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Trikaal Vaani · राशि अनुकूलता

मिथुन & सिंह

राशि अनुकूलता

राशि अनुकूलता स्कोर
27 / 36
75% · बहुत अच्छा

मिथुन और सिंह की जोड़ी राशि स्तर पर 36 में से 27 गुण पाती है, बहुत अच्छा मेल। सिंह मिथुन से तीसरी राशि है और यह 3-11 भकूट ग्रंथों में सुखद माना गया है। बुध सूर्य को मित्र मानता है, सूर्य बुध को सम। गण और नाड़ी की जाँच Rs 51 के कुंडली मिलान में होती है।

भावनात्मक अनुकूलता

मिथुन-सिंह जोड़ी में भावनात्मक तालमेल गर्म, जीवंत और मज़ेदार होता है। सिंह गर्मजोशी, उदारता और प्रशंसा-प्रियता लाता है, मिथुन वाक्पटुता, हास्य और बौद्धिक ऊर्जा। सिंह को सराहना और ध्यान प्रिय है, और मिथुन अपनी वाक्पटुता व प्रशंसा से यह सहजता से देता है — यह तालमेल भावनाओं को जीवंत रखता है। चुनौती यह है कि सिंह को गहरी निष्ठा और निरंतर प्रशंसा चाहिए, जबकि मिथुन चंचल और हल्का हो सकता है — इससे सिंह को असुरक्षा हो सकती है। जब मिथुन निरंतरता और सिंह लचीलापन दिखाता है, तो यह जोड़ी भावनात्मक रूप से गर्म और प्रेरक बनी रहती है।

संवाद शैली

संवाद इस जोड़ी का जीवंत पक्ष है। वायु और अग्नि का मेल विचारों, हास्य और सामाजिक चर्चाओं का जोशीला प्रवाह बनाता है। मिथुन वाक्पटु और बुद्धिमान है, सिंह आत्मविश्वासी और अभिव्यंजक — संवाद कभी उबाऊ नहीं होता। सावधानी: मिथुन का मज़ाक या तर्कशीलता गर्वित सिंह के अहं को चोट पहुँचा सकती है, और सिंह की प्रभुत्व-इच्छा मिथुन को सीमित लग सकती है। मिथुन को सिंह के गर्व का सम्मान और सिंह को मिथुन की चंचलता के प्रति धैर्य रखना होगा। प्रशंसा और हल्केपन के साथ संवाद मधुर रहता है।

इस जोड़ी की शक्तियाँ

इस जोड़ी की सबसे बड़ी ताकत है जीवंतता, संवाद और सामाजिक गर्मजोशी का साझा प्रेम। वायु अग्नि को प्रज्वलित करती है, इसलिए दोनों के बीच ऊर्जा, उत्साह और मनोरंजन की कमी नहीं रहती। सिंह नेतृत्व, गरिमा और गर्मजोशी लाता है, मिथुन वाक्पटुता, लचीलापन और बौद्धिक चमक। दोनों सामाजिक, मज़ेदार और जीवन को जोश से जीने वाले होते हैं। सिंह मिथुन को दिशा और स्थिरता देता है, मिथुन सिंह के जीवन में ताज़गी और विविधता। जब मिथुन की निरंतरता और सिंह का धैर्य जुड़ता है, तो यह जोड़ी एक जीवंत, आकर्षक और प्रेरक साझेदारी बन जाती है।

चुनौतियाँ

सबसे बड़ी चुनौती है सिंह की प्रशंसा-चाह और मिथुन की चंचलता का अंतर। सिंह को निरंतर ध्यान, निष्ठा और सराहना चाहिए, जबकि मिथुन हल्का, परिवर्तनशील और कभी अलिप्त हो सकता है — इससे सिंह उपेक्षित महसूस कर सकता है। मिथुन का मज़ाक या तर्क सिंह के अहं को चोट पहुँचा सकता है, और सिंह की प्रभुत्व-इच्छा व ज़िद (स्थिर राशि) मिथुन को बंधन जैसी लग सकती है। समाधान: मिथुन सिंह को निरंतर प्रशंसा और निष्ठा दे, सिंह मिथुन की स्वतंत्रता व चंचलता का सम्मान करे। प्रशंसा, धैर्य और लचीलेपन से यह जीवंत जोड़ी टिकाऊ बनती है।

प्रेम और रोमांस

मिथुन-सिंह का प्रेम जीवंत, गर्म और मज़ेदार होता है। सिंह भव्यता, जोश और गर्मजोशी लाता है, मिथुन वाक्पटुता, हास्य और नयापन। दोनों को सामाजिकता, मनोरंजन और रोमांस पसंद है, इसलिए प्रेम में ताज़गी और जोश बना रहता है। चुनौती यह कि मिथुन की चंचलता सिंह की निष्ठा-चाह से तालमेल बैठाए। जब मिथुन निरंतरता और प्रशंसा देता है, तो प्रेम गर्म, जीवंत और चमकदार बनता है।

विवाहित जीवन और दीर्घकालिकता

विवाह में यह जोड़ी एक जीवंत, सामाजिक और गर्मजोश साझेदारी बनाती है। सिंह नेतृत्व और गरिमा लाता है, मिथुन लचीलापन, संवाद और विविधता। दीर्घकालिकता की कुंजी है मिथुन की निरंतरता व निष्ठा और सिंह का धैर्य व लचीलापन। जब मिथुन सिंह को निरंतर प्रशंसा देता है और सिंह मिथुन की स्वतंत्रता स्वीकारता है, तो दाम्पत्य जीवंत, आकर्षक और प्रेरक बनता है।

घनिष्ठता और आकर्षण

वायु और अग्नि का मेल इस पक्ष को जोशीला, गर्म और मज़ेदार बनाता है। सिंह की उत्कट, गरिमामय उपस्थिति और मिथुन की कल्पनाशीलता व हास्य मिलकर आकर्षण को जीवंत बनाते हैं। दोनों खुले और प्रयोगशील होते हैं। संतुलन के लिए मिथुन को भावनात्मक उपस्थिति और सिंह को धैर्य अपनाना होगा। आपसी प्रशंसा, हास्य और गर्मजोशी इस घनिष्ठता को रोमांचक और संतोषजनक बनाए रखते हैं।

