पूर्णिमा कब है 2026-27: तारीख और तिथि समय
Trikaal Sandesh — Direct Answer
अगली पूर्णिमा सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को है (आश्विन, शरद पूर्णिमा), तिथि 25 अक्टूबर सुबह 11:57 से 26 अक्टूबर सुबह 9:42 तक है, इसलिए खीर की चाँदनी रात 25 अक्टूबर है। इसके बाद 24 नवंबर, 23 दिसंबर (शाम), 22 जनवरी 2027 और 20 फरवरी 2027 आती हैं। तारीखें दिल्ली के सूर्योदय की तिथि पर हैं; अपना शहर जाँचें।
Deep Dive Analysis
पूर्णिमा कब है 2026-27: सभी तारीखें एक नज़र में
अगली पूर्णिमा सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को है। यह आश्विन पूर्णिमा, यानी शरद पूर्णिमा है, हालाँकि खीर रखने की चाँदनी रात 25 अक्टूबर की शाम है, क्योंकि तिथि उस दिन सुबह 11:57 बजे शुरू हो जाती है। इसके बाद 24 नवंबर (कार्तिक), 23 दिसंबर (मार्गशीर्ष), 22 जनवरी 2027 (पौष), 20 फरवरी (माघ), 22 मार्च (फाल्गुन), 20 अप्रैल, 20 मई, 18 जून, 18 जुलाई (गुरु पूर्णिमा), 17 अगस्त, 15 सितंबर, 15 अक्टूबर, 14 नवंबर और 13 दिसंबर 2027 आती हैं। जहाँ अलग से न लिखा हो, वहाँ तारीख दिल्ली के सूर्योदय की तिथि से है। अपने शहर के लिए लाइव पंचांग देखें।
पूर्णिमा क्या है और ज्योतिष में इसका महत्व
पूर्णिमा पूर्ण चंद्रमा की तिथि है, शुक्ल पक्ष की 15वीं और आखिरी तिथि, जब चंद्रमा सूर्य के ठीक सामने होता है। तिथि वह समय है जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है, और पूर्णिमा इस अंतर के 168 से 180 अंश का हिस्सा है। ज्योतिष में पूर्ण चंद्रमा सबसे बलवान माना जाता है, इसलिए इस दिन चंद्रमा और उसके द्वारा शासित मन को उज्ज्वल और खुला पढ़ा जाता है। इसी कारण पूर्णिमा पर व्रत, उपवास और स्नान पर्व होते हैं, और लोग सत्यनारायण पूजा या चंद्रोदय के समय शांत प्रार्थना करते हैं।
दिल्ली के लिए पूर्णिमा की गणना कैसे करते हैं
हम दिल्ली (28.61 उत्तर, 77.21 पूर्व, भारतीय समय) के लिए हर मिनट सूर्य और चंद्रमा के बीच का कोण निकालते हैं और जिस क्षण यह 168 अंश पार करता है उसे पूर्णिमा का आरंभ, और 180 अंश को अंत मानते हैं। ये समय एक स्वतंत्र गणना इंजन से निकले हैं और Open Ephemeris के JPL DE440 डेटा से जाँचे गए हैं। स्नान और दान के लिए वही दिन लिया जाता है जिसके सूर्योदय पर तिथि हो, और शाम के व्रत तथा चंद्र-दर्शन के लिए वह दिन जिसमें चंद्रोदय के समय तिथि हो। जहाँ दोनों अलग पड़ते हैं, हम साफ़ लिखते हैं। किसी भी तारीख को रोज़ के पंचांग से मिलाएँ।
अक्टूबर से दिसंबर 2026 की पूर्णिमा: तिथि का समय
आश्विन पूर्णिमा 25 अक्टूबर को सुबह 11:57 बजे से 26 अक्टूबर को सुबह 9:42 बजे तक है, इसलिए सोमवार 26 अक्टूबर का सूर्योदय इसके अंदर आता है, जबकि चाँदनी रात 25 अक्टूबर की है। कार्तिक पूर्णिमा 23 नवंबर को रात 11:43 बजे से 24 नवंबर को शाम 8:24 बजे तक है, इसलिए मंगलवार 24 नवंबर दिन है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा 23 दिसंबर को सुबह 10:48 बजे से 24 दिसंबर को सुबह 6:58 बजे तक है, जो किसी सूर्योदय को नहीं छूती, इसलिए बुधवार 23 दिसंबर की शाम, जब चंद्रमा उगता है, व्रत का दिन है। सभी समय दिल्ली के भारतीय समय में हैं।
