आज का राहुकाल कैसे निकालें: पूरा नियम
Trikaal Sandesh — Direct Answer
राहुकाल सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर भागों में बाँटकर निकाला जाता है। रविवार को आठवाँ, सोमवार को दूसरा, मंगलवार को सातवाँ, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, शुक्रवार को चौथा और शनिवार को तीसरा भाग राहुकाल होता है। दिल्ली में 14 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को यह 12:06 से 13:31 है।
Deep Dive Analysis
आज का राहुकाल: संक्षिप्त उत्तर
आज का राहुकाल जानने का सबसे सीधा तरीका है कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँट दें और अपने वार का तय भाग चुन लें। दिल्ली में बुधवार 14 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय 06:25 और सूर्यास्त 17:48 था, इसलिए पाँचवाँ भाग 12:06 से 13:31 बैठा। हर शहर और हर ऋतु में सूर्योदय बदलता है, इसलिए रोज़ का सही समय हमारे आज के पंचांग में सीधे देख सकते हैं। नए शुभ काम के चयन के लिए मुफ़्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर भी उपलब्ध है।
राहुकाल क्या है
राहुकाल पंचांग का वह रोज़ आने वाला डेढ़ घंटे के आसपास का समय है जिसे परंपरा में नए शुभ कार्य शुरू करने के लिए टालने योग्य माना जाता है। यह तिथि या नक्षत्र की तरह चलने वाला नहीं, बल्कि वार और सूर्योदय पर टिका हुआ खंड है। दक्षिण भारत में इसे राहु कालम के नाम से बहुत माना जाता है और उत्तर भारत में भी पंचांग के साथ इसे देखा जाता है। राहुकाल कोई दंड-काल नहीं है, बल्कि सावधानी का संकेत है। सामान्य दिनचर्या इसमें चलती रहती है। तिथि का साथ पढ़ने के लिए आज कौन सी तिथि है देखें।
राहुकाल कैसे निकालते हैं: आठ भाग का नियम
गणना तीन चरणों की है। पहले अपने शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त देखिए। फिर इन दोनों के बीच के कुल मिनट निकालकर आठ से भाग दीजिए, जो एक भाग का समय देगा। अंत में वार के अनुसार तय क्रमांक वाला भाग चुन लीजिए। दिल्ली के उदाहरण में सूर्योदय से सूर्यास्त तक 683 मिनट थे, यानी हर भाग लगभग 85 मिनट का था। यही कारण है कि गर्मियों के लंबे दिनों में राहुकाल थोड़ा लंबा और सर्दियों के छोटे दिनों में थोड़ा छोटा हो जाता है। यह तरीका चौघड़िया की गणना से मेल खाता है।
शास्त्र क्या कहता है: दिन के आठ भाग और गुलिक
यहाँ ईमानदारी से एक भेद साफ करना ज़रूरी है। हमारे पुस्तकालय में उपलब्ध बृहत् पराशर होरा शास्त्र के पाठ में राहुकाल शब्द नहीं मिलता, पर दिन को आठ भागों में बाँटकर वारेश से क्रम गिनने की वही विधि मिलती है। श्लोक कहता है कि रविवार से शनिवार तक गुलिक आदि का निरूपण होता है, दिन को आठ भाग करके वारेश से क्रम से गिना जाता है[1]। अगले श्लोक में आठवाँ भाग स्वामी-रहित और शनि का भाग गुलिक बताया गया है[2]। इसलिए राहुकाल की वार-वार तालिका परंपरागत पंचांग से ली जाती है, और आठ भाग की बनावट शास्त्र से।
कौन-सा भाग किस वार को पड़ता है
