
राशि अनुकूलता
तुला और मिथुन की जोड़ी को राशि स्तर पर 36 में से 30 गुण (लगभग 83%) मिलते हैं, यानी उत्कृष्ट मिलान। राशि-स्वामी शुक्र और बुध परस्पर मित्र हैं और दोनों वायु तत्व की राशियाँ हैं। मिथुन तुला से नौवीं राशि है, यानी नवपंचम भकूट, जिसका दोष यह मैत्री काफ़ी हद तक हटाती है। पूरा कुंडली मिलान असली गुण बताएगा।
तुला और मिथुन के बीच भावनात्मक तालमेल हल्का, हँसी-भरा और बौद्धिक होता है। दोनों वायु तत्व के हैं, इसलिए भावनाओं को संवाद और विचारों के माध्यम से सहजता से व्यक्त करते हैं। तुला सौहार्द, संतुलन और प्रशंसा चाहती है, जबकि मिथुन विविधता, जिज्ञासा और मानसिक उत्तेजना। शुक्र-बुध मित्रता एक सहज, आनंदमय भावनात्मक प्रवाह रचती है, जिसमें भारीपन कम और ताज़गी अधिक रहती है। चुनौती यह है कि दोनों गहरी भावनात्मक प्रतिबद्धता में कभी हिचक सकते हैं। यदि दोनों भावनात्मक गहराई को भी अपनाएँ, तो उनका रिश्ता हल्केपन और समझ का सुंदर मेल बनता है, जिसमें ऊब के लिए कोई स्थान नहीं रहता।
संवाद इस जोड़ी की सबसे बड़ी ताकत है। दोनों वायु तत्व के बौद्धिक जीव हैं, इसलिए विचारों, कला, सामाजिक मुद्दों और रोज़मर्रा की बातों पर अनवरत संवाद करते हैं। तुला न्याय और संतुलन की दृष्टि लाती है, जबकि मिथुन विविधता, बुद्धि और हाज़िरजवाबी। शुक्र-बुध मित्रता संवाद को सहज और आनंदमय बनाती है। मतभेद कम होते हैं और तर्क व हास्य से सुलझ जाते हैं। मिथुन की चंचलता और तुला की अनिर्णयता कभी विषय भटका सकती है, पर मानसिक तालमेल इसे संभाल लेता है। कुल मिलाकर इनका संवाद जीवंत, प्रेरक और परस्पर समृद्ध करने वाला रहता है — यही रिश्ते की रीढ़ है।
इस जोड़ी की ताकत है असाधारण बौद्धिक तालमेल, साझा सामाजिकता और जीवन के प्रति हल्का, सकारात्मक नज़रिया। दोनों वायु तत्व के होने से मानसिक तरंग में सहज मेल रखते हैं। शुक्र-बुध मित्रता उन्हें विचारों, कला और सामाजिक जीवन में जोड़ती है। तुला सौंदर्य, सौहार्द और कूटनीति लाती है, जबकि मिथुन विविधता, बुद्धि और उत्साह। दोनों जिज्ञासु, संवादप्रिय और लचीले हैं, इसलिए जीवन में ऊब नहीं आती। मित्रता और मानसिक जुड़ाव इनके प्रेम की नींव हैं। यह उत्कृष्ट मेल एक आनंदमय, बौद्धिक और सामाजिक रूप से समृद्ध संबंध बनाता है, जिसमें संवाद और स्वतंत्रता दोनों फलते हैं।
मुख्य चुनौती गहराई और स्थिरता की है। दोनों वायु तत्व के होने से बौद्धिक तो हैं, पर भावनात्मक गहराई और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता में कभी हिचक सकते हैं। तुला अनिर्णायक है और मिथुन चंचल, इसलिए ठोस निर्णय और स्थिरता में संघर्ष संभव है। दोनों व्यावहारिक एवं घरेलू मामलों में ध्यान कम दे सकते हैं। भावनात्मक अभिव्यक्ति सतही रह सकती है, जिससे गहरा जुड़ाव अधूरा लग सकता है। आर्थिक अनुशासन भी कमज़ोर रह सकता है। समाधान यह है कि दोनों भावनात्मक गहराई, व्यावहारिकता और प्रतिबद्धता पर सजगता से ध्यान दें, तभी यह उत्कृष्ट मानसिक मेल पूर्ण और स्थायी बनता है।
