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सिंह राशि की शादी कब होगी: 2027 के योग

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect16 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

सिंह राशि की शादी का समय सप्तम भाव कुंभ, उसके स्वामी शनि, चल रही दशा और गोचर से तय होता है, किसी एक उम्र से नहीं। 31 अक्टूबर 2026 से गुरु आपकी अपनी राशि सिंह में आता है और शनि आठवें भाव में रहता है। अपनी सही खिड़की कुंडली से जाँचें।

Deep Dive Analysis

सिंह राशि की शादी कब होगी: सीधा और छोटा जवाब

सिंह राशि की शादी की कोई एक तारीख या उम्र तय नहीं होती। समय तब बनता है जब तीन चीज़ें साथ मिलें: सातवें भाव यानी कुंभ और उसके स्वामी शनि की स्थिति, चल रही महादशा-अंतर्दशा का विवाह से जुड़ाव, और गुरु-शनि का गोचर। 2026-27 में गुरु 31 अक्टूबर 2026 से आपकी अपनी राशि सिंह में आता है, जबकि शनि मीन में आपके आठवें भाव में रहता है। इसलिए सही उत्तर खिड़कियों में है, तारीख़ में नहीं। पूरी विधि के लिए शादी कब होगी: कुंडली से विवाह का समय पढ़ें, और अपना व्यक्तिगत नतीजा शादी कब होगी कैलकुलेटर से निकालें।

सिंह चंद्र राशि का मतलब: लग्न नहीं, चंद्रमा की राशि

यहाँ सिंह राशि का अर्थ है कि जन्म के समय चंद्रमा सिंह में था। यह आपका लग्न नहीं है, और दोनों को मिलाने से ही सबसे ज़्यादा भूल होती है। फलदीपिका गोचर के फल के लिए चंद्र राशि को प्रधान मानती है[1], इसलिए इस पन्ने में हर गोचर आपकी सिंह राशि से गिना गया है। अगर आपको अपनी चंद्र राशि पक्की नहीं पता तो राशि कैलकुलेटर चलाएँ, और लग्न अलग से देखने के लिए लग्न कैलकुलेटर का उपयोग करें। पूरी जन्म-कुंडली के लिए जन्म कुंडली कैलकुलेटर सबसे सीधा रास्ता है।

सप्तम भाव कुंभ और स्वामी शनि: सिंह के लिए विवाह का केंद्र

सिंह राशि से गिनने पर सातवाँ भाव कुंभ बनता है, जिसके स्वामी शनि हैं। यही भाव जीवनसाथी, विवाह और साझेदारी का घर है। फलदीपिका कहती है कि सप्तमेश बलवान और शुभ दृष्ट हो तो जीवनसाथी सुशील और अच्छी संतान से युक्त होता है[7]। शनि स्वभाव से धीमे और स्थिर ग्रह हैं, इसलिए सिंह के लिए रिश्ता अक्सर सोच-समझकर और परिवार की मंज़ूरी के साथ बनता है, जल्दबाज़ी में नहीं। यह देरी का फ़ैसला नहीं, बल्कि गंभीरता का संकेत है। इस घर को विस्तार से समझने के लिए सातवाँ भाव कमज़ोर हो तो विवाह में देरी के कारण पढ़ें।

शनि की दोहरी भूमिका: छठे और सातवें भाव का स्वामी

सिंह के लिए शनि दो घरों के स्वामी हैं: छठा मकर और सातवाँ कुंभ। छठा भाव सेवा, कर्ज़ और रोज़ के संघर्ष का घर है, और सातवाँ साझेदारी का। इसका सरल मतलब यह है कि सिंह के जातक रिश्ते में ज़िम्मेदारी और निभाने की क्षमता को सबसे ऊपर रखते हैं। शनि सूर्य के स्वाभाविक विरोधी भी माने जाते हैं, इसलिए आपकी अपनी पहचान और साथी की माँगों के बीच संतुलन बिठाना इस कुंडली की असली कसौटी है। शनि की दशा-अंतर्दशा में यही बात उभरती है, जिसकी चर्चा आगे शनि महादशा के प्रभाव के साथ जोड़कर की गई है।

शुक्र का हाल: तीसरे और दसवें भाव का स्वामी

सिंह के लिए शुक्र तीसरे भाव तुला और दसवें भाव वृषभ के स्वामी हैं। पुरुष की कुंडली में शुक्र विवाह के मुख्य कारक हैं, और यहाँ वे करियर यानी दसवें भाव से जुड़े हैं। इसलिए बहुत से सिंह जातकों में विवाह तब आगे बढ़ता है जब पेशे की दिशा साफ़ होने लगती है। तीसरा भाव प्रयास, संवाद और छोटी यात्राओं का है, इसलिए रिश्ते की बातचीत में खुद पहल करना भी मदद करता है। शुक्र की दशा में विवाह की संभावनाएँ शुक्र अंतर्दशा और विवाह योग में अलग से समझाई गई हैं।