शरद पूर्णिमा 2026: खीर की रात 25 अक्टूबर क्यों है
शरद पूर्णिमा आश्विन की पूर्णिमा है, और परंपरा है कि दूध की खीर रात भर चाँदनी में रखी जाती है। तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:57 बजे शुरू होकर उस पूरी रात मौजूद रहती है और 26 अक्टूबर को सुबह 9:42 बजे खत्म होती है, इसलिए चाँदनी रात 25 अक्टूबर की रात है। 26 अक्टूबर का सूर्योदय भी तिथि के अंदर है, इसीलिए स्नान और दान का दिन सोमवार है। जो परिवार यह परंपरा मानते हैं वे हल्का उपवास रखते हैं, चंद्रमा को खीर अर्पित करते हैं और अगली सुबह उसे खाते हैं। इससे पहले के पर्वों के लिए शारदीय नवरात्रि और दशहरा के पन्ने देखें।
कार्तिक पूर्णिमा 2026: मंगलवार, 24 नवंबर
कार्तिक पूर्णिमा साल के सबसे ज़्यादा स्नान वाले दिनों में है, और सूर्योदय के नियम से दिल्ली के लिए मंगलवार 24 नवंबर 2026 है, क्योंकि तिथि 23 नवंबर रात 11:43 से 24 नवंबर शाम 8:24 तक है। यह पवित्र डुबकी, नदियों और मंदिरों में दीपदान और वाराणसी की देव दीपावली का दिन है। यह दिवाली 8 नवंबर के कुछ ही बाद आती है, और देवउठनी एकादशी 20 या 21 नवंबर को विवाह सीज़न खोलती है। पर्व की जानकारी के लिए कार्तिक पूर्णिमा कब है का पन्ना देखें।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2026: बुधवार, 23 दिसंबर
यह वह स्थिति है जहाँ तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती। पूर्णिमा 23 दिसंबर को सुबह 10:48 बजे शुरू होकर 24 दिसंबर को सुबह 6:58 बजे खत्म होती है, जो दिल्ली के लगभग 7:10 बजे के सूर्योदय से पहले है, इसलिए सूर्योदय आधारित स्नान को कोई पूर्णिमा नहीं मिलती। 23 दिसंबर की शाम पूर्ण चंद्रमा की शाम है, इसलिए सत्यनारायण पूजा, चंद्र अर्घ्य और व्रत उसी दिन होते हैं। अगर आपके परिवार में तिथि चलते हुए स्नान की रीति है, तो 23 दिसंबर को सुबह 10:48 के बाद स्नान करें और पुरोहित से पूछ लें कि कौन सी रीति लागू है। सही समय के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर देखें।
जनवरी से जून 2027 की पूर्णिमा की तारीखें
पौष पूर्णिमा 21 जनवरी रात 9:31 से 22 जनवरी शाम 5:47 तक है, इसलिए शुक्रवार 22 जनवरी दिन है। माघ पूर्णिमा 20 फरवरी सुबह 8:00 से 21 फरवरी सुबह 4:54 तक है और किसी सूर्योदय को नहीं छूती, इसलिए शनिवार 20 फरवरी की शाम व्रत का दिन है। फाल्गुन पूर्णिमा 21 मार्च शाम 6:22 से 22 मार्च शाम 4:14 तक है, यानी सोमवार 22 मार्च। चैत्र पूर्णिमा मंगलवार 20 अप्रैल, वैशाख पूर्णिमा गुरुवार 20 मई है, और ज्येष्ठ पूर्णिमा 18 जून को सुबह 4:35 पर शुरू होकर 19 जून को सुबह 6:14 पर खत्म होती है, यानी दो सूर्योदय छूती है।