क्रम याद रखने का सरल तरीका यह है: रविवार को आठवाँ भाग, सोमवार को दूसरा, मंगलवार को सातवाँ, बुधवार को पाँचवाँ, गुरुवार को छठा, शुक्रवार को चौथा और शनिवार को तीसरा भाग राहुकाल होता है। यानी क्रमांक आठ, दो, सात, पाँच, छह, चार और तीन। इन अंकों को रविवार से शनिवार तक क्रम में याद कर लेने पर किसी तालिका की ज़रूरत नहीं रहती। हर वार के लिए सूर्योदय से गिनिए: पहला भाग सूर्योदय से शुरू होता है और आठवाँ सूर्यास्त पर समाप्त होता है। रोज़ का ठीक समय पंचांग पृष्ठ पर मिलता है।
उदाहरण: बुधवार, दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026
उस दिन सूर्योदय 06:25 और सूर्यास्त 17:48 था। हर भाग लगभग 85 मिनट का बना। बुधवार का राहुकाल पाँचवाँ भाग होता है, इसलिए वह 12:06 पर शुरू होकर 13:31 पर समाप्त हुआ। उसी दिन गुलिक काल, जो बुधवार को चौथे भाग में पड़ता है, 10:41 से 12:06 तक रहा, और अभिजित मुहूर्त 11:43 से 12:29 तक। यह उदाहरण हमारे पंचांग इंजन की गणना से लिया गया है, जो स्विस एफेमेरिस पर चलता है। आप किसी भी दिन की जाँच आज का चौघड़िया और पंचांग के साथ मिलाकर कर सकते हैं।
सूर्योदय बदलने से राहुकाल क्यों बदलता है
राहुकाल की घड़ी-वाली तालिका हर जगह एक जैसी नहीं चलती, क्योंकि उसकी नींव सूर्योदय और सूर्यास्त हैं। मध्य अक्टूबर के आसपास दिल्ली के लिए लगभग समय ऐसे बनते हैं: रविवार 16:23 से 17:48, सोमवार 07:50 से 09:15, मंगलवार 14:57 से 16:22, बुधवार 12:06 से 13:31, गुरुवार 13:31 से 14:57, शुक्रवार 10:41 से 12:06 और शनिवार 09:15 से 10:41। मुंबई, कोलकाता या बेंगलुरु में ये समय कुछ मिनट आगे-पीछे होंगे। इसलिए नागपुर या पटना जैसे शहर के लिए सीधे उसी तारीख का पंचांग देखना सही है। रोज़ का सही समय आज का पंचांग में मिलता है।
छह से छह वाले दिन की मोटी तालिका
यदि कभी पंचांग हाथ में न हो, तो एक मोटा अनुमान चल सकता है जिसमें दिन को सुबह 6 से शाम 6 तक मान लिया जाए। तब रविवार को 16:30 से 18:00, सोमवार को 07:30 से 09:00, मंगलवार को 15:00 से 16:30, बुधवार को 12:00 से 13:30, गुरुवार को 13:30 से 15:00, शुक्रवार को 10:30 से 12:00 और शनिवार को 09:00 से 10:30 बैठता है। यह केवल अनुमान है और असली समय सूर्योदय के साथ थोड़ा खिसकता है। सटीक मुहूर्त के लिए शुभ मुहूर्त मार्गदर्शिका में तरीका मिलता है।
गुलिक काल क्या है और राहुकाल से कैसे अलग है
गुलिक काल भी दिन के उन्हीं आठ भागों में से एक होता है, पर उसका निर्धारण शनि के भाग से होता है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र में कहा गया है कि आठवाँ खंड स्वामी-रहित है, शनि का अंश गुलिक कहलाता है और सूर्य का अंश काल कहलाता है[3]। इसलिए गुलिक की जड़ शास्त्र में है और इसी विधि से वह जन्म कुंडली में भी निकाला जाता है। राहुकाल दैनिक मुहूर्त का साधन है, जबकि गुलिक कुंडली का एक संवेदनशील बिंदु भी है। दोनों को एक मान लेना ग़लत होगा। उदाहरण में बुधवार को राहुकाल 12:06 और गुलिक 10:41 से शुरू हुए।
अभिजित मुहूर्त और राहुकाल का रिश्ता
अभिजित मुहूर्त दिन के मध्य का लगभग पैंतालीस मिनट का शुभ खंड है, और राहुकाल कभी-कभी उसके ऊपर या आसपास पड़ जाता है। 14 अक्टूबर 2026 को अभिजित 11:43 से 12:29 था, जबकि उसी दिन राहुकाल 12:06 से शुरू हुआ। यानी अभिजित का अंतिम हिस्सा राहुकाल से टकराया। ऐसे दिनों में अधिकतर पंचांग अभिजित के शुरुआती हिस्से को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं। यह केवल सामान्य परंपरा है, और बड़े निर्णयों के लिए चंद्र, लग्न और अपनी कुंडली भी देखी जाती है। इनके लिए मुफ़्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर काम आता है।
