राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा का फल
Trikaal Sandesh — Direct Answer
राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा दूसरी उप-अवधि है और 2.4 साल, यानी करीब 2 साल 4 महीने 24 दिन चलती है। यह महादशा शुरू होने के 2.7 साल बाद लगती है और 5.1 साल पर खत्म होती है। गुरु ज्ञान, धन और संतान का कारक है, राहु अति-महत्वाकांक्षा का, इसलिए सीख और अवसर के साथ संतुलन ज़रूरी है।
Deep Dive Analysis
राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा: संक्षिप्त उत्तर
विंशोत्तरी पद्धति में राहु महादशा 18 साल की होती है और उसमें गुरु की अंतर्दशा दूसरे क्रम पर आती है, यानी राहु की अपनी अंतर्दशा के ठीक बाद। इसकी अवधि 18 गुणा 16 भाग 120, यानी पूरे 2.4 साल है, जो करीब 2 साल 4 महीने 24 दिन बैठता है। यह राहु काल के 2.7 साल बाद शुरू होकर 5.1 साल पर खत्म होती है, और इसके बाद शनि की अंतर्दशा आती है। गुरु ज्ञान, धन, संतान और मार्गदर्शन का कारक है, जबकि राहु अति-महत्वाकांक्षा का, इसलिए यह काल अक्सर सीख और अवसर साथ लाता है। मूल पद्धति के लिए महादशा की पूरी गाइड पढ़ें।
2.4 साल की अवधि का गणित
विंशोत्तरी में राहु को 18 साल और गुरु को 16 साल मिले हैं, और पूरा चक्र 120 साल का है। अंतर्दशा की लंबाई दोनों अवधियों का गुणनफल भाग 120 होती है, इसलिए 18 गुणा 16 भाग 120 बराबर 2.4 साल। शास्त्र में हर ग्रह की दशा के वर्ष क्रम से निर्धारित बताए गए हैं।[2] इसी विधि से राहु में राहु 2.7 साल, शनि 2.85, बुध 2.55, केतु 1.05, शुक्र 3.0, सूर्य 0.9, चंद्र 1.5 और मंगल 1.05 साल बनते हैं, और सब मिलकर पूरे 18 साल होते हैं। पूरी महादशा के हिसाब के लिए राहु महादशा कितने साल की होती है देखें।
राहु काल में गुरु कहाँ आता है
राहु महादशा में अंतर्दशा का क्रम राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र, सूर्य, चंद्र और मंगल है। राहु की अपनी 2.7 साल की उप-अवधि के तुरंत बाद गुरु आता है, इसलिए गुरु अंतर्दशा 2.7 साल पर शुरू होकर 5.1 साल पर खत्म होती है, और उसके बाद 2.85 साल की शनि अंतर्दशा आती है। यानी यह महादशा का शुरुआती हिस्सा है, जहाँ पहली उथल-पुथल के बाद दिशा मिलने का एहसास बनता है। क्रम को समझने के लिए राहु महादशा में शनि अंतर्दशा भी देखें।
गुरु और राहु का स्वभाव: विरोधी या पूरक
गुरु विस्तार, नीति, धर्म, शिक्षा, धन और संतान का कारक माना जाता है, जबकि राहु भी विस्तार चाहता है मगर बिना सीमा के, यानी लालसा, विदेश, तकनीक और असामान्य रास्तों का कारक है। दोनों के मेल को अक्सर ऐसे समझा जाता है कि गुरु दिशा देता है और राहु रफ़्तार। जब दोनों में संतुलन रहता है तो बड़े सपने ठोस योजना बन जाते हैं, और जब नहीं रहता तो वादे ज़्यादा और अमल कम रह जाता है। ग्रहों के स्वभाव के लिए कुंडली के 9 ग्रह पढ़ें।
गुरु चांडाल योग और इस अंतर्दशा का रिश्ता
