Vedic Astrology

वृषभ राशि का जीवनसाथी कैसा होगा: संकेत

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect14 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

वृषभ राशि के जातक का सातवाँ भाव वृश्चिक राशि है, जिसके स्वामी मंगल हैं। इसलिए जीवनसाथी में तीव्रता, दृढ़ता और गहरी भावनात्मक पकड़ के संकेत मिलते हैं। अंतिम निर्णय सप्तमेश मंगल की स्थिति, शुक्र और दारकारक से होता है, केवल राशि से नहीं। यह प्रवृत्ति है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

Deep Dive Analysis

वृषभ राशि का जीवनसाथी: सीधा उत्तर

वृषभ राशि वालों के जीवनसाथी का संकेत सातवें भाव से मिलता है, जो वृषभ से गिनने पर वृश्चिक राशि बनता है। वृश्चिक के स्वामी मंगल हैं, इसलिए साथी में तीव्र भावनाएँ, दृढ़ता और अपनी बात पर टिके रहने की प्रवृत्ति देखी जाती है। पर यह केवल पहला संकेत है। असली तस्वीर सप्तमेश मंगल की स्थिति, शुक्र की शक्ति और दारकारक ग्रह से बनती है। विवाह-विश्लेषण का पूरा ढाँचा समझने के लिए 36 गुण मिलान गाइड पढ़ें।

वृषभ से सातवाँ भाव: वृश्चिक राशि और मंगल

पराशर परंपरा में जीवनसाथी का भाव सातवाँ है। वृषभ को पहला मानें तो गिनती में सातवीं राशि वृश्चिक आती है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र वृश्चिक को रोमों से भरी, अत्यंत तीक्ष्ण और मंगल के स्वामित्व वाली राशि बताता है[2]। इसी वर्णन से परंपरा साथी के स्वभाव में गहराई, तेज़ी और तीव्र निष्ठा का संकेत निकालती है। यह कोई तयशुदा भविष्यवाणी नहीं, एक शुरुआती सूत्र है। अपनी वृषभ राशि पक्की करने के लिए राशि कैलकुलेटर देखें।

चंद्र राशि वृषभ हो या लग्न वृषभ: कौन सा देखें

ज्यादातर लोग राशि का अर्थ चंद्र राशि से लेते हैं, यानी जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। वृषभ चंद्र राशि वालों के लिए चंद्र से सातवाँ भाव वृश्चिक बनता है। जिनका लग्न वृषभ है, उनके लिए लग्न से सातवाँ भाव वृश्चिक है। दोनों में गिनती वही रहती है, पर फल की गहराई लग्न-कुंडली से अधिक सटीक निकलती है। अपना लग्न जानने के लिए लग्न कैलकुलेटर और पूरी कुंडली के लिए जन्म कुंडली कैलकुलेटर का उपयोग करें।

वृषभ राशि का स्वभाव: शुक्र के प्रभाव में

वृषभ का स्वामी शुक्र है। शास्त्र में वृषभ श्वेत, चतुष्पाद, रात्रि में बलवान, भूमि-तत्व की और वणिक जाति की राशि कही गई है[1]। इसी से वृषभ में स्थिरता, भौतिक सुरक्षा की चाह, सौंदर्य-प्रेम और धीमे पर पक्के निर्णय का स्वभाव माना जाता है। इसलिए वृषभ जातक जीवनसाथी में भी भरोसा, सुख-सुविधा और टिकाऊ संबंध खोजता है। अपने संबंध-स्वभाव को समझने के लिए रिश्तों का मार्गदर्शन पृष्ठ भी उपयोगी है।

सप्तम भाव और सप्तमेश का अर्थ

सप्तम भाव विवाह, साझेदारी और जीवनसाथी का भाव है। इस भाव का स्वामी सप्तमेश कहलाता है। शास्त्र कहता है कि सप्तमेश अपनी राशि या उच्च राशि में हो तो जीवनसाथी का पूर्ण सुख बताया गया है[3]। वृषभ के लिए सप्तमेश मंगल हैं, इसलिए मंगल की राशि, भाव और दृष्टि पर सबसे अधिक ध्यान जाता है। यही कारण है कि वृषभ के विवाह में मंगल को समझना ज़रूरी है। विवाह-योगों का सार कुंडली में विवाह योग में मिलेगा।