विश्वास और निष्ठा

सिंह स्वभाव से वफ़ादार और समर्पित होता है, और उसे निष्ठा अत्यंत प्रिय है, जबकि मिथुन सामाजिक, बातूनी और स्वतंत्रता-प्रिय। सिंह को मिथुन की चंचलता और सामाजिकता से असुरक्षा हो सकती है। मिथुन को पारदर्शिता, निरंतरता और निरंतर प्रशंसा दिखानी होगी, सिंह को मिथुन की स्वतंत्रता का सम्मान करना होगा। खुला संवाद, सराहना और परस्पर सम्मान इस जोड़ी की निष्ठा को मज़बूत बनाते हैं।

धन और जीवनशैली

दोनों की जीवनशैली सामाजिक, सक्रिय और आनंद-प्रिय होती है — सिंह भव्यता और शान पर खर्च करता है, मिथुन विविधता और अनुभवों पर। दोनों ही बचत में कमज़ोर हो सकते हैं। समाधान: एक स्पष्ट बजट और बचत-नियम बनाएँ, और दिखावे व आवेगी खर्च पर संयम रखें। जीवनशैली में दोनों को मनोरंजन, यात्रा और सामाजिकता पसंद है। वित्तीय अनुशासन के साथ यह जोड़ी एक जीवंत, आकर्षक जीवनशैली बना सकती है।

परिवार और संतान

परिवार के प्रति सिंह गर्मजोश, गर्वित और सुरक्षात्मक होता है, मिथुन जिज्ञासु, संवादप्रिय और प्रगतिशील। घर में जोश, बातचीत और जीवंतता का वातावरण रहता है। बच्चों को सिंह आत्मविश्वास और गरिमा सिखाता है, मिथुन बौद्धिकता और संवाद। ध्यान रखने योग्य बात यह कि अनुशासन में निरंतरता और भावनात्मक स्थिरता भी बनी रहे। बड़ों के सम्मान और साझा मूल्यों के साथ यह जोड़ी एक जीवंत, गरिमामय परिवार बनाती है।

तत्व और ग्रह मैत्री

मिथुन वायु तत्व (स्वामी बुध) और सिंह अग्नि तत्व (स्वामी सूर्य) की राशि है। वायु अग्नि को प्रज्वलित करती है, इसलिए ऊर्जा, संवाद और गर्मजोशी का तालमेल स्वाभाविक रहता है। नैसर्गिक मैत्री में यह अनुकूलता एकतरफ़ा है: बुध सूर्य को मित्र मानता है, जबकि सूर्य बुध को सम रखता है[1] — शत्रुता नहीं, पर बराबर की दोस्ती भी नहीं, फिर भी बुद्धि और तेज का यह मेल अच्छा संयोग देता है। कुंजी यह है कि सिंह की अग्नि मिथुन की बुद्धि से दिशा पाए और मिथुन की वायु सिंह को जीवंत व विविध रखे — तब यह मेल गर्म, जीवंत और आकर्षक बनता है।

मिथुन सिंह के 27 गुण: यह अंक क्या बताता है

इस पेज पर दिया 27 का अंक राशि स्तर का सूचक है, 36 गुण वाले अष्टकूट पैमाने पर। यह हर मिथुन-सिंह जोड़े के लिए पक्का अंक नहीं है, क्योंकि आठ में से चार कूट जन्म नक्षत्र से तय होते हैं, राशि से नहीं। मिथुन वर और सिंह कन्या के लिए चार कूट राशियाँ ही तय कर देती हैं: 3-11 दूरी के कारण भकूट पूरे 7 गुण देता है[2], स्वामी मित्र और सम होने से ग्रह मैत्री 5 में से 4, वर्ण 1 में से 0 और वश्य 2 में से 0। यानी 11 गुण पहले से तय हैं। बाक़ी 21 गुण तारा (3), योनि (4), गण (6) और नाड़ी (8) से आते हैं, इसलिए इस दिशा में असली दायरा 11 से 32 तक है। हमने त्रिकाल वाणी के कुंडली मिलान इंजन पर तीन नक्षत्र जोड़ियाँ जाँचीं: आर्द्रा वर और पूर्वा फाल्गुनी कन्या को 28.5 गुण मिले, मृगशिरा और पूर्वा फाल्गुनी को 18.5 क्योंकि दोनों मध्य नाड़ी में हैं, और पुनर्वसु-मघा को 20.5 क्योंकि देव और राक्षस गण टकराए। तो 27 असली जोड़ों की ऊपरी सीमा के पास बैठता है, सबसे अच्छे नमूने से थोड़ा नीचे। सीधी भाषा में, राशि की परत मज़बूत है और नक्षत्र की परत तय करती है कि जोड़ा 18 के पास रहेगा या 28 के पास। आठों कूट कैसे जुड़ते हैं, यह 36 गुण मिलान गाइड में आसान भाषा में समझाया गया है, और अपने असली अंक के लिए Rs 51 का कुंडली मिलान ही अंतिम शब्द है।

सिंह राशि मिथुन से तीसरी: 3-11 भकूट का अर्थ

भकूट, जिसे राशि कूट भी कहते हैं, दोनों चंद्र राशियों के बीच की दूरी नापता है। मिथुन से आगे गिनें तो कर्क दूसरी और सिंह तीसरी राशि है, और सिंह से गिनते हुए मिथुन ग्यारहवीं पड़ती है। यही 3-11 की दूरी है। मुहूर्त चिन्तामणि विवाह के लिए केवल तीन दूरियों को दोष वाली बताता है, छह-आठ, नौ-पाँच और दो-बारह, और बाक़ी हर दूरी को दोनों के लिए सुख देने वाली कहता है[2]। विवाह पटल भी यही बात दूसरे ढंग से कहता है: दोष वाली दूरियों और समसप्तक के विशेष प्रेम के बाद वह बची हुई सब दूरियों को अनेक प्रकार का सुख, संतान और धन देने वाली बताता है[3]। यानी 3-11 सिर्फ़ सुरक्षित नहीं, दोनों ग्रंथों में शुभ दूरी है। रोज़ की भाषा में तीसरा भाव साहस, मेहनत और भाई-बहन का है, और ग्यारहवाँ भाव लाभ, मित्र और इच्छा-पूर्ति का। 3-11 वाले पति-पत्नी अक्सर एक टीम की तरह एक-दूसरे को आगे बढ़ाते हैं, मिथुन विचार और संपर्क लाता है, सिंह जोश और पहचान। इसीलिए यहाँ भकूट दोष है ही नहीं और कोई परिहार ढूँढने की ज़रूरत नहीं। तुलना के लिए मिथुन-वृषभ देखें, जहाँ दो-बारह की दूरी पर ग्रंथ धन की तंगी की चेतावनी देते हैं, या पूरी तालिका के लिए भकूट दोष गाइड पढ़ें। उल्टी दिशा, यानी सिंह वर और मिथुन कन्या, में भी यही शुभ भकूट रहता है, बस वश्य और वर्ण बदल जाते हैं।

