कर्क राशि राजयोग: मंगल, गुरु और चंद्र
Trikaal Sandesh — Direct Answer
कर्क लग्न में बृहत पराशर होरा शास्त्र मंगल को पूर्ण योगकारक कहता है, क्योंकि वह पंचम और दशम भाव का स्वामी है। गुरु नवम भाव के स्वामी और उच्च होने से सहायक है, चंद्र लग्नेश है। गजकेसरी, मंगल की मजबूती और दशा से राजयोग का फल मिलता है। राशि और लग्न दोनों देखना ज़रूरी है।
Deep Dive Analysis
कर्क राशि राजयोग: संक्षिप्त उत्तर
कर्क लग्न की कुंडली में बृहत पराशर होरा शास्त्र मंगल को साक्षात पूर्ण योगकारक कहता है।[1] कारण यह है कि मंगल इस लग्न में पंचम और दशम, यानी एक त्रिकोण और एक केंद्र का स्वामी है। गुरु नवम और षष्ठ का स्वामी है और कर्क में उच्च होता है, जबकि चंद्र लग्नेश है। इसलिए इन तीनों की स्थिति और दशा से राजयोग का फल तय होता है। यदि आपकी केवल राशि कर्क है और लग्न अलग है, तो ऊपर के नियम सीधे नहीं बैठते। अपना लग्न निःशुल्क लग्न कैलकुलेटर से जाँचें। राजयोग की सामान्य विधि कुंडली में राजयोग कैसे देखें में है।
राशि और लग्न में अंतर: पहले यह तय करें
कर्क राशि का अर्थ है कि जन्म के समय चंद्र कर्क में था। कर्क लग्न का अर्थ है कि पूर्वी क्षितिज पर कर्क उदित था। इन दोनों के नियम अलग हैं। बृहत पराशर में योगकारक ग्रह लग्न के आधार पर बताए गए हैं, इसलिए कर्क लग्न वालों पर मंगल का नियम लागू होता है। कर्क राशि वालों के लिए चंद्र की स्थिति, उससे बनने वाले योग और चंद्र से गिने भाव देखे जाते हैं। अपना चंद्र राशि पाने के लिए निःशुल्क राशि कैलकुलेटर खोलें और लग्न के लिए लग्न निकालने की विधि पढ़ें।
राजयोग क्या है: केंद्र और त्रिकोण का मेल
जन्म कुंडली में केंद्र भाव लग्न, चतुर्थ, सप्तम और दशम हैं, और त्रिकोण भाव पंचम और नवम हैं, जिनके साथ लग्न भी गिना जाता है। ग्रंथ कहता है कि जो ग्रह त्रिकोण और केंद्र दोनों का स्वामी हो और केंद्र या त्रिकोण में बैठे, वह विशेष रूप से योगकारक है।[2] इसी सिद्धांत पर कर्क लग्न में मंगल सबसे ऊपर आता है। भावों की बुनियादी समझ के लिए ज्योतिष में 12 भाव और नौ ग्रह पढ़ें।
कर्क लग्न में मंगल: पूर्ण योगकारक
बृहत पराशर के अनुसार कर्क लग्न में शुक्र और बुध पाप हैं, मंगल गुरु और चंद्र शुभ हैं, और मंगल साक्षात पूर्ण योगकारक होकर मंगल देने वाला है।[1] मेष दशम भाव में आता है और वृश्चिक पंचम भाव में, इसलिए मंगल कर्म और बुद्धि-संतान, दोनों भावों को जोड़ता है। मंगल मकर में उच्च होता है, जो कर्क लग्न का सप्तम भाव है। यदि मंगल मज़बूत हो और पाप ग्रहों से पीड़ित न हो, तो करियर में साहस, पद और स्थिरता मिलती है। ग्रहों की ताकत मापने के लिए षड्बल की जानकारी देखें।
कर्क लग्न में गुरु: नवम और षष्ठ का स्वामी
गुरु कर्क लग्न में नवम भाव यानी भाग्य का और षष्ठ भाव यानी रोग-ऋण-शत्रु का स्वामी है। ग्रंथ में गुरु को शुभ ग्रहों में गिना गया है।[1] कर्क में गुरु उच्च होता है और लग्न में उसकी स्थिति धन और मान देती है। बृहत पराशर में कर्क में अपने अंश में स्थित गुरु को वैभव, शरीर के सुख और राजा से सम्मान का दाता बताया गया है।[6] गुरु के गोचर का वर्तमान असर गुरु गोचर 2026 में पढ़ें।
