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तुला राशि की शादी कब होगी: 2027 के योग

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect16 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

तुला राशि की शादी का समय सप्तम भाव मेष, उसके स्वामी मंगल, चल रही दशा और गोचर से तय होता है। 31 अक्टूबर 2026 से गुरु आपके ग्यारहवें भाव सिंह में आकर सप्तम भाव को देखता है, और 3 जून 2027 से शनि सप्तम में आता है। सही खिड़की कुंडली से जाँचें।

Deep Dive Analysis

तुला राशि की शादी कब होगी: सीधा और छोटा जवाब

तुला राशि की शादी की कोई एक तारीख़ या तय उम्र नहीं होती। विवाह की खिड़की तब बनती है जब सप्तम भाव मेष और उसके स्वामी मंगल का बल, चल रही दशा-अंतर्दशा और गुरु-शनि का गोचर एक ही दिशा में दिखें। आपके लिए 2026-27 में दो बातें ख़ास हैं: 31 अक्टूबर 2026 से गुरु ग्यारहवें भाव सिंह में आकर अपनी नौवीं दृष्टि से सप्तम भाव को देखता है, और 3 जून 2027 से शनि सप्तम भाव में प्रवेश करता है। इसलिए जवाब खिड़कियों में है, तारीख़ में नहीं। पूरी विधि शादी कब होगी: कुंडली से विवाह का समय में है और अपना नतीजा शादी कब होगी कैलकुलेटर से निकालें।

तुला चंद्र राशि का मतलब: लग्न नहीं, जन्म का चंद्रमा

यहाँ तुला राशि का अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जो आपके लग्न से अलग भी हो सकती है। गोचर चंद्र राशि से गिना जाता है, इसलिए पहले राशि कैलकुलेटर से पक्का करें कि आपकी चंद्र राशि तुला है। लग्न के लिए लग्न कैलकुलेटर और नक्षत्र के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर देखें, क्योंकि चित्रा के अंतिम दो पाद, पूरा स्वाति और विशाखा के पहले तीन पाद तुला में आते हैं और तीनों का स्वभाव अलग माना जाता है। इस पेज के सारे गोचर तुला चंद्र राशि मानकर लिखे हैं।

सप्तम भाव मेष और स्वामी मंगल: तुला के लिए विवाह का केंद्र

तुला से गिनने पर सातवाँ घर मेष है और उसका स्वामी मंगल है। वही मंगल आपके द्वितीय भाव वृश्चिक का भी स्वामी है, इसलिए विवाह का प्रश्न आपके लिए कुटुंब और वाणी से भी जुड़ता है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र के जायाभावफलाध्याय का चौथा श्लोक कहता है कि सप्तमेश शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो और बलवान हो तो जातक धनी, मानी और सुख-सौभाग्य वाला होता है[1]। यानी मंगल की राशि-स्थिति के साथ उस पर शुभ दृष्टि भी गिनी जाती है। गहराई के लिए कुंडली में विवाह योग और सप्तम भाव कमज़ोर हो तो देरी पढ़ें।

राशि-स्वामी शुक्र और सप्तम भाव का संबंध

तुला का स्वामी शुक्र है, यानी आपकी चंद्र राशि का स्वामी वही ग्रह है जो पुरुष के लिए पत्नी का कारक माना जाता है। जायाभाव का पंद्रहवाँ श्लोक कहता है कि लग्नेश बलवान होकर सप्तम स्थान से जुड़े तो जीवनसाथी गुणवान होता है और संतान-वंश बढ़ता है[2]। यह श्लोक लग्नेश की बात करता है, राशि-स्वामी की नहीं, इसलिए अगर आपका लग्न भी तुला है तो शुक्र की राशि, बल और मंगल से उसका संबंध साथ में देखना पड़ता है, क्योंकि शुक्र और मंगल का जुड़ाव आपकी कुंडली में रिश्ते की ऊर्जा को सीधे छूता है। दोनों की ताक़त कुंडली बल कैलकुलेटर और ग्रह बल कैलकुलेटर से जाँचें।

