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Trikaal Vaani · राशि अनुकूलता

कन्या & सिंह

राशि अनुकूलता

राशि अनुकूलता स्कोर
16 / 36
44% · उपाय आवश्यक

कन्या और सिंह राशि की जोड़ी को राशि स्तर पर 36 में से 16 गुण (लगभग 44%) मिलते हैं, इसलिए यह उपाय-आवश्यक मिलान है। सिंह राशि कन्या से बारहवीं है, यानी द्विर्द्वादश भकूट, पर राशि-स्वामी बुध सूर्य को मित्र मानता है। असली गुण जानने के लिए दोनों जन्म कुंडलियों का पूरा कुंडली मिलान कराएँ।

भावनात्मक अनुकूलता

कन्या-सिंह जोड़ी में भावनात्मक स्वभाव काफ़ी भिन्न है। कन्या आरक्षित, व्यावहारिक और विनम्र है, जबकि सिंह गर्मजोश, अभिव्यंजक और प्रशंसा-प्रिय। कन्या प्रेम को सेवा, देखभाल और व्यावहारिक कार्यों से दिखाती है, जबकि सिंह को खुली प्रशंसा और भव्यता चाहिए। चुनौती यह है कि कन्या की आलोचनात्मक प्रवृत्ति गर्वित सिंह के अहं को चोट पहुँचा सकती है, और सिंह की भव्यता व ध्यान की माँग व्यावहारिक कन्या को दिखावा लग सकती है। जब कन्या सिंह को प्रशंसा देती है और सिंह कन्या की विनम्र सेवा को सराहता है, तो यह जोड़ी संतुलन पा सकती है। धैर्य और स्वीकार्यता इसकी कुंजी है।

संवाद शैली

संवाद में कन्या विश्लेषक, सटीक और आलोचनात्मक होती है, जबकि सिंह आत्मविश्वासी, अभिव्यंजक और नाटकीय। यह अंतर पूरकता बन सकता है — कन्या विस्तार और व्यावहारिकता लाती है, सिंह दृष्टि और जोश। सावधानी: कन्या की आलोचनात्मक टिप्पणियाँ गर्वित सिंह को गहरे चुभ सकती हैं, और सिंह का भव्य, ध्यान-केंद्रित स्वभाव विनम्र कन्या को असहज कर सकता है। कन्या आलोचना को कोमलता से कहे और सिंह कन्या की व्यावहारिक सलाह को सराहे। प्रशंसा, विनम्रता और धैर्य के साथ संवाद रचनात्मक रहता है।

इस जोड़ी की शक्तियाँ

इस जोड़ी की ताकत इसकी पूरकता में छिपी है। कन्या की व्यावहारिकता, अनुशासन और सेवा सिंह की भव्य योजनाओं को ज़मीनी आधार और क्रियान्वयन देती है, जबकि सिंह की गर्मजोशी, आत्मविश्वास और दृष्टि कन्या के विनम्र, व्यावहारिक स्वभाव को जोश और गरिमा देती है। कन्या समर्पित सेवा और विस्तार लाती है, सिंह नेतृत्व और प्रेरणा। दोनों ही, अलग तरीकों से, मेहनती और प्रियजनों के प्रति समर्पित होते हैं। यदि कन्या सिंह को प्रशंसा व सम्मान दे और सिंह कन्या की सेवा को सराहे, तो यह जोड़ी क्रियान्वयन और दृष्टि का सुंदर मेल बना सकती है। उपाय और परस्पर सम्मान इस संभावना को साकार करते हैं।

चुनौतियाँ

सबसे बड़ी चुनौती है विनम्रता बनाम भव्यता और आलोचना बनाम प्रशंसा का अंतर। कन्या विनम्र, व्यावहारिक और आलोचनात्मक है, जबकि सिंह को निरंतर प्रशंसा, ध्यान और भव्यता चाहिए। कन्या की आलोचना और पूर्णतावाद गर्वित सिंह के अहं को गहरे आहत कर सकता है, जबकि सिंह की भव्यता, दिखावा और ध्यान की माँग व्यावहारिक कन्या को फ़िज़ूल लग सकती है। धन और जीवनशैली में भी दृष्टिकोण भिन्न है (कन्या मितव्ययी, सिंह भव्य)। समाधान: कन्या आलोचना कम और प्रशंसा अधिक करे, सिंह कन्या की सेवा का सम्मान करे और विनम्रता अपनाए। इसी कारण इस जोड़ी के लिए उपाय और सचेत प्रयास विशेष रूप से ज़रूरी हैं।