कर्क लग्न में चंद्र: लग्नेश की भूमिका
चंद्र कर्क का स्वामी है, इसलिए कर्क लग्न का लग्नेश भी वही है। ग्रंथ ने चंद्र को शुभ ग्रहों में रखा है।[1] लग्नेश की मज़बूती पूरी कुंडली की नींव है। यदि चंद्र शुक्ल पक्ष का हो, शुभ भाव में हो और पाप ग्रहों के प्रभाव से बचा हो, तो मन स्थिर रहता है और राजयोग के फल पाने की क्षमता बढ़ती है। चंद्र की दशा का अनुभव चंद्र महादशा और मानसिक स्वास्थ्य में देखें।
शनि, शुक्र और बुध: किन ग्रहों से सावधानी
ग्रंथ के अनुसार कर्क लग्न में शनि मारक है और सूर्य साहचर्य से फल देता है, जबकि शुक्र और बुध पाप ग्रह गिने गए हैं।[3] इसका अर्थ यह नहीं कि इनकी दशा अशुभ ही होगी। इसका मतलब यह है कि ये ग्रह योगकारक की तरह स्वतः राजयोग नहीं देते और इनके फल के लिए अन्य कारक देखने पड़ते हैं। शनि की वर्तमान स्थिति का असर जानने के लिए साढ़ेसाती और ढैया की जानकारी देखें।
मंगल और गुरु का मेल: भाग्य और कर्म का जुड़ाव
जब नवम भाव का स्वामी गुरु और दशम भाव का स्वामी मंगल साथ आते हैं, या एक दूसरे को देखते हैं, तो भाग्य और कर्म जुड़ते हैं। इसे ज्योतिष में बहुत शुभ संयोग माना जाता है और व्यावहारिक रूप में यह करियर में सही अवसर और मार्गदर्शन का संकेत देता है। यह एक व्यापक रूप से सिखाया जाने वाला सिद्धांत है, और इसके लिए हमने ऊपर के श्लोकों में सीधा नाम नहीं पाया, इसलिए इसे अनुभव आधारित मार्गदर्शन की तरह लें। भाग्य के योग धन योग से मिलकर पढ़े जाते हैं, देखें धन योग.
गजकेसरी योग: चंद्र और गुरु का शुभ संबंध
बृहत पराशर के अनुसार जब देवगुरु बृहस्पति लग्न या चंद्र से केंद्र में हों, शुभ दृष्टि या युति से युक्त हों और नीच, अस्त या शत्रु गृह में न हों, तब गजकेसरी योग बनता है।[4] ऐसे योग में जन्मा व्यक्ति तेजस्वी, धनवान, मेधावी, गुणवान और राजा का प्रिय बताया गया है।[5] कर्क लग्न में गुरु का कर्क में उच्च होकर लग्न में बैठना इस योग का सबसे सीधा रूप है, क्योंकि चंद्र भी वहीं हो सकता है। योग की शर्तें ध्यान से जाँचें, क्योंकि केवल नाम देखकर फल बताना ठीक नहीं।
कर्क राशि वालों के लिए गजकेसरी योग
यदि आपकी राशि कर्क है, तो चंद्र कर्क में है। चंद्र से केंद्र चंद्र से लग्न, चतुर्थ, सप्तम और दशम हैं, यानी कर्क, तुला, मकर और मेष। यदि इनमें से किसी में गुरु बैठा हो, तो गजकेसरी की मुख्य शर्त पूरी होती है। फिर देखें कि गुरु नीच, अस्त या शत्रु गृह में तो नहीं है। गुरु का नीच स्थान मकर है, जो चंद्र से सप्तम में आता है, इसलिए वहाँ की स्थिति में शर्त टूट सकती है। अपना चार्ट निःशुल्क जन्म कुंडली कैलकुलेटर से बनाएँ।
अमलकीर्ति योग: दशम भाव में शुभ ग्रह
बृहत पराशर में एक और शुभ योग है अमलकीर्ति, जो तब बनता है जब लग्न या चंद्र से दशम भाव में केवल शुभ ग्रह हों।[7] कर्क लग्न में दशम भाव मेष है, इसलिए वहाँ मंगल अपनी राशि में हो तो वह स्वयं बलवान है, पर अमलकीर्ति के लिए शुभ ग्रह चाहिए। इसलिए यह योग तभी बनेगा जब दशम में केवल शुभ ग्रह हों, जैसे गुरु, शुक्र, बुध या बलवान चंद्र, और कोई पाप ग्रह साथ न हो। इसके बारे में करियर की दृष्टि से करियर भविष्यवाणी में पढ़ें।
