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नरक चतुर्दशी 2026: 8 नवंबर अभ्यंग स्नान

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect15 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

नरक चतुर्दशी 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। दिल्ली के पंचांग में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को 10:48 पर शुरू होकर 8 नवंबर को 11:28 तक रहती है। अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह सूर्योदय 06:42 से पहले होता है, जबकि दीपदान की शाम 7 नवंबर है। अपने शहर का समय मिलाएं।

Deep Dive Analysis

नरक चतुर्दशी 2026 की तारीख और चतुर्दशी तिथि का समय

नरक चतुर्दशी 2026 में रविवार, 8 नवंबर को पड़ रही है। त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन के अनुसार दिल्ली NCR में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी 7 नवंबर को 10:48 पर शुरू होती है और 8 नवंबर को 11:28 पर समाप्त होती है। अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले होता है, और 8 नवंबर की उस सुबह चतुर्दशी तिथि चल रही होती है, इसलिए स्नान की तारीख़ 8 नवंबर है। इसके पहले धनतेरस 2026 और इसके बाद दिवाली 2026 आती है, और रोज़ का समय 8 नवंबर का पंचांग में मिलेगा।

नरक चतुर्दशी के नाम: छोटी दिवाली, रूप चौदस और काली चौदस

इस एक तिथि के कई नाम हैं। उत्तर भारत में इसे छोटी दिवाली कहा जाता है, क्योंकि यह दिवाली से ठीक पहले की शाम दीपों से सजती है। राजस्थान, गुजरात और मध्य भारत में इसे रूप चौदस और काली चौदस भी कहते हैं, और बंगाल में यह काली पूजा से जुड़ी है। नाम अलग हैं, पर इस दिन की केंद्रीय परंपरा एक है: सूर्योदय से पहले स्नान, यम के लिए दीपदान और बुराई पर प्रकाश की विजय का भाव। दिवाली के ज्योतिषीय पक्ष का सार दिवाली ज्योतिष 2026 में पढ़ा जा सकता है।

8 नवंबर 2026 का पंचांग: दिल्ली NCR के पांचों अंग

8 नवंबर 2026 को दिल्ली NCR में वार रविवार है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्दशी (11:28 तक), नक्षत्र स्वाति (9 नवंबर 07:24 तक), योग आयुष्मान (9 नवंबर 03:03 तक) और करण शकुनि (11:28 तक) है। सूर्योदय 06:42 और सूर्यास्त 17:27 है। चतुर्दशी समाप्त होते ही 11:28 के बाद अमावस्या आरंभ होती है, इसलिए उसी शाम दिवाली पूजन का प्रदोष काल अमावस्या में पड़ता है। शहर के अनुसार समय कुछ मिनट बदलता है, इसलिए पंचांग में अपना स्थान जाँचें।

7 नवंबर 2026 का पंचांग: चतुर्दशी की शुरुआत

शनिवार, 7 नवंबर को दिल्ली NCR में सूर्योदय 06:41 पर त्रयोदशी तिथि चल रही है, जो 10:48 पर समाप्त होती है। उसके बाद चतुर्दशी शुरू होती है। नक्षत्र चित्रा (8 नवंबर 05:52 तक) और योग प्रीति (8 नवंबर 03:27 तक) है। सूर्यास्त 17:27 और प्रदोष काल 17:27 से 20:05 तक है। चूंकि चतुर्दशी इस शाम के प्रदोष में मौजूद है, यम और घर के दीपदान की शाम परंपरा में 7 नवंबर की मानी जा सकती है। पूरा विवरण 7 नवंबर का पंचांग में देखें।

अभ्यंग स्नान का समय: सूर्योदय से पहले

अभ्यंग स्नान का अर्थ है तेल मालिश के बाद किया गया स्नान। परंपरा के अनुसार यह नरक चतुर्दशी की सुबह सूर्योदय से पहले, अरुणोदय के समय करना चाहिए। दिल्ली में 8 नवंबर को सूर्योदय 06:42 पर है, इसलिए स्नान 06:42 से पहले पूरा कर लें, सुविधा के अनुसार सूर्योदय से लगभग एक से डेढ़ घंटे पहले के भीतर। सटीक अरुणोदय खंड हर शहर में थोड़ा अलग होता है, इसलिए अपने शहर के सूर्योदय को आधार मानें। सुबह जल्दी उठना कठिन हो तो उठने का समय एक रात पहले तय कर लें। शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से स्थान के अनुसार समय देखा जा सकता है।

