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Shadi Kab Hogi? कुंडली से विवाह का समय

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect16 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

ज्योतिष में विवाह का समय दो चरणों में देखा जाता है। कुंडली का सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र और गुरु बताते हैं कि विवाह का साथ है या नहीं; चल रही विंशोत्तरी दशा-अंतर्दशा और गुरु-शनि का गोचर बताते हैं कि कब। नतीजा एक खिड़की होता है, तारीख़ नहीं। अपनी जाँच करें [मुफ़्त शादी कब होगी कैलकुलेटर](/calculators/free-shadi-kab-hogi-calculator) में।

Deep Dive Analysis

शादी कब होगी? सीधा और छोटा जवाब

ज्योतिष में विवाह का समय दो चरणों में देखा जाता है। पहले यह जाँचा जाता है कि कुंडली विवाह का साथ देती है या नहीं, इसके लिए सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र और गुरु देखे जाते हैं। फिर वह अवधि खोजी जाती है जब चल रही विंशोत्तरी दशा-अंतर्दशा इन्हीं ग्रहों से जुड़ी हो और गोचर में गुरु-शनि भी इन्हें छू रहे हों। नतीजा कुछ महीनों की एक खिड़की होता है, पक्की तारीख़ नहीं। Trikaal Vaani का मुफ़्त शादी कब होगी कैलकुलेटर आपके जन्म विवरण से यह खिड़की दिखाता है, और कुंडली में विवाह योग गाइड योग वाला पक्ष समझाती है।

कुंडली से विवाह का समय कैसे देखा जाता है

विवाह के समय को तीन चाबियों वाले ताले की तरह समझिए। पहली चाबी जन्म-कुंडली का वादा है: सप्तम भाव, उसका स्वामी और कारक ग्रह साझेदारी देने लायक हों। दूसरी चाबी दशा की घड़ी है, जो बताती है कि अभी जीवन में कौन-से ग्रह सक्रिय हैं। तीसरी चाबी गोचर है, यानी धीमे ग्रहों का संवेदनशील बिंदुओं पर चलना। तीनों मिलें तो घटना की संभावना बनती है; केवल एक मिले तो अक्सर बात विचार तक ही रहती है। आगे का पूरा क्रम इसी पर चलता है, इसलिए अपनी जन्म कुंडली पास रखें और शब्द नए हों तो कुंडली कैसे काम करती है पढ़ें।

शादी की उम्र 27-30 का भ्रम: कोई एक उम्र तय नहीं होती

यह मान्यता कि विवाह 27 से 30 की उम्र में होता है, समाज की आदत है, ज्योतिष का नियम नहीं। बृहत् पराशर होरा शास्त्र विवाह की उम्र अलग-अलग योगों से जोड़ता है और वह बहुत फैली हुई है: शुक्र और सप्तमेश के एक योग में पाँचवाँ या नवाँ वर्ष,[3] शुक्र द्वितीय भाव में और उस भाव का स्वामी मंगल के साथ हो तो बाईसवाँ या सत्ताईसवाँ वर्ष,[4] शुक्र और भाग्येश दोनों राहु के साथ हों तो इकतीसवाँ या तैंतीसवाँ वर्ष,[6] और एक अन्य योग में तीसवाँ या सत्ताईसवाँ वर्ष।[5] यानी 27 से 30 कई योगों में से सिर्फ़ एक में आता है। आपकी उम्र आपकी कुंडली से तय होती है। देखें मेरी शादी किस उम्र में होगी।

पहला चरण: समय देखने से पहले विवाह का वादा जाँचें

जिस विवाह का समर्थन कुंडली में ही न हो, उसका समय बताना अंदाज़ा भर है, इसलिए पहले वादा जाँचें। सप्तम भाव, उस पर बैठी राशि, उसका स्वामी और उससे युत या दृष्ट ग्रह देखें। साझेदारी के नैसर्गिक कारक शुक्र और फिर गुरु को देखें। इसके बाद लग्न और चंद्रमा, दोनों से यही भाव पढ़ें। वादा मज़बूत, मिश्रित या हल्का हो सकता है, और मिश्रित सबसे आम है। मिश्रित वादे का मतलब विवाह नहीं होना नहीं है; इसका मतलब है कि समय भाग्य पर कम और दशा के साथ पर ज़्यादा निर्भर करेगा। सभी योगों की सूची कुंडली में विवाह योग में है।

सप्तम भाव और सप्तमेश: विवाह के बारे में क्या बताते हैं

सप्तम भाव, जिसे कलत्र या जाया भाव कहते हैं, जीवनसाथी और औपचारिक साझेदारी का भाव है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र कहता है कि सप्तमेश अपनी राशि या उच्च राशि में हो तो जीवनसाथी का सुख पूरा मिलता है।[1] यह भी कहता है कि सप्तमेश शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो, या स्वयं बलवान हो, तो जातक धनी, सम्मानित और सुख-सौभाग्य से युक्त होता है।[2] इन्हें वादे के संकेत की तरह पढ़ें, तारीख़ की तरह नहीं। कठिन भाव या राशि में बैठा सप्तमेश इनकार भी नहीं है, क्योंकि दशा और शुभ सहयोग से रास्ता फिर भी खुल सकता है। हर भाव की मूल बातें ज्योतिष में भाव में देखें।

शुक्र और गुरु: विवाह के कारक ग्रह

कारक वह ग्रह है जो हर कुंडली में किसी विषय का प्रतिनिधि होता है। शुक्र सबके लिए प्रेम, आकर्षण और साझेदारी का मुख्य कारक है। गुरु परंपरा से स्त्री की कुंडली में पति का कारक है, और किसी भी कुंडली में विवाह, आशीर्वाद और परिवार-वृद्धि का सहायक माना जाता है। शुक्र और गुरु बलवान, अस्त न होकर अच्छे स्थान पर हों तो वादे को पक्का आधार मिलता है। कोई एक कमज़ोर हो तो निष्कर्ष से पहले बाक़ी कुंडली पढ़ें; हमारा कमज़ोर ग्रह कैसे पता करें लेख और Weak Planet Finder बताते हैं कि नौ ग्रहों में सचमुच कौन कमज़ोर है।

