राशि रत्न चार्ट: 12 राशियों के रत्न व नियम
Trikaal Sandesh — Direct Answer
राशि रत्न चार्ट में हर राशि को उसके स्वामी ग्रह का रत्न दिया जाता है। मेष और वृश्चिक को मूंगा, वृषभ और तुला को हीरा, मिथुन और कन्या को पन्ना, कर्क को मोती, सिंह को माणिक, धनु और मीन को पुखराज, मकर और कुंभ को नीलम। यह केवल शुरुआती संकेत है, क्योंकि शास्त्र लग्न देखकर रत्न तय करता है।
Deep Dive Analysis
राशि रत्न चार्ट क्या है और इसे कैसे पढ़ें
राशि रत्न चार्ट वह तालिका है जिसमें हर राशि के सामने उसके स्वामी ग्रह का रत्न लिखा जाता है। मेष और वृश्चिक का स्वामी मंगल है, इसलिए दोनों के आगे मूंगा आता है। वृषभ और तुला का स्वामी शुक्र है, तो आगे हीरा आता है। यह पेज वही चार्ट सरल हिंदी में समझाता है और साथ में बताता है कि इस चार्ट पर आँख बंद करके भरोसा क्यों नहीं करना चाहिए। अपनी राशि पक्की करने के लिए फ्री राशि कैलकुलेटर चलाएँ।
12 राशियाँ, 7 स्वामी ग्रह और 7 मुख्य रत्न
बारह राशियों के स्वामी सात ग्रह हैं, इसलिए चार्ट में सात मुख्य रत्न ही दिखते हैं। मेष और वृश्चिक में मंगल के लिए मूंगा, वृषभ और तुला में शुक्र के लिए हीरा, मिथुन और कन्या में बुध के लिए पन्ना, कर्क में चंद्र के लिए मोती, सिंह में सूर्य के लिए माणिक, धनु और मीन में गुरु के लिए पुखराज, मकर और कुंभ में शनि के लिए नीलम। राहु और केतु किसी राशि के स्वामी नहीं माने जाते, इसलिए गोमेद और लहसुनिया इस चार्ट में नहीं आते।
रत्नों को ग्रहों से जोड़ने की यह परंपरा लोकप्रिय है। कौन सा रत्न किसके लिए है वाले विस्तृत पेज में हमने इसी जोड़ को कुंडली की शर्तों के साथ परखा है।
राशि का स्वामी तय करने का शास्त्रीय आधार
बृहत् पराशर होरा शास्त्र का राशिस्वरूपाध्याय पहले बारह राशियों का क्रम देता है, मेष से मीन तक।[1] फिर हर राशि के वर्णन में उसका अधिपति बताता है। यही अधिपति आगे चलकर रत्न-चार्ट की रीढ़ बनता है, क्योंकि रत्न राशि को नहीं, उसके स्वामी ग्रह को दिया जाता है।
ध्यान रखें कि ग्रंथ में राशि के अधिपति के श्लोक हैं, पर किस राशि पर कौन सा रत्न पहनना है, यह तालिका उन श्लोकों में नहीं मिलती। रत्न-ग्रह की जोड़ी बाद की रत्न-परंपरा से आई है। इसलिए हम स्वामी ग्रह को शास्त्र से लेते हैं और रत्न का निर्णय कुंडली की जाँच से करते हैं।
राशि से रत्न बनाम लग्न से रत्न: असली फर्क
लोकप्रिय चार्ट जन्म राशि यानी चंद्र राशि से चलते हैं। पर पराशरी पद्धति में कुंडली का पहला आधार लग्न है, क्योंकि लग्न से ही पता चलता है कि कौन सा ग्रह आपके लिए योगकारक है और कौन सा बाधक। लग्न और राशि का फर्क जानने के लिए अपना लग्न कैसे पता करें पढ़ें, और लग्न की बनावट समझने के लिए Lagna Chart Explained देखें।
व्यवहार में दोनों अलग निकलते हैं। चंद्र राशि धनु हो सकती है और लग्न कर्क। ऐसे में चार्ट पुखराज कहेगा, जबकि कर्क लग्न की कुंडली में गुरु की भूमिका अलग होगी। इसी वजह से हम पहले लग्न कैलकुलेटर से लग्न देखने की सलाह देते हैं।
