
राशि अनुकूलता
सिंह और मकर राशि की जोड़ी को राशि-स्तर सूचक पर 36 में से 14 गुण मिलते हैं, इसलिए श्रेणी उपाय आवश्यक है। मकर सिंह से छठी राशि है, यानी षडाष्टक भकूट, जिसे विवाह पटल वैर और वियोग से जोड़ता है,[1] पर अगला श्लोक तारा अनुकूल होने पर विवाह की अनुमति देता है।[2] असली फ़ैसला कुंडली मिलान से।
सिंह-मकर जोड़ी में भावनात्मक स्वभाव बहुत भिन्न है। सिंह गर्मजोश, अभिव्यंजक और प्रशंसा-प्रिय है, जबकि मकर संयमित, गंभीर और भावनाओं में आरक्षित। सिंह को खुली प्रशंसा, गर्माहट और ध्यान चाहिए, जबकि मकर प्रेम को ज़िम्मेदारी, स्थिरता और कर्मों से दिखाता है। चुनौती यह है कि मकर का ठंडापन और कार्य-केंद्रितता गर्वित सिंह को उपेक्षित कर सकती है, और सिंह की भव्यता, नाटकीयता व ध्यान की माँग व्यावहारिक मकर को दिखावा लग सकती है। जब सिंह मकर की गंभीरता और मकर सिंह की गर्माहट का सम्मान करता है, तो दोनों एक-दूसरे को संतुलित कर सकते हैं। पर इसके लिए धैर्य और उपाय ज़रूरी हैं।
संवाद में सिंह आत्मविश्वासी, अभिव्यंजक और गर्मजोश होता है, जबकि मकर व्यावहारिक, संयमित और लक्ष्य-केंद्रित। यह अंतर पूरकता बन सकता है — सिंह जोश और दृष्टि लाता है, मकर अनुशासन और यथार्थ। सावधानी: मकर का ठंडा, कम भावनात्मक और कभी आलोचनात्मक संवाद गर्वित सिंह के अहं को चोट पहुँचा सकता है, और सिंह की भव्यता व ध्यान की माँग संयमित मकर को फ़िज़ूल लग सकती है। सिंह को धैर्य और मकर को थोड़ी गर्मजोशी व प्रशंसा अपनानी होगी। सम्मानजनक, संयमित संवाद इस जोड़ी की कुंजी है।
सिंह-मकर की असली ताकत यह है कि दोनों एक-दूसरे की कमी पूरी करते हैं। दोनों महत्वाकांक्षी, मेहनती और लक्ष्य-केंद्रित होते हैं — सिंह दृष्टि, नेतृत्व और गर्मजोशी लाता है, मकर अनुशासन, धैर्य और रणनीति। सिंह की भव्य योजनाओं को मकर का अनुशासन ठोस आधार और क्रियान्वयन दे सकता है, जबकि सिंह मकर के गंभीर जीवन में गर्माहट, गरिमा और जोश भर सकता है। दोनों ही सफलता, प्रतिष्ठा और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को महत्व देते हैं। यदि सिंह मकर की गंभीरता और मकर सिंह की गर्माहट को अपनाए, तो यह जोड़ी एक शक्तिशाली, सफल साझेदारी बन सकती है। एक और अच्छी बात: मुहूर्त चिन्तामणि के अनुसार वृश्चिक को छोड़ हर राशि सिंह के वश में है,[6] इसलिए वश्य कूट में इस जोड़ी को पूरे 2 गुण मिलते हैं। नियमित उपाय और सचेत प्रयास से यह संभावना सच होती है।
सबसे बड़ी चुनौती है गर्मजोशी बनाम संयम और भव्यता बनाम मितव्ययिता का अंतर। सिंह को गर्माहट, प्रशंसा, ध्यान और भव्यता चाहिए, जबकि मकर संयमित, गंभीर, मितव्ययी और कार्य-केंद्रित। मकर का ठंडापन, गंभीरता और कार्य-प्राथमिकता गर्वित सिंह को उपेक्षित और अप्रसन्न कर सकती है, जबकि सिंह की भव्यता, नाटकीयता और दिखावा व्यावहारिक मकर को फ़िज़ूल और अव्यावहारिक लग सकता है। मुहूर्त चिन्तामणि के अनुसार सूर्य के दो शत्रुओं में एक शनि है[3] और शनि के तीन शत्रुओं में एक सूर्य,[4] इसलिए ग्रह मैत्री में 5 में से 0 गुण आते हैं। ऊपर से मकर सिंह से छठी राशि है, और विवाह पटल षडाष्टक के दोष मृत्यु, वैर और वियोग बताता है,[1] पर उसी ग्रंथ का अगला श्लोक राशि-स्वामी, एकाधिपत्य और वश्य राशि देखकर तारा अनुकूल हो तो विवाह की अनुमति देता है,[2] और मकर तो सिंह के वश में है ही।[6] समाधान: मकर गर्मजोशी और प्रशंसा दिखाए, सिंह धैर्य, मितव्ययिता और मकर की गंभीरता का सम्मान करे। इसीलिए इस जोड़ी में उपाय और लगातार, सोचा-समझा प्रयास दोनों चाहिए।
