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मेरे लिए कौन सा दिन शुभ है? शुभ वार जानें

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect16 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

वैदिक ज्योतिष में आपका शुभ दिन वह है जब चार बातें आपकी कुंडली से मेल खाएँ: वार-स्वामी आपकी चंद्र-राशि के स्वामी का मित्र हो, तिथि सहयोगी हो, और चंद्रमा का नक्षत्र व राशि आपके जन्म-नक्षत्र और राशि के लिए अनुकूल हों (ताराबल, चंद्रबल)। अपना दिन [लकी डे कैलकुलेटर](/calculators/free-lucky-day-calculator) से जांचें।

Deep Dive Analysis

मेरे लिए कौन सा दिन शुभ है? सीधा जवाब

आपका शुभ दिन वह है जिस दिन चार बातें आपकी अपनी कुंडली से मेल खाएँ: वार-स्वामी आपकी चंद्र-राशि के स्वामी का मित्र हो, तिथि सहयोगी प्रकार की हो, चंद्रमा का नक्षत्र आपके जन्म-नक्षत्र से अनुकूल तारा में पड़े (ताराबल), और चंद्रमा आपकी राशि से गिनने पर सहयोगी भाव में चले (चंद्रबल)। कोई एक वार सबके लिए शुभ नहीं होता। पहले मुफ़्त राशि कैलकुलेटर से अपनी चंद्र-राशि और मुफ़्त नक्षत्र कैलकुलेटर से जन्म-नक्षत्र निकालें, फिर लकी डे कैलकुलेटर से इन्हें कैलेंडर पर मिलाएँ। नीचे पूरी विधि दी है ताकि आप किसी भी परिणाम को खुद परख सकें।

वैदिक ज्योतिष में शुभ दिन का अर्थ

वैदिक ग्रंथ अंग्रेज़ी शब्द luck का प्रयोग लगभग नहीं करते। वे शुभ (सहयोगी) और अशुभ (सावधानी वाली) स्थितियों की बात करते हैं, जिन्हें पंचांग पाँच अंगों से पढ़ता है: तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। आज के मान आप त्रिकाल वाणी पंचांग पर देख सकते हैं और पढ़ना हमारी पंचांग और चौघड़िया गाइड से सीख सकते हैं। बृहत् संहिता हर तिथि को पाँच नामित समूहों में बाँटती है और कर्म को उसी समूह के अनुरूप करने को कहती है।[1] इसलिए शुभ दिन आपके पक्ष में एक झुकाव है, गारंटी नहीं: जिस काम की तैयारी आपने कर ली है उसमें यह घर्षण घटाता है, तैयारी की जगह नहीं लेता।

शुभ दिन और मुहूर्त में अंतर: निजी मेल और घटना का समय

मुहूर्त एक सवाल का उत्तर देता है: कोई विशेष कार्य, जैसे विवाह, वाहन की डिलीवरी या नौकरी का पहला दिन, कब शुरू हो। शुभ दिन एक व्यापक और निजी सवाल का उत्तर देता है: सप्ताह और महीने के कौन-से दिन मेरे पक्ष में चलते हैं। रोज़मर्रा के फ़ैसलों, जैसे नई आदत शुरू करना, कठिन बातचीत करना या छोटा सौदा तय करना, के लिए शुभ दिन देखें। बड़े आयोजन के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर गाइड या मुफ़्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर पर जाएँ, जो संबंधित व्यक्ति की कुंडली भी जाँचता है। सोना खरीद मुहूर्त और जॉब जॉइनिंग मुहूर्त जैसी गाइडें हर अवसर पर और गहराई से बताती हैं।

निजी शुभ दिन की पाँच परतें

शुभ दिन को पाँच परतों के रूप में समझें। वार, तिथि और नक्षत्र किसी तारीख़ पर सबके लिए एक ही होते हैं, इसलिए वे निजी तभी बनते हैं जब आपकी कुंडली से मिलाए जाएँ। ताराबल और चंद्रबल जन्म से ही निजी हैं, क्योंकि वे आपके अपने जन्म-नक्षत्र और चंद्र-राशि से गिने जाते हैं। मुहूर्त चिंतामणि भी चंद्रमा के बल को ताराबल से आँकने की बात करती है।[15] जो दिन तीन-चार परतों पर खरा उतरे वह आपके लिए अच्छा दिन है; जो केवल एक पर उतरे वह साधारण है। पाँचों का एक साथ मिलना दुर्लभ है, इसलिए लक्ष्य यह है कि महत्वपूर्ण कदम वाले दिन कमज़ोर परतें एक साथ न जुड़ें।

क्या चाहिए: चंद्र-राशि, जन्म-नक्षत्र और जन्म का वार

पहले चरण के लिए तीन बातें काफ़ी हैं। आपकी जन्म राशि (चंद्र-राशि) राशि कैलकुलेटर से मिलती है और हमारी चंद्र राशि गाइड में समझाई गई है। आपका जन्म-नक्षत्र नक्षत्र कैलकुलेटर से मिलता है; नक्षत्र गाइड और जन्म नक्षत्र कैसे पता करें इसे पढ़ने में मदद करते हैं। जन्म का वार आप तारीख़ से देख सकते हैं। सटीक जन्म-समय हो तो जन्म कुंडली कैलकुलेटर तीनों एक साथ दे देता है। घंटों की चूक वाला जन्म-समय नक्षत्र बदल सकता है, इसलिए रिकॉर्ड संदिग्ध हो तो जन्म समय की शुद्धता देखें।

वार-अधिपति: सात दिनों के सात स्वामी

हर वार का एक ग्रह-स्वामी होता है, जिसे वार-अधिपति कहते हैं: रविवार का सूर्य (रवि), सोमवार का चंद्र (सोम), मंगलवार का मंगल, बुधवार का बुध, गुरुवार का बृहस्पति (गुरु), शुक्रवार का शुक्र और शनिवार का शनि। दिन अपने स्वामी का स्वभाव ओढ़ लेता है, इसलिए मंगलवार ऊर्जावान और गुरुवार विस्तार वाला लगता है। यही कारण है कि एक ही वार किसी को सहयोगी और किसी को भारी लगता है: आपकी कुंडली का उस ग्रह से पहले से एक संबंध है। नौ ग्रहों की याद ताज़ा करने के लिए नवग्रह गाइड या कुंडली के 9 ग्रह पढ़ें।

वार-स्वामी की मित्रता कैसे तय करती है आपका वार

व्यावहारिक कसौटी वार-स्वामी और आपकी चंद्र-राशि के स्वामी की मित्रता है। हम इसे राशि-स्वामी की ओर से पढ़ते हैं: आपकी चंद्र-राशि का स्वामी वार-स्वामी को किस नज़र से देखता है। पाराशरी परंपरा पहले नैसर्गिक मित्र-शत्रु गिनाती है, फिर स्थिति से तात्कालिक मित्रता जोड़ती है, और दोनों मिलकर फल देती हैं: दोनों में मित्र हो तो अधिमित्र, मित्र और सम हो तो मित्र, शत्रु और सम हो तो शत्रु।[17] जहाँ मित्रता और शत्रुता मिलें वहाँ ग्रह सम होता है और दोनों में शत्रु हो तो अधिशत्रु, इसलिए दैवज्ञ सब तौलकर ही निर्णय देता है।[18] मित्रता दोनों ओर से एक-सी भी नहीं होती: मंगल शनि को सम मानता है जबकि शनि मंगल को शत्रु मानता है। शत्रु वार-स्वामी सावधानी का कारण है, घबराहट का नहीं, और आगे हर वार के साथ उसका समाधान दिया है। ग्रह की स्थिति भी मायने रखती है; ग्रहों की उच्च-नीच स्थिति देखें।

