
राशि अनुकूलता
तुला और कन्या राशि की जोड़ी को राशि स्तर पर 36 में से 19 गुण (लगभग 53%) मिलते हैं, यानी स्वीकार्य मिलान। कन्या तुला से बारहवीं राशि है, इसलिए द्विर्द्वादश भकूट बनता है, पर राशि-स्वामी शुक्र और बुध आपस में मित्र हैं, जो इस भकूट दोष की शास्त्रीय छूट है। असली गुण जानने के लिए पूरा कुंडली मिलान कराएँ।
तुला और कन्या के बीच भावनात्मक जुड़ाव सौम्य पर कुछ सतर्क होता है। तुला सौहार्द, प्रशंसा और भावनात्मक संतुलन चाहती है, जबकि कन्या व्यावहारिक, विश्लेषणात्मक और कम अभिव्यंजक होती है। शुक्र की कोमलता बुध की तार्किकता से मिलती है, इसलिए प्रेम शब्दों से कम और कार्यों से अधिक प्रकट होता है। कन्या की आलोचनात्मक प्रवृत्ति तुला की संवेदनशीलता को आहत कर सकती है, जबकि तुला की अनिर्णयता कन्या को बेचैन कर सकती है। यदि कन्या कोमल शब्द चुने और तुला कन्या के व्यावहारिक प्रेम को समझे, तो भावनात्मक दूरी घटती है और रिश्ता स्थिर तथा सहयोगी बनता है।
संवाद में दोनों बौद्धिक और तर्कशील हैं, क्योंकि शुक्र-बुध मित्रता विचारों के आदान-प्रदान को सहज बनाती है। तुला विषयों को संतुलन और न्याय की दृष्टि से देखती है, जबकि कन्या विस्तार, तथ्य और सुधार पर ध्यान देती है। चर्चाएँ अक्सर रोचक और रचनात्मक रहती हैं। समस्या तब आती है जब कन्या की आलोचना तीखी हो जाए या तुला निर्णय टालती रहे। कन्या को सुझाव कोमलता से देना चाहिए और तुला को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। जब दोनों एक-दूसरे की संवाद-शैली का सम्मान करते हैं, तो उनका संवाद समस्याओं को सुलझाने का सशक्त माध्यम बन जाता है।
इस जोड़ी की ताकत है बौद्धिक तालमेल, साझा सौंदर्यबोध और व्यावहारिक सहयोग। शुक्र-बुध मित्रता दोनों को विचारों, कला और सुव्यवस्था में जोड़ती है। तुला रिश्ते में सौहार्द और सौंदर्य लाती है, जबकि कन्या अनुशासन, सेवा-भाव और व्यवस्था जोड़ती है। दोनों परिष्कार और स्वच्छता को महत्व देते हैं, जिससे घर सुसंगठित और सुंदर रहता है। पृथ्वी तत्व कन्या से तुला को स्थिरता मिलती है, और वायु तत्व तुला से कन्या को हल्कापन। मिलकर ये एक सुसंस्कृत, समझदार और परस्पर सहयोगी संबंध बनाते हैं जिसमें व्यावहारिकता और कोमलता दोनों रहती हैं।
मुख्य चुनौती स्वभावगत भिन्नता की है। कन्या की पूर्णतावादी आलोचना तुला के सौहार्द-प्रेमी मन को चोट दे सकती है, जबकि तुला की अनिर्णयता और विलासिता कन्या की व्यावहारिकता से टकराती है। वायु-पृथ्वी तत्वों का मेल स्वाभाविक रूप से सहज नहीं — एक उड़ान चाहता है, दूसरा ज़मीन। भावनात्मक अभिव्यक्ति में अंतर दूरी ला सकता है। आर्थिक दृष्टिकोण भी भिन्न है — तुला सौंदर्य पर खर्च चाहती है, कन्या बचत पर। यदि दोनों धैर्य रखें, आलोचना को सुझाव में बदलें और एक-दूसरे की प्रेम-भाषा समझें, तो ये अंतर पूरकता में बदल जाते हैं।