मेष राशि के लिए चार्ट का रत्न: मूंगा
मेष राशि का स्वामी मंगल है।[2] मंगल साहस, ऊर्जा और भूमि का कारक है। इसलिए चार्ट मेष को मूंगा देता है। पर मंगल अगर आपकी कुंडली में छठे, आठवें या बारहवें भाव का स्वामी बनकर बैठा है, तो मूंगा आग में घी का काम कर सकता है। पहले मूंगा के लाभ और जोखिम पढ़ें और मूंगा सुइटेबिलिटी चेक चलाएँ।
वृषभ राशि के लिए चार्ट का रत्न: हीरा
वृषभ राशि का अधिपति शुक्र है।[3] शुक्र सुख, कला, वाहन और दांपत्य का कारक है। चार्ट वृषभ को हीरा देता है। हीरा महँगा और तेज़ असर वाला रत्न है, इसलिए उसे केवल चार्ट देखकर लेना ठीक नहीं। हीरा किसे सूट करता है में शुक्र की स्थिति, दशा और विकल्प रत्न विस्तार से दिए हैं।
मिथुन राशि के लिए चार्ट का रत्न: पन्ना
मिथुन राशि का स्वामी बुध है।[4] बुध वाणी, गणित, व्यापार और तर्क का कारक है। चार्ट मिथुन को पन्ना देता है। पन्ना बुद्धि को तेज़ करने वाला माना जाता है, पर बुध कुंडली में अस्त या पीड़ित हो तो पहले कारण समझना ज़रूरी है। पन्ना के फायदे और नुकसान इसी जाँच को क़दम-दर-क़दम समझाता है।
कर्क राशि के लिए चार्ट का रत्न: मोती
कर्क राशि के अधिपति चंद्र हैं।[5] चंद्र मन, माता और भावनाओं का कारक है। चार्ट कर्क को मोती देता है। मोती सामान्यतः सौम्य माना जाता है, फिर भी अगर चंद्र छठे या आठवें भाव का स्वामी बनकर बैठा हो, तो अलग सावधानी चाहिए। मोती पहनने से पहले वाले पेज में यही बारीकी लिखी है।
सिंह राशि के लिए चार्ट का रत्न: माणिक
सिंह राशि का स्वामी सूर्य है।[6] सूर्य आत्मबल, पिता, पद और प्रतिष्ठा का कारक है। चार्ट सिंह को माणिक देता है। माणिक गर्म प्रकृति का रत्न है, इसलिए पित्त या क्रोध की प्रवृत्ति वालों को खास सावधान रहना चाहिए। माणिक की पूरी जानकारी देखें और तब निर्णय लें।
कन्या राशि के लिए चार्ट का रत्न: पन्ना
कन्या राशि भी बुध की राशि है।[7] मिथुन की तरह कन्या का स्वामी भी बुध है, इसलिए चार्ट यहाँ भी पन्ना लिखता है। फर्क यह है कि कन्या पृथ्वी तत्व की राशि है और मिथुन वायु तत्व की, इसलिए बुध का असर दोनों में अलग ढंग से दिखता है। कन्या वालों के लिए कन्या लग्न के रत्न का पेज पहले देखना बेहतर रहता है, क्योंकि वहाँ बुध लग्न का स्वामी बनकर आता है।
तुला राशि के लिए चार्ट का रत्न: हीरा
तुला राशि का स्वामी शुक्र है।[8] वृषभ की तरह तुला का स्वामी भी शुक्र है और चार्ट हीरा ही देता है। तुला वायु तत्व की राशि है और संतुलन, संबंध तथा न्याय से जुड़ी है। इसलिए हीरे का सवाल अक्सर विवाह और साझेदारी के निर्णय से जुड़ जाता है। जल्दबाज़ी में न पहनें और तुला लग्न के रत्न से अपनी स्थिति मिला लें।
वृश्चिक राशि के लिए चार्ट का रत्न: मूंगा
