धनतेरस 2026: 6 नवंबर पूजा मुहूर्त, खरीदारी
Trikaal Sandesh — Direct Answer
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है। दिल्ली में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को 10:31 बजे शुरू होकर 7 नवंबर को 10:48 बजे तक रहेगी, और प्रदोष काल शाम 17:28 से 20:06 तक है। लक्ष्मी-कुबेर और धन्वंतरि की पूजा इसी प्रदोष में करें, यम दीपदान भी उसी शाम होता है।
Deep Dive Analysis
धनतेरस 2026 की तारीख और त्रयोदशी का समय
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को मनाई जाएगी। दिल्ली NCR के पंचांग में कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी 6 नवंबर को 10:31 बजे आरंभ होती है और 7 नवंबर को 10:48 बजे समाप्त होती है। पूजा के लिए यह देखा जाता है कि त्रयोदशी प्रदोष काल को स्पर्श करे, और 6 नवंबर की शाम को यही स्थिति बनती है। इसलिए पूजा, खरीदारी और दीपदान 6 नवंबर को ही करें। पूरे दीपावली-सप्ताह का क्रम नरक चतुर्दशी 2026 में दिया है, और अपनी तारीख़ मिलाने के लिए मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर खुला रखें।
धनतेरस के नाम: धन्वंतरि त्रयोदशी और धनत्रयोदशी
धनतेरस को धनत्रयोदशी और धन्वंतरि त्रयोदशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर समुद्र-मंथन से आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए। इसलिए यह पर्व केवल धन का नहीं, आरोग्य का भी है। पुरानी परंपरा में इस दिन स्वास्थ्य और संपन्नता दोनों की कामना साथ की जाती है। इस भाव को याद रखने से पूजा का फल तारीख़ की गिनती से आगे बढ़कर घर के वातावरण में दिखता है। आगे के खंडों में लक्ष्मी-कुबेर पूजन और धन्वंतरि पूजन दोनों की विधि दी गई है। पिछले पर्व की तैयारी के लिए शरद पूर्णिमा 2026 भी देखें।
6 नवंबर 2026 का पंचांग: दिल्ली NCR के पांचों अंग
सूर्योदय के समय 6 नवंबर को द्वादशी तिथि चल रही है और वह 10:31 पर समाप्त होकर त्रयोदशी में बदलती है। नक्षत्र हस्त है (पद 1), जो 7 नवंबर को 04:43 तक रहेगा। योग विष्कंभ है (7 नवंबर 04:10 तक) और करण तैतिल है (10:31 तक)। सूर्योदय 06:40 और सूर्यास्त 17:28 है। यह गणना त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन से, लाहिड़ी अयनांश और दिल्ली NCR के निर्देशांक पर की गई है। शहर बदलने पर समय कुछ मिनट खिसकते हैं, इसलिए अपने नगर का पंचांग देखकर मिलान कर लें।
7 नवंबर 2026 का पंचांग: त्रयोदशी का अंतिम भाग
7 नवंबर की सुबह सूर्योदय (06:41) पर त्रयोदशी तिथि चल रही होती है और वह 10:48 बजे समाप्त होती है। नक्षत्र चित्रा (पद 1) है और 8 नवंबर को 05:52 तक रहेगा, योग प्रीति है और करण वणिज है। सूर्यास्त 17:27 पर होता है। चूंकि प्रदोष-काल 6 नवंबर को त्रयोदशी में पड़ चुका होता है, 7 नवंबर की सुबह धनतेरस की पूजा नहीं बल्कि उसका शेष समय माना जाएगा। जो लोग उदयातिथि पर चलते हैं, वे खरीदारी का शुभारंभ 7 नवंबर के सुबह के हिस्से में सरल रूप से कर सकते हैं।
धनतेरस की पूजा का समय: प्रदोष काल 17:28 से 20:06
धनतेरस पर लक्ष्मी-कुबेर और धन्वंतरि की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। दिल्ली NCR में 6 नवंबर को प्रदोष काल सूर्यास्त 17:28 से 20:06 तक है। इस अवधि में स्थिर लग्न का प्रयोग पारंपरिक रूप से श्रेष्ठ माना जाता है, पर सामान्य गृहस्थ के लिए पूरा प्रदोष-काल पर्याप्त है। यदि दफ़्तर से देर से लौटते हैं तो 20:06 से पहले दीप जलाकर संक्षिप्त पूजा कर लें, फिर आराम से विस्तार करें। निशीथ काल (23:37 से 00:30) साधना के लिए रखा जाता है, गृहस्थ पूजा के लिए नहीं।
