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मीन राशि की शादी कब होगी: 2027 के योग

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect16 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

मीन राशि की शादी का समय सप्तम भाव कन्या, उसके स्वामी बुध, चल रही दशा और गोचर से तय होता है, किसी एक उम्र से नहीं। साढ़ेसाती के बीच भी गुरु की दृष्टि बड़ा सहारा है, और 26 नवंबर 2027 को गुरु आपके सातवें भाव में आते हैं। अपनी सही खिड़की कुंडली से जाँचें।

Deep Dive Analysis

मीन राशि की शादी कब होगी: सीधा और छोटा जवाब

मीन राशि की शादी की कोई एक तारीख या उम्र तय नहीं होती। समय तब बनता है जब तीन बातें साथ मिलें: सातवें भाव कन्या और उसके स्वामी बुध की स्थिति, चल रही महादशा-अंतर्दशा का विवाह से जुड़ाव, और गुरु-शनि का गोचर। 2026-27 में आपकी राशि पर साढ़ेसाती चल रही है, पर गुरु की दृष्टि और नवंबर 2027 में गुरु का सातवें भाव में आना इसे संतुलित करते हैं। इसी कारण मीन के लिए उत्तर एक तारीख़ नहीं, कुछ समय-खिड़कियों के रूप में मिलता है। सामान्य विधि शादी कब होगी: कुंडली से विवाह का समय में समझाई गई है, और मीन राशि वाले अपनी खिड़की शादी कब होगी कैलकुलेटर पर देख सकते हैं।

मीन चंद्र राशि का मतलब: चंद्रमा की राशि, लग्न नहीं

मीन राशि का अर्थ है कि आपके जन्म के समय चंद्रमा मीन में था। इस राशि के स्वामी गुरु हैं, जो ज्ञान, विवेक और आशीर्वाद के कारक माने जाते हैं। राशि और लग्न दो अलग चीज़ें हैं, और इन्हें एक समझने से गोचर की पूरी गिनती बदल जाती है। फलदीपिका गोचर का फल बताने में चंद्र राशि को प्रधान मानती है[1], इसलिए यहाँ हर भाव मीन से गिना गया है। चंद्र राशि पर शंका हो तो राशि कैलकुलेटर से पुष्टि करें, नाम वाला तरीका मेरी राशि क्या है में देखें, और लग्न अलग से लग्न कैलकुलेटर पर निकालें।

सप्तम भाव कन्या और स्वामी बुध: मीन के लिए विवाह का केंद्र

मीन से गिनने पर सातवाँ भाव कन्या है, जिसके स्वामी बुध हैं। कन्या बुध की अपनी और उच्च, दोनों राशि है। बृहत् पराशर होरा के अनुसार सप्तमेश अपनी या उच्च राशि में हो तो जीवनसाथी का सुख पूर्ण बताया गया है[12], और फलदीपिका के अनुसार सप्तमेश बलवान और शुभ दृष्ट हो तो जीवनसाथी सुशील और अच्छी संतान से युक्त होता है[6]। इसलिए आपके लिए बुध की कुंडली वाली स्थिति देखना सबसे पहला काम है। बुध समझदारी, बातचीत और व्यावहारिकता लाते हैं, जो आपकी भावुक राशि से अलग है और इसलिए संतुलन देता है। भावों की समझ के लिए कुंडली के 12 भाव और देरी के कारण सातवाँ भाव कमज़ोर हो तो विवाह में देरी पढ़ें।

गुरु: राशि के स्वामी और पहले-दसवें भाव के अधिपति

गुरु मीन यानी पहले भाव और धनु यानी दसवें भाव के स्वामी हैं, यानी स्वयं और कर्म के घर के। इसलिए आपके लिए गुरु शुभ ग्रह हैं, और उनकी स्थिति आपके आत्मविश्वास तथा पेशे दोनों को प्रभावित करती है। रिश्ते की बात अक्सर तब आगे बढ़ती है जब आप मन से स्थिर और काम में जमे हुए महसूस करते हैं। गुरु की महादशा का पूरा ब्योरा गुरु महादशा में है, और इस साल के गोचर के लिए गुरु गोचर 2027 देखें। स्त्री की कुंडली में गुरु विवाह के मुख्य कारक भी माने जाते हैं, इसलिए उनकी भूमिका दोहरी बन जाती है।