वृषभ राशि के जीवनसाथी का संभावित स्वभाव

सप्तम भाव में वृश्चिक होने से जीवनसाथी में संकेत मिलते हैं गहरी निष्ठा, प्रबल इच्छाशक्ति, निजता को महत्व देने की आदत और भावनाओं की तीव्रता के। ऐसा साथी बात को आसानी से भूलता नहीं और रिश्ते में पूरी ईमानदारी चाहता है। वही गुण अत्यधिक होने पर ज़िद या अधिकार-भाव में बदल सकते हैं। इसलिए संवाद और सम्मान की आदत ज़रूरी है। यह प्रवृत्ति-आधारित वर्णन है और हर कुंडली में रूप अलग होता है। अपने दांपत्य संकेत देखने के लिए मुफ़्त कुंडली मिलान खोलें।

वृषभ जातक जीवनसाथी से क्या चाहता है

शुक्र के प्रभाव में वृषभ जातक स्थिरता, घर की शांति, अच्छा भोजन, सुंदर वातावरण और आर्थिक सुरक्षा को महत्व देता है। वह अचानक बदलाव से घबराता है और रिश्ते में भी भरोसेमंद ढर्रा पसंद करता है। साथी से उसे सम्मान, समय और साझा भविष्य की स्पष्टता चाहिए। जब साथी बार-बार योजनाएँ बदले, तो वृषभ भीतर से बेचैन हो जाता है। दोनों पक्षों को शुरू में ही अपनी अपेक्षाएँ खुलकर कह लेनी चाहिए। मन और रिश्तों के संबंध पर मानसिक स्वास्थ्य और वैदिक ज्योतिष भी पढ़ सकते हैं।

सप्तमेश मंगल बलवान हो तो क्या संकेत मिलते हैं

शास्त्र के अनुसार सप्तमेश शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो और बलवान हो, तो जातक धनी, सम्मानित और सुख-सौभाग्य से युक्त होता है[4]। वृषभ के लिए इसका अर्थ है कि मंगल अपनी राशि, उच्च राशि, केंद्र या त्रिकोण में शुभ दृष्टि पाकर स्थित हो तो साथी का सहयोग, साहस और परिवार को सँभालने की क्षमता बढ़ती है। फिर भी इसे एक भाव या एक योग से पक्का न मानें। सारे संकेत मिलाकर पढ़ें। संबंधित योग समझने के लिए विवाह योग और संयोजन पढ़ें।

सप्तमेश मंगल कमज़ोर या पीड़ित हो तो

यदि मंगल नीच राशि में हो, पाप-ग्रहों से पीड़ित हो या छठे, आठवें, बारहवें भाव में चला जाए, तो परंपरा जीवनसाथी के साथ तालमेल में मेहनत, कभी स्वास्थ्य की चिंता और कभी विवाह में देरी का संकेत देती है। यह डराने की बात नहीं, सावधानी की बात है। सही निदान जन्म-विवरण से ही संभव है। ऐसे में दशा, गोचर और नवांश साथ में देखे जाते हैं। देरी का कारण समझने के लिए सातवाँ भाव कमज़ोर होने के लक्षण देख सकते हैं।

दारकारक क्या है और कैसे निकलता है

जैमिनी और पराशर दोनों परंपराओं में चर कारकों का उपयोग होता है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र के कारकाध्याय में कहा गया है कि ज्ञातिकारक से भी कम अंश वाला ग्रह दारकारक यानी जीवनसाथी का कारक जाना जाए[5]। इसका अर्थ है कि हर कुंडली में जीवनसाथी का कारक ग्रह अलग हो सकता है। वृषभ राशि वालों में भी वह सूर्य से शनि तक कोई भी हो सकता है। इसलिए केवल राशि से साथी का पूरा चित्र नहीं बनता। अपने ग्रहों का बल जानने के लिए कुंडली बल कैलकुलेटर देखें।