बुध सूर्य को मित्र मानता है, सूर्य बुध को सम

फलदीपिका मेष से क्रम से राशियों के स्वामी गिनाती है, जिससे मिथुन का स्वामी बुध और सिंह का स्वामी सूर्य बनता है[4]। ग्रह मैत्री कूट यही देखता है कि ये दोनों स्वामी एक-दूसरे को कैसे मानते हैं। बृहज्जातक साफ़ कहता है कि सूर्य के लिए शनि और शुक्र शत्रु, बुध सम और बाक़ी मित्र हैं, और बुध के लिए सूर्य व शुक्र मित्र तथा चंद्र शत्रु है[1]। फलदीपिका अपने शब्दों में यही दोहराती है कि सूर्य के लिए बुध सम है और बुध के मित्र शुक्र और सूर्य हैं[5]। मुहूर्त चिन्तामणि का विवाह प्रकरण भी मिलान के लिए यही तालिका लेता है, जिसमें बुध सूर्य के सम खाने में है[6]। मतलब, गर्मजोशी एक तरफ़ से ज़्यादा है। मिथुन साथी स्वभाव से सिंह साथी का सम्मान करता है और उसका साथ देना चाहता है, जबकि सिंह साथी मिथुन से नाराज़ नहीं, पर उसके लिए ख़ुद आगे भी नहीं बढ़ता। कुंडली मिलान इंजन इस मित्र-सम जोड़ी को 5 में से 4 गुण देता है, अधिकतम से बस एक कम। व्यवहार में इसका अर्थ है कि मिथुन साथी तारीफ़ आसानी से करता है और सिंह साथी को धन्यवाद ज़ोर से बोलना सीखना होता है, इतने से ही ज़्यादातर दूरी मिट जाती है। आकाश में भी बुध कभी सूर्य से ज़्यादा दूर नहीं जाता, इसलिए कुंडलियों में दोनों अक्सर एक ही राशि में बैठकर बुधादित्य योग बनाते हैं, जिसके बारे में बुधादित्य योग लेख में विस्तार है। आगे चलकर किसी साथी की बुध या सूर्य की दशा आए तो यही दो ग्रह जीवन में सबसे आगे आ जाते हैं।

मिथुन वर, सिंह कन्या: वश्य और वर्ण में कम अंक क्यों

दो छोटे कूट, कुल 3 गुण वाले, बताते हैं कि यह जोड़ी केवल राशियों के दम पर 30 के पार क्यों नहीं जाती। वश्य देखता है कि कौन-सी राशि किसके प्रभाव में है। फलदीपिका मिथुन को मनुष्य (नर) राशियों में गिनती है, जबकि सिंह, जो सूर्य की मूलत्रिकोण राशि है, चतुष्पद राशियों में आता है[7]। मुहूर्त चिन्तामणि इसमें एक ख़ास अपवाद जोड़ता है: सिंह (मृगेन्द्र, यानी पशुओं का राजा) को छोड़कर सब राशियाँ मनुष्य राशियों के वश में हैं, और वृश्चिक को छोड़कर सब राशियाँ सिंह के वश में[8]। इसलिए सिंह कन्या मिथुन वर के वश में नहीं आती और इंजन 2 में से 0 देता है। इसी श्लोक से उल्टी तस्वीर भी समझ आती है, क्योंकि मिथुन सिंह के वश में आता है, इसलिए सिंह-मिथुन पेज पर वश्य अलग पढ़ा जाता है। वर्ण का 1 गुण मुहूर्त चिन्तामणि के त्रिकों से तय होता है। श्लोक मीन, वृश्चिक और कर्क को ब्राह्मण बताकर क्रम से क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र त्रिक गिनाता है, जिसकी प्रचलित व्याख्या में सिंह क्षत्रिय और मिथुन शूद्र है, और वर से ऊँचे वर्ण की कन्या को अच्छा नहीं माना गया[9]। सिंह कन्या मिथुन वर से ऊपर है, इसलिए वर्ण 0 है। दो बातें साफ़ समझ लें। पहली, यह वर्ण सिर्फ़ चंद्र राशि का नाम है, किसी परिवार की जाति से इसका कोई लेना-देना नहीं, इसलिए अंतरजातीय विवाह पर इसका असर नहीं। दूसरी, ये दोनों कूट मिलाकर 36 में से केवल 3 गुण हैं, और अकेला 3-11 भकूट इनसे दोगुने से ज़्यादा भारी है, इसलिए यह हाशिये की टिप्पणी है, चेतावनी नहीं।