धनतेरस पर खरीदारी कब करें
परंपरा में खरीदारी त्रयोदशी तिथि में की जाती है, यानी 6 नवंबर को 10:31 के बाद से 7 नवंबर को 10:48 तक। इसमें सबसे श्रेष्ठ समय प्रदोष काल (17:28 से 20:06) माना गया है। दिन में खरीदारी करनी हो तो राहु काल (10:43 से 12:04) और यमगंड (14:46 से 16:07) से बचकर समय चुनें। 12:25 से 14:46 के बीच और 16:07 से 17:28 के बीच का समय सुविधाजनक रहता है। दुकान पर भीड़ से बचने के लिए पहले से सूची बना लें। सोने की खरीद का विस्तृत नियम सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त में दिया है।
6 नवंबर के अशुभ काल: राहु काल, यमगंड और गुलिक
6 नवंबर को राहु काल 10:43 से 12:04, यमगंड 14:46 से 16:07 और गुलिक काल 08:01 से 09:22 रहेगा। अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:25 है, पर वह आंशिक रूप से राहु काल से टकराता है, इसलिए नई खरीदारी या पूजा-आरंभ के लिए 12:04 के बाद का समय सहज रहता है। ये काल रोक नहीं, सावधानी के संकेत हैं। इन समयों में पूजा-पाठ और दान तो हो सकता है, केवल नए आरंभ और बड़ी ख़रीद टालना बेहतर माना गया है। अपने शहर के सही काल के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से जांच लें।
लक्ष्मी-कुबेर पूजन की सरल विधि
पूजा-स्थान को साफ़ करके उत्तर या पूर्व दिशा में चौकी रखें, उस पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और लक्ष्मी, कुबेर तथा धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र रखें। दीप जलाकर गणेश-वंदना से आरंभ करें, फिर रोली, अक्षत, पुष्प और मिष्ठान्न अर्पित करें। आप चाहें तो नए सिक्के या खरीदी गई वस्तु भी चौकी पर रखकर पूजा कर सकते हैं। अंत में आरती करें और परिवार में प्रसाद बांटें। पूरी विधि में 30 से 40 मिनट लगते हैं और इसे बच्चों के साथ भी सहजता से किया जा सकता है।
धन्वंतरि पूजन और आरोग्य का संकल्प
धन्वंतरि को आयुर्वेद का देवता माना जाता है, इसलिए धनतेरस पर उनकी पूजा के साथ स्वास्थ्य का संकल्प लेने की परंपरा है। पूजा में तुलसी-पत्र, हल्दी और जल अर्पित करें और परिवार में सबके स्वास्थ्य की कामना करें। जो लोग किसी रोग या दवा के नियम पर हों, वे चिकित्सक की सलाह के अनुसार चलें और पूजा को पूरक की तरह रखें। इस दिन किसी वृद्ध या ज़रूरतमंद को औषधि, फल या भोजन देना भी आरोग्य-पूजा का सुंदर रूप है। आयुर्वेदिक दिनचर्या की शुरुआत के लिए यह एक अच्छा अवसर है। व्रतों का क्रम एकादशी व्रत 2026 में देखा जा सकता है।
यम दीपदान: धनतेरस की शाम का दीया
धनतेरस की शाम को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर एक दीया जलाने की परंपरा है, जिसे यम दीपदान कहते हैं। मान्यता है कि यह परिवार को अकाल-मृत्यु के भय से रक्षित करता है। दीया मिट्टी का हो, उसमें सरसों का तेल और रुई की बत्ती हो, और उसे प्रदोष काल (17:28 से 20:06) में जलाया जाए। यह उपाय भय के लिए नहीं, कृतज्ञता और सुरक्षा की भावना के लिए है। इसका विस्तार नरक चतुर्दशी के यम दीपदान से जुड़ा है, जिसे नरक चतुर्दशी 2026 में देखा जा सकता है।
धनतेरस की कथा: हेम राजा के पुत्र की रक्षा