वृश्चिक राशि का अधिपति मंगल है।[9] वृश्चिक की राशि भी मंगल की है, इसलिए चार्ट मेष की तरह यहाँ भी मूंगा लिखता है। यह राशि जल तत्व की है और गहराई, गुप्तता तथा संघर्ष-क्षमता से जुड़ी मानी जाती है। जो वृश्चिक वाले पहले से तीखे स्वभाव के हैं, उन्हें मूंगा तभी लेना चाहिए जब कुंडली साफ़ अनुमति दे। वृश्चिक लग्न के रत्न में यह फर्क खुलकर लिखा है।
धनु राशि के लिए चार्ट का रत्न: पुखराज
धनु राशि के स्वामी गुरु हैं।[9] गुरु ज्ञान, धर्म, शिक्षा और संतान का कारक है। चार्ट धनु को पुखराज देता है। राशि के स्वभाव की पूरी तस्वीर धनु राशि: स्वभाव, स्वामी और खूबियाँ में मिलेगी। रत्न का प्रश्न अलग है, और उसके लिए पुखराज के लाभ और जोखिम तथा धनु लग्न के रत्न दोनों देखने चाहिए।
मकर राशि के लिए चार्ट का रत्न: नीलम
मकर राशि का स्वामी शनि है।[10] शनि कर्म, अनुशासन और देरी से मिलने वाले फल का कारक है। चार्ट मकर को नीलम देता है, पर नीलम सबसे तेज़ और सबसे जोखिम भरे रत्नों में गिना जाता है। इसलिए इसे बिना परीक्षण के कभी न पहनें। नीलम के फायदे और नुकसान में परीक्षण की पूरी विधि दी है।
कुंभ राशि के लिए चार्ट का रत्न: नीलम
कुंभ राशि का अधिपति भी शनि है।[11] ग्रंथ कुंभ को शनि की राशि बताता है, इसलिए चार्ट यहाँ भी नीलम लिखता है। कुंभ वाले अक्सर चार्ट देखकर सीधे नीलम की ओर चल पड़ते हैं, जबकि नीलम की परीक्षा के बिना यह सबसे जोखिम भरा क़दम है। पहले कुंभ लग्न के रत्न पढ़ें और फिर नीलम सुइटेबिलिटी चेक चलाएँ।
मीन राशि के लिए चार्ट का रत्न: पुखराज
मीन राशि के स्वामी भी गुरु हैं।[12] मीन का स्वामी गुरु है, इसलिए चार्ट धनु की तरह पुखराज लिखता है। मीन जल तत्व की द्विस्वभाव राशि है और अध्यात्म, करुणा तथा कल्पना से जुड़ी मानी जाती है। पुखराज यहाँ भी तभी पहनें जब कुंडली में गुरु शुभ भाव का स्वामी हो। मीन लग्न के रत्न वही निर्णय-रेखा समझाता है।
नीलम जैसे तेज़ रत्न के लिए अलग सावधानी
चार्ट सात रत्न बराबर आसानी से गिना देता है, पर असर सबका बराबर नहीं है। नीलम सबसे तेज़ और सबसे जोखिम भरा माना जाता है, इसलिए उसे पहनने से पहले कुछ दिन का परीक्षण ज़रूरी है। हीरा और माणिक भी कुंडली की उलटी स्थिति में परेशानी दे सकते हैं।
गलत रत्न की परेशानी कैसे बनती है, यह गलत रत्न आपको नुकसान क्यों पहुँचा सकता है में उदाहरण सहित समझाया है। जिन्हें राहु-केतु के रत्न पर सवाल है, वे गोमेद की जानकारी और लहसुनिया की जानकारी अलग से पढ़ें।
स्वामी ग्रह कुंडली में दोस्त है या दुश्मन: चार्ट यहीं चूकता है
चार्ट मानकर चलता है कि जिस राशि का स्वामी जो ग्रह है, वही आपका शुभ ग्रह भी है। असल कुंडली में ऐसा हर बार नहीं होता। मंगल मेष राशि वाले व्यक्ति की कुंडली में आठवें भाव का स्वामी बन सकता है, और तब मूंगा लाभ की जगह बेचैनी दे सकता है।
इसलिए रत्न तय करने से पहले ग्रह की भाव-स्वामित्व, स्थिति, दृष्टि और दशा देखी जाती है। कौन सा ग्रह सचमुच कमज़ोर है, यह कमज़ोर ग्रह खोजने वाले टूल और कुंडली में कमज़ोर ग्रह कैसे पहचानें से जाँचा जा सकता है।