अभ्यंग स्नान की विधि: तेल, उबटन और जल

स्नान से पहले शरीर पर सरसों या तिल का तेल हल्के हाथ से मलें। परंपरा में तिल के तेल को शुभ माना गया है। फिर उबटन, यानी बेसन, हल्दी और दूध या दही का लेप, लगाएं और कुछ मिनट बाद गुनगुने पानी से स्नान करें। कई घरों में जल में अपामार्ग की टहनी या पत्ते डालने की परंपरा है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें, दीपक जलाएं और घर के बड़ों को प्रणाम करें। त्वचा संवेदनशील हो तो पहले हाथ पर तेल की जांच कर लें। इस विधि को रूप और स्वास्थ्य की देखभाल की दिनचर्या की तरह देखा जाता है।

नरकासुर की कथा: प्रकाश की विजय

प्रचलित कथा के अनुसार प्रागज्योतिषपुर का राजा नरकासुर अत्याचारी हो गया था और उसने हज़ारों कन्याओं को बंदी बना रखा था। श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के सहयोग से उसका वध किया और बंदी कन्याओं को मुक्त कराया। इसी विजय की स्मृति में यह चतुर्दशी नरक चतुर्दशी कहलाई। कथा का संदेश स्पष्ट है: अत्याचार चाहे कितना बड़ा हो, उसका अंत होता है, और मुक्ति के दिन दीप जलाए जाते हैं। इसे डर की कथा न बनाएं, यह आशा की कथा है। रोशनी के पर्वों की कड़ी कार्तिक पूर्णिमा 2026 तक चलती है।

यम दीपदान: चौमुखा दीया कैसे और कहां जलाएं

नरक चतुर्दशी की शाम एक चौमुखा, यानी चारमुख वाला, दीया जलाने की परंपरा है। उसमें सरसों का तेल डालें और रुई की चार बत्तियां रखें। दीया घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखा जाता है, क्योंकि दक्षिण को यम की दिशा माना गया है। इसका भाव है कि घर में असमय संकट का भय न आए और परिवार के सभी सदस्य सुरक्षित रहें। दीया हवा से बचाकर रखें और जलते हुए बच्चों को दूर रखें। परंपरा श्रद्धा की है, इसलिए सुरक्षा का ध्यान सबसे पहले रखें।

घर में दीपक कहां-कहां जलाएं: सरल सूची

दीपदान के लिए पांच स्थान प्रचलित हैं: मुख्य द्वार, तुलसी चौरा, रसोई, पूजा स्थान और आंगन या बालकनी। हर जगह एक-एक दीया पर्याप्त है। पीपल या किसी पवित्र वृक्ष के नीचे भी दीपक रखने की परंपरा है, यदि पास में हो। दीयों की संख्या से अधिक ज़रूरी है कि वे साफ़-सुथरी जगह पर सुरक्षित रखे जाएं। सोसाइटी में रहने वाले परिवार बालकनी और दरवाज़े पर दीये रखकर परंपरा निभा सकते हैं। तारीख़ों के क्रम के लिए 6 नवंबर का पंचांग देखा जा सकता है।

रूप चौदस: सौंदर्य और स्वास्थ्य की देखभाल

रूप चौदस का सरल अर्थ है शरीर और स्वास्थ्य को निखारने का दिन। उबटन, तेल मालिश, स्वच्छ वस्त्र और सुगंधित पदार्थों का उपयोग इसी भावना को दर्शाता है। इसे बाहरी सुंदरता से जोड़कर सीमित न करें, इसका मूल भाव है त्योहार से पहले स्वयं को तैयार करना। जिन लोगों को ठंड में त्वचा रूखी रहती है, उनके लिए यह परंपरा स्वाभाविक रूप से उपयोगी बैठती है। स्वास्थ्य के ज्योतिषीय पक्ष पर स्वास्थ्य ज्योतिष और स्वास्थ्य कैलकुलेटर जैसी सामग्री उपलब्ध है।