लोक-कथा के अनुसार राजा हेम के पुत्र की कुंडली में विवाह के चौथे दिन मृत्यु का योग था। उसकी नवविवाहिता पत्नी ने उस रात द्वार पर सोने-चांदी के आभूषण और असंख्य दीपक सजाए और पूरी रात कथा और गीत गाती रही। यमराज सर्प के रूप में आए पर दीपों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं और वे लौट गए। तभी से इस दिन दीपदान की परंपरा चली। इस कथा का सार भय नहीं, बुद्धि, श्रद्धा और जागरूकता की रक्षा-शक्ति है, और यही संदेश आज के उपायों में भी निहित है।
धनतेरस पर क्या खरीदें: परंपरा की सूची
परंपरा में धनतेरस पर सोना, चांदी, तांबे या पीतल के बर्तन, नए सिक्के, झाड़ू और धनिया के बीज खरीदना शुभ माना गया है। इसके पीछे विचार यह है कि नई वस्तु घर में नई ऊर्जा और समृद्धि का आरंभ लाती है। हर चीज़ खरीदना ज़रूरी नहीं है, अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक छोटी वस्तु भी पर्याप्त मानी गई है। जो लोग वाहन या संपत्ति लेने की सोच रहे हैं, वे वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त और प्रॉपर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त पहले देख लें।
सोना और चांदी खरीदें तो ध्यान रखें
सोना या चांदी खरीदते समय मूल्य, शुद्धता और बजट तीनों पर ध्यान दें। भारत में हॉलमार्क (HUID) वाला गहना ही लें और बिल अवश्य रखें। बजट कम हो तो सोने की जगह चांदी का सिक्का या छोटा आभूषण भी शुभ माना गया है। उधार लेकर या क्रेडिट पर महंगा सोना खरीदना परंपरा की भावना के विपरीत है, इसलिए अपनी बचत के भीतर रहें। यह लेख वित्तीय सलाह नहीं है, केवल परंपरा की जानकारी है। खरीद के समय के लिए सोना खरीद मुहूर्त कैलकुलेटर और आय-वृद्धि के समय के लिए धन योग देखें।
कम बजट में शुभ खरीदारी: बर्तन, झाड़ू और धनिया
जिनके पास बड़ा बजट नहीं है, उनके लिए धनतेरस की परंपरा में कई सरल विकल्प हैं। एक नया पीतल या स्टील का बर्तन, एक नई झाड़ू और मुट्ठी भर धनिया के बीज सभी शुभ माने गए हैं। धनिया के बीज पूजा में रखे जाते हैं और बाद में बगीचे या गमले में बो दिए जाते हैं, जो समृद्धि के बढ़ने का प्रतीक है। इन वस्तुओं का मूल्य कम होने से पर्व की भावना बनी रहती है और किसी पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। शुभ खरीद का भाव वस्तु की क़ीमत में नहीं, श्रद्धा में रहता है।
वाहन, दुकान और नया व्यापार: धनतेरस पर शुरुआत
बहुत से परिवार धनतेरस पर वाहन की डिलीवरी, नई दुकान का उद्घाटन या नए व्यापार की शुरुआत चुनते हैं। यदि ऐसी कोई योजना है तो पहले देख लें कि आपकी कुंडली में आरंभ के लिए समय अनुकूल है या नहीं, क्योंकि पर्व का शुभ समय सबके लिए एक जैसा फल नहीं देता। नए व्यापार के लिए नया बिज़नेस शुरू करने का मुहूर्त और नया बिज़नेस मुहूर्त कैलकुलेटर सहायक हैं। वाहन के लिए वाहन खरीद मुहूर्त कैलकुलेटर देखें। संपत्ति-योग की जांच के लिए प्रॉपर्टी योग उपयोगी है।
शुक्रवार, शुक्र और लक्ष्मी: 6 नवंबर का वार-स्वामी
शुक्रवार का स्वामी शुक्र है, और शुक्र को सुख, सौंदर्य और लक्ष्मी का कारक माना जाता है। इसलिए शुक्रवार को धनतेरस पड़ना पूजा के लिए एक स्वाभाविक संगति मानी जाती है। इसी दिन शुक्र कन्या राशि के लगभग 29.85 अंश पर वक्री है, यानी राशि के अंतिम छोर पर पहुंचा हुआ है। इसका सरल अर्थ यह है कि बड़े सौंदर्य-खर्च या विलासिता की ख़रीद में थोड़ा सोच-विचार रखें। इसका उपाय भी सरल है: सफ़ेद मिठाई या इत्र का दान और शुक्र का बीज मंत्र, जैसा आगे उपायों में बताया गया है, और ग्रहों की कमज़ोरी जांचने के लिए कमज़ोर ग्रह खोजक उपयोगी है।
