शश योग क्या है: कुंडली में फल, करियर, विवाह और उपाय
Trikaal Sandesh — Direct Answer
शश योग पंच महापुरुष योगों में पांचवां है। यह तब बनता है जब शनि अपनी राशि (मकर या कुंभ) या उच्च राशि (तुला) में केंद्र यानी 1, 4, 7 या 10वें भाव में हो, जैसा फलदीपिका कहती है। इसे अधिकार और अनुशासन देने वाला माना गया है। अपनी कुंडली [जन्म कुंडली कैलकुलेटर](/calculators/free-janam-kundali-calculator) से जांचें।
Deep Dive Analysis
शश योग एक नज़र में
शश योग पंच महापुरुष योगों में पांचवां और अंतिम है, यानी पांच महान-पुरुष योग जिन्हें मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि बना सकते हैं। शनि के लिए शर्त एक ही है: शनि अपनी राशि या उच्च राशि में हो और केंद्र में खड़ा हो। फलदीपिका पांचों योग और उन्हें बनाने का नियम बताती है।[1] बृहत् पराशर होरा शास्त्र वही नियम और पांचों नाम देता है।[3][4] शास्त्रीय वादा है अधिकार, लोगों पर नियंत्रण और सार्वजनिक प्रतिष्ठा, साथ में यह चेतावनी कि शनि धीरे बनाता है। इस पेज में हम देखेंगे कि योग कैसे बनता है, बारह कुंडली पैटर्न, करियर, धन और विवाह में फल, दशा, कमजोरियां और सरल उपाय। अपनी कुंडली जांचने के लिए जन्म कुंडली कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
वैदिक ज्योतिष में शश योग क्या है?
योग ग्रहों का वह संयोग है जो कोई खास फल देता है। शश योग शनि का महापुरुष योग है, और शश का अर्थ खरगोश है, जो इस योग का शास्त्रीय नाम है, स्वभाव का वर्णन नहीं। फलदीपिका बताती है कि शश योग में जन्मा व्यक्ति बहुतों से प्रशंसित, बलवान, अच्छे सेवकों वाला और ग्राम-प्रधान या राजा होने योग्य होता है।[2] शनि अनुशासन, ढांचे, श्रम और समय का ग्रह है, इसलिए यह योग लंबी मेहनत से कमाए अधिकार की ओर इशारा करता है। यह दोष नहीं है, इसलिए डरने की कोई बात नहीं, बस इसे अच्छे से इस्तेमाल करना है। ग्रहों की पृष्ठभूमि के लिए ग्रह गाइड और कुंडली के 9 ग्रह पढ़ें।
पंच महापुरुष योग क्या हैं?
पंच का अर्थ पांच और महापुरुष का अर्थ महान व्यक्ति है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र इस समूह का परिचय देता है और क्रम से नाम बताता है: मंगल का रुचक, बुध का भद्र, गुरु का हंस, शुक्र का मालव्य और शनि का शश।[4] हर योग के लिए ग्रह को अपनी राशि या उच्च राशि में और लग्न से केंद्र में होना चाहिए, और ग्रह बली होना चाहिए।[3] सूर्य और चंद्रमा इस समूह में नहीं आते, और राहु-केतु भी नहीं गिने जाते। हर योग पूरी कुंडली को अपने ग्रह का स्वाद देता है: रुचक में साहस, भद्र में बुद्धि, हंस में ज्ञान, मालव्य में सुख-प्रेम और शश में ढांचा और अधिकार। गरिमा के नियम ग्रह उच्च-नीच गाइड में देखें।
शश योग कैसे बनता है: दो शर्तें
दोनों शर्तें साथ पूरी होनी चाहिए। पहली, शनि बलवान राशि में हो: मकर या कुंभ, जो शनि की अपनी राशियां हैं, या तुला, जहां शनि उच्च होता है। दूसरी, वह राशि लग्न से केंद्र में पड़े, यानी पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव में।[1][3] फलदीपिका जोड़ती है कि पांचों योग चंद्रमा से भी गिने जाते हैं, इसलिए चंद्रमा से केंद्र में स्वराशि या उच्च का शनि भी इसी तरह पढ़ा जाता है, हालांकि लग्न वाला रूप ज्यादा मजबूत है।[2] हमेशा सिडेरियल कुंडली और सही जन्म समय लें, क्योंकि गलत लग्न से भाव बदल जाता है। कुंडली जन्म कुंडली कैलकुलेटर से बनाएं और समय की पुष्टि कुंडली जन्म समय की शुद्धता से करें।