करियर पर राजयोग का असर
कर्क लग्न में दशम भाव का स्वामी मंगल है, इसलिए करियर की गुणवत्ता मंगल की स्थिति से बहुत जुड़ी है। मज़बूत मंगल प्रबंधन, प्रशासन, सुरक्षा, इंजीनियरिंग या भूमि से जुड़े क्षेत्रों में नेतृत्व देता है। गुरु का सहयोग सलाह, शिक्षा और वित्त जैसे क्षेत्रों में साथ देता है। यदि मंगल पर शनि या राहु की छाया हो, तो करियर में रुकावट या उतावलापन आ सकता है। अपनी नौकरी के समय की जाँच के लिए निःशुल्क दशा कैलकुलेटर देखें और करियर पेज पर संपूर्ण जानकारी पाएँ।
धन और संपत्ति पर असर
धन के लिए द्वितीय और एकादश भाव देखे जाते हैं। कर्क लग्न में द्वितीय भाव सिंह है जिसका स्वामी सूर्य है, और एकादश वृषभ है जिसका स्वामी शुक्र है। ग्रंथ में शुक्र को पाप कहा गया है, इसलिए धन का स्रोत अक्सर मंगल और गुरु के सहयोग से बनता है। चतुर्थ भाव में तुला है जो संपत्ति से जुड़ा है। धन के योग विस्तार से धन भविष्यवाणी में हैं और धन पेज पर अन्य जानकारी है।
विवाह और संबंधों पर असर
कर्क लग्न में सप्तम भाव मकर है, जिसका स्वामी शनि है। ग्रंथ ने शनि को मारक कहा है,[3] इसलिए विवाह में धैर्य और समझ की ज़रूरत पड़ सकती है। पर मंगल का मकर में उच्च होना सप्तम भाव को ऊर्जा देता है। इसलिए रिश्तों में अक्सर प्रबल और ज़िम्मेदार साथी मिलने का संकेत बनता है। निश्चित फल के लिए सप्तमेश शनि, सप्तम भाव और शुक्र की स्थिति देखें। विवाह समय के लिए कुंडली के साथ दशा का मिलान ज़रूरी है।
स्वास्थ्य और मन पर असर
लग्नेश चंद्र का सीधा संबंध मन से है, इसलिए कर्क लग्न और कर्क राशि वालों में भावनात्मक संवेदनशीलता अधिक रहती है। राजयोग का फल लेने के लिए मन का संतुलन ज़रूरी है। नियमित नींद, भोजन और ध्यान रखें। कोई लक्षण लगातार बना रहे तो चिकित्सक की सलाह लें। ज्योतिषीय पक्ष मानसिक स्वास्थ्य और चंद्र-शनि-राहु में समझाया गया है।
दशा में राजयोग का फल कब मिलता है
कोई भी योग अपना फल उन ग्रहों की दशा और अंतर्दशा में देता है जो उससे जुड़े हैं। कर्क लग्न में मंगल की महादशा सात वर्ष की होती है और गुरु की सोलह वर्ष की। इन दशाओं में, और चंद्र की दस वर्ष की दशा में, राजयोग के फल अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। पर यदि ग्रह कमज़ोर हों तो फल कम रहेगा। दशा की मूल बातें महादशा की व्याख्या में हैं, और अपनी तिथियाँ दशा कैलकुलेटर में देखें।
मंगल की महादशा में क्या अपेक्षा करें
कर्क लग्न में मंगल की दशा में पद, परिश्रम और संपत्ति से जुड़े मामले उभरते हैं। पंचम और दशम के कारण पढ़ाई, संतान और करियर तीनों में हलचल रहती है। यदि मंगल बलवान है तो यह समय आगे बढ़ने का होता है। यदि मंगल पीड़ित है तो जल्दबाज़ी, क्रोध और दुर्घटना की सावधानी रखें। अपने मंगल की ताकत की जाँच कमज़ोर ग्रह कैसे पहचानें की मदद से करें।
गुरु की महादशा में क्या अपेक्षा करें
गुरु की सोलह वर्ष की महादशा कर्क लग्न में भाग्य, शिक्षा, गुरु-कृपा और विदेश यात्रा के विषयों को आगे लाती है। चूंकि गुरु षष्ठ का स्वामी भी है, इसलिए ऋण, रोग और विवाद के मामलों में भी सावधानी चाहिए। उच्च और मज़बूत गुरु इन्हें सँभाल लेता है। पुखराज पहनने की जल्दबाज़ी न करें, पहले कौन सा रत्न पहनें पढ़ें।