अपनी असली राशि पक्की करने का तरीका
चार्ट का पहला क़दम राशि है, और राशि के लिए जन्म का समय सही होना ज़रूरी है। चंद्रमा लगभग सवा दो दिन में एक राशि बदलता है, इसलिए जन्म की तारीख के दिन चंद्र राशि बदल रही हो तो समय की गलती राशि ही बदल सकती है।
सटीक डिग्री के लिए फ्री राशि कैलकुलेटर चलाएँ। केवल नाम से राशि जाननी हो तो नाम से अपनी राशि देखें, पर वह अनुमान है। नक्षत्र और चरण की पुष्टि के लिए 27 नक्षत्रों के नाम, स्वामी और राशि मदद करता है।
चंद्र राशि और सूर्य राशि का भ्रम
इंटरनेट के कई चार्ट पश्चिमी सूर्य राशि के हिसाब से बने होते हैं और वैदिक चंद्र राशि के हिसाब से बने चार्ट से मेल नहीं खाते। भारतीय परंपरा में जन्म राशि का मतलब चंद्र राशि है, यानी जन्म के क्षण चंद्रमा जिस राशि में था। इसलिए सूर्य-राशि वाला चार्ट भारतीय कुंडली के लिए भरोसेमंद नहीं रहता।
अगर आपकी राशि कुछ और बताती है और चार्ट कुछ और, तो पहले अपनी जन्म कुंडली बनवाकर चंद्र की राशि देखें। वही आपका आधार बनेगी।
राशि रत्न चार्ट कब काम आता है और कब नहीं
चार्ट सीखने के लिए अच्छा है। इससे आप जान लेते हैं कि कौन सा ग्रह किस रत्न से जुड़ता है और बारह राशियाँ सात स्वामियों में कैसे बँटती हैं। पर जब निर्णय पैसे और जोखिम का हो, तब चार्ट केवल शुरुआत है।
अंतिम निर्णय के लिए लग्न का स्वामी, योगकारक ग्रह और चल रही दशा देखनी पड़ती है। यह पूरी विधि कुंडली के हिसाब से कौन सा रत्न पहनें में चरण-दर-चरण दी है। इस पेज को उसी पेज का सरल प्रवेश-द्वार समझें।
दशा रत्न का फैसला कैसे बदल देती है
चल रही महादशा का स्वामी बहुत कुछ बदल देता है। जिस ग्रह की दशा चल रही है, उसके रत्न का असर तेज़ दिखता है। इसलिए दशा के बीच में रत्न बदलना आसान निर्णय नहीं है।
अपनी चल रही दशा देखने के लिए फ्री दशा कैलकुलेटर चलाएँ। केवल दशा देखकर रत्न पहनना भी ग़लत है, क्योंकि बुरे भाव का स्वामी दशानाथ हो तो रत्न उसे और बलवान कर देता है। दोनों बातें साथ देखनी चाहिए।
सही रत्न तय करने की चार कसौटियाँ
पहली कसौटी है लग्न और उसका स्वामी। दूसरी कसौटी है कि ग्रह किस भाव का स्वामी है। तीसरी कसौटी है ग्रह की डिग्री, अस्त या वक्री होना और दृष्टि। चौथी कसौटी है चल रही दशा और अंतर्दशा।
इन चारों पर ग्रह खरा उतरे तभी रत्न का नाम तय होता है। हर कसौटी का हिसाब एक साथ रत्न सुइटेबिलिटी कैलकुलेटर करता है, और रत्न कैलकुलेटर आपको ग्रह-वार नतीजा दिखाता है।
रत्न का वज़न, धातु और उंगली कैसे तय होती है
वज़न का कोई एक नियम सब पर लागू नहीं होता। परंपरा में वज़न को ग्रह की ज़रूरत से जोड़कर देखा जाता है, इसलिए न बहुत छोटा और न बहुत बड़ा रत्न चुनना ठीक माना जाता है। धातु ग्रह की प्रकृति के अनुसार चुनी जाती है, जैसे गुरु के लिए सोना और शनि के लिए लोहे या पंचधातु की परंपरा।