शश योग बनाने वाले 12 कुंडली पैटर्न
तीन राशियां गुणा चार केंद्र, कुल बारह पैटर्न बनते हैं। शनि मकर में हो तो योग मकर लग्न (पहला भाव), तुला लग्न (चौथा), कर्क लग्न (सातवां) और मेष लग्न (दसवां) के लिए बनता है। शनि कुंभ में हो तो कुंभ लग्न (पहला), वृश्चिक लग्न (चौथा), सिंह लग्न (सातवां) और वृषभ लग्न (दसवां) के लिए। शनि तुला में हो तो तुला लग्न (पहला), कर्क लग्न (चौथा), मेष लग्न (सातवां) और मकर लग्न (दसवां) के लिए। हर पैटर्न को पूरी जांच चाहिए, क्योंकि लग्न तय करता है कि शनि किन भावों का स्वामी है और योग किस तरह का फल देगा। अपना लग्न मेरा लग्न क्या है और लग्न कैलकुलेटर से जानें।
शास्त्र शश योग वाले व्यक्ति के बारे में क्या कहते हैं
फलदीपिका कहती है कि शश योग में जन्मा सबका प्रशंसित, अच्छे सेवकों और बल वाला होता है और ग्राम-प्रधान या राजा हो सकता है।[2] उसी श्लोक में कुछ भटकाव और स्त्रियों से जुड़े लाभ की बात भी है, फिर भी उसे सुखी कहा गया है। इस सावधानी वाले भाग को प्रवृत्ति समझें, फैसला नहीं, जिसे आत्म-संयम चाहिए। उपाय: शनिवार सुबह सप्ताह का एक आचरण-नियम लिखें और एक बार ज़ोर से पढ़ें। 19 शनिवार करें। खर्च शून्य है और शनि-मन को वह अनुशासन देता है जो श्लोक के अनुसार फिसल सकता है। शनि का कठोर पक्ष समझने के लिए साढ़े साती के संकेत पढ़ें।
बृहत् पराशर होरा शास्त्र में शश योग का रूप और स्वभाव
बृहत् पराशर होरा शास्त्र शश योग वाले को दुबली काया, पतले मुख, कृश कमर, अच्छी टांगों, बुद्धि और दूसरों के गुप्त भेद समझने की क्षमता वाला बताता है।[5] यह भी कहता है कि वह वन, पर्वत और दुर्गों में साहसी और बलवान होता है, सेना का नेतृत्व कर सकता है, उसके दांत उभरे होते हैं, मन चंचल रहता है, धातुओं में रुचि होती है और स्त्रियों का साथ पसंद होता है।[6] ये शास्त्रीय वर्णन हैं और आज किसी व्यक्ति से हर बिंदु पर शायद ही मिलते हैं। व्यावहारिक पाठ है तेज, सजग, व्यावहारिक मन जो दबाव संभाल लेता है। चंचल मन की बात दिनचर्या से संतुलित होती है। उपाय: शनिवार शाम दस मिनट अगले दिन की योजना कागज़ पर बनाएं, 19 शनिवार, शून्य खर्च। गुणों को कुंडली कैसे देखें से परखें।
राजसी चिह्न और शासन का वादा
उसी BPHS अंश में कहा गया है कि शश योग वाले के हाथ-पैरों में माला, वीणा, मृदंग और अस्त्र के चिह्न होते हैं, वह पृथ्वी का पालन करने वाला राजा, दीर्घायु और सुखी होता है।[7] इसे कवित्व भरी भाषा समझें, जो बताती है कि योग पद, अधिकार और स्थिर जीवन देता है, शाब्दिक सिंहासन नहीं। आज के जीवन में यह वरिष्ठ पद, संगठन की कमान, भरोसेमंद सार्वजनिक भूमिका या जमीन-संपत्ति के स्वामित्व के रूप में दिखता है। फल की ताकत शनि की अपनी स्थिति, दृष्टियों और दशा पर टिकी है। टाइमिंग कैसे चलती है, महादशा गाइड में पढ़ें, और शनि सार्वजनिक करियर में कैसे मदद करता है, शनि और सरकारी नौकरी में देखें।
शश योग वाली कुंडली की ताकतें