राहुकाल में क्या न करें
परंपरा में राहुकाल के दौरान नए और शुभ कार्य की शुरुआत टालने को कहा जाता है: नई दुकान या दफ़्तर का उद्घाटन, गृह-प्रवेश, विवाह जैसे संस्कार, नया वाहन या मकान खरीदना, नई नौकरी की जॉइनिंग और नया व्यापारिक सौदा। यात्रा की शुरुआत भी इसी सूची में आती है। कारण यह माना जाता है कि इस खंड में आरंभ किए गए काम में रुकावट या अस्थिरता की संभावना रहती है। यह भय की बात नहीं, योजना की बात है, क्योंकि समय बदला जा सकता हो तो डेढ़ घंटा आगे-पीछे करने में कोई हानि नहीं। नौकरी के लिए जॉब जॉइनिंग मुहूर्त विस्तार से बताया गया है।
राहुकाल में क्या किया जा सकता है
राहुकाल में जो काम पहले से चल रहा है, उसे बीच में रोकना ज़रूरी नहीं माना जाता। रोज़ की दिनचर्या, भोजन, पढ़ाई, सफाई, पहले से जारी यात्रा और सेवा-कार्य चलते रहते हैं। जप, ध्यान और शांत पाठ के लिए यह समय अच्छा भी माना जाता है, क्योंकि राहु की ऊर्जा चंचल मन को स्थिर करने की माँग रखती है। जो कार्य टाला नहीं जा सकता, उसके लिए नीचे का सरल उपाय है। मुख्य सिद्धांत यह है कि आरंभ से बचें, निरंतरता का सम्मान करें। पूजा के काल का विस्तार एकादशी व्रत कब है 2026 में समझाया गया है।
क्या राहुकाल में यात्रा पर निकलना अशुभ है
यात्रा पर निकलने की शुरुआत को परंपरा राहुकाल में टालने को कहती है, पर यह कठोर निषेध नहीं बल्कि पसंद का नियम है। अगर ट्रेन, फ्लाइट या ऑफ़िस का समय तय है और उसे बदलना संभव नहीं, तो यात्रा निरस्त करने की ज़रूरत नहीं। ऐसे में घर से निकलने से पहले संक्षिप्त प्रार्थना कर लेना और मन को शांत रखना पर्याप्त माना जाता है। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार लोगों के लिए सुविधा को प्राथमिकता दीजिए। जो यात्रा कई दिन की है, उसमें अकेले राहुकाल से ज़्यादा आपके लग्न और चंद्र का महत्व रहता है।
राहुकाल बनाम चौघड़िया: कौन किस काम के लिए
चौघड़िया दिन को आठ भागों में बाँटकर अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, रोग और काल जैसे नाम देता है, जबकि राहुकाल केवल एक विशेष भाग को अलग से चिह्नित करता है। दोनों एक साथ देखे जा सकते हैं, पर किसी एक को पूरा आधार मान लेना ज़रूरी नहीं। जब चौघड़िया शुभ हो और राहुकाल भी हो, तो अधिकतर लोग बड़े आरंभ के लिए अगली शुभ चौघड़िया खोजते हैं। दोनों का विस्तृत तुलनात्मक परिचय आज का चौघड़िया और पंचांग और पंचांग और चौघड़िया गाइड में है।
विवाह, गृह-प्रवेश और बड़े संस्कार
विवाह, सगाई, गृह-प्रवेश और नामकरण जैसे संस्कारों में राहुकाल से बचना सबसे अधिक माना जाता है, क्योंकि इनमें एक बार का आरंभ पूरे जीवन से जुड़ता है। फिर भी इन संस्कारों की तिथि, लग्न और चंद्र पहले आते हैं, और राहुकाल उसके भीतर एक छोटी छलनी की तरह काम करता है। नवंबर के विवाह मुहूर्त का पूरा चयन नवंबर 2026 विवाह मुहूर्त में, और तुलसी विवाह की विधि तुलसी विवाह 2026 में है। देवउठनी एकादशी के पूजन का समय देवउठनी एकादशी 2026 में देखा जा सकता है।