मंगल: दूसरे और नौवें भाव के स्वामी

मंगल मीन से दूसरे मेष और नौवें वृश्चिक के स्वामी हैं, यानी परिवार-वाणी और भाग्य के। इसलिए आपके लिए रिश्ते की बात में परिवार की सहमति और भाग्य का साथ दोनों अहम रहते हैं, और मंगल की दशा में परिवार के ज़रिए बात बन सकती है। मीन राशि का नाम सुनकर मांगलिक होने का अनुमान न लगाएँ, क्योंकि यह जन्म कुंडली में मंगल के भाव से तय होता है। मंगल से जुड़ी आम शंकाओं के उत्तर मंगल दोष: असली या नकली में और उसकी दशा का असर मंगल महादशा: ऊर्जा और क्रोध में है।

शुक्र: तीसरे और आठवें भाव के स्वामी

शुक्र मीन से तीसरे वृषभ और आठवें तुला के स्वामी हैं, और मीन उनकी उच्च राशि भी है। तीसरा भाव पहल और संवाद का है, आठवाँ ससुराल, गुप्त बातों और अचानक बदलावों का। इसलिए आपके रिश्तों में ससुराल पक्ष की भूमिका बड़ी रहती है, और पहल या बातचीत से परिचय आगे बढ़ता है। पुरुष की कुंडली में शुक्र विवाह के कारक भी हैं। शुक्र की दशा का ब्योरा शुक्र अंतर्दशा और विवाह योग में है, और अपनी दशा की तारीख़ें दशा कैलकुलेटर से निकालें।

शनि: ग्यारहवें और बारहवें भाव के स्वामी

शनि मीन से ग्यारहवें मकर और बारहवें कुंभ के स्वामी हैं, यानी लाभ और खर्च के। ग्यारहवाँ भाव इच्छाओं की पूर्ति और मित्र-दायरे का है, बारहवाँ एकांत, दूर के स्थान और व्यय का। इसलिए शनि की दशा में मित्रों के माध्यम से या दूर के स्थान से रिश्ता आ सकता है, और निर्णय में धीमापन रहता है। इस समय शनि आपकी राशि पर गोचर कर रहे हैं, यानी साढ़ेसाती चल रही है, जिसकी पूरी चर्चा आगे है। शनि की दशा के लिए शनि महादशा के प्रभाव और साढ़ेसाती के लिए मीन राशि साढ़ेसाती पढ़ें।

पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती: मीन के तीन नक्षत्र

मीन राशि में पूर्वा भाद्रपद का अंतिम चरण, उत्तरा भाद्रपद और रेवती आते हैं। पूर्वा भाद्रपद के स्वामी गुरु हैं, उत्तरा भाद्रपद के शनि और रेवती के बुध। मीन वालों का जीवन इन्हीं तीन में से किसी नक्षत्र-स्वामी की दशा से शुरू होता है, इसलिए विवाह-समय की गिनती का पहला आधार यही है। रेवती में सहज करुणा और संवेदनशीलता रहती है, उत्तरा भाद्रपद में गहराई और धैर्य, और पूर्वा भाद्रपद में आदर्शवाद। अपना नक्षत्र नक्षत्र कैलकुलेटर से निकालें, उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र: अर्थ, स्वभाव, करियर और विवाह पढ़ें, और सभी नक्षत्रों के स्वामी 27 नक्षत्रों के नाम और स्वामी में देखें।

नवांश और सप्तमेश: फलदीपिका की समय-विधि

सिर्फ़ चंद्र राशि से शादी का समय नहीं निकलता, क्योंकि असली संकेत नवांश और सप्तमेश बुध की स्थिति से मिलते हैं। फलदीपिका की एक विधि कहती है कि सप्तमेश जिस नवांश राशि में बैठा हो उसके स्वामी, या शुक्र और चंद्र में जो बलवान हो, उसकी दशा चल रही हो और गुरु उस नवांश राशि से त्रिकोण में गोचर करे, तब विवाह का योग बनता है[9]। यह समय पहचानने की एक विधि है, सबके लिए पक्की तारीख़ नहीं, क्योंकि हर कुंडली में कई योग साथ काम करते हैं। इसलिए जन्म कुंडली कैलकुलेटर से अपना नवांश निकालें और योगों को कुंडली में विवाह योग की सूची से मिलाएँ।