मुख्य ताकतें हैं अनुशासन, धैर्य, जिम्मेदारी, संगठन-कौशल और लंबे समय तक बड़ा बोझ उठाने की क्षमता। इस योग वाले लोग अक्सर दबाव में स्थिर, सिस्टम में कुशल और भरोसेमंद होने के लिए सम्मानित होते हैं। वे चमकदार कम होते हैं, पर टिकते ज्यादा हैं। योग श्रम, जमीन, कानून, तकनीक, खनन, धातु, प्रशासन और बड़ी संस्थाओं के साथ काम करने को भी अनुकूल है। जब गुरु शनि का साथ दें, जैसे गजकेसरी पैटर्न में, तो अधिकार के साथ विवेक जुड़ता है, इसलिए गजकेसरी योग भी पढ़ें। करियर पक्ष की पुष्टि के लिए दशमेश और करियर देखें।
शश योग की कमजोरियां और संतुलन
शनि की छाया है कठोरता, ठंडापन, अति-काम और देरी। मजबूत शश योग व्यक्ति को दूसरों और खुद पर कठोर बना सकता है, और शुरुआती जीवन में पुरस्कार आने से पहले धीमापन लग सकता है। संतुलन है सेवा और गर्मजोशी। उपाय: शनिवार को किसी मजदूर या सहायक को साधारण भोजन या चप्पल दें, हफ्ते में एक बार 19 हफ्ते, भोजन पर दस से बीस रुपये। यह शनि के श्रमिकों के प्रति न्याय के विषय से मेल खाता है और कठोर आदतें नरम करता है। आराम का समय भी तय करें, क्योंकि शनि शरीर थकाता है। शनि का मन-स्वास्थ्य पक्ष मानसिक स्वास्थ्य गाइड में है और बुजुर्गों के प्रति कर्तव्य शनि और पितृ दोष में।
पहले, चौथे, सातवें और दसवें भाव में शश योग
पहले भाव में योग पूरे व्यक्तित्व को ढालता है: गंभीर, संयमी और स्वयं बना हुआ। चौथे में यह संपत्ति, मजबूत घरेलू आधार और जमीन-वाहन से सम्मान देता है, हालांकि माता पक्ष में धैर्य चाहिए। सातवें में यह साझेदारी और व्यापार में अनुशासित, गंभीर या बड़े साथी के साथ अनुकूल है। दसवें में, जो इस योग के लिए सबसे मजबूत स्थान है, यह पद, अधिकार और सार्वजनिक काम देता है। हर भाव यह भी दिखाता है कि शनि की देरी पहले कहां दिख सकती है, इसलिए राशि और दृष्टि के साथ पढ़ें। हर भाव का अर्थ कुंडली के 12 भाव में देखें और सर्वश्रेष्ठ करियर कुंडली पढ़ें।
शश योग और करियर
यह योग सरकार, प्रशासन, कानून, इंजीनियरिंग, निर्माण, खनन, विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, राजनीति, श्रमिक संगठनों और बड़े उद्यमों में नेतृत्व के अनुकूल है। यह उन नौकरियों के लिए भी ठीक है जहां आप श्रमिकों, प्रक्रियाओं या सिस्टम को संभालते हैं। फल आमतौर पर चरणों में बढ़ते हैं और असली उछाल लगातार मेहनत के बाद आता है। चरम वर्ष बताने से पहले दशम भाव, उसके स्वामी और शनि की दशा देखें, करियर भविष्यवाणी पेज की मदद से। अगर शनि चल रहा है और नौकरी में देरी है, तो दशा और टाइमिंग पढ़ें। सटीक तारीखों के लिए दशा कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
शश योग और धन
धन की शैली धीमी, ठोस और संपत्ति-आधारित है: जमीन, मकान, व्यवसाय, ठेके और दीर्घकालीन होल्डिंग। शनि शॉर्टकट पसंद नहीं करता, इसलिए सट्टे के लाभ कम विशिष्ट हैं। शनि की दशा और अंतर्दशा में धन बढ़ता है, और जब दूसरा, ग्यारहवां और नवम भाव सहारा दें तब भी। धन को स्वस्थ बहता रखने के लिए नियमित छोटा दान जोड़ें। उपाय: हर शनिवार दस से बीस रुपये अलग रखें और 19 हफ्ते किसी श्रमिक या जरूरतमंद को दें। यह सस्ता है और निष्पक्ष व्यवहार को मजबूत करता है। बाकी कुंडली परखने के लिए धन योग पेज, धन भविष्यवाणी पेज और कुंडली में धन योग पढ़ें।
शश योग और विवाह