सिंह-मकर का प्रेम दो भिन्न शैलियों का मेल है। सिंह रोमांस में जोश, भव्यता और गर्मजोशी लाता है, जबकि मकर गंभीर, स्थिर और प्रतिबद्ध प्रेम। शुरू में मकर का संयम और ठंडापन गर्म सिंह को उपेक्षा जैसा लग सकता है। पर जब मकर गर्मजोशी और सिंह धैर्य अपनाता है, तो प्रेम स्थिर और गहरा बन सकता है — जहाँ सिंह गर्माहट दे और मकर स्थायित्व। एक-दूसरे की प्रेम-भाषा समझना इसकी कुंजी है।
विवाह में सिंह गरिमा, गर्माहट और नेतृत्व लाता है, मकर स्थिरता, अनुशासन और दीर्घकालिक रणनीति। दोनों की महत्वाकांक्षा इसे एक सफल टीम बना सकती है। दीर्घकालिकता की कुंजी है गर्मजोशी और संयम का संतुलन तथा धन-जीवनशैली में तालमेल। जब मकर गर्माहट और सिंह मितव्ययिता व धैर्य अपनाता है, तो दाम्पत्य सफल, स्थिर और गरिमामय बन सकता है। सचेत प्रयास और उपाय इसकी कुंजी हैं।
अग्नि और पृथ्वी का मेल इस पक्ष में गति और शैली का अंतर लाता है — सिंह जोशीला, गर्म और भव्य, जबकि मकर संयमित, गंभीर और धीमा। तालमेल के लिए मकर को गर्मजोशी व अभिव्यक्ति और सिंह को धैर्य अपनाना होगा। मकर एक बार खुल जाए तो उसका समर्पण गहरा और भरोसेमंद निकलता है। आपसी सम्मान, धैर्य और भावनात्मक प्रयास के साथ यह घनिष्ठता धीरे-धीरे गर्म और संतोषजनक बन सकती है, यद्यपि शुरू में दूरी रह सकती है।
दोनों राशियाँ निष्ठा और प्रतिबद्धता को गहराई से महत्व देती हैं — सिंह गर्वित व वफ़ादार, मकर ज़िम्मेदार व स्थिर। यह विश्वास की अच्छी नींव बनाता है। चुनौती तब आती है जब मकर का ठंडापन सिंह में असुरक्षा जगाए या सिंह को पर्याप्त प्रशंसा न मिले। निरंतर सराहना (सिंह के लिए), गर्मजोशी और प्रतिबद्धता का प्रदर्शन इस जोड़ी की निष्ठा को मज़बूत करते हैं। दोनों एक-दूसरे का स्वभाव मान लें, तो यह भरोसा लंबा टिकता है।
धन इस जोड़ी का संवेदनशील पक्ष है। मकर अनुशासित, बचतकर्ता और मितव्ययी है, जबकि सिंह भव्यता, शान और उदार खर्च पसंद करता है — यह बड़ा टकराव ला सकता है। समाधान: एक स्पष्ट बजट बनाएँ जिसमें मकर की बचत और सिंह की कुछ भव्यता दोनों को जगह हो, और बड़े खर्च मिलकर तय करें। मकर वित्तीय अनुशासन संभाले, सिंह महत्वाकांक्षा व कमाई लाए। संतुलित प्रबंधन के साथ यह जोड़ी समृद्धि और सुरक्षा दोनों पा सकती है।
परिवार के प्रति सिंह गरिमा, गर्व और गर्मजोशी को महत्व देता है, जबकि मकर अनुशासन, संरचना और परंपरा को। बच्चों के लिए यह संयोजन संतुलित हो सकता है — सिंह आत्मविश्वास और गरिमा देता है, मकर अनुशासन और ज़िम्मेदारी। ध्यान रखने योग्य बात यह कि सिंह का अहं और मकर की कठोरता अनुशासन में संतुलित रहे, और बच्चों को गर्माहट व मार्गदर्शन दोनों मिलें। बड़ों के सम्मान के साथ यह जोड़ी एक गरिमामय, अनुशासित और सुरक्षित परिवार बना सकती है।
