अमावस्या कब है 2026-27: तारीख और तिथि
Trikaal Sandesh — Direct Answer
अगली अमावस्या शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को है (आश्विन, सर्वपितृ और शनि अमावस्या), तिथि 9 अक्टूबर रात 9:36 से 10 अक्टूबर रात 9:20 तक है। इसके बाद 9 नवंबर, 8 दिसंबर, 7 जनवरी 2027 और 6 फरवरी 2027 (मौनी) आती हैं। तारीखें दिल्ली के सूर्योदय की तिथि पर हैं; अपना शहर जाँचें।
Deep Dive Analysis
अमावस्या कब है 2026-27: सभी तारीखें एक नज़र में
अगली अमावस्या शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को है। यह आश्विन अमावस्या है, जिसे सर्वपितृ अमावस्या कहते हैं, और शनिवार होने से शनि अमावस्या भी है। इसके बाद 9 नवंबर (कार्तिक), 8 दिसंबर (मार्गशीर्ष), 7 जनवरी 2027 (पौष), 6 फरवरी (माघ, मौनी), 8 मार्च, 6 अप्रैल, 6 मई, 4 जून, 4 जुलाई, 2 अगस्त, 31 अगस्त, 30 सितंबर, 29 अक्टूबर, 28 नवंबर और 27 दिसंबर 2027 आती हैं। यहाँ हर तारीख वह दिन है जिस दिन दिल्ली के सूर्योदय पर तिथि मौजूद है। अपने शहर के लिए लाइव पंचांग खोलें, और किसी भी कर्म के सही समय के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर साथ रखें।
अमावस्या क्या है और ज्योतिष में इसका महत्व
अमावस्या नए चंद्रमा की तिथि है, कृष्ण पक्ष की 30वीं और आखिरी तिथि, जब चंद्रमा और सूर्य लगभग एक ही अंश पर होते हैं। वैदिक गणित में तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है, और अमावस्या इस अंतर के 348 से 360 अंश का हिस्सा है। चंद्रमा मन और भावना का कारक है, इसलिए ज्योतिष में चंद्रमा की स्थिति और कला से मनोदशा और लगाव को पढ़ा जाता है। परंपरा में यह दिन पितरों से जुड़ा है, इसीलिए तर्पण और श्राद्ध की परंपराएँ इसी तिथि के आसपास चलती हैं।
दिल्ली के लिए अमावस्या की गणना कैसे करते हैं
हम दिल्ली (28.61 उत्तर, 77.21 पूर्व, भारतीय समय) के लिए हर मिनट सूर्य और चंद्रमा के बीच का कोण निकालते हैं और जिस क्षण यह 348 अंश पार करता है उसे अमावस्या का आरंभ, और 360 अंश को अंत मानते हैं। ये समय एक स्वतंत्र गणना इंजन से निकाले गए हैं और Open Ephemeris के JPL DE440 डेटा से जाँचे गए हैं। व्रत या स्नान का दिन वही है जिस दिन सूर्योदय इस समय-सीमा के अंदर आता है, यानी स्मार्त पद्धति, जिसे ज़्यादातर परिवार मानते हैं। छपे पंचांगों में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है, और जहाँ तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती या दो को छूती है, वहाँ हम साफ़ बताते हैं। अपने शहर के लिए पंचांग से मिलान करें।
अक्टूबर से दिसंबर 2026 की अमावस्या: तिथि का समय