तुला और कन्या का प्रेम धीरे-धीरे, समझ और सम्मान के साथ पनपता है। शुक्र-प्रेरित तुला रोमांस में सौंदर्य, प्रशंसा और कोमलता चाहती है, जबकि बुध-प्रेरित कन्या प्रेम को व्यावहारिक सेवा और विश्वसनीयता से प्रकट करती है। शुक्र-बुध मित्रता बौद्धिक आकर्षण को सहज बनाती है, पर भावनात्मक अभिव्यक्ति में अंतर रहता है। तुला को खुली प्रशंसा चाहिए, कन्या संयमित रहती है। यदि कन्या स्नेह को शब्दों में ढाले और तुला कन्या के मौन प्रेम को पहचाने, तो रोमांस परिपक्व, स्थिर और परस्पर सहयोगी बनता है, जिसमें दिखावे से अधिक गहराई होती है।
विवाह में यह जोड़ी सुव्यवस्थित, सुसंस्कृत और परस्पर सहयोगी गृहस्थी बनाती है। तुला घर में सौहार्द और सौंदर्य लाती है, जबकि कन्या अनुशासन, बचत और व्यवस्था जोड़ती है। पृथ्वी तत्व की कन्या रिश्ते को स्थिरता देती है, जो तुला की चंचलता को संतुलित करती है। दीर्घकालिकता के लिए कन्या को आलोचना कम करनी होगी और तुला को निर्णय में दृढ़ता लानी होगी। साझा बौद्धिकता और परिष्कार रिश्ते को टिकाऊ बनाते हैं। आपसी सम्मान, धैर्य और एक-दूसरे की प्रेम-भाषा की समझ से यह विवाह वर्षों तक संतुलित रहता है।
घनिष्ठता में यह जोड़ी कोमल, विचारशील और क्रमिक रूप से गहराती है। शुक्र तुला को सौंदर्य और संवेदना देता है, जबकि बुध कन्या को सजगता और बौद्धिकता। आरंभिक आकर्षण मानसिक तालमेल से जन्मता है। तुला को रोमांटिक वातावरण और कोमलता चाहिए, जबकि कन्या को विश्वास और स्वच्छता। कन्या आरंभ में संकोची हो सकती है, पर विश्वास बढ़ने पर समर्पित होती है। यदि तुला धैर्य रखे और कन्या खुलकर भावनाएँ साझा करे, तो दोनों के बीच एक शांत, गहरा और परस्पर सम्मानजनक जुड़ाव बनता है जो समय के साथ और मधुर होता है।
विश्वास इस जोड़ी की मज़बूत नींव है, क्योंकि दोनों ईमानदारी और विश्वसनीयता को महत्व देते हैं। कन्या स्वभाव से निष्ठावान और कर्तव्यपरायण होती है, जबकि तुला निष्पक्षता और पारदर्शिता चाहती है। शुक्र-बुध मित्रता आपसी समझ को सहज बनाती है। हालाँकि कन्या की संदेहशील प्रवृत्ति और तुला की सबको खुश रखने की आदत कभी-कभी शंका जगा सकती है। खुला संवाद और स्पष्टता इसे दूर रखती है। एक बार विश्वास स्थापित हो जाए, तो दोनों एक-दूसरे के प्रति समर्पित और स्थिर रहते हैं, जिससे रिश्ता सुरक्षित और भरोसेमंद बनता है।
जीवनशैली में दोनों परिष्कार और गुणवत्ता को महत्व देते हैं, पर खर्च का दृष्टिकोण भिन्न है। शुक्र तुला को सौंदर्य और विलासिता की ओर खींचता है, जबकि बुध कन्या को व्यावहारिकता, बचत और सुनियोजित व्यय की ओर। यह अंतर आरंभ में टकराव दे सकता है, पर संतुलित होने पर पूरकता बनता है — तुला जीवन में सौंदर्य लाती है, कन्या वित्तीय अनुशासन। संयुक्त बजट और स्पष्ट प्राथमिकताएँ अपनाने से दोनों समृद्ध और संतुष्ट जीवन बना सकते हैं। कन्या की योजना और तुला का सौंदर्यबोध मिलकर एक सुव्यवस्थित, सुरुचिपूर्ण जीवनशैली रचते हैं।