जुलाई से दिसंबर 2027 की पूर्णिमा की तारीखें
आषाढ़ पूर्णिमा, यानी गुरु पूर्णिमा, रविवार 18 जुलाई 2027 को है, तिथि रात 9:15 बजे खत्म होती है। श्रावण पूर्णिमा 16 अगस्त सुबह 10:29 से 17 अगस्त दोपहर 12:59 तक है, इसलिए मंगलवार 17 अगस्त सूर्योदय का दिन है। भाद्रपद पूर्णिमा बुधवार 15 सितंबर को है, जो पितृ पक्ष की शुरुआत के पास पड़ती है। आश्विन पूर्णिमा 14 अक्टूबर शाम 6:50 से 15 अक्टूबर शाम 7:17 तक है, इसलिए शरद पूर्णिमा की चाँदनी रात 14 अक्टूबर है। कार्तिक पूर्णिमा रविवार 14 नवंबर और मार्गशीर्ष पूर्णिमा सोमवार 13 दिसंबर 2027 को है।
पौष और माघ पूर्णिमा: 2027 का स्नान काल
22 जनवरी 2027 की पौष पूर्णिमा से कई लोग प्रयागराज और दूसरी नदियों पर माघ मास के स्नान का संकल्प शुरू करते हैं, और 20 फरवरी की माघ पूर्णिमा उस काल को पूरा करती है। पौष के लिए सूर्योदय का नियम 22 जनवरी देता है। माघ के लिए तिथि 20 फरवरी सुबह 8:00 से 21 फरवरी सुबह 4:54 तक है, इसलिए कोई सूर्योदय इसे नहीं छूता और 20 फरवरी की शाम चंद्र-दर्शन का दिन है। जो लोग सुबह स्नान करते हैं वे आमतौर पर तिथि शुरू होने के बाद 20 फरवरी को डुबकी लेते हैं। दोनों के बीच मकर संक्रांति 2027 आती है, जिसकी तारीख अलग पन्ने पर मिलती है।
गुरु पूर्णिमा 2027: रविवार, 18 जुलाई
गुरु पूर्णिमा आषाढ़ पूर्णिमा को पड़ती है, और 2027 के लिए सूर्योदय का नियम रविवार 18 जुलाई देता है, तिथि 17 जुलाई शाम 6:49 से 18 जुलाई रात 9:15 तक चलती है। यह वह दिन है जब भक्त अपने गुरुओं, आध्यात्मिक और सांसारिक, का आभार मानते हैं, और कई लोग वर्षा ऋतु भर चलने वाला अध्ययन या साधना शुरू करते हैं। ज्योतिष में बृहस्पति गुरु-कारक है, इसलिए यह दिन कुंडली में गुरु की स्थिति देखने का भी अच्छा समय है, जिसके लिए दशा कैलकुलेटर काम आता है। किसी शिक्षक को छोटा सा धन्यवाद-पत्र लिखना इसे मनाने का सरल तरीका है।
फाल्गुन पूर्णिमा और होली 2027: सोमवार, 22 मार्च
फाल्गुन पूर्णिमा 21 मार्च शाम 6:22 बजे शुरू होकर 22 मार्च शाम 4:14 बजे खत्म होती है, इसलिए सूर्योदय का दिन सोमवार 22 मार्च है। होलिका दहन रात में तब किया जाता है जब पूर्णिमा हो और भद्रा न हो, जो आपके शहर के करण-समय पर निर्भर है, इसलिए शाम के समय के लिए नज़दीक आने पर होलिका दहन 2027 की जानकारी देखें। 22 मार्च की सुबह का पूर्णिमा स्नान होलिका की आग से अलग है और अपने आप में माना जाता है। चंद्रमा पूर्ण होने से यह दिन आभार और मेल-मिलाप के लिए ठीक है, नए आर्थिक वादों के लिए कम।
रक्षा बंधन और श्रावण पूर्णिमा 2027
2027 में श्रावण पूर्णिमा 16 अगस्त सुबह 10:29 बजे शुरू होकर 17 अगस्त दोपहर 12:59 बजे खत्म होती है, यानी तिथि एक दिन की देर सुबह और अगले दिन की सुबह दोनों में है। रक्षा बंधन का अपना नियम है, जिसमें अपराह्न में तिथि और भद्रा से बचाव देखा जाता है, इसलिए राखी का समय यहाँ तय नहीं किया गया है और तारीख के नज़दीक त्योहार के पन्ने पर दिया जाएगा। इस नियम को समझने के लिए रक्षा बंधन कब है का पन्ना देखें। भाई-बहन के बंधन के ग्रहों को समझाने वाला रक्षा बंधन ज्योतिष लेख भी पढ़ें।