नौकरी: इंटरव्यू, जॉइनिंग और इस्तीफ़ा
नौकरी से जुड़े तीन पल सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं: इंटरव्यू देने जाना, नई जगह जॉइन करना और पुरानी जगह से इस्तीफ़ा देना। जॉइनिंग को राहुकाल से बाहर रखना परंपरा का सबसे प्रचलित नियम है। इंटरव्यू का समय कंपनी तय करती है, इसलिए वहाँ राहुकाल का आग्रह नहीं किया जा सकता, पर घर से निकलने से पहले शांत मन रखना उपयोगी है। इस्तीफ़े के लिए समय का चुनाव इस्तीफ़ा मुहूर्त कैलकुलेटर में, और आवेदन भेजने का समय आवेदन भेजने का शुभ मुहूर्त में विस्तार से मिलता है।
वाहन खरीद और डिलीवरी का समय
नया वाहन लेना हो तो बुकिंग, भुगतान और डिलीवरी तीन अलग बिंदु होते हैं, और परंपरा में डिलीवरी या चाबी लेने के पल को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे राहुकाल से बचाकर शुभ चौघड़िया में रखना आम सलाह है। शोरूम की कतार या पंजीकरण का समय कभी-कभी तय होता है, तो उसे बदलने की जगह केवल चाबी हाथ में लेने का क्षण चुन लिया जाता है। विस्तृत प्रक्रिया वाहन डिलीवरी का शुभ मुहूर्त में है, और सामान्य जाँच के लिए मुफ़्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर खुला है।
मकान शिफ्टिंग और भूमि पूजन
किराए के मकान में जाना हो या अपने नए घर में, शिफ्टिंग का पहला पल और पहली पूजा राहुकाल से बाहर रखने की सलाह दी जाती है। सामान ढोने का पूरा दिन राहुकाल से नहीं रुकता, बल्कि पूजा, दीप और पहले प्रवेश का समय सावधानी से चुना जाता है। भूमि पूजन और शिलान्यास जैसे संस्कारों में यह नियम और भी कड़ाई से माना जाता है। शिफ्टिंग की विधि किराए के मकान में शिफ्टिंग मुहूर्त में और भूमि पूजन का समय भूमि पूजन और शिलान्यास का शुभ मुहूर्त में विस्तार से मिलता है।
परीक्षा-फ़ॉर्म, आवेदन और दाखिला
फ़ॉर्म भरना, आवेदन जमा करना और दाखिले की प्रक्रिया शुरू करना ऐसे कार्य हैं जिनके आरंभ का क्षण सुविधा से तय हो सकता है। इसलिए परीक्षा-फ़ॉर्म की पहली प्रविष्टि या अंतिम सबमिट राहुकाल में न पड़े, इतना ध्यान रखना काफी है। अंतिम तारीख़ के दबाव में डेढ़ घंटे का इंतज़ार ख़तरा बन जाए, तो सुविधा को प्राथमिकता दीजिए। इस विषय के सरल तरीके परीक्षा फ़ॉर्म भरने का शुभ मुहूर्त और दाखिले का शुभ मुहूर्त में विस्तार से दिए गए हैं।
दुकान, दफ़्तर और नया व्यापार
नई दुकान, नया दफ़्तर या नया ऑनलाइन चैनल शुरू करते समय पहला उद्घाटन, पहला सौदा और पहली बिक्री का पल सबसे अहम माना जाता है। इस पल को राहुकाल से बाहर और शुभ चौघड़िया में रखना सबसे प्रचलित सलाह है। व्यापार में अचानक आए ऑर्डर या ग्राहक को राहुकाल के नाम पर लौटाना व्यावहारिक नहीं है। इसलिए पहले दिन की योजना बनाते समय समय पहले से तय रखिए। विस्तृत विधि दुकान या ऑफ़िस खोलने का शुभ मुहूर्त और चैनल लॉन्च का शुभ मुहूर्त में दी गई है।
पूजा, व्रत और अमावस्या-पूर्णिमा