पारिवारिक जीवन में यह जोड़ी व्यवस्था, मूल्य और देखभाल लाती है। तुला घर में सौहार्द और सौंदर्य बनाए रखती है, जबकि कन्या स्वच्छता, अनुशासन और सेवा-भाव जोड़ती है। दोनों संतान को शिक्षा, शिष्टाचार और व्यावहारिक कौशल सिखाने में विश्वास रखते हैं। बुध का प्रभाव बच्चों में बुद्धि और संवाद-कौशल बढ़ाता है, जबकि शुक्र कला और सौंदर्य की रुचि देता है। कन्या को बच्चों के प्रति अति-आलोचना से बचना चाहिए और तुला को सुसंगत अनुशासन बनाए रखना चाहिए। यह संतुलित वातावरण बच्चों के लिए पोषक और मूल्य-आधारित सिद्ध होता है।
तुला वायु तत्व व चर राशि है और इसका स्वामी शुक्र है; कन्या पृथ्वी तत्व व द्विस्वभाव राशि है और इसका स्वामी बुध है। शुक्र और बुध परस्पर मित्र हैं, जिससे बौद्धिक और कलात्मक तालमेल स्वाभाविक रूप से अच्छा रहता है। हालाँकि वायु-पृथ्वी तत्वों का मेल सहज नहीं — वायु को स्वतंत्रता और विचार चाहिए, पृथ्वी को स्थिरता और व्यावहारिकता। इस संतुलन को सजगता से साधना पड़ता है। ग्रह-स्तर पर मित्रता रिश्ते को सहयोगी बनाती है, जबकि तत्व-अंतर को धैर्य और समझ से पाटना पड़ता है। कुल मिलाकर यह एक समझदार, परिश्रमी और परस्पर सहयोगी संबंध है।
शास्त्रीय कुंडली मिलान आठ कूट देखता है, वर्ण और वश्य से लेकर भकूट और नाड़ी तक, और हर अगला कूट पिछले से भारी होता है।[1] राशि स्तर पर इस जोड़ी को दो कूट सबसे ज़्यादा तय करते हैं। ग्रह मैत्री में फलदीपिका शुक्र को बुध का मित्र[2] और बुध को शुक्र का मित्र बताती है,[3] इसलिए तुला (शुक्र) और कन्या (बुध) की मैत्री दोनों तरफ़ से पूरी है। भकूट में कन्या तुला से बारहवीं राशि है, यानी द्विर्द्वादश भकूट, जिसे मुहूर्तचिन्तामणि धन की तंगी से जोड़ता है।[4] पर अगला ही श्लोक कहता है कि राशि-स्वामी मित्र हों और नाड़ी व नक्षत्र शुद्ध हों तो विवाह शुभ है।[5] इसलिए छूट असली है, पर शर्त के साथ: दोनों के नक्षत्र और नाड़ी पूरे कुंडली मिलान में जाँचें, और नीचे दिया साझा बजट वाला उपाय धन की चेतावनी को हर महीने की आदत में बदल देता है। सभी छह भकूट स्थितियाँ भकूट दोष लेख में समझाई गई हैं।
लव मैरिज में अक्सर तुला पहले आकर्षित करती है और कन्या चुपचाप परखकर, छोटी-छोटी बातें जाँचकर ही पूरी तरह हाँ कहती है, इसलिए दोस्ती से प्यार तक का सफ़र महीनों लेता है। अरेंज्ड मैरिज में कन्या साथी अपनी ज़िम्मेदारी और समझदारी से तुला परिवार का दिल जीतता है, और तुला साथी अपनी मिठास और शिष्टाचार से कन्या परिवार का। पहला साल असली परीक्षा है, जब पैसा, मेहमान-नवाज़ी और एक-दूसरे को टोकने की आदत सामने आती है। लव मैरिज वाले जोड़े गुण कैसे पढ़ें, यह लव मैरिज कुंडली मिलान लेख बताता है, और लव या अरेंज्ड मैरिज कैलकुलेटर तुरंत संकेत देता है। जन्म तारीख़ से सीधा मिलान करना हो तो जन्म तारीख़ से कुंडली मिलान देखें।