काली चौदस: भय नहीं, साधना की रात

कुछ क्षेत्रों में नरक चतुर्दशी की रात को काली चौदस कहा जाता है और इसे देवी काली की उपासना से जोड़ा जाता है। इसे भूत-प्रेत या अनिष्ट की रात के रूप में प्रचारित करना परंपरा की सही समझ नहीं है। भक्त इस रात मां काली से भय और नकारात्मकता से रक्षा की प्रार्थना करते हैं। घर में सरल आरती, सरसों के तेल का दीपक और शांत मन से जप पर्याप्त है। किसी दूसरे की बनाई तांत्रिक विधि या डराने वाली सलाह पर भरोसा न करें। मन को शांत रखने के लिए मानसिक स्वास्थ्य और ज्योतिष पढ़ना उपयोगी है।

चित्रा से स्वाति तक: चंद्रमा तुला राशि में

8 नवंबर की सुबह के समय चंद्रमा तुला राशि में है। चित्रा नक्षत्र 05:52 तक रहता है, जिसके स्वामी मंगल हैं, और उसके बाद स्वाति नक्षत्र आता है, जिसके स्वामी राहु हैं। अभ्यंग स्नान का समय इसी संधि के आसपास पड़ता है। तुला शुक्र की राशि है और संतुलन, सौंदर्य और संबंधों का भाव देती है, इसलिए रूप चौदस की परंपरा और तुला के चंद्र में स्वाभाविक संगति दिखती है। अपना जन्म नक्षत्र जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर और चंद्र राशि के लिए राशि कैलकुलेटर का उपयोग करें।

सूर्य तुला में: दिवाली के सप्ताह का आकाश

8 नवंबर को सूर्य तुला राशि में लगभग 21.6 अंश पर है, और तुला सूर्य की नीच राशि है। ज्योतिष की भाषा में नीच का अर्थ यह है कि ग्रह अपने सहज रूप में कमज़ोर माना जाता है, जीवन में बुरा होने की भविष्यवाणी नहीं। इसी कारण कई विद्वान दीपावली को सूर्य-शक्ति बढ़ाने वाली उपासनाओं का समय मानते हैं, यानी दीपक, अर्घ्य और प्रकाश। यह त्रिकाल वाणी की व्याख्या है, किसी श्लोक का उद्धरण नहीं। ग्रहों की अवस्थाओं को समझने के लिए ग्रहों की उच्च-नीच अवस्था पढ़ें।

शुक्र वक्री और कन्या में: ख़रीदारी में थोड़ा विवेक

पंचांग इंजन के अनुसार नवंबर के पहले सप्ताह में शुक्र पीछे की ओर, यानी वक्री गति में, चल रहा है और 8 नवंबर को कन्या राशि में लगभग 29 अंश पर है। कन्या शुक्र की नीच राशि है। परंपरा में शुक्र का संबंध सुंदरता, वाहन, आभूषण और विलासिता से माना जाता है, इसलिए इस सप्ताह बड़ी ख़रीदारी में जल्दबाज़ी की जगह तुलना और जांच बेहतर रहती है। यह किसी पूजा, दीपदान या स्नान को नहीं रोकता। शुक्र की इस चाल का विस्तार शुक्र गोचर 2026 में देखा जा सकता है।

मंगल कर्क में और गुरु सिंह में: ग्रहों का संतुलन

8 नवंबर को मंगल कर्क राशि में लगभग 28 अंश पर है, जो उसकी नीच राशि है, और जल्द ही सिंह में प्रवेश करने वाला है। गुरु सिंह राशि में कुछ ही अंश पर नया-नया प्रवेश कर चुका है। मंगल का संबंध साहस, ऊर्जा और रक्त से है, इसलिए नीच मंगल में क्रोध और जल्दबाज़ी पर संयम रखना अच्छा रहता है। गुरु का सिंह में आना शिक्षा, संतान और रचनात्मकता का विषय है। मंगल की आगे की चाल मंगल गोचर 2026-27 में और गुरु का परिवर्तन गुरु का सिंह गोचर में है।