जब जन्म कुंडली में गुरु और राहु एक ही राशि में साथ बैठते हैं तो इसे गुरु चांडाल योग कहा जाता है। ऐसी कुंडली में गुरु अंतर्दशा राहु काल के भीतर दो ग्रहों की सीधी बातचीत बन जाती है, इसलिए विचारों में उलझन या सलाह पर शक की प्रवृत्ति दिख सकती है। पर यह योग अपने आप में अशुभ फल की गारंटी नहीं है, गुरु की राशि, अंश और दृष्टि सब देखनी पड़ती है। दोषों की जाँच के लिए कुंडली में दोष कैसे देखें पढ़ें।
जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति कैसे परखें
अंतर्दशा का फल पढ़ने से पहले चार बातें देखी जाती हैं: गुरु किस राशि में है, किस भाव में है, किन ग्रहों के साथ या दृष्टि में है, और कितने अंश पर है। गुरु कर्क में उच्च, मकर में नीच और धनु या मीन में स्वराशि का माना जाता है। नवांश में उसकी स्थिति भी वही कहानी आगे बढ़ाती है, इसलिए नवांश चार्ट गाइड और ग्रहों की गरिमा समझ लेना उपयोगी रहता है। अपनी कुंडली बनाने के लिए फ्री जन्म कुंडली कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।
गुरु किस भाव का स्वामी है, इससे फल कैसे बदलता है
गुरु धनु और मीन, दो राशियों का स्वामी है, इसलिए हर लग्न में वह दो भावों का अधिपति बनता है। जब वह केंद्र या त्रिकोण का स्वामी हो तो उसकी अंतर्दशा में अक्सर स्थिरता, सहारा और सम्मान के संकेत देखे जाते हैं। जब वह छठे, आठवें या बारहवें भाव से जुड़ा हो तो सलाह, खर्च या कानूनी मामलों में अधिक सावधानी की ज़रूरत पड़ती है। इस फर्क को समझने के लिए कुंडली के 12 भाव और लग्न की गाइड पढ़ें।
राहु की स्थिति से गुरु अंतर्दशा का रंग
गुरु अंतर्दशा राहु महादशा के भीतर चलती है, इसलिए राहु का भाव और राशि पूरे दौर का मिज़ाज तय करते हैं। राहु तीसरे, छठे, दसवें या ग्यारहवें भाव में हो तो कई परंपराओं में उसे साहस और लाभ देने वाला माना जाता है, जबकि चौथे, आठवें या बारहवें में वह बेचैनी बढ़ा सकता है। गुरु से राहु की दूरी भी मायने रखती है। छाया ग्रह की बुनियाद के लिए राहु क्या है पढ़ें, और ग्यारहवें भाव का उदाहरण कुंडली के 11वें भाव में राहु में देखें।
शुरुआती महीने: पहली उथल-पुथल के बाद दिशा
गुरु अंतर्दशा राहु की अपनी 2.7 साल की तीव्र उप-अवधि के ठीक बाद शुरू होती है, इसलिए शुरुआती महीनों में कई लोगों को हल्कापन और स्पष्टता महसूस होती है। पुराने उलझे रिश्तों, पैसों और पढ़ाई के मामलों में किसी बड़े की सलाह या नया रास्ता मिलने के संकेत बनते हैं। फिर भी राहु का असर पूरी तरह हटता नहीं, इसलिए जल्दबाज़ी में बड़ा वादा या निवेश करने से बचना चाहिए। राहु काल की शुरुआत को समझने के लिए राहु अंतर्दशा की उलझन के लक्षण देखें।
बीच का दौर: अवसर, विस्तार और परख
अवधि का बीच का हिस्सा आम तौर पर वह समय होता है जब गुरु के कारकत्व, यानी शिक्षा, धन, संतान और मार्गदर्शन, सबसे ज़्यादा सामने आते हैं। नई पढ़ाई, प्रमोशन की बातचीत, घर में शुभ चर्चा या किसी गुरु जैसे व्यक्ति से मुलाकात ऐसे संकेत हैं जो कई कुंडलियों में दिखते हैं। राहु इसी विस्तार को बढ़ा-चढ़ाकर भी दिखा सकता है, इसलिए हर अवसर को ठोस दस्तावेज़ और समय-सीमा पर परखना समझदारी है। समय के हिसाब के लिए दशा और प्रत्यंतर समय पढ़ें।