तुला और मिथुन का प्रेम हल्का, हँसी-भरा और बौद्धिक रूप से उत्तेजक होता है। शुक्र-प्रेरित तुला रोमांस में सौंदर्य, सौहार्द और मानसिक तालमेल चाहती है, जबकि बुध-प्रेरित मिथुन विविधता, संवाद और जिज्ञासा लाता है। दोनों वायु तत्व के होने से आकर्षण मुख्यतः मानसिक तरंग से जन्मता है — विचारों की समानता ही चिंगारी बनती है। शुक्र-बुध मित्रता प्रेम को सहज और आनंदमय बनाती है। रिश्ते में ऊब नहीं आती क्योंकि दोनों निरंतर नया खोजते हैं। यदि दोनों भावनात्मक गहराई भी जोड़ें, तो यह प्रेम हल्केपन और समझ का सुंदर, टिकाऊ मेल बनता है।
विवाह में यह जोड़ी जीवंत, सामाजिक और बौद्धिक रूप से समृद्ध गृहस्थी बनाती है। तुला सौहार्द, सौंदर्य और संतुलन लाती है, जबकि मिथुन विविधता, उत्साह और लचीलापन। साझा वायु तत्व और शुक्र-बुध मित्रता दाम्पत्य को गहरी मानसिक समझ देते हैं। दोनों एक-दूसरे की स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं, इसलिए घुटन नहीं होती। दीर्घकालिकता के लिए भावनात्मक प्रतिबद्धता, व्यावहारिकता और आर्थिक अनुशासन पर ध्यान देना आवश्यक है। साझा रुचियाँ, संवाद और हास्य रिश्ते को ताज़ा बनाए रखते हैं। आपसी सम्मान और गहराई जोड़ने से यह विवाह आनंदमय और टिकाऊ बनता है।
घनिष्ठता में वायु-वायु का मेल कल्पनाशील, चंचल और बौद्धिक रहता है। शुक्र तुला को सौंदर्य और कोमलता देता है, जबकि बुध मिथुन को विविधता, जिज्ञासा और मानसिक उत्तेजना। आकर्षण मुख्यतः संवाद और मानसिक तालमेल से जन्मता है। दोनों प्रयोगधर्मी और हल्के-फुल्के हैं, इसलिए निकटता में ऊब नहीं आती। चुनौती यह है कि भावनात्मक गहराई कभी कम पड़ सकती है। यदि दोनों भावनात्मक उपस्थिति भी जोड़ें, तो उनके बीच एक चंचल, रोचक और संतोषजनक जुड़ाव बनता है, जिसमें मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर ताज़गी बनी रहती है।
विश्वास इस जोड़ी में संवाद के माध्यम से पनपता है। दोनों खुले, सामाजिक और बौद्धिक हैं, इसलिए पारदर्शिता स्वाभाविक रहती है। शुक्र-बुध मित्रता आपसी समझ को सहज बनाती है। हालाँकि दोनों की सामाजिकता और चंचलता कभी असुरक्षा या संदेह जगा सकती है — खासकर यदि प्रतिबद्धता स्पष्ट न हो। खुला संवाद और स्पष्ट सीमाएँ इसे दूर रखती हैं। दोनों एक-दूसरे को स्वतंत्रता देते हैं, इसलिए घुटन नहीं होती। एक बार प्रतिबद्धता और भावनात्मक सुरक्षा स्थापित हो जाए, तो दोनों एक-दूसरे के प्रति निष्ठावान और भरोसेमंद साथी बनते हैं।