लग्न के साथ चंद्रमा से भी पढ़ें

फलदीपिका कहती है कि पंचम और सप्तम भाव तथा उनके स्वामियों को लग्न से भी देखो और चंद्रमा से भी; वे शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हों तो संतान और जीवनसाथी दोनों का सहारा रहता है, और न हों तो उनमें सिद्धि निश्चित नहीं।[7] व्यवहार में सीख यह है कि दोनों पठन चलाएँ। लग्न से कमज़ोर दिखने वाली तस्वीर चंद्रमा से बेहतर दिख सकती है, और उल्टा भी होता है, इसलिए दोनों को साथ पढ़ें। लग्न पता न हो तो पहले मेरा लग्न क्या है पढ़ें और अपनी चंद्र राशि देखें।

दूसरा चरण: विंशोत्तरी दशा और विवाह का समय

विंशोत्तरी दशा जीवन को कुल 120 वर्ष के ग्रह-कालों में बाँटती है, और हर काल अंतर्दशाओं में बँटा होता है। विचार सरल है: जिस ग्रह का काल चल रहा है, उससे जुड़ी घटना उसी समय पकती है। विवाह के लिए ये ग्रह हैं: सप्तमेश, शुक्र, गुरु, लग्नेश, सप्तम में बैठे या उसे देखने वाले ग्रह, और सप्तमेश के नवांश-राशि का स्वामी। अपना क्रम मुफ़्त दशा कैलकुलेटर में देख सकते हैं, और महादशा क्या है पेज बताता है कि काल कैसे बनता है।

कौन-सी महादशा और अंतर्दशा विवाह देती है

फलदीपिका सप्तम में बैठे, सप्तम को देखने वाले या सप्तम के स्वामी ग्रह की दशा को विवाहकारक काल मानती है।[9] वह सप्तमेश के नवांश-राशि के स्वामी, शुक्र और चंद्रमा में जो सबसे बलवान हो, उसकी दशा भी गिनती है।[10] जातकपारिजात इसमें शुक्र-युत सप्तम राशि के स्वामी, द्वितीयेश जिस राशि में हो उसके स्वामी, और दशम तथा अष्टम भाव के स्वामियों की दशा-भुक्ति जोड़ता है।[11] ज़्यादातर कुंडलियों में कई उम्मीदवार मिलते हैं; कौन-सा सचमुच सक्रिय होगा, यह गोचर तय करता है। देखें दशा-प्रत्यंतर से समय कैसे पकड़ें।

शुक्र की दशा और विवाह

शुक्र सबसे स्वाभाविक जाँच है, पर उसकी अपनी दशा को सावधानी से पढ़ना चाहिए। बृहत् पराशर होरा शास्त्र कहता है कि शुक्र की अपनी दशा में शुक्र की ही अंतर्दशा, जब शुक्र लग्न से केन्द्र-त्रिकोण में, ग्यारहवें में या बलवान हो, शुभ फल देती है, जिसमें पत्नी-पुत्र आदि से वैभव भी है।[16] इसलिए शुक्र की दशा तब सहायक है जब शुक्र अच्छे स्थान पर हो, और केवल तटस्थ जब न हो। बीस-तीस की उम्र की शुक्र दशा विवाह की गारंटी नहीं, पर बाधाओं का बड़ा हिस्सा हटा देती है। शुक्र की अंतर्दशा की तारीख़ें मुफ़्त दशा कैलकुलेटर में देखें।

गुरु की दशा-अंतर्दशा और विवाह

गुरु की दशाएँ इसलिए मायने रखती हैं कि गुरु आशीर्वाद, परिवार और पति का कारक है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अनुसार गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा, जब शुक्र दशापति से केन्द्र, द्वितीय या नवम में हो, धन-धान्य, जीवनसाथी का लाभ और बड़े लोगों से भेंट देती है।[14] उसी दशा में मंगल की अंतर्दशा, जब मंगल लग्न से केन्द्र-त्रिकोण में या अपनी अथवा उच्च राशि में हो, विद्या और विवाह के कार्य, भूमि-लाभ और कार्यों में सफलता देती है।[15] इन्हें सहायक स्थितियाँ समझें, गारंटी नहीं। गुरु के पूरे 16 वर्ष महादशा क्या है पेज के क्रम में देखें।

सप्तमेश, लग्नेश और सप्तम को देखने वाले ग्रहों की दशा

सबसे सीधे उम्मीदवारों से शुरू कीजिए। सप्तमेश की अपनी दशा या अंतर्दशा चल रही हो और वह बुरी तरह पीड़ित न हो, तो विवाह उस काल का स्वाभाविक विषय है। यही बात सप्तम में बैठे या उसे देखने वाले ग्रह पर लागू होती है, जैसा फलदीपिका के दशा-नियम में कहा गया है।[9] लग्नेश इसलिए मायने रखता है कि वह व्यक्ति की अपनी तैयारी और प्रयास लाता है। यदि इनमें से कोई दशा आपके विवाह-योग्य वर्षों में नहीं पड़ती, तो पिछले खंडों के बाक़ी मार्ग फिर भी लागू रहते हैं। आपकी जन्म कुंडली सभी स्वामी दिखाती है, और भाव गाइड सप्तमेश खोजने में मदद करती है।

तीसरा चरण: विवाह के गोचर संकेत

दशा बताती है कि विवाह संभव है; गोचर बताता है कि अब है। फलदीपिका का गोचर-परीक्षण यह है: शुक्र या सप्तमेश जब सप्तमेश के नवांश-राशि के त्रिकोण में आए, तब विवाह होता है।[8] वह यह भी जोड़ती है कि लग्नेश गोचर में सप्तम राशि में जाए तो जीवनसाथी के लाभ का संकेत है।[9] ये संकेत हैं, भविष्यवाणी नहीं, और ये अनुकूल दशा के भीतर ही काम करते हैं। जिस दशा का सप्तम से कोई संबंध नहीं, उसमें गोचर-संकेत अक्सर रिश्ता, मुलाक़ात या बातचीत लाता है, विवाह नहीं। लाइव स्थिति जन्म कुंडली कैलकुलेटर से देखें।