हस्त नक्षत्र और कन्या का चंद्रमा
6 नवंबर को चंद्रमा कन्या राशि में है और नक्षत्र हस्त है, जिसका स्वामी चंद्रमा ही है। हस्त को कुशल हाथों, शिल्प और व्यवहार-कौशल का नक्षत्र माना जाता है। इसलिए यह दिन हाथ से बने सामान, कारीगरी की वस्तुएं या औज़ार खरीदने के लिए सहज माना जा सकता है। चंद्रमा का कन्या में होना मन को व्यावहारिक और हिसाबी बनाता है, जो खरीदारी की सूची और बजट के पालन के लिए उपयोगी है। चंद्र राशि के अनुसार अपना दिन समझने के लिए राशि कैलकुलेटर और जन्म-नक्षत्र के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर का उपयोग करें।
सूर्य तुला में और मंगल कर्क में: दिवाली-सप्ताह का आकाश
6 नवंबर को सूर्य तुला राशि में (लगभग 19.6 अंश) है, और मंगल कर्क में (लगभग 27 अंश)। दोनों अपनी नीच राशियों में हैं, जिसका आम अर्थ है कि इन ग्रहों के कारकत्व वाले विषयों, यानी अधिकार, ऊर्जा और साहस में थोड़ी धीमी गति से चलना बेहतर है। इसका मतलब यह नहीं कि पर्व अशुभ हो जाता है। पूजा और दान इन ग्रहों की ऊर्जा को शांत करने का सरल मार्ग हैं, जैसे सूर्य को जल देना और मंगल के लिए लाल मसूर का दान। बुध भी तुला में है और बुद्धि को व्यापार में स्थिर रखता है। आगे के वर्ष की ग्रह-चाल के लिए राहु-केतु गोचर 2027 देखें।
गुरु सिंह में: धन-निर्णयों में विवेक
गुरु इस समय सिंह राशि में (लगभग 0.7 अंश) है, जो पांचवें भाव की राशि है और बच्चों, बुद्धि और निवेश के विवेक से जुड़ी है। जिन परिवारों में बच्चों की पढ़ाई या भविष्य के लिए बचत की योजना है, उनके लिए धनतेरस पर संकल्प लेने का अच्छा दिन है। शनि मीन में और राहु कुंभ में हैं, जो धन में स्थिरता और लंबी योजना की ओर संकेत करते हैं। सूत्र यह है: जल्दबाज़ी के बजाय योजना। गुरु के आगे के मार्ग के लिए गुरु गोचर 2027 और शुभ गुरु-चंद्र मेल के लिए गजकेसरी योग देखें। अपने जीवन में धन-वृद्धि का समय देखने के लिए धन-वृद्धि का समय पढ़ें।
धनतेरस और ऋण: क्या न करें
परंपरा में धनतेरस पर ऋण देने या नया कर्ज़ लेने, दोनों में सतर्कता बरतने की बात आती है। साधारण नियम यह है कि इस दिन नया कर्ज़ लेकर खरीदारी न करें और किसी को बड़ा उधार न दें। इसके बजाय पुराना बकाया चुकाने की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। यह नियम आर्थिक अनुशासन सिखाता है, भय नहीं। यदि कोई बड़ा ऋण पहले से है तो पर्व पर संकल्प लें कि एक निश्चित राशि हर माह चुकाएंगे। अपने ऋण के समय को कुंडली में समझने के लिए संपत्ति और भाग्य का विश्लेषण देख सकते हैं, और अपनी दशा के लिए दशा कैलकुलेटर भी।
उपाय 1: लक्ष्मी-कुबेर पूजन, पांच पंक्तियों में
धनतेरस की शाम का यह उपाय घर की समृद्धि और अनुशासन दोनों को संतुलित करता है।
क्या: लक्ष्मी और कुबेर के सामने घी का दीया जलाकर श्री सूक्त या सरल लक्ष्मी मंत्र का पाठ। कब: 6 नवंबर 2026 को प्रदोष काल में, 17:28 से 20:06 के बीच। कितने का: फूल, रोली, अक्षत और मिठाई, लगभग 100 से 300 रुपये। कितने दिन: केवल धनतेरस की शाम, और चाहें तो दिवाली तक रोज़ पांच मिनट। आपके लिए क्यों: जिनके घर में खर्च और बचत का संतुलन बिगड़ता है, उनके लिए यह रोज़ की स्थिरता बनाता है।