8 नवंबर के अशुभ काल: राहु काल, यमगंड और गुलिक

दिल्ली NCR में 8 नवंबर को राहु काल 16:06 से 17:27 तक है, जो सूर्यास्त से ठीक पहले का खंड है। यमगंड 12:04 से 13:25 और गुलिक काल 14:45 से 16:06 तक है। अभिजित मुहूर्त 11:43 से 12:26 तक है, पर चतुर्दशी 11:28 पर समाप्त हो जाती है, इसलिए चतुर्दशी से जुड़े कर्म सुबह ही कर लेना ठीक है। राहु काल में नई ख़रीदारी या सौदा टालें। गणना का तरीक़ा राहु काल कैसे निकालें में समझाया गया है।

7 नवंबर के अशुभ काल: दीपदान की शाम

शनिवार, 7 नवंबर को दिल्ली NCR में राहु काल 09:22 से 10:43, यमगंड 13:24 से 14:45 और गुलिक काल 06:41 से 08:01 तक है। अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:25 तक है। शाम का प्रदोष काल 17:27 से 20:05 तक है और इन तीनों अशुभ खंडों से बाहर है। इसलिए दीपदान और शाम की पूजा बिना किसी बाधा के की जा सकती है। शनिवार शनि का दिन है, इसलिए सरसों के तेल का दीपक विशेष रूप से उपयुक्त बैठता है। दिन भर का समय पंचांग में देखें।

चतुर्दशी से अमावस्या का संधि-काल और दिवाली

8 नवंबर को चतुर्दशी 11:28 पर समाप्त होती है और उसी क्षण अमावस्या शुरू हो जाती है, जो 9 नवंबर को 12:32 तक चलती है। इसका मतलब है कि दिवाली पूजन का प्रदोष काल 8 नवंबर की शाम 17:27 से 20:05 अमावस्या में पड़ता है। इसलिए सुबह नरक चतुर्दशी का स्नान और शाम को लक्ष्मी पूजन एक ही दिन में आ जाते हैं। इसकी योजना पहले से बना लें ताकि सुबह की सफ़ाई और शाम की पूजा के बीच थकान न हो। दिवाली की पूरी विधि दिवाली 2026 पृष्ठ पर है।

धनतेरस से भाई दूज तक: पांच दिन का क्रम

दीपावली का पर्व पांच दिन का माना जाता है: धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज। 2026 में धनतेरस 6 नवंबर की शाम है, जब त्रयोदशी प्रदोष में रहती है। नरक चतुर्दशी की शाम 7 नवंबर और स्नान की सुबह 8 नवंबर है। उसी दिन शाम दिवाली है। उसके बाद गोवर्धन पूजा 2026 और भाई दूज 2026 आती हैं। पूरे क्रम का पंचांग 6 नवंबर से 9 नवंबर तक देखा जा सकता है।

चंद्रमा कमज़ोर या अमावस्या के निकट हो तो: मन का ध्यान

अमावस्या के निकट चंद्रमा की कला कम होती जाती है, और कुछ लोगों को इन दिनों नींद, थकान या भावनात्मक बेचैनी ज़्यादा महसूस होती है। जिनकी कुंडली में चंद्र पाप-ग्रस्त है, उनके लिए यह और स्पष्ट हो सकता है। यह स्थायी निर्णय नहीं है, क्योंकि नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद और सरल जप से इसे संभाला जा सकता है। त्योहार के सप्ताह में काम और मेहमानों की भीड़ भी थकान बढ़ाती है। इसलिए पहले चंद्र की स्थिति जानना अच्छा है, और इसके लिए जन्म कुंडली कैलकुलेटर उपयोगी है। मन पर चंद्र का असर चंद्र महादशा में समझाया गया है।