गुरु का गोचर और विवाह

गुरु लगभग एक वर्ष एक राशि में रहता है, इसलिए उसका गोचर मौसमी स्विच जैसा काम करता है। जानकार गुरु को सप्तम भाव, सप्तमेश, जन्म के चंद्रमा, लग्न और शुक्र पर देखते हैं, और इन बिंदुओं पर उसकी पहली, तीसरी, पाँचवीं, सातवीं, नवीं और ग्यारहवीं दृष्टियाँ भी देखते हैं। फलदीपिका गुरु के सप्तमेश के नवांश-राशि के त्रिकोण में आने को विवाह का संकेत मानती है।[10] गुरु का एक चक्कर विवाह की गारंटी नहीं, पर अक्सर परिचय, रिश्ते और पारिवारिक बातचीत की सबसे सक्रिय अवधि लाता है। हर राशि पर असर के लिए गुरु गोचर पेज देखें।

शनि का गोचर और विवाह

शनि एक राशि में लगभग ढाई वर्ष रहता है और प्रतिबद्धता की परीक्षा लेता है, इसलिए उसका गोचर अक्सर रोमांस से ज़्यादा तैयारी दिखाता है। सप्तम भाव, सप्तमेश या चंद्रमा पर शनि का गोचर या दृष्टि बातचीत को धीमा कर सकती है, और उस दौर में कई लोग ज़िम्मेदारी का दबाव महसूस करते हैं। राहत उसी में है: शनि के गुज़रने के बाद उसका धीमा काम टिकाऊ बनता है, और अनुकूल दशा में गुरु का संकेत हो तो शनि के रहते भी विवाह हो सकता है। चंद्रमा से शनि की स्थिति साढ़ेसाती कैलकुलेटर में देखें, और चिंता से पहले साढ़ेसाती और विवाह पढ़ें।

डबल ट्रांजिट: जब गुरु और शनि दोनों सहमत हों

कई जानकार डबल ट्रांजिट का कार्य-नियम चलाते हैं: जब गुरु और शनि दोनों, स्थिति या दृष्टि से, सप्तम भाव या उसके स्वामी को प्रभावित करें और कोई संबंधित दशा चल रही हो, तब विवाह की संभावना बनती है। यह शास्त्रीय गोचर-विचार पर बना आधुनिक चलन है, पुस्तकालय के ग्रंथों का श्लोक नहीं, इसलिए इसे छन्नी की तरह लें, क़ानून की तरह नहीं। इसकी उपयोगिता यह है कि एक वर्ष को कुछ महीनों तक सँकरा कर देता है। दशा असंबंधित हो तो यह विफल होता है, इसीलिए यह दशा-परीक्षण की जगह नहीं लेता। हमारा मुफ़्त कैलकुलेटर दशा और गोचर दोनों परतें जोड़ता है।

नवांश (D9) से विवाह के समय की जाँच

नवांश विवाह की कुंडली है और ग्रह के भीतरी बल का सूचक। ऊपर के शास्त्रीय समय-नियम इस पर खूब टिके हैं: फलदीपिका के परीक्षण सप्तमेश की नवांश-राशि इस्तेमाल करते हैं: शुक्र या सप्तमेश का उसके त्रिकोण में आना, गुरु का उस त्रिकोण में आना, और उस राशि के स्वामी की दशा।[8][10] इसलिए उम्मीदवार ग्रहों की सूची बनाते समय सप्तमेश का नवांश-स्वामी हमेशा जोड़ें। नवांश कैसे बनाएँ और पढ़ें, यह नवांश कुंडली गाइड में है, और आपका जन्म कुंडली कैलकुलेटर उसे अपने-आप दे देता है।

दशा और गोचर को साथ जोड़ना: एक काल्पनिक उदाहरण

यह गढ़ा हुआ ढाँचा है, किसी की असली कुंडली नहीं। मान लीजिए किसी वर्ष सप्तमेश की अंतर्दशा शुरू होती है, शुक्र केन्द्र में है और बाद में गुरु सप्तमेश के नवांश-राशि के त्रिकोण में गोचर करता है। दशा विषय देती है, शुक्र क्षमता देता है और गुरु संकेत देता है, इसलिए संभावित विवाह-खिड़की वे महीने हैं जब गुरु का गोचर अंतर्दशा से मिलता है। उन्हीं महीनों में शनि भी सप्तमेश को देखे तो खिड़की खिंच सकती है, बंद नहीं होती। कैलकुलेटर भी परिणाम ऐसे ही बताता है: कारणों के साथ कुछ महीनों का दौर। अपनी दशा-तालिका दशा कैलकुलेटर में मिलाएँ।

विवाह की खिड़कियाँ तारीख़ें नहीं होतीं

कोई ईमानदार ज्योतिषी वह दिन नहीं बता सकता जब आपकी शादी होगी, और कोई कैलकुलेटर भी नहीं बताना चाहिए। खिड़की का मतलब है कि कई संकेत एक साथ मिलने से कुंडली कुछ महीनों में विवाह का समर्थन करती है। उस दौरान विवाह होगा या नहीं, यह लोगों, परिवार, आर्थिक स्थिति और निर्णय पर निर्भर है, जिन्हें कोई कुंडली नहीं बदल सकती। खिड़की का उपयोग योजना के लिए करें: बातचीत शुरू करें, प्रोफ़ाइल अपडेट करें, तैयारी करें। खिड़की बिना विवाह के निकल जाए तो अगली अनुकूल दशा-गोचर मेल की अवधि अगली खिड़की है, और मानवीय परामर्श बता सकता है कि आपकी परिस्थिति में कौन-सी फिट बैठती है।

विवाह में देरी क्यों होती है: सप्तम भाव का दबाव और शनि

देरी आमतौर पर तीन बातों के मेल से आती है: दबाव में आया सप्तम भाव या सप्तमेश, शुरुआती युवा वर्षों में विवाह से असंबंधित दशा, और शनि या राहु का धीमा करने वाला प्रभाव। यह एक पैटर्न है, फ़ैसला नहीं, और भंग इसी में शामिल है: अनुकूल दशा खुलते ही देरी समाप्त होती है, और स्वराशि, उच्च या शुभ-समर्थित सप्तमेश दबाव को काफ़ी घटा देता है, जैसा सप्तमेश के बल वाले पिछले श्लोक दिखाते हैं।[1][2] क्या जाँचना है, यह विवाह में देरी के कारण से जोड़कर देखें, और विस्तृत कारण पितृ दोष और विवाह विलंब में शांति से समझाए गए हैं।