चंद्र की महादशा में क्या अपेक्षा करें
चंद्र की दस वर्ष की दशा लग्नेश की दशा है, इसलिए यह जीवन की दिशा तय करने वाला काल हो सकता है। मन, माँ, घर और सार्वजनिक छवि के विषय उभरते हैं। यदि चंद्र शुभ स्थान में बलवान हो, तो यह राजयोग के फल देने का समय होता है। क्षीण चंद्र हो तो मन की अस्थिरता से बचने के लिए नियमित दिनचर्या रखें।
कर्क राशि वालों के लिए राजयोग की अन्य संभावनाएँ
यदि आपकी केवल राशि कर्क है, तो राजयोग की संभावना चंद्र से बने योगों में देखें। चंद्र कर्क में अपने घर में है, इसलिए वह बलवान माना जाता है। चंद्र से केंद्र में गुरु हो तो गजकेसरी बनता है, और चंद्र से दशम में शुभ ग्रह अकेले हों तो अमलकीर्ति। पर आपके लग्न के अनुसार योगकारक ग्रह बदलेंगे। इसलिए राशि से अकेले निष्कर्ष न निकालें और पूरी कुंडली देखें।
राजयोग भंग होने के कारण
योग तब कमज़ोर हो जाता है जब संबंधित ग्रह नीच, अस्त या शत्रु गृह में हों, या पाप ग्रहों से पीड़ित हों। गजकेसरी के लिए यह शर्तें ग्रंथ ने स्वयं दी हैं।[4] इसी तरह, यदि केंद्र और त्रिकोण के स्वामी स्वयं पाप भावों के भी स्वामी हों, तो परंपरा के अनुसार केवल उनके संबंध मात्र से पूरा योग नहीं मिलता। इसलिए हर योग को शर्तों के साथ जाँचें और बिना प्रमाण किसी को महँगे उपाय के लिए न कहें।
क्या रत्न ज़रूरी है
कर्क लग्न के लिए मोती, मूंगा और पुखराज की चर्चा अक्सर होती है, पर रत्न केवल तब काम का है जब ग्रह बलवान होने के बावजूद अतिरिक्त सहारे की ज़रूरत हो। गलत रत्न नुकसान भी कर सकता है। पहले कुंडली की पूरी जाँच कराएँ और रत्न के नियम पढ़ें। देखें कर्क लग्न के रत्न, रत्न धारण के नियम और गलत रत्न का नुकसान.
सरल उपाय: पाँच पंक्तियों में
क्या करें: मंगलवार की सुबह स्नान के बाद पाँच मिनट शांत बैठकर ॐ अं अंगारकाय नमः का 108 बार जप करें और अपने करियर का एक लक्ष्य लिखें। कब: मंगलवार, सूर्योदय के बाद। कितने का: कोई खर्च नहीं। कितने दिन: लगातार सात मंगलवार। आपके लिए क्यों: कर्क लग्न में मंगल योगकारक है, इसलिए उसे सम्मान और अनुशासन देना राजयोग को सक्रिय रखने का सरल तरीका है।[1] यह कोई चमत्कारी इलाज नहीं है और इसमें किसी डर की ज़रूरत नहीं है। चार्ट के अनुसार उपाय के लिए निःशुल्क उपाय कैलकुलेटर खोलें।
दूसरा उपाय: चंद्र की शांति
क्या करें: सोमवार की शाम किसी ज़रूरतमंद को दूध या चावल दें और रात में कुछ देर चाँद को देखते हुए शांत बैठें। कब: सोमवार शाम। कितने का: अपनी सामर्थ्य अनुसार, थोड़ा सा भी चलेगा। कितने दिन: चार सोमवार। आपके लिए क्यों: चंद्र लग्नेश है और मन का कारक है, इसलिए मन की शांति से राजयोग के फल लेने की क्षमता बढ़ती है। बड़े पूजन या महँगे खर्च की ज़रूरत नहीं है।
कर्क राशि राजयोग के प्रचलित भ्रम
पहला भ्रम है कि हर कर्क राशि वाले को राजयोग मिलता है, जबकि योग कुंडली की शर्तों पर निर्भर करता है। दूसरा भ्रम है कि राशि और लग्न एक ही हैं। तीसरा भ्रम है कि मंगल हमेशा अशुभ है, जबकि कर्क लग्न में वह योगकारक है।[1] चौथा भ्रम है कि राजयोग का अर्थ राजा बन जाना है, जबकि इसका अर्थ है पद, सम्मान और सफलता की संभावना। पाँचवाँ भ्रम है कि बिना दशा देखे फल मिल जाएगा, जो सही नहीं।