शुक्र की भूमिका: वृषभ के स्वामी और प्रेम के कारक

शुक्र वृषभ का स्वामी है और परंपरा में प्रेम, सौंदर्य और दांपत्य सुख का कारक भी माना जाता है। इसलिए वृषभ जातक की कुंडली में शुक्र की स्थिति दो तरह से महत्वपूर्ण है। एक, उसके अपने स्वभाव के लिए। दो, संबंध-सुख की गुणवत्ता के लिए। शुक्र उच्च, स्वराशि या शुभ दृष्ट हो तो सहज प्रेम का संकेत मिलता है, जबकि पीड़ित शुक्र में अपेक्षाएँ और असंतोष बढ़ सकते हैं। शुक्र की दशा का असर शुक्र अंतर्दशा और विवाह योग में पढ़ें।

वृषभ लग्न में लग्नेश शुक्र सातवें भाव में हो तो

वृषभ लग्न के लिए लग्नेश शुक्र है और सप्तम भाव वृश्चिक है। शास्त्र कहता है कि लग्नेश बलवान होकर सप्तम भाव में हो तो जीवनसाथी सद्गुणों से युक्त और परिवार को बढ़ाने वाला बताया गया है[6]। इसका अर्थ वृषभ लग्न में तब निकलता है जब शुक्र बलवान स्थिति में सातवें भाव में पड़े। शुक्र वृश्चिक में मंगल की राशि में होने से मिश्रित फल भी बनते हैं, इसलिए बल देखना अनिवार्य है। लग्न के बल के लिए लग्न बल कैलकुलेटर उपयोगी है।

मंगल दोष और वृषभ राशि

क्योंकि सप्तमेश मंगल हैं, वृषभ वालों में मंगल दोष का प्रश्न बार-बार उठता है। मंगल का लग्न, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में होना ही मांगलिक स्थिति कहलाता है। पर यह भी कई परिहारों से बदल जाती है। सच्ची स्थिति जाँचने के लिए मुफ़्त मांगलिक दोष कैलकुलेटर देखें और भय से बचने के लिए मांगलिक के 10 मिथक पढ़ें। सातवें भाव में मंगल का विस्तृत फल सातवें भाव में मंगल दोष में है।

वृषभ और वृश्चिक की जोड़ी: आमने-सामने की राशियाँ

वृषभ और वृश्चिक राशियाँ ठीक सातवें अक्ष पर आमने-सामने हैं। इसलिए पारंपरिक रूप से इस जोड़ी में आकर्षण और संघर्ष दोनों का तनाव माना जाता है, क्योंकि वृषभ स्थिरता चाहता है और वृश्चिक गहराई और नियंत्रण। यह जोड़ी सफल भी हो सकती है यदि दोनों संवाद सीख लें। विस्तृत वर्णन के लिए वृषभ-वृश्चिक अनुकूलता और वृश्चिक-वृषभ अनुकूलता पृष्ठ देखें।

वृषभ की अन्य राशियों से अनुकूलता

केवल राशि-मिलान से पूरा निर्णय नहीं होता, पर यह एक उपयोगी शुरुआती संकेत है। वृषभ और कन्या में भूमि-तत्व की समानता से स्थिरता का मेल बनता है, जिसे वृषभ-कन्या में देखें। वृषभ और मकर का मेल वृषभ-मकर में मिलेगा। कर्क के साथ भावनात्मक जुड़ाव वृषभ-कर्क में है। तुला के साथ शुक्र का साझा स्वामित्व वृषभ-तुला में है। मीन के लिए वृषभ-मीन देखें।

अन्य संभावित जोड़ियाँ: मिथुन, सिंह, धनु, कुंभ और मेष

मिथुन की चंचलता वृषभ की स्थिरता से टकरा सकती है, जिसकी चर्चा वृषभ-मिथुन में है। सिंह और वृषभ दोनों अपनी जिद के लिए जाने जाते हैं, देखें वृषभ-सिंह। धनु के साथ स्वतंत्रता बनाम सुरक्षा का सवाल उठता है, जिसके लिए वृषभ-धनु पढ़ें। कुंभ और मेष के लिए वृषभ-कुंभ और वृषभ-मेष देखें। इन सबको केवल प्रवृत्ति मानें, नियम नहीं।