गुरु: पाँचवें और आठवें भाव का स्वामी

गुरु सिंह के लिए पाँचवें धनु और आठवें मीन के स्वामी हैं। पाँचवाँ भाव प्रेम और संतान का है, इसलिए गुरु का शुभ होना प्रेम से विवाह तक का रास्ता आसान करता है। आठवाँ भाव ससुराल, अचानक बदलाव और गहरे रिश्तों का भी है। स्त्री की कुंडली में गुरु विवाह के मुख्य कारक हैं, इसलिए उनकी स्थिति दोनों के लिए देखी जाती है। गुरु का सीधा असर सहमति और आशीर्वाद पर पड़ता है, जिसका विस्तार गुरु महादशा के पन्ने पर मिलेगा। कुल मिलाकर इस कुंडली में गुरु मदद भी करता है और परीक्षा भी लेता है।

सूर्य का स्वभाव: स्वाभिमान और साझेदारी का संतुलन

सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं, जो प्रकाश, मान और नेतृत्व के ग्रह हैं। इसी कारण सिंह के लोग रिश्ते में सम्मान और स्पष्टता चाहते हैं। यह गुण भरोसा भी देता है और कभी-कभी बातचीत में कठोरता भी ला सकता है। शनि सातवें भाव के स्वामी हैं, इसलिए साथी अक्सर ऐसा चुना जाता है जो अनुशासित और ज़िम्मेदार हो। जब आप अपने मान को साथी की ज़रूरत के साथ संतुलित रखना सीखते हैं, तब रिश्ता टिकता है। राशि के स्वभाव की गहराई के लिए सिंह राशि: स्वभाव, स्वामी और खूबियाँ पढ़ें और साझेदारी की अपनी सोच को कुंडली में विवाह योग से मिलाएँ।

मघा, पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी: सिंह के तीन नक्षत्र

सिंह राशि में तीन नक्षत्र आते हैं: मघा, पूर्वाफाल्गुनी और उत्तराफाल्गुनी का पहला पाद। मघा के स्वामी केतु हैं, पूर्वाफाल्गुनी के शुक्र और उत्तराफाल्गुनी के सूर्य। यह इसलिए ज़रूरी है कि आपकी जन्म दशा इसी से तय होती है। मघा में परंपरा और पूर्वजों से जुड़ाव का भाव गहरा रहता है, पूर्वाफाल्गुनी में सुख और आकर्षण का, और उत्तराफाल्गुनी में निभाने और सहयोग का। अपना नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर चलाएँ, और सभी नक्षत्रों के स्वामी समझने के लिए 27 नक्षत्रों के नाम, स्वामी ग्रह और राशि पढ़ें।

नवांश और सप्तमेश: असली तस्वीर यहीं बनती है

सिर्फ़ राशि से शादी का समय नहीं निकलता। असली तस्वीर नवांश कुंडली और सप्तमेश शनि की स्थिति से बनती है। बृहत् पराशर होरा में एक योग बताया गया है कि अष्टमेश सप्तम राशि में हो और लग्न के नवांश पर शुक्र का प्रभाव हो तो विवाह 25वें या 33वें वर्ष में मिलता है[9]। यह एक उदाहरण है, कोई सार्वभौमिक नियम नहीं, क्योंकि हर कुंडली में कई योग साथ चलते हैं। इसलिए अपना नवांश निकलवाकर जन्म कुंडली कैलकुलेटर में सप्तमेश देखें और अपने योगों की सूची के लिए कुंडली में विवाह योग से मिलान करें।

देरी के सामान्य कारण: कुंडली में क्या देखें

देरी की वजह हर बार एक नहीं होती। सामान्यतः सप्तम भाव या सप्तमेश पर पाप ग्रहों का प्रभाव, शुक्र या गुरु का कमज़ोर होना, और दशा का देर से विवाह-कारक होना कारण बनते हैं। फलदीपिका के अनुसार सातवें भाव पर पाप दृष्टि या योग से जीवनसाथी के सुख में बाधा कही गई है, जबकि शुभ ग्रहों की दृष्टि या योग से दंपती भाग्यशाली बताए गए हैं[8]। यानी हर बाधा के साथ उसका समाधान भी देखा जाता है। दोषों के भ्रम से बचने के लिए मंगल दोष: असली या नकली और काल सर्प दोष और विवाह पढ़ें।

महादशा की समय-रेखा: जन्म दशा कौन सी है

विंशोत्तरी दशा में हर ग्रह के साल तय हैं: सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17, केतु 7 और शुक्र 20 वर्ष। मघा में जन्मे व्यक्ति की जन्म दशा केतु की, पूर्वाफाल्गुनी में शुक्र की और उत्तराफाल्गुनी में सूर्य की होती है। जन्म के समय उस दशा का केवल बचा हुआ हिस्सा मिलता है, जो चंद्रमा के नक्षत्र में डिग्री पर निर्भर है। उसके बाद अगली दशाएँ तय क्रम में आती हैं। अपनी दशा की सटीक तारीख़ें दशा कैलकुलेटर से निकालें और अंतर्दशा की गणित के लिए प्रत्यंतर दशा कैसे निकालें पढ़ें।