मंगल दोष और विवाह का समय

सप्तम में मंगल या अन्य मांगलिक स्थितियाँ विलंब का सबसे चर्चित कारण हैं, और सबसे बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया भी। भृगु सूत्रम कहता है कि सप्तम में मंगल जातक को साहसहीन या अहंकारी बनाता है, पर शुभ ग्रह की दृष्टि होने पर दोष नहीं लगता।[17] इसलिए पहला क़दम यह जाँचना है कि दोष सचमुच है या नहीं और भंग हुआ या नहीं। मांगलिक दोष कैलकुलेटर दोनों जाँचता है, और हमारा सप्तम भाव में मंगल दोष लेख भंग समझाता है। भंग हुआ दोष कोई देरी नहीं करता; जो भंग नहीं हुआ, वह मिलान और सरल उपाय से सँभलता है, डर से नहीं।

राहु, केतु और विलंब के कारण

सप्तम भाव या सप्तमेश पर राहु-केतु का प्रभाव असामान्य मुलाक़ातें, देरी, या अलग पृष्ठभूमि का साथी ला सकता है। यह व्यवहार का अवलोकन है, और उसकी राहत साथ में है: ये छाया ग्रह अपनी दशा में सप्तम का साथ दें तो अचानक और अपरंपरागत विवाह भी देते हैं, और सप्तम पर शुभ दृष्टि असर को शांत करती है। काल सर्प योग को विवाह की मनाही न समझें; इसकी वजह काल सर्प दोष और विवाह में है। पितृ पक्ष के लिए पितृ दोष और विवाह विलंब बताता है कि यह विचार कहाँ काम करता है और कहाँ नहीं।

कमज़ोर सप्तमेश: शास्त्र क्या संकेत देते हैं और क्या उसे नरम करता है

फलदीपिका कहती है कि सप्तमेश शत्रु या नीच राशि में हो, अस्त हो, या पाप ग्रह से दृष्ट हो, अथवा सप्तम भाव पाप से युत-दृष्ट हो, तो जीवनसाथी के पक्ष में हानि या कष्ट का संकेत है।[13] यह जाँचने का संकेत है, सज़ा नहीं। उसी परंपरा में बृहत् पराशर होरा शास्त्र कहता है कि शुभ ग्रहों से युक्त-दृष्ट या बलवान सप्तमेश धन, सम्मान और सुख देता है,[2] इसलिए एक कमज़ोरी को बाक़ी बलों के सामने तौला जाता है। कोई निष्कर्ष निकालने से पहले अस्त ग्रह और उच्च-नीच की जाँच से बल परखें।

सप्तमेश और द्वितीयेश के आसपास बलवान-कमज़ोर ग्रहों की गिनती

जातकपारिजात गिनती की एक विधि देता है: सप्तमेश और द्वितीयेश के साथ जितने दुर्बल ग्रह हों उतना दाम्पत्य-पक्ष पर तनाव, और जितने बलवान शुभ ग्रह हों उतना दाम्पत्य-सुख।[12] यहाँ काम की चीज़ संतुलन है। जिस सप्तमेश के साथ एक कमज़ोर और दो बलवान शुभ ग्रह हों, वह केवल कमज़ोर साथियों वाले सप्तमेश से बिल्कुल अलग पढ़ा जाता है। इस तरह अस्पष्ट चिंता एक जाँचने योग्य गिनती बन जाती है। ग्रहों का बल ग्रह बल कैलकुलेटर दिखाता है, और समग्र चित्र कुंडली बल कैलकुलेटर देता है।

प्रेम विवाह और अरेंज मैरिज के लिए विवाह का समय

समय का तर्क दोनों में एक है, पर संकेत अक्सर अलग दिखता है। प्रेम विवाह में शुक्र, पंचम भाव का सप्तम से संबंध और उन्हें जोड़ने वाले ग्रह की दशा ज़्यादा मायने रखती है। अरेंज मैरिज में सप्तमेश, गुरु और परिवार-भाव के संबंध आगे रहते हैं। पहले प्रेम या अरेंज विवाह कैलकुलेटर से देखें कि आपकी कुंडली किस ओर झुकती है, फिर क्या मेरा प्रेम विवाह होगा या प्रेम बनाम अरेंज विवाह पढ़ें। कुंडली-मिलान में गुण कम आएँ तो लव मैरिज और कुंडली मिलान देखें।

30 के बाद विवाह: क्या देर से शादी ज्योतिष में समस्या है

देर से विवाह आधुनिक जीवन में आम है और अपने-आप में कोई ज्योतिषीय दोष नहीं। कई कुंडलियों में पहला अनुकूल दशा-गोचर मेल तीस के आसपास आता है, क्योंकि बीस की उम्र पढ़ाई, करियर और स्थानांतरण में निकल जाती है। भंग सरल है: बाद की खिड़की भी असली खिड़की है, और उसके साथ आई परिपक्वता अक्सर विवाह को टिकाऊ बनाती है। जिस उम्र की आप उम्मीद करते थे उससे आगे निकल गए हों तो यह न मानें कि कुंडली विफल हुई; पूछें कि अगली दशा कौन-सी है। बाद की खिड़कियाँ कैसी दिखती हैं, यह 30 के बाद विवाह पेज में है, और विवाह ज्योतिषी गाइड बताती है कि परामर्श कैसे मदद कर सकता है।

गुरु का 5 पंक्तियों वाला गुरुवार उपाय (विवाह कारक)

क्या: एक मुट्ठी चने की दाल और थोड़ा गुड़ गाय को खिलाएँ, फिर एक मिनट शांत खड़े रहें। कब: गुरुवार, सूर्योदय के बाद एक घंटे के भीतर। कितने का: मुफ़्त से 20 रुपये तक। कितने दिन: 11 गुरुवार। आपके लिए क्यों: गुरु विवाह और आशीर्वाद का मुख्य कारक है, इसलिए आपकी कुंडली में गुरु कमज़ोर दिखे या सप्तमेश पर दबाव हो, तो उसे पहले स्थिर करना पूरे विवाह-वादे को सहारा देता है। यह परंपरागत अभ्यास है, शास्त्रीय श्लोक नहीं, और इसमें कोई डर या समय-सीमा नहीं है। इसमें रत्न शामिल नहीं है; रत्न तभी सोचें जब पूरी कुंडली पढ़कर वह आपके अनुकूल निकले।