आपका जन्म का वार (जन्म वार): कितना मायने रखता है

अक्सर कहा जाता है कि जिस वार को आप जन्मे वही आपका शुभ दिन है। निजी आधार के रूप में यह ठीक है, क्योंकि आपकी पहली साँस के समय उस दिन का स्वामी वही ग्रह था। लेकिन यह कुंडली के बाकी हिस्सों को पलट देने वाला नियम नहीं है। यदि आपका जन्म वार आपकी चंद्र-राशि की मित्रता-कसौटी से मेल खाता है तो इसे दोहरा संकेत मानें; यदि नहीं खाता तो पहले चंद्र-राशि की कसौटी पर भरोसा करें और जन्म वार को जन्मदिन जैसे भावनात्मक अवसरों के लिए रखें। जन्म का सटीक वार सही समय और स्थान पर भी निर्भर है, इसीलिए लग्न कैलकुलेटर और आपका जन्म-रिकॉर्ड आपस में मेल खाने चाहिए।

रविवार का शुभ दिन: सूर्य वार-स्वामी

रविवार उन कामों के अनुकूल है जिनमें दृश्यता और अधिकार चाहिए: अधिकारियों को आवेदन, स्वास्थ्य जाँच, नेतृत्व की बातचीत और वे सब काम जिन्हें आप सबके सामने करना चाहते हैं। सूर्य चंद्र, मंगल और गुरु का नैसर्गिक मित्र है, इसलिए रविवार सिंह (स्वराशि), कर्क, मेष, वृश्चिक, धनु, मीन और बुध की मित्रता के कारण मिथुन व कन्या के लिए सहयोगी है। वृषभ, तुला, मकर और कुंभ चंद्र-राशि के लिए यह सावधानी का दिन है, क्योंकि शुक्र और शनि सूर्य के शत्रु हैं। उनके लिए रविवार रोज़ के काम में चलता है; बड़े हस्ताक्षर किसी बेहतर मेल वाले दिन के लिए रखें, और उपाय-खंड के अनुसार उगते सूर्य को जल दें।

सोमवार का शुभ दिन: चंद्र वार-स्वामी

सोमवार मन, परिवार, यात्रा, भोजन, जनसंपर्क और जनसद्भाव वाले कामों के अनुकूल है। सूर्य, मंगल और गुरु चंद्र को मित्र मानते हैं, इसलिए सोमवार कर्क (स्वराशि), सिंह, मेष, वृश्चिक, धनु और मीन के लिए सहयोगी है। बुध, शुक्र और शनि चंद्र को शत्रु मानते हैं, इसलिए मिथुन-कन्या, वृषभ-तुला और मकर-कुंभ चंद्र-राशियों के लिए सोमवार भावनात्मक रूप से थकाऊ लग सकता है। यदि आपकी कुंडली में चंद्र स्वयं बलवान है तो यह अनुभव नरम पड़ जाता है, जिसे ग्रह बल कैलकुलेटर में जाँचा जा सकता है; सादा जल-अर्पण उपाय-खंड में दिया है।

मंगलवार का शुभ दिन: मंगल वार-स्वामी

मंगलवार साहस, शारीरिक श्रम, संपत्ति देखने, खेल, मरम्मत और निर्णायक कदम को फल देता है। सूर्य और गुरु मंगल को मित्र मानते हैं, इसलिए मंगलवार मेष और वृश्चिक (स्वराशि), सिंह, धनु और मीन को सहयोग देता है। चंद्र, बुध और शुक्र मंगल को सम मानते हैं, इसलिए कर्क, मिथुन, कन्या, वृषभ और तुला के लिए यह सम है, और मकर-कुंभ के लिए सावधानी का दिन है क्योंकि शनि मंगल को शत्रु मानता है। यहाँ सावधानी का अर्थ स्वभाव पर नज़र रखना है: बहस कम करें, हस्ताक्षर कम करें और ऊर्जा को व्यायाम या सफ़ाई में लगाएँ। अपनी कुंडली में मंगल की स्थिति न पता हो तो कमज़ोर ग्रह खोजक बताता है कि वह कमज़ोर है या नहीं, और कुंडली में कमज़ोर ग्रह कैसे पता करें लक्षण समझाता है।

बुधवार का शुभ दिन: बुध वार-स्वामी

बुधवार पढ़ाई, लेखन, हिसाब-किताब, व्यापार, छोटी यात्रा, बातचीत और नया कौशल सीखने के अनुकूल है। चंद्र, शुक्र और शनि बुध को मित्र मानते हैं, इसलिए बुधवार मिथुन और कन्या (स्वराशि), कर्क, वृषभ, तुला, मकर और कुंभ के लिए सहयोगी है। सूर्य बुध को सम मानता है, इसलिए सिंह के लिए यह सम है। मंगल और गुरु बुध को शत्रु मानते हैं, इसलिए मेष, वृश्चिक, धनु और मीन के लिए सावधानी का है। इन चार राशियों के लिए भी यह कागज़ात, पढ़ने और रिकॉर्ड सुधारने का अच्छा दिन है; अनुबंधों में जल्दबाज़ी न करें और हर पंक्ति दो बार पढ़ें। साक्षात्कार की तैयारी वाले पाठक इसे इंटरव्यू मुहूर्त गाइड के साथ जोड़ सकते हैं।

गुरुवार का शुभ दिन: बृहस्पति वार-स्वामी

गुरुवार शिक्षा, गुरुजन, मार्गदर्शक, बच्चे, सलाह, संस्कार और दीर्घकालिक योजनाओं को अनुकूल है। सूर्य और मंगल गुरु को मित्र मानते हैं, इसलिए गुरुवार धनु और मीन (स्वराशि), सिंह, मेष और वृश्चिक के लिए सहयोगी है। चंद्र, बुध, शुक्र और शनि गुरु को सम मानते हैं, इसलिए कर्क, मिथुन, कन्या, वृषभ, तुला, मकर और कुंभ के लिए यह सम है। चूँकि यह किसी चंद्र-राशि के लिए शायद ही शत्रु बनता है, इसलिए जो चीज़ आप लंबे समय तक रखना चाहते हैं उसे शुरू करने का यह सबसे सुरक्षित सर्व-उपयोगी दिन है। कुंडली में गुरु कमज़ोर हो तो भारी अनुष्ठान की जगह उस दिन सीखने का एक छोटा काम जोड़ें, जैसा उपायों में सुझाया है।