सावधानी: पूजा के बाद तिजोरी या अलमारी को खुला न छोड़ें और पूजा-सामग्री साफ़ जगह पर विसर्जित करें।
उपाय 2: यम दीपदान, पांच पंक्तियों में
यह उपाय परिवार की सुरक्षा की भावना को मज़बूत करता है और पूरी तरह निःशुल्क जैसा है।
क्या: मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का एक दीया। कब: 6 नवंबर की शाम, प्रदोष काल में, सूर्यास्त 17:28 के बाद। कितने का: मिट्टी का दीया, तेल और बत्ती मिलाकर लगभग 20 से 30 रुपये। कितने दिन: एक शाम, पर कई परिवार इसे दिवाली तक दोहराते हैं। आपके लिए क्यों: जिन्हें यात्रा, स्वास्थ्य या सुरक्षा की चिंता रहती है, उन्हें इससे मानसिक शांति मिलती है।
सावधानी: दीया हवा से सुरक्षित जगह पर रखें और बच्चों को खुली लौ से दूर रखें।
उपाय 3: शुक्र और धन्वंतरि के लिए दान, पांच पंक्तियों में
शुक्रवार के स्वामी शुक्र और आरोग्य के देवता धन्वंतरि दोनों के लिए एक ही सरल दान पर्याप्त है।
क्या: सफ़ेद मिठाई, इत्र या फल किसी ज़रूरतमंद को देना, साथ में शुक्र का बीज मंत्र ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः का 108 बार जप। कब: 6 नवंबर को सूर्योदय के बाद या शाम की पूजा से पहले। कितने का: अपनी सामर्थ्य अनुसार, लगभग 100 से 400 रुपये। कितने दिन: एक दिन, चाहें तो अगले तीन शुक्रवार दोहराएं। आपके लिए क्यों: शुक्र के सुख-संबंधों और विलासिता के खर्च में संतुलन के लिए यह सरल है।
सावधानी: दान उतना ही दें जितना बजट सह सके, और मधुमेह जैसी स्थिति में मिठाई की मात्रा चिकित्सक की सलाह से तय करें।
किन्हें खरीदारी और पूजा में सावधानी रखनी चाहिए
जिनकी आय अनिश्चित है या जिन पर पहले से ऋण है, वे बड़ी खरीद की बजाय सांकेतिक खरीद चुनें, जैसे एक सिक्का या बर्तन। वृद्ध या बीमार व्यक्ति पूजा में लंबे उपवास की जगह हल्का भोजन रखें और चिकित्सक की सलाह मानें। ऑनलाइन खरीदारी में ऑफ़र और पर्व की भीड़ के कारण ठगी की संभावना बढ़ती है, इसलिए केवल जाने-पहचाने विक्रेता से खरीदें। यह सावधानी भय के लिए नहीं, पर्व को बिना तनाव के मनाने के लिए है। जिनकी कुंडली में आर्थिक प्रश्न हैं, वे उपाय कैलकुलेटर की सहायता ले सकते हैं।
बच्चों और परिवार के साथ धनतेरस कैसे मनाएं
बच्चों को पूजा की प्रक्रिया में शामिल करें, जैसे दीपक सजाना, रंगोली बनाना और मिठाई बांटना। उन्हें बताएं कि धन्वंतरि का संबंध स्वास्थ्य से है और सिक्का बचत की आदत का प्रतीक है। छोटी गुल्लक या बचत-खाता खोलना बच्चों के लिए धनतेरस की सुंदर शुरुआत हो सकती है। परिवार के बुज़ुर्गों से इस दिन की कथा सुनना भी पीढ़ियों को जोड़ता है। पर्व के कुल क्रम की झलक बच्चों को देने के लिए आने वाली एकादशी का पंचांग और अमावस्या का पंचांग भी साथ में दिखाएं।
नौकरीपेशा और व्यापारी के लिए सरल पूजा-क्रम
नौकरीपेशा लोग दफ़्तर से शाम 6 बजे तक घर पहुंचकर भी प्रदोष काल में पूजा कर सकते हैं, क्योंकि वह 20:06 तक चलता है। व्यापारी दुकान या दफ़्तर में बही-खाता, कंप्यूटर और तिजोरी की पूजा शाम को कर सकते हैं। पहले सफ़ाई, फिर दीप, फिर लक्ष्मी-कुबेर का स्मरण और अंत में प्रसाद का क्रम रखें। पूजा पूरी करके नई बही या नए खाते की पहली पंक्ति में शुभ लिखना भी परंपरा है। ऋण या स्टॉक की समीक्षा के बजाय इस दिन केवल शुभ संकल्प रखें और विश्लेषण अगले दिन करें।
आम ग़लतफ़हमियां: कुछ न खरीदा तो क्या अशुभ?