जीवनशैली में दोनों सामाजिकता, विविधता और बौद्धिक आनंद को महत्व देते हैं। शुक्र तुला को सौंदर्य और विलासिता की ओर खींचता है, जबकि बुध मिथुन को विविध अनुभवों, यात्रा और संवाद पर खर्च की ओर। दोनों का यथार्थवादी आर्थिक अनुशासन कमज़ोर रह सकता है, जिससे बचत चुनौती बन सकती है। संतुलित होने पर यह जीवंत और रंगीन जीवनशैली बनती है। संयुक्त बजट, दीर्घकालिक योजना और स्पष्ट प्राथमिकताएँ अपनाने से दोनों स्थिरता पा सकते हैं। मिथुन की बुद्धि और तुला का सौंदर्यबोध मिलकर एक सक्रिय, सामाजिक और सुरुचिपूर्ण जीवनशैली रच सकते हैं।
पारिवारिक जीवन में यह जोड़ी बौद्धिकता, हास्य और खुलापन लाती है। तुला घर में सौहार्द, सौंदर्य और शिष्टाचार बनाए रखती है, जबकि मिथुन बच्चों में जिज्ञासा, संवाद-कौशल और लचीलापन का संचार करता है। दोनों संतान को खुली सोच, शिक्षा और सामाजिक कौशल सिखाने में विश्वास रखते हैं। बुध का प्रभाव बच्चों में बुद्धि और अभिव्यक्ति बढ़ाता है, जबकि शुक्र कला और सौंदर्य की रुचि। घरेलू अनुशासन और भावनात्मक स्थिरता पर थोड़ा अधिक ध्यान देना लाभकारी रहता है। यह जीवंत वातावरण बच्चों के लिए प्रेरक, बौद्धिक और सामाजिक रूप से समृद्ध सिद्ध होता है।
तुला वायु तत्व व चर राशि है और इसका स्वामी शुक्र है; मिथुन वायु तत्व व द्विस्वभाव राशि है और इसका स्वामी बुध है। दोनों वायु तत्व के होने से बौद्धिक, संवादात्मक और सामाजिक तालमेल अत्यंत सहज रहता है। शुक्र और बुध परस्पर मित्र हैं, जिससे रिश्ते में सहयोग, मधुरता और मानसिक मेल आता है।[3][4] तुला की चर प्रकृति पहल देती है, जबकि मिथुन की द्विस्वभाव प्रकृति लचीलापन। यह ग्रह-तत्व संयोजन सबसे सामंजस्यपूर्ण वायु-जोड़ियों में से एक है, जिसमें संवाद और मानसिक तरंग रिश्ते की रीढ़ बनते हैं। भावनात्मक गहराई और स्थिरता जोड़ने पर यह मेल पूर्ण और दीर्घकालिक रूप से समृद्ध बनता है।
तुला से गिनें तो मिथुन नौवीं राशि है, और मिथुन से गिनें तो तुला पाँचवीं। मुहूर्त चिन्तामणि इस नवपंचम भकूट को संतान से जुड़ी चिंता से जोड़ता है,[1] और विवाहपटल भी त्रिकोण स्थिति के लिए यही चेतावनी देता है।[2] पर मुहूर्त चिन्तामणि उसी अध्याय में छूट भी देता है: राशि-स्वामी मित्र हों और नाड़ी व नक्षत्र शुद्ध हों, तो दुष्ट भकूट होने पर भी विवाह शुभ माना गया है।[5] इस जोड़ी में मैत्री दोनों तरफ़ से है। मुहूर्त चिन्तामणि बुध के मित्रों में शुक्र का नाम लेता है,[3] और अगले ही श्लोक में शुक्र के मित्रों में बुध का।[4] तुला के पहले 15 अंश शुक्र का मूलत्रिकोण भी हैं।[6] आसान शब्दों में, पाँचवाँ भाव संतान और रचनात्मकता का है और नौवाँ भाग्य और धर्म का, और दो मित्र स्वामियों के कारण इस जोड़ी का भकूट दोष काफ़ी हद तक हटा हुआ माना जाता है। जो जाँच कभी नहीं छोड़नी, वह है दोनों जन्म नक्षत्रों से नाड़ी, जिसे नाड़ी दोष उपाय गाइड समझाती है, और बाकी भकूट प्रकार भकूट दोष गाइड में हैं।