बहुत से लोग इस पेज पर किसी ख़ास स्थिति के साथ आते हैं। दूसरी शादी में राशि जोड़ी से ज़्यादा दोनों कुंडलियों का 7वाँ भाव (शादी और जीवनसाथी) और उसका स्वामी मायने रखता है, और यह जाँच सेकंड मैरिज कैलकुलेटर से भी हो सकती है। NRI रिश्ते में, जहाँ एक साथी विदेश में रहता है या बसना चाहता है, 9वाँ भाव (लंबी यात्रा) और 12वाँ भाव (विदेश) संकेत देते हैं। अंतरजातीय या अलग समुदाय के रिश्ते में भी अष्टकूट बिल्कुल उसी तरह गिना जाता है। शादी कब होगी, यह कुंडली से विवाह का समय लेख समझाता है। हर स्थिति में इस पेज की तुला-कन्या बातें लागू रहती हैं: तारीफ़ बनाम आलोचना, और संतुलन बनाम बारीकी।
पहला, मुफ़्त राशि कैलकुलेटर से दोनों की चंद्र राशि पक्की करें, क्योंकि बहुत लोग सिर्फ़ अंग्रेज़ी सूर्य राशि जानते हैं। दूसरा, मुफ़्त नक्षत्र कैलकुलेटर से दोनों के जन्म नक्षत्र निकालें, क्योंकि नाड़ी और तारा कूट इन्हीं पर टिके हैं। तीसरा, मुफ़्त मांगलिक दोष कैलकुलेटर से दोनों का मंगल दोष देखें। चौथा, 51 रुपये का पूरा कुंडली मिलान कराएँ, जो इस राशि स्तर के 19 की जगह आपकी दोनों कुंडलियों का असली गुण-योग देता है और बताता है कि शुक्र-बुध मैत्री वाली छूट आप पर लागू है या नहीं। नाड़ी कूट शून्य आए तो नाड़ी दोष उपाय लेख पढ़ें।
हर जोड़ी की दिशा का अपना अलग पेज है, इसलिए इसे कन्या और तुला से मिलाएँ, जहाँ कन्या साथी पहले है। तुला के दूसरे मिलान में तुला और मिथुन और तुला और कुंभ वायु तत्व की जोड़ियाँ हैं, और तुला और वृषभ में भी एक तरफ़ शुक्र का राज है। कन्या के दूसरे मिलान में कन्या और मकर और कन्या और वृषभ पृथ्वी तत्व की जोड़ियाँ हैं, और कन्या और मिथुन में दोनों राशियों का स्वामी बुध है। शादी के समय के लिए तुला राशि की शादी कब होगी और कन्या राशि की शादी कब होगी देखें।
राशि मिलान जीवन भर एक ही रहता है, पर शादी का मिज़ाज हर कुंडली में चल रही विंशोत्तरी दशा के साथ बदलता है। विंशोत्तरी में शुक्र की महादशा 20 साल और बुध की 17 साल की होती है, इसलिए तुला-कन्या जोड़ा लंबे समय तक अपनी ही किसी एक चंद्र राशि के स्वामी की दशा में रह सकता है। शुक्र की दशा में मेल-जोल, आराम पर खर्च और घर की सजावट आगे आती है, जबकि बुध की दशा में काम, पढ़ाई, व्यापार और काग़ज़ी काम। शुक्र की दशा और विवाह का संबंध शुक्र अंतर्दशा और विवाह योग लेख में है। पूरा मिलान पक्का होने के बाद शादी की तारीख़ विवाह मुहूर्त 2026 और विवाह मुहूर्त 2027 की सूची से चुनें, और विवाह मुहूर्त 2027 की तारीख़ कैसे चुनें लेख इसमें मदद करता है।