सबसे आम धारणा है कि धनतेरस पर कुछ न खरीदा तो पूरा साल कमज़ोर रहेगा। ज्योतिष की दृष्टि से कोई एक खरीद पूरे साल का फल तय नहीं करती। दूसरी धारणा है कि महंगा सोना ही शुभ है, जबकि परंपरा में छोटी वस्तु भी उतनी ही मान्य है। तीसरी धारणा है कि पूजा केवल एक निश्चित लग्न में ही फल देती है, जबकि पूरा प्रदोष काल गृहस्थ पूजा के लिए पर्याप्त माना गया है। इन धारणाओं से बचकर श्रद्धा और संयम पर ध्यान दें। अंत में, पर्व का असली फल मन की निश्चिंतता और परिवार के सहयोग में दिखता है। अपने शुभ दिन जानने के लिए लकी डे कैलकुलेटर देखें।
धनतेरस से भाई दूज तक: पांच दिन का क्रम
दीपावली का पांच दिन का उत्सव धनतेरस से आरंभ होता है। 6 नवंबर को धनतेरस है, जिसके बाद 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी की सुबह अभ्यंग स्नान और दिवाली की शाम का लक्ष्मी पूजन होता है। उसके बाद गोवर्धन पूजा और भाई दूज आते हैं, जिनकी तिथियां हम अपने पंचांग पृष्ठों पर अलग से देते हैं। इस क्रम में सबसे पहले धनतेरस पर दीप जलाना शुरू करें और हर दिन की पूजा का एक छोटा नियम रखें। इससे पहले के पर्वों के लिए शरद पूर्णिमा और पापांकुशा एकादशी देखें। नरक चतुर्दशी का विस्तार नरक चतुर्दशी 2026 में पढ़ें।
हमारी गणना की पद्धति और इस पृष्ठ की विश्वसनीयता
इस पृष्ठ की सभी तिथि, नक्षत्र और काल त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन से लिए गए हैं, जो Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश पर चलता है और दिल्ली NCR (28.6139°N, 77.209°E) के लिए गणना करता है। पांचों अंग सूर्योदय के समय पढ़े गए हैं, जो पर्व-निर्णय की प्रचलित परंपरा के अनुसार है। त्रिकाल पुस्तकालय में इस पर्व के लिए पृष्ठ-विशिष्ट श्लोक नहीं मिला, इसलिए इस लेख में कोई श्लोक-उद्धरण नहीं दिया गया। अपने शहर के लिए समय कुछ मिनट खिसक सकते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग से अंतिम मिलान कर लें।
अपनी कुंडली के अनुसार धनतेरस का मुहूर्त जांचें
धनतेरस के सामान्य समय सबके लिए एक जैसे हैं, पर आपके लिए खरीद या शुरुआत का सर्वश्रेष्ठ समय आपकी कुंडली के लग्न और दशा से तय होता है। इसलिए अपना जन्म विवरण डालकर मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर चलाइए और अपने लिए अनुकूल घड़ी देखिए। यदि आप दीपावली-सप्ताह के लिए सरल उपाय चाहते हैं तो उपाय कैलकुलेटर भी उपयोगी है। तुलसी विवाह की तारीख़ और विधि के लिए तुलसी विवाह 2026 पढ़ें। अपनी कुंडली के लिए मुफ्त जन्म कुंडली और दिसंबर के पर्व के लिए मोक्षदा एकादशी 2026 भी देखें। शुरुआती जांच मुफ़्त है।
Apna Personalized Analysis Lein
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शब्दावली · Glossary
- त्रयोदशी
- चंद्र पक्ष की तेरहवीं तिथि, जिस पर धनतेरस मनाई जाती है।
- प्रदोष काल
- सूर्यास्त के बाद का वह समय जब दिन और रात मिलते हैं, पूजा और दीपदान के लिए उपयुक्त माना जाता है।
- यम दीपदान
- धनतेरस की शाम द्वार पर दक्षिण दिशा में जलाया जाने वाला दीया, जो परिवार की सुरक्षा की भावना से जुड़ा है।
- धन्वंतरि
- आयुर्वेद के देवता, जो समुद्र-मंथन में अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए माने जाते हैं।
- राहु काल
- दिन का वह आठवां हिस्सा (नवंबर में लगभग 80 मिनट) जिसमें नए आरंभ और बड़ी खरीद टालने की परंपरा है।
Frequently Asked Questions
धनतेरस 2026 कब है?