मंगल की स्थिति और मांगलिक दोष का सवाल

मंगल तुला के लिए सप्तमेश है, इसलिए उसकी जन्मकालीन स्थिति सबसे पहले देखी जाती है। मांगलिक दोष का प्रश्न तब उठता है जब मंगल लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश में हो, और फिर उसका बल, दृष्टि और परिहार भी गिने जाते हैं। सिर्फ़ इस स्थिति से शादी रोक देना ग़लत है। अपनी स्थिति मंगल दोष कैलकुलेटर से जाँचें और मांगलिक होने पर क्या करें में अगला कदम पढ़ें। मंगल को ज़्यादा विस्तार से समझने के लिए सप्तम भाव में मंगल दोष भी देखें।

शुक्र और गुरु: तुला की कुंडली में विवाह के कारक

पुरुष की कुंडली में पत्नी का कारक शुक्र और स्त्री की कुंडली में पति का कारक गुरु माना जाता है, यह परंपरा का सामान्य नियम है। तुला के लिए शुक्र स्वयं राशि-स्वामी है, इसलिए पुरुषों के लिए उसकी दशा-अंतर्दशा बारीकी से पढ़ी जाती है। स्त्रियों के लिए गुरु तृतीय और षष्ठ भाव का स्वामी है, जो सीधे विवाह के भाव नहीं हैं, इसलिए गुरु की दशा और गोचर को सप्तमेश मंगल के साथ मिलाकर देखना ज़रूरी हो जाता है। अंतर्दशा के हिसाब के लिए शुक्र अंतर्दशा में विवाह योग और गुरु महादशा: ज्ञान और विकास पढ़ें।

आज की गोचर तस्वीर: 19 अक्टूबर 2026

19 अक्टूबर 2026 को शनि मीन में वक्री है, यानी आपके छठे भाव में, लगभग 15.93 अंश पर, और 11 दिसंबर 2026 को मार्गी होगा। गुरु कर्क में है, यानी आपके दशम भाव में, और 31 अक्टूबर की दोपहर 12:02 बजे सिंह में, यानी एकादश भाव में, जाएगा। शुक्र आपकी राशि तुला में वक्री है, 6 नवंबर 2026 को कन्या में लौटता है और 14 नवंबर को मार्गी होता है। यह सब त्रिकाल वाणी के गोचर इंजन से Swiss Ephemeris पर निकाला गया है। विस्तृत तिथि-सूची शनि गोचर 2027 की तारीख़ें और गुरु गोचर 2027 में है।

शनि छठे भाव में: अभी सप्तम पर सीधा असर नहीं

गोचर परंपरा में शनि को चंद्र राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें स्थान में शुभ माना जाता है। मीन आपके लिए छठा भाव है, इसलिए अभी शनि का गोचर आपके पक्ष में गिना जाता है, और यह रोज़गार, ऋण और प्रतिस्पर्धा में अनुशासन देता है। शनि की तीसरी दृष्टि आपके अष्टम भाव वृषभ पर, सातवीं दृष्टि द्वादश भाव कन्या पर और दसवीं दृष्टि तृतीय भाव धनु पर पड़ती है, यानी सप्तम भाव सीधी दृष्टि में नहीं है। इसलिए 3 जून 2027 से पहले शनि विवाह के प्रश्न को सीधे नहीं छूता। इस दौर में अपनी आय और स्थिरता मज़बूत करना रिश्ते की बात का व्यावहारिक आधार देता है। गोचर की अलग स्थितियाँ शनि की ढैया किस राशि पर है में समझाई गई हैं।

गुरु का सिंह में आना: सप्तम भाव पर नौवीं दृष्टि

31 अक्टूबर 2026 को गुरु सिंह में आता है, जो तुला से ग्यारहवाँ भाव है। गोचर परंपरा में चंद्र राशि से ग्यारहवाँ स्थान गुरु के लिए शुभ गिना जाता है, और यहाँ से उसकी नौवीं दृष्टि मेष यानी आपके सप्तम भाव पर पड़ती है, पाँचवीं दृष्टि तृतीय भाव धनु पर और सातवीं दृष्टि पंचम भाव कुंभ पर। यानी विवाह भाव पर गुरु की सीधी शुभ दृष्टि बनती है, और पंचम पर दृष्टि प्रेम की भावना को भी सहारा देती है। 13 दिसंबर 2026 को गुरु वक्री होता है, इसलिए बातचीत शुरू होने के बाद निर्णय से पहले एक बार दोहराकर देखना बेहतर है। विस्तार के लिए जुपिटर ट्रांज़िट 2026 और तुला राशि के लिए गुरु गोचर 2026 देखें।