दोनों साथी अपनी चंद्र राशि के स्वामी को मज़बूत करें, इससे शुक्र और बुध की वह मैत्री भी बनी रहती है जो इस जोड़ी के द्विर्द्वादश भकूट की छूट है। उपाय 1, तुला साथी के लिए (शुक्र) 1. क्या करें: माँ लक्ष्मी के सामने घी का छोटा दीपक जलाएँ, एक सफ़ेद फूल चढ़ाएँ और ॐ शुं शुक्राय नमः का 108 बार जप करें। 2. कब: हर शुक्रवार सुबह, स्नान के बाद। 3. खर्च: घी, बाती और फूल मिलाकर 10 से 20 रुपये। 4. कितने दिन: लगातार 11 शुक्रवार। 5. आपके लिए क्यों: शुक्र तुला का स्वामी है, मज़बूत शुक्र से तुला साथी टोके जाने को अपमान नहीं, परवाह की तरह सुन पाता है। उपाय 2, कन्या साथी के लिए (बुध) 1. क्या करें: भगवान गणेश को दूर्वा की 21 पत्तियाँ अर्पित करें और ॐ बुं बुधाय नमः का 108 बार जप करें। 2. कब: हर बुधवार सुबह, काम पर जाने से पहले। 3. खर्च: मुफ़्त से 10 रुपये तक। 4. कितने दिन: लगातार 11 बुधवार। 5. आपके लिए क्यों: बुध कन्या का स्वामी है, शांत बुध तीखी टोका-टाकी को नरम और काम की सलाह में बदलता है। उपाय 3, दोनों के लिए (द्विर्द्वादश का धन वाला पक्ष) 1. क्या करें: साथ बैठकर अगले महीने का घर का बजट एक पन्ने पर लिखें और 11 रुपये एक साझा गुल्लक में डालें। 2. कब: हर महीने के पहले शुक्रवार की शाम। 3. खर्च: 11 रुपये। 4. कितने दिन: 6 महीने, यानी 6 पहले शुक्रवार। 5. आपके लिए क्यों: मुहूर्तचिन्तामणि द्विर्द्वादश भकूट को धन की कमी से जोड़ता है,[4] और खुला साझा बजट राशि-स्वामियों की उसी मैत्री का रोज़मर्रा रूप है जो इसकी छूट है।[5] रत्न इस जोड़ी का पहला उपाय कभी नहीं हैं, इन्हें पूरी कुंडली देखकर ही चुनें। मुफ़्त उपाय कैलकुलेटर आपकी अपनी कुंडली से उपाय सुझाता है। तुला हेतु शुक्र को बल दें — 'ॐ शुं शुक्राय नमः' का जप करें, शुक्रवार को माँ लक्ष्मी की पूजा करें तथा श्वेत-गुलाबी वस्त्र व सुगंध का दान करें। कन्या हेतु बुध को सशक्त करें — 'ॐ बुं बुधाय नमः' का जप करें, बुधवार को भगवान गणेश की पूजा करें, हरी मूँग व हरी सब्ज़ियों का दान करें। चूँकि दोनों के स्वामी शुक्र व बुध मित्र हैं, संयुक्त रूप से बुधवार व शुक्रवार के व्रत और हरे-श्वेत भोग रिश्ते में तालमेल बढ़ाते हैं। आलोचना घटाने हेतु गणेश आराधना और सौहार्द हेतु लक्ष्मी सेवा शुभ है। रत्न धारण करने से पहले अपनी सटीक जन्म कुंडली का विश्लेषण अवश्य कराएँ।
यह सामान्य राशि अनुकूलता है। आपकी सटीक जन्म कुंडली के आधार पर पूर्ण मिलान — मांगलिक, नाड़ी, सभी 8 कूट और 10 उपाय — मात्र ₹51 में।
कुंडली मिलान करें ₹51 →राशि अनुकूलता दो राशियों का मेल दिखाती है। पर विवाह दो इंसानों का रिश्ता है। किसी की कुंडली से उनके 6 कार्मिक पैटर्न — स्वभाव, निष्ठा, धन, परिवार का सम्मान, छुपी प्रवृत्ति और विवाह का भविष्य — भृगु नाड़ी के आधार पर जानें। किसी पर निर्णय नहीं, केवल समझ।
कार्मिक बैकग्राउंड रीडिंग ₹101 →हाँ, 36 में से 19 गुण (लगभग 53%) के साथ यह 'स्वीकार्य' मेल है। शुक्र-बुध मित्रता बौद्धिक तालमेल देती है, पर वायु-पृथ्वी अंतर को धैर्य और समझ से साधना ज़रूरी है।
बौद्धिक तालमेल, साझा सौंदर्यबोध और व्यावहारिक सहयोग। शुक्र-बुध मित्रता दोनों को विचारों, कला और सुव्यवस्था में जोड़ती है, जिससे घर सुसंगठित और सुंदर रहता है।