आर्द्रा, मघा, फाल्गुनी: इस जोड़ी में गण और नाड़ी की जाँच

मिथुन का चंद्रमा मृगशिरा के उत्तरार्ध, आर्द्रा या पुनर्वसु के पहले तीन चरणों में होता है, और सिंह का चंद्रमा मघा, पूर्वा फाल्गुनी या उत्तरा फाल्गुनी के पहले चरण में। मुहूर्त चिन्तामणि मघा को राक्षस गण में, आर्द्रा और दोनों फाल्गुनी को मनुष्य गण में, और मृगशिरा व पुनर्वसु को देव गण में रखता है[10]। सबसे आसान जोड़ी आर्द्रा के साथ पूर्वा या उत्तरा फाल्गुनी है, दोनों मनुष्य, जिसमें गण के पूरे 6 गुण मिलते हैं। सबसे कठिन देव या मनुष्य मिथुन साथी के साथ मघा वाला सिंह साथी है, जहाँ हमारी पुनर्वसु-मघा जाँच में गण 6 में से 0 रहा। इसकी छूट ग्रंथ में लिखी है: दोनों चंद्र राशियों के स्वामी, या दोनों नवांशों के स्वामी, मित्र हों तो गण दोष नहीं गिना जाता[11]। यहाँ बुध सूर्य को मित्र मानता है पर सूर्य बदले में सम ही रहता है, इसलिए राशि-स्वामी वाला रास्ता आधा ही पूरा होता है, और सावधान पाठक गण दोष को रद्द मानने से पहले नवांश स्वामी देखता है। नाड़ी 8 गुण का भारी कूट है। आर्द्रा, पुनर्वसु और उत्तरा फाल्गुनी आदि नाड़ी में, मृगशिरा और पूर्वा फाल्गुनी मध्य नाड़ी में, और मघा अन्त्य नाड़ी में हैं, और ग्रंथ एक ही नाड़ी में विवाह को अशुभ कहता है, साझा मध्य नाड़ी के लिए सबसे कड़ा शब्द रखता है[12]। इसे इसकी सीमा के साथ ही पढ़ें: इन दो राशियों की नौ नक्षत्र जोड़ियों में से सिर्फ़ तीन में नाड़ी एक होती है, मृगशिरा-पूर्वा फाल्गुनी, और आर्द्रा या पुनर्वसु के साथ उत्तरा फाल्गुनी, बाक़ी छह पूरी तरह साफ़ हैं। इंजन ने हमारी मृगशिरा-पूर्वा फाल्गुनी जाँच को हल्का दोष बताया और अन्न, गौ व स्वर्ण दान को पारंपरिक उपाय कहा, और कम ख़र्च के रास्ते नाड़ी दोष उपाय में दिए हैं। यानी नाड़ी जाँचने की चीज़ है, डरने की नहीं।

मिथुन सिंह लव मैरिज और अरेंज मैरिज

लव मैरिज में मिथुन और सिंह अक्सर बातचीत, कॉलेज के किसी मंच या ऑफ़िस प्रोजेक्ट से मिलते हैं, और आकर्षण जल्दी होता है क्योंकि बुध को सुनने वाला चाहिए और सूर्य को देखने वाला। प्रेम विवाह में ख़तरा यह है कि घरवालों को जोड़ी परफ़ेक्ट बताई जाती है और नक्षत्र की परत बाद में खुलती है, इसलिए परिवारों के मिलने से पहले ही लव मैरिज कुंडली मिलान करा लें। अरेंज मैरिज में क्रम उल्टा होता है। परिवार पहले कुंडली देखते हैं, राशि स्तर पर 27 गुण और साफ़ भकूट पाते हैं, फिर ज़रूरत होती है कि दोनों वह दोस्ती बनाएँ जो सूर्य आधी ही देता है। दो-तीन आराम की मुलाक़ातें, जिनमें सिंह साथी योजना बनाए और मिथुन साथी बातचीत चलाए, जल्दी दिखा देती हैं कि गर्मजोशी दोनों तरफ़ है या नहीं। अपनी कुंडली किस राह की ओर झुकती है, इसकी पहली झलक मुफ़्त लव या अरेंज मैरिज कैलकुलेटर देता है। किसी भी कुंडली में पाँचवाँ भाव प्रेम का और सातवाँ भाव विवाह और जीवनसाथी का है, और कुंडली में विवाह योग लेख इन्हें विस्तार से समझाता है। शादी में देरी लगे तो शादी कब होगी वाला लेख पढ़ें। दोनों रास्तों में एक बात समान है: लव मैरिज गण और नाड़ी की जाँच नहीं छोड़ती, और अरेंज मैरिज को सफल होने के लिए पूरे अंक नहीं चाहिए, क्योंकि 3-11 भकूट और मित्र बुध इस जोड़ी को पहले ही मज़बूत आधार देते हैं।

मिथुन-सिंह: दूसरी शादी, विदेश में बसे रिश्ते और अंतरजातीय विवाह

दूसरी शादी में इस जोड़ी का एक असली फ़ायदा है: दोनों राशियाँ चुप्पी से नहीं, बातचीत और अपनेपन से संभलती हैं। सिंह साथी को भरोसा चाहिए कि उसकी तुलना पुराने रिश्ते से नहीं हो रही, और मिथुन साथी को पुरानी बात एक बार खुलकर कहने और फिर छोड़ देने की जगह चाहिए। तारीख़ तय करने से पहले मुफ़्त दूसरी शादी कैलकुलेटर अपनी कुंडली से पहली झलक देता है, और गण-नाड़ी नए सिरे से मिलाए जाते हैं क्योंकि नया साथी नया नक्षत्र लाता है। NRI रिश्ते में दूरी सूर्य की परीक्षा बुध से ज़्यादा लेती है। मिथुन वीडियो कॉल, मैसेज और टाइम ज़ोन आराम से संभाल लेता है, पर सिंह को साफ़ दिखना चाहिए कि वह पहली प्राथमिकता है, इसलिए हफ़्ते की एक तय कॉल, जिसे मिथुन साथी कभी रद्द न करे, किसी तोहफ़े से ज़्यादा असर करती है। विदेश में बसने की सोच रहे जोड़े विदेशी जीवनसाथी और सेटलमेंट पढ़ें, और याद रखें कि कुंडली जन्म समय और जन्म स्थान से बनती है, आज के देश से नहीं। अंतरजातीय विवाह के लिए एक साफ़ संदेश है: वर्ण कूट चंद्र राशि का गुण है, जाति का नहीं। इस जोड़ी में वर्ण का 0 बस इतना बताता है कि राशि त्रिक में सिंह चंद्रमा मिथुन चंद्रमा से ऊपर है, और यह हर परिवार के लिए एक जैसा है। असली बातें वही हैं जो हर रिश्ते में होती हैं, नक्षत्र की परत, दोनों कुंडलियों में मंगल दोष, और परिवारों के सामने एक-दूसरे का साथ देने की हिम्मत।