दोनों राशियों के स्वामी मित्र और बातूनी ग्रह हैं, इसलिए लव मैरिज में बातचीत पहले आती है और प्रेम-काल सहज लगता है। असली परीक्षा तब होती है जब किसी एक को पक्की हाँ कहनी पड़ती है। अरेंज्ड मैरिज में तुला पक्ष अपने शिष्टाचार से बड़ों का मन जीतता है और मिथुन पक्ष अपनी हाज़िरजवाबी से, और पहले साल में ही दिख जाता है कि फ़ैसले होते हैं या टलते रहते हैं। लव मैरिज कुंडली मिलान गाइड बताती है कि जिन्होंने एक-दूसरे को चुन लिया है वे गुण कैसे पढ़ें, मुफ़्त लव या अरेंज्ड मैरिज कैलकुलेटर तुरंत जवाब देता है, और कुंडली में विवाह योग दोनों रास्तों के ग्रह संकेत समझाता है।
दूसरी शादी में राशि जोड़ी से ज़्यादा दोनों कुंडलियों का सातवाँ भाव (विवाह और जीवनसाथी) और उसका स्वामी मायने रखता है, और मुफ़्त सेकंड मैरिज कैलकुलेटर यही जाँचता है। NRI रिश्ते में, जहाँ एक साथी विदेश में रहता है, विदेशी जीवनसाथी और विदेश में बसने की गाइड नौवें और बारहवें भाव के संकेत समझाती है, और मुफ़्त फ़ॉरेन स्पाउस कैलकुलेटर अपनी कुंडली से जवाब देता है। अंतरजातीय या अलग समुदाय के रिश्ते में भी राशि अंक बिल्कुल उसी तरह काम करता है। शादी के समय का अंदाज़ा शादी कब होगी लेख से लगाएँ।
पहला, मुफ़्त राशि कैलकुलेटर से दोनों की चंद्र राशि पक्की करें, क्योंकि कई लोग सिर्फ़ सूर्य राशि जानते हैं। दूसरा, मुफ़्त नक्षत्र कैलकुलेटर से दोनों के जन्म नक्षत्र निकालें, क्योंकि नाड़ी और भकूट की छूट इन्हीं पर टिकी है। तीसरा, हर साथी के लिए मुफ़्त मांगलिक दोष कैलकुलेटर चलाकर देखें कि मंगल मांगलिक भाव में है या नहीं। चौथा, 51 रुपये का पूरा 36 गुण वाला कुंडली मिलान बुक करें, जिसमें राशि-स्तर के 30 अंक की जगह दोनों कुंडलियों से निकला असली गुण योग मिलता है। हर कूट का अर्थ 36 गुण मिलान गाइड में है।
उलटी दिशा की पढ़ाई अलग होती है, इसलिए इस पेज की तुलना मिथुन और तुला से करें, जहाँ मिथुन साथी पहले है। वायु तत्व की दूसरी जोड़ियों के लिए तुला और कुम्भ, मिथुन और कुम्भ और तुला और तुला देखें। शुक्र की ही दूसरी राशि के साथ तुला का मेल तुला और वृषभ में है, जहाँ दोनों राशि-स्वामी एक ही ग्रह हैं।
दोनों साथी अपनी चंद्र राशि के स्वामी को मज़बूत करें, तुला के लिए शुक्र और मिथुन के लिए बुध, और हफ़्ते में एक उपाय मिलकर करें। शुक्र और बुध मित्र हैं, इसलिए नीचे का हर उपाय उस मैत्री को भी बढ़ाता है जो इस जोड़ी को जोड़ती है। उपाय 1, तुला साथी के लिए (शुक्र) 1. क्या करें: माँ लक्ष्मी को कुछ सफ़ेद फूल और थोड़ी मिश्री अर्पित करें और ॐ शुं शुक्राय नमः का 108 बार जप करें। 2. कब: हर शुक्रवार सुबह, स्नान के बाद। 3. खर्च: 10 से 20 रुपये। 4. कितने दिन: लगातार 11 शुक्रवार। 