शनि की दशा और अंतर्दशा में विवाह

सप्तमेश होने के कारण शनि की दशा और अंतर्दशा सिंह के लिए विवाह का सबसे सीधा समय मानी जाती है। फलदीपिका के अनुसार सप्तम में बैठे ग्रह, सप्तम को देखने वाले ग्रह या सप्तमेश की दशा आने पर जीवनसाथी का लाभ बताया गया है[11]। शनि की दशा लंबी, 19 साल की होती है, इसलिए इसकी हर अंतर्दशा का अलग विचार करना पड़ता है। इस दशा में रिश्ते धीरे बनते हैं पर टिकाऊ होते हैं। अपनी शनि दशा की परतें समझने के लिए शनि महादशा के प्रभाव और शनि ढैया किस राशि पर है पढ़ें।

शुक्र की दशा में विवाह: सुख और आकर्षण का समय

सिंह के लिए शुक्र तीसरे और दसवें भाव के स्वामी हैं, और पुरुष की कुंडली में विवाह के कारक भी। इसलिए शुक्र की महादशा या अंतर्दशा में रिश्ते की बातचीत अक्सर करियर की प्रगति के साथ चलती है। पूर्वाफाल्गुनी में जन्मे लोगों की जन्म दशा ही शुक्र की होती है, पर इसका मतलब शुरुआती 20 साल नहीं, केवल बचा हुआ हिस्सा है। शुक्र के साथ बलवान चंद्रमा और शुभ दृष्टि हो तो परिणाम और अच्छे आते हैं। विस्तार के लिए शुक्र अंतर्दशा और विवाह योग देखें और अपनी तारीख़ें दशा कैलकुलेटर से निकालें।

गुरु और बुध की दशा: परिवार की सहमति वाला समय

गुरु पाँचवें भाव के स्वामी हैं, यानी प्रेम और संतान के, और बुध दूसरे व ग्यारहवें के, यानी परिवार और लाभ के। इन दोनों की दशा में विवाह अक्सर घर की सहमति और सामाजिक दायरे से बनता है। गुरु की दशा 16 साल की और बुध की 17 साल की होती है, इसलिए अंतर्दशा देखे बिना निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। बुध की दशा में बातचीत, परिचय और मध्यस्थता से रिश्ते आते हैं। इन ग्रहों के बड़े असर की झलक गुरु महादशा और बुध महादशा में मिलती है।

सूर्य, चंद्र और मंगल की दशा: छोटी पर निर्णायक

सूर्य की दशा 6 साल, चंद्र की 10 और मंगल की 7 साल की होती है। उत्तराफाल्गुनी में जन्मे लोगों की जन्म दशा सूर्य की ही है, इसलिए बहुत से लोग शादी की उम्र तक इस दशा से आगे निकल चुके होते हैं। मंगल सिंह के लिए चौथे और नवें भाव के स्वामी हैं, यानी घर और भाग्य के, इसलिए उनकी दशा में घर बसाने की बातें आगे बढ़ सकती हैं। चंद्र बारहवें भाव के स्वामी हैं, जिनकी दशा में विदेश या दूर के रिश्ते का भी योग बनता है। मंगल से जुड़े भ्रम के लिए मंगल दोष और सातवाँ भाव पढ़ें।

राहु और केतु की दशा में रिश्ते

राहु की दशा 18 साल और केतु की 7 साल की होती है। मघा नक्षत्र के स्वामी केतु हैं, इसलिए मघा में जन्मे लोगों की जन्म दशा केतु की होती है और बाद में राहु की लंबी दशा आती है। राहु की दशा में असामान्य या अलग पृष्ठभूमि के रिश्ते, प्रेम विवाह या दूर के रिश्ते ज़्यादा दिखते हैं, जबकि केतु की दशा में अनासक्ति का भाव रह सकता है। यह कोई निश्चित फल नहीं, बल्कि प्रवृत्ति है। दोनों की गहरी समझ के लिए राहु महादशा के प्रभाव और केतु महादशा और वैराग्य पढ़ें।

गोचर में किसे गिनें: चंद्र राशि से देखना

गोचर यानी ग्रहों की आज की चाल को जन्म की चंद्र राशि से गिना जाता है। यहाँ मुख्य रूप से गुरु और शनि गिने जाते हैं, क्योंकि ये धीमे ग्रह हैं और महीनों-सालों तक एक राशि में रहते हैं। फलदीपिका के अनुसार गुरु चंद्र राशि से 2, 5, 7, 9 और 11वें भाव में शुभ है, और शनि-मंगल 3, 6 और 11वें में[2]। गुरु के गोचर फल अलग श्लोक में गिनाए गए हैं[3]। गोचर की आम समझ के लिए शनि गोचर 2027 और गुरु गोचर 2027 के पन्ने उपयोगी हैं।

गुरु का 31 अक्टूबर 2026 से अपनी राशि में गोचर

Swiss Ephemeris के हिसाब से गुरु 31 अक्टूबर 2026 के आसपास कर्क से सिंह में जाता है और 2027 के लगभग नवंबर तक वहीं रहता है। सिंह से सिंह पहला भाव यानी जन्म राशि है, जिसमें गुरु को ग्रंथ अपेक्षाकृत कठिन गोचर गिनता है, और स्थान छूटने, धन की हानि या विरोध जैसे फल बताता है[3]। परंतु यह बात सीधे विवाह पर रोक नहीं है, बल्कि खुद पर ध्यान और जल्दबाज़ी से बचने का संकेत है। इसलिए इस दौरान रिश्ते की बात पक्की करने से पहले जाँच-पड़ताल और परिवार की सहमति को समय दें। गुरु गोचर का असर राशि के हिसाब से बदलता है, इसे गुरु गोचर 2026: धनु राशि पर असर जैसे पन्नों में देख सकते हैं।