प्रेम और रोमांस

कन्या-सिंह का प्रेम दो भिन्न शैलियों का मेल है। सिंह रोमांस में जोश, भव्यता और नाटकीयता लाता है, जबकि कन्या विनम्र देखभाल, समर्पण और व्यावहारिक स्नेह। शुरू में सिंह की भव्यता कन्या को दिखावा और कन्या की संयमितता सिंह को ठंडी लग सकती है। जब कन्या सिंह को प्रशंसा देती है और सिंह कन्या की सेवा को सराहता है, तो प्रेम गर्म और स्थिर बन सकता है। स्वीकार्यता और सम्मान इसकी कुंजी हैं।

विवाहित जीवन और दीर्घकालिकता

विवाह में कन्या व्यवस्था, सेवा और व्यावहारिक सुरक्षा लाती है, सिंह गरिमा, गर्माहट और नेतृत्व। दीर्घकालिकता के लिए दोनों को अपने अंतर को सहयोग में बदलना होगा — कन्या आलोचना कम करे और सराहना अधिक, सिंह विनम्रता और कन्या के योगदान का सम्मान। जब क्रियान्वयन और दृष्टि का संतुलन बनता है, तो दाम्पत्य प्रभावी और स्थिर बन सकता है। सचेत प्रयास और उपाय इसकी कुंजी हैं।

घनिष्ठता और आकर्षण

इस पक्ष में सिंह जोश, गर्माहट और भव्यता लाता है, कन्या संयमित, विचारशील देखभाल। शुरू में कन्या आरक्षित हो सकती है, जो भव्य सिंह को ठंडी लग सकती है। तालमेल के लिए सिंह को धैर्य और कोमलता, कन्या को थोड़ा खुलापन व अभिव्यक्ति अपनानी होगी। जब कन्या का विश्वास बनता है, तो वह गहराई से समर्पित होती है। आपसी सम्मान, प्रशंसा और भावनात्मक उपस्थिति इस घनिष्ठता को गर्म और संतोषजनक बना सकती है।

विश्वास और निष्ठा

दोनों राशियाँ निष्ठा को महत्व देती हैं — कन्या समर्पित व विश्वसनीय, सिंह गर्वित व वफ़ादार। यह विश्वास की अच्छी नींव बनाता है। चुनौती तब आती है जब कन्या की आलोचना सिंह के अहं को चोट पहुँचाए या सिंह को पर्याप्त प्रशंसा न मिले। निरंतर सराहना, कोमल संवाद और एक-दूसरे के योगदान का सम्मान इस जोड़ी की निष्ठा को मज़बूत बनाते हैं। जब सिंह सराहा और कन्या मूल्यवान महसूस करती है, तो भरोसा दृढ़ रहता है।

धन और जीवनशैली

धन इस जोड़ी का संवेदनशील पक्ष है। कन्या बचतकर्ता, मितव्ययी और व्यावहारिक है, जबकि सिंह भव्यता, शान और उदार खर्च पसंद करता है। समाधान: एक स्पष्ट बजट बनाएँ जिसमें सिंह की कुछ भव्यता और कन्या की बचत दोनों को जगह हो, और बड़े खर्च मिलकर तय करें। कन्या वित्तीय अनुशासन संभाले, सिंह कमाई व नेतृत्व लाए। संतुलित प्रबंधन के साथ यह जोड़ी एक सुरक्षित फिर भी सुरुचिपूर्ण जीवनशैली बना सकती है।

परिवार और संतान

परिवार के प्रति कन्या व्यवस्था, सेवा और अनुशासन को महत्व देती है, जबकि सिंह गरिमा, गर्व और गर्मजोशी को। बच्चों के लिए यह संयोजन संतुलित हो सकता है — कन्या अनुशासन और व्यावहारिकता देती है, सिंह आत्मविश्वास और गरिमा। ध्यान रखने योग्य बात यह कि सिंह का अहं और कन्या की अति-आलोचना अनुशासन में संतुलित रहे, और बच्चों को प्रशंसा व मार्गदर्शन दोनों मिलें। बड़ों के सम्मान के साथ यह जोड़ी एक गरिमामय, सुव्यवस्थित परिवार बना सकती है।