5. आपके लिए क्यों: शुक्र तुला का स्वामी है, शांत शुक्र बार-बार तौलने की आदत को साफ़ और न्यायपूर्ण फ़ैसले में बदलता है। उपाय 2, मिथुन साथी के लिए (बुध) 1. क्या करें: भगवान गणेश को दूर्वा की कुछ पत्तियाँ या मुट्ठी भर हरी मूँग अर्पित करें और ॐ बुं बुधाय नमः का 108 बार जप करें। 2. कब: हर बुधवार सुबह, स्नान के बाद। 3. खर्च: मुफ़्त से 10 रुपये तक। 4. कितने दिन: लगातार 11 बुधवार। 5. आपके लिए क्यों: बुध मिथुन का स्वामी है, स्थिर बुध बिखरी बातों को निभाए जाने वाले वादों में बदलता है। उपाय 3, दोनों साथियों के लिए साथ में (गुरु) 1. क्या करें: साथ बैठकर पीले फूल अर्पित करें और ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः का 108 बार जप करें। 2. कब: हर गुरुवार सुबह, नाश्ते से पहले। 3. खर्च: 10 से 20 रुपये। 4. कितने दिन: लगातार 11 गुरुवार। 5. आपके लिए क्यों: दो वायु राशियों में अक्सर साझा और स्थिर दिनचर्या की कमी रहती है, और यह साप्ताहिक बैठक प्रतिबद्धता और फ़ैसले की आदत बनाती है। एक साझा आदत दोनों के काम आती है: कोई बड़ा फ़ैसला हो तो दोनों एक वाक्य में साफ़ कहें कि क्या चाहते हैं, फिर एक हफ़्ते के अंदर तय करें। हीरा, सफ़ेद पुखराज या पन्ना जैसे रत्न कभी पहला उपाय नहीं हैं, इन्हें पूरी कुंडली देखकर ही चुनें। अपने ग्रहों के हिसाब से उपाय के लिए मुफ़्त उपाय कैलकुलेटर आज़माएँ।
यह सामान्य राशि अनुकूलता है। आपकी सटीक जन्म कुंडली के आधार पर पूर्ण मिलान — मांगलिक, नाड़ी, सभी 8 कूट और 10 उपाय — मात्र ₹51 में।
कुंडली मिलान करें ₹51 →राशि अनुकूलता दो राशियों का मेल दिखाती है। पर विवाह दो इंसानों का रिश्ता है। किसी की कुंडली से उनके 6 कार्मिक पैटर्न — स्वभाव, निष्ठा, धन, परिवार का सम्मान, छुपी प्रवृत्ति और विवाह का भविष्य — भृगु नाड़ी के आधार पर जानें। किसी पर निर्णय नहीं, केवल समझ।
कार्मिक बैकग्राउंड रीडिंग ₹101 →हाँ, 36 में से 30 गुण (लगभग 83%) के साथ यह 'उत्कृष्ट' मेल है। साझा वायु तत्व और शुक्र-बुध मित्रता इसे बौद्धिक, आनंदमय और सामाजिक रूप से समृद्ध विवाह बनाती है।
असाधारण बौद्धिक तालमेल और साझा सामाजिकता। दोनों वायु तत्व के होने से मानसिक तरंग में सहज मेल रखते हैं और जीवन में ऊब नहीं आती।
भावनात्मक गहराई और स्थिरता की कमी। दोनों बौद्धिक हैं पर गहरी प्रतिबद्धता में हिचक सकते हैं, और व्यावहारिक व आर्थिक अनुशासन कमज़ोर रह सकता है।
नहीं। यह केवल चंद्र-राशि आधारित सामान्य विश्लेषण है। सटीक मिलान के लिए नक्षत्र, गण, नाड़ी और मंगल दोष देखना आवश्यक है — नीचे दिया कुंडली मिलान (₹51) उपयोग करें।
हाँ, यह जोड़ी लव मैरिज के लिए अत्यंत अनुकूल है। मित्रता और मानसिक तालमेल से प्रेम स्वाभाविक रूप से पनपता है और दोनों स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं।
जीवनशैली सामाजिक, विविध और जीवंत रहती है। दोनों का आर्थिक अनुशासन कमज़ोर रह सकता है, इसलिए संयुक्त बजट और दीर्घकालिक योजना अपनाना ज़रूरी है।