आश्विन अमावस्या 9 अक्टूबर को रात 9:36 बजे से 10 अक्टूबर को रात 9:20 बजे तक है, इसलिए शनिवार 10 अक्टूबर वह दिन है। कार्तिक अमावस्या 8 नवंबर को सुबह 11:28 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:32 बजे खत्म होती है, इसलिए सूर्योदय सोमवार 9 नवंबर को पड़ता है, जबकि दिवाली 8 नवंबर की शाम लक्ष्मी पूजा प्रदोष में होती है, जब तिथि मौजूद रहती है। मार्गशीर्ष अमावस्या 8 दिसंबर को सुबह 4:13 बजे शुरू होकर 9 दिसंबर को सुबह 6:22 बजे खत्म होती है, यानी उस दिन के सूर्योदय से पहले, इसलिए मंगलवार 8 दिसंबर ही दिन है। सभी समय दिल्ली के भारतीय समय में हैं।
सर्वपितृ अमावस्या 2026: शनिवार, 10 अक्टूबर
पितृ पक्ष को समाप्त करने वाली आश्विन अमावस्या वह दिन है जब परिवार हर पूर्वज को याद करता है, उन्हें भी जिनकी मृत्यु की तिथि पता नहीं। तिथि 9 अक्टूबर रात 9:36 से 10 अक्टूबर रात 9:20 तक है, इसलिए 10 अक्टूबर की पूरी अपराह्न बेला इसमें आती है, जो श्राद्ध जैसे कर्मों के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। हमारे लेख सर्वपितृ अमावस्या का महत्व, पितृ पक्ष 2026 और पितृ पक्ष कब है का पन्ना पढ़ें, जिसमें शहर के हिसाब से समय दिए हैं।
कार्तिक अमावस्या और दिवाली 2026: कौन सा दिन मानें
दिवाली 2026 में 8 नवंबर को है, क्योंकि लक्ष्मी पूजा के लिए प्रदोष यानी शाम के पहले भाग में अमावस्या चाहिए और उस दिन तिथि सुबह 11:28 बजे शुरू हो चुकी है। अमावस्या के स्नान-दान और पितृ कर्म सूर्योदय के नियम से चलते हैं, जो सोमवार 9 नवंबर देता है, और सोमवार होने से यह सोमवती अमावस्या भी है। अगर आपके परिवार में दोपहर में तर्पण होता है, तो ध्यान रहे कि तिथि 8 नवंबर की दोपहर में है और 9 नवंबर की दोपहर में नहीं, इसलिए अपने पुरोहित से पूछ लें कि आपकी परंपरा क्या कहती है। त्योहार के लिए दिवाली कब है देखें।
जनवरी से जून 2027 की अमावस्या की तारीखें
पौष अमावस्या 6 जनवरी रात 11:15 से 8 जनवरी रात 1:55 तक है, और सूर्योदय गुरुवार 7 जनवरी 2027 को पड़ता है। माघ अमावस्या, यानी मौनी अमावस्या, 5 फरवरी शाम 7:06 से 6 फरवरी रात 9:26 तक है, इसलिए शनिवार 6 फरवरी दिन है, और यह शनि अमावस्या भी है। फाल्गुन अमावस्या 7 मार्च दोपहर 1:47 से 8 मार्च दोपहर 3:00 तक है, इसलिए सोमवार 8 मार्च सोमवती है। चैत्र अमावस्या मंगलवार 6 अप्रैल (सुबह 5:41 से अगले दिन सुबह 5:21), वैशाख अमावस्या गुरुवार 6 मई और ज्येष्ठ अमावस्या शुक्रवार 4 जून को है।
जुलाई से दिसंबर 2027 की अमावस्या की तारीखें
आषाढ़ अमावस्या रविवार 4 जुलाई 2027 को है, तिथि सुबह 8:32 बजे खत्म होती है। श्रावण अमावस्या सोमवार 2 अगस्त है, इसलिए यह सोमवती अमावस्या है, और भाद्रपद अमावस्या मंगलवार 31 अगस्त है। अगली सर्वपितृ अमावस्या, यानी आश्विन अमावस्या, गुरुवार 30 सितंबर है और तिथि सुबह 8:06 बजे खत्म होती है। कार्तिक अमावस्या शुक्रवार 29 अक्टूबर है, जिसके साथ दिवाली 2027 जुड़ी है। मार्गशीर्ष अमावस्या रविवार 28 नवंबर है, और पौष अमावस्या सोमवार 27 दिसंबर है, जो सोमवती है और जिसकी तिथि उसी सुबह 12:23 बजे से 28 दिसंबर को रात 1:42 तक चलती है।