अपनी कुंडली में कर्क राजयोग कैसे जाँचें
पहले अपना लग्न और चंद्र राशि निकालें। फिर मंगल, गुरु और चंद्र की राशि, भाव, दृष्टि और बल देखें। उसके बाद चंद्र से केंद्र में गुरु की स्थिति और दशम भाव के ग्रह जाँचें। अंत में चल रही दशा देखें। यह सब आप निःशुल्क जन्म कुंडली कैलकुलेटर और लग्न व दशा कैलकुलेटर से शुरू कर सकते हैं। ग्रहों का परिचय कुंडली के नौ ग्रह में है।
कब किसी जानकार से सलाह लें
यदि आप करियर परिवर्तन, व्यवसाय, विवाह या बड़े निवेश का निर्णय ले रहे हैं, तो केवल इंटरनेट के सामान्य नियम पर भरोसा न करें। एक अनुभवी ज्योतिषी आपके लग्न, चंद्र, दशा और गोचर को एक साथ पढ़कर स्पष्ट दिशा दे सकता है। दिल्ली एनसीआर में व्यक्तिगत परामर्श के लिए दिल्ली परामर्श पेज देखें।
अपनी व्यक्तिगत कुंडली रीडिंग पाएँ
यदि आप अपने कर्क लग्न या कर्क राशि का राजयोग अपनी कुंडली, दशा और गोचर के साथ समझना चाहते हैं, तो Trikaal Vaani की रीडिंग आपके लिए है। यह योगकारक ग्रह, दशा के समय और सरल उपाय एक साथ देखती है। आप मुफ्त जन्म कुंडली से शुरुआत कर सकते हैं और सेवाएँ देख सकते हैं। रीडिंग की सीमित जगहें हर दिन उपलब्ध रहती हैं।
2027 में कर्क राशि के लिए क्या देखें
आने वाले वर्ष की सामान्य दिशा जानने के लिए कर्क राशि 2027 राशिफल गाइड पढ़ें, पर राजयोग की गहराई कुंडली से ही तय होती है। वर्ष का गोचर आपके योगों को सक्रिय या शांत कर सकता है। इसलिए पहले जन्म कुंडली के योग समझें और फिर गोचर देखें। लग्न की मूल अवधारणा लग्न और आरोहण में समझाई गई है।
वर्तमान गोचर में शनि का असर
वर्तमान में शनि मीन राशि में है और 27 जुलाई से 11 दिसंबर 2026 तक वक्री रहता है। कर्क राशि से मीन नवम भाव में आती है, जो भाग्य, गुरु और यात्रा का भाव है। वक्री शनि इस भाव में समीक्षा और धैर्य की माँग करता है। कर्क लग्न में शनि सप्तम और अष्टम का स्वामी है, इसलिए साझेदारी और अचानक बदलाव के विषयों में सावधानी रखें। विस्तार से शनि वक्री 2026 पढ़ें।
मोती, मूंगा और पुखराज का सही दृष्टिकोण
कर्क के लिए इन तीन रत्नों की चर्चा आम है। मोती चंद्र का, मूंगा मंगल का और पुखराज गुरु का रत्न माना जाता है। पर कोई भी रत्न कुंडली की शर्तें देखे बिना न पहनें। विस्तृत जानकारी के लिए मोती, मूंगा और पुखराज के लेख पढ़ें और उसके बाद ही निर्णय लें।
राजयोग और सितंबर 2026 का गुरु-शनि योग
हाल के गोचर योगों का सामान्य रूप सितंबर 2026 राजयोग में समझाया गया है। गोचर के योग सभी राशियों पर समान नहीं पड़ते। आपकी कुंडली का जन्मकालीन राजयोग स्थायी होता है और गोचर का योग अस्थायी। दोनों को अलग रखकर पढ़ें, ताकि आप भ्रम में न पड़ें और सही समय पर सही कदम उठा सकें।
राजयोग के बाद की ज़िम्मेदारी