गुरु की वापसी और दूसरी खिड़की

25 जनवरी 2027 को गुरु वक्री चाल में सिंह से कर्क लौटता है, यानी एकादश से दशम भाव में। 13 अप्रैल 2027 को वह कर्क में मार्गी होता है और 26 जून 2027 को फिर सिंह में आकर 26 नवंबर 2027 तक रहता है। इसलिए सप्तम भाव पर गुरु की दृष्टि की दो खिड़कियाँ हैं: 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 और 26 जून से 26 नवंबर 2027। बीच के लगभग पाँच महीनों में गुरु दशम भाव में है, जहाँ वह करियर और सामाजिक स्थिति पर ज़्यादा बोलता है, और विवाह का प्रश्न नौकरी और स्थिरता के रास्ते से आता है। वक्री चाल का अर्थ 2027 के वक्री ग्रह में दिया है।

मंगल का गोचर: 12 नवंबर 2026 को एकादश भाव में

12 नवंबर 2026 की रात लगभग 8:19 बजे भारतीय समय पर सप्तमेश मंगल कर्क से सिंह में आता है, यानी आपके दशम से एकादश भाव में। गोचर परंपरा में मंगल को चंद्र राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में शुभ माना जाता है। आपके सप्तमेश का ग्यारहवें, यानी लाभ और मित्र-मंडली के भाव में जाना परिचय और बातचीत के लिए सहायक पढ़ा जा सकता है। यह विवाह की घोषणा नहीं, गोचर का एक अनुकूल संकेत है, जिसकी पुष्टि दशा और कुंडली से करनी चाहिए। मंगल के पूरे रास्ते के लिए मंगल गोचर 2026-27 देखें।

राहु-केतु का बदलाव: 5 दिसंबर 2026

राहु 5 दिसंबर 2026 को कुंभ छोड़कर मकर में और केतु सिंह छोड़कर कर्क में प्रवेश करता है। तुला के लिए राहु पंचम से चतुर्थ भाव में और केतु एकादश से दशम भाव में आता है। यह धुरी आपके सप्तम भाव से सीधे नहीं टकराती, पर चतुर्थ-दशम की धुरी घर और करियर के बीच खिंचाव दिखा सकती है, जो विवाह की बातचीत में रहने की जगह, नौकरी की जगह या परिवार की अपेक्षाओं के रूप में आता है। यह गोचर का प्रचलित पठन है, कोई श्लोक नहीं। इसलिए रिश्ते की बात में स्थान और काम का सवाल पहले साफ़ कर लें। विस्तार राहु-केतु गोचर 2027 में पढ़ें।

3 जून 2027: शनि का सप्तम भाव मेष में प्रवेश

3 जून 2027 को सुबह लगभग 5:28 बजे शनि मीन से मेष में आता है, यानी आपके सप्तम भाव में। गोचर परंपरा में चंद्र राशि से सातवें स्थान के शनि को कंटक शनि कहा जाता है, और माना जाता है कि वह साझेदारी और जीवनसाथी के विषय में परीक्षा, देरी या गंभीरता लाता है। 9 अगस्त 2027 को वह मेष में वक्री होता है, 20 अक्टूबर 2027 को मीन में लौटता है, 24 दिसंबर को मार्गी होता है और 23 फ़रवरी 2028 को फिर मेष में जाता है। सातवें भाव के शनि की सातवीं दृष्टि आपकी चंद्र राशि तुला पर पड़ती है। इसका अर्थ विवाह का रुकना नहीं, निर्णय का धीमा और परिपक्व होना है। विस्तार के लिए 2027 के अशुभ राशि और कंटक शनि पढ़ें।