प्रेम विवाह या अरेंज मैरिज: कुंडली क्या कहती है

वृषभ जातक सुरक्षा पसंद करता है, इसलिए अक्सर परिवार की सहमति वाला विवाह उसे सहज लगता है। फिर भी पंचम, सप्तम और एकादश भावों के संबंध से प्रेम विवाह के योग बनते हैं, राशि से नहीं। अपनी स्थिति जानने के लिए प्रेम या अरेंज मैरिज कैलकुलेटर चलाएँ। प्रेम विवाह में कुंडली मिलान कैसे देखें, यह प्रेम विवाह और कुंडली मिलान में है। राशि केवल पृष्ठभूमि है।

वृषभ की शादी कब होगी: दशा का संकेत

विवाह का समय राशि से नहीं, दशा और गोचर से तय होता है। सप्तमेश मंगल की दशा, शुक्र की दशा और सप्तम भाव को देखने वाले ग्रहों की दशा में विवाह की संभावना अधिक बनती है। गुरु का गोचर भी सहायक माना जाता है। अपनी दशा जानने के लिए दशा कैलकुलेटर और सीधे समय के अनुमान के लिए शादी कब होगी कैलकुलेटर देखें। कारणों की व्याख्या कुंडली से विवाह का समय में है।

विवाह में देरी हो तो क्या समझें

विवाह में देरी हर बार दोष नहीं होती। कई बार करियर की स्थिरता, परिवार के निर्णय या ग्रहों की दशा समय को आगे बढ़ा देती है। परंपरा सातवें भाव, सप्तमेश, शुक्र और शनि के प्रभाव को देखती है। पितृ-संबंधी सूत्र भी चर्चा में रहते हैं, जिसकी जानकारी पितृ दोष और विवाह विलंब में है। जल्द शादी की बेचैनी में महँगे अनुष्ठान न कराएँ। सरल मार्ग के लिए चट मंगनी पट ब्याह के उपाय पढ़ें।

साढ़ेसाती का वृषभ राशि और विवाह पर असर

साढ़ेसाती में विवाह नहीं हो सकता, यह एक भ्रांति है। वृषभ राशि की साढ़ेसाती की तिथियाँ और प्रभाव की जानकारी वृषभ राशि साढ़ेसाती में दी गई है। विवाह, करियर और धन पर इसके सामान्य असर के लिए साढ़ेसाती और विवाह पढ़ें। अपनी स्थिति जाँचने के लिए साढ़ेसाती कैलकुलेटर चलाएँ। चरण और चंद्र की स्थिति के आधार पर ही कोई निष्कर्ष निकालें।

2027 में वृषभ राशि वालों के लिए संकेत

नए वर्ष की सामान्य दिशा समझने के लिए वृषभ राशि का वार्षिक मार्गदर्शन उपयोगी है, जिसे वृषभ राशि 2027 राशिफल गाइड में पढ़ा जा सकता है। सभी राशियों के प्रेम, करियर और स्वास्थ्य की झलक 2027 राशिफल गाइड में है। राशिफल सामान्य होता है, इसलिए विवाह के निर्णय अपनी कुंडली और दशा देखकर ही लें। गोचर और दशा का मेल अधिक भरोसेमंद संकेत देता है।

वृषभ जातक के लिए कुंडली मिलान में क्या देखें

कुंडली मिलान में केवल गुण-संख्या नहीं, नाड़ी, भकूट, मंगल की स्थिति, सप्तमेश का बल और दशा की अनुकूलता भी देखी जाती है। मूल अवधारणा के लिए 36 गुण मिलान समझें पढ़ें। जन्म तिथि से मिलान की सीमाएँ जन्म तारीख से कुंडली मिलान में और नाम से मिलान की सीमाएँ नाम से कुंडली मिलान में बताई गई हैं। पूरा मिलान चाहिए तो कुंडली मिलान पृष्ठ पर दोनों जन्म-विवरण दें।

रत्न और शुक्र: जल्दबाज़ी न करें

वृषभ लग्न के लिए शुक्र का रत्न चर्चा में रहता है, पर रत्न तभी सोच-समझकर पहना जाता है जब कुंडली में शुक्र की स्थिति और शुभता जाँच ली जाए। बिना जाँच पहना रत्न लाभ के बजाय असंतुलन भी ला सकता है। विस्तार के लिए वृषभ लग्न के रत्न पढ़ें। आपके लिए उपयुक्तता जाँचने को हीरा पहनें या नहीं और रत्न कैलकुलेटर देखें।