चैत्र और वैशाख पूर्णिमा: हनुमान जयंती और बुद्ध पूर्णिमा
मंगलवार 20 अप्रैल 2027 की चैत्र पूर्णिमा पर उत्तर भारत के कई मंदिर हनुमान जयंती मनाते हैं, और तिथि 20 अप्रैल सुबह 4:52 से 21 अप्रैल सुबह 3:57 तक है, इसलिए दिल्ली का सूर्योदय इसके अंदर आता है। गुरुवार 20 मई 2027 की वैशाख पूर्णिमा बुद्ध पूर्णिमा है, और तिथि 19 मई शाम 4:03 से 20 मई शाम 4:29 तक है। दोनों दिन स्नान, हल्का भोजन और दान के साथ मनाए जाते हैं। पूर्ण चंद्रमा आपको कैसे छूता है, यह आपकी चंद्र स्थिति से पता चलता है, इसलिए राशि कैलकुलेटर और नक्षत्र कैलकुलेटर खोलें।
पूर्णिमा व्रत किस दिन: सूर्योदय या चंद्रोदय
दो नियम चलते हैं। स्नान और दान के लिए वह दिन लिया जाता है जिसके सूर्योदय पर पूर्णिमा हो, जबकि शाम के व्रत, चंद्र अर्घ्य और सत्यनारायण पूजा के लिए वह दिन जिसमें चंद्रोदय के समय पूर्णिमा हो। ज़्यादातर महीनों में दोनों एक ही तारीख देते हैं, जैसे 26 अक्टूबर 2026, 24 नवंबर 2026 और 22 जनवरी 2027 को। वे तब अलग होते हैं जब तिथि किसी सूर्योदय को नहीं छूती, जैसे 23 दिसंबर 2026 और 20 फरवरी 2027 को, या दो सूर्योदय छूती है, जैसे 18 और 19 जून 2027 को। ऐसे महीनों में अपने परिवार की रीति मानें या पुरोहित से पूछें, और सूर्योदय-चंद्रोदय के समय के लिए पंचांग खुला रखें।
पूर्णिमा पर घर में सत्यनारायण पूजा: आठ चरण
कई परिवार पूर्णिमा की शाम सत्यनारायण पूजा करते हैं। पहले, पूजा का कोना साफ़ करें और पीले कपड़े वाली चौकी लगाएँ। दूसरे, विष्णु की मूर्ति और कलश रखें। तीसरे, तुलसी, फल और सूजी या आटे, घी, चीनी और केले से बना प्रसाद चढ़ाएँ। चौथे, घी का दीपक जलाएँ। पाँचवें, कथा पढ़ें या सुनें। छठे, आरती करें। सातवें, चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल अर्पित करें। आठवें, प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बाँटें। समय में मदद चाहिए तो शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर आपके शहर के लिए शांत समय बताता है।
पूर्णिमा पर क्या करें: एक सरल दिनचर्या
पूर्णिमा की दिनचर्या छोटी और स्थिर रखें। जल्दी उठकर स्नान करें, नदी तक न पहुँच सकें तो गंगाजल की कुछ बूँदें डालें। हल्का सात्त्विक भोजन लें, सुबह सूर्य को जल दें और शाम को घी का दीपक जलाएँ। चंद्रमा उगने के बाद उसे जल या खीर अर्पित करें और दस मिनट शांत जप करें। किसी ज़रूरतमंद को भोजन, कपड़े या कुछ पैसे दान करें। पूर्ण चंद्रमा आभार और मनन के लिए अच्छा समय है, और अपनी राशि को राशि कैलकुलेटर से जाँचने के लिए भी।
पूर्णिमा का संयम: शास्त्र क्या कहते हैं
