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उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र: स्वभाव, करियर, शादी

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect16 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

उत्तरा भाद्रपद 27 नक्षत्रों में 26वां है, जो सिडेरियल मीन राशि में 3°20' से 16°40' तक फैला है। इसके स्वामी शनि हैं और अधिदेवता अहिर्बुध्न्य हैं, यानी गहरे जल का सर्प। बृहत्संहिता इसमें जन्मे व्यक्ति को वक्ता, धार्मिक, संतानवान और शत्रुजयी बताती है। अपना नक्षत्र मुफ्त जानने के लिए [नक्षत्र कैलकुलेटर](/calculators/free-nakshatra-calculator) देखें।

Deep Dive Analysis

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र एक नज़र में

उत्तरा भाद्रपद 26वां नक्षत्र है और पूरी तरह सिडेरियल मीन राशि में 3°20' से 16°40' तक आता है। इसके स्वामी शनि हैं, अधिदेवता अहिर्बुध्न्य हैं और इसका स्वभाव गहरा, शांत और अंतर्मुखी माना जाता है। बृहत्संहिता यहां जन्मे व्यक्ति को वक्ता, धार्मिक, संतानवान और शत्रु पर विजय पाने वाला बताती है।[1] इस पेज में हम देखेंगे कि असली कुंडली में इसका मतलब क्या है: स्वभाव, करियर, धन, विवाह, शनि दशा, मुहूर्त और सरल उपाय। अगर आप सिर्फ यह जानना चाहते हैं कि आपका चंद्रमा यहां है या नहीं, तो मुफ्त नक्षत्र कैलकुलेटर कुछ सेकंड में बता देगा। नवजात शिशु के पक्ष के लिए उत्तरा भाद्रपद और संतान जन्म पढ़ें।

वैदिक ज्योतिष में उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र क्या है?

नक्षत्र राशिचक्र के 27 बराबर हिस्से हैं, हर एक 13°20' का, जो उस तारा-समूह के नाम पर है जिससे चंद्रमा गुजरता है। उत्तरा भाद्रपद का अर्थ है दो भाद्रपद तारों में बाद वाला, जो रेवती के साथ राशिचक्र का अंत करता है। जन्म नक्षत्र वह है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, और वही स्वभाव, रिश्तों और शुरुआती दशा को रंग देता है। पृष्ठभूमि के लिए नक्षत्र गाइड और चंद्र राशि गाइड पढ़ें। राशि जानने के लिए राशि कैलकुलेटर है, और नक्षत्र उससे बारीक जानकारी देता है। अपना नक्षत्र खोजने का आसान तरीका जन्म नक्षत्र कैसे पता करें में है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के अंश और राशिचक्र में स्थान

यह नक्षत्र सिडेरियल मीन राशि के 3°20' से 16°40' तक है, यानी पूरे 360° चक्र पर 333°20' से 346°40'। यह एक ही राशि में आता है, इसलिए यहां का हर चंद्रमा मीन राशि का चंद्रमा है। मीन के स्वामी गुरु हैं और नक्षत्र के स्वामी शनि, यानी दो बड़े गुरु एक छोटे से आकाश-खंड में साथ हैं। इससे पहले पूर्वा भाद्रपद और बाद में अंतिम तारा रेवती आता है। सिडेरियल और ट्रॉपिकल स्थिति में आज लगभग 24 अंश का अंतर है, इसीलिए सिर्फ सूर्य राशि की तालिका काफी नहीं और जन्म कुंडली कैलकुलेटर चाहिए। बारह राशियां राशि गाइड में देखें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह: शनि और उसकी दशा

विंशोत्तरी में उत्तरा भाद्रपद के दशा-स्वामी शनि हैं, पुष्य और अनुराधा की तरह। कृत्तिका से शुरू होकर दशा-स्वामी सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र के क्रम में चलते हैं और 27 नक्षत्रों पर तीन बार दोहराए जाते हैं।[6] इससे शनि 8वें, 17वें और 26वें तारे पर आते हैं, और उत्तरा भाद्रपद 26वां है। यानी यहां चंद्रमा हो तो जीवन की शुरुआत शनि की दशा से होती है, और जन्म पर बची हुई अवधि इस पर निर्भर है कि चंद्रमा कितना आगे बढ़ चुका था। पूरी महादशा 19 साल की होती है, फिर बुध, केतु और शुक्र क्रम से आते हैं। पूरा तंत्र महादशा गाइड में है और अपनी शुरुआत दशा कैलकुलेटर से निकालें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के देवता: अहिर्बुध्न्य, गहरे जल का सर्प