व्रत और पूजा की तिथियों में राहुकाल का सवाल अक्सर उठता है, और यहाँ संतुलन ज़रूरी है। दैनिक प्रार्थना, जप और ध्यान राहुकाल में भी चलते हैं। किसी विशेष पूजा या हवन की शुरुआत का क्षण शुभ चौघड़िया में रखना सामान्य सलाह है। अमावस्या और पूर्णिमा जैसे दिनों में तर्पण और दान का समय सुबह के सरल क्रम में रखा जाता है। इन दिनों की तारीख़ें अमावस्या कब है 2026 और पूर्णिमा कब है 2026 में, और महीने की अमावस्या इस महीने की अमावस्या में देखें।
राहु ग्रह से राहुकाल का संबंध
राहुकाल का नाम राहु ग्रह से आता है, पर इसका अर्थ यह नहीं कि राहु उस समय आपके विरुद्ध काम करता है। राहु को ज्योतिष में छाया ग्रह, महत्वाकांक्षा, भ्रम और अप्रत्याशित बदलाव का कारक माना जाता है। परंपरा में यह खंड इसी अस्थिरता के प्रतीक के रूप में आरंभ-कार्यों के लिए टाला जाता है। राहु का कुंडली में वास्तविक प्रभाव उसके भाव, दशा और गोचर से तय होता है, न कि रोज़ के इस खंड से। राहु की प्रकृति राहु क्या है में और राहु की महादशा के असर राहु महादशा के प्रभाव में समझाए गए हैं।
राहु की दशा या गोचर वाले लोग राहुकाल को कैसे समझें
जिनकी कुंडली में राहु की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, वे अक्सर राहुकाल से ज़्यादा डर जाते हैं। यह डर अनावश्यक है, क्योंकि रोज़ का राहुकाल और आपकी दशा दो अलग साधन हैं। दशा में असली काम आत्म-अनुशासन, स्पष्ट निर्णय और जल्दबाज़ी से बचने का है। राहु के चल रहे गोचर का सामान्य असर राहु-केतु गोचर 2026 खतरनाक है क्या और क्या राहु-केतु गोचर 2026 ख़तरनाक है में बताया गया है। भ्रम और उलझन के लक्षण राहु अंतर्दशा की उलझन में पहचाने जा सकते हैं।
राहुकाल से जुड़ी पाँच आम भ्रांतियाँ
पहली भ्रांति यह है कि राहुकाल में कुछ भी करना अनर्थ है, जबकि परंपरा केवल नए शुभ आरंभ को टालने को कहती है। दूसरी भ्रांति है कि राहुकाल हर शहर में एक ही घड़ी पर होता है, जबकि वह सूर्योदय से बनता है। तीसरी भ्रांति है कि राहुकाल का मतलब राहु का दोष है। चौथी है कि पूजा-पाठ राहुकाल में नहीं हो सकता, जबकि जप और ध्यान सहज चलते हैं। पाँचवीं है कि राहुकाल मिस हुआ तो कार्य निष्फल, जबकि कार्य की सफलता मेहनत, इरादे और दशा पर भी टिकी है। इन सबका निचोड़ यह है कि राहुकाल को सलाह की तरह लें, आदेश की तरह नहीं।
टाला न जा सकने वाले काम के लिए पाँच पंक्तियों का उपाय
क्या करें: यदि काम राहुकाल में ही शुरू करना पड़े, तो आरंभ से पहले एक दीप जलाकर कुछ क्षण शांत प्रार्थना करें। क्यों: इससे मन की घबराहट घटती है और निर्णय साफ रहता है। कैसे: घी का दीप, एक गिलास जल और अपने इष्ट का स्मरण पर्याप्त है, फिर काम को सहज भाव से शुरू करें। कब: आरंभ से ठीक पहले, लंबी विधि की आवश्यकता नहीं। सावधानी: किसी भी ऐसे व्यक्ति के कहने पर महँगा अनुष्ठान न करें जो राहुकाल के नाम पर डराए।
डर के व्यापार से बचें: हमारा तरीका
राहुकाल जैसे सरल विषय के नाम पर कई जगह घबराहट फैलाई जाती है, जैसे कि इस घड़ी में लिया गया निर्णय बिगड़ जाएगा। हमारा तरीका इससे उलटा है। हम गणना पूरी पारदर्शिता से बताते हैं, शास्त्र और परंपरा का अंतर साफ़ रखते हैं और आपको वही सलाह देते हैं जो व्यावहारिक हो। राहुकाल को सावधानी का संकेत समझिए, आपकी स्वतंत्रता का अवरोध नहीं। हमारी सोच का परिचय संस्थापक पृष्ठ पर पढ़ा जा सकता है, और सटीक गणना के लिए पंचांग खुला है।