आख़िरी महीने और शनि अंतर्दशा की तैयारी
जैसे-जैसे गुरु अंतर्दशा 5.1 साल की ओर बढ़ती है, शनि की 2.85 साल की अंतर्दशा की आहट शुरू हो जाती है। शनि अनुशासन, देरी और ज़िम्मेदारी का कारक है, इसलिए अंतिम महीनों में अधूरे काम निपटाना, बचत बढ़ाना और नए वादों की सूची छोटी रखना व्यावहारिक रहता है। गुरु काल में जो भी योजनाएँ बनीं, उन्हें ज़मीन पर उतारने का समय भी यही है। अगले चरण को पहले से समझने के लिए राहु महादशा में शनि अंतर्दशा और शनि महादशा गाइड पढ़ें।
करियर और नौकरी पर असर
गुरु सलाह, शिक्षण, कानून, बैंकिंग, परामर्श और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों का कारक माना जाता है, इसलिए इन क्षेत्रों में काम करने वालों को यह दौर पहचान और ज़िम्मेदारी दिला सकता है। राहु तकनीक, विदेश और नए तरीकों से जुड़ा है, इसलिए पारंपरिक काम में नया प्रयोग भी जुड़ सकता है। नौकरी बदलने से पहले दसवें भाव और उसके स्वामी की दशा-स्थिति देखनी चाहिए। इसके लिए करियर की ज्योतिषीय भविष्यवाणी, नौकरी बदलने का योग और करियर के लिए दशा समय पढ़ें।
व्यापार और निवेश
गुरु विस्तार का ग्रह है और राहु जोखिम उठाने की भूख का, इसलिए इस दौर में व्यापार बढ़ाने की इच्छा तेज़ रहती है। नई शाखा, नया साझेदार या ऑनलाइन विस्तार कई बार सामने आता है। सावधानी यह है कि राहु बढ़ा-चढ़ाकर वादे दिखाता है, इसलिए लाभ के आँकड़े और अनुबंध की शर्तें दो बार जाँचें। निवेश में एक ही जगह पूरा पैसा लगाने से बचें। इस विषय पर राहु-केतु गोचर 2026 का व्यापार पर असर और व्यापार सफलता की भविष्यवाणी उपयोगी हैं।
धन, बचत और कर्ज
गुरु दूसरे और ग्यारहवें भाव का स्वाभाविक कारक माना जाता है, यानी संचित धन और आय का। इसीलिए इस अंतर्दशा में आमदनी के नए स्रोत या बचत की आदत बनाने का मौका मिलता है। राहु के कारण खर्च भी अचानक और बड़े आकार में आ सकते हैं, खासकर दिखावे, वाहन या गैजेट पर। बजट बनाकर चलना सबसे सरल उपाय है। कर्ज से जुड़ी योजना के लिए कर्ज-मुक्ति की दशा और धन योग देखें, तथा धन की भविष्यवाणी भी पढ़ें।
विवाह, जीवनसाथी और रिश्ते
महिलाओं की कुंडली में गुरु को पति का कारक भी माना जाता है, और सभी की कुंडली में वह परिवार के बड़े-बुज़ुर्गों और विवाह की शुभता से जुड़ा है। इसलिए कई कुंडलियों में गुरु अंतर्दशा में रिश्ते की बात आगे बढ़ती है। राहु के कारण कभी-कभी परिवार की सहमति में देरी या अपेक्षाओं का टकराव भी दिखता है। फैसला लेने से पहले सातवाँ भाव, शुक्र और नवांश देखना आवश्यक है। मदद के लिए कुंडली में विवाह योग और विवाह में देरी के कारण पढ़ें, और कुंडली मिलान के लिए कुंडली मिलान देखें।
संतान और परिवार
गुरु को पुत्रकारक माना गया है, यानी संतान का प्रमुख कारक। इसलिए संतान की योजना, गर्भधारण की चर्चा या बच्चों की पढ़ाई जैसे विषय इस अंतर्दशा में अक्सर केंद्र में आते हैं। ज्योतिष का फल केवल संकेत देता है और स्वास्थ्य संबंधी निर्णय हमेशा चिकित्सक की सलाह से ही लेने चाहिए। पाँचवे भाव और उसके स्वामी की दशा-स्थिति साथ देखनी पड़ती है। विस्तार से समझने के लिए संतान जन्म की भविष्यवाणी और गुरु पुत्रकारक पर गाइड पढ़ें।