गुरु की दृष्टि कुंभ पर: सप्तम भाव को सहारा

सिंह में बैठा गुरु अपनी पाँचवीं, सातवीं और नौवीं दृष्टि से धनु, कुंभ और मेष को देखता है। इनमें कुंभ आपका सप्तम भाव है। गुरु की सातवीं दृष्टि सप्तम भाव पर पड़ना परंपरा में विवाह के लिए सहायक गिना जाता है। यही कारण है कि जन्म राशि का गोचर कठिन गिना गया हो तब भी गुरु की दृष्टि का यह पक्ष रिश्ते की बातचीत को सहारा देता है। फलदीपिका के अनुसार बुरे फल वाला ग्रह शुभ दृष्टि से निष्फल कहा गया है[5], पर यह हर कुंडली में अलग से जाँचना पड़ता है। इस पक्ष के लिए शादी कब होगी कैलकुलेटर में अपनी तारीख़ें डालें।

शनि का आठवाँ भाव 3 जून 2027 तक: धैर्य का समय

शनि अभी मीन में है, जो सिंह से आठवाँ भाव है, और 3 जून 2027 के आसपास तक वहीं रहता है। फलदीपिका ने शनि के गोचर फल जन्म राशि से आठवें भाव तक क्रम से गिनाए हैं[4], और आठवें भाव को सेहत, धन और निकट संबंधों के लिए अपेक्षाकृत भारी बताया गया है। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि इस अवधि में बड़े वादे, कर्ज़ और जल्दबाज़ी की सगाई टालें और हर बात दो बार परखें। यह डराने की बात नहीं, सावधानी की सलाह है, और शनिवार का सरल उपाय आगे दिया गया है। अपनी राशि के लिए ढैया और अष्टम शनि की स्थिति सिंह राशि साढ़ेसाती और ढैया में विस्तार से देखें।

शनि 3 जून 2027 के बाद मेष में, फिर वक्री वापसी

जून 2027 में शनि मेष में जाता है, जो सिंह से नौवाँ भाव है, और Swiss Ephemeris के अनुसार वक्री होकर 2027 के अंत में कुछ समय के लिए फिर मीन में लौटता है। नौवाँ भाव भाग्य, गुरुजन और धर्म का घर है, इसलिए आठवें भाव के भारीपन से निकलना राहत की तरह महसूस हो सकता है। शनि को मेष में नीच भी कहा जाता है, जिसकी चर्चा मेष में शनि नीच 2027 और शनि गोचर 2027 की पूरी गाइड में है। तारीख़ों के लिए शनि गोचर 2027 की तारीख़ें देखें।

राहु-केतु का दिसंबर 2026 का बदलाव

माध्य राहु की गणना के अनुसार राहु दिसंबर 2026 की शुरुआत में कुंभ से मकर में जाता है और केतु सिंह से कर्क में। सिंह से मकर छठा भाव है और कर्क बारहवाँ। फलदीपिका में राहु-केतु को सूर्य के समान गिना गया है[2], और छठे भाव का गोचर सहायक माना जाता है, पर यह केवल सामान्य संकेत है और बिना जन्म-विवरण के किसी कुंडली पर पक्का नहीं कहा जा सकता। केतु की बारहवें भाव में स्थिति मन को अंदर की ओर ले जा सकती है। विस्तृत जानकारी राहु केतु गोचर 2027 और राहु केतु गोचर 2026 प्यार-रिश्तों पर असर में पढ़ें।

2026-27 की संभावित खिड़कियाँ: कब बात आगे बढ़ती है

यह कोई भविष्यवाणी नहीं, बल्कि गोचर का मोटा नक्शा है। पहली अवधि 31 अक्टूबर 2026 से जून 2027 तक की है, जब गुरु आपकी राशि में है और उसकी दृष्टि सप्तम भाव पर है, पर शनि आठवें में है। इसमें परिचय और बातचीत अच्छी है, निर्णय धीमे रखें। दूसरी अवधि जून 2027 के बाद की है, जब शनि आठवें से निकलकर नौवें में जाता है। तीसरी और सबसे अनुकूल अवधि 2027 के अंत में गुरु के कन्या में जाने के साथ बनती है, क्योंकि कन्या सिंह से दूसरा भाव है और गुरु दूसरे भाव में शुभ गिना जाता है[2]। यह तभी असर दिखाएगा जब आपकी दशा साथ दे, इसलिए दशा कैलकुलेटर से अपनी दशा मिलाएँ।