दांपत्य सुख के सरल और भय-रहित उपाय

उपाय का उद्देश्य मन को स्थिर करना और संबंध में सद्भाव बढ़ाना है। शुक्रवार को सुगंध और स्वच्छता का ध्यान, साथी के साथ साझा भोजन, वाणी में कोमलता और मंगलवार को संयम सरल अभ्यास हैं। मंगल की तीव्रता के लिए क्रोध नियंत्रण और व्यायाम परंपरा में सहायक माने गए हैं। कोई महँगा अनुष्ठान आवश्यक नहीं है। अपनी कुंडली के लिए उपयुक्त उपाय उपाय कैलकुलेटर से जाँचें। गहरे कर्म-संदर्भ के लिए कार्मिक पृष्ठभूमि पठन देखें।

विवाह के शुभ मुहूर्त: आगे की तारीखें

यदि आपका विवाह तय हो चुका है, तो तिथि के लिए पंचांग और कुंडली दोनों देखे जाते हैं। निकट की तिथियाँ नवंबर 2026 विवाह मुहूर्त, दिसंबर 2026 विवाह मुहूर्त और जनवरी 2027 विवाह मुहूर्त में हैं। पूरे वर्ष का क्रम विवाह मुहूर्त 2027 में मिलेगा। अपने शहर के अनुसार शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से जाँच करें।

वृषभ राशि पर प्रचलित भ्रम

पहला भ्रम है कि वृषभ का जीवनसाथी हमेशा झगड़ालू होगा। मंगल का स्वामित्व तीव्रता देता है, झगड़ा तय नहीं करता। दूसरा भ्रम है कि वृश्चिक लग्न या राशि का साथी ही शुभ है। राशि अकेले कुछ तय नहीं करती। तीसरा भ्रम है कि मांगलिक होने से विवाह टूटता है। इस पर विस्तार से क्या मांगलिक विवाह खतरनाक है में तथ्य दिए गए हैं। ग्रहों का सही बल देखने के लिए कमज़ोर ग्रह खोजक का उपयोग करें।

Trikaal Vaani विवाह-संकेत कैसे पढ़ता है

हम राशि से शुरू करते हैं, पर निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र, दारकारक, दशा और गोचर साथ में पढ़ते हैं। शास्त्र का हवाला केवल तभी देते हैं जब श्लोक हमारे पुस्तकालय में सत्यापित हो। विवाह और संबंधों के अन्य लेख विवाह विषय में हैं, और हमारे संस्थापक रोहित गुप्ता की कार्यपद्धति संस्थापक परिचय में पढ़ी जा सकती है। हम भय नहीं, स्पष्टता देने का प्रयास करते हैं।

वृषभ महिला और वृषभ पुरुष: पति या पत्नी के संकेत में अंतर

पुरुष की कुंडली में पत्नी का कारक आमतौर पर शुक्र माना जाता है, जबकि स्त्री की कुंडली में पति का कारक परंपरा में गुरु के रूप में देखा जाता है। इसलिए वृषभ महिला के लिए सप्तम भाव के साथ गुरु की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो जाती है। वृषभ पुरुष के लिए शुक्र की शक्ति अधिक बोलती है। दोनों के लिए सप्तमेश मंगल मूल सूत्र है। समान राशि के जोड़े के लिए वृषभ-वृषभ अनुकूलता भी देखी जा सकती है। यह परंपरा-आधारित व्यवस्था है और अंतिम आकलन कुंडली से होता है।

विवाह तय करने से पहले पूछे जाने वाले व्यावहारिक प्रश्न

ज्योतिषीय संकेतों के साथ कुछ व्यावहारिक प्रश्न भी ज़रूरी हैं। भावी साथी के साथ पैसे, परिवार की भूमिका, करियर की प्राथमिकताएँ, रहने की जगह और संतान की सोच पर खुलकर बात करें। वृषभ जातक जल्दबाज़ी पसंद नहीं करता, इसलिए पर्याप्त समय लेकर फैसला लेना उसके स्वभाव के अनुकूल है। कुंडली मार्गदर्शन देती है, पर संवाद ही संबंध की नींव बनाता है। अपनी तैयारी के लिए विवाह विषय के लेख पढ़ें और ज़रूरत हो तो जानकार से परामर्श लें।