सिंह अग्नि तत्व (स्वामी सूर्य) और मकर पृथ्वी तत्व (स्वामी शनि) की राशि है। अग्नि गर्म, भव्य और अभिव्यंजक है, पृथ्वी संयमित, गंभीर और व्यावहारिक — इसलिए गर्मजोशी बनाम संयम का बड़ा अंतर है। शास्त्रीय सूची में सूर्य और शनि एक-दूसरे के शत्रु हैं,[3][4] जो इस अंतर को और गहरा करता है। यही कारण है कि इस जोड़ी को तालमेल हेतु गहरा सचेत प्रयास और उपाय चाहिए। कुंजी यह है कि सिंह की गर्माहट मकर को कोमल करे और मकर का अनुशासन सिंह की भव्यता को आधार दे।
सिंह पाँचवीं राशि है और मकर दसवीं। सिंह से आगे गिनें तो सिंह 1, कन्या 2, तुला 3, वृश्चिक 4, धनु 5 और मकर 6 पर आती है, और मकर से पीछे सिंह तक गिनें तो 8 आता है। इसी 6-8 दूरी को षडाष्टक कहते हैं, और इसी वजह से भकूट कूट के 7 में से 0 गुण मिलते हैं। विवाह पटल इस दूरी के दोष मृत्यु, वैर और वियोग गिनाता है,[1] और अक्सर परिवार यहीं पढ़ना बंद कर देते हैं। पर ग्रंथ यहीं नहीं रुकता: अगले ही श्लोक में कहा गया है कि षडाष्टक में भी राशि-स्वामी, एकाधिपत्य और वश्य राशि देखकर, यदि तारा दोनों ओर से अनुकूल हो, तो विवाह का समय शुभ है।[2] मुहूर्त चिन्तामणि भी दुष्ट भकूट के लिए बलवान, मित्र नवांश-स्वामी और शुद्ध नाड़ी-नक्षत्र वाला रास्ता देता है।[5] यानी षडाष्टक जाँच का संकेत है, अपने आप में फ़ैसला नहीं। तीनों कठिन भकूट-दूरियों की पूरी जानकारी भकूट दोष गाइड में है।
ग्रह मैत्री कूट देखता है कि दोनों जन्मराशियों के स्वामी आपस में कैसे हैं। सिंह का स्वामी सूर्य है और मकर का शनि, और शास्त्रीय सूची में शत्रुता दोनों तरफ़ से है: सूर्य के शत्रु शुक्र और शनि हैं,[3] और शनि के शत्रु चंद्र, सूर्य और मंगल।[4] इसलिए इस कूट में 5 में से 0 गुण आते हैं। पर असली जीवन में दो बातें इसे नरम करती हैं। पहली, पराशर तात्कालिक मैत्री बताते हैं: कुंडली में जो दो ग्रह एक-दूसरे से 2, 3, 4, 10, 11 या 12वें घर में बैठे हों, वे उस कुंडली में मित्र बन जाते हैं,[8] और जो ग्रह स्वभाव से शत्रु पर स्थिति से मित्र हो, वह मिलाकर सम माना जाता है।[9] अगर आपकी अपनी कुंडली में सूर्य-शनि ऐसे घरों में हैं, तो आपका निजी सूर्य-शनि तनाव राशि-स्तर की तस्वीर से हल्का है, भले ही कूट का अंक स्वाभाविक संबंध से ही गिना जाए। दूसरी, दोनों के नवांश-स्वामी मित्र हो सकते हैं, और यही दुष्ट भकूट के परिहार का रास्ता है।[5]
इस पेज का 36 में से 14 राशि-स्तर सूचक है, आपका असली गुण नहीं, क्योंकि असली अंक दोनों के जन्म नक्षत्र पर टिका है। हमने त्रिकाल वाणी के कुंडली मिलान इंजन पर तीन नमूना जोड़ियाँ चलाईं, हर एक में एक का चंद्रमा सिंह में और दूसरे का मकर में। मघा वर और श्रवण वधू को 36 में से 6.5 गुण मिले, क्योंकि दोनों अन्त्य नाड़ी में हैं और गण राक्षस-देव है। श्रवण वर और पूर्वा फाल्गुनी वधू को 17.5 गुण मिले, जहाँ नाड़ी के पूरे 8 गुण आए। पूर्वा फाल्गुनी वर और उत्तराषाढ़ा वधू को 22 गुण मिले, और इंजन ने भकूट दोष को कटा हुआ माना क्योंकि तारा और नाड़ी दोनों शुद्ध थे, जो विवाह पटल की अनुकूल-तारा शर्त से मेल खाता है।[2] तीनों में ग्रह मैत्री 0 और भकूट 0 रहे, जबकि वश्य के पूरे 2 गुण मिले। पहली जोड़ी जैसी एक-नाड़ी स्थिति सबसे भारी है, और उसके उपाय नाड़ी दोष उपाय में दिए हैं। आपकी जोड़ी इस दायरे में कहीं भी आ सकती है, इसलिए सही जन्म-समय के साथ कुंडली मिलान इस सूचक से कहीं ज़्यादा मायने रखता है।