धनतेरस 2026 शुक्रवार, 6 नवंबर को है। दिल्ली में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को 10:31 बजे शुरू होकर 7 नवंबर को 10:48 बजे समाप्त होती है।
धनतेरस की पूजा का मुहूर्त क्या है?
दिल्ली NCR में 6 नवंबर को प्रदोष काल शाम 17:28 से 20:06 तक है। लक्ष्मी-कुबेर और धन्वंतरि की पूजा इसी समय में करना श्रेष्ठ माना जाता है।
धनतेरस पर खरीदारी किस समय करें?
त्रयोदशी तिथि में, यानी 6 नवंबर को 10:31 के बाद, खरीदारी की जा सकती है। सबसे श्रेष्ठ समय प्रदोष काल है। राहु काल (10:43 से 12:04) और यमगंड (14:46 से 16:07) से बचें।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
परंपरा में सोना, चांदी, पीतल या तांबे के बर्तन, नए सिक्के, झाड़ू और धनिया के बीज शुभ माने जाते हैं। अपनी सामर्थ्य के अनुसार एक छोटी वस्तु भी पर्याप्त मानी गई है।
यम दीपदान कब और कैसे करें?
6 नवंबर की शाम प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का एक दीया जलाएं। दीया हवा से सुरक्षित जगह पर रखें।
क्या धनतेरस पर कुछ न खरीदने से साल अशुभ होता है?
नहीं। कोई एक खरीद पूरे साल का फल तय नहीं करती। श्रद्धा से की गई पूजा, दान और संयम ही पर्व का वास्तविक फल देते हैं।
धनतेरस को धन्वंतरि त्रयोदशी क्यों कहते हैं?
मान्यता है कि इस तिथि पर समुद्र-मंथन से आयुर्वेद के देवता धन्वंतरि अमृत-कलश के साथ प्रकट हुए, इसलिए इसे धन्वंतरि त्रयोदशी भी कहा जाता है।
6 नवंबर 2026 को कौन-सा नक्षत्र है?
सूर्योदय के समय नक्षत्र हस्त (पद 1) है, जो 7 नवंबर को 04:43 तक रहेगा। चंद्रमा कन्या राशि में है।
क्या धनतेरस पर ऋण लेकर खरीदारी करनी चाहिए?
परंपरा में इस दिन नया कर्ज़ लेकर खरीदारी टालने की सलाह है। अपनी बचत के भीतर रहकर छोटी खरीद करें। यह वित्तीय सलाह नहीं, परंपरा की जानकारी है।
धनतेरस के बाद दिवाली कब है?
दिल्ली के पंचांग के अनुसार नरक चतुर्दशी और दिवाली की शाम का लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर 2026 को है।
यह भी देखें · See also
इस हब का मुख्य पेजShubh Muhurat Calculator — 39 Ghatnayenसमूह: अन्य समूह — अनुष्ठानिक, चिकित्सा और कानूनी घटनाएं
Amavasya Kab Hai 2026-27: Dates & Tithi
muhuratEkadashi Vrat Kab Hai 2026: Dates & Parana
muhuratPurnima Kab Hai 2026-27: Dates & Timing
श्रेणी: muhurat