सोमवती अमावस्या: 2026-27 में सोमवार की तारीखें
जब अमावस्या सूर्योदय पर सोमवार को मिलती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं। चंद्र-स्वामी का संबंध होने से इस दिन जल अर्पण और शांत पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस अवधि में सोमवती अमावस्या की तारीखें हैं: सोमवार 9 नवंबर 2026, सोमवार 8 मार्च 2027, सोमवार 2 अगस्त 2027 और सोमवार 27 दिसंबर 2027। कई घरों में हल्का उपवास रखा जाता है, सूर्योदय से पहले स्नान करके पीपल को जल चढ़ाया जाता है। चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए जिन्हें बेचैनी रहती है वे इस दिन बहस की जगह शांति चुनते हैं। अपनी राशि देखें कि चंद्रमा आपकी कुंडली में किस राशि को छूता है।
शनि अमावस्या: 2026-27 में शनिवार की तारीखें
शनि अमावस्या तब होती है जब अमावस्या तिथि शनिवार के सूर्योदय पर मौजूद हो। इस अवधि में यह 10 अक्टूबर 2026 को होती है, जो सर्वपितृ अमावस्या के साथ पड़ती है, और 6 फरवरी 2027 को, जो मौनी अमावस्या है। शनि अनुशासन, सेवा और देरी के कारक हैं, इसलिए इस दिन पीपल के नीचे दीपक, काम करने वालों को सादा भोजन और शांत दान की परंपरा है। अगर आप शनि के प्रभाव वाले समय में हैं तो साढ़ेसाती कैलकुलेटर से कुंडली जाँचें, और साढ़ेसाती कब चल रही है पढ़कर तय करें कि क्या करना है।
मौनी अमावस्या 2027: शनिवार, 6 फरवरी
माघ की अमावस्या, यानी मौनी अमावस्या, मौन, पवित्र स्नान और दान के साथ मनाई जाती है। तिथि 5 फरवरी शाम 7:06 बजे शुरू होकर 6 फरवरी रात 9:26 बजे खत्म होती है, इसलिए 6 फरवरी की पूरी सुबह इसमें आती है। सूर्योदय से पहले नदी में, या घर पर गंगाजल की कुछ बूँदों के साथ स्नान, फिर तिल और भोजन का दान करना आम चलन है। यह शनिवार को पड़ती है, इसलिए इसमें शनि अमावस्या के भाव भी जुड़ते हैं, और यह मकर संक्रांति के कुछ सप्ताह बाद आती है। घाट पर जाना हो तो यात्रा पहले से तय करें, क्योंकि भीड़ बहुत होती है।
अमावस्या पर क्या करें: एक सरल दिनचर्या
अमावस्या की दिनचर्या छोटी रखें। सूर्योदय से पहले उठें, स्नान करें, और दिन में हल्का भोजन लें, जैसे फल, दूध या सादा सात्त्विक भोजन। शाम को घी का दीपक जलाएँ, अगर आपके परिवार में तर्पण होता है तो काले तिल मिला जल दक्षिण दिशा में मुख करके पितरों को अर्पित करें, और कुछ मिनट शांत जप करें। किसी ज़रूरतमंद को भोजन, कपड़े या कुछ पैसे दें। घर का वातावरण शांत रखें, क्योंकि यह दिन नए आरंभ से ज़्यादा मनन का है। तर्पण और उपाय का लेख विधि चरण-दर-चरण बताता है, और पंचांग कैसे पढ़ें दिन को समझने में मदद करता है।
अमावस्या पर क्या न करें