उपाय 1: अभ्यंग स्नान का सरल रूप, पांच पंक्तियों में

क्या करना है: तिल या सरसों के तेल से हल्की मालिश के बाद गुनगुने पानी से स्नान करें और पानी में चुटकी भर हल्दी डालें। कब: रविवार, 8 नवंबर, सूर्योदय 06:42 से पहले। कितने का: दस से बीस रुपये के तेल में हो जाता है। कितने दिन: इस एक सुबह के लिए, चाहें तो हर रविवार दोहराएं। आपके लिए क्यों: रविवार सूर्य का दिन है और सूर्य इस समय तुला में कमज़ोर है, इसलिए प्रातःकाल का स्नान और धूप उसे बल देने का सरल तरीक़ा है। सावधानी: त्वचा पर एलर्जी हो तो तेल कम रखें और ठंड से बचने के लिए तुरंत सूखे कपड़े पहनें।

उपाय 2: यम दीपदान, पांच पंक्तियों में

क्या करना है: सरसों के तेल का एक चौमुखा दीया मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर रखें। कब: शनिवार, 7 नवंबर, सूर्यास्त 17:27 के बाद प्रदोष काल में, और परंपरा के अनुसार 8 नवंबर की शाम भी चाहें तो एक दीया। कितने का: पांच से दस रुपये का दीया और तेल। कितने दिन: दो शामें, 7 और 8 नवंबर। आपके लिए क्यों: दक्षिण दिशा का यह दीप परिवार की सुरक्षा और स्वास्थ्य की प्रार्थना का प्रतीक है, जो मंगल के इस समय नीच राशि में होने के दौर में मन को स्थिर रखता है। सावधानी: दीया हवा और पर्दों से दूर रखें और बच्चों को पास न जाने दें।

उपाय 3: बेकार सामान का दान और घर की सफ़ाई, पांच पंक्तियों में

क्या करना है: घर के पुराने, उपयोग योग्य कपड़े, बर्तन या किताबें अलग करके ज़रूरतमंद को दें और टूटे सामान को हटाएं। कब: शुक्रवार, 6 नवंबर, या शनिवार, 7 नवंबर, दिन में। कितने का: मुफ़्त, केवल अपना पुराना सामान। कितने दिन: दिवाली तक, यानी 8 नवंबर से पहले। आपके लिए क्यों: साफ़ और हल्का घर मन को हल्का करता है, और दान गुरु के सिंह में आने के इस समय को सार्थक बनाता है। सावधानी: दान उन्हीं चीज़ों का करें जो सही स्थिति में हों, किसी की गरिमा का ध्यान रखें।

किन्हें तेल मालिश और जल्दी स्नान में सावधानी रखनी चाहिए

नवंबर की सुबह दिल्ली-NCR में ठंडी हो सकती है। छोटे बच्चे, वृद्धजन, गर्भवती महिलाएं और जिन्हें सर्दी-ज़ुकाम, दमा या जोड़ों की समस्या है, वे ठंडे पानी या खुले में तेल लगाकर देर तक न रहें। जिनकी त्वचा संवेदनशील है, वे बेसन-दही का हल्का उबटन चुनें। रक्तचाप या हृदय रोग के मरीज़ सुबह बहुत जल्दी उठने की कोशिश में नींद की क़ीमत पर नियम न निभाएं। परंपरा का सार शुद्धता और संयम है, इसलिए सुविधा और सुरक्षा के अनुसार उसे ढाला जा सकता है। स्वास्थ्य के ज्योतिषीय सुझाव स्वास्थ्य कैलकुलेटर में देखें।

बच्चों और परिवार के साथ कैसे मनाएं

बच्चों के लिए नरक चतुर्दशी को कहानी की तरह सुनाना सबसे अच्छा रहता है। कृष्ण और नरकासुर की कथा, दीये सजाना और उबटन लगाना उन्हें रोचक लगता है। उन्हें दीपक जलाने के लिए बड़ों की निगरानी में रखें और पटाखों से दूर रखें। घर के सब लोग एक साथ मुख्य द्वार पर दीया रखकर परिवार की सुरक्षा की प्रार्थना कर सकते हैं। यह साझा क्षण दिवाली की भागदौड़ में एक शांत ठहराव देता है। उत्सव की तारीख़ों का सार पंचांग पर देखा जा सकता है, ताकि परिवार का कार्यक्रम पहले से बन सके।