विवाह मुहूर्त 2027 कैसे देखें

जब रिश्ता तय हो जाए तब विवाह की तारीख़ चुनी जाती है। इसके लिए गुरु और शुक्र के अस्त होने के समय, चातुर्मास और खरमास जैसे परहेज़ की अवधि देखी जाती है, और उसके बाद वर-वधू की कुंडली से शुभ तारीख़ छाँटी जाती है। साल भर की सूची के लिए विवाह मुहूर्त 2027 पन्ना देखें और महीने के हिसाब से दिसंबर 2026 विवाह मुहूर्त, जनवरी 2027 विवाह मुहूर्त और फरवरी 2027 विवाह मुहूर्त पढ़ें। निजी मुहूर्त के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर चलाएँ।

प्रेम विवाह या अरेंज: सिंह के लिए कौन सा रास्ता

पाँचवाँ भाव धनु है, जिसके स्वामी गुरु हैं, और सातवें के स्वामी शनि। जब पंचम और सप्तम का संबंध बने तो प्रेम से विवाह की संभावना बढ़ती है, जबकि अकेले सप्तमेश शनि का प्रभाव प्रबल हो तो अरेंज या परिवार की मंज़ूरी वाला रास्ता ज़्यादा स्वाभाविक रहता है। कोई भी रास्ता गलत नहीं, बस आपकी कुंडली की प्रवृत्ति अलग हो सकती है। इसे जाँचने के लिए प्रेम या अरेंज विवाह कैलकुलेटर चलाएँ और प्रेम विवाह में कुंडली मिलान की भूमिका के लिए लव मैरिज में कुंडली मिलान पढ़ें।

कुंडली मिलान: सिंह राशि में किन बातों पर ध्यान दें

कुंडली मिलान का मतलब सिर्फ़ 36 में से अंक गिनना नहीं है। अष्टकूट के अंक एक आधार देते हैं, पर सप्तम भाव, दशा की संगति और नवांश भी देखने पड़ते हैं। सिंह के लिए शनि सप्तमेश हैं, इसलिए साथी की कुंडली में शनि और सूर्य के बीच का संतुलन देखना उपयोगी रहता है। सिर्फ़ नाम से मिलान पर निर्भर न रहें, जन्म विवरण से ही सही नतीजा मिलता है। विस्तार के लिए 36 गुण मिलान की पूरी व्याख्या, जन्म तारीख से कुंडली मिलान और नाम से कुंडली मिलान पढ़ें, और सीधे जाँच के लिए कुंडली मिलान पन्ना खोलें।

मांगलिक और सिंह: मंगल चौथे और नौवें भाव का स्वामी

सिंह के लिए मंगल चौथे वृश्चिक और नौवें मेष के स्वामी हैं, यानी घर और भाग्य के। यह स्थिति मंगल को सिंह के लिए अपेक्षाकृत शुभ ग्रह बनाती है। मांगलिक होने का मतलब केवल यह है कि जन्म कुंडली में मंगल कुछ विशेष भावों में है, और इसका असर लग्न, चंद्रमा और शुक्र से भी देखा जाता है। हर जगह इसे विवाह की रुकावट बताना भ्रम है, और अधिकांश मामलों में परिहार भी मौजूद रहते हैं। अपनी स्थिति जाँचने के लिए मांगलिक दोष कैलकुलेटर चलाएँ, और विस्तार के लिए मांगलिक और गैर-मांगलिक का विवाह तथा मांगलिक मिथक पढ़ें।

उपाय 1: रविवार को सूर्य को जल अर्पण

क्या करना है: रविवार को ताँबे या किसी भी साफ़ लोटे से उगते सूर्य को जल दें और मन में शांत भाव रखें। कब: रविवार सुबह, सूर्योदय के तुरंत बाद। कितने का: कोई खर्च नहीं। कितने दिन: लगातार 11 रविवार। आपके लिए क्यों: सूर्य आपकी राशि के स्वामी हैं, और फलदीपिका की इसी बात से यह उपाय जुड़ता है कि प्रतिकूल ग्रहों के लिए जप, सत्कर्म, व्रत, दान और वंदन से शांति कही गई है[6]। सावधानी: इसे अहंकार की शांति के भाव से करें, किसी से सौदे के भाव से नहीं। 11 रविवार के बाद रुककर अपनी दशा फिर देखें।

उपाय 2: शनिवार को ज़रूरतमंद की सहायता

क्या करना है: शनिवार को किसी बुज़ुर्ग कर्मचारी, सफ़ाईकर्मी या ज़रूरतमंद को काली उड़द या खाने का सामान दें। कब: शनिवार शाम को। कितने का: 30 से 50 रुपये। कितने दिन: लगातार 9 शनिवार। आपके लिए क्यों: शनि आपके सप्तम भाव के स्वामी हैं और अभी आठवें भाव में चल रहे हैं, इसलिए उनकी सेवा-भावना वाला सरल उपाय रिश्तों में धैर्य और अनुशासन लाता है। सावधानी: दिखावे या कठोर नियमों की ज़रूरत नहीं, जो निभ सके वही करें। उपाय चुनने में उपाय कैलकुलेटर की मदद ले सकते हैं।

