। पूरे वर्ष की मकर-स्थिति के लिए मकर राशि 2027 देखें।
सिंह और कर्क राशि पर असर
सिंह राशि में 21 फ़रवरी का उपच्छाया चंद्र ग्रहण मघा नक्षत्र पर पड़ता है, जो पितृ-स्मृति और वंश-परंपरा का नक्षत्र माना जाता है। कर्क राशि में 2 अगस्त का सूर्य ग्रहण पुष्य नक्षत्र पर पड़ता है, जो पोषण और संरक्षण का नक्षत्र है। दोनों के लिए सामान्य संकेत घर-परिवार, माता-पिता और स्वास्थ्य की बातों पर थोड़ा अधिक ध्यान देने का है, किसी अनिष्ट का नहीं। जो जातक इन राशियों में जन्मे हैं, वे ग्रहण के बाद दान और जप से इस ऊर्जा को सहज बना सकते हैं। कर्क राशि 2027 में विस्तार है।
नक्षत्र के अनुसार ग्रहण का संकेत
ग्रहण जिस नक्षत्र में पड़ता है, उसके जातकों में उसकी ऊर्जा सबसे अधिक महसूस की जाती है। 2027 में धनिष्ठा (6 फ़रवरी और 17 अगस्त), मघा (21 फ़रवरी), उत्तराषाढ़ा (18 जुलाई) और पुष्य (2 अगस्त) प्रमुख हैं। यदि आपका जन्म-नक्षत्र इनमें से कोई है तो ग्रहण की तारीख़ पर जप, दान और संयम का थोड़ा अधिक ध्यान रखना उपयोगी है, भय का कारण नहीं। अपना जन्म-नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर का उपयोग करें, और चंद्र राशि के लिए राशि कैलकुलेटर।
6 फ़रवरी के ग्रहण पर गुरु की दृष्टि
बृहत्संहिता का सूत्र है कि यदि बृहस्पति ग्रहण के अशुभ फलों पर दृष्टि डालता है तो वे जल से बुझी अग्नि की तरह शांत हो जाते हैं।[6] 6 फ़रवरी 2027 को गुरु कर्क राशि में वक्री है और अपनी सातवीं दृष्टि से सामने की मकर राशि को देखता है, जहां यह सूर्य ग्रहण बनता है। इसलिए ग्रहण के संभावित भारी संकेत गुरु की दृष्टि से हल्के पड़ जाते हैं। गुरु के पूरे वर्ष के मार्ग के लिए गुरु गोचर 2027 पढ़ें, और गुरु-चंद्र के शुभ मेल के लिए गजकेसरी योग देखें।
ग्रहण के बाद वर्षा और शुद्धि का संकेत
प्राचीन परंपरा में ग्रहण के बाद के मौसम को भी संकेत माना गया है। बृहत्संहिता कहती है कि यदि ग्रहण के बाद सप्ताह भर के भीतर साफ़ वर्षा हो जाए तो अच्छी फसल होती है और ग्रहण के अशुभ फल नष्ट माने जाते हैं।[7] 2 अगस्त का ग्रहण मानसून के बीच आता है, इसलिए यह संकेत स्वयं में सहज रूप से देखा जा सकता है। ग्रहण के बाद घर की सफ़ाई, स्नान और जल-अर्पण का क्रम इसी शुद्धि की भावना से जुड़ा है। मौसम के संकेत को केवल परंपरा की सूचना की तरह लीजिए, किसी निश्चित भविष्यवाणी की तरह नहीं।
ग्रहण शांति का शास्त्रीय आधार
जब ग्रहण का फल भारी लगे तो शास्त्र शांति का सीधा मार्ग बताता है। बृहत्संहिता के अनुसार पूजा, जप, नियम, दान, आत्म-संयम और सत्संग से अशुभ फल की शांति होती है।[8] इसका अर्थ है कि कोई महंगा अनुष्ठान ज़रूरी नहीं, बल्कि छह सरल कदम पर्याप्त हैं। आगे दिए तीन उपाय इन्हीं कदमों से लिए गए हैं और हर एक पांच पंक्तियों में समझाया गया है ताकि आप अपनी सुविधा से चुन सकें। उपाय चुनने में संशय हो तो उपाय कैलकुलेटर आपकी कुंडली के हिसाब से सुझाव देता है।
उपाय 1: ग्रहण के बाद दान
सूर्य ग्रहण का सबसे पारंपरिक और सरल उपाय ग्रहण के बाद का दान है, जो सूर्य-चंद्र दोनों की ऊर्जा को संतुलित करता है।