बृहत्संहिता नक्षत्र-क्रम में अधिपति देवता गिनाती है और पूर्वा भाद्रपद को अजपाद, उत्तरा भाद्रपद को अहिर्बुध्न्य और रेवती को पूषा देती है।[2] मुहूर्त चिंतामणि वही क्रम संक्षेप में देती है।[3] अहिर्बुध्न्य का अर्थ है गहराई का सर्प, वैदिक परंपरा में धरती के नीचे के गुप्त जल, संचित ऊर्जा और स्थिर सहारे से जुड़ा रूप। यह छवि इस तारे पर ठीक बैठती है: ऊपर से शांत, भीतर से गहरा। इस देवता में डरने जैसा कुछ नहीं है। यह धैर्य, सहनशक्ति और धीमे, ठोस काम की ओर इशारा करता है, जो शनि भी सिखाते हैं। ऐसे देवता-विषयों का ग्रहों से संबंध ग्रह गाइड में देखें।

शास्त्र उत्तरा भाद्रपद में जन्मे लोगों के बारे में क्या कहते हैं

बृहत्संहिता का नक्षत्र-जातक अध्याय दूसरे भाद्रपद में जन्मे व्यक्ति को वक्ता, सुखी, संतानवान, धार्मिक और शत्रुजयी बताता है।[1] पास का एक श्लोक दोनों भाद्रपद तारों को साथ लेकर थोड़ी सावधानी भरी बात जोड़ता है: चिंता, स्त्रियों के प्रभाव में आना, धन-कुशलता और दान में संकोच।[7] इसे प्रवृत्ति समझें, फैसला नहीं, और जानबूझकर थोड़ा दान करके संतुलन बनाएं। उपाय: गुरुवार को एक समय का भोजन या दस से बीस रुपये दान करें, लगातार 11 गुरुवार। खर्च लगभग शून्य है और यह वही खुला हाथ सिखाता है जिसकी कमी श्लोक बताता है। तीनों अंतिम तारों का फर्क समझने के लिए रेवती नक्षत्र पेज देखें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का व्यक्तित्व और स्वभाव

इस चंद्रमा वाले लोग शांत, विचारशील और देर से गुस्सा होने वाले होते हैं। वे पहले सुनते हैं, फिर बोलते हैं, और जब बोलते हैं तो शब्दों में वजन होता है, जो शास्त्र के वक्ता शब्द से मेल खाता है। उन्हें दिखावे से ज्यादा गहराई, शांति और अर्थ पसंद है। शनि नक्षत्र के और गुरु राशि के स्वामी हैं, इसलिए कई लोगों में गंभीर, शिक्षक जैसी परत और कोमल हृदय साथ दिखता है। शुरू में वे दूर लग सकते हैं, पर भरोसा बनने पर निष्ठा बहुत गहरी होती है। पूरा व्यक्तित्व लग्न, चंद्र भाव और दृष्टियों पर भी टिकता है, इसलिए इन गुणों को कुंडली कैसे देखें और कुंडली के 9 ग्रह से मिलाकर परखें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र की ताकतें

मुख्य ताकतें हैं धैर्य, आत्म-संयम, समझदारी और टिके रहने की क्षमता। यह लंबी दौड़ का तारा है, इसलिए धीरे-धीरे बनाने वाले और हार न मानने वाले लोगों को सूट करता है। कई लोग अच्छे सलाहकार बनते हैं, क्योंकि वे कमरे में शांति रखते हैं और राज संभालते हैं। अकेलापन उन्हें खलता नहीं, और अध्ययन, शोध या साधना पर घंटों ध्यान लगा सकते हैं। पैसे की आदतें आमतौर पर समझदार रहती हैं और वे शोर-शराबे में नहीं बहते। गुरु अच्छी स्थिति में हों तो ये गुण और बढ़ते हैं, इसलिए योग देखने के लिए गजकेसरी योग और धन योग पेज पढ़ें। इन ताकतों को काम और घर में जानबूझकर इस्तेमाल करें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र की कमजोरियां और संतुलन के उपाय

गहरे, शांत तारे की छाया है अंदर सिमट जाना। कुछ लोग भावनाएं दबा लेते हैं, चिंता में डूबते हैं, फैसले टालते हैं और मदद न मांगने से थकान जमा कर लेते हैं। शनि कर्तव्य का बोझ जरूरत से ज्यादा उठाने की आदत जोड़ते हैं। संतुलन छोटा और व्यावहारिक है। उपाय: शनिवार की शाम दस मिनट अपनी एक चिंता और कल की एक कार्रवाई कागज़ पर लिखें, लगातार 11 शनिवार। खर्च शून्य है और यह धीमे शनि-मन को अगला कदम देता है। हफ्ते में एक सच्ची बातचीत किसी भरोसेमंद व्यक्ति से करें। चंद्र, शनि और राहु के मन-स्वास्थ्य पक्ष के लिए मानसिक स्वास्थ्य गाइड और मानसिक स्वास्थ्य कुंडली से पढ़ें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के चरण और नवांश

हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर एक 3°20' का, और हर चरण एक नवांश राशि में आता है। चरण 1 मीन के 3°20' से 6°40' में है और सिंह नवांश में पड़ता है, चरण 2 कन्या में, चरण 3 तुला में और चरण 4 वृश्चिक में। सिंह आत्मविश्वास देता है, कन्या विश्लेषण और सेवा, तुला संतुलन और साझेदारी, और वृश्चिक गहराई और तीव्रता। इसलिए चरण तय करता है कि शांत मीन-शनि आधार कैसे व्यक्त होगा, और यह D9 चार्ट में चंद्रमा की ताकत के लिए सबसे ज्यादा मायने रखता है। यह चार्ट कैसे काम करता है, नवांश गाइड में पढ़ें और गरिमा के नियम ग्रह उच्च-नीच गाइड में देखें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के नाम अक्षर: दू, थ, झ, त्र

चारों चरणों के पारंपरिक नाम-अक्षर दू, थ, झ और त्र हैं, हर चरण के लिए एक, क्रम से। कई परिवार नवजात का पहला अक्षर उस चरण से चुनते हैं जिसमें चंद्रमा था। ऐसा नाम चुनें जो बोलने में आसान हो, अच्छा अर्थ रखे और सही अक्षर से शुरू हो, किसी दुर्लभ नाम को जबरन न थोपें। कौन-सा चरण है, यह ठीक जन्म समय से तय होता है, इसलिए नाम अक्षर कैलकुलेटर से पुष्टि करें और पूरी तालिका के लिए नक्षत्र अनुसार शुभ नाम अक्षर पढ़ें। नक्षत्र का अक्षर एक परंपरा है, भाग्य का नियम नहीं।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और करियर

यह तारा उन कामों को सूट करता है जो गहराई और भरोसे को इनाम देते हैं: शिक्षण, काउंसलिंग, शोध, कानून, लेखन, लेखा, चिकित्सा, समाज-सेवा, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और लंबी प्रशासनिक भूमिकाएं। शनि संस्थाओं के लिए धैर्य देते हैं और मीन की पृष्ठभूमि सहानुभूति। तेज बिक्री या दिखावटी नौकरी से ज्यादा ये स्थिर, मिशन वाली भूमिकाओं में अच्छा करते हैं। अंतिम करियर तस्वीर दशम भाव और उसके स्वामी से आती है, इसलिए दशमेश और करियर, करियर भविष्यवाणी पेज और सर्वश्रेष्ठ करियर कुंडली साथ पढ़ें। अगर शनि की दशा नौकरी में देर कर रही है, तो दशा और टाइमिंग देखें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और धन

यह चंद्रमा आमतौर पर धन धीरे-धीरे बनाता है और संभालकर रखता है। बचत, संपत्ति और दीर्घकालीन योजनाएं सट्टे से ज्यादा सूट करती हैं। शास्त्र की धन-कुशलता वाली बात इसी प्रोफाइल से मेल खाती है, पर वही पंक्ति ज्यादा कसकर पकड़ने से चेताती भी है।[7] संतुलन का तरीका है हर महीने एक तय छोटी रकम देना। उपाय: हर गुरुवार दस से बीस रुपये अलग रखें और 11 हफ्ते किसी जरूरतमंद को दें। यह सस्ता है और प्रवाह को स्वस्थ रखता है। कुंडली में धन दूसरे, ग्यारहवें और नवम भाव पर निर्भर है, इसलिए कुंडली में धन योग और धन भविष्यवाणी पेज पढ़ें। गुरु और शनि मिलकर कर्ज और बचत बनाते हैं, यह शनि-गुरु संबंध में समझाया है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और विवाह, मिलान

अष्टकूट मिलान में इस तारे का गण मनुष्य, योनि गाय और नाड़ी मध्य है। मनुष्य गण मनुष्य और देव के साथ सबसे सहज मेल करता है, गाय योनि कोमल और निष्ठावान है, और मध्य नाड़ी का दूसरी मध्य नाड़ी से मेल नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे नाड़ी दोष बनता है। उत्तरा भाद्रपद विवाह मुहूर्त के 11 नक्षत्रों में भी है, जो बताता है कि जीवनभर के बंधन के लिए इसे स्थिर माना गया है। मिलान केवल नक्षत्र से कभी न करें, क्योंकि सप्तम भाव और शुक्र उतने ही मायने रखते हैं। पूरी जांच कुंडली मिलान टूल से करें, 36 गुण मिलान पढ़ें और नाड़ी मिले तो नाड़ी दोष उपाय देखें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और प्रेम संबंध