वर्ण कूट को अक्सर जाति समझ लिया जाता है। मुहूर्त चिन्तामणि में यह जन्मराशि का वर्गीकरण है: सिंह क्षत्रिय समूह में है और मकर वैश्य समूह में, और श्लोक केवल इतना कहता है कि वर से ऊँचे राशि-वर्ण वाली वधू प्रशस्त नहीं।[7] सिंह वर और मकर वधू हों तो यह 1 गुण मिलता है, मकर वर और सिंह वधू हों तो नहीं मिलता, पर यह 36 में से सिर्फ़ 1 गुण है और किसी परिवार की जाति के बारे में कुछ नहीं कहता। वश्य कूट इस जोड़ी के पक्ष में है, क्योंकि वृश्चिक को छोड़ हर राशि सिंह के वश में है,[6] इसलिए सिंह चाहे वर हो या वधू, पूरे 2 गुण मिलते हैं। अलग समुदायों से आने वाले जोड़ों के लिए राशि का यह एक गुण नहीं, बल्कि पूरी कुंडली, खासकर सातवाँ भाव यानी शादी और साथी का घर, असली कसौटी है।
सिंह-मकर की लव मैरिज अक्सर ऑफ़िस या किसी साझा लक्ष्य से शुरू होती है, और दिक्कत बाद में आती है जब सिंह खुली तारीफ़ चाहता है और मकर भावनाएँ अंदर रखता है। अरेंज्ड मैरिज में यही जोड़ी कई बार सिर्फ़ 14 गुण और षडाष्टक शब्द देखकर ठुकरा दी जाती है, जिससे अच्छा रिश्ता भी जल्दी छूट जाता है। दोनों हालात में सही कदम एक ही है: हाँ या ना से पहले दोनों के नक्षत्र, नाड़ी और नवांश-स्वामी देखें। लव मैरिज कुंडली मिलान और लव या अरेंज्ड मैरिज कैलकुलेटर बताते हैं कि आपकी कुंडली किस ओर झुकती है। दूसरी शादी का सवाल हो तो दूसरी शादी कैलकुलेटर आपका अपना सातवाँ भाव, यानी शादी और साथी का घर, देखता है, जो यहाँ राशि-जोड़ी से ज़्यादा अहम है।
जब एक साथी विदेश में हो और दूसरा भारत में, या दोनों NRI हों, तो सूर्य-शनि का अंतर और तीखा दिखता है। अलग-अलग समय पर होने वाली वीडियो कॉल में सिंह को वह गर्मजोशी कम मिलती है जो उसे चाहिए, और मकर तनाव में और ज़्यादा काम करके कम बोलता है। मदद करती है हफ़्ते की एक तय कॉल जिसे दोनों बचाकर रखें, और एक साझा लंबी योजना, जैसे वीज़ा की तारीख़, घर या बचत का लक्ष्य, क्योंकि मकर योजना पर भरोसा करता है और सिंह उसे आगे बढ़ाना पसंद करता है। कुंडली में विदेश में बसना या विदेशी जीवनसाथी दिखता है या नहीं, यह विदेश में शादी और बसने की गाइड और फ़ॉरेन स्पाउस कैलकुलेटर से देखें। विदेश में दर्ज जन्म-समय सही टाइम ज़ोन के साथ डालें, वरना चंद्र नक्षत्र और उसके साथ पूरा गुण-अंक बदल सकता है।
त्रिकाल वाणी पर हर दिशा का अलग पेज है। उलटी जोड़ी मकर और सिंह वही 6-8 दूरी मकर की ओर से पढ़ती है, जहाँ सिंह आठवीं राशि है। एक ही राशि वाली जोड़ियाँ सिंह-सिंह और मकर-मकर में स्वामी एक है, इसलिए वहाँ कठिन भकूट बनता ही नहीं। इन्हीं स्वामियों वाली दूसरी जोड़ियाँ दिखाती हैं कि दूरी से तस्वीर कैसे बदलती है: सिंह-कुम्भ में भी सूर्य के सामने शनि है पर दूरी 7-7 है, और मेष-मकर में शनि के सामने मंगल है और दूरी 4-10। अग्नि राशियों वाली सिंह-धनु और सिंह-मेष, और पृथ्वी राशियों वाली मकर-वृषभ और मकर-कन्या से तुलना पूरी होती है। सिंह वालों के लिए आने वाला साल सिंह राशि 2027 भविष्यवाणी में है।