क्या: गेहूं, गुड़ या तिल का दान किसी ज़रूरतमंद को करें। कब: 2 अगस्त 2027 को ग्रहण समाप्त होने (17:03) के बाद स्नान करके, उसी शाम या अगली सुबह। कितने का: अपनी सामर्थ्य अनुसार, लगभग 100 से 500 रुपये की सामग्री पर्याप्त है। कितने दिन: केवल एक दिन, पर चाहें तो अगले सात रविवार दोहरा सकते हैं। आपके लिए क्यों: कर्क या सिंह राशि और पुष्य, मघा नक्षत्र के जातकों के लिए यह दान मन को स्थिर करता है।
सावधानी: दान उतना ही करें जितना घर के बजट पर बोझ न बने, और सामग्री स्वच्छ तथा सही व्यक्ति को दें।
उपाय 2: इष्ट मंत्र का जप
जिन्हें दान संभव न हो, उनके लिए मंत्र-जप सबसे सुलभ उपाय है, और यह बृहत्संहिता में बताए जप-नियम की भावना से मेल खाता है।
क्या: अपने इष्ट देव या गायत्री मंत्र का 108 बार जप। कब: ग्रहण के समय, यानी 2 अगस्त को 15:54 से 17:03 के बीच, शांत स्थान पर बैठकर। कितने का: कोई खर्च नहीं, केवल माला या उंगली पर गिनती। कितने दिन: एक दिन, और चाहें तो ग्रहण के बाद 11 दिन रोज़ 11 माला। आपके लिए क्यों: मकर, धनिष्ठा या उत्तराषाढ़ा से जुड़े जातकों के लिए यह एकाग्रता और स्थिरता देता है।
सावधानी: जप शांत मन से करें, दिखावे या दबाव में नहीं, और स्वास्थ्य ठीक न हो तो बैठकर या लेटकर मानसिक जप कर लें।
उपाय 3: ग्रहण के बाद शुद्धि और जल-अर्पण
ग्रहण के बाद शुद्धि का उपाय शरीर और घर दोनों को सामान्य लय में लौटाता है, और यह शास्त्र के नियम-और-संयम वाले सूत्र से जुड़ता है।
क्या: स्नान करके घर में गंगाजल का छिड़काव और सूर्य या चंद्र को जल-अर्पण। कब: ग्रहण की समाप्ति के तुरंत बाद। 2 अगस्त को 17:03 के बाद। कितने का: लगभग 20 से 50 रुपये का गंगाजल पर्याप्त है। कितने दिन: एक बार, ग्रहण के उसी दिन। आपके लिए क्यों: जिन्होंने सूतक में पूजा-पाठ का नियम निभाया, उनके लिए यह दिन का सहज समापन बनता है।
सावधानी: ठंडे पानी से स्नान में असुविधा हो तो गुनगुना जल लें, क्योंकि नियम सुविधा के लिए हैं, कष्ट के लिए नहीं।
2028 की शुरुआत के ग्रहण
2027 के बाद अगली ग्रहण-श्रृंखला जनवरी 2028 में आरंभ होगी। 12 जनवरी 2028 को आंशिक चंद्र ग्रहण पड़ेगा और 26 जनवरी 2028 को मकर राशि में वलयाकार सूर्य ग्रहण पड़ेगा। दोनों भारत से दिखाई नहीं देंगे, इसलिए इन पर सूतक का प्रश्न नहीं उठता। मकर की धुरी (मकर राशि 2027) इस श्रृंखला में भी दिखती है, जो बताता है कि राहु-केतु की धुरी का प्रभाव एक वर्ष से आगे चलता है। योजना बनाने वालों के लिए 2027 की संपूर्ण भविष्यवाणी साथ में रखना सहायक रहेगा।
ग्रहण से जुड़े आम भ्रम और सच
पहला भ्रम है कि हर ग्रहण का सूतक सभी जगह माना जाए, जबकि परंपरा में सूतक केवल उस स्थान के लिए है जहां ग्रहण दिखता है। दूसरा भ्रम है कि उपच्छाया चंद्र ग्रहण भी भारी होता है, जबकि वह बहुत हल्का खगोलीय चरण है। तीसरा भ्रम है कि ग्रहण में भोजन और जल सदा दूषित हो जाते हैं, जबकि तुलसी रखने जैसे सरल नियम पर्याप्त माने जाते हैं। चौथा भ्रम है कि ग्रहण केवल अशुभ है। असल में यह जप, ध्यान और आत्म-निरीक्षण का अवसर है। मानसिक संतुलन और ग्रहों के संबंध पर चंद्र-शनि-राहु की धुरी का लेख देखें।