मिथुन सिंह शादी की समस्याएँ और उनके हल

मिथुन-सिंह जोड़ों में तीन समस्याएँ बार-बार आती हैं, और हर एक का व्यावहारिक हल है। पहली समस्या ध्यान की है। सूर्य की राशि सिंह को कमरे में सबसे पहले गिना जाना चाहिए, जबकि मिथुन की जिज्ञासा कई लोगों में बँटी रहती है। हल छोटा और नियमित है: रोज़ दूसरों के सामने एक सच्ची तारीफ़, जिसमें ख़र्च कुछ नहीं और असर ठीक वहीं होता है जहाँ सूर्य को चाहिए। दूसरी समस्या पैसे की है। न सूर्य बचत का ग्रह है न बुध, इसलिए यह घर अनुभवों और दिखावे पर ख़र्च करता है। हल यह है कि वेतन वाले दिन ही तय बचत अलग कर दें, और एक सीमा तय करें जिसके ऊपर की हर ख़रीद एक रात रुके। तीसरी समस्या बहस में अहं की है। ग़लत समय पर मिथुन का एक तीखा मज़ाक सिंह को कई दिन चुभता है। हल यह नियम है कि एक-दूसरे पर मज़ाक घर के अंदर रहें, और हर बहस सिंह साथी के लिए सम्मान के एक सच्चे वाक्य पर ख़त्म हो। किसी एक कुंडली में मंगल दोष दिखे तो मंगल दोष क्या है, मांगलिक और नॉन-मांगलिक विवाह और मांगलिक मिथक लेख दोष की सीमा और उसके परिहार समझाते हैं, ताकि एक शब्द से कोई न डरे। ज़्यादातर फ़्री टूल्स 36 में से एक अंक पर रुक जाते हैं। त्रिकाल वाणी की Rs 51 वाली कुंडली मिलान रिपोर्ट नक्षत्र स्तर पर गण और नाड़ी, दोनों साथियों का मंगल दोष और लागू होने वाला परिहार जोड़ती है, यानी ठीक वही परत जो यह राशि पेज नहीं देख सकता।

दूसरी मिथुन और सिंह जोड़ियों से तुलना

मिथुन परिवार में 3-11 भकूट सिंह के अलावा सिर्फ़ मेष के साथ बनता है, क्योंकि मेष मिथुन से ग्यारहवीं है, और मिथुन-मेष पेज दिखाता है कि बुध और मंगल की एकतरफ़ा शत्रुता तस्वीर कैसे बदलती है। मिथुन के बाक़ी वायु-अग्नि पड़ोसी अलग हैं: मिथुन-तुला और मिथुन-कुंभ त्रिकोण जोड़ियाँ हैं जिन पर ग्रंथ नौ-पाँच की बात करते हैं, और मिथुन-धनु आपसी सातवें की जोड़ी है जिसे विवाह पटल प्रेम के लिए सराहता है। सिंह की ओर से मेष-सिंह और धनु-सिंह अग्नि-अग्नि मेल हैं, जबकि कन्या-सिंह में फिर वही बुध-सूर्य स्वामी जोड़ी है पर दो-बारह की दूरी पर। एक ही राशि के मेल जैसे मिथुन-मिथुन और सिंह-सिंह दिखाते हैं कि एक ही स्वामी होने पर क्या होता है। इन सबके सामने मिथुन-सिंह की ख़ासियत है साफ़ भकूट और ऐसी स्वामी जोड़ी जिसमें एक तरफ़ मित्रता है और किसी तरफ़ शत्रुता नहीं, इसीलिए यह राशि स्तर पर बहुत अच्छे दर्जे में है और असली सवाल सिर्फ़ नक्षत्र जाँच का बचता है।

वैदिक उपाय

उपाय 1 — बुधवार को तारीफ़ के तीन वाक्य क्या करें: एक छोटे कार्ड पर साथी की तीन ख़ास अच्छाइयाँ लिखें और उन्हें ज़ोर से पढ़कर सुनाएँ। कब: बुधवार शाम, खाने के बाद। ख़र्च: मुफ़्त। कितने दिन: लगातार 7 बुधवार। आपके लिए क्यों: बुध मिथुन वर का स्वामी है, वाणी का ग्रह है और सूर्य को पहले से मित्र मानता है, इसलिए यह दोस्ती बोले गए शब्दों में बदलकर सिंह की सराहना की ज़रूरत पूरी करती है। उपाय 2 — रविवार सूर्योदय पर सूर्य को जल क्या करें: ताँबे या स्टील के लोटे में थोड़े चावल डालकर उगते सूर्य को जल चढ़ाएँ, हो सके तो दोनों साथ। कब: रविवार, सूर्योदय के एक घंटे के भीतर। ख़र्च: 10 रुपये या उससे कम। कितने दिन: 8 रविवार। आपके लिए क्यों: सूर्य सिंह कन्या की राशि का स्वामी है और बुध को केवल सम मानता है, इसलिए इस जोड़ी में गर्मजोशी की पहल सूर्य की तरफ़ से होनी चाहिए। उपाय 3 — महीने की पैसों वाली बातचीत क्या करें: पंद्रह मिनट साथ बैठें, महीने की एक बचत राशि और एक ऐसी ख़रीद तय करें जिसके लिए दोनों रुकेंगे। कब: हर महीने के पहले रविवार की शाम। ख़र्च: मुफ़्त। कितने दिन: 6 महीने, यानी 6 बैठकें। आपके लिए क्यों: न बुध बचत का ग्रह है न सूर्य, और तय बातचीत इस जोड़ी के ख़ुशी वाले ख़र्च को झगड़े में बदलने से रोकती है। इस जोड़ी पर बुध (मिथुन) और सूर्य (सिंह) का प्रभाव है। नीचे के उपाय बुध की वाणी और सूर्य के तेज, दोनों को साधने के लिए हैं। पुराने पारंपरिक सुझाव: • बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करें, हरे वस्त्र धारण करें और हरी मूँग या हरी सब्ज़ियाँ दान करें। • रविवार को सूर्य को जल अर्पित करें (सूर्य अर्घ्य) और गुड़ या गेहूँ का दान करें। • बुध मंत्र — ॐ बुं बुधाय नमः — और सूर्य मंत्र — ॐ सूर्याय नमः — का जप करें। • अहं और चंचलता में संतुलन हेतु ध्यान और विनम्रता का अभ्यास करें। • दोनों मिलकर किसी ज़रूरतमंद की सहायता करें। ध्यान रहे: ये पारंपरिक सुझाव हैं। पन्ना या माणिक जैसे रत्न धारण करने से पहले अपनी सटीक जन्म कुंडली का विश्लेषण अवश्य कराएँ, और शुरुआत मुफ़्त रत्न उपयुक्तता कैलकुलेटर से करें।