तत्व और ग्रह मैत्री

कन्या पृथ्वी तत्व (स्वामी बुध) और सिंह अग्नि तत्व (स्वामी सूर्य) की राशि है। पृथ्वी विनम्र, व्यावहारिक और संयमित है, अग्नि गर्म, भव्य और अभिव्यंजक — इसलिए विनम्रता बनाम भव्यता का अंतर स्वाभाविक है। पराशर के नैसर्गिक मैत्री नियम से बुध सूर्य को मित्र मानता है और सूर्य बुध को सम, इसलिए ग्रह स्तर पर एक कामकाजी मैत्री है, भले ही मूल्यों और शैली में अंतर हो। कुंजी यह है कि सिंह की अग्नि कन्या की व्यावहारिकता से दिशा व क्रियान्वयन पाए और कन्या की सेवा सिंह की सराहना से सम्मान — तब यह दृष्टि और कर्म का संतुलन बनता है।

भकूट और ग्रह मैत्री: शास्त्रीय जाँच

शास्त्रीय कुंडली मिलान में आठ कूट तौले जाते हैं, वर्ण और वश्य से लेकर भकूट और नाड़ी तक।[1] राशि स्तर पर इस जोड़ी का फ़ैसला मुख्य रूप से दो कूट करते हैं। ग्रह मैत्री में राशि-स्वामियों की मित्रता देखी जाती है: पराशर हर ग्रह की मूलत्रिकोण राशि से गिने गए भावों के आधार पर नैसर्गिक मैत्री तय करते हैं,[2] और इस नियम से बुध सूर्य को मित्र मानता है जबकि सूर्य बुध को सम। भकूट दोनों चंद्र राशियों की दूरी देखता है, और सिंह कन्या से बारहवीं राशि है। मुहूर्त चिन्तामणि कहता है कि द्विर्द्वादश भकूट साझा धन पर दबाव डाल सकता है,[3] पर उसी अध्याय में यह भी कहा गया है कि राशि-स्वामियों की मैत्री दुष्ट भकूट का दोष दूर कर देती है।[4] यहाँ मैत्री एकतरफ़ा है, इसलिए यह छूट आंशिक रूप से ही लागू होती है, और कोई भी निर्णय लेने से पहले दोनों कुंडलियों के असली नक्षत्र, नाड़ी और मांगलिक स्थिति देखना ज़रूरी है। व्यावहारिक उपाय है मिलकर लिखा गया मासिक बजट, साथ में नीचे दिए बुध और सूर्य के उपाय।

कन्या और सिंह के लिए लव मैरिज या अरेंज्ड मैरिज

लव मैरिज में अक्सर सिंह पहल करता है और कन्या हाँ कहने से पहले चुपचाप रिश्ते को परखती है, इसलिए प्रेम-काल लंबा चल सकता है। अरेंज्ड मैरिज में कन्या अपनी काबिलियत से सिंह परिवार को प्रभावित करती है और सिंह अपने आत्मविश्वास से कन्या परिवार को, और पहले साल में ही अहं बनाम आलोचना का अंतर सामने आता है। दोनों ही रास्तों में 36 में से 16 का अंक सिर्फ़ राशि की परत है। लव मैरिज कुंडली मिलान गाइड बताती है कि जिन्होंने पहले ही एक-दूसरे को चुन लिया है वे गुण अंक कैसे पढ़ें, और मुफ़्त लव या अरेंज्ड मैरिज कैलकुलेटर तुरंत जवाब देता है। कुंडली में विवाह योग लेख दोनों रास्तों के ग्रह संकेत समझाता है।

दूसरी शादी, NRI और अंतरजातीय विवाह

कई पाठक किसी ख़ास स्थिति के साथ इस पेज पर आते हैं। दूसरी शादी में राशि जोड़ी से ज़्यादा दोनों कुंडलियों का सातवाँ भाव और उसका स्वामी मायने रखता है, और मुफ़्त सेकंड मैरिज कैलकुलेटर यह जाँच करता है। NRI रिश्ते में, जहाँ एक साथी विदेश में रहता है, विदेशी जीवनसाथी और विदेश में बसने की गाइड नौवें और बारहवें भाव के संकेत समझाती है। अंतरजातीय या अलग समुदाय के रिश्ते में भी राशि अंक बिल्कुल उसी तरह काम करता है। हर स्थिति में इस पेज के कन्या-सिंह विषय, यानी सराहना बनाम आलोचना और गर्व बनाम विनम्रता, लागू रहते हैं। शादी के समय का अंदाज़ा शादी कब होगी लेख से लगाएँ।