उंगली और दिन के नियम भी हैं। इन सबकी साफ़ सूची रत्न धारण के व्यावहारिक नियम में है और सामान्य सवाल रत्न के सबसे आम सवाल में हैं। मूल बात यह है कि नियम एक बार पढ़ लें, फिर ही रत्न खरीदें।
बजट कम हो तो उपरत्न कहाँ तक ठीक है
उपरत्न महँगे मुख्य रत्न का कम दाम वाला विकल्प माना जाता है, जैसे पुखराज की जगह सुनहला। यह उन लोगों के लिए आसान रास्ता है जिनके लिए असली रत्न बजट से बाहर है। पर उपरत्न का असर हल्का माना जाता है, इसलिए उम्मीद भी उतनी ही रखें।
कौन सा उपरत्न किस रत्न की जगह लेता है, और कब उपरत्न से काम चल जाता है, यह उपरत्न: विकल्प रत्न की गाइड में बताया है। प्रयोगशाला में बने रत्नों पर हमारा रुख अलग पेज पर साफ़ लिखा है।
रत्न से पहले आज़माने लायक सरल उपाय
रत्न एकमात्र रास्ता नहीं है। कमज़ोर सूर्य के लिए सबसे आसान उपाय सुबह सूर्य को जल देना है।
उपाय: सूर्य को जल अर्पण।
कैसे: सुबह ताँबे के लोटे में साफ़ जल लेकर सूर्य की ओर मुख करके धीरे से चढ़ाएँ।
कब: सूर्योदय के बाद पहले एक घंटे में, रोज़ या कम से कम रविवार को।
कितना: एक लोटा जल, पाँच मिनट। कोई खर्च नहीं।
सावधानी: सीधे नंगी आँखों से तेज़ धूप में न देखें, और इसे कोई चमत्कारी इलाज न मानें।
कई उपाय अपनी कुंडली के हिसाब से फ्री उपाय कैलकुलेटर में मिलते हैं।
सात रत्नों की प्रकृति: एक नज़र में
हर रत्न की प्रकृति अलग मानी जाती है। मूंगा और माणिक गर्म प्रकृति के माने जाते हैं, जबकि मोती शीतल माना जाता है। पन्ना बुद्धि-प्रधान, पुखराज गुरु-तत्त्व वाला और हीरा भोग-सुख से जुड़ा रत्न है। नीलम सबसे तीव्र प्रकृति का है।
इसलिए एक ही राशि के दो लोगों को एक ही रत्न का अलग अनुभव हो सकता है। प्रकृति और कुंडली का मेल देखे बिना रत्न का नाम तय करना अधूरा निर्णय है। अपनी प्रकृति के हिसाब से रत्न कैलकुलेटर का नतीजा ज़रूर देखें।
ग्रह के कारकत्व से रत्न का सवाल कैसे जुड़ता है
ग्रह किन चीज़ों का कारक है, इससे यह समझ आता है कि रत्न किस क्षेत्र को छूएगा। सूर्य का कारकत्व पद और आत्मबल है, चंद्र का मन और माता, मंगल का साहस और भूमि, बुध का वाणी और व्यापार, गुरु का ज्ञान और संतान, शुक्र का सुख और संबंध, और शनि का कर्म और अनुशासन है।
पर कारकत्व और भाव-स्वामित्व दो अलग बातें हैं। ग्रह का कारकत्व शुभ होकर भी अगर वह कुंडली में अशुभ भाव का स्वामी है, तो रत्न दुविधा पैदा कर सकता है। भाव का अर्थ समझने के लिए Lagna Chart Explained में भावों का क्रम देखें।
असली रत्न की पहचान के सामान्य नियम
रत्न का सही ग्रह चुन लेने के बाद अगली चुनौती असली रत्न पाना है। प्रमाणित प्रयोगशाला की रिपोर्ट वाला रत्न चुनें, रत्न में दिखने वाले दोष, रंग की एकरूपता और चमक को परखें, और भरोसेमंद विक्रेता से ही लें।