शुक्रवार का शुभ दिन: शुक्र वार-स्वामी

शुक्रवार संबंध, कला, सुख-सुविधा, आनंद के लिए खरीदारी, सौंदर्य, संगीत और सद्भाव पर टिके समझौतों को सहयोग देता है। बुध और शनि शुक्र को मित्र मानते हैं, इसलिए शुक्रवार वृषभ और तुला (स्वराशि), मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ के लिए अनुकूल है। सूर्य और गुरु शुक्र को शत्रु मानते हैं, इसलिए सिंह, धनु और मीन के लिए सावधानी का है। चंद्र और मंगल शुक्र को सम मानते हैं, इसलिए कर्क तथा मेष-वृश्चिक सम हैं। सावधानी वाले शुक्रवार को योजनाएँ रद्द करने के बजाय खर्च और वादे सीमित रखें, और बड़ी खरीदारी किसी बेहतर मेल वाले दिन करें; बड़ी खरीद की तुलना कर रहे हों तो सोना खरीद मुहूर्त और वाहन खरीद मुहूर्त गाइडें काम आती हैं।

शनिवार का शुभ दिन: शनि वार-स्वामी

शनिवार अशुभ दिन नहीं है; यह अनुशासन का दिन है और धैर्य, नियमित काम, सेवा, लंबी परियोजनाओं, भूमि तथा टिकाऊ कामों को फल देता है। शनि बुध और शुक्र का मित्र, सूर्य, चंद्र और मंगल का शत्रु तथा गुरु के प्रति सम है, पर मित्रता आपकी राशि-स्वामी की ओर से परखी जाती है। इसलिए शनिवार मकर और कुंभ (स्वराशि) तथा वृषभ और तुला के लिए सहयोगी है, जिनका स्वामी शुक्र शनि को मित्र मानता है। यह मिथुन, कन्या, कर्क, मेष, वृश्चिक, धनु और मीन के लिए सम है और सिंह के लिए सावधानी का है। शनिवार भारी लगे तो काम की सूची छोटी करें और एक कठिन काम पूरा करें; यही शनि माँगता है। शनि के गोचर से गुज़र रहे लोग साढ़ेसाती कैलकुलेटर में अपना चरण देख सकते हैं।

मेष और वृश्चिक चंद्र-राशि (मंगल): शुभ वार

यदि आपकी चंद्र-राशि मेष या वृश्चिक है तो आपका राशि-स्वामी मंगल है। मंगलवार आपका अपना दिन है। सूर्य, चंद्र और गुरु मंगल के मित्र हैं, इसलिए रविवार, सोमवार और गुरुवार भी सहयोगी हैं। बुध मंगल का शत्रु है, इसलिए बुधवार सावधानी का दिन है: पढ़ाई और कागज़ात के लिए ठीक, पर बहस या जल्दबाज़ी के सौदों के लिए कम। शुक्रवार और शनिवार सम हैं। आपके सबसे अच्छे दिन इसलिए मंगलवार और गुरुवार हैं, और रविवार तीसरा मज़बूत दिन है। मेष और वृश्चिक के चंद्र-नक्षत्र अलग होते हैं, इसलिए लकी डे कैलकुलेटर से अंतिम जाँच तीस सेकंड में कर लेना उचित है।

वृषभ और तुला चंद्र-राशि (शुक्र): शुभ वार

वृषभ और तुला चंद्र-राशि का स्वामी शुक्र है, इसलिए शुक्रवार आपका अपना दिन है। बुध और शनि शुक्र के मित्र हैं, इसलिए बुधवार और शनिवार आपको सहयोग देते हैं। सूर्य और चंद्र शुक्र के शत्रु हैं, इसलिए रविवार और सोमवार सावधानी के दिन हैं, यानी वे नई प्रतिबद्धताओं के बजाय नियमित काम के लिए ठीक हैं। मंगलवार और गुरुवार सम हैं। आपका सबसे अच्छा मेल शुक्रवार के साथ बुधवार है, और शनिवार लंबे, शांत कामों के लिए अच्छा है। वार को सहयोगी तिथि के साथ जोड़ना आपके लिए अधिकांश लोगों से अधिक मायने रखता है, जिसे आगे के तिथि-खंड समझाते हैं।

मिथुन और कन्या चंद्र-राशि (बुध): शुभ वार

मिथुन और कन्या चंद्र-राशि का स्वामी बुध है, इसलिए बुधवार आपका अपना दिन है। सूर्य और शुक्र बुध के मित्र हैं: रविवार और शुक्रवार दोनों आपको सहयोग देते हैं। चंद्र बुध का शत्रु है, इसलिए सोमवार सावधानी का दिन है; आराम, परिवार और नियमित काम के लिए अच्छा, पर समय-सीमा वाले काम के लिए कमज़ोर। मंगलवार, गुरुवार और शनिवार सम हैं। आपके सबसे मज़बूत दिन बुधवार और शुक्रवार हैं, और सार्वजनिक काम के लिए रविवार भी अच्छा चलता है। कोई बड़ी परीक्षा आने वाली हो और बुध की ताकत जाँचनी हो तो कुंडली बल कैलकुलेटर मदद करता है।

कर्क चंद्र-राशि (चंद्र): शुभ वार

कर्क का स्वामी चंद्र है, इसलिए सोमवार आपका अपना दिन है। सूर्य और बुध चंद्र के मित्र हैं, जिससे रविवार और बुधवार सहयोगी हैं। चंद्र का कोई नैसर्गिक शत्रु नहीं है, इसलिए कर्क के लिए कोई वार शत्रु नहीं; मंगलवार, गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार सम हैं। यह आपको लचीला बनाता है, और इसका यह भी अर्थ है कि आपका परिणाम चंद्रमा की वास्तविक स्थिति और चंद्रबल पर औरों से ज़्यादा टिका है, क्योंकि चंद्रमा की दैनिक स्थिति आपकी अपनी चंद्र-राशि से ही गिनी जाती है। महत्वपूर्ण आरंभ से पहले पंचांग पर शुक्ल या कृष्ण पक्ष की स्थिति देख लें।

सिंह चंद्र-राशि (सूर्य): शुभ वार

सिंह का स्वामी सूर्य है, इसलिए रविवार आपका अपना दिन है। चंद्र, मंगल और गुरु सूर्य के मित्र हैं, इसलिए सोमवार, मंगलवार और गुरुवार सहयोगी हैं। शुक्र और शनि सूर्य के शत्रु हैं, इसलिए शुक्रवार और शनिवार सावधानी के दिन हैं: वे महत्वाकांक्षी शुरुआत से ज़्यादा नियमित, सेवा और धैर्य वाले काम को सूट करते हैं। बुधवार सम है। आपके सबसे अच्छे दिन रविवार और गुरुवार हैं, और कर्म के लिए मंगलवार अच्छा है। शनिवार टालना संभव न हो तो उस दिन एक स्पष्ट लक्ष्य रखें और उसे राहुकाल से दूर, सुबह के मध्य से पहले शुरू करें।