कन्या की आलोचना तुला को आहत कर सकती है और तुला की अनिर्णयता कन्या को बेचैन। वायु-पृथ्वी तत्व-अंतर और भिन्न खर्च-दृष्टिकोण भी संतुलन माँगते हैं।
नहीं। यह केवल चंद्र-राशि आधारित सामान्य विश्लेषण है। सटीक मिलान के लिए नक्षत्र, गण, नाड़ी और मंगल दोष देखना आवश्यक है — नीचे दिया कुंडली मिलान (₹51) उपयोग करें।
मध्यम रूप से अनुकूल है। बौद्धिक आकर्षण प्रबल रहता है, पर भावनात्मक अभिव्यक्ति में अंतर है। स्पष्ट संवाद और एक-दूसरे की प्रेम-भाषा समझने से लव मैरिज सफल रहती है।
तुला सौंदर्य पर खर्च चाहती है, कन्या बचत पर। संतुलित होने पर यह पूरकता बनता है — संयुक्त बजट और स्पष्ट प्राथमिकताओं से जीवनशैली समृद्ध व सुव्यवस्थित रहती है।
तुला हेतु शुक्र मंत्र व लक्ष्मी पूजा, कन्या हेतु बुध मंत्र व गणेश पूजा शुभ है। बुधवार-शुक्रवार के व्रत और हरे-श्वेत भोग आपसी तालमेल बढ़ाते हैं।
हाँ, किसी भी विवाह से पूर्व दोनों की जन्म कुंडली में मंगल दोष की जाँच आवश्यक है। यह केवल जन्म कुंडली से तय होता है, चंद्र-राशि से नहीं।
हाँ। कन्या तुला से बारहवीं राशि है, इसलिए द्विर्द्वादश भकूट बनता है, जिसे मुहूर्तचिन्तामणि धन की कमी से जोड़ता है।[4] उसी अध्याय में कहा गया है कि राशि-स्वामियों में मैत्री हो और नाड़ी व नक्षत्र शुद्ध हों तो विवाह शुभ है,[5] और शुक्र-बुध आपस में मित्र हैं। हर महीने साथ बैठकर घर का बजट बनाना और इस पेज के शुक्रवार-बुधवार उपाय इसकी व्यावहारिक छूट हैं।
फलदीपिका शुक्र को बुध का मित्र बताती है[2] और बुध को शुक्र का,[3] इसलिए यह मित्रता दोनों तरफ़ से है। मुहूर्तचिन्तामणि यह छूट तभी मानता है जब नाड़ी और नक्षत्र भी शुद्ध हों,[5] इसलिए अंतिम हाँ से पहले दोनों कुंडलियों का पूरा कुंडली मिलान ज़रूरी है।
राशि स्तर पर इस जोड़ी को 36 में से 19 गुण मिलते हैं, यानी स्वीकार्य मिलान। असली गुण दोनों के जन्म नक्षत्र से आठों कूट जोड़कर निकलते हैं,[1] इसलिए दो तुला-कन्या जोड़ों के गुण बहुत अलग हो सकते हैं। हर कूट का अर्थ 36 गुण मिलान लेख में पढ़ें।
राशि अंक हर स्थिति में एक जैसा गिना जाता है, असली फ़ैसला कुंडली के दूसरे भाव करते हैं। विदेश में बसे साथी के लिए 9वाँ और 12वाँ भाव देखा जाता है, जिसे विदेशी जीवनसाथी लेख समझाता है। दूसरी शादी के लिए 7वाँ भाव और उसका स्वामी निर्णायक है, जिसकी जाँच सेकंड मैरिज कैलकुलेटर करता है। अंतरजातीय विवाह में भी अष्टकूट वैसे ही गिना जाता है।
वर्णो वश्यं तथा तारा योनिश्च ग्रहमैत्रकम् । गणमैत्रं भकूटं च नाडी चैते गुणाधिकाः ॥ २१ ॥विवाह मिलान के आठ कूट हैं: वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रहमैत्री, गणमैत्री, भकूट और नाड़ी, और हर अगला कूट पिछले से अधिक गुण का होता है।
Marriage matching uses eight kootas, Varna, Vashya, Tara, Yoni, Graha Maitri, Gana Maitri, Bhakoot and Nadi, and each later koota carries more points than the one before it.