मनुस्मृति 4.128 गृहस्थ को अमावस्या, अष्टमी, पूर्णिमा और चतुर्दशी पर संयम, यानी ब्रह्मचर्य जैसे अनुशासन, की सलाह देती है [1]। आज लोग इसे दिन की शांत दिनचर्या की तरह पढ़ते हैं: हल्का भोजन, कम भोग, ज़्यादा शांति। यह किसी अनहोनी की चेतावनी नहीं है, और रीतियाँ परिवार के अनुसार अलग होती हैं, इसलिए अपनी परंपरा मानें। इन्हीं तिथियों का कैलेंडर में उपयोग कैसे होता है, यह देखना हो तो अमावस्या कब है और एकादशी कब है लेख पढ़ें, जो चंद्र मास की बनावट समझाते हैं।
पौर्णमास: पूर्णिमा के कर्म की शास्त्रीय जड़
पूर्णिमा के अनुष्ठान का एक प्राचीन नाम है, पौर्णमास, जिसे ग्रंथ अमावस्या के कर्म दर्श के साथ जोड़ते हैं। मनुस्मृति 6.9 में वानप्रस्थ को विधि अनुसार वैतानिक अग्निहोत्र करने और दर्श तथा पौर्णमास पर्व-यज्ञों को न छोड़ने का निर्देश है [2]। ये दो कर्म दिखाते हैं कि पखवाड़े के मोड़ वाले दिन हज़ारों साल से माने जाते रहे हैं। आज के परिवार इन्हें स्नान, उपवास, पूजा और दान के रूप में निभाते हैं। नए चंद्रमा के पक्ष के लिए अमावस्या का लेख देखें, और पितरों के लिए अमावस्या तर्पण और उपाय पढ़ें।
कुंडली में पूर्णिमा का जन्म: पूर्ण बल का चंद्रमा
पूर्णिमा के आसपास जन्मे व्यक्ति के जन्म पर चंद्रमा सूर्य के लगभग सामने होता है, और ज्योतिष बढ़ते-से-पूर्ण चंद्रमा को बलवान और शुभ मानता है, जो मन, स्मृति और भावनात्मक स्थिरता का सहारा है। अंतिम निष्कर्ष फिर भी नक्षत्र, भाव, शनि या राहु की दृष्टि और चल रही दशा पर निर्भर है। इसे ठीक से जाँचने के लिए जन्म कुंडली कैलकुलेटर खोलें, अपनी दशा देखें और नक्षत्र पहचानें। कुंडली में चंद्रमा और मंगल पास हों तो उसका अलग असर पढ़ा जाता है, इसलिए पूरी कुंडली का मिलान करें।
पूर्णिमा और मन: बेचैन चंद्रमा के लिए शांत आदतें
चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए बेचैनी के दौर को नाटकीय उपाय की जगह स्थिर लय से हल्का किया जा सकता है। समय पर सोएँ, भोजन का समय तय रखें, शाम की रोशनी में कुछ मिनट बाहर बिताएँ और मन की बात लिख लें। अगर आप चंद्र की महादशा या अंतर्दशा में हैं, तो हमारा चंद्र, शनि, राहु और मानसिक स्वास्थ्य का लेख पैटर्न को सरल भाषा में समझाता है। ये आदतें संतुलन के लिए हैं और चिकित्सा का विकल्प नहीं, इसलिए नींद या मूड हफ़्तों तक खराब रहे तो डॉक्टर से मिलें।
पूर्णिमा का एक सरल उपाय जो कोई भी शुरू कर सकता है
पूर्णिमा की शाम छोटी और स्थिर आदत शुरू करने का अच्छा समय है। नीचे की पाँच पंक्तियों की योजना अपनाएँ, और भारी लगे तो रुक जाएँ। क्या: चंद्रमा को एक छोटी कटोरी जल या दूध अर्पित करें। कब: पूर्णिमा की शाम चंद्रोदय के बाद। कैसे: चंद्रमा की ओर मुख करके कृतज्ञता की छोटी प्रार्थना करें और जल किसी पौधे की जड़ में डाल दें। कितना: हर पूर्णिमा पाँच मिनट, तीन महीने तक। सावधानी: यह तभी करें जब आपके परिवार की रीति से मेल खाए, और अस्वस्थ हों तो छोड़ दें। यह मन की शांति में सहायक है, योग्य ज्योतिषी की सलाह का विकल्प नहीं।
पूर्णिमा और विवाह मुहूर्त: एक अनुकूल तिथि