उपाय 3: शुक्रवार को मिश्री का दान

क्या करना है: शुक्रवार को थोड़ी मिश्री या सफ़ेद मिठाई किसी मंदिर में या किसी कन्या को दें। कब: शुक्रवार सुबह। कितने का: 20 से 40 रुपये। कितने दिन: लगातार 11 शुक्रवार। आपके लिए क्यों: शुक्र आपके दसवें और तीसरे भाव के स्वामी हैं और विवाह के कारक हैं, इसलिए रिश्ते में मधुरता और बातचीत की सहजता के लिए यह सरल उपाय चुना गया है। सावधानी: यह उपाय किसी को ख़ुश करने की शर्त नहीं, बल्कि अपने मन को स्थिर रखने का तरीका है। शुक्र की दशा के संदर्भ में शुक्र अंतर्दशा और विवाह योग भी पढ़ें।

उपाय की सीमा: क्या न करें और रत्न के बारे में

ऊपर के तीनों उपाय आज ही शुरू किए जा सकते हैं और खर्च बहुत कम है। रत्न पहला उपाय नहीं है, क्योंकि महँगा है और गलत रत्न का असर उल्टा हो सकता है। फलदीपिका कहती है कि जो अहिंसक, संयमी और धर्म से धन कमाने वाला है, उस पर ग्रह सदा कृपालु रहते हैं[10], इसलिए आचरण उपाय से ऊपर रखें। यदि आप रत्न के बारे में जानना चाहें तो पहले कुंडली से जाँच करें और रत्न सूटेबिलिटी कैलकुलेटर देखें। किसी ने कहा कि अमुक अनुष्ठान न कराया तो शादी रुक जाएगी, यह डर पर टिका दावा है और ग्रंथ की भाषा नहीं।

मिथक और सच: सिंह राशि और शादी

मिथक: सिंह राशि वालों की शादी हमेशा देर से होती है। सच: समय सप्तमेश शनि, दशा और गोचर पर टिका है, राशि के नाम पर नहीं, और कई सिंह जातकों की शादी जल्दी भी होती है। मिथक: आठवें भाव का शनि शादी रोक देता है। सच: यह सावधानी और धीमे निर्णय की अवधि है, रोक नहीं। मिथक: 36 में से कम गुण हों तो रिश्ता नहीं हो सकता। सच: अंक एक आधार हैं, पूरा फ़ैसला सप्तम भाव और दशा से होता है। सच्चाई जानने के लिए कुंडली में विवाह योग और शादी कब होगी: कुंडली से विवाह का समय पढ़ें।

आज क्या करें: तीन कदम और अपनी खिड़की निकालें

पहला कदम यह है कि अपना सही जन्म समय और स्थान तय कर लें, क्योंकि इसके बिना सप्तमेश और नवांश नहीं निकलते। दूसरा कदम है शादी कब होगी कैलकुलेटर चलाकर दशा और गोचर का मेल देखना। तीसरा कदम है ऊपर के तीन उपायों में से एक चुनकर शुरू करना। अगर आपकी कुंडली में कोई उलझन है तो हमारे साथ शादी का मार्गदर्शन पन्ने पर बात कर सकते हैं, या ऑनलाइन परामर्श के लिए ऑनलाइन विवाह ज्योतिषी देखें। सुविधा के लिए पहले से समय तय कर लें। रोहित गुप्ता, मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट, की टीम आपकी कुंडली देखती है।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

चंद्र राशि
जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। गोचर का फल इसी से गिना जाता है।
सप्तम भाव
कुंडली का सातवाँ घर, जो जीवनसाथी, विवाह और साझेदारी का भाव है।
गोचर
ग्रहों की आज की चाल। इसे जन्म की चंद्र राशि से गिनकर समय का फल देखा जाता है।
महादशा
विंशोत्तरी पद्धति में ग्रह का लंबा कालखंड, जैसे शनि के 19 और शुक्र के 20 वर्ष।
अष्टम शनि
जब शनि जन्म की चंद्र राशि से आठवें भाव में गोचर करता है। इसे ढैया की तरह सावधानी की अवधि गिना जाता है।
नवांश
राशि का नौवाँ हिस्सा। विवाह की गहराई और जीवनसाथी का स्वभाव नवांश कुंडली से परखा जाता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    सर्वेषु लग्नेष्वपि सत्सु चन्द्रलग्नं प्रधानं खलु गोचरेषु । तस्मात्तदृक्षादपि वर्तमानग्रहेन्द्रचारैः कथयेत्फलानि ॥१॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 1

    गोचर के फल में चंद्र लग्न यानी चंद्र राशि प्रधान है, और उसी राशि से चल रहे ग्रहों के आधार पर फल कहे जाते हैं।

    For transit results the Moon sign is primary, and results are told from the Moon sign by the planets currently moving.

  2. [2]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    सूर्यः षट्त्रिदशस्थितस्त्रिदशषट्सप्ताद्यगश्चन्द्रमाः जीवस्त्वस्ततपोद्विपञ्चमगतो वक्रार्कजौ षट्त्रिगौ । सौम्यः षट्स्वचतुर्दशाष्टमगतः सर्वेऽप्युपान्त्यस्थिताः शुक्रः खास्तरिपून्विहाय शुभदस्तिग्मांशुवद्भोगिनौ ॥२॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 2

    गोचर में गुरु चंद्र राशि से 2, 5, 7, 9 और 11वें भाव में शुभ है। शनि और मंगल 3, 6 और 11वें भाव में शुभ माने गए हैं।

    In transit Jupiter is favourable in the 2nd, 5th, 7th, 9th and 11th from the Moon, and Saturn and Mars in the 3rd, 6th and 11th.