ग्रहण और शुभ कार्यों का मुहूर्त
ग्रहण के दिन और सूतक के समय नए शुभ कार्य, जैसे गृह-प्रवेश, मुंडन या सगाई, सामान्यतः टाले जाते हैं। 2027 में व्यावहारिक रूप से इसका असर केवल 2 अगस्त पर पड़ता है, क्योंकि बाकी चार ग्रहण दिल्ली में या तो दिखते नहीं या उपच्छाया वाले हैं। इसलिए 2027 की शुभ तिथियां तय करते समय बस उसी एक दिन को छोड़ना काफ़ी है। साल की अन्य शुभ तिथियों के लिए 2027 की शुभ तिथियां और योग और विवाह के लिए 2027 के विवाह मुहूर्त देखें।
अपने शहर में ग्रहण की दृश्यता कैसे जांचें
ग्रहण की तारीख़ दुनिया भर में एक होती है, पर समय, दृश्यता और परिमाण हर शहर में अलग होते हैं। इसलिए सबसे पहले यह देखें कि आपके शहर में ग्रहण क्षितिज के ऊपर आता है या नहीं। इस लेख में दिए समय दिल्ली NCR के लिए हैं। मुंबई, कोलकाता या चेन्नई में आरंभ और समाप्ति के समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं और सूतक का आरंभ उसी हिसाब से खिसकेगा। सबसे सही तरीका अपने शहर के निर्देशांक से गणना करवाना है। तब तक शनि की चाल जैसी बड़ी घटनाओं के लिए शनि गोचर 2027 और मेष में शनि 2027 का सहारा लें।
अपनी कुंडली में ग्रहण का असर जांचें
ग्रहण के राशि-फल सबके लिए सामान्य होते हैं, पर आपकी कुंडली में कौन-सा भाव और कौन-सा ग्रह छुआ जा रहा है, यह व्यक्तिगत बात है। इसलिए अपना जन्म विवरण डालकर मुफ्त जन्म कुंडली बनाइए और देखिए कि ग्रहण की राशि आपके किस भाव में आती है। यदि आपको सीधे कदम चाहिए तो उपाय कैलकुलेटर सरल उपाय सुझाएगा। राहु-केतु का पूरे वर्ष का असर जानने के लिए राहु-केतु गोचर 2027 और 2026 के ग्रहण भी पढ़ें। शुरुआती जांच मुफ़्त है।
Apna Personalized Analysis Lein
Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:
शब्दावली · Glossary
- सूतक
- ग्रहण से पहले का वह समय जिसमें पूजा, भोजन पकाने और शुभ कार्यों से परहेज़ की परंपरा है।
- उपच्छाया
- पृथ्वी की छाया का हल्का बाहरी भाग, जिसमें चंद्रमा बहुत मंद पड़ता है।
- वलयाकार ग्रहण
- वह सूर्य ग्रहण जिसमें चंद्रमा के चारों ओर सूर्य का किनारा अंगूठी की तरह चमकता रहता है।
- परिमाण
- ग्रहण में सूर्य या चंद्र के व्यास का कितना भाग ढका है, इसकी माप।
- राहु-केतु की धुरी
- चंद्र कक्षा और सूर्य पथ के कटान के दो बिंदु, जिनके पास ग्रहण बनते हैं।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
भूच्छायां स्वग्रहणे भास्करम् अर्कग्रहे प्रविशतिइन्दुः। प्रग्रहणम् अतः पश्चान् नैन्दोर् भानोश् च पूर्वअर्धात्॥
— बृहत्संहिता, अध्याय 5 — राहुचाराध्याय · श्लोक 8अपने ग्रहण में चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है, और सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को ढकता है।
At its own eclipse the Moon enters the Earth's shadow, and at a solar eclipse the Moon covers the Sun.