पाँच मिनट में अपना कन्या-सिंह मिलान कैसे जाँचें

पहला, मुफ़्त राशि कैलकुलेटर से दोनों की चंद्र राशि पक्की करें, क्योंकि कई लोग सिर्फ़ सूर्य राशि जानते हैं। दूसरा, मुफ़्त नक्षत्र कैलकुलेटर से दोनों के जन्म नक्षत्र निकालें। तीसरा, मुफ़्त मांगलिक दोष कैलकुलेटर से दोनों का मंगल दोष देखें। चौथा, पूरा 36 गुण वाला कुंडली मिलान कराएँ, जो इस राशि-स्तर के 16 अंक की जगह आपकी दोनों कुंडलियों का असली गुण योग देता है। हर कूट का अर्थ 36 गुण मिलान गाइड में है, और जन्म तिथि या नाम से मिलान के लिए जन्म तारीख से कुंडली मिलान और नाम से कुंडली मिलान देखें।

तुलना के लिए जुड़ी हुई राशि जोड़ियाँ

हर जोड़ी की दोनों दिशाएँ अलग पेज पर पढ़ी जाती हैं, इसलिए इस पेज की तुलना सिंह और कन्या से करें, जहाँ सिंह साथी पहले है। कन्या के दूसरे मिलान के लिए कन्या और वृषभ, कन्या और मकर और कन्या और कन्या देखें, ये पृथ्वी तत्व की जोड़ियाँ हैं। सिंह के दूसरे मिलान के लिए सिंह और धनु और सिंह और मेष देखें, जो अग्नि तत्व की जोड़ियाँ हैं।

कन्या-सिंह जोड़ी के लिए विवाह मुहूर्त

पूरा मिलान होने के बाद शादी की तारीख़ विवाह मुहूर्त सूची से चुनी जाती है। त्रिकाल वाणी हर साल की सूची विवाह मुहूर्त 2026 और विवाह मुहूर्त 2027 पर देता है, और 2027 में शादी की तारीख़ कैसे चुनें तथा जन्म तिथि से विवाह मुहूर्त लेख चुनाव का तरीका बताते हैं। त्रिकाल वाणी गोचर इंजन के अनुसार विवाह का ग्रह शुक्र 14 नवंबर 2026 को मार्गी होता है, इसलिए उसके बाद की तारीख़ें चुनना आसान है। इस जोड़ी के लिए अतिरिक्त जाँच यह है कि विवाह कुंडली में बुध और सूर्य पीड़ित न हों। मांगलिक साथी हो तो मांगलिक लड़की की शादी लेख भी पढ़ें।

वैदिक उपाय

दोनों साथी अपनी चंद्र राशि के स्वामी को मज़बूत करें, इससे बुध और सूर्य की वह मैत्री भी बढ़ती है जो इस जोड़ी को जोड़ती है। उपाय 1, कन्या साथी के लिए (बुध) 1. क्या करें: भगवान गणेश को दूर्वा की कुछ पत्तियाँ अर्पित करें और ॐ बुं बुधाय नमः का 108 बार जप करें। 2. कब: हर बुधवार सुबह, स्नान के बाद। 3. खर्च: मुफ़्त से 10 रुपये तक। 4. कितने दिन: लगातार 11 बुधवार। 5. आपके लिए क्यों: बुध कन्या का स्वामी है, शांत बुध आलोचना को उपयोगी सलाह में बदल देता है। उपाय 2, सिंह साथी के लिए (सूर्य) 1. क्या करें: तांबे या स्टील के लोटे से उगते सूर्य को जल (अर्घ्य) दें और ॐ सूर्याय नमः का 12 बार जप करें। 2. कब: हर रविवार सूर्योदय के समय। 3. खर्च: मुफ़्त। 4. कितने दिन: लगातार 11 रविवार। 5. आपके लिए क्यों: सूर्य सिंह का स्वामी है, स्थिर सूर्य अहं को गर्मजोश नेतृत्व में बदलता है। एक साझा आदत दोनों के लिए काम करती है: हर शाम साथी की एक सच्ची तारीफ़। पन्ना या माणिक जैसे रत्न कभी पहला उपाय नहीं हैं, इन्हें पूरी कुंडली देखकर ही चुनें। मुफ़्त उपाय कैलकुलेटर आपकी अपनी कुंडली से उपाय सुझाता है।

शब्दावली · Glossary

अष्टकूट
आठ भागों वाली कुंडली मिलान पद्धति जो जोड़ी को 36 गुणों में अंक देती है।
भकूट
दोनों चंद्र राशियों की आपसी दूरी देखने वाला कूट, जिसके 7 गुण होते हैं।
ग्रह मैत्री
दोनों चंद्र राशियों के स्वामियों की मित्रता देखने वाला कूट, जिसके 5 गुण होते हैं।
मूलत्रिकोण
हर ग्रह की विशेष बल वाली राशि, जिससे पराशर नैसर्गिक मैत्री तय करते हैं।
नाड़ी
सबसे अधिक 8 गुण वाला कूट, जो स्वास्थ्य और संतान से जुड़ा है।
द्विर्द्वादश
वह भकूट स्थिति जिसमें एक राशि दूसरी से दूसरी और वह पहली से बारहवीं होती है।
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अनुकूलता से आगे — वह इंसान असल में कैसा है?