सस्ते दाम का कोई भी बड़ा दावा सावधान होने का संकेत है। रत्न पहनने से पहले उसे वापस करने या जाँच करवाने की सुविधा पूछ लें। रिपोर्ट का काग़ज़ संभालकर रखें, क्योंकि वही आगे आपकी पहचान का सबूत रहेगा। खरीद से पहले रत्न के सबसे आम सवाल भी एक बार पढ़ लें।
जन्म समय संदिग्ध हो तो रत्न का निर्णय कैसे लें
बहुत से लोगों को जन्म का समय ठीक से पता नहीं होता। ऐसे में चंद्र राशि अक्सर फिर भी पक्की रहती है, क्योंकि लग्न की तुलना में चंद्र राशि बहुत धीरे बदलती है। पर लग्न कुछ ही मिनट में बदल सकता है, इसलिए लग्न अनिश्चित हो तो रत्न का निर्णय टाल देना ही ठीक है।
ऐसी स्थिति में रत्न टालकर पहले मंत्र और दान जैसे सरल उपाय अपनाएँ और जन्म समय सुधारने का रास्ता खोजें। सही जन्म-समय मिल जाए तो फ्री जन्म कुंडली कैलकुलेटर से लग्न और ग्रह-स्थिति निकाली जा सकती है।
चार्ट देखकर होने वाली आम गलतियाँ
पहली गलती है सूर्य राशि के हिसाब से रत्न चुन लेना। दूसरी गलती है दुकान पर बैठे दुकानदार की सलाह को कुंडली की जाँच मान लेना। तीसरी गलती है एक साथ कई रत्न पहन लेना।
चौथी गलती है नीलम जैसे तेज़ रत्न को बिना परीक्षण लेना। पाँचवीं गलती है असली-नकली की पहचान किए बिना खरीद लेना। इन सबके जोखिम रत्न धारण के नियमों और गलत रत्न के नुकसान में खुलकर लिखे हैं।
कब रत्न न पहनना ही ठीक है
अगर कुंडली में रत्न का ग्रह अशुभ भाव का स्वामी है, तो रत्न पहनना ठीक नहीं रहता। तब ग्रह की शांति मंत्र, दान और सेवा से करना सुरक्षित माना जाता है। अगर जन्म का समय संदिग्ध है, तब भी रत्न टाल दें, क्योंकि लग्न बदलते ही रत्न का फैसला बदल जाता है।
अगर आप पहले ही कोई रत्न पहने हुए हैं और असहज महसूस कर रहे हैं, तो पहले रत्न को उतारकर किसी जानकार से जाँच करवाएँ। डर की ज़रूरत नहीं है, पर जल्दबाज़ी भी नहीं।
चार्ट के बाद अगला कदम: लग्न आधारित रत्न पेज
अगर आपका लग्न पता है, तो सीधा अपने लग्न का पेज खोलें। मेष लग्न, वृषभ लग्न, मिथुन लग्न और कर्क लग्न के पेज चार रत्न-आधारों को अलग करके दिखाते हैं। सिंह लग्न और मकर लग्न के पेज भी ऐसे ही हैं।
हर लग्न पेज उस लग्न के लिए शुभ ग्रह और बाधक ग्रह गिनाता है। यही वह जगह है जहाँ राशि वाला चार्ट आगे बढ़कर असली निर्णय बनता है। लग्न नहीं पता तो पहले लग्न कैलकुलेटर चलाएँ।
अपनी कुंडली पक्की करें और आगे बढ़ें
अगर आप अपनी राशि से रत्न का सवाल लेकर आए हैं, तो सबसे सुरक्षित क्रम यह है: पहले फ्री राशि कैलकुलेटर से राशि और लग्न कैलकुलेटर से लग्न पक्का करें, फिर रत्न सुइटेबिलिटी कैलकुलेटर चलाएँ। कुंडली मज़बूत है या कमज़ोर, यह भी कुंडली मज़बूत है या कमज़ोर से देख लें।
यह पेज रोहित गुप्ता, मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट ने लिखा है, जो 16 वर्ष से अधिक समय से पराशरी पद्धति में कुंडली-विश्लेषण करते हैं। गणना Swiss Ephemeris पर आधारित है। रत्न एक गंभीर निर्णय है, इसलिए जाँच के बिना खरीदना सबसे बड़ी गलती है।
Apna Personalized Analysis Lein
Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:
शब्दावली · Glossary
- राशि
- राशि चक्र का तीस अंश का एक भाग, कुल बारह में से एक।
- स्वामी ग्रह
- वह ग्रह जिसे किसी राशि का अधिपति माना जाता है।
- लग्न
- जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदित हो रही राशि।
- योगकारक
- वह ग्रह जो केंद्र और त्रिकोण दोनों का स्वामी बनकर शुभ फल देता है।
- उपरत्न
- मुख्य रत्न का कम दाम वाला विकल्प रत्न।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 3
मेष से मीन तक बारह राशियों का क्रम इस श्लोक में गिना गया है।
The twelve signs are listed in order from Aries to Pisces.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 7
मेष राशि का अधिपति मंगल बताया गया है।
Aries is described as the sign of which Mars is the lord.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 8
वृषभ राशि का अधिपति शुक्र बताया गया है।
Taurus is described as the sign of which Venus is the lord.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 10
मिथुन राशि का अधिपति बुध बताया गया है।
Gemini is described as the sign of which Mercury is the lord.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 11
कर्क राशि का अधिपति चंद्र बताया गया है।
Cancer is described as the sign of which the Moon is the lord.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 12
सिंह राशि का अधिपति सूर्य बताया गया है।
Leo is described as the sign of which the Sun is the lord.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 14
कन्या राशि का अधिपति बुध बताया गया है।
Virgo is described as the sign of which Mercury is the lord.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 16
तुला राशि का अधिपति शुक्र बताया गया है।
Libra is described as the sign of which Venus is the lord.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 17
वृश्चिक का अधिपति मंगल और धनु का स्वामी गुरु बताया गया है।
Scorpio is a sign of Mars and Sagittarius is a sign of Jupiter.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 19
मकर राशि का अधिपति शनि बताया गया है।
Capricorn is described as the sign of which Saturn is the lord.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 22
कुंभ राशि का स्वामी सूर्यपुत्र शनि बताया गया है।
Aquarius is described as a sign ruled by the son of the Sun, that is Saturn.
- — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 24
मीन राशि का अधिपति गुरु बताया गया है।
Pisces is described as the sign of which Jupiter is the lord.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
राशि रत्न चार्ट में हर राशि का रत्न कौन सा है?