डबल ट्रांजिट: 26 जून से 20 अक्टूबर 2027 की खिड़की

26 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 के बीच तुला के लिए डबल ट्रांजिट बनता है: शनि सप्तम भाव मेष में बैठा है और गुरु सिंह में लौटकर अपनी नौवीं दृष्टि से उसी मेष को देख रहा है। विवाह के प्रश्न में इसे सबसे मज़बूत गोचर संकेतों में गिना जाता है, क्योंकि दोनों बड़े ग्रह एक ही भाव पर जुड़ते हैं। इसी अवधि में शनि 9 अगस्त को वक्री भी होता है, इसलिए पूरा समय सीधी रेखा नहीं, पर परिपक्व बातचीत का है। इसे वादा न समझें, यह खिड़की है, और दशा के विवाह से जुड़े होने पर ही ठोस रूप लेती है। विधि शादी कब होगी: कुंडली से विवाह का समय में बताई गई है।

क्या सातवाँ शनि डरावना है

कंटक शनि नाम सुनकर घबराने की ज़रूरत नहीं। यह गोचर की एक व्यावहारिक पहचान है, कोई अलग दोष नहीं। जब शनि चंद्र राशि से चौथे, सातवें या दसवें स्थान में आता है, तो उस भाव से जुड़े विषय में धीमी रफ़्तार और अधिक परख दिखती है। तुला के लिए यह 3 जून 2027 से मेष में शनि है, और उसी समय गुरु की सहायक दृष्टि भी मिलती है। इसलिए इस गोचर को डर की तरह नहीं, तैयारी के संकेत की तरह पढ़ें: रिश्ते में पारदर्शिता, काम और घर की बात पहले, तारीख़ बाद में। शनि के फल का संतुलित विवरण क्या साढ़ेसाती हमेशा बुरी होती है में है।

महादशा-अंतर्दशा: तुला के लिए मंगल सबसे पहले

तुला के लिए मंगल सप्तमेश और द्वितीयेश दोनों है, इसलिए मंगल की महादशा-अंतर्दशा सबसे पहले जाँचने लायक है। इसके अलावा शुक्र की दशा, और मंगल से संबंधित ग्रहों की अंतर्दशाएँ भी विवाह की सक्रियता दिखा सकती हैं। जिस ग्रह का संबंध सप्तम भाव, उसके स्वामी, शुक्र या गुरु से हो, उसकी दशा विवाह की संभावना जगाती है। अपनी दशा दशा कैलकुलेटर से निकालें और दशा-प्रत्यंतर से समय की खिड़की में पढ़ें। दशा अनुकूल न हो तो गोचर केवल परिचय तक रह सकता है, और अनुकूल हो तो गोचर तारीख़ की ओर बढ़ाता है।

नवांश D9 में मंगल और शुक्र

नवांश D9 में मंगल और शुक्र की राशि देखें। जन्म कुंडली में मंगल कठिन स्थिति में दिखे पर नवांश में अपनी या उच्च राशि में हो, तो पठन नरम पड़ता है। मंगल मेष और वृश्चिक में अपनी राशि में और मकर में उच्च का होता है। नवांश की गणना कठिन है, इसलिए कुंडली जन्म कुंडली कैलकुलेटर में खोलें और बल कुंडली बल कैलकुलेटर से परखें। जिस रिश्ते की बात चल रही हो उसका नवांश भी साथ देखना अच्छा रहता है, क्योंकि केवल राशि से शादी का समय बताना अधूरा है।

तुला में विवाह में देरी के सामान्य कारण

देरी का अर्थ इनकार नहीं है। तुला राशि वालों में देर के कारण आम तौर पर ये दिखते हैं: सप्तमेश मंगल का कठिन स्थिति में होना, शुक्र पर शनि या राहु-केतु का असर, चल रही दशा का विवाह से दूर रहना, और करियर, आय तथा परिवार की अपेक्षाओं जैसे व्यावहारिक कारण। पहले तीन कुंडली से जाँचे जाते हैं और अंतिम आपके अपने हालात से। विस्तार के लिए सप्तम भाव कमज़ोर हो तो शादी में देरी, लड़के की शादी नहीं हो रही और पितृ दोष और विवाह में देरी पढ़ें।