पूर्णिमा को विवाह के लिए तब स्वीकार किया जाता है जब नक्षत्र, वार और लग्न भी मेल खाएँ, क्योंकि चंद्रमा पूर्ण और बलवान होता है। यह अकेला नियम नहीं है, इसलिए पूरा मुहूर्त जाँचना ज़रूरी है। सीज़न की तारीखों के लिए विवाह मुहूर्त 2026 या विवाह मुहूर्त 2027 खोलें, और हॉल बुक करने से पहले जोड़े के लिए कुंडली मिलान चलाएँ। विवाह सीज़न देवउठनी एकादशी के बाद खुलता है, जैसा हमारा एकादशी का लेख बताता है।
पूर्णिमा, अमावस्या और एकादशी: महीने के तीन आधार
चंद्र मास के तीन आधार हैं। एकादशी महीने में दो बार, हर पक्ष की 11वीं तिथि पर आती है, पूर्णिमा शुक्ल पक्ष को पूरा करती है और अमावस्या कृष्ण पक्ष को। ये साथ मिलकर हिंदू घर की उपवास और दान की लय तय करती हैं। एकादशी की तारीखें एकादशी कब है लेख में हैं और अमावस्या की तारीखें अमावस्या कब है लेख में। महीने की योजना बनाते समय पहले तीनों को अपने पंचांग में चिह्नित करें और बाकी काम इनके आसपास रखें, ताकि व्रत के दिन और बड़े पारिवारिक आयोजन आपस में न टकराएँ।
अपने शहर के लिए पूर्णिमा कैसे जाँचें
तिथि की समय-सीमा हर जगह एक है, लेकिन सूर्योदय और चंद्रोदय शहर के साथ बदलते हैं, इसलिए पूर्व और पश्चिम में व्रत का दिन अलग हो सकता है। अपने शहर का पंचांग खोलें, सूर्योदय और चंद्रोदय का समय देखें और ऊपर दी गई समय-सीमाओं से मिलाएँ। अगर पूर्णिमा आपके सूर्योदय के कुछ मिनट बाद खत्म होती है, या चंद्रोदय से ठीक पहले शुरू होती है, तो अपने कुल पुरोहित से पूछें कि कौन सा दिन मानें। तिथियों के तर्क के लिए पंचांग समझाने वाला लेख पढ़ें।
पूर्णिमा की तारीखों पर आम गलतियाँ
पहली गलती है यह देखे बिना किसी सामान्य कैलेंडर से तारीख ले लेना कि तिथि सूर्योदय को छूती है या नहीं, जैसा 23 दिसंबर 2026 और 20 फरवरी 2027 दिखाते हैं। दूसरी गलती पूर्णिमा और प्रतिपदा, यानी अगले दिन, को मिला देना है, जब चंद्रमा घटने लगता है। तीसरी गलती पिछले साल का होली या राखी का समय नकल करना है, क्योंकि भद्रा और अपराह्न हर साल बदलते हैं। चौथी गलती शरद पूर्णिमा को सुबह का पर्व समझना है, जबकि असली महत्व चाँदनी रात का है। दो स्रोत मिलाएँ और अपने शहर के लिए हमारा लाइव पंचांग देखें।
त्वरित संदर्भ: 2026-27 के पूर्णिमा दिन
- 26 अक्टूबर 2026, सोमवार: आश्विन, शरद पूर्णिमा (खीर की रात 25 अक्टूबर)
- 24 नवंबर 2026, मंगलवार: कार्तिक
- 23 दिसंबर 2026, बुधवार: मार्गशीर्ष (शाम, कोई सूर्योदय नहीं)
- 22 जनवरी 2027, शुक्रवार: पौष
- 20 फरवरी 2027, शनिवार: माघ (शाम, कोई सूर्योदय नहीं)
- 22 मार्च 2027, सोमवार: फाल्गुन
- 20 अप्रैल 2027, मंगलवार: चैत्र
- 20 मई 2027, गुरुवार: वैशाख
- 18 जून 2027, शुक्रवार: ज्येष्ठ (दो सूर्योदय, 18 और 19 जून)
- 18 जुलाई 2027, रविवार: आषाढ़, गुरु पूर्णिमा
- 17 अगस्त 2027, मंगलवार: श्रावण
- 15 सितंबर, 15 अक्टूबर (चाँदनी रात 14 अक्टूबर), 14 नवंबर, 13 दिसंबर 2027