शिक्षा, शोध और ज्ञान
गुरु शिक्षा का सबसे बड़ा कारक है, इसलिए पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा, शोध या कोई नया कौशल सीखने के लिए यह अंतर्दशा अनुकूल मानी जाती है। राहु इसमें विदेश, तकनीक और ऑनलाइन माध्यम जोड़ सकता है। नतीजों में ध्यान भटकने का जोखिम भी रहता है, इसलिए नियमित समय-सारणी और मोबाइल पर सीमा रखना सहायक रहता है। विद्यार्थियों के लिए शिक्षा की ज्योतिषीय भविष्यवाणी और परीक्षा सफलता का सबसे अच्छा वर्ष और दशा उपयोगी हैं।
सेहत और जीवनशैली
परंपरा में गुरु को वसा, पाचन, मधुमेह जैसी प्रवृत्तियों और शरीर के विस्तार से जोड़ा जाता है, और राहु अनियमित दिनचर्या तथा अनजाने कारणों वाली परेशानियों से। इसलिए इस दौर में खान-पान, वज़न और नींद का संतुलन सबसे महत्वपूर्ण है। यह कोई चिकित्सकीय निदान नहीं है, केवल प्रवृत्ति का संकेत है, और लक्षण होने पर डॉक्टर से मिलना सर्वोपरि है। सामान्य जानकारी के लिए स्वास्थ्य की ज्योतिषीय भविष्यवाणी और फ्री हेल्थ कैलकुलेटर देखें।
मन, श्रद्धा और आध्यात्मिक झुकाव
गुरु श्रद्धा, धर्म और आंतरिक शांति का कारक है, और राहु मन में नए प्रश्न और असंतोष जगाता है। इस मेल में कई लोग गुरु, कथा, ध्यान या किसी आध्यात्मिक मार्ग की ओर आकर्षित होते हैं। कभी-कभी दिखावटी गुरुओं या बहुत तेज़ वादे करने वालों से धोखा खाने का जोखिम भी रहता है, इसलिए किसी पर भी आँख मूँदकर भरोसा न करें। मन की स्थिति समझने के लिए वैदिक ज्योतिष और मानसिक स्वास्थ्य और चंद्र-शनि-राहु की मानसिक स्वास्थ्य गाइड पढ़ें।
विदेश यात्रा और नए अवसर
राहु विदेश और अपरिचित जगहों का कारक है, और गुरु उच्च शिक्षा और लंबी यात्रा का। इसलिए पढ़ाई या काम के सिलसिले में विदेश जाने की बात इस अंतर्दशा में कई बार उठती है। नवें और बारहवें भाव की स्थिति इसका मुख्य आधार बनती है। कागज़ी प्रक्रिया, वीज़ा और एजेंट के मामले में केवल प्रमाणित स्रोतों पर भरोसा करें। विस्तार के लिए विदेश बसने के लिए राहु केतु और विदेश बसने की भविष्यवाणी पढ़ें।
गोचर का असर: दशा के साथ ग्रहों की चाल
दशा बताती है कि कौन सा ग्रह सक्रिय है, और गोचर बताता है कि उसका फल किस समय जाग्रत होगा। इसलिए गुरु अंतर्दशा में गुरु और राहु-केतु के चल रहे गोचर को साथ देखना चाहिए। जब गोचर का गुरु आपकी जन्म राशि या दशा-स्वामी के भावों को सहारा देता है, तो अच्छे संकेत जल्दी दिखते हैं। गोचर के लिए राहु-केतु गोचर 2027, गुरु गोचर 2027 और राहु-केतु गोचर की गाइड देखें।
किन संकेतों को अच्छा माना जाता है
इस अंतर्दशा में कई कुंडलियों में ये संकेत अच्छे माने जाते हैं: किसी बड़े या गुरु का मार्गदर्शन मिलना, पढ़ाई या प्रशिक्षण का अवसर, आय के स्रोत में बढ़ोतरी, परिवार में शुभ चर्चा, मन में स्पष्टता और पुराने मतभेदों का सुलझना। ये संकेत तब ज़्यादा भरोसेमंद होते हैं जब गुरु कुंडली में कारक और बलवान हो। बल जाँचने के लिए षड्बल क्या है पढ़ें और फ्री कुंडली स्ट्रेंथ कैलकुलेटर आज़माएँ।