शुक्र और सप्तम भाव के लिए 5 पंक्तियों वाला शुक्रवार उपाय

क्या: दस रुपये की मिठाई किसी बच्चे को या मंदिर में चढ़ाएँ, और किसी एक ऐसे व्यक्ति से मीठा बोलें जिससे आप आमतौर पर बचते हैं। कब: शुक्रवार, सूर्योदय के बाद एक घंटे के भीतर। कितने का: 10 रुपये। कितने दिन: 11 शुक्रवार। आपके लिए क्यों: शुक्र साझेदारी का नैसर्गिक कारक है, इसलिए आपकी कुंडली में शुक्र या सप्तमेश कमज़ोर दिखे तो यह छोटा-सा मीठा कर्म उससे जुड़ने का सबसे सरल रोज़ का तरीक़ा है। यह परंपरागत अभ्यास है, शास्त्रीय श्लोक नहीं, और इसे निभाना आसान रखा गया है; किसी हफ़्ते चूक हो जाना असफलता नहीं। रत्न की ज़रूरत हो भी तो वह पूरी कुंडली पढ़ने के बाद ही आता है।

विवाह का समय बताने में होने वाली आम ग़लतियाँ

आम ग़लतियाँ पहचानी हुई हैं। केवल एक नियम पर टिकना, जैसे 'सप्तम में शनि है तो देर', दशा को नज़रअंदाज़ करता है। गोचर को तारीख़ मान लेना वादे को नज़रअंदाज़ करता है। अप्रमाणित जन्म-समय से दशा की तारीख़ें महीनों खिसक जाती हैं, इसलिए पहले जन्म समय की सटीकता जाँचें। केवल लग्न से पढ़ना और चंद्रमा या नवांश छोड़ देना शास्त्रीय प्रमाण फेंक देना है। और दोस्त की कुंडली से अपनी तुलना बेमानी है, क्योंकि हर दशा-क्रम अलग है। ये सब इस गाइड के तीन चरणों का क्रम मानने से सुधर जाती हैं।

विवाह समय कैलकुलेटर इस्तेमाल करने से पहले क्या चाहिए

तीन चीज़ें चाहिए: ठीक जन्म तारीख़, मिनट तक जन्म-समय और जन्म का शहर। दशा की तारीख़ें चंद्रमा की सटीक स्थिति पर निर्भर हैं, इसलिए कुछ घंटों की चूक भी काल को महीनों खिसका सकती है। समय पक्का न हो तो तीन पास के समयों पर अपना लग्न निकालकर देखें कि वह बदलता है या नहीं; हमारी लग्न पता करने की गाइड तरीक़ा बताती है। लिंग भी काम का है, क्योंकि पति-कारक गुरु का पठन स्त्री की कुंडली में होता है। परिवार से पुष्ट कोई भी समय लिख रखें, ताकि कैलकुलेटर से मिला सकें।

अपना मुफ़्त शादी कब होगी कैलकुलेटर परिणाम समझदारी से कैसे इस्तेमाल करें

परिणाम को कैलेंडर नहीं, खिड़कियों का नक़्शा समझें। अनुकूल दशा-काल, गोचर के महीने और दिए गए कारण लिख लें। इन्हें पहले चरण में जाँचे वादे से मिलाएँ; वादा हल्का और खिड़कियाँ सँकरी हों तो देरी वाले खंड फिर से पढ़ें और धैर्य की योजना बनाएँ। परिणाम से तय करें कि सक्रिय खोज कब शुरू करनी है, और दूसरी राय चाहिए तो किसी भरोसेमंद ज्योतिषी से साझा करें। अभी शादी कब होगी कैलकुलेटर खोलें, और उसके बगल में अपनी दशा-तालिका रखें ताकि हर खिड़की के पीछे के काल दिखें।

समय के बाद: कुंडली मिलान, मुहूर्त और विदेशी या दूसरे विवाह के सवाल

खिड़की अच्छी दिखे तो अगले सवाल साथी और तारीख़ के होते हैं। अनुकूलता कुंडली मिलान से जाँची जाती है और 36 गुण मिलान में समझाई गई है। विवाह की तारीख़ मुहूर्त का सवाल है, जिसे शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर और जन्म तिथि से विवाह मुहूर्त गाइड सँभालते हैं। विदेश के जीवनसाथी या दूसरे विवाह का सवाल हो तो विदेशी जीवनसाथी कैलकुलेटर या दूसरी शादी कैलकुलेटर इस्तेमाल करें, और विदेशी जीवनसाथी योग पढ़ें।

विवाह के समय के शास्त्रीय स्रोत

बृहत् पराशर होरा शास्त्र सप्तमेश के वादे वाले नियम देता है,[1][2] योग के अनुसार उम्र की सूची देता है जो एक ही विवाह-उम्र की धारणा को ग़लत ठहराती है,[3][4][5][6] और गुरु तथा शुक्र की दशाओं में अंतर्दशाओं के फल बताता है।[14][15][16] फलदीपिका लग्न और चंद्रमा से पठन,[7] गोचर-परीक्षण,[8][9] दशा-मार्ग[10] और कमज़ोर सप्तमेश के चेतावनी-संकेत देती है।[13] जातकपारिजात कुछ और दशा-मार्ग[11] तथा ग्रह-गिनती की विधि जोड़ता है।[12] भृगु सूत्रम सप्तम के मंगल पर शुभ दृष्टि की राहत देता है।[17] हर श्लोक संख्या और अर्थ के साथ उद्धृत है; इन ग्रंथों के e-text व्यक्तिगत अध्ययन के लिए लाइसेंस पर हैं, इसलिए उनका संस्कृत पाठ यहाँ नहीं दिया गया।

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Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