  3. [3]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    जीवे जन्मनि देशनिर्गमनमप्यर्थच्युतिं शत्रुतां प्राप्नोति द्रविणं कुटुम्बसुखमप्यर्थं स्ववाचां फलम् । दुश्चिक्ये स्थितिनाशमिष्टवियुतिं कार्यान्तरायं रुजं दुःखैर्बन्धुजनोद्भवैश्च हिबुके दैन्यं चतुष्पाद्भयम् ॥१८॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 18

    गुरु का जन्म राशि में गोचर स्थान छूटने, धन की हानि और शत्रुता जैसे फलों के साथ गिना गया है, जबकि दूसरे भाव में धन, कुटुंब का सुख और वाणी का फल कहा गया है।

    Jupiter transiting the Moon sign is listed with results such as leaving ones place, loss of wealth and enmity, while in the 2nd it gives wealth, family comfort and the fruit of speech.

  4. [4]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    रोगाशौचक्रियाप्तिं धनसुतविहतिं स्थानभृत्यार्थलाभं स्त्रीबन्ध्वर्थप्रणाशं द्रविणसुतमतिप्रच्युतिं सर्वसौख्यम् । स्त्रीरोगाध्वावभीतिं स्वसुतपशुसुहृद्वित्तनाशामयार्तिं जन्मादेरष्टमान्तं दिशति पदवशेनार्कसूनुः क्रमेण ॥२२॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 22

    शनि के गोचर फल जन्म राशि से आठवें भाव तक क्रम से कहे गए हैं। इनमें छठा भाव सब सुख देने वाला और आठवाँ भारी गिना गया है।

    Saturn transit results are listed in order from the Moon sign up to the 8th house, and the 6th is counted as giving all comforts while the 8th is counted among the heavy houses.

  5. [5]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    असत्फलः सौम्यनिरीक्षितो यः शुभप्रदश्चाप्यशुभेक्षितश्च । द्वौ निष्फलौ द्वावपि खेचरेन्द्रौ यः शत्रुणा स्वेन विलोकितश्च ॥३०॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 30

    जो ग्रह बुरा फल देने वाला हो और शुभ ग्रह से देखा जाए, तो वह निष्फल कहा गया है। इसी तरह शुभ फल वाला ग्रह पाप दृष्टि से निष्फल होता है।

    A planet giving a bad result that is aspected by a benefic, and one giving a good result aspected by a malefic, both become ineffective.

  6. [6]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    दशापहाराष्टकवर्गगोचरे ग्रहेषु नृणां विषमस्थितेष्वपि । जपेच्च तत्प्रीतिकरैः सुकर्मभिः करोति शान्तिं व्रतदानवन्दनैः ॥४९॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 49

    दशा या गोचर में ग्रह प्रतिकूल हों तो उन्हें प्रसन्न करने वाले जप, सत्कर्म, व्रत, दान और वंदन से शांति होती है।

    When planets are badly placed in dasha or transit, japa, good deeds that please them, vows, charity and reverence bring peace.

  7. [7]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    स्त्रीसंख्यां मदगैर्ग्रहैर्मृतिमसत्खेटैश्च सद्भिः स्थितिं द्यूनेशे सबले शुभे सति वधूः साध्वी सुपुत्रान्विता । पापोऽपि स्वगृहं गतः शुभकरः पत्न्याश्च कामस्थितो हित्वा षड्व्ययरन्ध्रपान्मदनगाः सौम्यास्तु सौख्यावहाः ॥६॥
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्रभावो नाम दशमोऽध्यायः · श्लोक 6

    सप्तमेश बलवान और शुभ दृष्ट हो तो जीवनसाथी सुशील और अच्छी संतान से युक्त बताया गया है।

    If the 7th lord is strong and well placed the spouse is virtuous and blessed with good children.

  8. [8]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    भार्यानाशस्त्वशुभसहितौ वीक्षितौ वार्थकामौ तत्र प्राहुस्त्वशुभफलदां क्रूरदृष्टिं विशेषात् । एवं पत्न्या अपि सति मदे चाष्टमे वास्ति दोषः सौम्यैर्दृष्टे सति शुभयुते दंपती भाग्यवन्तौ ॥७॥
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्रभावो नाम दशमोऽध्यायः · श्लोक 7

    सप्तम पर पाप ग्रहों का योग या दृष्टि जीवनसाथी के लिए हानिकारक कही गई है, पर शुभ ग्रहों की दृष्टि या योग हो तो दंपती भाग्यवान बताए गए हैं।

    Malefics joined with or aspecting the 7th harm the spouse, but when the 7th is aspected or joined by benefics the couple are fortunate.