धनु और मीन चंद्र-राशि (गुरु): शुभ वार

धनु और मीन चंद्र-राशि का स्वामी गुरु है, इसलिए गुरुवार आपका अपना दिन है। सूर्य, चंद्र और मंगल गुरु के मित्र हैं, इसलिए रविवार, सोमवार और मंगलवार आपको सहयोग देते हैं। बुध और शुक्र गुरु के शत्रु हैं, इसलिए बुधवार और शुक्रवार सावधानी के दिन हैं: पढ़ाई और आनंद के लिए उपयोगी, पर जल्दबाज़ी के लेन-देन के लिए नहीं। शनिवार सम है। आपके सबसे अच्छे दिन गुरुवार और रविवार हैं, और चंद्रमा शुक्ल पक्ष में हो तो सोमवार कोमल रहता है। यदि एक और परत चाहिए तो ताराबल देखने के बाद गुरुवार को पुनर्वसु, विशाखा या पूर्वाभाद्रपद जैसे गुरु-शासित नक्षत्र के साथ जोड़ें।

मकर और कुंभ चंद्र-राशि (शनि): शुभ वार

मकर और कुंभ चंद्र-राशि का स्वामी शनि है, इसलिए शनिवार आपका अपना दिन है। बुध और शुक्र शनि के मित्र हैं, इसलिए बुधवार और शुक्रवार आपको सहयोग देते हैं। सूर्य, चंद्र और मंगल शनि के शत्रु हैं, इसलिए रविवार, सोमवार और मंगलवार सावधानी के दिन हैं: साधारण काम में ठीक, बड़े आरंभ के लिए भारी। गुरुवार सम है। आपके सबसे अच्छे दिन शनिवार और शुक्रवार हैं, और पढ़ाई तथा व्यापार के लिए बुधवार मज़बूत है। यदि शनि अभी आपकी चंद्र-राशि के आसपास गोचर कर रहा है तो किसी एक दिन का निर्णय करने से पहले क्या मेरी साढ़ेसाती चल रही है पढ़ें।

ताराबल: जन्म-नक्षत्र से नौ ताराएँ

ताराबल यह पूछता है कि आज चंद्रमा का नक्षत्र आपके जन्म-नक्षत्र के लिए मित्रवत है या नहीं। मुहूर्त चिंतामणि जन्म-नक्षत्र से गिनी जाने वाली नौ ताराएँ बताती है: जन्म, सम्पत्, विपत्, क्षेम, प्रत्यरि, साधक, वध, मैत्र और अतिमैत्र, और हर तारा अपने नाम के अनुरूप फल देती है।[12] सम्पत् (धन), क्षेम (कुशल), साधक (सिद्धि), मैत्र (मित्रवत) और अतिमैत्र (अति मित्रवत) सहयोगी हैं; जन्म तारा मिश्र है; विपत्, प्रत्यरि और वध में सावधानी चाहिए। बृहत् संहिता तो यह भी कहती है कि क्षौर-कर्म अनुकूल नक्षत्र में, चंद्रमा और शुभ तारा से युक्त क्षण में हो।[5] चंद्रमा एक नक्षत्र में लगभग एक दिन रहता है, इसलिए ताराबल रोज़ बदलता है।

ताराबल कैसे गिनें: उदाहरण सहित

अपने जन्म-नक्षत्र से आज के नक्षत्र तक, दोनों को गिनते हुए, गिनती करें और उसमें नौ से भाग दें; शेषफल तारा की संख्या है, शून्य हो तो नौ। उदाहरण एक: जन्म-नक्षत्र रोहिणी (चौथा), आज का नक्षत्र हस्त (तेरहवाँ)। गिनती 13 घटा 4 जोड़ 1 यानी 10; शेषफल 1, अर्थात जन्म तारा। उदाहरण दो: जन्म रोहिणी, दिन पुष्य (आठवाँ)। गिनती 5, यानी प्रत्यरि तारा। उदाहरण तीन: जन्म अनुराधा (सत्रहवाँ), दिन श्रवण (बाईसवाँ)। गिनती 6, यानी साधक तारा। सत्ताईस नक्षत्रों में नौ के तीन चक्र होते हैं, इसलिए हर तारा तीन बार आती है। आपके जन्म-नक्षत्र की संख्या नक्षत्र कैलकुलेटर देता है।

विपत्, प्रत्यरि और वध तारा: सावधानी और सरल उपाय

तीसरी, पाँचवीं और सातवीं ताराओं को परंपरा बिल्कुल नए आरंभ के लिए टालने की सलाह देती है। मुहूर्त चिंतामणि स्वयं इन्हें हल्का करने वाले दान के साथ जोड़ती है: वध के लिए स्वर्ण-तिल, विपत् के लिए गुड़ और प्रत्यरि के लिए लवण।[13] श्लोक संक्षिप्त है और टीकाकार इसे नौ-नक्षत्रों के तीनों चक्रों के आर-पार पढ़ते हैं, इसलिए एक चक्र की सावधानी पूरे दिन का फ़ैसला नहीं है। मज़बूत वार और अच्छे चंद्रबल वाला दिन फिर भी रोज़ के काम में लिया जा सकता है। विपत्, प्रत्यरि या वध तारा वाले दिन का उपाय: क्या: एक मुट्ठी गुड़ (विपत्), नमक (प्रत्यरि) या तिल (वध) किसी ज़रूरतमंद या मंदिर की रसोई को दें। कब: उसी दिन सुबह, सूर्योदय से 10 बजे के बीच। खर्च: मुफ़्त से ₹20। कितने दिन: केवल वही एक दिन, तारा दोबारा आए तभी दोहराएँ। आपके लिए क्यों: उस दिन का नक्षत्र आपके जन्म-नक्षत्र से तीसरा, पाँचवाँ या सातवाँ पड़ता है।

चंद्रबल: आपकी राशि से चंद्रमा का गोचर-भाव

चंद्रबल आज चंद्रमा की स्थिति को आपकी जन्म चंद्र-राशि से गिनता है। मुहूर्त-व्यवहार में चलने वाली परंपरा के अनुसार चंद्रमा आपकी राशि से 1, 3, 6, 7, 10 या 11वें भाव में हो तो सहयोगी है, 2, 5 और 9 मध्यम हैं, और 4, 8 तथा 12 कमज़ोर स्थितियाँ हैं जिनमें नए आरंभ से बचना चाहिए। चंद्रमा एक राशि में लगभग सवा दो दिन रहता है, इसलिए ये दौर दो-तीन दिन ही चलते हैं। मुहूर्त चिंतामणि एक रास्ता भी देती है: पाप ग्रहों से घिरा चंद्र खराब हो जाता है, पर शुभ नवांश में या गुरु-दृष्ट चंद्र अच्छा हो जाता है।[14] कमज़ोर चंद्रबल वाले दिन पर मज़बूत ताराबल भी उसे हल्का कर देता है।

तिथि के प्रकार: नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा

हर पक्ष की पंद्रह तिथियाँ पाँच समूहों में आती हैं, जिन्हें बृहत् संहिता नंदा, भद्रा, विजया (जया), रिक्ता और पूर्णा नाम देती है।[1] नंदा (1, 6, 11) आनंद-भरे आरंभ हैं; भद्रा (2, 7, 12) स्थिर और पोषक हैं; जया (3, 8, 13) प्रयास और स्पर्धा के अनुकूल हैं; रिक्ता (4, 9, 14) रिक्त दिन हैं, समेटने और साफ़ करने के लिए बेहतर; पूर्णा (5, 10, 15) भरी हुई हैं, पूर्णता के लिए अनुकूल। हर तिथि का अपना अधिपति देवता भी है, ब्रह्मा से आरंभ कर।[2] ग्रंथ यह भी जोड़ता है कि नक्षत्र का कार्य उन तिथियों, करणों और मुहूर्तों में भी सिद्ध होता है जो उसी देवता के हों।[3] पूर्णिमा और अमावस्या को पूर्णिमा गाइड और अमावस्या गाइड में पढ़ें।