प्रेम में यह चंद्रमा निष्ठावान, शांत और गंभीर होता है। वे जल्दबाजी नहीं करते, भरोसे को धीरे परखते हैं और फिर गहराई से जुड़ते हैं। खतरा भावनात्मक चुप्पी का है: वे बहुत महसूस करते हैं और कम कहते हैं, और साथी इसे ठंडापन समझ सकता है। रोज एक गर्मजोशी भरा वाक्य कहने से बहुत कुछ सुधर जाता है। साथी के लिए ड्रामा से ज्यादा धैर्य और भरोसेमंद व्यवहार कारगर है। रास्ता प्रेम का हो या अरेंज्ड, यह पूरी कुंडली पर टिका है, इसलिए प्रेम विवाह भविष्यवाणी और कुंडली में विवाह योग देखें। समय के लिए शादी किस उम्र में होगी पेज दशा के संकेत समझाता है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और स्वास्थ्य

मीन पैरों, लसीका और द्रव प्रणाली का कारक है और शनि जोड़ों, हड्डियों और धीरे बनने वाली थकान का। इसलिए शास्त्रीय पाठक इस नक्षत्र में पैर, टखने, नींद, द्रव संतुलन और थकान पर नजर रखते हैं। इसे नियमित देखभाल का संकेत मानें, निदान नहीं। उपाय: सोने से पहले दस मिनट गुनगुने पानी में पैर डुबोएं, हफ्ते में पांच रात, 40 दिन। घर पर निःशुल्क है और दिन के अंत में शरीर को शांत करता है। नींद का समय नियमित रखें और किसी भी असली लक्षण पर डॉक्टर को दिखाएं। छठे, आठवें और बारहवें भाव का पठन कुंडली में बीमारी कैसे देखें और स्वास्थ्य भविष्यवाणी पेज में है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और परिवार: संतान और माता-पिता

संतानवान होने वाली शास्त्रीय पंक्ति नक्षत्र-ग्रंथों की सबसे सुंदर पंक्तियों में है।[1] व्यवहार में यह ऐसे देखभाल करने वाले, जिम्मेदार माता-पिता की ओर इशारा करती है जो चिल्लाकर नहीं, उदाहरण से सिखाते हैं। असली तस्वीर पंचम भाव, उसके स्वामी और पुत्रकारक गुरु से तय होती है, इसलिए संतान जन्म भविष्यवाणी, कितने बच्चे होंगे और गुरु पुत्रकारक लेख पढ़ें। माता-पिता के साथ रिश्ता कर्तव्यनिष्ठ और लंबा चलने वाला होता है, और शनि बुजुर्गों के प्रति कर्तव्य दिखा सकते हैं। इस धुरी पर माता-पिता का रिश्ता कुंडली से और शनि और पितृ दोष पढ़ें।

कुंडली में उत्तरा भाद्रपद का चंद्रमा: भाव और गरिमा

मीन में चंद्रमा न उच्च होता है न नीच, यानी सम स्थिति में है, और गुरु के घर में जल-राशि में सहज रहता है। उसका भाव ज्यादा मायने रखता है। पहले भाव में यह शांत, विचारशील चेहरा देता है। चौथे में शांत घरेलू जीवन। सातवें में शांत, स्थिर जीवनसाथी। दसवें में गहराई वाला सार्वजनिक काम। बारहवें में, जो मीन का स्वाभाविक भाव है, यह एकांत, यात्रा या साधना की ओर खींच सकता है। निष्कर्ष से पहले हमेशा चंद्रमा की दृष्टि और युति देखें। अपना चंद्र भाव जानने के लिए जन्म कुंडली कैलकुलेटर और कुंडली के 12 भाव का उपयोग करें, और लग्न के लिए मेरा लग्न क्या है पढ़ें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और शनि महादशा

अगर आपका चंद्रमा यहां है तो आपकी पहली महादशा शनि की है, और जन्म पर बची अवधि शून्य से 19 साल तक कुछ भी हो सकती है। बाद में दूसरी शनि महादशा सामान्य जीवनकाल में नहीं लौटती, क्योंकि पूरा विंशोत्तरी चक्र 120 साल का है।[6] शनि की दशाएं मेहनत, अनुशासन और धैर्य को इनाम देती हैं और शॉर्टकट कम देती हैं। छात्र को धीमी प्रगति लग सकती है, फिर ठोस नतीजे आते हैं। भारी शनि दशा के लिए उपाय: शनिवार को घर में तिल के तेल का एक दीपक जलाएं और हफ्ते में एक बार किसी आवारा कुत्ते या कौवे को खिलाएं, 19 हफ्ते। खर्च लगभग शून्य है और यह शनि के सेवा भाव से मेल खाता है। सटीक अंतर्दशा दशा कैलकुलेटर से देखें और महादशा गाइड पढ़ें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में बैठे अन्य ग्रह