तुला हेतु शुक्र मंत्र व लक्ष्मी पूजा, मिथुन हेतु बुध मंत्र व गणेश पूजा शुभ है। बुधवार-शुक्रवार व्रत और हरे-श्वेत भोग रिश्ते की मधुरता बढ़ाते हैं।
हाँ, किसी भी विवाह से पूर्व दोनों की जन्म कुंडली में मंगल दोष की जाँच आवश्यक है। यह केवल जन्म कुंडली से तय होता है, चंद्र-राशि से नहीं।
राशि स्तर पर इस जोड़ी को 36 में से 30 गुण मिलते हैं, लगभग 83 प्रतिशत, इसलिए यह उत्कृष्ट श्रेणी में है। असली गुण योग दोनों जन्म नक्षत्रों पर निर्भर है और पूरे कुंडली मिलान से मिलता है।
मिथुन तुला से नौवीं राशि है, यानी नवपंचम भकूट, जिसे मुहूर्त चिन्तामणि संतान की चिंता से जोड़ता है।[1] वही अध्याय कहता है कि राशि-स्वामी मित्र हों और नाड़ी व नक्षत्र शुद्ध हों तो विवाह शुभ है,[5] और शुक्र-बुध परस्पर मित्र हैं। इसलिए दोष काफ़ी हद तक हट जाता है, और बाकी के लिए नाड़ी जाँच और इस पेज का गुरुवार वाला उपाय काफ़ी है।
हाँ। मुहूर्त चिन्तामणि शुक्र को बुध का मित्र बताता है[3] और बुध को शुक्र का मित्र,[4] इसलिए तुला और मिथुन की ग्रह मैत्री दोनों तरफ़ से अनुकूल है। यही दोतरफ़ा मैत्री इस जोड़ी के ऊँचे राशि अंक की मुख्य वजह है।
हाँ। हर स्थिति में राशि अंक एक जैसा काम करता है। दूसरी शादी के लिए दोनों कुंडलियों का सातवाँ भाव और उसका स्वामी, NRI रिश्ते के लिए नौवाँ और बारहवाँ भाव देखें, फिर 51 रुपये के पूरे कुंडली मिलान से सब पक्का करें।
मृत्युः षट्काष्टके ज्ञेयोऽपत्यहानिर्नवात्मजे । द्विर्द्वादशे निर्धनत्वं द्वयोरन्यत्र सौख्यकृत् ॥ ३१ ॥षडष्टक भकूट मृत्यु-भय, नवपंचम संतान-हानि और द्विर्द्वादश निर्धनता से जोड़ा गया है, बाकी स्थितियाँ सुख देती हैं।
A 6-8 bhakoot is linked with danger to life, a 9-5 bhakoot with trouble about children and a 2-12 bhakoot with poverty, while the other positions bring happiness.
षट्काष्टके मरणवैरवियोगदोषा द्विर् द्वादशे निधनता ऽप्रजाता त्रिकोणे। प्रीतिः परा निगदिता समसप्तकेषु शेषेष्व् अनेकविधसौख्यसुतार्थसंपत्॥षडष्टक (6-8) में मृत्यु, वैर और वियोग के दोष, द्विर्द्वादश (2-12) में निर्धनता (गरीबी) और त्रिकोण (नवपंचम) में संतान की कमी कही गई है, जबकि समसप्तक, यानी एक ही राशि (1-1) और आपसी सप्तम (1-7), में परम प्रीति और बाकी स्थितियों में अनेक प्रकार का सुख, संतान और धन मिलता है।
Signs in a 6-8 placement bring the faults of death, enmity and separation, a 2-12 placement brings poverty and a trikona (5-9) placement brings lack of children, while samasaptaka, meaning the same sign (1-1) and the mutual 7th (1-7), gives the highest affection, and the remaining placements bring many kinds of happiness, children and wealth.