सौम्यः समोऽर्कजसितावहितौ खरांशो-रिन्दोर्हितौ रविबुधावपरे समाः स्युः । भौमस्य मन्दभृगुजौ तु समौ रिपुर्ज्ञः सौम्यस्य शीतगुररिः सुहृदौ सितार्कौ ॥२१॥बुध के लिए चन्द्रमा शत्रु है और शुक्र तथा सूर्य मित्र हैं। यही श्लोक सूर्य, चन्द्र और मंगल के मित्र-शत्रु भी बताता है।
For Mercury, the Moon is an enemy while Venus and the Sun are friends. The same verse also gives the friends and enemies of the Sun, the Moon and Mars.
सूरेर्द्विषौ कविबुधौ रविजः समः स्या-न्मध्यौ कवेर्गुरुकुजौ सुहृदौ शनिज्ञौ । जीवः समः सितविदौ रविजस्य मित्रे ज्ञेया अनुक्तखचरास्तु तदन्यथा स्युः ॥२२॥शुक्र के लिए गुरु और मंगल सम हैं, जबकि शनि और बुध मित्र हैं।
For Venus, Jupiter and Mars are neutral while Saturn and Mercury are friends.
मृत्युः षट्काष्टके ज्ञेयोऽपत्यहानिर्नवात्मजे । द्विर्द्वादशे निर्धनत्वं द्वयोरन्यत्र सौख्यकृत् ॥ ३१ ॥षडष्टक भकूट मृत्यु-भय से, नवपंचम संतान-हानि से और द्विर्द्वादश धन की कमी से जुड़ा है, बाकी स्थितियाँ सुख देती हैं।
A 6-8 bhakoot is linked with danger to life, a 9-5 bhakoot with loss concerning children and a 2-12 bhakoot with lack of money, while the remaining positions give happiness.
प्रोक्ते दुष्टभकूटके परिणयस्त्वेकाधिपत्ये शुभोऽथो राशीश्वरसौहृदेऽपि गदितो नाड्यृक्षशुद्धिर्यदि । अन्यर्क्षेंऽशपयोर्बलित्वसखिते नाड्यृक्षशुद्धौ तथा ताराशुद्धिवशेन राशिवशताभावे निरुक्तो बुधैः ॥ ३२ ॥दुष्ट भकूट होने पर भी विवाह शुभ कहा गया है यदि दोनों राशियों का स्वामी एक हो, और राशि-स्वामियों में मैत्री होने पर भी, बशर्ते नाड़ी और नक्षत्र शुद्ध हों।
When a bad bhakoot is found, the marriage is still called auspicious if both Moon signs have the same lord, and also when the two sign lords are friends, provided Nadi and nakshatra are clean.
रोहित गुप्ता त्रिकाल वाणी के संस्थापक एवं मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट हैं। उनकी भविष्यवाणियाँ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र (BPHS), भृगु नाड़ी और षड्बल पर आधारित हैं।