यह पेज सिर्फ़ दोनों जन्मराशियाँ पढ़ता है। ₹51 का कुंडली मिलान दोनों की सही जन्म-तारीख़, समय और जगह लेकर Swiss Ephemeris से चंद्र नक्षत्र निकालता है और मुहूर्त चिन्तामणि के नियमों से वर्ण से नाड़ी तक आठों कूट गिनता है। सिंह-मकर जोड़े के लिए यह भी दिखता है कि आपके मामले में षडाष्टक का परिहार है या नहीं, दोनों की नाड़ी कौन-सी है, और दोनों कुंडलियों में मांगलिक स्थिति क्या है। ज़्यादातर फ़्री रिपोर्ट साइटें बिना वजह सिर्फ़ 36 में से अंक छाप देती हैं, और लाइव-चैट ऐप षडाष्टक सुनते ही महँगी पूजा बता देते हैं। यह रिपोर्ट रोहित गुप्ता, मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट, ने बनाई है, ताकि हर अंक के साथ उसका श्लोक दिखे। शादी के समय का सवाल हो तो सिंह राशि की शादी कब होगी, मकर राशि की शादी कब होगी और कुंडली से शादी का समय पढ़ें, और गुणों की पूरी समझ के लिए 36 गुण मिलान देखें।
इस जोड़ी के दो दबाव-बिंदु हैं: सिंह का स्वामी सूर्य और मकर का स्वामी शनि। इसलिए हर साथी अपने राशि-स्वामी पर काम करे, और षडाष्टक दूरी पर दोनों मिलकर। उपाय 1, सिंह साथी के लिए (सूर्य) 1. क्या करें: ताँबे के लोटे में जल, थोड़ा गुड़ और लाल फूल डालकर उगते सूरज को अर्घ्य दें और ॐ घृणि सूर्याय नमः 11 बार बोलें। 2. कब: हर रविवार सुबह, सूर्योदय के आधे घंटे के अंदर। 3. कितने का: घर में लोटा हो तो मुफ़्त, वरना गुड़ और फूल 10 से 20 रुपये। 4. कितने दिन: लगातार 11 रविवार। 5. आपके लिए क्यों: सूर्य सिंह का स्वामी है और शनि को शत्रु मानता है,[3] शांत सूर्य से सिंह साथी का अहं तब नहीं भड़कता जब मकर साथी तारीफ़ कम करता है। उपाय 2, मकर साथी के लिए (शनि) 1. क्या करें: किसी सफ़ाईकर्मी, मज़दूर या बुज़ुर्ग सहायक को काली उड़द या काले तिल का छोटा पैकेट दें और धन्यवाद कहें। 2. कब: हर शनिवार, सुबह 11 बजे से पहले। 3. कितने का: 10 से 20 रुपये। 4. कितने दिन: लगातार 8 शनिवार। 5. आपके लिए क्यों: शनि मकर का स्वामी है और सूर्य को शत्रु मानता है,[4] मेहनतकश लोगों की सेवा शनि को साधने का पारंपरिक तरीका है, जिससे मकर साथी का वह संकोच घटता है जिसे सिंह साथी ठंडापन समझता है। उपाय 3, दोनों के लिए (षडाष्टक दूरी) 1. क्या करें: दस मिनट साथ बैठें, इस हफ़्ते का एक फ़ैसला जो दोनों मिलकर लेंगे और एक आदत जो हर कोई छोड़ेगा क्योंकि वह दूसरे को चुभती है, दोनों एक कॉपी में लिखें। 2. कब: हर सोमवार रात 9 बजे, फ़ोन दूसरे कमरे में रखकर। 3. कितने का: मुफ़्त। 4. कितने दिन: लगातार 9 सोमवार। 5. आपके लिए क्यों: षडाष्टक आपकी दोनों जन्मराशियों की दूरी है और ग्रंथ इसके दोष वैर और वियोग बताता है,[1] इसलिए हफ़्ते की तय बातचीत ठीक उसी कमज़ोर जगह पर काम करती है, जबकि नक्षत्र जाँच बताती है कि शास्त्रीय परिहार आप पर लागू होता है या नहीं।