बड़े निर्णय के लिए अकेला राहुकाल काफी नहीं
विवाह, मकान, नौकरी या व्यापार जैसे बड़े निर्णयों में राहुकाल केवल एक छलनी है, पूरा मुहूर्त नहीं। पूरा मुहूर्त तिथि, वार, नक्षत्र, योग, लग्न और चंद्र की स्थिति से बनता है, और व्यक्ति की अपनी कुंडली भी देखी जाती है। इसलिए पहले अपने शुभ वार और अनुकूल समय की जाँच कीजिए। इसके लिए मुफ़्त लकी डे कैलकुलेटर और शुभ मुहूर्त मार्गदर्शिका उपयोगी हैं। जब निर्णय बड़ा हो, तब विस्तार से कुंडली-आधारित मार्गदर्शन लेना बेहतर रहता है।
आज का राहुकाल कहाँ देखें और अगला कदम
रोज़ का सटीक राहुकाल, गुलिक काल, अभिजित मुहूर्त, तिथि और नक्षत्र आप हमारे आज के पंचांग पर एक ही स्क्रीन में देख सकते हैं। हमारा पंचांग इंजन स्विस एफेमेरिस पर चलता है और दिल्ली एनसीआर के लिए गणना करता है। अपनी कुंडली के आधार पर शुभ समय खोजना हो तो मुफ़्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर खोलें। और यदि कोई बड़ा निर्णय सामने है, तो कुंडली-आधारित गहरी कार्मिक बैकग्राउंड रीडिंग भी उपलब्ध है।
Apna Personalized Analysis Lein
Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:
शब्दावली · Glossary
- राहुकाल
- वार और सूर्योदय पर आधारित दैनिक खंड, जिसमें परंपरा नए शुभ आरंभ को टालने को कहती है।
- गुलिक काल
- दिन के आठ भागों में शनि के भाग से बनने वाला खंड, जो कुंडली में भी देखा जाता है।
- अभिजित मुहूर्त
- दिन के मध्य का लगभग पैंतालीस मिनट का शुभ खंड।
- चौघड़िया
- दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटकर शुभ-अशुभ समय बताने वाली प्रणाली।
- वारेश
- सप्ताह के दिन का स्वामी ग्रह, जैसे बुधवार का बुध।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
रविवारादिशन्यन्तं गुलिकादि निरूप्यते । दिवसानष्टधा भक्त्वा वारेशाद् गणेयत् क्रमात्
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूप अध्याय · श्लोक 66रविवार से शनिवार तक गुलिक आदि का निरूपण होता है: दिन को आठ भागों में बाँटकर वारेश से क्रम से गिनें।
Gulika and the like are determined from Sunday to Saturday: divide the day into eight parts and count in order from the weekday lord.
अष्ट्मोंऽशो निरीशः स्याच्छन्यंशो गुलिकःस्मृतः । रात्रिमप्यष्टधा कृत्वा वारेशात् पञ्चमादितः
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूप अध्याय · श्लोक 67आठवाँ अंश स्वामी-रहित है और शनि का अंश गुलिक कहा गया है, रात को भी आठ भागों में बाँटकर वारेश से पाँचवें से गिनें।
The eighth part has no lord and the Saturn part is Gulika, the night is also divided into eight, counting from the fifth from the weekday lord.
गणयेदष्टमः खण्डो निष्यतिः परिकीर्तितः । श्न्यंशो गुलिकः प्रोक्तो रव्यंशः कालसञ्ज्ञकः
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूप अध्याय · श्लोक 68आठवाँ खंड स्वामी-रहित है, शनि का अंश गुलिक और सूर्य का अंश काल कहलाता है।
The eighth segment is lordless, the Saturn part is called Gulika and the Sun part is called Kala.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
आज का राहुकाल कितने बजे है?