सूर्यात् सप्तमराशौ यदि चौदग्दक्षिणेन नअतिगतः। चन्द्रः पूर्वअभिमुखश् छायाम् और्वीम् तदा विशति॥
— बृहत्संहिता, अध्याय 5 — राहुचाराध्याय · श्लोक 10जब चंद्रमा सूर्य से सातवीं राशि में हो और अक्षांश कम हो, तब वह पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है।
When the Moon is in the seventh sign from the Sun with small latitude, it enters the Earth's shadow.
चन्द्रो अधःस्थः स्थगयति रविम् अम्बुदवत् समागतः पश्चात्। प्रतिदेशम् अतश् चित्रं दृष्टिवशाद् भास्करग्रहणम्॥
— बृहत्संहिता, अध्याय 5 — राहुचाराध्याय · श्लोक 11चंद्रमा नीचे से बादल की तरह सूर्य को ढकता है, इसलिए सूर्य ग्रहण का दृश्य स्थान-स्थान पर भिन्न होता है।
The Moon below hides the Sun like a cloud, so the sight of the solar eclipse differs from place to place.
एवम् उपरागकारणम् उक्तम् इदं दिव्यदृग्भिर् आचार्यैः। राहुर् अकारणम् अस्मिन्न् इत्य् उक्तः शास्त्रसद्भावः॥
— बृहत्संहिता, अध्याय 5 — राहुचाराध्याय · श्लोक 13दिव्य-दृष्टि वाले आचार्यों ने ग्रहण का यह कारण बताया है, और इस व्याख्या में राहु को कारण नहीं माना गया है।
The acharyas with divine insight gave this astronomical cause of eclipses, and in this explanation Rahu is not the cause.
यो असौअसुरो राहुस् तस्य वरो ब्रह्मणा अयम् आज्ञप्तः। आप्यायनम् उपरागे दत्तहुतांशेन ते भविता॥
— बृहत्संहिता, अध्याय 5 — राहुचाराध्याय · श्लोक 14असुर राहु को ब्रह्मा के वरदान के अनुसार ग्रहण के समय दिए गए दान और हवन का अंश उसे पोषण देता है।
By Brahma's boon to the asura Rahu, offerings made at an eclipse nourish him.
यद् अशुभम् अवलोकनाभिर् उक्तं ग्रहजनितं ग्रहणे प्रमोक्षणे वा। सुरपतिगुरुणाअवलोकिते तत्शमम् उपयाति जलैर् इवअग्निर् इद्धः॥
— बृहत्संहिता, अध्याय 5 — राहुचाराध्याय · श्लोक 62जिस ग्रहण पर बृहस्पति की दृष्टि पड़े, उसके अशुभ फल जल से बुझी अग्नि की तरह शांत हो जाते हैं।
Ill effects of an eclipse looked upon by Jupiter subside like fire quenched by water.