कलत्र भाव (सप्तम भाव)
कुंडली का सातवाँ भाव, जो जीवनसाथी, विवाह और औपचारिक साझेदारी का प्रतिनिधि है।
कारक
वह ग्रह जो हर कुंडली में किसी जीवन-विषय का प्रतिनिधि होता है, जैसे साझेदारी के लिए शुक्र और स्त्री की कुंडली में पति तथा आशीर्वाद के लिए गुरु।
विंशोत्तरी दशा
120 वर्ष के ग्रह-कालों की प्रणाली, जो अंतर्दशाओं में बँटी होती है और जीवन की घटनाओं का समय बताने में काम आती है।
अंतर्दशा
किसी ग्रह की महादशा के भीतर आने वाला दूसरे ग्रह का उप-काल।
गोचर
राशिचक्र में ग्रहों की वर्तमान चाल, जिसे जन्म-कुंडली से मिलाकर अनुकूल दशा के भीतर घटना का संकेत पढ़ा जाता है।
नवांश (D9)
नवम विभागीय कुंडली, जो विवाह और ग्रह के भीतरी बल के लिए पढ़ी जाती है; शास्त्रीय विवाह-समय परीक्षण सप्तमेश की नवांश-राशि का उपयोग करते हैं।
डबल ट्रांजिट
जानकारों का नियम कि संबंधित दशा में गुरु और शनि दोनों सप्तम भाव या उसके स्वामी को प्रभावित करें तो विवाह की संभावना बनती है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    जायाभावफलं वक्ष्ये शृणु त्वं द्विजसत्तम । जायाधिपे स्वभे स्वोच्चे स्त्रीसुखं पूर्णमादिशेत्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफल अध्याय (सप्तम भाव के फल) · श्लोक 1 · sanskritdocuments

    सप्तमेश अपनी राशि या उच्च राशि में हो तो स्त्री-सुख (जीवनसाथी का सुख) पूरा मिलता है।

    When the 7th lord is in its own sign or in its exaltation sign, the happiness from the spouse is full.

  2. [2]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    जायाधीशः शुभैर्युक्तो दृष्टो वा बलसंयुतः । तदा जातो धनी मानी सुखसौभाग्यसंयुतः
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफल अध्याय (सप्तम भाव के फल) · श्लोक 4 · sanskritdocuments

    सप्तमेश शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट अथवा बलवान हो तो जातक धनी, मानी और सुख-सौभाग्य से युक्त होता है।

    A 7th lord joined or aspected by benefics, or strong, makes a person wealthy, respected and happy in fortune.

  3. [3]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    दारेशे शुभराशिस्थे स्वोच्चस्वर्क्षगतो भृगुः । पञ्चमे नवमेऽब्दे तु विवाहः प्रायशो भवेत्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफल अध्याय (सप्तम भाव के फल) · श्लोक 22 · sanskritdocuments

    सप्तमेश शुभ राशि में और शुक्र उच्च या स्वराशि में हो तो प्रायः पाँचवें या नवें वर्ष में विवाह होता है।

    Marriage usually comes in the 5th or 9th year when the 7th lord is in an auspicious sign and Venus is in its exaltation or own sign.

  4. [4]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    रन्ध्राज्जामित्रगे शुक्रे तदीशे भौमसंयुते । द्वाविंशे सप्तविंशेऽब्दे विवाहं लभते नरः
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफल अध्याय (सप्तम भाव के फल) · श्लोक 30 · sanskritdocuments

    शुक्र द्वितीय भाव में और उस भाव का स्वामी मंगल के साथ हो तो प्रायः बाईसवें या सत्ताईसवें वर्ष में विवाह होता है।

    Marriage usually comes in the 22nd or 27th year when Venus is in the 2nd house and that house's lord is with Mars.

  5. [5]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    भाग्याज्जामित्रगे शुक्रे तद्द्यूने दारनायके । त्रिंशे वा सप्तविंशाब्दे विवाहं लभते नरः
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफल अध्याय (सप्तम भाव के फल) · श्लोक 34 · sanskritdocuments

    शुक्र तृतीय भाव में और सप्तमेश उससे सातवें भाव (नवम) में हो तो प्रायः तीसवें या सत्ताईसवें वर्ष में विवाह होता है।

    Marriage usually comes in the 30th or 27th year for the combination of Venus in the 3rd house with the 7th lord in the 9th.

  6. [6]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    भाग्याद्।ह्भाग्यगते शुक्रे तद्।ह्द्वये राहुसंयुते । एकत्रिंशास्त्रयस्त्रिंशे दारलाभं विनिर्दिशेत्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफल अध्याय (सप्तम भाव के फल) · श्लोक 33 · sanskritdocuments

    शुक्र पंचम भाव में हो और शुक्र तथा भाग्येश दोनों राहु के साथ हों तो इकतीसवें या तैंतीसवें वर्ष में विवाह होता है।

    Marriage usually comes in the 31st or 33rd year when Venus is in the 5th house and Venus and the 9th lord are both with Rahu.

  7. [7]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    कलत्र भव शुभाधिपयुतेक्षिते सुतकलत्रभे लग्नतो विधोरपि तयोः शुभं त्वितरथान सिद्धिस्तयोः । सिताव्द्ययसुखाष्टगैः खरखगैरसन्नध्यगे सितेऽप्यथ शुभेतरेक्षितयुते च जायावधः
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्र भाव (जीवनसाथी और विवाह) · श्लोक 1 · sanskritdocuments

    लग्न और चन्द्र दोनों से पंचम-सप्तम भाव और उनके स्वामी शुभ ग्रहों से युत-दृष्ट हों तो संतान और जीवनसाथी शुभ रहते हैं; उलटे हों तो सिद्धि नहीं।

    The 5th and 7th houses and their lords, from the lagna and from the Moon, joined or aspected by benefics give well-supported spouse and children; the reverse gives no success in them.

  8. [8]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    कामस्थकामाधिप्भार्गवाना मृक्षं दिशं शंसति तस्य पत्न्याः । शुक्रोऽस्तपो वा नतुनाथभांश\- त्रिकोणमायाति तदा विवाहः
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्र भाव (जीवनसाथी और विवाह) · श्लोक 12 · sanskritdocuments

    शुक्र या सप्तमेश गोचर में सप्तमेश के नवांश-राशि के त्रिकोण में आए तो विवाह होता है।

    Marriage takes place when Venus or the 7th lord transits the trine of the navamsha sign of the 7th lord.