  9. [9]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    रन्ध्रेशे दारराशिस्थे लग्नांशे भृगुसंयुते । पञ्चविंशे त्रयस्त्रिंशे विवाहं लभते नरः
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 32

    अष्टमेश सप्तम राशि में हो और लग्न का नवांश शुक्र से युक्त हो तो 25वें या 33वें वर्ष में विवाह बताया गया है।

    When the 8th lord is in the sign of the 7th and the lagna navamsha is joined by Venus, marriage is indicated in the 25th or 33rd year.

  10. [10]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    अहिंसकस्य दान्तस्य धर्मार्जितधनस्य च । सर्वदा नियमस्थस्य सदा सानुग्रहा ग्रहाः ॥५०॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 50

    जो अहिंसक है, संयमी है, धर्म से धन कमाता है और नियम में स्थिर रहता है, उस पर ग्रह सदा कृपालु रहते हैं।

    For one who is non-violent, self-controlled, earns wealth by dharma and keeps his vows, the planets are always gracious.

  11. [11]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    कलत्रसंस्थस्य कलत्रदृष्टेर्दशागमे वाथ कलत्रपस्य । यदा विलग्नाधिपतिः प्रयाति कलत्रभं तत्र कलत्रलाभः ॥१३॥
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्रभावो नाम दशमोऽध्यायः · श्लोक 13

    सप्तम में बैठे ग्रह, सप्तम को देखने वाले ग्रह या सप्तमेश की दशा आने पर, और लग्नेश के सप्तम राशि में गोचर करने पर विवाह का लाभ बताया गया है।

    Gain of a spouse comes in the dasha of the planet in the 7th, the planet aspecting the 7th, or the 7th lord, and when the lagna lord transits the 7th sign.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

सिंह राशि की शादी कब होगी?

सिंह राशि की शादी का समय सप्तम भाव कुंभ, उसके स्वामी शनि, चल रही दशा और गोचर से तय होता है। कोई एक उम्र सब पर लागू नहीं होती। अपनी खिड़की जन्म विवरण से निकालनी पड़ती है।

सिंह राशि का सप्तम भाव कौन सा है और उसका स्वामी कौन है?

सिंह राशि से गिनने पर सातवाँ भाव कुंभ है, जिसके स्वामी शनि हैं। यही भाव जीवनसाथी और विवाह का माना जाता है।

31 अक्टूबर 2026 से गुरु का गोचर सिंह राशि वालों के लिए कैसा है?

गुरु 31 अक्टूबर 2026 से आपकी अपनी राशि में आता है, जिसे ग्रंथ अपेक्षाकृत कठिन गोचर गिनता है। साथ ही गुरु की सातवीं दृष्टि सप्तम भाव कुंभ पर पड़ती है, जो सहायक मानी जाती है। इसलिए बातचीत करें पर निर्णय सोचकर लें।

आठवें भाव का शनि क्या शादी रोक देता है?

नहीं। यह सावधानी और धीमे निर्णय की अवधि मानी गई है, रोक नहीं। शनि 3 जून 2027 के आसपास मीन से निकलकर मेष में जाता है।

सिंह राशि के लिए सबसे अनुकूल गोचर कब बनता है?

2027 के अंत में गुरु कन्या में जाता है, जो सिंह से दूसरा भाव है। फलदीपिका गुरु को दूसरे भाव में शुभ गिनती है, इसलिए यह अवधि अपेक्षाकृत अनुकूल मानी जा सकती है।

कौन सी दशा में सिंह राशि वालों की शादी होती है?

सप्तमेश शनि, विवाह के कारक शुक्र और गुरु की दशा-अंतर्दशा में योग ज़्यादा बनते हैं। सटीक समय आपकी कुंडली की दशा-तारीख़ों से निकलता है।

क्या सिंह राशि वालों की शादी देर से होती है?

यह सामान्यीकरण है। शनि के सप्तमेश होने से रिश्ता सोच-समझकर बनता है, पर समय आपकी दशा और गोचर पर निर्भर है, राशि के नाम पर नहीं।

सिंह राशि के लिए कौन से उपाय आसान हैं?

रविवार को सूर्य को जल, शनिवार को ज़रूरतमंद की सहायता और शुक्रवार को मिश्री का दान आसान उपाय हैं। इन्हें श्रद्धा से और बिना डर के करें, और रत्न पहले जाँच के बाद ही पहनें।

क्या सिंह राशि वाले मांगलिक होते हैं?

नहीं, मांगलिक होना राशि से नहीं, कुंडली में मंगल की भाव-स्थिति से तय होता है। सिंह के लिए मंगल चौथे और नौवें के स्वामी हैं, इसलिए अपनी कुंडली जाँचकर ही निष्कर्ष लें।

शादी का मुहूर्त कैसे निकालें?

रिश्ता तय होने के बाद गुरु-शुक्र के अस्त, खरमास और चातुर्मास जैसी अवधि देखकर वर-वधू की कुंडली से शुभ तारीख़ चुनी जाती है। साल भर की सूची विवाह मुहूर्त 2027 पन्ने पर है।

यह भी देखें · See also

इस हब का मुख्य पेजShadi Kab Hogi? कुंडली से विवाह का समय

समूह: राशि अनुसार शादी कब होगी

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