शश योग के साथ विवाह का फैसला सप्तम भाव, शुक्र और दशा से होता है, अकेले योग से नहीं। स्त्रियों से जुड़े लाभ और चंचल मन की शास्त्रीय बात का मतलब है कि मुख्य अनुशासन निष्ठा और साफ सीमाएं हैं।[2][6] उपाय: शनिवार को अपने साथी से निभाने के लिए एक वादा लिखें और हफ्ते में एक बार ज़ोर से पढ़ें, 19 हफ्ते। खर्च शून्य है और शनि की गंभीरता को गर्म दिशा देता है। मजबूत शनि के साथ विवाह अक्सर औसत से थोड़ा देर से होता है और बनने के बाद टिकता है। कुंडली में विवाह योग, शादी कब होगी और प्रेम विवाह भविष्यवाणी पढ़ें। कुंडलियां कुंडली मिलान टूल से मिलाएं।
शश योग और स्वास्थ्य
शनि हड्डियों, जोड़ों, दांतों, त्वचा और नाड़ी-तंत्र का कारक है, और दुबली काया इस योग की शास्त्रीय छवि है।[5] इसलिए देखभाल के क्षेत्र हैं जोड़, पीठ, घुटने, दांत, नींद और पुरानी थकान। इसे नियमित देखभाल का संकेत मानें, निदान नहीं। उपाय: सोने से पहले दस मिनट हल्का स्ट्रेचिंग, हफ्ते में पांच रात, 40 दिन, घर पर निःशुल्क। यह शनि के धीमे, स्थिर स्वभाव से मेल खाता है और जोड़ों को बचाता है। किसी भी असली लक्षण पर डॉक्टर को दिखाएं। छठे, आठवें और बारहवें भाव का पठन कुंडली में बीमारी कैसे देखें में है।
शश योग और पारिवारिक जीवन
यह योग कर्तव्यनिष्ठ, भरोसेमंद परिवार-व्यक्ति बनाता है, जो अक्सर माता-पिता, भाई-बहन और बच्चों की जिम्मेदारी उठाने वाला होता है। खतरा सख्ती का है। मीठे शब्द और साझा समय इसे संतुलित करते हैं। चौथा भाव माता और घर, पंचम संतान और नवम पिता और गुरु दिखाता है। शनि बुजुर्गों से कैसे जुड़ता है, शनि और पितृ दोष में पढ़ें, और शनि-गुरु मिलकर कर्तव्य और कर्ज कैसे बनाते हैं, शनि-गुरु संबंध में। संतान पक्ष के लिए कितने बच्चे होंगे और माता-पिता का रिश्ता देखें।
चंद्रमा से शश योग
फलदीपिका कहती है कि पांचों महापुरुष योग लग्न के साथ चंद्रमा से भी गिने जाते हैं।[2] इसलिए अगर शनि मकर, कुंभ या तुला में है और आपकी चंद्र राशि से केंद्र में खड़ा है, तो लग्न का नियम पूरा न होने पर भी शश जैसा हल्का फल पढ़ा जाता है। चंद्र वाले रूप को सहायक संकेत की तरह लें, विकल्प की तरह नहीं। यह तब सबसे अच्छा चलता है जब चंद्रमा खुद अच्छी स्थिति में हो। चंद्रमा को पढ़ना चंद्र राशि गाइड में सीखें और चंद्रमा का तारा नक्षत्र कैलकुलेटर से जानें। शनि के तीन नक्षत्रों में से एक उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में पढ़ें।
शश योग को क्या कमजोर कर सकता है
योग उतना ही मजबूत है जितना उसे बनाने वाला ग्रह। शनि कमजोर होता है अगर वह अस्त हो या सूर्य के बहुत पास हो, खराब नवांश में बैठा हो, मजबूत पाप दृष्टि या युति में हो, या उस केंद्र का भाव-स्वामी कमजोर हो। वक्री शनि बल की दृष्टि से मजबूत है और तीव्र हो सकता है। इसलिए कागज़ पर बना योग मामूली फल दे सकता है, जबकि अच्छे सहारे वाले शनि का योग बहुत मजबूत फल दे सकता है। नवांश की जांच नवांश गाइड में करें और पूरी मानवीय रीडिंग का फायदा फ्री कुंडली कितनी सही होती है में देखें। गलत जन्म समय भी कागज़ पर योग तोड़ सकता है।
शनि महादशा और अंतर्दशा में शश योग