राशि अनुकूलता दो राशियों का मेल दिखाती है। पर विवाह दो इंसानों का रिश्ता है। किसी की कुंडली से उनके 6 कार्मिक पैटर्न — स्वभाव, निष्ठा, धन, परिवार का सम्मान, छुपी प्रवृत्ति और विवाह का भविष्य — भृगु नाड़ी के आधार पर जानें। किसी पर निर्णय नहीं, केवल समझ।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कन्या-सिंह की जोड़ी विवाह के लिए अच्छी है?+

राशि स्तर पर अनुकूलता मध्यम है (36 में से 16 गुण, लगभग 44%, उपाय आवश्यक)। विनम्रता बनाम भव्यता और आलोचना बनाम प्रशंसा में संतुलन व प्रयास ज़रूरी है। सटीक निर्णय के लिए पूरी जन्म कुंडली का अष्टकूट मिलान आवश्यक है।

कन्या-सिंह जोड़ी की सबसे बड़ी ताकत क्या है?+

पूरकता — कन्या की व्यावहारिकता व सेवा और सिंह की दृष्टि व जोश। सिंह की भव्य योजनाओं को कन्या क्रियान्वयन और ज़मीनी आधार देती है।

कन्या-सिंह रिश्ते की मुख्य चुनौती क्या है?+

आलोचना बनाम प्रशंसा और विनम्रता बनाम भव्यता — कन्या की आलोचना सिंह के अहं को चोट पहुँचाती है, सिंह की भव्यता कन्या को दिखावा लगती है। सराहना, विनम्रता और उपाय ज़रूरी हैं।

क्या यह सामान्य राशि मिलान असली कुंडली मिलान जितना सटीक है?+

नहीं। यह केवल चंद्र-राशि आधारित विश्लेषण है। असली 36-गुण अष्टकूट नक्षत्र, गण, नाड़ी, भकूट व मंगल दोष पर निर्भर है — इसके लिए त्रिकाल वाणी का कुंडली मिलान (₹51) उपयोग करें।

क्या कन्या-सिंह लव मैरिज के लिए अनुकूल है?+

संभव है, पर प्रयास माँगता है। सिंह की विनम्रता और कन्या की सराहना इसे प्रेम विवाह में स्थिर बना सकते हैं; उपाय सहायक हैं।

कन्या-सिंह जोड़ी का धन व जीवनशैली पक्ष कैसा रहता है?+

संवेदनशील पक्ष — कन्या मितव्ययी, सिंह भव्यता-प्रिय। स्पष्ट बजट और संतुलन से जीवनशैली सुरक्षित फिर भी सुरुचिपूर्ण बनती है; कन्या वित्त संभाले।

कन्या-सिंह जोड़ी के लिए कौन-से वैदिक उपाय शुभ हैं?+

बुधवार गणेश पूजा व हरी वस्तुओं का दान, रविवार सूर्य अर्घ्य व गुड़/गेहूँ दान, बुध व सूर्य मंत्र जप, विनम्रता-ध्यान। रत्न धारण से पूर्व कुंडली विश्लेषण कराएँ।

क्या कन्या-सिंह में मंगल दोष (मांगलिक) की जाँच ज़रूरी है?+

हाँ। राशि अनुकूलता मंगल दोष नहीं दर्शाती; यह कुंडली में मंगल की भाव-स्थिति से तय होता है, इसलिए विवाह से पहले अलग जाँच अवश्य कराएँ।

कन्या और सिंह का राशि मिलान 36 में से कितना है?+

राशि स्तर पर इस जोड़ी को 36 में से 16 गुण मिलते हैं, लगभग 44 प्रतिशत, इसलिए यह उपाय-आवश्यक श्रेणी में है। असली गुण योग दोनों जन्म नक्षत्रों पर निर्भर है और पूरे कुंडली मिलान से मिलता है।