परंपरा में अमावस्या पर गृहप्रवेश, नया व्यापार या विवाह जैसे शुभ आरंभ से बचा जाता है, क्योंकि मुहूर्त ग्रंथ इस दिन को पितरों और शांत साधना के लिए रखते हैं और चंद्रमा दिखाई नहीं देता। भारी मांसाहार, शराब और लंबी बहस से भी लोग बचते हैं। इसमें कोई अनहोनी की चेतावनी नहीं है; यह बस कैलेंडर का चुनाव है, क्योंकि नए आरंभ के लिए दूसरी तिथियाँ बेहतर हैं। किसी ज़रूरी काम की तारीख चाहिए तो शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर बेहतर समय बताता है, और विवाह मुहूर्त 2027 में नए चंद्रमा के दिनों से बचे हुए विवाह के दिन मिलते हैं।
अमावस्या का तर्पण और श्राद्ध: विधि कैसे काम करती है
तर्पण का अर्थ है तिल और जौ मिले जल से पितरों को तृप्त करना, उनके नाम और गोत्र के साथ। श्राद्ध में ब्राह्मण भोजन और कौआ, गाय, कुत्ते के लिए भोजन भी जोड़ा जाता है। मनुस्मृति 3.282 गृहस्थ के श्राद्ध को दर्श, यानी अमावस्या के कर्म, से जोड़ती है, जो अमावस्या की परंपरा की शास्त्रीय जड़ है [1]। बृहत्संहिता 98.2 पितरों को अमावस्या का देवता बताती है [2]। कौन कर सकता है, दिशा और सामग्री परिवार के अनुसार अलग होती है, इसलिए अपनी परंपरा मानें। कुंडली की दृष्टि से पिंडदान और पितृ दोष पढ़ें।
कुंडली में अमावस्या: सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में
जन्म कुंडली में अमावस्या के जन्म का अर्थ है कि चंद्रमा सूर्य के बहुत पास है, जिसे ज्योतिष चंद्रमा का अस्त होना और इसलिए कम बल वाला पढ़ता है। इसका अर्थ विनाश नहीं है; यह एक भीतर की ओर रहने वाले मन की ओर संकेत करता है, जिसे नियमित दिनचर्या और चौथे भाव के सुख तथा लग्नेश के सहारे की ज़रूरत हो सकती है। चंद्रमा का बल अपनी जन्म कुंडली में और नक्षत्र नक्षत्र कैलकुलेटर से देखें। चंद्रमा और पितृ दोष लेख बताता है कि शास्त्रों में चंद्र की कमज़ोरी पितृ अक्ष से कहाँ मिलती है।
अमावस्या पर पितृ दोष की जाँच: क्या देखें
कई लोग अमावस्या पर पूर्वजों से जुड़े योग देखते हैं, तो ज्योतिषी यह परखते हैं। नवम भाव और उसका स्वामी पिता की रेखा, सूर्य पिता, चंद्रमा माता की रेखा के कारक हैं, और इन बिंदुओं पर राहु या केतु अनसुलझे पारिवारिक पैटर्न का संकेत दे सकते हैं। पितृ दोष पूरी कुंडली से पुष्ट होने वाला निष्कर्ष है, किसी एक ग्रह का फ़ैसला नहीं। पहले पितृ दोष कैलकुलेटर चलाएँ, फिर पितृ दोष का मुख्य लेख और केतु और पितृ दोष तथा राहु और पितृ दोष पढ़ें।
अमावस्या और कालसर्प दोष: क्या दोनों जुड़े हैं
अमावस्या सूर्य-चंद्र की युति है, जबकि कालसर्प दोष वह स्थिति है जिसमें सभी ग्रह राहु और केतु के बीच आ जाते हैं, इसलिए दोनों अलग चीज़ें हैं। ये तभी मिलते हैं जब ग्रहण वाली अमावस्या राहु-केतु के पास पड़े, इसीलिए लोग कभी-कभी इन्हें मिला देते हैं। अगर आपको अपनी कुंडली में कालसर्प का संदेह है तो कालसर्प दोष कैलकुलेटर चलाएँ और कालसर्प दोष का लेख पढ़ें, ताकि पता चले कि यह पूर्ण है या आंशिक। परिणाम को एक पैटर्न की तरह समझें, शांत उपायों के साथ, चिंता का कारण नहीं।
अमावस्या का एक सरल उपाय जो कोई भी शुरू कर सकता है