शब्दावली · Glossary

भकूट
चंद्र राशियों के बीच घरों की गिनती पर टिका कूट, जिस पर 7 गुण निर्भर हैं। मिथुन और सिंह 3-11 पर हैं, और यह दूरी पूरे 7 गुण रखती है।
ग्रह मैत्री
हर राशि-स्वामी दूसरे को मित्र, सम या शत्रु किस नज़र से देखता है, इसे दोनों दिशाओं से परखने वाला 5 गुण का कूट। मिथुन-सिंह में यह बुध और सूर्य की तुलना है।
नैसर्गिक मैत्री
ग्रंथों में लिखी ग्रहों की स्वाभाविक, स्थायी मित्रता, जो किसी एक कुंडली में भाव-स्थिति से बनने वाली तात्कालिक मित्रता से अलग है।
वश्य
दोनों चंद्र राशियों के बीच प्रभाव का 2 गुण वाला कूट। विवाह ग्रंथ सिंह को मनुष्य राशियों के वश वाले समूह से बाहर रखते हैं, इसीलिए मिथुन वर को यहाँ 0 मिलता है।
गण
जन्म नक्षत्र का स्वभाव-समूह, देव, मनुष्य या राक्षस, जो मिलान में 6 गुण तक देता है।
नाड़ी
8 गुण का कूट जो 27 नक्षत्रों को तीन धाराओं में बाँटता है। दोनों साथी एक ही धारा में हों तो परिहार न होने पर पूरे 8 गुण कट जाते हैं।
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अनुकूलता से आगे — वह इंसान असल में कैसा है?

राशि अनुकूलता दो राशियों का मेल दिखाती है। पर विवाह दो इंसानों का रिश्ता है। किसी की कुंडली से उनके 6 कार्मिक पैटर्न — स्वभाव, निष्ठा, धन, परिवार का सम्मान, छुपी प्रवृत्ति और विवाह का भविष्य — भृगु नाड़ी के आधार पर जानें। किसी पर निर्णय नहीं, केवल समझ।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मिथुन-सिंह की जोड़ी विवाह के लिए अच्छी है?+

हाँ, 36 में से 27 गुण के साथ यह जोड़ी राशि स्तर पर बहुत अच्छी श्रेणी में आती है। वायु-अग्नि का मेल और साझा जीवंतता इसे गर्म व अनुकूल बनाते हैं। सटीक निर्णय के लिए पूरी जन्म कुंडली का अष्टकूट मिलान आवश्यक है।

मिथुन-सिंह जोड़ी की सबसे बड़ी ताकत क्या है?+

जीवंतता, संवाद और सामाजिक गर्मजोशी का साझा प्रेम। सिंह की गरिमा और मिथुन की वाक्पटुता मिलकर एक आकर्षक, मज़ेदार जोड़ी बनाते हैं।

मिथुन-सिंह रिश्ते की मुख्य चुनौती क्या है?+

सिंह की प्रशंसा-चाह व निष्ठा-इच्छा बनाम मिथुन की चंचलता, तथा सिंह का अहं। निरंतर प्रशंसा, निष्ठा और धैर्य ज़रूरी हैं।

क्या यह सामान्य राशि मिलान असली कुंडली मिलान जितना सटीक है?+

नहीं। यह केवल चंद्र-राशि आधारित विश्लेषण है। असली 36-गुण अष्टकूट नक्षत्र, गण, नाड़ी, भकूट व मंगल दोष पर निर्भर है — इसके लिए त्रिकाल वाणी का कुंडली मिलान (₹51) उपयोग करें।

क्या मिथुन-सिंह लव मैरिज के लिए अनुकूल है?+

हाँ, जीवंत आकर्षण, गर्मजोशी और सामाजिक तालमेल इसे प्रेम विवाह के लिए अनुकूल बनाते हैं। निष्ठा और प्रशंसा दीर्घकालिक कुंजी है। प्रेम विवाह से पहले लव मैरिज कुंडली मिलान की जाँच भी कर लें।

मिथुन-सिंह जोड़ी का धन व जीवनशैली पक्ष कैसा रहता है?+

सामाजिक और भव्य; दोनों बचत में कमज़ोर हो सकते हैं। स्पष्ट बजट और संयम से जीवनशैली जीवंत व संतुलित बनती है।

मिथुन-सिंह जोड़ी के लिए कौन-से वैदिक उपाय शुभ हैं?+

बुधवार गणेश पूजा व हरी वस्तुओं का दान, रविवार सूर्य अर्घ्य व गुड़/गेहूँ दान, बुध व सूर्य मंत्र जप, विनम्रता-ध्यान। पन्ना या माणिक पहनने से पहले अपनी कुंडली से रत्न उपयुक्तता जाँच लें।

क्या मिथुन-सिंह में मंगल दोष (मांगलिक) की जाँच ज़रूरी है?+

हाँ। मिथुन-सिंह का राशि मेल मंगल दोष के बारे में कुछ नहीं बताता, क्योंकि यह दोष दोनों कुंडलियों में मंगल किस भाव में है, उससे तय होता है, इसलिए विवाह से पहले इसकी अलग जाँच अवश्य कराएँ। दोनों कुंडलियों में मंगल दोष हो तो परंपरा में इसे संतुलित माना जाता है, इसलिए यह जाँच का कारण है, डर का नहीं, और मुफ़्त मांगलिक दोष कैलकुलेटर एक मिनट में यह दिखा देता है।

मिथुन और सिंह के कितने गुण मिलते हैं?+

राशि स्तर पर मिथुन वर और सिंह कन्या को 36 में से 27 गुण मिलते हैं। भकूट (7) और ग्रह मैत्री (4) राशियों से तय हैं, वर्ण और वश्य 0 देते हैं, और बाक़ी 21 गुण नक्षत्रों पर निर्भर हैं। हमारे इंजन की जाँच में यह 18.5 से 28.5 तक रहा, इसलिए असली अंक के लिए अपना कुंडली मिलान कराएँ।

क्या मिथुन-सिंह में भकूट दोष है?+

नहीं। सिंह मिथुन से तीसरी राशि है, और 3-11 की दूरी छह-आठ, नौ-पाँच और दो-बारह वाली तीन दोष-दूरियों में नहीं आती, इसलिए ग्रंथ इसे सुख देने वाली मानते हैं[2] और भकूट के पूरे 7 गुण बने रहते हैं।