[5] नीचे पुराने पारंपरिक सुझाव जैसे के तैसे हैं। इस जोड़ी पर सूर्य (सिंह) और शनि (मकर) का प्रभाव है, और इनकी परस्पर शत्रुता के कारण उपाय विशेष महत्व रखते हैं। पारंपरिक उपाय: • सिंह साथी रविवार को सूर्य को अर्घ्य दे और गुड़ या गेहूँ दान करे। • मकर साथी शनिवार को शनि देव या हनुमान जी का स्मरण करे और काले तिल, सरसों का तेल या काला कपड़ा दान करे। • सिंह साथी ॐ सूर्याय नमः और मकर साथी ॐ शं शनैश्चराय नमः का जप करे। • अहं, ठंडापन और भव्यता में संतुलन हेतु विनम्रता, गर्मजोशी और ध्यान का अभ्यास करें। • बुज़ुर्गों, मज़दूरों और ज़रूरतमंदों की मदद करना शनि को साधने का पुराना तरीका माना जाता है। ध्यान रहे: ये पारंपरिक सुझाव हैं। रत्न पहला उपाय नहीं है: सूर्य का माणिक और शनि का नीलम उलटी दिशा में काम करते हैं, इसलिए पहले मुफ़्त उपाय कैलकुलेटर से उपयुक्तता जाँचें।
यह सामान्य राशि अनुकूलता है। आपकी सटीक जन्म कुंडली के आधार पर पूर्ण मिलान — मांगलिक, नाड़ी, सभी 8 कूट और 10 उपाय — मात्र ₹51 में।
कुंडली मिलान करें ₹51 →राशि अनुकूलता दो राशियों का मेल दिखाती है। पर विवाह दो इंसानों का रिश्ता है। किसी की कुंडली से उनके 6 कार्मिक पैटर्न — स्वभाव, निष्ठा, धन, परिवार का सम्मान, छुपी प्रवृत्ति और विवाह का भविष्य — भृगु नाड़ी के आधार पर जानें। किसी पर निर्णय नहीं, केवल समझ।
कार्मिक बैकग्राउंड रीडिंग ₹101 →राशि स्तर पर अनुकूलता मध्यम है (36 में से 14 गुण, लगभग 39%, उपाय आवश्यक)। गर्मजोशी बनाम संयम और भव्यता बनाम मितव्ययिता में संतुलन व गहरा प्रयास ज़रूरी है। पक्का फ़ैसला दोनों के जन्म नक्षत्र वाले अष्टकूट मिलान से ही होगा।
साझा महत्वाकांक्षा और पूरकता। सिंह की दृष्टि व नेतृत्व और मकर का अनुशासन व रणनीति मिलकर एक सफल टीम बना सकते हैं।
गर्मजोशी बनाम संयम और भव्यता बनाम मितव्ययिता — मकर का ठंडापन बनाम सिंह की प्रशंसा-चाह, और सूर्य-शनि की परस्पर शत्रुता। गर्माहट, धैर्य व उपाय ज़रूरी हैं।
नहीं। यह केवल चंद्र-राशि आधारित विश्लेषण है। सिंह-मकर का असली 36-गुण अष्टकूट दोनों के नक्षत्र, गण, नाड़ी, भकूट और मंगल दोष से बनता है, जिसे ₹51 का कुंडली मिलान पूरा जाँचता है।
संभव है, पर गहरा प्रयास माँगता है। मकर की गर्मजोशी और सिंह का धैर्य व मितव्ययिता इसे प्रेम विवाह में स्थिर बना सकते हैं; उपाय सहायक हैं।
संवेदनशील पक्ष — मकर मितव्ययी, सिंह भव्यता-प्रिय। स्पष्ट बजट और संतुलन से समृद्धि व सुरक्षा दोनों संभव; मकर वित्त संभाले, सिंह कमाई लाए।
सिंह साथी के लिए रविवार का सूर्य अर्घ्य और गुड़ या गेहूँ दान, मकर साथी के लिए शनिवार की शनि या हनुमान पूजा और काले तिल-तेल दान, सूर्य व शनि मंत्र जप, विनम्रता-सेवा। रत्न सबसे आख़िर में, पहले मुफ़्त उपाय कैलकुलेटर से जाँच।
हाँ। सिंह-मकर का राशि मिलान मंगल दोष नहीं बताता, क्योंकि मांगलिक स्थिति हर कुंडली में मंगल किस भाव में बैठा है उससे तय होती है, इसलिए शादी से पहले यह जाँच अलग से कराएँ। विस्तार से मंगल दोष और विवाह मिलान में पढ़ें, या मुफ़्त मांगलिक दोष कैलकुलेटर से पहली जाँच करें।