अमावस्या छोटी और स्थिर आदत शुरू करने का अच्छा दिन है। नीचे की पाँच पंक्तियों की योजना अपनाएँ, और भारी लगे तो रुक जाएँ। क्या: अपने पितरों को कुछ काले तिल मिला जल अर्पित करें। कब: अमावस्या की सुबह स्नान के बाद, दक्षिण दिशा की ओर मुख करके। कैसे: जो नाम याद हों उन्हें लें और कृतज्ञता की एक छोटी प्रार्थना करें। कितना: हर अमावस्या पाँच मिनट, तीन महीने तक। सावधानी: यह तभी करें जब आपके परिवार की रीति से मेल खाए, और अस्वस्थ हों तो छोड़ दें। यह मन की शांति में सहायक है, योग्य ज्योतिषी की सलाह का विकल्प नहीं।
अमावस्या और धन: दिन का उपयोग रीसेट के लिए
कुछ लोग अमावस्या को महीने का हिसाब-किताब का दिन मानते हैं। वे छोटे बकाये चुकाते हैं, खुले काम बंद करते हैं और लिखते हैं कि शुक्ल प्रतिपदा, यानी नए चंद्रमा के अगले दिन, जब चंद्रमा फिर बढ़ने लगता है, वे क्या शुरू करेंगे। धन योग और पैसे के पैटर्न दूसरे और ग्यारहवें भाव से पढ़े जाते हैं, तिथि से नहीं, इसलिए दिन का उपयोग भविष्यवाणी की जगह योजना के लिए करें। कुंडली आधारित नज़र चाहिए तो हमारा दशा कैलकुलेटर बताता है कि कौन सी ग्रह दशा चल रही है।
अमावस्या और विवाह मुहूर्त: तारीख क्यों छोड़ी जाती है
विवाह अमावस्या पर नहीं किए जाते क्योंकि मुहूर्त के नियम इस दिन को पितृ कर्म के लिए रखते हैं और मन का कारक चंद्रमा अदृश्य होता है। अच्छी विवाह तिथियाँ इसलिए शुक्ल पक्ष में, शुभ नक्षत्र और बलवान चंद्रमा के साथ मिलती हैं। तारीख चुननी हो तो विवाह मुहूर्त 2026 या विवाह मुहूर्त 2027 खोलें, और कुछ तय करने से पहले जोड़े के लिए कुंडली मिलान चलाएँ। देवउठनी एकादशी के बाद का विवाह सीज़न हमारे एकादशी के लेख में है, और तारीख देवउठनी एकादशी के पन्ने पर मिलती है।
अमावस्या, पूर्णिमा और एकादशी: महीने के तीन आधार
चंद्र मास के तीन आधार हैं। एकादशी महीने में दो बार, हर पक्ष की 11वीं तिथि पर आती है, पूर्णिमा शुक्ल पक्ष को पूरा करती है और अमावस्या कृष्ण पक्ष को। साथ मिलकर ये हिंदू घर की उपवास और दान की लय तय करती हैं, और कई परिवार तीनों रखते हैं। एकादशी की तारीखें एकादशी कब है लेख में हैं, और अगला पूर्णिमा पर्व कार्तिक पूर्णिमा कब है के पन्ने पर समझाया गया है। महीना योजना बनाते समय पहले इन तीनों को अपने पंचांग में चिह्नित करें और बाकी काम इनके आसपास रखें।
2026-27 में अमावस्या से जुड़े पर्व
कई पर्व अमावस्या पर या उसके आसपास आते हैं। 10 अक्टूबर 2026 की सर्वपितृ अमावस्या पितृ पक्ष को समाप्त करती है, और उसके अगले दिन शारदीय नवरात्रि शुरू होती है, फिर दशहरा आता है। 8 नवंबर 2026 की दिवाली कार्तिक अमावस्या की है, और करवा चौथ तथा धनतेरस उससे कुछ सप्ताह पहले आते हैं। 6 फरवरी 2027 की मौनी अमावस्या मकर संक्रांति के बाद आती है, और 8 मार्च 2027 की फाल्गुन अमावस्या होली के मौसम के पास है। छठ पूजा का पन्ना दिवाली के बाद की तारीखें देता है।