यहां बैठा कोई भी ग्रह शनि का धैर्यवान, गहरा रंग लेता है। गुरु को अपनी राशि की समझदारी मिलती है और वह सहज चलता है। बुध मीन में है, जहां उसका परम नीच बिंदु लगभग 15° पर है और वह बिंदु इसी तारे के भीतर पड़ता है, इसलिए विश्लेषक बुध को यहां ज्यादा शांति और साफ संवाद चाहिए। शुक्र आगे रेवती में उच्च होता है, तो इस तारे में वह कोमल पर सादा रहता है। मंगल की ऊर्जा शनि के साथ ठंडी होकर चलती है। राहु और केतु असामान्य आध्यात्मिक या शोध रुचि देते हैं। ग्रहों का फल भाव और गरिमा के साथ पढ़ें, जैसा ग्रह गाइड और गरिमा गाइड बताते हैं। राहु-केतु की धुरी के लिए कालसर्प दोष पेज देखें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का मुहूर्त: यह ध्रुव तारा क्यों है

बृहत्संहिता तीनों उत्तरा और रोहिणी को ध्रुव यानी स्थिर गिनती है और अभिषेक, शांति-कर्म, वृक्षारोपण, नगर-स्थापना और बीज-वपन के लिए सुझाती है।[4] मुहूर्त चिंतामणि सहमत है और गृह-निर्माण तथा उद्यान जोड़ती है।[5] इसलिए उत्तरा भाद्रपद घर की नींव, दीर्घकालीन निवेश या ऐसी शुरुआत के लिए अच्छा चंद्र-तारा है जो टिकनी चाहिए। यह विवाह मुहूर्त के 11 नक्षत्रों में भी है। अच्छे नक्षत्र को अच्छी तिथि, वार और लग्न भी चाहिए। आज का आकाश पंचांग पेज पर देखें और तारीख शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से तय करें। पूरा फिल्टर शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर गाइड में समझाया है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र, मीन राशि और गुरु का संबंध

पूरा तारा मीन यानी गुरु की राशि में है, इसलिए यह नक्षत्र शनि का अनुशासन और गुरु की समझदारी मिलाता है। इसी कारण कई उत्तरा भाद्रपद चंद्रमा कम उम्र में भी पुरानी आत्मा जैसे दिखते हैं। जब गुरु मीन में गोचर करें या जन्म चंद्र पर दृष्टि डालें तो वृद्धि आसानी से आ सकती है। जब शनि चंद्र राशि से पिछली, चंद्र की अपनी या अगली राशि में गोचर करे, तो वह साढ़े साती का दौर धैर्य मांगता है। मीन राशि की साढ़े साती के लक्षण और समय मीन राशि साढ़े साती और साढ़े साती के संकेत में क्रम से हैं, और सहायक पक्ष के लिए गुरु गोचर मीन राशि देखें। संदेश डर का नहीं, संतुलन का है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के उपाय और सरल उपाय

इस नक्षत्र के उपाय तभी चलते हैं जब सरल हों। उपाय 1: शनिवार की शाम एक जलते दीपक के पास दस मिनट शांत बैठें और अपनी आदर की किसी किताब का एक पन्ना पढ़ें। हर शनिवार 19 हफ्ते करें। खर्च शून्य है और शनि-स्वामी मन को दिनचर्या से स्थिरता मिलती है। उपाय 2: गुरुवार सुबह केले या पीपल के पौधे को जल चढ़ाएं और तीन परिक्रमा करें, 11 गुरुवार, निःशुल्क। यह मीन के गुरु पक्ष को सहारा देता है। उपाय 3: शनिवार को किसी जरूरतमंद को साधारण भोजन दें, हफ्ते में एक बार 19 हफ्ते, दस से बीस रुपये में। इनमें से एक चुनें, सभी नहीं। पहले कदम के तौर पर महंगे रत्न न पहनें, कारण मीन लग्न के रत्न पेज में देखें। पितृ पक्ष के लिए चंद्र और पितृ दोष पढ़ें।

कैसे जानें कि आपका चंद्रमा उत्तरा भाद्रपद में है

आपको जन्म की सही तारीख, समय और स्थान चाहिए। इन्हें मुफ्त नक्षत्र कैलकुलेटर में डालें और चंद्रमा की पंक्ति देखें। अगर चंद्रमा मीन के 3°20' से 16°40' के बीच है तो आपका जन्म नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद है। जन्म समय में कुछ मिनट का फर्क भी चंद्रमा को इतना खिसका सकता है कि चरण, और कभी-कभी नक्षत्र, बदल जाए, इसलिए पहले समय पक्का करें, कुंडली जन्म समय की शुद्धता देखें। मुफ्त टूल और मानवीय पठन में फर्क फ्री कुंडली कितनी सही होती है में है। अपना लग्न जानने के लिए मेरी जन्म कुंडली पढ़ें।