रिक्ता तिथि, विष्टि करण और अमावस्या: सावधानी और उसका रास्ता

तीन समय-सावधानियाँ जानने योग्य हैं। बृहत् संहिता क्षौर-कर्म के लिए रिक्ता तिथि को अनुपयुक्त अवसरों में गिनती है,[4] कहती है कि विष्टि साधारण कार्यों में कुछ शुभ नहीं देती,[19] और विवाह के लिए व्यतिपात, वैधृति, विष्टि तथा रिक्ता छोड़ने को कहती है।[20] अमावस्या पितरों की तिथि है।[1] इनमें से कोई भी दिन डरने का नहीं है। रिक्ता दिन पूरा करने, सफ़ाई, हिसाब चुकाने और शांत पढ़ाई के अनुकूल हैं; अमावस्या स्मरण और दान के; विष्टि तिथि के भीतर केवल कुछ घंटे चलती है, इसलिए पंचांग की खिड़की बताती है कि कब रुकना है। नया आरंभ एक दिन आगे खिसका दें तो कुछ नहीं खोता। सटीक खिड़कियाँ पंचांग पर देखें।

नक्षत्र के प्रकार: कौन-सा तारा-दिन किस काम का

बृहत् संहिता नक्षत्रों को स्वभाव के अनुसार बाँटती है। ध्रुव (स्थिर) नक्षत्र, रोहिणी और तीनों उत्तरा, स्थायी आरंभ के लिए हैं।[6] लघु नक्षत्र हस्त, अश्विनी और पुष्य व्यापार, ज्ञान, कला और वाहन के लिए अनुकूल हैं।[9] मृदु नक्षत्र अनुराधा, चित्रा, रेवती और मृगशिरा मित्रता और कोमल कामों के लिए हैं।[10] कृत्तिका और विशाखा मिश्र हैं, जबकि श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पुनर्वसु और स्वाति गतिशील कामों के लिए हैं।[11] तीक्ष्ण नक्षत्र (मूल, आर्द्रा, ज्येष्ठा, आश्लेषा) और उग्र नक्षत्र (तीनों पूर्वा, भरणी, मघा) तीव्र हैं, इसलिए वे टकराव या अलग करने वाले काम से जुड़ते हैं, कोमल शुरुआत से नहीं।[7][8] कोमल शुरुआत वाले काम अगले नक्षत्र तक रुक सकते हैं। नक्षत्र से शुभ नाम अक्षर टूल भी इसी नक्षत्र-व्यवस्था पर चलता है।

राहुकाल और अभिजित: किसी भी दिन के भीतर का समय

दिन चुन लेने के बाद घंटा चुनें। राहुकाल दिन के उजाले का लगभग आठवाँ हिस्सा, यानी करीब 90 मिनट, है और वार के साथ खिसकता है। सुबह 6 से शाम 6 वाले दिन में यह सोमवार को 7:30-9, मंगलवार को 3-4:30, बुधवार को 12-1:30, गुरुवार को 1:30-3, शुक्रवार को 10:30-12, शनिवार को 9-10:30 और रविवार को 4:30-6 पड़ता है। मुहूर्त चिंतामणि वार से बँधे अशुभ खण्ड भी गिनाती है, जैसे रविवार और बुधवार को यमघण्टक और सोमवार को कुलिक।[16] अभिजित स्थानीय दोपहर के आसपास का लगभग 48 मिनट का खंड है जिसे परंपरा व्यापक रूप से अनुकूल मानती है। ये नया काम शुरू करने से बचने की खिड़कियाँ हैं, पूरे दिन नहीं। काम खिसक न सके तो राहुकाल समाप्त होते ही शुरू करें। स्थानीय सूर्योदय से समय बदलता है, इसलिए पंचांग या चौघड़िया गाइड पर पुष्टि करें।

जो दिन आपके अनुकूल न हो उसके सरल उपाय

सावधानी वाले दिन को शांत दृष्टिकोण चाहिए, अनुष्ठानों की मैराथन नहीं। उपाय एक, वार-स्वामी का अभिवादन: क्या: वार-स्वामी को छोटे कटोरे में जल अर्पित करें और स्वामी का नाम एक बार लें। कब: उसी वार को, 10 बजे से पहले (शनिवार को संध्या के समय)। खर्च: मुफ़्त से ₹10। कितने दिन: उस वार के पाँच बार आने तक। आपके लिए क्यों: वह वार-स्वामी आपकी चंद्र-राशि के स्वामी का मित्र नहीं है। उपाय दो, जब चंद्र आपकी राशि से चौथे, आठवें या बारहवें में हो: क्या: एक अधूरा काम पूरा करें और एक नया आरंभ टाल दें। कब: ऐसे पहले दिन के सूर्योदय से चंद्रमा के उस राशि को छोड़ने तक। खर्च: मुफ़्त। कितने दिन: हर बार लगभग दो दिन। आपके लिए क्यों: चंद्रबल कम है और पूरा करने में वही ऊर्जा काम आती है। ताराबल का उपाय अपने खंड में है। कमज़ोर ग्रह की आशंका हो तो कमज़ोर ग्रह खोजक से शुरू करें।

शुभ दिन चुनते समय आम गलतियाँ

पाँच गलतियाँ बार-बार होती हैं। पहली, चंद्र-राशि की जगह अख़बार वाली सूर्य-राशि का प्रयोग; मेरी जन्म कुंडली जन्म राशि और नाम-राशि का अंतर समझाती है। दूसरी, लग्न को नज़रअंदाज़ करना; लग्न कैसे पता करें इसे खोजना सिखाता है। तीसरी, राहुकाल को पूरे दिन का निषेध मान लेना, जबकि वह छोटी खिड़की है। चौथी, मित्र का शुभ दिन अपना लेना जब आपका वार एक है पर चंद्र-राशि नहीं। पाँचवीं, ऐसे आयोजन के लिए शुभ दिन का प्रयोग जिसे असली मुहूर्त चाहिए। यदि आप शुभ रंग या अंक भी खोजते हैं तो वह अलग परत है, जिसे 2027 राशिफल शुभ रंग, अंक, रत्न में समझाया है।

कैलकुलेटर से अपना शुभ दिन मुफ़्त कैसे जांचें

लकी डे कैलकुलेटर में अपनी जन्म तारीख़, समय और स्थान भरें। टूल Swiss Ephemeris की स्थितियों से आपकी चंद्र-राशि और जन्म-नक्षत्र निकालता है और आने वाले दिनों के लिए आपके सहयोगी वार, ताराबल और चंद्रबल लौटाता है, ताकि आपको हाथ से गिनना न पड़े। उत्तर के पीछे की कुंडली देखनी हो तो उसे जन्म कुंडली कैलकुलेटर में खोलें या उदय होती राशि लग्न कैलकुलेटर में पक्की करें। विवाह, वाहन या जॉइनिंग जैसे तारीख़-वाले आयोजन के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर पर आगे बढ़ें, जो तिथि, योग और लग्न की छँटाई भी जोड़ता है।