अपने शहर के लिए अमावस्या कैसे जाँचें
तिथि का समय हर जगह एक है, लेकिन सूर्योदय शहर के साथ बदलता है, इसलिए पूर्व और पश्चिम में व्रत का दिन अलग हो सकता है। अपना दिन जाँचने के लिए अपने शहर का पंचांग खोलें, सूर्योदय का समय देखें और जाँचें कि वह ऊपर दी गई तिथि-सीमा में आता है या नहीं। अगर तिथि आपके सूर्योदय के कुछ मिनट बाद खत्म होती है, तो अपने कुल पुरोहित से पूछें कि कौन सा दिन मानें, क्योंकि रीतियाँ अलग हैं। किसी कर्म के सटीक समय के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर और तिथियों के तर्क के लिए पंचांग समझाने वाला लेख पढ़ें।
अमावस्या की तारीखों पर आम गलतियाँ
सबसे आम गलती है सूर्योदय का नियम देखे बिना किसी सामान्य कैलेंडर से तारीख ले लेना, क्योंकि तिथि एक शाम शुरू होकर अगले दिन की दोपहर तक चल सकती है। दूसरी गलती अमावस्या और प्रतिपदा, यानी अगले दिन, को मिला देना है, जब चंद्रमा फिर दिखने लगता है। तीसरी गलती दिवाली की पूजा का समय पितृ कर्म के लिए नकल करना है, क्योंकि दोनों के नियम अलग हैं, जैसा कार्तिक अमावस्या का उदाहरण दिखाता है। चौथी गलती केवल अमावस्या की तारीख से पितृ दोष पढ़ना है। सही जानकारी के लिए दो स्रोत मिलाएँ और हमारा लाइव पंचांग देखें।
आपकी जन्म तिथि और अमावस्या: एक निजी जाँच
आपकी जन्म तिथि वह तिथि है जिस पर आपका जन्म हुआ और यह आपकी कुंडली में मिलती है। अगर आपका जन्म अमावस्या पर हुआ, तो आपके जन्म पर चंद्रमा और सूर्य साथ थे, और चंद्रमा का बल तब उसके नक्षत्र और भाव पर निर्भर करता है। कोई निष्कर्ष निकालने से पहले अपनी कुंडली जन्म कुंडली कैलकुलेटर से निकालें और राशि कैलकुलेटर तथा नक्षत्र कैलकुलेटर से चंद्र राशि और नक्षत्र देखें। अपनी दशा भी जाँचें कि अभी कौन सा ग्रह-काल चल रहा है।
त्वरित संदर्भ: 2026-27 के अमावस्या दिन
- 10 अक्टूबर 2026, शनिवार: आश्विन, सर्वपितृ और शनि अमावस्या
- 9 नवंबर 2026, सोमवार: कार्तिक, सोमवती (दिवाली की शाम 8 नवंबर)
- 8 दिसंबर 2026, मंगलवार: मार्गशीर्ष
- 7 जनवरी 2027, गुरुवार: पौष
- 6 फरवरी 2027, शनिवार: माघ, मौनी, शनि
- 8 मार्च 2027, सोमवार: फाल्गुन, सोमवती
- 6 अप्रैल, 6 मई, 4 जून, 4 जुलाई 2027: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़
- 2 अगस्त 2027, सोमवार: श्रावण, सोमवती
- 31 अगस्त, 30 सितंबर, 29 अक्टूबर, 28 नवंबर 2027: भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष
- 27 दिसंबर 2027, सोमवार: पौष, सोमवती
अमावस्या के आसपास त्योहारों का महीना कैसे बनाएँ
अक्टूबर और नवंबर कैलेंडर के सबसे व्यस्त महीने हैं, इसलिए पहले से योजना बनाएँ। पितृ पक्ष 10 अक्टूबर को समाप्त होता है, नवरात्रि और दशहरा उसके बाद आते हैं, करवा चौथ अक्टूबर के अंत में है, धनतेरस और दिवाली नवंबर के पहले सप्ताह में हैं, और देवउठनी एकादशी 20 या 21 नवंबर को विवाह सीज़न लाती है। पहले अमावस्या चिह्नित करें, फिर यात्रा, खरीदारी और पारिवारिक कर्म उसके आसपास रखें। पितृ पक्ष कब है का पन्ना और पंचांग तारीखें जमाने में मदद करते हैं।