  9. [9]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    कलत्रसंस्थस्य कलत्रदृष्टे दर्शागमेवाथ कलत्रपस्य । यदा विलग्नाधिपतिः प्रयाति कलत्रभं तत्र कलत्रलाभः
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्र भाव (जीवनसाथी और विवाह) · श्लोक 13 · sanskritdocuments

    लग्नेश गोचर में सप्तम राशि में जाए, अथवा सप्तम में बैठे, सप्तम को देखने वाले या सप्तमेश की दशा में, कलत्र-लाभ होता है।

    Gain of a spouse comes when the lagna lord transits the 7th sign, or in the dasha of a planet in the 7th, aspecting the 7th, or ruling the 7th.

  10. [10]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    कलत्रनाथस्थितभांशकेशयोः सितक्षपानायकयोर्बलीयसः । दशागमे द्यूनपयुक्तभांशक\- लत्रिकोणगे देवगुरौ करग्रहः
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्र भाव (जीवनसाथी और विवाह) · श्लोक 14 · sanskritdocuments

    सप्तमेश के नवांश-राशि के स्वामी तथा शुक्र/चन्द्र में बलवान की दशा में, या गुरु के उस नवांश-राशि के त्रिकोण में आने पर विवाह होता है।

    Marriage in the dasha of the stronger of the navamsha-sign lord of the 7th lord and Venus or the Moon, or when Jupiter transits the trine of that navamsha sign.

  11. [11]↑जातकपारिजातजातकपारिजातः · Vaidyanatha Dikshita
    शुक्रोपेतकलत्रराशिपदशामुक्तोविवाहप्रदा लग्नाद्वित्तपतिस्थराशिपदशाभुक्तौ च पाणिग्रहः । कर्मायुर्भवनाधिनायकदशाभुक्तौ विवाहः क्रमात् कामेशेन यूतः कलत्रगृहगस्तत्पाकमुक्तौ तु वा
    — जातकपारिजात, अध्याय 14 — सप्तम-अष्टम-नवम भावफल अध्याय · श्लोक 29 · sanskritdocuments

    शुक्र-युत सप्तम राशि के स्वामी, द्वितीयेश जिस राशि में हो उसके स्वामी तथा दशमेश-अष्टमेश की दशा-भुक्ति में विवाह होता है।

    Marriage in the dasha-bhukti of the lord of the sign joined by Venus in the 7th, of the lord of the sign holding the 2nd lord, and of the 10th and 8th lords.

  12. [12]↑जातकपारिजातजातकपारिजातः · Vaidyanatha Dikshita
    दारेशेन कुटुम्बपेन सहिता यावद्ग्रहा दुर्बला\- स्तत्संख्याककलत्रनाशनकरा दुःस्थानाथा यदि । यावन्तो बलशालिनः शुभकरास्तत्तुल्यजायासुखं कुर्वन्त्येकवियच्चरो बलयुतो यद्येकदारो भवेत्
    — जातकपारिजात, अध्याय 14 — सप्तम-अष्टम-नवम भावफल अध्याय · श्लोक 26 · sanskritdocuments

    सप्तमेश-द्वितीयेश के साथ जितने दुर्बल ग्रह हों उतना दाम्पत्य-पक्ष पर कष्ट, और जितने बलवान शुभ ग्रह हों उतना दाम्पत्य-सुख।

    Weak planets joined with the 7th and 2nd lords add strain on the marriage side, and each strong benefic adds matching marital comfort.

  13. [13]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    कलत्रनाथे रिपुनीचसंस्थे मूढेऽथवा पापनिरीक्षिते वा कलत्रभे पापयुतेऽथ दृष्टे कलत्रहानी प्रवदन्ति सन्तः
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्र भाव (जीवनसाथी और विवाह) · श्लोक 15 · sanskritdocuments

    सप्तमेश शत्रु/नीच राशि में, अस्त या पाप-दृष्ट हो, अथवा सप्तम भाव पाप से युत-दृष्ट हो तो जीवनसाथी के पक्ष में हानि-कष्ट कहा गया है।

    A 7th lord in an enemy or debilitated sign, combust, or aspected by malefics, or a 7th house joined or aspected by malefics, signals loss or hardship on the spouse's side.

  14. [14]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    धनधान्यादिलाभश्च स्र्/ईलाभो राजदर्शनम्।ह्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 56 — जीव-अन्तर्दशाफल अध्याय (गुरु की अंतर्दशाएँ) · श्लोक 46 · sanskritdocuments

    गुरु की दशा में शुक्र की अंतर्दशा, शुक्र दशापति से केन्द्र/द्वितीय/नवम में हो तो धन-धान्य, स्त्री-लाभ और राजदर्शन होता है।

    In a Jupiter period, Venus's sub-period with Venus in a kendra, 2nd or 9th from the period lord gives wealth, gain of a spouse and a meeting with the powerful.

  15. [15]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    विद्याविवाहकार्याणि ग्रामभूम्यादिलाभकृत्।ह् । जनसामर्थ्यमाप्नोति सर्वकार्यार्थसिद्धिदम्।ह्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 56 — जीव-अन्तर्दशाफल अध्याय (गुरु की अंतर्दशाएँ) · श्लोक 66 · sanskritdocuments

    गुरु की दशा में मंगल की अंतर्दशा, मंगल लग्न से केन्द्र-त्रिकोण में या स्व/उच्च राशि में हो तो विद्या-विवाह के कार्य, भूमि-लाभ और सब कार्यों में सिद्धि होती है।

    In a Jupiter period, Mars's sub-period with Mars in a kendra or trikona from the lagna, or in own or exalted sign, favours study and marriage, land and success in all undertakings.

  16. [16]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    नूतनालयनिर्माणं नित्यं मिष्ठान्नभोजनम्।ह् । कलत्रपुत्रविभवं मित्रसंयुक्तभोजनम्।ह्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 60 — शुक्र-अन्तर्दशाफल अध्याय (शुक्र की अंतर्दशाएँ) · श्लोक 4 · sanskritdocuments

    शुक्र की अपनी अंतर्दशा में, शुक्र शुभ स्थिति में हो तो पत्नी-पुत्र आदि से वैभव मिलता है।

    In Venus's own sub-period, with Venus well placed, the results include prosperity through spouse and children.

  17. [17]↑भृगु सूत्रमभृगुसूत्रम् · Maharishi Bhrigu
    अवीरः अहङ्कारी वा शुभदृष्टे न दोषः
    — भृगु सूत्रम, अध्याय 3 — मंगलफल (मंगल के फल) · श्लोक 65 · sanskritdocuments

    सप्तम भाव में मंगल हो तो जातक साहसहीन या अहंकारी होता है, पर शुभ दृष्टि होने पर दोष नहीं लगता।

    Mars in the 7th makes the person lacking in boldness or ego-prone, but no fault attaches when a benefic aspects it.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

मेरी कुंडली के अनुसार मेरी शादी कब होगी?