अविकृतसलिलनिपातैः सप्ताहअन्तः सुभिक्षम् आदेश्यम्। यच् चअशुभं ग्रहणजं तत् सर्वं नाशन् उपयाति॥
— बृहत्संहिता, अध्याय 5 — राहुचाराध्याय · श्लोक 96ग्रहण के बाद सप्ताह भर में साफ़ वर्षा हो तो अच्छी फसल होती है और ग्रहण के अशुभ फल नष्ट होते हैं।
Clear rain within a week of the eclipse means a good harvest and the ill effects of the eclipse are destroyed.
शमयौद्गताम् अशुभदृष्टिम् अपि विबुधविप्रपूजया। शान्तिजपनियमदानदमैः सुजनअभिभाषणसमागमैस् तथा॥
— बृहत्संहिता, अध्याय 103 — ग्रहगोचराध्याय · श्लोक 48अशुभ फल देव-ब्राह्मण पूजा, शांति, जप, नियम, दान, संयम और सज्जनों के संग-संवाद से शांत होता है।
Ill effects are pacified by worship, shanti rites, japa, observances, charity, self-restraint and the company of the good.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
2027 में कुल कितने ग्रहण पड़ेंगे?
2027 में कुल पांच ग्रहण पड़ेंगे: दो सूर्य ग्रहण (6 फ़रवरी और 2 अगस्त) और तीन उपच्छाया चंद्र ग्रहण (21 फ़रवरी, 18 जुलाई और 17 अगस्त)।
क्या 2027 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा?
6 फ़रवरी का वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत से नहीं दिखेगा। 2 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण दिल्ली में केवल आंशिक रूप में 15:54 से 17:03 के बीच दिखेगा।
2 अगस्त 2027 को सूतक कब लगेगा?
दिल्ली में ग्रहण 15:54 पर आरंभ होता है। सूर्य ग्रहण के लिए 12 घंटे पहले गिनने पर सूतक 2 अगस्त की सुबह 03:54 से माना जाएगा।
क्या उपच्छाया चंद्र ग्रहण में सूतक लगता है?
नहीं। परंपरा में सूतक तभी माना जाता है जब ग्रहण दिखाई दे और वह वास्तविक छाया वाला हो। उपच्छाया चंद्र ग्रहण में सूतक नहीं गिना जाता।
2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण किस राशि और नक्षत्र में है?
यह ग्रहण कर्क राशि के पुष्य नक्षत्र में बनेगा। कर्क राशि और पुष्य नक्षत्र के जातकों को घर-परिवार और स्वास्थ्य पर थोड़ा अधिक ध्यान देना उपयोगी है।
क्या राहु ग्रहण का कारण है?
बृहत्संहिता के अनुसार आचार्यों द्वारा दिए गए खगोलीय कारण में राहु कारण नहीं है। परंपरा में राहु का नाम दान और हवन की कथा के कारण जुड़ा रहा।
ग्रहण के समय क्या करना चाहिए?
शांत मन से इष्ट मंत्र का जप, ध्यान और भजन करें। भोजन में तुलसी रखें और ग्रहण समाप्त होने पर स्नान करके दान करें।
क्या गर्भवती महिलाओं को 2027 के ग्रहण से चिंता करनी चाहिए?
दिल्ली में केवल 2 अगस्त का हल्का आंशिक सूर्य ग्रहण दिखेगा। आराम करें, हल्का भोजन लें और सीधे सूर्य को न देखें। चिकित्सक की सलाह सबसे ऊपर रखें।
आंशिक सूर्य ग्रहण को सुरक्षित कैसे देखें?
केवल प्रमाणित ग्रहण-चश्मे या पिनहोल प्रोजेक्टर से देखें। नंगी आंख, साधारण धूप के चश्मे या फ़ोन कैमरे की स्क्रीन से सीधे देखना सुरक्षित नहीं है।
2027 के बाद अगला ग्रहण कब है?
अगली श्रृंखला जनवरी 2028 में है: 12 जनवरी को आंशिक चंद्र ग्रहण और 26 जनवरी को मकर राशि में वलयाकार सूर्य ग्रहण। दोनों भारत से दिखाई नहीं देंगे।
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