योग आमतौर पर शनि की महादशा में, जो 19 साल चलती है, और शनि के मित्र ग्रहों की अंतर्दशाओं में सबसे बड़े फल दिखाता है। शनि काल के शुरू में दबाव ज्यादा होता है और प्रयास जमा होने पर इनाम आते हैं। विद्यार्थी या कामगार को देरी लग सकती है, फिर साफ उछाल आता है। भारी शनि दशा के लिए उपाय: शनिवार को घर में तिल के तेल का एक दीपक जलाएं और हफ्ते में एक बार किसी आवारा कुत्ते या कौवे को खिलाएं, 19 हफ्ते। खर्च लगभग शून्य है और यह शनि के सेवा भाव से मेल खाता है। दशा के नियम दशा और टाइमिंग और महादशा गाइड में हैं, और सटीक अवधि दशा कैलकुलेटर से निकालें।
शश योग और साढ़े साती
शश योग होने से साढ़े साती रद्द नहीं होती, पर अक्सर इसका मतलब है कि व्यक्ति के पास उसे संभालने के संसाधन ज्यादा हैं। जब शनि चंद्र राशि से पिछली, चंद्र की अपनी और अगली राशि में गोचर करता है, तो मजबूत कुंडली में भी साढ़े सात साल का वह दौर धैर्य मांगता है। इसे ढांचा बनाने का समय मानें। उपाय: इस दौर में नया जोखिम भरा कर्ज न लें और तय दिनचर्या रखें, निःशुल्क, और हर शनिवार उसकी समीक्षा करें, 19 हफ्ते। साढ़े साती के संकेत पढ़ें, साढ़े साती कैलकुलेटर गाइड देखें और अपनी तारीखें साढ़े साती कैलकुलेटर से निकालें।
लग्न के अनुसार शश योग: मकर, कुंभ, तुला और अन्य
मकर और कुंभ लग्न में शनि लग्नेश होता है, इसलिए योग सीधे व्यक्ति के स्वयं, शरीर और जीवन-पथ से जुड़ता है। तुला लग्न में शनि चौथे और पांचवें भाव का स्वामी है, जो बहुत अनुकूल स्थिति है, और यहां वह लग्न में उच्च भी है, इसलिए योग विशेष रूप से मजबूत हो सकता है। वृषभ लग्न में शनि नवम और दशम का स्वामी है, इसलिए योग भाग्य और करियर से फल देता है। मेष लग्न में वह दशम और एकादश का स्वामी है, जो काम और लाभ जोड़ता है। कर्क लग्न में वह सप्तम और अष्टम का स्वामी है, इसलिए योग साझेदारी और अचानक बदलाव से काम करता है और ज्यादा सावधानी मांगता है। सिंह लग्न में छठे-सातवें का और वृश्चिक में तीसरे-चौथे का स्वामी है। लग्न के अनुसार फल बदलता है। रत्न पक्ष के लिए मकर लग्न, कुंभ लग्न और तुला लग्न के रत्न पढ़ें।
अन्य योगों के साथ शश योग
शश तब सबसे अच्छा चलता है जब सहायक संयोग हों। गुरु की दृष्टि विवेक जोड़ती है, जैसा गजकेसरी और हंस पैटर्न में दिखता है। मजबूत दशमेश करियर को उछाल देता है, और मजबूत द्वितीयेश तथा एकादशेश धन बढ़ाते हैं। शनि-मंगल संबंध इंजीनियरिंग और ऊर्जा जोड़ सकता है, जबकि शनि के साथ राहु असामान्य या विदेश से जुड़ा काम दे सकता है। जब कई महापुरुष योग साथ हों तो फल बढ़ते हैं। गजकेसरी योग पेज और धन योग पेज पढ़ें। अन्य ग्रह पैटर्न के लिए मंगल महादशा गाइड देखें, और शनि-सूर्य के टकराव के लिए सूर्य-शनि प्रतियुति पढ़ें।
शश बनाम रुचक, भद्र, हंस और मालव्य योग
पांचों योग एक नियम साझा करते हैं और ग्रह में अलग हैं। रुचक मंगल का है और साहस तथा नेतृत्व देता है। भद्र बुध का है और बुद्धि तथा वाणी देता है। हंस गुरु का है और ज्ञान तथा सदाचार देता है। मालव्य शुक्र का है और सुख, सौंदर्य और संबंध देता है। शश शनि का है और ढांचा, श्रमिकों पर पद और टिकाऊपन देता है।[4] फलदीपिका पांचों को एक श्लोक में गिनाती है और BPHS उसी क्रम में।[1] फर्क गुणवत्ता का नहीं, शैली का है। रुचक और शश सबसे मांगलिक अनुशासन वाले हैं। अपनी कुंडली में कौन-सा योग है, यह हर ग्रह की राशि और भाव देखकर जानें, ग्रह गाइड और गरिमा गाइड की मदद से।
शश योग के उपाय और सरल उपाय