विवाह के बाद मंगल और शुक्र का संतुलन कैसे साधें

वृषभ का जीवन शुक्र की शांति और सप्तम की मंगल-ऊर्जा के बीच चलता है। इसलिए दांपत्य में दो बातें काम आती हैं। पहली, क्रोध के क्षण में निर्णय टालना और शांत होकर बात करना, जो मंगल को संतुलित करता है। दूसरी, साथ में समय, भोजन, सुंदरता और छोटे उपहारों से शुक्र को पोषण देना। इन्हीं छोटी आदतों से अधिकांश तनाव घटते हैं। यदि बार-बार टकराव हो तो कमज़ोर ग्रह खोजक से देखें कि कौन सा ग्रह कमज़ोर है।

सारांश: वृषभ राशि के जीवनसाथी के लिए याद रखने योग्य बातें

वृषभ का सातवाँ भाव वृश्चिक है और उसके स्वामी मंगल हैं। इसलिए साथी में तीव्रता, निष्ठा और दृढ़ता के संकेत मिलते हैं। असली निर्णय मंगल की स्थिति, शुक्र की शक्ति और दारकारक से होता है। दशा से विवाह का समय देखें और मंगल दोष के भय में न आएँ। जो जानकारी राशि से मिलती है वह प्रवृत्ति है, भविष्यवाणी नहीं। अपनी कुंडली पर आधारित स्पष्ट उत्तर के लिए कुंडली मिलान खोलें और विवाह योगों के लिए कुंडली में विवाह योग पढ़ें।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

सप्तम भाव
कुंडली का सातवाँ घर, जो विवाह, साझेदारी और जीवनसाथी का भाव माना जाता है।
सप्तमेश
सातवें भाव का स्वामी ग्रह, जिसकी स्थिति से दांपत्य के संकेत पढ़े जाते हैं।
दारकारक
चर कारकों में जीवनसाथी का प्रतिनिधि ग्रह, जो कम अंश के आधार पर निकाला जाता है।
चंद्र राशि
जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में स्थित था, वही व्यक्ति की राशि मानी जाती है।
मांगलिक
वह स्थिति जिसमें मंगल लग्न, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है।
दशा
ग्रहों की समय-अवधि, जिससे जीवन की घटनाओं का समय आँका जाता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    श्वेतः शुक्राधिपो दीर्घश्चतुष्पाच्छर्वरीबली । याम्येट् ग्राम्यो वणिग्भूमिरजः पृष्ठोदयो वृषः
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 8

    वृषभ राशि श्वेत वर्ण, शुक्र के स्वामित्व वाली, चतुष्पाद, रात्रि में बलवान, दक्षिण दिशा की, भूमि-तत्व की और वणिक जाति की कही गई है।

    Taurus is described as white, ruled by Venus, long, four-footed, strong at night, southern, earthy and of the merchant class.

  2. [2]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    रोमस्वाढ्योऽतितीक्ष्णाग्रो वृश्चिकश्च कुजाधिपः । पृष्ठोदयी त्वथ धनुर्गुरुस्वामी च सात्त्विकः
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 17

    वृश्चिक राशि रोमों से भरी, अत्यंत तीक्ष्ण और मंगल के स्वामित्व वाली कही गई है।

    Scorpio is described as hairy-bodied, extremely sharp and ruled by Mars.

  3. [3]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    जायाभावफलं वक्ष्ये शृणु त्वं द्विजसत्तम । जायाधिपे स्वभे स्वोच्चे स्त्रीसुखं पूर्णमादिशेत्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 1

    सप्तमेश अपनी राशि या उच्च राशि में हो तो जीवनसाथी का पूर्ण सुख बताया गया है।

    If the 7th lord is in its own sign or exaltation, full happiness from the spouse is indicated.

  4. [4]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    जायाधीशः शुभैर्युक्तो दृष्टो वा बलसंयुतः । तदा जातो धनी मानी सुखसौभाग्यसंयुतः
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 4

    सप्तमेश शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो और बलवान हो तो जातक धनी, सम्मानित और सुख-सौभाग्य से युक्त होता है।

    If the 7th lord is joined or aspected by benefics and is strong, the native becomes wealthy, respected and blessed with happiness and good fortune.