पूर्णिमा के आसपास त्योहारों का महीना कैसे बनाएँ
अक्टूबर से दिसंबर तक कैलेंडर भरा है। पितृ पक्ष 10 अक्टूबर को समाप्त होता है, नवरात्रि और दशहरा उसके बाद आते हैं, शरद पूर्णिमा की रात 25 अक्टूबर है, करवा चौथ अक्टूबर के अंत में है, और धनतेरस तथा दिवाली नवंबर के पहले सप्ताह में हैं। फिर 24 नवंबर की कार्तिक पूर्णिमा स्नान का मौसम लाती है और देवउठनी एकादशी उससे ठीक पहले विवाह खोलती है। पहले पूर्णिमा की तारीखें पक्की करें और बाकी आयोजन उनके आसपास रखें। छठ पूजा का पन्ना, पंचांग और पितृ पक्ष कब है का पन्ना इसमें मदद करते हैं।
Apna Personalized Analysis Lein
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शब्दावली · Glossary
- पूर्णिमा
- पूर्ण चंद्रमा की तिथि, शुक्ल पक्ष की आखिरी, जब चंद्रमा सूर्य के सामने होता है।
- तिथि
- चंद्र दिन; वह समय जिसमें चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है।
- शरद पूर्णिमा
- आश्विन की पूर्णिमा, जिस पर चाँदनी में खीर रखने की परंपरा है।
- सत्यनारायण पूजा
- विष्णु की घरेलू पूजा, कथा और प्रसाद के साथ, जो अक्सर पूर्णिमा पर होती है।
- पौर्णमास
- पूर्णिमा का शास्त्रीय कर्म, जिसे ग्रंथ अमावस्या के दर्श के साथ जोड़ते हैं।
- अपराह्न
- दिन का दोपहर बाद का भाग, जिससे रक्षा बंधन जैसे नियम तय होते हैं।
- भद्रा
- एक करण-काल जिसे होलिका दहन और राखी जैसे कर्मों में टाला जाता है।
- प्रतिपदा
- पक्ष की पहली तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या के अगले दिन।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
अमावास्याम् अष्टमीं च पौर्णमासीं चतुर्दशीम् । ब्रह्मचारी भवेन् नित्यम् अप्य् ऋतौ स्नातको द्विजः ॥ १२८ ॥
— Manusmriti, अध्याय 4 — अध्याय 4 · श्लोक 128 · github-sanskrittextsगृहस्थ को अमावस्या, अष्टमी, पूर्णिमा और चतुर्दशी पर ब्रह्मचर्य जैसा संयम रखने की सलाह दी गई है।
Advises a householder to keep restraint, a brahmacharya-like discipline, on Amavasya, Ashtami, Purnima and Chaturdashi.
वैतानिकं च जुहुयाद् अग्निहोत्रं यथाविधि । दर्शम् अ.स्कन्दयन् पर्व पौर्णमासं च योगतः ॥ ९ ॥
— Manusmriti, अध्याय 6 — अध्याय 6 · श्लोक 9 · github-sanskrittextsवानप्रस्थ को विधि अनुसार वैतानिक अग्निहोत्र करने और दर्श तथा पौर्णमास पर्व-यज्ञों को न छोड़ने का निर्देश है।
Tells the forest-dweller to offer the Vaitanika Agnihotra as prescribed, without missing the Darsha and Paurnamasa parva sacrifices.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
अक्टूबर 2026 में पूर्णिमा कब है?
अक्टूबर 2026 की पूर्णिमा आश्विन पूर्णिमा है, दिल्ली के लिए सोमवार 26 अक्टूबर, तिथि 25 अक्टूबर सुबह 11:57 से 26 अक्टूबर सुबह 9:42 तक। यह शरद पूर्णिमा है, और खीर की चाँदनी रात 25 अक्टूबर की शाम है।
नवंबर 2026 में पूर्णिमा कब है?
कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार 24 नवंबर 2026 को है। तिथि 23 नवंबर रात 11:43 से 24 नवंबर शाम 8:24 तक है, इसलिए 24 नवंबर का सूर्योदय इसके अंदर आता है। यह पवित्र स्नान और दीपदान का दिन है।
दिसंबर 2026 में पूर्णिमा कब है?
मार्गशीर्ष पूर्णिमा 23 दिसंबर सुबह 10:48 से 24 दिसंबर सुबह 6:58 तक है, जो दिल्ली के सूर्योदय से पहले खत्म हो जाती है, इसलिए यह किसी सूर्योदय को नहीं छूती। बुधवार 23 दिसंबर की शाम, जब चंद्रमा उगता है, व्रत और सत्यनारायण पूजा का दिन है।
जनवरी 2027 में पूर्णिमा कब है?
पौष पूर्णिमा शुक्रवार 22 जनवरी 2027 को है। तिथि 21 जनवरी रात 9:31 से 22 जनवरी शाम 5:47 तक है, इसलिए 22 जनवरी का दिल्ली का सूर्योदय इसके अंदर आता है।
गुरु पूर्णिमा 2027 कब है?
गुरु पूर्णिमा 2027 रविवार 18 जुलाई को है। आषाढ़ पूर्णिमा की तिथि 17 जुलाई शाम 6:49 से 18 जुलाई रात 9:15 तक है, इसलिए 18 जुलाई का सूर्योदय इसके अंदर आता है।
पूर्णिमा की दो तारीखें क्यों दिखती हैं?
तिथि एक शाम शुरू होकर अगली सुबह खत्म हो सकती है, और कुछ तिथियाँ किसी सूर्योदय को नहीं छूतीं या दो को छूती हैं। स्नान का दिन सूर्योदय के नियम से और शाम का व्रत चंद्रोदय के नियम से चलता है, इसलिए दोनों अलग हो सकते हैं। अपने परिवार की रीति मानें या पुरोहित से पूछें।
शरद पूर्णिमा 2026 में 25 अक्टूबर है या 26?
तिथि 25 अक्टूबर की पूरी रात मौजूद है और 26 अक्टूबर को सुबह 9:42 पर खत्म होती है। इसलिए चाँदनी में खीर रखने की परंपरा 25 अक्टूबर की रात की है, जबकि सूर्योदय का स्नान-दान का दिन सोमवार 26 अक्टूबर है।
जब तिथि किसी सूर्योदय को न छुए तो पूर्णिमा व्रत किस दिन होगा?
ऐसे में वह दिन लिया जाता है जिसमें चंद्रोदय के समय पूर्णिमा हो। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के लिए यह 23 दिसंबर 2026 है और माघ पूर्णिमा के लिए 20 फरवरी 2027। परिवार की रीति अलग हो तो वही मानें।
पूर्णिमा पर क्या करना चाहिए?
जल्दी स्नान करें, हल्का सात्त्विक भोजन लें, घी का दीपक जलाएँ, चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल अर्पित करें, कुछ मिनट जप करें और भोजन या कपड़े दान करें। कई परिवार शाम को सत्यनारायण पूजा भी करते हैं।
क्या पूर्णिमा विवाह के लिए शुभ है?
पूर्णिमा को विवाह के लिए तब स्वीकार किया जाता है जब नक्षत्र, वार और लग्न भी मेल खाएँ, क्योंकि चंद्रमा पूर्ण और बलवान होता है। फिर भी पूरा मुहूर्त जाँचना होता है, इसलिए तारीख तय करने से पहले विवाह मुहूर्त के पन्ने और कुंडली मिलान देखें।
क्या पूर्णिमा का जन्म बलवान चंद्रमा का संकेत है?
पूर्ण के पास का चंद्रमा आमतौर पर बलवान और शुभ माना जाता है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष नक्षत्र, भाव, दृष्टि और चल रही दशा पर निर्भर करता है। केवल जन्म तिथि के भरोसे न रहकर अपनी कुंडली जाँचें।
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