नौकरीपेशा और फ्लैट में रहने वाले कैसे निभाएं

रविवार होने के कारण 8 नवंबर को अधिकतर लोगों की छुट्टी है, जो सुबह का स्नान और शाम की पूजा दोनों के लिए सुविधाजनक है। फिर भी देर रात तक जागने वाले लोग सूर्योदय से पहले उठने के लिए पहले से अलार्म और गुनगुने पानी की तैयारी रखें। फ्लैट में घर के बाहर दीया रखने की जगह सीमित हो तो दरवाज़े के पास सुरक्षित स्थान चुनें। सोसाइटी के नियमों का पालन करें और अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें। अपना सही सूर्योदय देखने के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर काम आएगा।

आम ग़लतफ़हमियां: नरक का भय या एक दिन की चूक

नाम में नरक शब्द होने से कई लोग इस तिथि को भय से जोड़ देते हैं, जबकि इसका केंद्र नरकासुर के वध का उत्सव और प्रकाश की विजय है। एक ग़लतफ़हमी यह भी है कि सुबह देर से उठे तो पूरा पर्व बिगड़ गया। परंपरा रोगी, बच्चों और परिस्थिति के अनुसार नियमों में छूट देती है, और सच्चा भाव सबसे ऊपर रहता है। इसी तरह कुंडली में कोई भी कठिन बात उसके उपाय के साथ ही समझनी चाहिए, अलग करके नहीं। दिवाली से जुड़ी और भ्रांतियां दिवाली ज्योतिष 2026 में दूर की गई हैं।

नरक चतुर्दशी के बाद: दिवाली, गोवर्धन और भाई दूज

नरक चतुर्दशी के बाद उसी शाम दिवाली और लक्ष्मी पूजन होता है। अगले ही दिन अमावस्या का स्नान-दान और उसके बाद गोवर्धन पूजा 2026 और भाई दूज 2026 आते हैं। थोड़ा आगे देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा आती है, जहां विवाह के शुभ मुहूर्तों का मौसम खुलता है। अमावस्या की तारीख़ और महत्व के लिए अमावस्या कब है 2026 देखें, और उसके ज्योतिषीय अर्थ के लिए अमावस्या का महत्व।

हमारी गणना की पद्धति और इस पृष्ठ की विश्वसनीयता

इस पृष्ठ के सभी समय और ग्रह-स्थितियां त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन से ली गई हैं, जो Swiss Ephemeris, लाहिड़ी अयनांश और सूर्योदय-आधारित तिथि निर्णय पर चलता है। इस पद्धति की देखरेख 16 वर्ष से अधिक की पाराशरी साधना वाले मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट रोहित गुप्ता करते हैं। दिए गए समय दिल्ली NCR के हैं, और अन्य शहरों में सूर्योदय के साथ अभ्यंग स्नान का समय बदल जाएगा। ग्रहों की स्थितियों की व्याख्या यहां सरल भाषा में परंपरा के अनुसार दी गई है, और कोई भी बात अंतिम भविष्यवाणी नहीं है। ग्रहों का परिचय से शुरुआत की जा सकती है।

अपनी कुंडली के अनुसार दिवाली सप्ताह का मुहूर्त जांचें

पंचांग सबके लिए एक जैसा दिन बताता है, पर आपकी कुंडली में चल रही दशा और गोचर का असर अलग होता है। इसलिए दिवाली सप्ताह में बड़ी ख़रीदारी, नया काम या पूजा-संकल्प लेने से पहले अपना जन्म विवरण डालकर मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर चलाएं। साथ ही उपाय कैलकुलेटर से देखें कि आपके लिए कौन-सा सरल उपाय ठीक रहेगा, और कमज़ोर ग्रह खोजक से कमज़ोर ग्रह जानें। धन के योगों के लिए धन योग गाइड पढ़ें। शुरुआत की जांचें मुफ़्त हैं।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