किन संकेतों पर सावधान रहें
राहु के प्रभाव में ये संकेत ध्यान माँगते हैं: बहुत बड़े वादे करने वाले लोग, बिना जाँच का निवेश, सलाह पर अत्यधिक निर्भरता या उसकी अनदेखी, वज़न और पाचन में गड़बड़ी, और अचानक खर्च का बढ़ना। इनमें से कोई भी संकेत डर की वजह नहीं है, बल्कि सजग रहने की सूचना है। कमज़ोर ग्रह की पहचान के लिए फ्री कमज़ोर ग्रह खोजक और कुंडली में दोष की जाँच उपयोगी हैं।
डर-मुक्त उपाय: क्या करें और क्या न करें
इस अंतर्दशा के उपाय सरल, सस्ते और बिना डर के होते हैं। गुरुवार को पीले फल, चने की दाल या हल्दी का दान, शिक्षकों और बड़ों का सम्मान, किसी ज़रूरतमंद विद्यार्थी की पढ़ाई में मदद और पीपल में जल चढ़ाना परंपरा में सुझाए जाते हैं। किसी भी महँगे अनुष्ठान या डराने वाले दावे से दूर रहें। विस्तृत सूची के लिए राहु की महादशा के उपाय, फ्री उपाय कैलकुलेटर और गुरु पूर्णिमा का महत्व पढ़ें।
रत्न और दान: पुखराज पर क्या सोचें
गुरु का रत्न पुखराज माना जाता है, पर इसे बिना कुंडली देखे पहनना ठीक नहीं है। अगर गुरु आपकी कुंडली में कारक है और कमज़ोर है, तभी रत्न पर विचार किया जा सकता है। अगर गुरु पहले से बलवान है या अशुभ भाव का स्वामी है, तो रत्न नुकसान भी कर सकता है। दान का रास्ता अधिक सुरक्षित और सरल है। निर्णय के लिए पुखराज कैलकुलेटर, रत्न पहनने का सही तरीका और मज़बूत ग्रह को रत्न की ज़रूरत नहीं देखें।
मंत्र और दैनिक दिनचर्या
मंत्र का उद्देश्य मन को स्थिर करना है, किसी ग्रह को डराना नहीं। गुरुवार की सुबह स्नान के बाद ॐ बृहस्पतये नमः का शांत जप, पाँच या ग्यारह बार भी, काफ़ी माना जाता है। दिनचर्या में समय पर उठना, पढ़ने की एक नियमित आदत और रोज़ कुछ मिनट मौन रखना राहु की बेचैनी को शांत करता है। गणना के लिए कोई कठोर संख्या ज़रूरी नहीं है, अपनी सुविधा के अनुसार चलें। सामान्य मार्गदर्शन के लिए राहु महादशा के प्रभाव और उपाय पढ़ें।
आम भ्रम और सच्चाई
पहला भ्रम है कि गुरु अंतर्दशा हमेशा शुभ फल देती है, जबकि फल गुरु के भाव, स्वामित्व और बल पर निर्भर करता है। दूसरा भ्रम है कि राहु महादशा के सारे चरण कठिन होते हैं, जबकि हर अंतर्दशा का अपना अलग रंग होता है। तीसरा भ्रम है कि गुरु चांडाल योग का मतलब अनिवार्य नुकसान है, जबकि वह विचारों की परीक्षा का संकेत है। सही जानकारी के लिए राहु अंतर्दशा की उलझन के लक्षण और ग्रहों की पूरी गाइड देखें।
प्रत्यंतर दशा: 2.4 साल के भीतर छोटे चरण
गुरु अंतर्दशा के भीतर नौ प्रत्यंतर दशाएँ चलती हैं, और हर एक कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक रहती है। इसलिए एक ही अंतर्दशा में कभी बहुत सहज और कभी बेचैन दिन आ सकते हैं। प्रत्यंतर में गुरु और राहु का क्रम आने पर विचारों की गति तेज़ दिखती है, जबकि शनि या केतु का प्रत्यंतर आने पर धीमापन और आत्मचिंतन बढ़ता है। इन छोटे चरणों की सही तारीखें पता हों तो फैसलों का समय चुनना आसान हो जाता है। विस्तृत विधि के लिए प्रत्यंतर दशा कैलकुलेटर गाइड देखें।