उत्तरा भाद्रपद बनाम पूर्वा भाद्रपद और रेवती

तीनों अंतिम तारे पास-पास हैं और अक्सर आपस में उलझ जाते हैं। पूर्वा भाद्रपद के स्वामी गुरु हैं, यह कुंभ के 20°00' से मीन के 3°20' तक चलता है और ज्यादा तीखा, तीव्र स्वभाव रखता है। उत्तरा भाद्रपद के स्वामी शनि हैं, पूरी तरह मीन में, शांत और गहरा। रेवती के स्वामी बुध हैं, यह मीन के 16°40' से 30°00' तक है और कोमल, देखभाल करने वाला, मार्गदर्शक है। बृहत्संहिता दोनों भाद्रपद को एक श्लोक में लेती है पर दूसरे को अलग करती है।[7] नवजात पक्ष के लिए रेवती, पुष्य और अनुराधा देखें, जो शनि के बाकी दो तारे हैं। फर्क करने के लिए राशि नहीं, चंद्रमा का अंश देखें।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के बारे में आम भ्रांतियां

भ्रांति एक: शनि का तारा यानी कठिन जीवन। सच यह है कि शनि धीमे, टिकाऊ नतीजे देते हैं और इस तारे की शास्त्र में धर्म, संतान और शत्रु पर विजय के लिए प्रशंसा है।[1] भ्रांति दो: सर्प देवता खतरनाक है। अहिर्बुध्न्य गहरे जल के रक्षक हैं, श्राप नहीं।[2] भ्रांति तीन: इस चंद्रमा की शादी अच्छी नहीं होती। यह विवाह के 11 नक्षत्रों में है और मनुष्य गण कई साथियों से आसानी से मिलता है। भ्रांति चार: नीला रत्न पहनना ही होगा। रत्न शायद ही पहला उत्तर होता है, और सरल दिनचर्या अक्सर ज्यादा मदद करती है। हमेशा पूरी कुंडली पढ़ें। फ्री कुंडली भ्रम क्यों देती है देखें और शनि को शांत, निडर नजर से देखें।

आगे पढ़ने के लिए पड़ोसी नक्षत्र

अगर यह पेज पसंद आया, तो हमारे नक्षत्र क्लस्टर के पास के तारे पढ़ें। शुरुआत रोहिणी नक्षत्र से करें, जो दूसरा ध्रुव तारा है और शनि की शांति के सामने चंद्र-स्वामी विपरीत रंग देता है। फिर बाकी उत्तरा तारों के नवजात पेज देखें, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा, जो ध्रुव समूह साझा करते हैं। शनि के बाकी तारे पुष्य और अनुराधा हैं। पूरी थ्योरी के लिए नक्षत्र गाइड और चंद्र नक्षत्र और मैनिफेस्टेशन लेख पर लौटें।

त्रिकाल वाणी के साथ अपनी उत्तरा भाद्रपद कुंडली पढ़ें

नक्षत्र एक स्वाद बताता है, पर आपकी कुंडली पूरा तंत्र है। अगर आपका चंद्रमा उत्तरा भाद्रपद में है, तो अगला कदम लग्न, चंद्र का भाव, चल रही दशा और सातवां-दसवां भाव जांचना है। त्रिकाल संदेश फॉर्म पर मुफ्त रीडिंग से शुरू करें और जन्म कुंडली कैलकुलेटर से मिलाएं। दिल्ली एनसीआर में मानवीय रीडिंग चाहिए तो दिल्ली में ज्योतिषी या कम्पैटिबिलिटी सर्विस देखें। हर हफ्ते स्लॉट सीमित हैं, इसलिए टाइमिंग मायने रखे तो जल्दी बुक करें। मुख्य वैदिक वास्तुकार रोहित गुप्ता की हर रीडिंग स्विस एफेमेरिस की सटीकता और शास्त्रीय पाराशरी नियमों पर बनी है।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

नक्षत्र
सिडेरियल राशिचक्र के 27 बराबर 13°20' विभागों में से एक, जो किसी तारा-समूह के नाम पर है और जिसमें किसी समय चंद्रमा स्थित होता है।
उत्तरा भाद्रपद
26वां नक्षत्र, जो पूरी तरह मीन राशि में है, जिसके स्वामी शनि और अधिदेवता अहिर्बुध्न्य हैं।
जन्म नक्षत्र
जन्म के क्षण में चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो, जो शुरुआती विंशोत्तरी दशा तय करता है।
विंशोत्तरी दशा
120 वर्ष की ग्रह-काल प्रणाली, जिसका आरंभिक स्वामी जन्म के समय चंद्रमा के नक्षत्र से तय होता है।
ध्रुव नक्षत्र
स्थिर तारा, जैसे रोहिणी और तीनों उत्तरा, जो बीज-वपन, नींव और अभिषेक जैसे टिकाऊ कार्यों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।
नवांश
नौवां विभाजन चार्ट, D9, जिसमें हर नक्षत्र चरण एक राशि में पड़ता है और ग्रह की गहरी गुणवत्ता दिखाता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑बृहत्संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    वक्ता सुखी प्रजावान् जितशत्रुः धार्मिको द्वितीयासु । सम्पूर्णांगः सुभगः शूरः शुचिः अर्थवान् पौष्णे ।
    — बृहत्संहिता, अध्याय 100 — नक्षत्र-जातक अध्याय · श्लोक 14 · sanskritdocuments