Apna Personalized Analysis Lein
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शब्दावली · Glossary
- अमावस्या
- नए चंद्रमा की तिथि, कृष्ण पक्ष की आखिरी, जब सूर्य और चंद्र लगभग एक ही अंश पर होते हैं।
- तिथि
- चंद्र दिन; वह समय जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है।
- सोमवती अमावस्या
- वह अमावस्या जो सोमवार के सूर्योदय पर मौजूद हो।
- शनि अमावस्या
- वह अमावस्या जो शनिवार के सूर्योदय पर मौजूद हो।
- तर्पण
- तिल और जौ मिले जल से पितरों को अर्पण।
- श्राद्ध
- पितरों के निमित्त भोजन और प्रार्थना का कर्म।
- अपराह्न
- दिन का दोपहर बाद का भाग, श्राद्ध जैसे कर्मों के लिए श्रेष्ठ।
- प्रतिपदा
- पक्ष की पहली तिथि, अमावस्या या पूर्णिमा के अगले दिन।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
न पैतृयज्ञियो होमो लौकिके ऽग्नौ विधीयते । न दर्शेन विना श्राद्धम् आहित.अग्नेर् द्विजन्मनः ॥ २८२ ॥
— Manusmriti, अध्याय 3 — अध्याय 3 · श्लोक 282 · github-sanskrittextsअग्निहोत्री गृहस्थ के श्राद्ध को दर्श यानी अमावस्या के कर्म से जोड़ा गया है; दर्श के बिना श्राद्ध नहीं कहा गया।
Links the shraddha of a householder who keeps the sacred fire with the Darsha, the new-moon rite, saying shraddha is not done without Darsha.
पितरोऽमावस्यायां संज्ञासदृशाश्च तैः क्रियाः कार्याः । नन्दा भद्रा विजया रिक्ता पूर्णा च ताः त्रिविधाः ।
— Brihat Samhita, अध्याय 98 — तिथिकर्मगुणाध्याय · श्लोक 2 · sanskritdocumentsअमावस्या के अधिष्ठाता पितर बताए गए हैं, तिथि के स्वभाव के अनुरूप कर्म करने को कहा गया है और तिथियाँ नन्दा, भद्रा, विजया, रिक्ता, पूर्णा वर्गों में बाँटी गई हैं।
Names the Pitris as the presiding deities of Amavasya, says actions should suit the nature of the tithi, and groups tithis into Nanda, Bhadra, Vijaya, Rikta and Purna.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
अक्टूबर 2026 में अमावस्या कब है?
अक्टूबर 2026 की अमावस्या दिल्ली के लिए शनिवार 10 अक्टूबर को है। तिथि 9 अक्टूबर रात 9:36 बजे से 10 अक्टूबर रात 9:20 बजे तक है, इसलिए 10 अक्टूबर का सूर्योदय इसके अंदर आता है। यह आश्विन अमावस्या, यानी सर्वपितृ अमावस्या है, और शनिवार होने से शनि अमावस्या भी है।
नवंबर 2026 में अमावस्या कब है?
कार्तिक अमावस्या 8 नवंबर सुबह 11:28 बजे से 9 नवंबर दोपहर 12:32 बजे तक है। दिवाली 8 नवंबर को है क्योंकि शाम का प्रदोष तिथि के अंदर है, जबकि सूर्योदय के नियम से स्नान-दान सोमवार 9 नवंबर को जाता है, जो सोमवती अमावस्या है।
दिवाली के बाद अगली अमावस्या कब है?