जब शुभ दिन काफ़ी न हो: दशा, साढ़ेसाती और ग्रह-बल

शुभ दिन दिन को झुकाता है; आपकी चल रही दशा वर्ष को झुकाती है। यदि वार अनुकूल हो पर वर्तमान दशा माँग-भरी हो, तो दिन को सहारा मानें, इलाज नहीं। अपनी दशा दशा कैलकुलेटर में देखें और महादशा गाइड पढ़ें। ग्रह का बल अपनी अलग परत है; षड्बल और कुंडली में षड्बल देखें। रत्न आख़िरी चरण हैं, पहले नहीं: कुछ भी खरीदने से पहले रत्न उपयुक्तता कैलकुलेटर जाँचें और बलवान ग्रह को रत्न क्यों नहीं चाहिए तथा गलत रत्न नुकसान क्यों करता है पढ़ें। मुफ़्त से शुरू करें और क़दम-दर-क़दम बढ़ें।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

वार
सप्ताह के सात दिनों में से एक; हर दिन का एक ग्रह-स्वामी है, रविवार का सूर्य से शनिवार का शनि तक।
तिथि
चांद्र दिन, चंद्रमा के मासिक चक्र का तीसवाँ भाग; हर पक्ष की पंद्रह तिथियाँ नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा समूहों में आती हैं।
ताराबल
आज के नक्षत्र का आपके लिए बल, जो जन्म-नक्षत्र से गिनकर नौ ताराओं में पढ़ा जाता है।
चंद्रबल
किसी दिन आपके लिए चंद्रमा का बल, जो आपकी जन्म चंद्र-राशि से गिने उसके भाव से परखा जाता है।
जन्म राशि
आपके जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था; चंद्रबल और वार-स्वामी की मित्रता-कसौटी का आधार।
रिक्ता तिथि
पक्ष की चौथी, नौवीं और चौदहवीं तिथियाँ, जिन्हें रिक्त कहा जाता है और जो परंपरा में नए शुभ आरंभ के लिए अनुपयुक्त मानी गई हैं।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    पितरोऽमावस्यायां संज्ञासदृशाश्च तैः क्रियाः कार्याः । नन्दा भद्रा विजया रिक्ता पूर्णा च ताः त्रिविधाः ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 98 — तिथिकर्मगुणाध्याय · श्लोक 2 · sanskritdocuments

    तिथियाँ नन्दा, भद्रा, विजया (जया), रिक्ता और पूर्णा — इन पाँच समूहों में बँटी हैं; अमावस्या पितरों की है और कर्म हर संज्ञा के अनुरूप किए जाने चाहिए।

    Tithis fall into five groups named nanda, bhadra, vijaya (jaya), rikta and purna; the amavasya belongs to the pitaras, and works are to be done in keeping with each name.

  2. [2]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    कमलजविधातृहरियमशशांकषड्वक्त्रशक्रवसुभुजगाः । धर्मेशसवितृमन्मथकलयो विश्वे च तिथिपतयः ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 98 — तिथिकर्मगुणाध्याय · श्लोक 1 · sanskritdocuments

    तिथियों के अधिपति देवताओं को क्रम से गिनाता है — ब्रह्मा से आरम्भ कर हरि, यम, चन्द्र, षड्वक्त्र (कार्तिकेय), इन्द्र, वसु, नाग, सविता, मन्मथ और विश्वेदेव।

    Names the presiding deities of the tithis in order, beginning with Brahma and including Hari, Yama, the Moon, Shanmukha, Indra, the Vasus, the serpents, Savitri, Manmatha and the Vishvedevas.

  3. [3]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    यत् कार्यं नक्षत्रे तद्दैवत्यासु तिथिषु तत् कार्यम् । करणमुहूर्तेष्वपि तत् सिद्धिकरं देवतासदृशम् ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 98 — तिथिकर्मगुणाध्याय · श्लोक 3 · sanskritdocuments

    जो कार्य जिस नक्षत्र का है, वही उस नक्षत्र के देवता वाली तिथि, करण और मुहूर्त में भी सिद्ध होता है।

    Work that belongs to a nakshatra also succeeds on the tithis, karanas and muhurtas that share that nakshatra's deity.

  4. [4]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    न स्नातमात्रगमनौन्मुख (उत्सुक) भूषितानाम् अभ्यक्तभुक्तरणकालनिरासनानाम् । सन्ध्य्निशाशनिकुजार्कतिथौ (निशोः कुजयमार्कदिने) च रिक्ते क्षौरं हितं न नवमेऽह्नि न चापि विष्ट्याम् ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 97 — नक्षत्रकर्मगुणाध्याय · श्लोक 13 · sanskritdocuments

    क्षौर-कर्म के लिए अनुपयुक्त अवसर गिनाता है — रिक्ता तिथि, नवम दिन और विष्टि सहित।

    Lists occasions unsuitable for the hair-cutting rite, including a rikta tithi, the ninth day and vishti.

  5. [5]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    हस्तत्रयं मृगशिरः श्रवणत्रयं (श्रवनात्त्रयं) च पूषाश्विशक्रगुरुभानि पुनर्वसुश्च । क्षौरे तु कर्मणि हितानि उदये क्षणे वा युक्तानि चौडुपतिना शुभतारया च ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 97 — नक्षत्रकर्मगुणाध्याय · श्लोक 12 · sanskritdocuments

    क्षौर-कर्म के लिए गिनाए गए नक्षत्र उदय-काल में, या चन्द्रमा तथा शुभ तारा से युक्त क्षण में हितकारी हैं।

    For the hair-cutting rite, the listed nakshatras are favourable at the rising or at the moment they are joined with the Moon and an auspicious tara (shubha-tara).

  6. [6]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    त्रीणि उत्तराणि तेभ्यो रोहिण्यश्च ध्रुवाणि तैः कुर्यात् । अभिषेकशान्तितरुनगरधर्मबीजध्रुवारंभान् ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 97 — नक्षत्रकर्मगुणाध्याय · श्लोक 6 · sanskritdocuments

    तीनों उत्तरा और रोहिणी ध्रुव (स्थिर) नक्षत्र हैं; अभिषेक, शान्ति, वृक्षारोपण, नगर-निर्माण, धर्म-कार्य, बीज-बुवाई और स्थायी आरम्भ के लिए उपयुक्त।

    The three Uttara nakshatras and Rohini are dhruva (fixed); they suit consecration, shanti, planting trees, founding towns, dharma, sowing and other lasting beginnings.

  7. [7]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    मूलशिवशक्रभुजगाधिपानि तीक्ष्णानि तेषु सिद्ध्यन्ति । अभिघातमन्त्रवेतालबन्धवधभेदसंबन्धाः ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 97 — नक्षत्रकर्मगुणाध्याय · श्लोक 7 · sanskritdocuments

    मूल, आर्द्रा, ज्येष्ठा और आश्लेषा तीक्ष्ण कहे गए हैं और कोमल आरम्भ के बजाय तीव्र तथा भेदकारी कर्मों से जोड़े गए हैं।

    Mula, Ardra, Jyeshtha and Ashlesha are called tikshna (sharp) and are matched with forceful and separating kinds of work rather than gentle beginnings.