राहुकाल आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर है। दिन को आठ भाग करें और अपने वार का भाग चुनें: रविवार आठवाँ, सोमवार दूसरा, मंगलवार सातवाँ, बुधवार पाँचवाँ, गुरुवार छठा, शुक्रवार चौथा और शनिवार तीसरा। दिल्ली में 14 अक्टूबर 2026 को बुधवार का राहुकाल 12:06 से 13:31 था।
राहुकाल क्या होता है?
राहुकाल वार और सूर्योदय पर आधारित डेढ़ घंटे के आसपास का खंड है, जिसमें परंपरा नए शुभ कार्य की शुरुआत टालने को कहती है। यह कोई दंड-काल नहीं, बल्कि सावधानी का संकेत है। चल रहे सामान्य काम और दैनिक पूजा इसमें जारी रखे जा सकते हैं।
राहुकाल कैसे निकालते हैं?
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के कुल मिनट निकालिए, उन्हें आठ से भाग दीजिए और अपने वार का क्रमांक वाला भाग चुनिए। पहला भाग सूर्योदय से शुरू होता है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र का आठ भाग वाला विधान इसी पद्धति की जड़ है, जबकि वार-वार तालिका परंपरागत पंचांग से ली जाती है।
राहुकाल में क्या नहीं करना चाहिए?
परंपरा के अनुसार नए शुभ कार्य, जैसे दुकान का उद्घाटन, गृह-प्रवेश, विवाह, नया वाहन या मकान लेना, नई नौकरी जॉइन करना और नए सौदे की शुरुआत टालने की सलाह दी जाती है। यात्रा की शुरुआत भी इसी सूची में आती है, पर पहले से तय यात्रा रद्द करना आवश्यक नहीं माना जाता।
क्या राहुकाल में पूजा या जप कर सकते हैं?
हाँ, दैनिक पूजा, जप, ध्यान और शांत पाठ राहुकाल में भी किए जाते हैं। केवल किसी विशेष पूजा, हवन या संस्कार की शुरुआत का क्षण शुभ चौघड़िया में रखने की सामान्य सलाह है। राहुकाल का उद्देश्य पूजा रोकना नहीं, बड़े आरंभ को सोच-समझकर चुनना है।
क्या राहुकाल और गुलिक काल एक ही हैं?
नहीं, दोनों दिन के आठ भागों में से अलग भाग हैं। गुलिक का निर्धारण शनि के भाग से होता है और बृहत् पराशर होरा शास्त्र में इसका स्पष्ट विधान है। राहुकाल दैनिक मुहूर्त का साधन है, जबकि गुलिक कुंडली में भी एक संवेदनशील बिंदु माना जाता है।
क्या हर शहर में राहुकाल का समय अलग होता है?
हाँ, क्योंकि हर शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त अलग होता है। दिल्ली और मुंबई के राहुकाल में कुछ मिनट का अंतर आ जाता है, और गर्मी-सर्दी में भाग की लंबाई भी बदलती है। इसलिए अपने शहर और तारीख़ का पंचांग देखना सही है।
क्या राहुकाल में यात्रा शुरू करना अशुभ है?
परंपरा यात्रा की शुरुआत राहुकाल में टालने को कहती है, पर यह कठोर निषेध नहीं है। जिन यात्राओं का समय बदला नहीं जा सकता, उनमें संक्षिप्त प्रार्थना और शांत मन पर्याप्त माना जाता है। बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमारों के लिए सुविधा को प्राथमिकता दें।
क्या राहुकाल से राहु दोष का संबंध है?
नहीं, राहुकाल का नाम राहु से है, पर कुंडली में राहु का वास्तविक प्रभाव उसके भाव, दशा और गोचर से तय होता है। रोज़ का राहुकाल राहु दोष का संकेत नहीं देता। इसलिए राहुकाल देखकर किसी दोष या विपत्ति का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
नौकरी की जॉइनिंग राहुकाल में हो तो क्या करें?
यदि कंपनी का समय बदला नहीं जा सकता, तो आरंभ से पहले एक छोटा दीप और शांत प्रार्थना पर्याप्त है, और महँगा अनुष्ठान आवश्यक नहीं। यदि समय लचीला हो, तो डेढ़ घंटे आगे या पीछे किसी शुभ चौघड़िया में जॉइन करना परंपरा के अनुसार बेहतर माना जाता है।
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