    दूसरे भाद्रपद में जन्मा जातक वक्ता, सुखी, संतानवान, धार्मिक और शत्रुओं को जीतने वाला बताया गया है।

    Describes the person born under the second Bhadrapada as eloquent, happy, blessed with children, religious and a conqueror of enemies.

  2. [2]↑बृहत्संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    शक्रो निरृतिः तोयं विश्वे ब्रह्मा हरिः वसुः वरुणः । अजपादोऽहिर्बुध्न्यः पूषा चेतीश्वरा भानाम् ।
    — बृहत्संहिता, अध्याय 97 — नक्षत्र-कर्म-गुण अध्याय · श्लोक 5 · sanskritdocuments

    अधिपति देवताओं की सूची को आगे बढ़ाता है और अंतिम तीन नक्षत्रों के लिए अजपाद, अहिर्बुध्न्य और पूषा का नाम देता है।

    Continues the list of presiding deities, naming Ajapada, Ahirbudhnya and Pusha for the last three nakshatras.

  3. [3]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    नासत्यान्तकमवह्निधातृशशभृद्रुद्रादितीज्योरगा ऋक्षेशाः पितरो भगोऽर्यमरवित्वष्ट्राशुगाश्च क्रमात् । शक्राग्नी खलु मित्रशक्रनिर्ऋतिश्रोतोयपेशास्तथा गोविन्दो वसुतोयपाजचरणाहुर्बुध्यपूषाभिधाः ॥ १ ॥
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 2 — नक्षत्र प्रकरण · श्लोक 1 · github-sanskrittexts

    नक्षत्र-देवताओं का क्रम देता है, जिसके अंत में अहिर्बुध्न्य और पूषा आते हैं।

    Gives the nakshatra deities in sequence, ending with the serpent of the deep (Ahirbudhnya) and Pusha.

  4. [4]↑बृहत्संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    त्रीणि उत्तराणि तेभ्यो रोहिण्यश्च ध्रुवाणि तैः कुर्यात् । अभिषेकशान्तितरुनगरधर्मबीजध्रुवारंभान् ।
    — बृहत्संहिता, अध्याय 97 — नक्षत्र-कर्म-गुण अध्याय · श्लोक 6 · sanskritdocuments

    तीनों उत्तरा और रोहिणी ध्रुव (स्थिर) नक्षत्र हैं, जो अभिषेक, शांति-कर्म, वृक्षारोपण, नगर-स्थापना, बीज-वपन और स्थायी आरंभ के लिए लिए जाते हैं।

    The three Uttara stars and Rohini are fixed (dhruva) and are used for consecration, pacification rites, planting trees, founding a settlement, sowing seed and other lasting beginnings.

  5. [5]↑मुहूर्त चिंतामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    उत्तरात्रयरोहिण्यो भास्करश्च ध्रुवं स्थिरम् । तत्र स्थिरं बीजगेहशांत्यारामादि सिद्धये ॥ २ ॥
    — मुहूर्त चिंतामणि, अध्याय 2 — नक्षत्र प्रकरण · श्लोक 2 · github-sanskrittexts

    तीनों उत्तरा, रोहिणी और रविवार ध्रुव (स्थिर) हैं, जो बीज-वपन, गृह-निर्माण, शांति-कर्म और उद्यान जैसे कार्यों में सिद्धि देते हैं।

    The three Uttara stars, Rohini and Sunday are dhruva (fixed) and bring success to sowing, house-building, pacification rites and gardens.

  6. [6]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    कृत्तिकातः समारभ्य त्रिरावृत्य दशाधिपाः । आचंकुरागुशबुकेशुपूर्वा विहगाः क्रमात्।ह्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46 — दशा अध्याय · श्लोक 12 · sanskritdocuments

    कृत्तिका से आरंभ कर विंशोत्तरी दशा-स्वामी सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र के क्रम में 27 नक्षत्रों पर तीन बार दोहराए जाते हैं।

    Starting from Krittika, the Vimshottari dasha lords run Sun, Moon, Mars, Rahu, Jupiter, Saturn, Mercury, Ketu, Venus and repeat three times over the 27 stars.