राजयोग का अर्थ यह नहीं कि सफलता अपने आप आ जाएगी। यह एक क्षमता है जिसे प्रयास, अनुशासन और सही समय के साथ उपयोग करना पड़ता है। कर्क लग्न वाले अक्सर भावुक होते हैं, इसलिए निर्णय लेते समय मन को स्थिर रखना और योजनाओं को लिखित रूप देना उपयोगी रहता है। जो योग मिला है उसका सम्मान करें, पर अहंकार से बचें और सेवा को अपने काम में शामिल रखें।
राजयोग की जाँच के लिए पाँच सवाल
पहला, आपका लग्न कौन सा है। दूसरा, मंगल किस राशि और भाव में है और उसका बल कैसा है। तीसरा, चंद्र की स्थिति और पक्ष क्या है। चौथा, गुरु चंद्र या लग्न से केंद्र में है या नहीं। पाँचवाँ, इन ग्रहों की दशा कब आ रही है। इन पाँच उत्तरों से आप अपनी स्थिति का साफ़ चित्र बना सकते हैं, और बाकी उत्तर के लिए व्यक्तिगत कुंडली-पाठ करवाएँ। जल्दबाज़ी में किसी योग का नाम सुनकर निर्णय न लें।
Apna Personalized Analysis Lein
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शब्दावली · Glossary
- योगकारक
- वह ग्रह जो केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामी होकर राजयोग का फल देता है।
- लग्नेश
- लग्न भाव का स्वामी ग्रह।
- गजकेसरी योग
- चंद्र या लग्न से केंद्र में गुरु के बैठने से बनने वाला शुभ योग।
- त्रिकोण
- पंचम और नवम भाव, जो लग्न के साथ सबसे शुभ भाव माने जाते हैं।
- केंद्र
- लग्न, चतुर्थ, सप्तम और दशम भाव।
- दशा
- ग्रहों का वह काल जिसमें कोई योग अपना फल देता है।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
भार्गवेन्दुसुतौ पापौ भूसुतेज्येन्दवः शुभाः । पूर्णयोगकरः साक्षान्मंगलो मंगलप्रदः
— बृहत पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 · श्लोक 27कर्क लग्न में शुक्र और बुध पाप हैं, मंगल गुरु और चंद्र शुभ हैं और मंगल साक्षात पूर्ण योगकारक है।
For Cancer ascendant Venus and Mercury are malefic, Mars, Jupiter and the Moon are benefic, and Mars is directly the full yogakaraka.
कोणेशत्वे यदैकस्य केन्द्रेशत्वं च जायते । केन्द्रे कोणे स्थितो वाऽसौ विशेषाद्योगकारकः
— बृहत पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 · श्लोक 13जो ग्रह त्रिकोण और केंद्र दोनों का स्वामी हो और केंद्र या त्रिकोण में बैठे वह विशेष योगकारक है।
A planet that lords a trikona and also a kendra, and sits in a kendra or trikona, is specially a yogakaraka.
निहन्ताऽर्कसुतोऽर्कस्तु साहचर्यात् फलप्रदः । कर्कलग्नोद्।ह्भवस्यैवं फलं प्रोक्तं मनीषिभिः
— बृहत पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 34 · श्लोक 28कर्क लग्न में शनि मारक है और सूर्य साहचर्य से फल देता है।
For Cancer ascendant Saturn is the killer, and the Sun gives results through association.
केन्द्रे देवगुरौ लग्नाच्चन्द्राद्वा शुभदृग्।ह्युते । नीचास्तारिगृहैर्हीने योगोऽयं गजकेसरी
— बृहत पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 36 · श्लोक 3लग्न या चंद्र से केंद्र में गुरु, शुभ दृष्टि या युति के साथ और नीच अस्त या शत्रु गृह से रहित हो तो गजकेसरी योग बनता है।
Jupiter in a kendra from the lagna or the Moon, with benefic aspect or conjunction and free of debilitation, combustion or enemy houses, makes Gajakesari yoga.