मित्राणि द्युमणेः कुजेज्यशशिनः शुक्रार्कजौ वैरिणौ सौम्यश्चास्य समो विधोर्बुधरवी मित्रे न चास्य द्विषत् । शेषाश्चास्य समाः कुजस्य सुहृदश्चन्द्रेज्यसूर्या बुधः शत्रुः शुक्रशनी समौ च शशभृत्सूनोः सिताहस्करौ ॥ २७ ॥सूर्य के मित्र मंगल, गुरु और चंद्र, शत्रु शुक्र और शनि, और बुध सम है, चंद्र के मित्र बुध और सूर्य हैं और कोई शत्रु नहीं, मंगल के मित्र चंद्र, गुरु और सूर्य और शत्रु बुध है, और श्लोक के अंत में चंद्रपुत्र बुध के मित्र शुक्र और सूर्य बताए गए हैं।
The Sun has Mars, Jupiter and the Moon as friends, Venus and Saturn as enemies and Mercury as neutral, the Moon has Mercury and the Sun as friends and no enemy, Mars has the Moon, Jupiter and the Sun as friends and Mercury as enemy, and the verse closes by naming Venus and the Sun as the friends of Mercury, the son of the Moon.
मित्रे चास्य रिपुः शशी गुरुशनिक्ष्माजाः समा गीष्पतेर्मित्राण्यर्ककुजेन्दवो बुधसितौ शत्रू समः सूर्यजः । मित्रे सौम्यशनी कवेः शशिरवी शत्रू कुजेज्यौ समौ मित्रे शुक्रबुधौ शनेः शशिरविक्ष्माजा द्विषोऽन्यः समः ॥ २८ ॥बुध का शत्रु चंद्र है और गुरु, शनि, मंगल सम हैं, गुरु के मित्र सूर्य, मंगल और चंद्र तथा शत्रु बुध और शुक्र हैं, शुक्र के मित्र बुध और शनि, शत्रु चंद्र और सूर्य, और मंगल व गुरु सम हैं, तथा शनि के मित्र शुक्र और बुध हैं।
Mercury holds the Moon as enemy and Jupiter, Saturn and Mars as neutral, Jupiter has the Sun, Mars and the Moon as friends and Mercury and Venus as enemies, Venus has Mercury and Saturn as friends, the Moon and the Sun as enemies and Mars and Jupiter as neutral, and Saturn has Venus and Mercury as friends.
प्रोक्ते दुष्टभकूटके परिणयस्त्वेकाधिपत्ये शुभोऽथो राशीश्वरसौहृदेऽपि गदितो नाड्यृक्षशुद्धिर्यदि । अन्यर्क्षेंऽशपयोर्बलित्वसखिते नाड्यृक्षशुद्धौ तथा ताराशुद्धिवशेन राशिवशताभावे निरुक्तो बुधैः ॥ ३२ ॥दुष्ट भकूट होने पर भी विवाह शुभ है जब दोनों राशियों का स्वामी एक हो, या राशि-स्वामी मित्र हों और नाड़ी व नक्षत्र शुद्ध हों, और विद्वान नवांश-स्वामियों के बल या मैत्री, तारा शुद्धि या राशियों के परस्पर वश्य होने पर भी इसे मानते हैं।
Even with a bad bhakoot the marriage is auspicious when both signs have the same lord, or when the sign lords are friends provided the Nadi and the nakshatras are clean, and the learned also allow it through strong or friendly navamsha lords, clean tara or mutual vashya of the signs.
तुले शुक्रस्य तिथ्यंशास्त्रिकोणमपरे स्वभम् । शनेः कुम्भे नखांशाश्च त्रिकोणमपरे स्वभम्तुला में पहले 15 अंश शुक्र का मूलत्रिकोण हैं और बाकी उसकी स्वराशि, तथा कुम्भ में पहले 20 अंश शनि का मूलत्रिकोण हैं और बाकी उसकी स्वराशि।
In Libra the first 15 degrees are the mooltrikona of Venus and the rest is its own sign, and in Aquarius the first 20 degrees are the mooltrikona of Saturn and the rest is its own sign.
रोहित गुप्ता त्रिकाल वाणी के संस्थापक एवं मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट हैं। उनकी भविष्यवाणियाँ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS), भृगु नाड़ी और षड्बल पर आधारित हैं।