शादी की उम्र: ग्रंथ में एक आयु नहीं, योग के साथ वर्ष

तुला राशि के लिए शादी की कोई एक उम्र ग्रंथ में नहीं दी गई। बृहत् पराशर में कुछ योगों के साथ वर्ष गिनाए गए हैं, जैसे शुक्र द्वितीय भाव में और सप्तमेश एकादश भाव में हो तो दसवें या सोलहवें वर्ष में प्रायः विवाह बताया गया है[3]। एक अन्य योग में शुक्र लग्न से केंद्र में हो और उससे सातवें स्थान में शनि हो तो बारहवें या उन्नीसवें वर्ष में प्रायः विवाह कहा गया है[4]। दूसरे योग में शनि की सप्तम स्थिति आपके 2027 के गोचर जैसी लगती है, पर वह जन्म की स्थिति का नियम है, गोचर का नहीं। ये पुरानी सामाजिक आयु-गणनाएँ हैं, इसलिए आज इन्हें योग की बनावट की तरह पढ़ें। शादी की उम्र का भ्रम विस्तार से बताता है।

27 से 33 वर्ष के बीच विवाह: ग्रंथ क्या कहता है

आजकल अधिकतर लोगों का विवाह पढ़ाई और करियर के बाद होता है, इसलिए 27 से 33 की आयु का प्रश्न ज़्यादा उठता है। बृहत् पराशर में भाग्य भाव से सातवें स्थान में शुक्र और उससे सातवें में सप्तमेश हो तो तीसवें या सत्ताईसवें वर्ष में विवाह कहा गया है[5]। यह उदाहरण बताता है कि ग्रंथ में भी विवाह के अलग-अलग काल अलग योग से बनते हैं, और देर से विवाह कोई विसंगति नहीं है। योग को अपनी कुंडली में परखने के लिए कुंडली में विवाह योग पढ़ें, परिवार की चिंता के लिए लड़के की शादी नहीं हो रही देखें, और स्थिति जन्म कुंडली कैलकुलेटर से जाँचें।

प्रेम विवाह के संकेत: पंचम भाव कुंभ

तुला के लिए पंचम भाव कुंभ है, जहाँ राहु 5 दिसंबर 2026 तक है, और 31 अक्टूबर 2026 से गुरु की सातवीं दृष्टि वहीं पड़ती है। पंचम का सप्तम से संबंध प्रेम को विवाह की ओर ले जाने का संकेत माना जाता है। राहु की उपस्थिति में भ्रम या बढ़ी हुई अपेक्षाएँ आ सकती हैं, और गुरु की दृष्टि उन्हें संतुलित करने वाली मानी जाती है। इसलिए जिनका रिश्ता पहले से है, उनके लिए ये पाँच हफ़्ते रिश्ते को खुली बातचीत से स्पष्ट करने का मौक़ा हैं। अपना झुकाव प्रेम या अरेंज मैरिज कैलकुलेटर से देखें और लव मैरिज और कुंडली मिलान पढ़ें।

कुंडली मिलान: तुला के लिए क्या देखें

रिश्ता पक्का करने से पहले कुंडली मिलान कराएँ, पर याद रखें कि ऊँचे गुण अंक अकेले पूरा फ़ैसला नहीं करते। तुला के लिए नाड़ी और भकूट के साथ मंगल की स्थिति सबसे पहले देखी जाती है, क्योंकि वही सप्तमेश है। दोनों कुंडलियों की दशाओं का तालमेल भी जाँचें, ताकि एक का अनुकूल काल दूसरे के कठिन काल से न टकराए। शुरुआत में 36 गुण मिलान का तर्क जानें, उसके बाद जन्म तारीख़ से कुंडली मिलान करें। मंगल दोष की चिंता हो तो मांगलिक और गैर-मांगलिक का विवाह देखें।

शुक्रवार का उपाय: राशि-स्वामी शुक्र के लिए पाँच पंक्तियाँ

क्या करें: शुक्रवार की शाम घर में एक साफ़ कोना चुनें, वहाँ सफ़ेद फूल या चावल रखें और दो मिनट शांत बैठें। कब: हर शुक्रवार सूर्यास्त के आसपास। कितने का: बिना खर्च, या चाहें तो दस-बीस रुपये के फूल। कितने दिन: लगातार 11 शुक्रवार। आपके लिए क्यों: शुक्र आपकी राशि का स्वामी है, और रिश्ते की ऊर्जा को दिनचर्या में याद रखने का यह सबसे सरल तरीक़ा है। सावधानी: कोई महँगा रत्न या अनुष्ठान न ख़रीदें, और हीरे जैसा रत्न पहनना हो तो पहले क्या मुझे हीरा पहनना चाहिए से जाँच लें।