गजकेसरीसञ्जातस्तेजस्वी धनवान् भवेत् । मेधावी गुणसम्पन्नो राजप्रियकरो नरः
— बृहत पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 36 · श्लोक 4गजकेसरी में जन्मा व्यक्ति तेजस्वी, धनवान, मेधावी, गुणवान और राजा का प्रिय होता है।
One born in Gajakesari becomes splendid, wealthy, intelligent, virtuous and dear to the king.
विभवस्यातिलाभश्च शरीरेऽपि सुखं तथा । नृपात्।ह् सम्मानलाभश्च कर्के स्वांशगते गुरौ
— बृहत पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 64 · श्लोक 15कर्क में अपने अंश में स्थित गुरु हो तो वैभव का बड़ा लाभ, शरीर का सुख और राजा से सम्मान मिलता है।
With Jupiter in Cancer in its own amsha there is great gain of wealth, bodily comfort and honour from the king.
दशमेऽङ्गात्तथा चन्द्रात् केवलैश्च शुभैर्युते । स योगोऽमलकीत्र्त्याख्यः कीर्तिराचन्द्रतारकी
— बृहत पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 36 · श्लोक 5लग्न या चंद्र से दशम में केवल शुभ ग्रह हों तो अमलकीर्ति योग बनता है।
Benefics alone in the tenth from the lagna or the Moon form the yoga called Amalakirti.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
कर्क लग्न में राजयोग कारक ग्रह कौन सा है?
बृहत पराशर होरा शास्त्र के अनुसार कर्क लग्न में मंगल साक्षात पूर्ण योगकारक है, क्योंकि वह पंचम और दशम का स्वामी है। गुरु और चंद्र भी शुभ माने गए हैं।
कर्क राशि और कर्क लग्न में क्या फर्क है?
कर्क राशि में जन्म के समय चंद्र कर्क में होता है, जबकि कर्क लग्न में पूर्वी क्षितिज पर कर्क उदित होता है। योगकारक ग्रह लग्न से तय होते हैं।
क्या कर्क राशि में गजकेसरी योग बनता है?
यदि चंद्र से केंद्र यानी कर्क, तुला, मकर या मेष में गुरु हो और वह नीच, अस्त या शत्रु गृह में न हो, तो गजकेसरी की मुख्य शर्त पूरी होती है।
कर्क लग्न में कौन से ग्रह पाप माने गए हैं?
ग्रंथ में शुक्र और बुध को पाप कहा गया है, शनि को मारक और सूर्य को साहचर्य से फल देने वाला बताया गया है।
मंगल कर्क लग्न में अशुभ है क्या?
नहीं। कर्क लग्न में मंगल पंचम और दशम का स्वामी होकर योगकारक है। उसका फल उसकी राशि, भाव और बल पर निर्भर करता है।
राजयोग का फल कब मिलता है?
योग से जुड़े ग्रहों की दशा और अंतर्दशा में फल अधिक स्पष्ट होता है, जैसे मंगल की सात वर्ष की, गुरु की सोलह वर्ष की और चंद्र की दस वर्ष की दशा।
क्या कर्क लग्न के लिए मूंगा पहनना चाहिए?
केवल तभी जब कुंडली की पूरी जाँच में मंगल को सहारे की ज़रूरत दिखे। बिना जाँच रत्न न पहनें, क्योंकि गलत रत्न नुकसान कर सकता है।
राजयोग टूटने के कारण क्या हैं?
संबंधित ग्रहों का नीच, अस्त या शत्रु गृह में होना या पाप ग्रहों से पीड़ित होना योग को कमज़ोर करता है। ग्रंथ में गजकेसरी की यही शर्तें दी गई हैं।
कर्क राशि का सरल उपाय क्या है?
मंगलवार को शांत बैठकर 108 बार जप करें और सोमवार को ज़रूरतमंद को दूध या चावल दें। ये उपाय बिना खर्च या डर के किए जा सकते हैं।
क्या इस पेज की बातें हर कर्क राशि वाले पर लागू होती हैं?
नहीं। ये सामान्य शास्त्रीय नियम हैं। आपके लग्न, चंद्र की स्थिति, दशा और गोचर मिलकर वास्तविक फल तय करते हैं।
यह भी देखें · See also
कर्क लग्न के लिए सबसे अच्छे रत्न कौन से हैं?
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श्रेणी: राजयोग · karma-destiny