क्या कन्या और सिंह का द्विर्द्वादश भकूट समस्या है?+

सिंह कन्या से बारहवीं राशि है, यानी द्विर्द्वादश भकूट, जिसे मुहूर्त चिन्तामणि साझा धन पर दबाव से जोड़ता है। वही ग्रंथ कहता है कि राशि-स्वामियों की मैत्री यह दोष हटाती है, और बुध सूर्य को मित्र मानता है, इसलिए असर हल्का होता है। साझा बजट और बुध-सूर्य के उपाय मदद करते हैं।

क्या कन्या-सिंह जोड़ी का NRI या अंतरजातीय विवाह सफल हो सकता है?+

हाँ। NRI और अंतरजातीय जोड़ों के लिए राशि अंक वैसे ही काम करता है। विदेश या समुदाय के पहलू के लिए दोनों कुंडलियों के सातवें, नौवें और बारहवें भाव देखें और पूरा कुंडली मिलान कराएँ।

कन्या-सिंह जोड़ी के लिए शादी की अच्छी तारीख़ कौन सी है?+

त्रिकाल वाणी की 2026 या 2027 की विवाह मुहूर्त सूची से तारीख़ चुनें, बेहतर हो जब शुक्र मार्गी हो। त्रिकाल वाणी गोचर इंजन के अनुसार शुक्र 14 नवंबर 2026 को मार्गी होता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

  1. [1]↑मुहूर्तचिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    वर्णो वश्यं तथा तारा योनिश्च ग्रहमैत्रकम् । गणमैत्रं भकूटं च नाडी चैते गुणाधिकाः ॥ २१ ॥
    — मुहूर्तचिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 21

    विवाह मिलान के आठ कूट हैं: वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रहमैत्री, गणमैत्री, भकूट और नाड़ी, और हर अगला कूट पिछले से अधिक गुण का है।

    The eight kootas of marriage matching are Varna, Vashya, Tara, Yoni, Graha Maitri, Gana Maitri, Bhakoot and Nadi, each carrying more points than the one before.

  2. [2]↑बृहत्पाराशरहोराशास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    त्रिकोणात् स्वात् सुखस्वाऽन्त्यधीधर्मायुःस्वतुङ्गपाः । सुहृदो रिपवश्वान्वे समाश्चोभयलक्षणाः
    — बृहत्पाराशरहोराशास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूपाध्याय · श्लोक 55

    मूलत्रिकोण से दूसरे, चौथे, पाँचवें, आठवें, नौवें और बारहवें भाव के स्वामी तथा उच्च राशि का स्वामी ग्रह के मित्र होते हैं, बाकी शत्रु, और दोनों लक्षण वाले सम।

    Counted from its mooltrikona sign, the lords of the 2nd, 4th, 5th, 8th, 9th and 12th and of its exaltation sign are friends of a planet, the others are enemies, and a lord with both qualities is neutral.

  3. [3]↑मुहूर्तचिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    मृत्युः षट्काष्टके ज्ञेयोऽपत्यहानिर्नवात्मजे । द्विर्द्वादशे निर्धनत्वं द्वयोरन्यत्र सौख्यकृत् ॥ ३१ ॥
    — मुहूर्तचिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 31

    षडष्टक भकूट मृत्यु-भय, नवपंचम संतान-हानि और द्विर्द्वादश निर्धनता से जोड़ा गया है, बाकी स्थितियाँ सुख देती हैं।

    A 6-8 bhakoot is linked with danger to life, a 9-5 bhakoot with trouble about children and a 2-12 bhakoot with poverty, while the other positions bring happiness.

  4. [4]↑मुहूर्तचिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    मैत्र्यां राशिस्वामिनोरंशनाथद्वन्द्वस्यापि स्याद्गणानां न दोषः । खेटारित्वं नाशयेत्सद्भकूटं खेटप्रीतिश्चापि दुष्टं भकूटम् ॥ ३३ ॥
    — मुहूर्तचिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 33

    राशि-स्वामियों या नवांश-स्वामियों में मैत्री हो तो गण दोष नहीं रहता, और ग्रह-मैत्री दुष्ट भकूट के दोष को भी दूर करती है।

    When the sign lords, or the navamsha lords, are friends there is no fault of gana, and friendship between the planets removes the fault of a bad bhakoot.

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RG
Rohiit Gupta
मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट

रोहित गुप्ता त्रिकाल वाणी के संस्थापक एवं मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट हैं। उनकी भविष्यवाणियाँ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS), भृगु नाड़ी और षड्बल पर आधारित हैं।

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