सिर्फ़ इस आधार पर नहीं। विवाह पटल 6-8 दूरी के दोष वैर और वियोग बताता है, पर अगले श्लोक में राशि-स्वामी, वश्य और परस्पर अनुकूल तारा देखकर विवाह की अनुमति देता है,[2] और मकर पहले से सिंह के वश में है।[6] आपके नक्षत्र यह शर्त पूरी करते हैं या नहीं, यह कुंडली मिलान बताता है।
यह दोनों के जन्म नक्षत्र पर निर्भर है। हमारे इंजन के नमूनों में मघा-श्रवण (दोनों अन्त्य नाड़ी) को 6.5 और पूर्वा फाल्गुनी-उत्तराषाढ़ा को 22 गुण मिले। 36 में से 14 सिर्फ़ राशि-स्तर सूचक है, असली अंक के लिए दोनों के जन्म-विवरण डालें, और नक्षत्र पहले नक्षत्र कैलकुलेटर से जान सकते हैं।
मकर का स्वामी शनि है, इसलिए शनि का गोचर मकर वालों के फ़ैसलों में ज़्यादा महसूस होता है। शादी की तारीख़ तय करने से पहले मकर साढ़ेसाती और सिंह साढ़ेसाती देख लें, और भारी दौर में ऊपर बताया शनिवार वाला उपाय लगातार 8 शनिवार करें।
Rashi star par 36 mein se 14 gun aur shadashtak bhakoot hai, aur Surya-Shani aapas mein shatru hain.[3][4] Lekin Vivaha Patala anukool tara par vivah ki anumati deta hai,[2] aur kuch nakshatra jodiyon mein 22 gun tak aate hain. Faisla kundali milan se karein, sirf rashi dekh kar nahi.
षट्काष्टके मरणवैरवियोगदोषा द्विर् द्वादशे निधनता ऽप्रजाता त्रिकोणे। प्रीतिः परा निगदिता समसप्तकेषु शेषेष्व् अनेकविधसौख्यसुतार्थसंपत्॥दोनों जन्मराशियाँ 6-8 पर हों तो मृत्यु, वैर और वियोग के दोष कहे गए हैं, 2-12 पर निर्धनता (गरीबी), त्रिकोण पर संतान की कमी, समसप्तक (एक ही राशि 1-1 और आपसी सप्तम 1-7) पर परम प्रीति, और बाकी हर स्थिति में अनेक प्रकार का सुख, संतान और धन।
When the two Moon signs sit 6-8 from each other the faults named are death, enmity and separation, 2-12 brings poverty and the trikona brings lack of children, samasaptaka (same sign 1-1 and mutual 7th 1-7) gives the highest affection, and every other placement gives many kinds of happiness, children and wealth.
षट्काष्टके ऽपि भवनाधिपम् एव भाव एकाधिपत्यम् अवलोक्य च वश्यराशिम्। कार्यो विवाहसमयः शुभकृत् सदुक्तः स्तारा भवेद् यदि परस्परतो ऽनुकूला॥षडाष्टक में भी राशि-स्वामी, एकाधिपत्य और वश्य राशि देखकर, यदि तारा दोनों ओर से अनुकूल हो तो विवाह का समय शुभ कहा गया है।
Even in a 6-8 placement, after looking at the sign lords, a shared lordship and the vashya sign, the marriage time is called auspicious if the tara is favourable from each partner to the other.
मित्राणि द्युमणेः कुजेज्यशशिनः शुक्रार्कजौ वैरिणौ सौम्यश्चास्य समो विधोर्बुधरवी मित्रे न चास्य द्विषत् । शेषाश्चास्य समाः कुजस्य सुहृदश्चन्द्रेज्यसूर्या बुधः शत्रुः शुक्रशनी समौ च शशभृत्सूनोः सिताहस्करौ ॥ २७ ॥श्लोक सूर्य से शुरू होता है, जिसके मित्र मंगल, गुरु और चंद्र हैं, शत्रु शुक्र और शनि, और बुध सम, फिर चंद्र, मंगल और बुध के मित्र-शत्रु बताता है।
The verse opens with the Sun, whose friends are Mars, Jupiter and the Moon and whose enemies are Venus and Saturn, with Mercury neutral, and then gives the friends and enemies of the Moon, Mars and Mercury.