अपनी गुरु अंतर्दशा की तारीख कैसे निकालें
दशा की गणना जन्म के चंद्र नक्षत्र से शुरू होती है, जहाँ कृत्तिका से जन्म नक्षत्र तक की गिनती को 9 से भाग देकर शेष से दशा स्वामी तय किया जाता है।[1] इसके बाद नक्षत्र का भोगा और शेष हिस्सा अनुपात से निकालकर महादशा की शुरुआत की तारीख मिलती है।[3] फिर 2.7 साल जोड़ने पर गुरु अंतर्दशा शुरू होती है और 5.1 साल पर खत्म होती है। हाथ से हिसाब कठिन लगे तो फ्री दशा कैलकुलेटर का उपयोग करें, और विधि के लिए विंशोत्तरी दशा कैसे निकालें, प्रत्यंतर दशा कैसे निकालें और जन्म नक्षत्र कैसे पता करें पढ़ें।
दशा-स्वामी का नक्षत्र और उसका महत्व
अंतर्दशा का फल पढ़ते समय केवल ग्रह का भाव और राशि नहीं, उसका नक्षत्र भी देखा जाता है। गुरु जिस नक्षत्र में बैठा है उसका स्वामी बताता है कि गुरु का फल किस ग्रह की ऊर्जा से रंगा होगा। उदाहरण के लिए, राहु के नक्षत्र में बैठा गुरु राहु जैसा तेज़ और अपरंपरागत फल दे सकता है, जबकि अपने ही नक्षत्र में वह अधिक शांत रहता है। इसलिए नक्षत्र की जानकारी भी बराबर ज़रूरी है। इसके लिए 27 नक्षत्रों के नाम, स्वामी और राशि और नक्षत्र गाइड पढ़ें।
सारांश और आगे का रास्ता
राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा 2.4 साल की वह अवधि है जो राहु की शुरुआती तीव्रता के बाद सलाह, शिक्षा और विस्तार का मौका लाती है। इसका फल आपकी कुंडली में गुरु की राशि, भाव, बल और राहु की स्थिति से तय होता है, इसलिए सामान्य लेख से आगे निजी जाँच ज़रूरी है। अन्य चरणों के लिए चंद्र अंतर्दशा, शुक्र अंतर्दशा, मंगल अंतर्दशा और केतु अंतर्दशा पढ़ें। अपनी तारीखें अभी निकालने के लिए फ्री दशा कैलकुलेटर खोलें।
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शब्दावली · Glossary
- महादशा
- विंशोत्तरी पद्धति में किसी ग्रह के नाम पर चलने वाला मुख्य लंबा कालखंड।
- अंतर्दशा
- महादशा के भीतर किसी दूसरे ग्रह की उप-अवधि, जिसे भुक्ति भी कहते हैं।
- विंशोत्तरी
- जन्म के चंद्र नक्षत्र पर आधारित 120 साल की दशा पद्धति।
- गुरु चांडाल योग
- कुंडली में गुरु और राहु का एक ही राशि में साथ आना, जिसमें विचार और विश्वास का संतुलन परखा जाता है।
- कारक
- वह ग्रह जो स्वाभाविक रूप से जीवन के किसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है।
- छाया ग्रह
- राहु और केतु के लिए प्रयुक्त शब्द, जो चंद्र-पथ के बिंदु हैं।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
वह्निभाज्जन्मभं यावद्।ह् या संख्या नवतष्टिता । शेषाद्दशाधिपो ज्ञेयस्तमारभ्य दशां नयेत्।ह्
— Brihat Parashara Hora Shastra, अध्याय 46 · श्लोक 13कृत्तिका से जन्म नक्षत्र तक की गिनती को 9 से भाग देने पर शेष से दशा का स्वामी जाना जाता है।
The Vimshottari lord is found by counting from Krittika to the birth nakshatra and dividing by nine, the remainder naming the dasha lord.