  7. [7]↑बृहत्संहिताबृहत्संहिता · Varahamihira
    स्फुटवाग् व्यसनी रिपुहा साहसिकः शतभिषक्सु दुर्ग्राह्यः । भद्रपदासूद्विग्नः स्त्रीजितधनपटुः अदाता च ।
    — बृहत्संहिता, अध्याय 100 — नक्षत्र-जातक अध्याय · श्लोक 13 · sanskritdocuments

    दोनों भाद्रपद नक्षत्रों को साथ लेकर चिंता, स्त्रियों के प्रभाव में आना, धन-कुशलता और दान में संकोच जैसे लक्षण बताता है।

    For the two Bhadrapada stars taken together, lists traits of anxiety, yielding to women, skill with money and reluctance to give.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र क्या है और इसका स्वामी कौन है?

उत्तरा भाद्रपद 27 नक्षत्रों में 26वां है, जो सिडेरियल मीन के 3°20' से 16°40' तक है। विंशोत्तरी स्वामी शनि और देवता अहिर्बुध्न्य हैं। अपना नक्षत्र [मुफ्त नक्षत्र कैलकुलेटर](/calculators/free-nakshatra-calculator) से जानें।

उत्तरा भाद्रपद में जन्मे लोगों के मुख्य गुण क्या हैं?

बृहत्संहिता उन्हें वक्ता, धार्मिक, संतानवान और शत्रुजयी बताती है। आज की भाषा में वे शांत, गहरे, धैर्यवान और निष्ठावान होते हैं, पर भावनाएं रोकने की आदत रख सकते हैं।

उत्तरा भाद्रपद में जन्मे बच्चे के लिए कौन से अक्षर शुभ हैं?

पारंपरिक अक्षर दू, थ, झ और त्र हैं, हर चरण के लिए एक। सही जन्म समय से चरण की पुष्टि [नाम अक्षर कैलकुलेटर](/calculators/free-baby-name-by-nakshatra) में करें।

क्या उत्तरा भाद्रपद विवाह के लिए अच्छा है?

हां, यह विवाह मुहूर्त के 11 नक्षत्रों में है और इसका गण मनुष्य, योनि गाय और नाड़ी मध्य है। पूरा मिलान [कुंडली मिलान टूल](/kundali-milan) से करें, क्योंकि सप्तम भाव भी उतना ही जरूरी है।

उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र पर कौन-सा करियर सूट करता है?

शिक्षण, काउंसलिंग, कानून, शोध, लेखन, लेखा, चिकित्सा, समाज-सेवा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन इस धैर्यवान, गहरे स्वभाव को सूट करते हैं। दशम भाव [जन्म कुंडली](/calculators/free-janam-kundali-calculator) में जांचें।

उत्तरा भाद्रपद चंद्रमा किस दशा से शुरू होता है?

यह शनि महादशा से शुरू होता है, जिसकी पूरी अवधि 19 साल है। जन्म पर बची अवधि चंद्रमा के सटीक अंश पर निर्भर है। [दशा कैलकुलेटर](/calculators/free-dasha-calculator) से निकालें।

क्या उत्तरा भाद्रपद ध्रुव या स्थिर नक्षत्र है?

हां। बृहत्संहिता और मुहूर्त चिंतामणि तीनों उत्तरा और रोहिणी को स्थिर मानती हैं, जो नींव, रोपण और टिकाऊ शुरुआत के लिए अच्छे हैं। [शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर](/calculators/free-shubh-muhurat-calculator) देखें।

उत्तरा भाद्रपद का सबसे सरल उपाय क्या है?

19 हफ्ते हर शनिवार शाम को जलते दीपक के पास दस मिनट शांत बैठें। यह निःशुल्क है और शनि-स्वामी मन को सूट करता है। महंगे रत्न पहला कदम नहीं हैं।

क्या उत्तरा भाद्रपद चंद्रमा पर साढ़े साती अलग असर करती है?

साढ़े साती चंद्र राशि पर शनि के गोचर से बनती है, जो यहां मीन है। नक्षत्र शनि का धैर्यवान रंग जोड़ता है। समय और उपाय के लिए [मीन राशि साढ़े साती](/blog/meen-rashi-sade-sati-hindi) पढ़ें।

उत्तरा भाद्रपद और पूर्वा भाद्रपद में क्या फर्क है?

पूर्वा भाद्रपद के स्वामी गुरु हैं, यह तीव्र है और कुंभ से मीन में फैला है। उत्तरा भाद्रपद के स्वामी शनि हैं, शांत, गहरा और पूरी तरह मीन में। दोनों को अलग करने के लिए चंद्रमा का सटीक अंश देखें।

यह भी देखें · See also

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