शश एक शुभ योग है, इसलिए उपाय समस्या हटाने के नहीं, शनि का अच्छा इस्तेमाल करने के हैं। उपाय 1: शनिवार शाम घर में तिल के तेल का दीपक जलाएं और दस मिनट शांत बैठें। हर शनिवार 19 हफ्ते करें। खर्च लगभग शून्य है और यह शनि-मन को शांत करता है। उपाय 2: शनिवार को किसी सहायक या मजदूर को साधारण भोजन दें, हफ्ते में एक बार 19 हफ्ते, दस से बीस रुपये में। उपाय 3: रोज एक तय दिनचर्या रखें, जैसे रोज एक ही समय उठना, 40 दिन, निःशुल्क। इनमें से एक चुनें, सभी नहीं। पहले कदम के तौर पर महंगे रत्न न पहनें। शनि के लिए शुभ दिन समझने के लिए शनि जयंती देखें। रत्न से पहले अपना लग्न मेरी जन्म कुंडली से जांचें।
अपनी कुंडली में शश योग कैसे जांचें
पहले जन्म कुंडली कैलकुलेटर में सही जन्म तारीख, समय और स्थान से सटीक कुंडली बनाएं। दूसरे, शनि की राशि देखें। अगर वह मकर, कुंभ या तुला है तो आगे बढ़ें। तीसरे, लग्न से भाव गिनें। अगर वह पहला, चौथा, सातवां या दसवां है तो योग मौजूद है। चौथे, यही गिनती चंद्रमा से दोहराएं। पांचवें, शनि की ताकत, नवांश, दृष्टियां और चल रही दशा देखें। कैलकुलेटर योग चिन्हित करता है, पर उसकी ताकत मानवीय रीडिंग तय करती है। उसके लिए दिल्ली में ज्योतिषी देखें। बुनियाद समझने के लिए कुंडली कैसे देखें, चरण दर चरण पढ़ें।
शश योग के बारे में आम भ्रांतियां
भ्रांति एक: शनि के योग बुरे होते हैं। सच यह है कि शश फलदीपिका और BPHS में पांच महान योगों में गिना गया है।[2][7] भ्रांति दो: नीलम पहनना ही होगा। रत्न शायद ही पहला कदम होता है और शनि अनुकूल न हो तो उल्टा पड़ सकता है। भ्रांति तीन: योग तुरंत सफलता देता है। शनि धीमे चलता है, इसलिए फल चरणों में आते हैं। भ्रांति चार: योग बहुत दुर्लभ है। इसके लिए खास राशि और भाव चाहिए, इसलिए यह कुछ कुंडलियों में है और कुछ में नहीं, और हर कुंडली जांचनी चाहिए। भ्रांति पांच: यह सब समस्याएं मिटा देता है। ऐसा नहीं है और अन्य ग्रह भी मायने रखते हैं। शनि को निडर नजर से, शांत दिनचर्या के साथ देखना सही तरीका है।
शनि और योगों पर आगे पढ़ें
अगर यह गाइड काम आया, तो ग्रह और टाइमिंग वाले पेज आगे पढ़ें। शुरुआत साढ़े साती के संकेत और शनि कैलकुलेटर गाइड से करें। फिर शनि का तारा उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र और चंद्र-स्वामी का विपरीत रंग रोहिणी नक्षत्र में देखें। बड़ी तस्वीर के लिए महादशा गाइड, ग्रह गाइड और राशि गाइड पर लौटें। इस पेज का अंग्रेज़ी रूप Shasha Yoga के नाम से उपलब्ध है।
त्रिकाल वाणी के साथ अपना शश योग पढ़ें
योग एक संभावना बताता है, पर आपकी कुंडली पूरा तंत्र है। अगर आपका शनि शश योग बनाता है, तो अगला कदम उसकी ताकत, नवांश, दृष्टियां और चल रही दशा जांचना है। त्रिकाल संदेश फॉर्म पर मुफ्त रीडिंग से शुरू करें और जन्म कुंडली कैलकुलेटर से मिलाएं। दिल्ली एनसीआर में मानवीय रीडिंग चाहिए तो दिल्ली में ज्योतिषी या कम्पैटिबिलिटी सर्विस देखें। हर हफ्ते स्लॉट सीमित हैं, इसलिए टाइमिंग मायने रखे तो जल्दी बुक करें। मुख्य वैदिक वास्तुकार रोहित गुप्ता की हर रीडिंग स्विस एफेमेरिस की सटीकता और शास्त्रीय पाराशरी नियमों पर बनी है।
Apna Personalized Analysis Lein
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शब्दावली · Glossary