  8. [8]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    उग्राणि पूर्वभरणीपित्र्याणि उत्सादनाशशाठ्येषु । योज्यानि बन्धविषदहनशस्त्रघातादिषु च सिद्ध्यै ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 97 — नक्षत्रकर्मगुणाध्याय · श्लोक 8 · sanskritdocuments

    तीनों पूर्वा, भरणी और पित्र्य (मघा) उग्र नक्षत्र हैं और कोमल आरम्भ के बजाय कठोर, विध्वंसक कर्मों से जोड़े गए हैं।

    The three Purva nakshatras, Bharani and the pitrya (Magha) group are ugra (fierce) and are matched with harsh, destructive kinds of work rather than gentle starts.

  9. [9]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    लघु हस्ताश्विनपुष्याः पण्यरतिज्ञानभूषणकलासु । शिल्पौषधयानादिषु सिद्धिकराणि प्रदिष्टानि ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 97 — नक्षत्रकर्मगुणाध्याय · श्लोक 9 · sanskritdocuments

    हस्त, अश्विनी और पुष्य लघु (हल्के, शीघ्र) नक्षत्र हैं; व्यापार, प्रेम, ज्ञान, आभूषण, कला, शिल्प, औषधि और वाहन में सिद्धि देते हैं।

    Hasta, Ashwini and Pushya are laghu (light and quick) and bring success in trade, love, learning, ornaments, arts, crafts, medicine and vehicles.

  10. [10]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    मृदुवर्गो (मृदुवर्गः त्व्)ऽनूराधाचित्रापौष्णेन्दवानि मित्रार्थे । सुरतविधिवस्त्रभूषणमंगलगीतेषु च हितानि ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 97 — नक्षत्रकर्मगुणाध्याय · श्लोक 10 · sanskritdocuments

    अनुराधा, चित्रा, रेवती और मृगशिरा मृदु वर्ग हैं; मित्रता, प्रेम, वस्त्र, आभूषण और मंगल-गीत के लिए हितकारी।

    Anuradha, Chitra, Revati and Mrigashira form the mridu (soft) group, favourable for friendship, love, clothes, ornaments and auspicious songs.

  11. [11]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    हौतभुजं सविशाखं मृदुतीक्ष्णम् तद्विमिश्रफलकारि । श्रवणत्रयमादित्यानिले च चरकर्मणि हितानि ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 97 — नक्षत्रकर्मगुणाध्याय · श्लोक 11 · sanskritdocuments

    कृत्तिका और विशाखा मिश्र (मृदु-तीक्ष्ण) फल देते हैं; श्रवण-त्रय, पुनर्वसु और स्वाति चर (गतिशील) कर्मों के लिए हितकारी हैं।

    Krittika with Vishakha gives mixed (soft and sharp) results, while the three Shravana-group stars, Punarvasu and Swati suit movement-type works.

  12. [12]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    जन्माख्यसंपद्विपदः क्षेमप्रत्यरिसाधकाः । वधमैत्रातिमैत्राः स्युस्तारा नामसदृक्फलाः ॥ १२ ॥
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 4 — गोचरप्रकरणम् · श्लोक 12 · github-sanskrittexts

    जन्म-नक्षत्र से गिनी जाने वाली नौ ताराएँ बताता है — जन्म, सम्पत्, विपत्, क्षेम, प्रत्यरि, साधक, वध, मैत्र और अतिमैत्र — हर तारा अपने नाम के अनुरूप फल देती है।

    Names nine taras counted from the birth star: janma, sampat, vipat, kshema, pratyari, sadhaka, vadha, maitra and atimaitra, each giving results in keeping with its name.

  13. [13]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    मृत्यौ स्वर्णतिलान्विपद्यपि गुडं शाकं त्रिजन्मस्वथो दद्यात्प्रत्यरितारकासु लवणं सर्वो विपत्प्रत्यरिः । मृत्युश्चादिमपर्यये न शुभदोऽथैषां द्वितीयेऽशका नादिप्रांत्यतृतीयका अथ शुभाः सर्वे तृतीये स्मृताः १३
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 4 — गोचरप्रकरणम् · श्लोक 13 · github-sanskrittexts

    कठोर ताराओं की शान्ति के लिए दान बताता है — वध तारा में स्वर्ण-तिल, विपत् में गुड़, जन्म-प्रकार की ताराओं में शाक और प्रत्यरि में लवण; संक्षिप्त श्लोक को टीकाकार तीन नक्षत्र-चक्रों के अनुसार पढ़ते हैं।

    Prescribes gifts to ease the harsher taras: gold and sesame for the vadha tara, jaggery for vipat, vegetables for the janma-type taras and salt for pratyari; the terse verse is read by commentators for the three nine-star cycles.

  14. [14]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    पापांतः पापयुग्घ्यूने पापाच्चन्द्रः शुभोऽप्यसन् । शुभांशे चाधिमित्रांशे गुरुदृष्टोऽशुभोऽपि सन् ॥ ७ ॥
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 4 — गोचरप्रकरणम् · श्लोक 7 · github-sanskrittexts

    पाप ग्रहों से घिरा या युक्त चन्द्र शुभ स्थान में भी अशुभ हो जाता है; पर शुभ या अधिमित्र नवांश में, अथवा गुरु-दृष्ट होने पर अशुभ चन्द्र भी शुभ हो जाता है।

    A Moon hemmed in by or joined with malefics turns poor even if otherwise well placed, but in a benefic or great-friend navamsha, or aspected by Jupiter, even a poor Moon turns good.

  15. [15]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    नृपेक्षणं सर्वकृतिश्च संगरः शास्त्रं विवाहौ गमदीक्षणे रवेः । वीर्येऽथ ताराबलतः शुभो विधुर्विधोर्बलेऽर्कोऽrkबले कुजादयः ॥ १९ ॥
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 3 — संक्रान्तिप्रकरणम् · श्लोक 19 · github-sanskrittexts

    चन्द्र का बल ताराबल से, सूर्य का बल चन्द्रबल से और मंगल आदि का बल सूर्यबल से जोड़ता है।

    Ties the Moon's strength to tarabala, the Sun's strength to the Moon's, and the strength of Mars and the others to the Sun's.

  16. [16]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    सूर्ये यमघण्टकः कारवेलः सोमवारे कुलिकः। मङ्गले कंटकः बुधे यमघण्टकः॥
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 1 — शुभाशुभप्रकरणम् · श्लोक 38 · github-sanskrittexts

    वार-विशेष के अशुभ खण्ड गिनाता है — रविवार और बुधवार को यमघण्टक, सोमवार को कुलिक और मंगलवार को कण्टक।

    Names weekday-specific inauspicious segments of the day, such as yamaghantaka on Sunday and Wednesday, kulika on Monday and kantaka on Tuesday.