मंगलवार का उपाय: सप्तमेश मंगल के लिए पाँच पंक्तियाँ

क्या करें: मंगलवार की सुबह किसी हनुमान मंदिर में या घर पर पाँच मिनट सुंदरकांड की कोई एक चौपाई पढ़ें या शांत बैठकर ध्यान करें। कब: हर मंगलवार सुबह नौ बजे से पहले। कितने का: मुफ़्त। कितने दिन: लगातार 9 मंगलवार। आपके लिए क्यों: मंगल आपका सप्तमेश है, और संयम तथा साहस दोनों की यह साधना विवाह के प्रश्न में मन की स्थिरता देती है। सावधानी: मूँगा बिना जाँच के न पहनें, पहले क्या मुझे मूँगा पहनना चाहिए से देखें, और कोई कठिन व्रत न करें।

शनिवार का संयम: सप्तम भाव में आने वाले शनि की तैयारी

क्या करें: शनिवार की शाम एक दीपक जलाएँ और अपने रिश्ते या परिवार के किसी एक वादे को समय पर निभाने का संकल्प लें। कब: हर शनिवार सूर्यास्त के बाद। कितने का: मुफ़्त, केवल दीपक का तेल। कितने दिन: लगातार 19 शनिवार। आपके लिए क्यों: 3 जून 2027 से शनि आपके सप्तम भाव में आता है, और वादे निभाने का अभ्यास उसी भाव की भाषा है। सावधानी: लंबा पाठ या कठिन उपवास न अपनाएँ, क्योंकि जो नियम टूट जाए वह उपाय नहीं रहता। शनि के बारे में डर की जगह शनि की ढैया किस राशि पर है में तथ्य पढ़ें।

तुला राशि के बारे में आम मिथक

पहला मिथक: तुला राशि वाले संतुलन के चक्कर में शादी टालते हैं। कोई ग्रंथ राशि के आधार पर आचरण या आयु तय नहीं करता। दूसरा मिथक: सातवें भाव में शनि आए तो विवाह नहीं होता। कंटक शनि केवल गति धीमी और परख बढ़ाता है, और 26 जून से 20 अक्टूबर 2027 के बीच गुरु की दृष्टि इसे सहारा भी देती है। तीसरा मिथक: मंगल सप्तमेश हो तो हर तुला मांगलिक है। मांगलिक दोष जन्म के भाव से देखा जाता है। चौथा मिथक: गुरु की दृष्टि का मतलब शादी पक्की। गोचर खिड़की देता है, वादा दशा देती है। क्या मंगल दोष असली है और मंगल दोष के मिथक देखें।

परिवार क्या करें और क्या न करें

परिवार के लिए तीन बातें काम की हैं। पहली, रिश्ते की चर्चा में लड़के या लड़की की अपनी राय को पहले जगह दें और कुंडली को बाद में खोलें। दूसरी, जल्द शादी की गारंटी या महँगे अनुष्ठान की माँग करने वाले किसी व्यक्ति को पैसा न दें। तीसरी, शुभ तिथि चुनने के लिए विवाह मुहूर्त 2027 और नवंबर 2026 के विवाह मुहूर्त देखें। रिश्ता अचानक तय करने का दबाव आए तो चट मंगनी पट विवाह के उपाय ज़रूर पढ़ें।

अपनी कुंडली से सही समय कैसे निकालें

तीन चरण पर्याप्त हैं। पहले क़दम में जन्म की तारीख़, समय और स्थान भरकर जन्म कुंडली बनाएँ। दूसरा, दशा कैलकुलेटर में अगली दो अंतर्दशाओं को देखें और पता करें कि उनमें मंगल, शुक्र, गुरु या सप्तम भाव का संबंध है या नहीं। तीसरा, शादी कब होगी कैलकुलेटर का परिणाम इस पेज की गुरु-शनि की तिथियों से मिलाएँ, ख़ासकर 26 जून से 20 अक्टूबर 2027 की खिड़की से। सटीक जन्म-समय से ही भरोसेमंद नतीजा मिलता है, और समय पर संदेह हो तो नक्षत्र कैलकुलेटर से कम से कम चंद्र नक्षत्र जान लें।