- शश योग
- वह पंच महापुरुष योग जो शनि के स्वराशि या उच्च राशि में लग्न से केंद्र में होने पर बनता है।
- पंच महापुरुष योग
- मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि के स्वराशि या उच्च में केंद्र में होने से बनने वाले पांच महान-पुरुष योगों का समूह।
- केंद्र
- कुंडली के चार कोणीय भाव, 1, 4, 7 और 10, जो ग्रह को कार्य करने की सबसे अधिक शक्ति देते हैं।
- उच्च राशि
- वह राशि जहां ग्रह सबसे बलवान होता है, जो शनि के लिए तुला है।
- स्वक्षेत्र
- ग्रह की अपनी राशि, जो शनि के लिए मकर और कुंभ है।
- महादशा
- विंशोत्तरी प्रणाली में प्रमुख ग्रह-काल, जो शनि के लिए 19 वर्ष का होता है।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
- — फलदीपिका, अध्याय 6 — योग अध्याय · श्लोक 1 · github-sanskrittexts
रुचक, भद्र, हंस, मालव्य और शश नामक पांच योग बताता है, जो मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि के स्वराशि या उच्च राशि में केंद्र में होने पर बनते हैं।
Names the five yogas Ruchaka, Bhadraka, Hamsaka, Malavya and Shasha and says they arise when Mars, Mercury, Jupiter, Venus and Saturn are in own or exaltation sign in a kendra.
- — फलदीपिका, अध्याय 6 — योग अध्याय · श्लोक 4 · github-sanskrittexts
शश योग में जन्मे को सबका प्रशंसित, सेवकों और बल से युक्त, ग्रामाधिप या राजा बताता है और कहता है कि पांचों योग लग्न और चंद्रमा दोनों से गिने जाते हैं।
Describes the Shasha-born as praised by all, strong with good attendants, a village head or king, and says the five yogas are counted from the lagna and from the Moon.
अथ वक्ष्याम्यहं पञ्चमहापुरुषलक्षणम्।ह् । स्वभोच्चगतकेन्द्रस्थैर्बलिभिश्च कुजादिभिः
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 75 — पंच महापुरुष लक्षण अध्याय · श्लोक 1 · sanskritdocumentsपंच महापुरुष लक्षणों का परिचय देता है और कहता है कि मंगल आदि ग्रह बली होकर स्वराशि या उच्च में केंद्र में हों तब ये बनते हैं।
Introduces the Pancha Mahapurusha characteristics and says they arise when Mars and the other planets are strong, in own or exaltation sign and in a kendra.
क्रमशो रुचको भद्रो हंसो मालव्य एव च । शशश्चैते बुधैः सर्वैर्महान्तः पुरुषाः स्मृताः
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 75 — पंच महापुरुष लक्षण अध्याय · श्लोक 2 · sanskritdocumentsपांच नाम क्रम से रुचक, भद्र, हंस, मालव्य और शश बताता है, जिन्हें विद्वान महापुरुष मानते हैं।
Gives the five names in order: Ruchaka, Bhadra, Hamsa, Malavya and Shasha, remembered by the wise as great persons.
तनुद्विजमुखः शूरो नातिह्रस्वः कृशोदरः । मध्ये क्षामः सुजंघश्च मतिमान्।ह् पररन्ध्रवित्।ह्
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 75 — पंच महापुरुष लक्षण अध्याय · श्लोक 20 · sanskritdocumentsशश योग वाले को पतला मुख, शूरता, कृश काया और दूसरों के गुप्त भेद समझने वाली बुद्धि वाला बताता है।
Describes the Shasha person as having a thin face, bravery, a slender build and a shrewd mind that knows the hidden matters of others.