दिवाली के बाद अगली अमावस्या मार्गशीर्ष अमावस्या है, मंगलवार 8 दिसंबर 2026। तिथि 8 दिसंबर सुबह 4:13 बजे शुरू होकर 9 दिसंबर सुबह 6:22 बजे खत्म होती है, जो उस सुबह के सूर्योदय से पहले है, इसलिए दिल्ली के लिए दिन 8 दिसंबर है।
2026-27 में सोमवती अमावस्या कब-कब है?
सोमवती अमावस्या तब होती है जब सोमवार के सूर्योदय पर अमावस्या मौजूद हो। इस अवधि में तारीखें हैं: 9 नवंबर 2026, 8 मार्च 2027, 2 अगस्त 2027 और 27 दिसंबर 2027। कई परिवार हल्का उपवास रखकर पीपल को जल चढ़ाते हैं।
2026-27 में शनि अमावस्या कब है?
शनि अमावस्या शनिवार 10 अक्टूबर 2026 को है, जो सर्वपितृ अमावस्या भी है, और शनिवार 6 फरवरी 2027 को, जो मौनी अमावस्या भी है। दोनों तारीखें दिल्ली के सूर्योदय के नियम से हैं।
क्या अमावस्या अशुभ होती है?
मुहूर्त ग्रंथ अमावस्या पर विवाह या गृहप्रवेश जैसे नए आरंभ से बचने की सलाह देते हैं। साथ ही यह प्रार्थना, तर्पण, दान और मनन के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। यह कैलेंडर का चुनाव है, चेतावनी नहीं, और नए आरंभ के लिए बेहतर तारीखें आसानी से मिल जाती हैं।
अलग-अलग पंचांगों में अमावस्या की तारीख अलग क्यों होती है?
तिथि एक शाम शुरू होकर अगली दोपहर खत्म हो सकती है, और व्रत का दिन इस पर निर्भर करता है कि आप कौन सा सूर्योदय या दिन का कौन सा भाग मानते हैं। शहरों के सूर्योदय भी अलग होते हैं, इसलिए दो अच्छे पंचांग अलग दिन दिखा सकते हैं। अपने कुल की रीति या पुरोहित की सलाह मानें।
मृत्यु की तिथि न पता हो तो क्या अमावस्या पर तर्पण कर सकते हैं?
हाँ, सर्वपितृ अमावस्या उन पितरों के लिए रखी गई है जिनकी तिथि पता नहीं। काले तिल मिला जल अर्पित करें, जो नाम याद हों वे लें, कृतज्ञता की प्रार्थना करें और भोजन का दान दें। विधि परिवार के अनुसार बदलती है, इसलिए अपनी परंपरा मानें।
अमावस्या पर तर्पण किस समय करें?
श्राद्ध जैसे कर्म आमतौर पर अपराह्न में किए जाते हैं जब तिथि मौजूद हो, जबकि साधारण जल तर्पण सुबह स्नान के बाद किया जाता है। 10 अक्टूबर 2026 को तिथि पूरे दिन है, इसलिए दोनों समय ठीक हैं।
क्या अमावस्या का जन्म कमज़ोर चंद्रमा का संकेत है?
ज़रूरी नहीं। चंद्रमा सूर्य के पास होता है और अस्त माना जाता है जिससे बल घटता है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष नक्षत्र, भाव, दृष्टि और चल रही दशा पर निर्भर करता है। केवल जन्म तिथि के भरोसे न रहकर अपनी कुंडली जाँचें।
क्या अमावस्या और पितृ दोष एक ही हैं?
नहीं। अमावस्या कैलेंडर की एक तिथि है, जबकि पितृ दोष नवम भाव, सूर्य, चंद्र और राहु-केतु से जुड़ा कुंडली का पैटर्न है। लोग पितृ कर्म के लिए अमावस्या चुनते हैं, पर दोष की पुष्टि पूरी कुंडली से ही होती है।
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