हम क्या नहीं कह सकते

शादी की पक्की तारीख़ कोई नहीं बता सकता, हम भी नहीं, इसलिए ऐसा दावा करने वाले से सावधान रहें। हम यह भी नहीं कह सकते कि शनि का सप्तम में आना विवाह को रोक देगा। इस पेज की गोचर तिथियाँ त्रिकाल वाणी के गणना-इंजन से हैं, पर सभी तुला चंद्र राशि वालों पर उनका असर एक जैसा नहीं होता, क्योंकि हर किसी की दशा और कुंडली अलग है। हमने केवल ऊपर दिए श्लोकों का हवाला दिया है और उनका अर्थ सरल भाषा में अपने शब्दों में रखा है। संदेह बचे तो शादी कब होगी का निःशुल्क परिणाम से अपनी कुंडली पर सीधा उत्तर लें।

इस मार्गदर्शन के बारे में: लेखक और स्रोत

यह मार्गदर्शन रोहित गुप्ता, Chief Vedic Architect, Trikaal Vaani की कलम से है, जिन्हें पराशरी ज्योतिष में 16 वर्ष से अधिक का अनुभव है। गोचर तिथियाँ Swiss Ephemeris पर आधारित हमारे इंजन से निकाली गई हैं, जबकि शास्त्रीय हवाले बृहत् पराशर होरा शास्त्र के जायाभावफलाध्याय से हैं। मूल बातें समझनी हों तो कुंडली कैसे काम करती है और ज्योतिष में बारह भाव पढ़ें।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

सप्तम भाव
कुंडली का सातवाँ घर, जो विवाह और साझेदारी का भाव है।
सप्तमेश
सातवें भाव का स्वामी ग्रह, जिसकी राशि और बल से विवाह के संकेत पढ़े जाते हैं।
डबल ट्रांजिट
गुरु और शनि का एक साथ किसी भाव या उसके स्वामी को छूना, जिसे समय की मज़बूत खिड़की माना जाता है।
कंटक शनि
चंद्र राशि से चौथे, सातवें या दसवें स्थान में शनि का गोचर, जिसे गोचर परंपरा परख और धीमी गति से जोड़ती है।
वक्री
ग्रह की पीछे की ओर प्रतीत होने वाली चाल।
नवांश
राशि का नौवाँ विभाजन यानी D9 कुंडली, जो विवाह की बारीक जाँच के काम आती है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    जायाधीशः शुभैर्युक्तो दृष्टो वा बलसंयुतः । तदा जातो धनी मानी सुखसौभाग्यसंयुतः
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 4

    सप्तमेश शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट और बलवान हो तो जातक धनी, मानी और सुख-सौभाग्य से युक्त होता है।

    If the 7th lord is joined or aspected by benefics and is strong, the native becomes wealthy, respected and blessed with happiness and good fortune.

  2. [2]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    लग्नेशो बलसंयुक्तः कलत्रस्थानसंयुतः । तद्।ह्भार्या सद्।ह्गुणोपेता पुत्रपौत्रप्रवर्धिनी
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 15

    बलवान लग्नेश सप्तम स्थान से जुड़ा हो तो जीवनसाथी गुणवान होता है और संतान-वंश बढ़ता है।

    A strong lagna lord connected with the 7th house gives a virtuous spouse and thriving children and grandchildren.

  3. [3]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    कुटुम्बस्थानगे शुक्रे दारेशे लाभराशिगे । दशमे षोडशाऽब्दे च विवाहः प्रायशो भवेत्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 24

    शुक्र द्वितीय भाव में और सप्तमेश एकादश भाव में हो तो प्रायः दसवें या सोलहवें वर्ष में विवाह कहा गया है।

    Venus in the 2nd house and the 7th lord in the 11th: marriage generally in the 10th or 16th year.

  4. [4]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    लग्नात् केन्द्रगते शुक्रे तस्मात् कामगते शनौ । द्वादशैकोनविंशे च विवाहः प्रायशो भवेत्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 26

    शुक्र लग्न से केंद्र में और शुक्र से सप्तम में शनि हो तो प्रायः बारहवें या उन्नीसवें वर्ष में विवाह कहा गया है।

    Venus in a kendra from the lagna and Saturn in the 7th from Venus: marriage generally in the 12th or 19th year.