  5. [5]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    स दारकारको ज्ञेयो निर्विशंके द्विजोत्तम । चराख्यकारला एते ब्राह्मणा कथिताः पुरा
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 32 — कारकाध्याय · श्लोक 15

    पिछले श्लोक में बताए ज्ञातिकारक से भी कम अंश वाला ग्रह निःसंदेह दारकारक यानी जीवनसाथी का कारक जानना चाहिए।

    The planet with the fewest degrees, coming after the jnati karaka named in the preceding verse, is to be known without doubt as the darakaraka, the significator of the spouse.

  6. [6]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    लग्नेशो बलसंयुक्तः कलत्रस्थानसंयुतः । तद्।ह्भार्या सद्।ह्गुणोपेता पुत्रपौत्रप्रवर्धिनी
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 15

    लग्नेश बलवान होकर सप्तम भाव में हो तो जीवनसाथी सद्गुणों से युक्त और परिवार को बढ़ाने वाला बताया गया है।

    If the lagna lord is strong and placed in the 7th house, the spouse is endowed with good qualities and helps the family grow.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

वृषभ राशि का जीवनसाथी कैसा होता है?

वृषभ का सातवाँ भाव वृश्चिक है और उसके स्वामी मंगल हैं। इसलिए जीवनसाथी में निष्ठा, तीव्र भावना और दृढ़ता के संकेत मिलते हैं। यह प्रवृत्ति है, पक्की भविष्यवाणी नहीं।

वृषभ राशि वालों का सप्तमेश कौन सा ग्रह है?

वृषभ राशि या लग्न के लिए सप्तम भाव वृश्चिक बनता है, जिसके स्वामी मंगल हैं। इसलिए मंगल ही सप्तमेश कहलाते हैं।

क्या वृषभ राशि वाले मांगलिक होते हैं?

नहीं। राशि से कोई मांगलिक नहीं होता। मंगल का लग्न, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में होना मांगलिक स्थिति बनाता है, जो कुंडली से जाँची जाती है।

वृषभ राशि की शादी कब होती है?

समय राशि से नहीं, दशा और गोचर से तय होता है। मंगल या शुक्र की दशा और सप्तम भाव से संबंध रखने वाले ग्रहों की दशा में संभावना अधिक मानी जाती है।

वृषभ राशि के लिए सबसे अच्छा जीवनसाथी किस राशि का होता है?

परंपरा में कन्या, मकर, कर्क, मीन और तुला से सहज मेल की चर्चा होती है। पर अंतिम निर्णय पूरी कुंडली मिलान से होना चाहिए, केवल राशि से नहीं।

दारकारक ग्रह क्या होता है?

बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अनुसार ज्ञातिकारक से भी कम अंश वाला ग्रह दारकारक यानी जीवनसाथी का कारक होता है। यह हर कुंडली में अलग हो सकता है।

क्या वृषभ और वृश्चिक की शादी सफल होती है?

दोनों आमने-सामने की राशियाँ हैं, इसलिए आकर्षण और टकराव दोनों संभव हैं। संवाद और सम्मान हो तो यह जोड़ी सफल भी हो सकती है।

वृषभ राशि वालों को विवाह में देरी क्यों होती है?

देरी का कारण राशि नहीं, सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र या दशा का प्रभाव हो सकता है। परिवार और करियर की परिस्थितियाँ भी समय बदल देती हैं। देरी कोई निषेध नहीं है।

क्या वृषभ राशि का जीवनसाथी अमीर या सुंदर होता है?

ऐसे दावे राशि से नहीं किए जा सकते। शास्त्र के अनुसार सप्तमेश बलवान और शुभ-दृष्ट हो तो धन, सम्मान और सुख के संकेत मिलते हैं, पर यह पूरी कुंडली पर निर्भर है।

अपनी कुंडली से जीवनसाथी के संकेत कैसे जानें?

जन्म तिथि, समय और स्थान से कुंडली बनवाकर सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र और दशा देखें। इसके लिए कुंडली मिलान टूल का उपयोग कर सकते हैं।

यह भी देखें · See also

इस हब का मुख्य पेज36 गुण मिलान — कितने गुण होने चाहिए? पूरी गाइड

समूह: कुंडली मिलान समूह — नाम, गुण, नाड़ी और भकूट

श्रेणी: Vedic Astrology · marriage