मित्रे चास्य रिपुः शशी गुरुशनिक्ष्माजाः समा गीष्पतेर्मित्राण्यर्ककुजेन्दवो बुधसितौ शत्रू समः सूर्यजः । मित्रे सौम्यशनी कवेः शशिरवी शत्रू कुजेज्यौ समौ मित्रे शुक्रबुधौ शनेः शशिरविक्ष्माजा द्विषोऽन्यः समः ॥ २८ ॥बुध, गुरु और शुक्र की सूची के बाद श्लोक शनि पर समाप्त होता है, जिसके मित्र शुक्र और बुध हैं, शत्रु चंद्र, सूर्य और मंगल, और बचा हुआ एक ग्रह सम।
After the lists for Mercury, Jupiter and Venus, the verse closes with Saturn, whose friends are Venus and Mercury and whose enemies are the Moon, the Sun and Mars, the one planet left being neutral.
प्रोक्ते दुष्टभकूटके परिणयस्त्वेकाधिपत्ये शुभोऽथो राशीश्वरसौहृदेऽपि गदितो नाड्यृक्षशुद्धिर्यदि । अन्यर्क्षेंऽशपयोर्बलित्वसखिते नाड्यृक्षशुद्धौ तथा ताराशुद्धिवशेन राशिवशताभावे निरुक्तो बुधैः ॥ ३२ ॥दुष्ट भकूट होने पर भी विवाह शुभ कहा गया है यदि दोनों राशियों का स्वामी एक हो, या राशि-स्वामी मित्र हों और नाड़ी-नक्षत्र शुद्ध हों, या अन्य नक्षत्र में नवांश-स्वामी बलवान और मित्र हों और नाड़ी-नक्षत्र शुद्ध हों, और राशि-वश्य न हो तो तारा-शुद्धि से भी विद्वान इसे स्वीकार करते हैं।
With a bad bhakoot, marriage is still called auspicious if both signs share one lord, or if the sign lords are friends with Nadi and nakshatra clean, or, for other nakshatras, if the navamsha lords are strong and friendly with Nadi and nakshatra clean, and the learned also allow it through tara purity when rashi vashya is absent.
हित्वा मृगेन्द्रं नरराशिवश्याः सर्वे तथैषां जलजास्तु भक्ष्याः । सर्वेऽपि सिंहस्य वशे विनालिं ज्ञेयं नराणां व्यवहारतोऽन्यत् ॥ २३ ॥सिंह को छोड़ सब राशियाँ नर राशियों के वश में हैं और जलचर राशियाँ उनका भक्ष्य, वृश्चिक को छोड़ सब राशियाँ सिंह के वश में हैं, और बाकी बात लोक-व्यवहार से जानी जाती है।
Except Leo, all signs come under the human signs and the water signs are their food, every sign except Scorpio comes under Leo, and the rest is judged from human usage.
द्विजा झषालिकर्कटास्ततो नृपा विशोऽङ्घ्रिजाः । वरस्य वर्णतोऽधिका वधूर्न शस्यते बुधैः ॥ २२ ॥मीन, वृश्चिक और कर्क ब्राह्मण राशियाँ हैं और आगे क्रम से क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र समूह आते हैं, जिससे सिंह क्षत्रिय और मकर वैश्य राशि बनती है, और वर से ऊँचे राशि-वर्ण वाली वधू प्रशस्त नहीं मानी गई।
Pisces, Scorpio and Cancer are Brahmin signs and the next groups in order are Kshatriya, Vaishya and Shudra, which puts Leo among the Kshatriya signs and Capricorn among the Vaishya signs, and a bride whose sign varna is above that of the groom is not recommended.
दशबन्ध्वायसहजस्वान्त्यस्थास्तु परस्परम् । तत्काले मित्रतां यान्ति रिपवोऽन्यत्र संस्थिताःजो ग्रह एक-दूसरे से 10, 4, 11, 3, 2 या 12वें स्थान में हों वे उस कुंडली में तात्कालिक मित्र बनते हैं, और बाकी स्थानों में बैठे ग्रह तात्कालिक शत्रु।
Planets placed in the 10th, 4th, 11th, 3rd, 2nd or 12th from each other become temporary friends in that chart, and planets placed anywhere else become temporary enemies.
समो मित्ररिपुत्वे तु शत्रुत्वे त्वधिशत्रुता । एवं विविच्य दैवज्ञो जातकस्य फलं वदेत्जो ग्रह एक प्रकार से मित्र और दूसरे प्रकार से शत्रु हो वह सम हो जाता है, जो स्वभाव और स्थिति दोनों से शत्रु हो वह अधिशत्रु, और ज्योतिषी इसे तौलकर ही फल कहे।
A planet that is a friend in one way and an enemy in the other becomes neutral, one that is an enemy both by nature and by placement becomes a bitter enemy, and the astrologer should state results only after weighing this.
रोहित गुप्ता त्रिकाल वाणी के संस्थापक एवं मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट हैं। उनकी भविष्यवाणियाँ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS), भृगु नाड़ी और षड्बल पर आधारित हैं।