  5. [5]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    भाग्याज्जामित्रगे शुक्रे तद्द्यूने दारनायके । त्रिंशे वा सप्तविंशाब्दे विवाहं लभते नरः
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 34

    भाग्य भाव से सप्तम में शुक्र और उससे सप्तम में सप्तमेश हो तो तीसवें या सत्ताईसवें वर्ष में विवाह कहा गया है।

    Venus in the 7th from the 9th house and the 7th lord in the 7th from there: marriage in the 30th or 27th year.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

तुला राशि की शादी कब होगी?

कोई एक तारीख़ तय नहीं होती। सप्तम भाव मेष और मंगल की स्थिति, चल रही दशा और गुरु-शनि का गोचर मिलकर खिड़की बनाते हैं। 31 अक्टूबर 2026 से गुरु सप्तम भाव को देखता है और 3 जून 2027 से शनि सप्तम में आता है।

तुला राशि के लिए सप्तम भाव कौन सा है?

तुला से सातवाँ भाव मेष है और उसका स्वामी मंगल है। विवाह की जाँच में इसी भाव और मंगल की स्थिति को सबसे पहले देखा जाता है।

क्या तुला राशि के लिए शनि का सप्तम में आना बुरा है?

नहीं, इसे डर की तरह न पढ़ें। 3 जून 2027 से शनि मेष में आता है, जिसे गोचर परंपरा में कंटक शनि कहती है, पर इसका अर्थ गति धीमी और परख अधिक होना है। 26 जून से 20 अक्टूबर 2027 के बीच गुरु की दृष्टि भी उसी भाव पर रहती है।

तुला राशि के लिए डबल ट्रांजिट कब बनता है?

26 जून 2027 से 20 अक्टूबर 2027 के बीच शनि सप्तम भाव मेष में है और गुरु सिंह से अपनी नौवीं दृष्टि से उसी भाव को देखता है। यह सबसे मज़बूत गोचर खिड़की मानी जाती है, पर दशा की पुष्टि ज़रूरी है।

गुरु सिंह में आने पर तुला राशि को क्या मिलता है?

31 अक्टूबर 2026 से गुरु आपके ग्यारहवें भाव में आता है, जिसे गोचर परंपरा शुभ मानती है। उसकी नौवीं दृष्टि सप्तम भाव पर और सातवीं दृष्टि पंचम भाव पर रहती है, यानी विवाह और प्रेम दोनों को सहारा मिलता है।

क्या तुला राशि वाले मांगलिक होते हैं?

राशि से मांगलिक दोष तय नहीं होता। मंगल तुला के लिए सप्तमेश है, इसलिए जन्म कुंडली में उसकी स्थिति पहले देखी जाती है। मंगल दोष कैलकुलेटर से अपनी कुंडली की स्थिति एक बार देख लें।

तुला राशि की स्त्री के लिए कौन सा ग्रह देखें?

स्त्री की कुंडली में परंपरा पति के कारक के रूप में गुरु को देखती है। तुला के लिए गुरु तृतीय और षष्ठ भाव का स्वामी है, इसलिए गुरु की दशा और गोचर को सप्तमेश मंगल के साथ मिलाकर देखें।

तुला राशि के पुरुष के लिए कौन सा ग्रह देखें?

पुरुष की कुंडली में पत्नी का कारक शुक्र माना जाता है और तुला का राशि-स्वामी भी शुक्र है। शुक्र की दशा-अंतर्दशा और उसकी राशि-स्थिति पहले देखें।

अपनी शादी का सही समय कैसे पता करें?

जन्म तारीख़, समय और स्थान से कुंडली बनाएँ, अगली दो अंतर्दशाओं में मंगल, शुक्र, गुरु या सप्तम भाव का संबंध देखें और फिर गोचर की खिड़की से मिलाएँ। निःशुल्क शादी कब होगी कैलकुलेटर यह क्रम दिखाता है।

क्या उपाय करने से शादी जल्दी हो जाती है?

कोई उपाय समय की गारंटी नहीं देता। शुक्रवार, मंगलवार और शनिवार के सरल नियम केवल अनुशासन और मन की स्थिरता देते हैं, और इन्हें बिना ख़र्च के किया जा सकता है।

यह भी देखें · See also

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समूह: राशि अनुसार शादी कब होगी

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