शक्तो वनाद्रिदुर्गेषु सेनानीर्दन्तुरः शशः । चंचलो धातुवादी च स्त्रीशक्तोऽन्यधानान्वितः
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 75 — पंच महापुरुष लक्षण अध्याय · श्लोक 21 · sanskritdocumentsकहता है कि शश योग वाला वन, पर्वत और दुर्गों में साहसी, सेनापति, चंचल, धातु-विद्या में रुचि वाला और स्त्रियों का प्रिय होता है।
Says the Shasha person is bold in forests, hills and forts, can lead an army, is changeable in mind, drawn to metals and fond of the company of women.
मालावीणामृदङ्गाऽस्त्ररेखाङ्कितकरांघ्रिकः । भूपोऽयं वसुधा पाति जीवन्।ह् खाद्रिसमाः सुखी
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 75 — पंच महापुरुष लक्षण अध्याय · श्लोक 22 · sanskritdocumentsकहता है कि शश योग वाले के हाथ-पैरों में माला, वीणा, मृदंग और अस्त्र के चिह्न होते हैं, वह पृथ्वी का पालन करने वाला राजा, दीर्घायु और सुखी होता है।
Says the Shasha person bears garland, veena, drum and weapon marks on hands and feet, rules the earth as a king, lives long and is happy.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
ज्योतिष में शश योग क्या है?
शश योग पंच महापुरुष योगों में से एक है, जो शनि के स्वराशि या उच्च राशि में केंद्र में होने पर बनता है। इसे अधिकार, अनुशासन और पद देने वाला माना गया है। अपनी कुंडली [जन्म कुंडली कैलकुलेटर](/calculators/free-janam-kundali-calculator) से जांचें।
कुंडली में शश योग कैसे बनता है?
शनि मकर, कुंभ या तुला में हो और वह राशि लग्न से 1, 4, 7 या 10वें भाव में पड़े। फलदीपिका जोड़ती है कि यह योग चंद्रमा से भी गिना जाता है।
क्या शश योग अच्छा है या बुरा?
यह शुभ योग है। फलदीपिका और BPHS इसे पांच महान योगों में गिनती हैं। यह धीमे चलता है और अनुशासन चाहता है, इसलिए इसे दिनचर्या और निष्पक्ष व्यवहार के साथ इस्तेमाल करें।
किन लग्नों में शश योग बन सकता है?
शनि की राशि के अनुसार मेष, वृषभ, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, मकर और कुंभ लग्न में यह बन सकता है। कुल बारह संभावित पैटर्न हैं।
शश योग कौन-सा करियर देता है?
प्रशासन, कानून, इंजीनियरिंग, निर्माण, खनन, विनिर्माण, राजनीति और बड़ी संस्थाओं में नेतृत्व इसके अनुकूल है। [करियर भविष्यवाणी पेज](/learn/career-prediction-astrology) देखें और दशम भाव से पुष्टि करें।
क्या शश योग विवाह पर असर डालता है?
यह गंभीर, निष्ठावान साझेदारी दे सकता है, अक्सर औसत से थोड़ी देर से। असली तस्वीर सप्तम भाव, शुक्र और दशा से तय होती है। मिलान [कुंडली मिलान टूल](/kundali-milan) से करें।
शश योग का फल कब मिलता है?
ज्यादातर शनि की महादशा में, जो 19 साल चलती है, और अनुकूल अंतर्दशाओं में। तारीखें [दशा कैलकुलेटर](/calculators/free-dasha-calculator) से निकालें।
क्या शश योग कमजोर हो सकता है?
हां। अस्त होना, खराब नवांश, मजबूत पाप दृष्टि या गलत जन्म समय फल घटा सकते हैं। मानवीय रीडिंग इन कारकों की जांच करती है।
शश योग का सबसे अच्छा उपाय क्या है?
शनिवार शाम घर में तिल के तेल का दीपक जलाकर दस मिनट शांत बैठें, 19 शनिवार। यह निःशुल्क है। महंगे रत्न पहला कदम नहीं हैं।
शश और मालव्य योग में क्या फर्क है?
शश शनि से बनता है और ढांचा, पद और टिकाऊपन देता है। मालव्य शुक्र से बनता है और सुख, सौंदर्य और संबंध देता है। दोनों में स्वराशि या उच्च होकर केंद्र में होने का नियम एक है।
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