अभ्यंग स्नान
तेल मालिश के बाद किया जाने वाला स्नान, जो नरक चतुर्दशी पर सूर्योदय से पहले करने की परंपरा है।
अरुणोदय
सूर्योदय से ठीक पहले का वह समय जब आकाश में लालिमा आने लगती है।
चौमुखा दीया
चार बत्तियों वाला दीपक, जिसे यम दीपदान के लिए द्वार पर रखा जाता है।
प्रदोष काल
सूर्यास्त के बाद का वह समय जब दिन और रात मिलते हैं, पूजा और दीपदान के लिए उपयुक्त माना जाता है।
चतुर्दशी
चंद्र पक्ष की चौदहवीं तिथि, जो अमावस्या या पूर्णिमा से ठीक पहले आती है।

Frequently Asked Questions

नरक चतुर्दशी 2026 कब है?

नरक चतुर्दशी 2026 रविवार, 8 नवंबर को है। दिल्ली NCR में चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को 10:48 पर शुरू होकर 8 नवंबर को 11:28 तक रहती है।

अभ्यंग स्नान का समय क्या है?

अभ्यंग स्नान 8 नवंबर की सुबह सूर्योदय से पहले करें। दिल्ली में सूर्योदय 06:42 पर है, इसलिए स्नान उससे पहले पूरा कर लें, अपने शहर का सूर्योदय देखकर।

छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी में क्या फ़र्क़ है?

दोनों एक ही तिथि के नाम हैं। उत्तर भारत में इसे छोटी दिवाली कहते हैं, जबकि सुबह के अभ्यंग स्नान वाले पक्ष को नरक चतुर्दशी और रूप चौदस कहा जाता है।

नरक चतुर्दशी पर दीपदान कहां और कब करें?

चौमुखा दीया सरसों के तेल से घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण की ओर रखें। 2026 में प्रदोष काल 17:27 से 20:05 तक है और 7 नवंबर की इस शाम चतुर्दशी मौजूद है।

क्या नरक चतुर्दशी और दिवाली एक ही दिन हैं?

2026 में दोनों 8 नवंबर को आते हैं। सुबह चतुर्दशी में अभ्यंग स्नान होता है और 11:28 के बाद अमावस्या शुरू होने से शाम को दिवाली पूजन होता है।

नरकासुर का वध किसने किया था?

प्रचलित कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के सहयोग से नरकासुर का वध किया। इसी स्मृति में यह तिथि नरक चतुर्दशी कहलाती है।

काली चौदस क्या है?

कई क्षेत्रों में नरक चतुर्दशी की रात देवी काली की उपासना की जाती है, जिसे काली चौदस कहते हैं। इसका भाव भय से रक्षा और नकारात्मकता से मुक्ति की प्रार्थना है।

8 नवंबर 2026 को राहु काल कब है?

दिल्ली NCR में 8 नवंबर को राहु काल 16:06 से 17:27 तक है। यमगंड 12:04 से 13:25 और गुलिक काल 14:45 से 16:06 तक है।

क्या तेल मालिश सभी के लिए सुरक्षित है?

त्वचा की एलर्जी, बुख़ार या सर्दी-ज़ुकाम में सावधानी रखें। पहले हाथ पर थोड़ा तेल लगाकर जांच लें और ठंड से बचने के लिए स्नान के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें।

नरक चतुर्दशी के बाद कौन-से त्योहार आते हैं?

उसी शाम दिवाली और लक्ष्मी पूजन होता है। उसके बाद गोवर्धन पूजा, भाई दूज, देवउठनी एकादशी और कार्तिक पूर्णिमा आती हैं।

यह भी देखें · See also

इस हब का मुख्य पेजShubh Muhurat Calculator — 39 Ghatnayen

समूह: अन्य समूह — अनुष्ठानिक, चिकित्सा और कानूनी घटनाएं

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