कुंडली विवाह की खिड़कियाँ दिखाती है, तारीख़ नहीं। वादे के लिए सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र और गुरु देखें, फिर इन्हीं ग्रहों की वह दशा-अंतर्दशा खोजें जो सप्तम पर गुरु या शनि के गोचर से मिलती हो। [मुफ़्त शादी कब होगी कैलकुलेटर](/calculators/free-shadi-kab-hogi-calculator) आपके जन्म विवरण से ये खिड़कियाँ बताता है।

क्या ज्योतिष से शादी की ठीक तारीख़ या उम्र पता चल सकती है?

नहीं। दशा और गोचर से वे महीने दिखते हैं जब विवाह की संभावना ज़्यादा होती है, पर असली तारीख़ व्यक्तिगत निर्णय, परिवार और परिस्थितियों से तय होती है। ठीक तारीख़ के हर दावे से सावधान रहें और खिड़कियों को योजना के लिए इस्तेमाल करें।

क्या ज्योतिष में 27 से 30 की उम्र शादी के लिए सबसे अच्छी है?

नहीं, यह समाज की आदत है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र अलग-अलग योगों को पाँचवें से तैंतीसवें वर्ष तक की अलग उम्रों से जोड़ता है, और 27 या 30 उनमें से सिर्फ़ एक योग में आते हैं। आपकी खिड़की आपकी कुंडली तय करती है; देखें [मेरी शादी किस उम्र में होगी](/learn/what-age-will-i-get-married)।

विवाह के लिए कौन-सी दशा सबसे अच्छी है?

सप्तमेश, शुक्र, गुरु, लग्नेश और सप्तम में बैठे या उसे देखने वाले ग्रहों की दशाएँ मुख्य उम्मीदवार हैं। सप्तमेश के नवांश-राशि के स्वामी की दशा भी जाँची जाती है। इनमें जो सबसे बलवान और अच्छे स्थान पर होता है, अक्सर वही खिड़की देता है; [महादशा क्या है](/learn/mahadasha-explained) पढ़ें।

गुरु का गोचर विवाह के समय को कैसे प्रभावित करता है?

गुरु तब संकेत का काम करता है जब वह सप्तम भाव, सप्तमेश, चंद्रमा या सप्तमेश के नवांश-राशि के त्रिकोण पर गोचर करे, ख़ासकर अनुकूल दशा में। वह हलचल और पारिवारिक बातचीत लाता है, विवाह की गारंटी नहीं। देखें [गुरु गोचर पेज](/learn/jupiter-transit-2026)।

विवाह के लिए डबल ट्रांजिट क्या है?

यह जानकारों का नियम है: जब गुरु और शनि दोनों, स्थिति या दृष्टि से, सप्तम भाव या उसके स्वामी को प्रभावित करें और संबंधित दशा चल रही हो, तब विवाह की संभावना बनती है। यह शास्त्रीय गोचर-विचार पर बनी छन्नी है, पुस्तकालय के ग्रंथों का श्लोक नहीं, इसलिए इसे दशा के बिना कभी न चलाएँ।

विवाह में देरी कौन-सा ग्रह करता है?

सप्तम भाव या स्वामी पर शनि और राहु, तथा कमज़ोर शुक्र या सप्तमेश आम संदिग्ध हैं, पर देरी असल में शुरुआती वर्षों की अनुकूल दशा के न होने से आती है। अनुकूल खिड़की खुलते ही वह समाप्त होती है; देखें [मेरी शादी में देरी क्यों](/learn/why-is-my-marriage-delayed)।

क्या मंगल दोष विवाह में देरी करता है?

कुछ कुंडलियों में कर सकता है, पर अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाता है और अक्सर भंग हो जाता है। भृगु सूत्रम कहता है कि सप्तम में मंगल पर शुभ दृष्टि हो तो दोष नहीं लगता। चिंता से पहले [मांगलिक दोष कैलकुलेटर](/calculators/free-manglik-dosh-calculator) से अपना जाँचें।

क्या केवल जन्म तारीख़ से विवाह का समय पता हो सकता है?

भरोसे से नहीं। ठीक जन्म-समय और शहर भी चाहिए, क्योंकि चंद्रमा की स्थिति दशा की तारीख़ें तय करती है और लग्न भाव तय करता है। केवल तारीख़ से कोई भी अनुमान सामान्य होता है और उसे अनुमानित ही मानना चाहिए।

क्या उपाय करने से शादी जल्दी हो सकती है?

उपाय कुंडली नहीं बदल सकते, पर ऊपर के गुरुवार और शुक्रवार जैसे सरल अभ्यास संबंधित ग्रहों को स्थिर करते हैं और आपको नियमित रखते हैं। कोई उपाय अनुकूल दशा की जगह नहीं लेता, और कोई उपाय डर, बड़े ख़र्च या पहले क़दम के रूप में रत्न वाला नहीं होना चाहिए।

क्या ज्योतिष में 30 के बाद शादी बुरी है?

नहीं। कई कुंडलियों में पहली अनुकूल खिड़की तीस के आसपास आती है। बाद की खिड़की भी असली खिड़की है, और उसके साथ आई परिपक्वता अक्सर टिकाऊ विवाह में मदद करती है। पढ़ें [30 के बाद विवाह](/learn/marriage-after-30-prediction)।

क्या मुफ़्त विवाह-समय कैलकुलेटर सटीक होता है?

कैलकुलेटर उतना ही सटीक है जितना आपका जन्म-डेटा और उसकी विधि। वह दशा-गोचर के मेल ठीक गिन सकता है, पर पारिवारिक परिस्थितियों का आकलन नहीं कर सकता। खिड़कियाँ खोजने के लिए उसका और उन्हें परखने के लिए मानवीय पठन का उपयोग करें; [विवाह ज्योतिषी गाइड](/blog/marriage-astrologer-near-me-online-hindi) बताती है कि कब मदद मिलती है।

यह भी देखें · See also

श्रेणी: calculator-guide · marriage