दशासमाः क्रमादेषां षड्।ह् दशाऽश्वा गजेन्दवः । नृपाला नवचन्द्राश्च नवचन्द्रा नगा नखाः
— Brihat Parashara Hora Shastra, अध्याय 46 · श्लोक 15नौ ग्रहों की दशा-अवधियाँ क्रम से निर्धारित बताई गई हैं, सूर्य के 6 वर्ष से शुक्र के 20 वर्ष तक।
The dasha years of the nine lords are laid down in fixed order, from the Sun at six years up to Venus at twenty.
दशामनां भयातघ्नं भभोगेन हृतं फलम्।ह् । दशाया भुक्तवर्षाद्य भोग्यं मानाद्।ह् विशोधितम्।ह्
— Brihat Parashara Hora Shastra, अध्याय 46 · श्लोक 16दशा का भोगा हुआ और शेष भाग नक्षत्र के तय किए गए अंश और उसके पूरे विस्तार के अनुपात से निकाला जाता है।
The elapsed and remaining portion of a dasha is found by the ratio of the nakshatra part already traversed to its full span.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा कितने साल की होती है?
राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा 2.4 साल, यानी करीब 2 साल 4 महीने 24 दिन की होती है। यह 18 गुणा 16 भाग 120 के हिसाब से निकलती है।
राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा कब शुरू होती है?
यह राहु महादशा शुरू होने के 2.7 साल बाद, यानी राहु की अपनी अंतर्दशा खत्म होते ही शुरू होती है और 5.1 साल पर खत्म होती है।
क्या राहु महादशा में गुरु अंतर्दशा अच्छी होती है?
इसे अक्सर राहु काल का अपेक्षाकृत सहारा देने वाला दौर माना जाता है, पर फल कुंडली में गुरु की राशि, भाव और दृष्टि पर निर्भर करता है। कोई एक जवाब सब पर लागू नहीं होता।
गुरु चांडाल योग हो तो क्या करें?
घबराएँ नहीं। पहले जाँचें कि गुरु और राहु किस राशि और भाव में हैं और कितने अंश पर हैं। फिर बड़ों की सलाह, शिक्षा और दान जैसे सरल उपाय अपनाएँ।
क्या गुरु अंतर्दशा में शादी के योग बनते हैं?
गुरु विवाह और संतान का कारक है, इसलिए कई कुंडलियों में यह दौर विवाह की बातचीत के लिए अनुकूल माना जाता है। फिर भी सातवाँ भाव, शुक्र और गोचर साथ देखना ज़रूरी है।
क्या इस दौर में पुखराज पहनना ज़रूरी है?
नहीं। रत्न तभी सोचें जब कुंडली में गुरु कारक हो और कमज़ोर हो। गलत रत्न उलटा असर कर सकता है, इसलिए पहनने से पहले कुंडली की जाँच करवाएँ।
गुरु अंतर्दशा के सरल उपाय क्या हैं?
गुरुवार को पीली चीज़ों का दान, बड़ों और शिक्षकों का सम्मान, पीपल में जल और गुरु मंत्र का शांत जप सरल उपाय माने जाते हैं। इनमें डरने जैसा कुछ नहीं है।
क्या इस दौर में नौकरी या व्यापार बदलना चाहिए?
बदलाव से पहले योजना, बचत और सलाह ज़रूरी है। गुरु सलाह का कारक है, इसलिए किसी अनुभवी व्यक्ति से बात करके फैसला लेना बेहतर रहता है।
अपनी गुरु अंतर्दशा की तारीख कैसे निकालें?
जन्म तारीख, समय और जगह भरकर फ्री दशा कैलकुलेटर से महादशा और अंतर्दशा की सटीक तारीखें निकाली जा सकती हैं।
क्या यह अंतर्दशा सबके लिए एक जैसा फल देती है?
नहीं। फल गुरु के भाव, स्वामित्व, राहु की स्थिति और चल रहे गोचर पर निर्भर करता है, इसलिए दो लोगों का अनुभव अलग हो सकता है।
यह भी देखें · See also
इस हब का मुख्य पेजराहु महादशा कितने साल की होती है? 18 वर्षसमूह: राहु महादशा में नौ अंतर्दशाओं का क्रम
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mahadashaराहु महादशा में शनि अंतर्दशा का फल
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श्रेणी: mahadasha · karma-destiny