क्या बुध और सूर्य आपस में मित्र हैं?+

केवल एक तरफ़ से। बुध सूर्य को मित्र मानता है, पर सूर्य बुध को सम मानता है[1]। कुंडली मिलान में यह मित्र-सम जोड़ी ग्रह मैत्री के 5 में से 4 गुण पाती है, यानी मदद करती है पर पूरी दोस्ती नहीं है।

क्या मिथुन-सिंह जोड़े में नाड़ी दोष हो सकता है?+

हाँ, नौ में से तीन नक्षत्र जोड़ियों में: मृगशिरा-पूर्वा फाल्गुनी (मध्य नाड़ी) और आर्द्रा या पुनर्वसु के साथ उत्तरा फाल्गुनी (आदि नाड़ी)[12]। बाक़ी छह जोड़ियाँ साफ़ हैं, और जहाँ दोष दिखे वहाँ नाड़ी दोष उपाय और पूरी कुंडली देखकर ही अगला क़दम तय होता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

  1. [1]↑बृहज्जातकबृहज्जातकम् · Varahamihira
    शत्रू मन्द सितौ समश् च शशिजो मित्राणि शेषा रवेस् तीक्ष्ण अंशुर् हिम रश्मिजश् च सुहृदौ शेषाः समाः शीतगोः। जीव इन्दु उष्ण कराः कुजस्य सुहृदो ज्ञो अरिः सित अर्की समौ मित्रे सूर्य सितौ बुधस्य हिमगुः शत्रुः समाश् च अपरे॥
    — बृहज्जातक, अध्याय 2 — ग्रहयोनिभेदाध्याय · श्लोक 16

    सूर्य के लिए शनि और शुक्र शत्रु, बुध (शशिज, चंद्रमा का पुत्र) सम और बाक़ी मित्र हैं, जबकि बुध के लिए सूर्य और शुक्र मित्र, चंद्र शत्रु और बाक़ी ग्रह सम हैं।

    The Sun counts Saturn and Venus as enemies, Mercury (Shashija, son of the Moon) as neutral and the rest as friends, while Mercury counts the Sun and Venus as friends, the Moon as its enemy and the remaining planets as neutral.

  2. [2]↑मुहूर्तचिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    मृत्युः षट्काष्टके ज्ञेयोऽपत्यहानिर्नवात्मजे । द्विर्द्वादशे निर्धनत्वं द्वयोरन्यत्र सौख्यकृत् ॥ ३१ ॥
    — मुहूर्तचिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 31

    दोनों चंद्र राशियाँ छह-आठ पर हों तो श्लोक मृत्यु की चेतावनी देता है, नौ-पाँच पर संतान की हानि और दो-बारह पर निर्धनता की, और बाक़ी हर दूरी को दोनों के लिए सुख देने वाली कहता है, इसलिए मिथुन-सिंह की 3-11 दूरी सुख वाले पक्ष में आती है।

    When the two Moon signs stand six-eight apart the verse warns of death, at nine-five of loss through children and at two-twelve of poverty, and it calls every other distance a giver of happiness to both, so the 3-11 distance of Gemini and Leo falls on the happy side.

  3. [3]↑विवाहपटल
    षट्काष्टके मरणवैरवियोगदोषा द्विर् द्वादशे निधनता ऽप्रजाता त्रिकोणे। प्रीतिः परा निगदिता समसप्तकेषु शेषेष्व् अनेकविधसौख्यसुतार्थसंपत्॥
    — विवाहपटल, अध्याय 1 · श्लोक 25

    विवाह पटल छह-आठ (मृत्यु, वैर, वियोग), दो-बारह (निर्धनता) और त्रिकोण (संतान का अभाव) के दोष गिनाता है, एक राशि और आपसी सातवें को सबसे गहरे प्रेम वाला बताता है, और बाक़ी सब दूरियों को, 3-11 समेत, तरह-तरह का सुख, संतान और धन देने वाली कहता है।

    Vivaha Patala lists the faults of six-eight (death, enmity, separation), two-twelve (poverty) and the trine (no children), praises the same sign and the mutual seventh for the highest love, and gives all the remaining distances, 3-11 included, many kinds of comfort, children and wealth.

  4. [4]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    भौमः शुक्रबुधेन्दुसूर्यशशिजाः शुक्रारजीवार्कजाः मन्दो देवगुरुः क्रमेण कथिता मेषादिराशीश्वराः । सूर्यादुच्चगृहाः क्रियो वृषमृगस्त्रीकर्किमीनास्तुला दिक्त्र्यंशैर्मनुयुक्तिथीषुभनखांशैस्तेऽस्तनीचाः क्रमात् ॥६॥
    — फलदीपिका, अध्याय 1 — संज्ञाध्याय · श्लोक 6

    मेष से गिनें तो राशियों के स्वामी मंगल, शुक्र, बुध, चंद्र, सूर्य और आगे क्रम से हैं, यानी मिथुन का स्वामी बुध और सिंह का स्वामी सूर्य है।

    Counting from Aries the sign lords are Mars, Venus, Mercury, the Moon, the Sun and onwards, which makes Mercury the lord of Gemini and the Sun the lord of Leo.

  5. [5]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    सौम्यः समोऽर्कजसितावहितौ खरांशो-रिन्दोर्हितौ रविबुधावपरे समाः स्युः । भौमस्य मन्दभृगुजौ तु समौ रिपुर्ज्ञः सौम्यस्य शीतगुररिः सुहृदौ सितार्कौ ॥२१॥
    — फलदीपिका, अध्याय 2 — ग्रहभेदाध्याय · श्लोक 21

    सूर्य (खरांशु) के लिए बुध सम है और शनि व शुक्र अहितकारी, और बुध (सौम्य) के लिए चंद्र शत्रु है जबकि शुक्र और सूर्य उसके मित्र हैं।

    For the Sun (Kharamshu) Mercury is neutral and Saturn and Venus are hostile, and for Mercury (Saumya) the Moon is an enemy while Venus and the Sun are its friends.