मेष और वृश्चिक का मूंगा, वृषभ और तुला का हीरा, मिथुन और कन्या का पन्ना, कर्क का मोती, सिंह का माणिक, धनु और मीन का पुखराज, और मकर और कुंभ का नीलम माना जाता है। ये रत्न राशि के स्वामी ग्रह से जुड़ते हैं।
क्या राशि देखकर रत्न पहनना सही है?
राशि केवल शुरुआती संकेत देती है। शास्त्रीय पद्धति में लग्न, ग्रह का भाव-स्वामित्व और चल रही दशा देखकर रत्न तय होता है। केवल राशि के आधार पर महँगा रत्न लेना जोखिम भरा हो सकता है।
राशि के अनुसार रत्न और लग्न के अनुसार रत्न में क्या फर्क है?
राशि जन्म के समय चंद्रमा की राशि है और लग्न पूर्वी क्षितिज पर उदित राशि है। रत्न का निर्णय लग्न से अधिक भरोसेमंद माना जाता है, क्योंकि उसी से शुभ और बाधक ग्रह तय होते हैं।
मेरी राशि और लग्न अलग हैं, तो कौन सा रत्न लूँ?
पहले लग्न के आधार पर शुभ ग्रह पहचानें, फिर उस ग्रह की स्थिति और दशा देखें। राशि वाला रत्न तभी चुनें जब वही ग्रह कुंडली में भी अनुकूल निकले। अलग-अलग होने पर जल्दी निर्णय न लें।
सबसे जोखिम वाला रत्न कौन सा माना जाता है?
नीलम को सबसे तेज़ असर वाला और सबसे जोखिम भरा माना जाता है। इसे पहनने से पहले परीक्षण ज़रूरी है। हीरा, माणिक और मूंगा भी उलटी कुंडली में परेशानी दे सकते हैं।
क्या बृहत् पराशर होरा शास्त्र में राशि रत्न चार्ट मिलता है?
हमारे पुस्तकालय में उपलब्ध पाठ में राशियों के अधिपति के श्लोक मिलते हैं, पर राशि-वार रत्न की तालिका नहीं मिलती। रत्न-ग्रह की जोड़ी बाद की रत्न-परंपरा की है, इसलिए उसे परंपरा के रूप में ही लें।
राशि रत्न चार्ट में गोमेद और लहसुनिया क्यों नहीं हैं?
चार्ट राशि के स्वामी के आधार पर बनता है और राहु-केतु किसी राशि के स्वामी नहीं माने जाते। इसलिए गोमेद और लहसुनिया चार्ट में नहीं आते। वे कुंडली की अलग जाँच के बाद ही सुझाए जाते हैं।
क्या दो रत्न एक साथ पहने जा सकते हैं?
कुछ ग्रह आपस में शत्रु माने जाते हैं, इसलिए हर जोड़ी साथ नहीं पहनी जाती। एक साथ कई रत्न पहनने से पहले हर रत्न की अलग जाँच करें। नियमों की सूची रत्न धारण के पेज पर है।
बजट कम हो तो क्या करें?
उपरत्न विकल्प हो सकता है, पर उसका असर हल्का माना जाता है। रत्न के बजाय मंत्र, दान और सेवा जैसे सरल उपाय भी आज़माए जा सकते हैं। कोई भी बड़ा खर्च कुंडली की जाँच के बाद ही करें।
रत्न का फल कब दिखता है?
इसका कोई तयशुदा समय नहीं है और कोई भी रत्न पक्का फल देने का दावा नहीं कर सकता। असर ग्रह की दशा, कुंडली की स्थिति और रत्न की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। इसलिए बदलाव को धैर्य से परखें।
यह भी देखें · See also
इस हब का मुख्य पेजकुंडली के हिसाब से कौन सा रत्न पहनेंसमूह: कुंडली से रत्न कैसे निकालें — शुरुआती नियम
धनु राशि: स्वभाव, स्वामी, खूबियाँ और उपाय
gemstonesरत्न से जुड़े सवाल: पूरी वैदिक ज्योतिष FAQ
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श्रेणी: gemstones · remedies