  17. [17]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    तत्काले च निसर्गे च मित्रं चेदधिमित्रकम् । मित्रं मित्रसमत्वे तु शत्रुः शत्रुसमत्वके
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूप अध्याय · श्लोक 57 · sanskritdocuments

    जो ग्रह नैसर्गिक और तात्कालिक दोनों में मित्र हो वह अधिमित्र होता है; मित्र और सम मिलकर मित्र, तथा शत्रु और सम मिलकर शत्रु रहता है।

    A planet that is a friend in both natural and temporary terms becomes an adhimitra (great friend); friend with neutral stays a friend; enemy with neutral stays an enemy.

  18. [18]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    समो मित्ररिपुत्वे तु शत्रुत्वे त्वधिशत्रुता । एवं विविच्य दैवज्ञो जातकस्य फलं वदेत्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूप अध्याय · श्लोक 58 · sanskritdocuments

    जहाँ मित्रता और शत्रुता मिलें वहाँ ग्रह सम होता है और दोनों में शत्रु हो तो अधिशत्रु; दैवज्ञ इन सबका विवेचन करके ही फल कहे।

    Where friendship and enmity meet the planet is neutral, and where it is an enemy in both it is an adhishatru (great enemy); the astrologer is to weigh all this before declaring results.

  19. [19]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    कृषिबीजगृहाश्रयजानि गरे वणिजि धुवकार्यवणिग्युतयः । न हि विष्टिकृतं विदधाति शुभं परघातविषादिषु सिद्धिकरम् ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 99 — करणगुणाध्याय · श्लोक 4 · sanskritdocuments

    विष्टि साधारण कार्यों में कुछ शुभ नहीं देती; वह केवल परघात और विष आदि कठोर कर्मों में सिद्धि देने वाली कही गई है।

    Vishti gives nothing auspicious for ordinary works and is said to succeed only in harsh works such as harming others or poisons.

  20. [20]↑बृहत् संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    दंपत्योः द्विनवाष्टराशिरहिते चारानुकुले रवौ चन्द्रे चार्ककुजार्किशुक्रवियुते मध्येऽथवा पापयोः । त्यक्त्वा च व्यतिपातवैधृति (वैधृत) दिनं विष्टिं च रिक्तां तिथिं क्रूराहायनपौषचैत्र (चैत्रपौष) विरहे लग्नांशके मानुषे ।
    — बृहत् संहिता, अध्याय 99 — करणगुणाध्याय · श्लोक 8 · sanskritdocuments

    विवाह के लिए यह श्लोक व्यतिपात और वैधृति के दिन, विष्टि तथा रिक्ता तिथि छोड़ने को कहता है।

    For a wedding the verse asks to leave out vyatipata and vaidhriti days, vishti and the rikta tithi.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मेरे लिए कौन सा दिन शुभ है?

वह वार जिसका स्वामी आपकी चंद्र-राशि के स्वामी का मित्र हो, सहयोगी तिथि पर, और अच्छे ताराबल व चंद्रबल के साथ। अपनी चंद्र-राशि और जन्म-नक्षत्र जानकर [लकी डे कैलकुलेटर](/calculators/free-lucky-day-calculator) से इन्हें कैलेंडर पर मिलाएँ।

अपनी चंद्र-राशि से शुभ वार कैसे पता करें?

अपनी चंद्र-राशि और उसका स्वामी ग्रह पता करें, फिर देखें कि किन वार-स्वामियों से उसकी मित्रता है। मेष और वृश्चिक के लिए मंगलवार, गुरुवार और रविवार सहयोगी हैं; सिंह के लिए रविवार, गुरुवार और मंगलवार। ऊपर के खंडों में बारहों राशियाँ दी हैं।

क्या जिस वार को मेरा जन्म हुआ वही मेरा शुभ दिन है?

यह एक उचित निजी आधार है, पर नियम नहीं। पहले वार-स्वामी और अपनी चंद्र-राशि के स्वामी की मित्रता-कसौटी पर भरोसा करें, फिर दोनों मेल खाएँ तो जन्म वार को अतिरिक्त लाभ मानें।

ताराबल क्या है और इसे कैसे गिनें?

ताराबल आज के चंद्र-नक्षत्र की तुलना आपके जन्म-नक्षत्र से करता है। जन्म-नक्षत्र से आज के नक्षत्र तक दोनों सहित गिनें, नौ से भाग दें और शेषफल पढ़ें: 1 जन्म, 2 सम्पत्, 3 विपत्, 4 क्षेम, 5 प्रत्यरि, 6 साधक, 7 वध, 8 मैत्र, 9 अतिमैत्र। जन्म-नक्षत्र [नक्षत्र कैलकुलेटर](/calculators/free-nakshatra-calculator) से मिलता है।

चंद्रबल क्या है?

चंद्रबल आपके लिए चंद्रमा का बल है, जो आपकी चंद्र-राशि से चंद्रमा के भाव से परखा जाता है। 1, 3, 6, 7, 10, 11 सहयोगी, 2, 5, 9 मध्यम और 4, 8, 12 कमज़ोर हैं, जो एक बार में केवल दो-तीन दिन रहता है।

रिक्ता तिथियाँ कौन-सी हैं, क्या इन्हें टालना चाहिए?

रिक्ता तिथियाँ हर पक्ष की चौथी, नौवीं और चौदहवीं हैं। ये समारोह जैसे नए आरंभों के लिए कमज़ोर हैं पर समेटने, सफ़ाई और हिसाब चुकाने के लिए अच्छी हैं, इसलिए पूरे दिन से बचने की ज़रूरत नहीं।

क्या शनिवार अशुभ दिन है?

नहीं। शनिवार शनि का दिन है, जो अनुशासन और धैर्य का ग्रह है। यह मकर, कुंभ, वृषभ और तुला चंद्र-राशि के लिए सबसे अच्छा, अधिकांश के लिए सम और सिंह के लिए सावधानी का है। भारी शनिवार पर एक स्पष्ट लक्ष्य रखें तो वह अच्छा चलता है।

क्या शुभ दिन और मुहूर्त एक ही हैं?

नहीं। शुभ दिन एक निजी वार और चंद्र-पैटर्न है, जबकि मुहूर्त किसी विशेष कार्य की खिड़की है। विवाह, वाहन या नौकरी की शुरुआत के लिए [शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर](/calculators/free-shubh-muhurat-calculator) का प्रयोग करें और [मुहूर्त गाइड](/blog/shubh-muhurat-calculator-guide-hindi) पढ़ें।

क्या मेरा शुभ दिन समय के साथ बदलता है?

आपकी चंद्र-राशि की मित्रता-रूपरेखा जीवन भर वही रहती है, पर ताराबल और चंद्रबल रोज़ बदलते हैं, और दशा तथा गोचर पृष्ठभूमि बदलते हैं। कैलेंडर दोबारा जाँचें और चल रही अवधि के लिए [दशा कैलकुलेटर](/calculators/free-dasha-calculator) देखें।

सही शुभ दिन परिणाम के लिए क्या चाहिए?

आपकी जन्म तारीख़, ठीक समय और स्थान चाहिए। घंटों की चूक वाला समय आपका नक्षत्र बदल सकता है, इसलिए पहले रिकॉर्ड पक्का करें; [जन्म समय की शुद्धता](/blog/kundali-janm-samay-shuddhata) गाइड बताती है कैसे।

यह भी देखें · See also

श्रेणी: calculator-guide · lucky-day