  6. [6]↑मुहूर्तचिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    मित्राणि द्युमणेः कुजेज्यशशिनः शुक्रार्कजौ वैरिणौ सौम्यश्चास्य समो विधोर्बुधरवी मित्रे न चास्य द्विषत् । शेषाश्चास्य समाः कुजस्य सुहृदश्चन्द्रेज्यसूर्या बुधः शत्रुः शुक्रशनी समौ च शशभृत्सूनोः सिताहस्करौ ॥ २७ ॥
    — मुहूर्तचिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 27

    विवाह प्रकरण की ग्रह मैत्री तालिका में मंगल, गुरु और चंद्र सूर्य के मित्र, शुक्र और शनि उसके शत्रु और बुध उसके लिए सम है, और बुध की सूची शुक्र और सूर्य से शुरू होती है।

    In the graha maitri table of the marriage chapter, Mars, Jupiter and the Moon are friends of the Sun, Venus and Saturn are its enemies and Mercury is neutral to it, and the list for Mercury begins with Venus and the Sun.

  7. [7]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    सिंहोक्षाजवधूहयाङ्गवणिजः कुंभस्त्रिकोणा रवे-ज्ञेन्द्वोस्तूच्चलवान्नखोडिनशरैर्दिग्भूतकृत्यंशकः । चापाद्यर्धवधूनृयुग्घटतुला मर्त्याश्च कीटोऽलिभं त्वाप्याः कर्किमृगापरार्द्धशफराः शेषाश्चतुष्पादकाः ॥७॥
    — फलदीपिका, अध्याय 1 — संज्ञाध्याय · श्लोक 7

    मूलत्रिकोण राशियों की सूची सिंह से शुरू होती है जो सूर्य की है, मिथुन (नृयुक्) मनुष्य राशियों में गिना गया है, और जो राशियाँ न मनुष्य में न जलचर में गिनी गईं, सिंह समेत, वे चतुष्पद हैं।

    Leo heads the list of moolatrikona signs as the Sun’s own, Gemini (Nriyuk) is named among the human signs, and the signs not named as human or watery, Leo among them, are four-footed.

  8. [8]↑मुहूर्तचिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    हित्वा मृगेन्द्रं नरराशिवश्याः सर्वे तथैषां जलजास्तु भक्ष्याः । सर्वेऽपि सिंहस्य वशे विनालिं ज्ञेयं नराणां व्यवहारतोऽन्यत् ॥ २३ ॥
    — मुहूर्तचिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 23

    सिंह (मृगेन्द्र) को छोड़कर हर राशि मनुष्य राशियों के वश में है, और वृश्चिक को छोड़कर सभी राशियाँ सिंह के वश में आती हैं।

    Leaving out Leo (Mrigendra), every sign is vashya to the human signs, and all signs except Scorpio come under the sway of Leo.

  9. [9]↑मुहूर्तचिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    द्विजा झषालिकर्कटास्ततो नृपा विशोऽङ्घ्रिजाः । वरस्य वर्णतोऽधिका वधूर्न शस्यते बुधैः ॥ २२ ॥
    — मुहूर्तचिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 22

    मीन, वृश्चिक और कर्क ब्राह्मण, अगला त्रिक क्षत्रिय, फिर वैश्य और फिर शूद्र है, और वर से ऊँचे वर्ण की कन्या को विद्वान अच्छा नहीं मानते।

    Pisces, Scorpio and Cancer are Brahmin, the next triad is Kshatriya, then Vaishya and then Shudra, and the wise do not praise a bride whose varna is higher than the groom.

  10. [10]↑मुहूर्तचिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    रक्षोनरामरगणाः क्रमतो मघाहिवस्विन्द्रमूलवरुणानलतक्षराधाः । पूर्वोत्तरात्रयविधातृयमेशभानि मैत्रादितीन्दुहरिपौष्णमरुल्लघूनि ॥ २९ ॥
    — मुहूर्तचिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 29

    मघा राक्षस गण में, आर्द्रा और पूर्वा-उत्तरा नक्षत्र (पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी समेत) मनुष्य गण में, और मृगशिरा व पुनर्वसु देव गण में गिने गए हैं।

    Magha is listed in the Rakshasa gana, Ardra and the Purva and Uttara nakshatras (Purva and Uttara Phalguni among them) in the Manushya gana, and Mrigashira and Punarvasu in the Deva gana.

  11. [11]↑मुहूर्तचिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    मैत्र्यां राशिस्वामिनोरंशनाथद्वन्द्वस्यापि स्याद्गणानां न दोषः । खेटारित्वं नाशयेत्सद्भकूटं खेटप्रीतिश्चापि दुष्टं भकूटम् ॥ ३३ ॥
    — मुहूर्तचिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 33

    दोनों चंद्र राशियों के स्वामी मित्र हों, या दोनों नवांशों के स्वामी, तो गण दोष नहीं लगता, और शुभ भकूट ग्रह-शत्रुता के दोष को मिटा देता है।

    When the lords of the two Moon signs are friends, or the lords of the two navamshas are, the gana fault does not apply, and a good bhakoot cancels the fault of planetary enmity.

  12. [12]↑मुहूर्तचिन्तामणिमुहूर्तचिन्तामणि · Rama Daivajna
    ज्येष्ठारौद्रार्यमाम्भःपतिभयुगयुगं दास्रभं चैकनाडी पुष्येन्दुत्वाष्ट्रमित्रान्तकवसुजलभं योनिबुध्न्ये च मध्या । वाय्वग्निव्यालविश्वोडुयुगयुगमथो पौष्णभं चापरा स्याद्दम्पत्योरेकनाड्यां परिणयनमसन्मध्यनाड्यां हि मृत्युः ॥ ३४ ॥
    — मुहूर्तचिन्तामणि, अध्याय 6 — विवाहप्रकरणम् · श्लोक 34

    आर्द्रा, पुनर्वसु और उत्तरा फाल्गुनी आदि नाड़ी में, मृगशिरा और पूर्वा फाल्गुनी मध्य नाड़ी में और मघा अन्त्य नाड़ी में हैं, और श्लोक एक ही नाड़ी में विवाह को अशुभ कहता है, साझा मध्य नाड़ी के लिए अपना सबसे कड़ा शब्द प्रयोग करता है।

    Ardra, Punarvasu and Uttara Phalguni sit in the first (Adi) nadi, Mrigashira and Purva Phalguni in the middle (Madhya) nadi and Magha in the last (Antya) nadi, and the verse calls marriage in one shared nadi not good, using its strongest word for a shared Madhya nadi.

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RG
Rohiit Gupta
मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट

रोहित गुप्ता त्रिकाल वाणी के संस्थापक एवं मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट हैं। उनकी भविष्यवाणियाँ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS), भृगु नाड़ी और षड्बल पर आधारित हैं।

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