देरी के सामान्य कारण: मीन कुंडली में क्या परखें

मीन राशि में विवाह की देरी का कोई एक तय कारण नहीं होता। आम तौर पर सातवें भाव पर पाप ग्रहों का असर, सप्तमेश की कमज़ोरी, शुक्र-गुरु की कमज़ोरी और विवाह-कारक दशा का देर से आना कारण बनते हैं। फलदीपिका दांपत्य की बाधा तब बताती है जब सातवें भाव का स्वामी नीच, शत्रु राशि में या अस्त हो, उस पर पाप दृष्टि हो, या सातवें भाव में पाप ग्रह बैठे या उसे देखें[8]। बुध मीन राशि में नीच के माने जाते हैं, इसलिए आपकी कुंडली में बुध कहाँ बैठे हैं, यह सबसे पहले जाँचने की बात है। ऐसे हर योग का परिहार और सरल उपाय भी कुंडली में साथ देखा जाता है। देरी से जुड़े दो आम भ्रमों पर पितृ दोष और विवाह में देरी और मंगल दोष और सातवाँ भाव में साफ़ बात की गई है।

महादशा की समय-रेखा: आपकी जन्म दशा कौन सी है

विंशोत्तरी दशा में हर ग्रह के वर्ष तय हैं: सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19, बुध 17, केतु 7 और शुक्र 20। पूर्वा भाद्रपद में जन्मे व्यक्ति की जन्म दशा गुरु की, उत्तरा भाद्रपद में शनि की और रेवती में बुध की होती है। जन्म के समय उस दशा का केवल बचा हुआ हिस्सा मिलता है, जो चंद्रमा के नक्षत्र में डिग्री पर निर्भर है, और उसके बाद दशाएँ तय क्रम से चलती हैं। तरीका विंशोत्तरी दशा कैसे निकालें में है, और अंतर्दशा के लिए प्रत्यंतर दशा कैसे निकालें देखें।

बुध की दशा में विवाह: सप्तमेश का समय

सप्तमेश होने के कारण बुध की महादशा और अंतर्दशा मीन के लिए विवाह का सबसे सीधा समय गिनी जाती है। ग्रंथ का नियम है कि सातवें भाव के स्वामी, उसमें बैठे ग्रह या उस पर दृष्टि रखने वाले ग्रह की दशा विवाह का अवसर लाती है[7]। बुध की दशा 17 साल की है, इसलिए उसकी हर अंतर्दशा को अलग से पढ़ना पड़ता है। इस दौरान रिश्ते बातचीत, पढ़ाई-लिखाई और व्यावहारिक समझ के रास्ते से बनते हैं। रेवती में जन्मे लोगों की जन्म दशा बुध की ही होती है, पर वह केवल बचा हुआ हिस्सा है। विस्तार के लिए बुध महादशा पढ़ें।

गुरु और शुक्र की दशा में रिश्ते

गुरु की 16 साल की दशा में परिवार, बड़ों की सहमति और जीवन-मूल्यों की भूमिका मुख्य रहती है, क्योंकि गुरु आपके पहले और दसवें भाव के स्वामी हैं। शुक्र की 20 साल की दशा में आकर्षण, रुचि और ससुराल पक्ष की चर्चा आगे बढ़ती है, क्योंकि शुक्र तीसरे और आठवें के स्वामी हैं और मीन में उच्च भी होते हैं। मीन वालों के लिए इन दोनों लंबी दशाओं का फल अंतर्दशा-स्वामी के हिसाब से बदलता रहता है, इसलिए पूरी दशा पर एक ही फ़ैसला न दें। विस्तार के लिए गुरु महादशा और शुक्र अंतर्दशा और विवाह योग पढ़ें।

मंगल, चंद्र और सूर्य की दशा: छोटी पर निर्णायक

इन तीनों में चंद्र की दशा दस वर्ष, मंगल की सात और सूर्य की छह वर्ष चलती है। मीन के लिए मंगल दूसरे और नौवें के स्वामी हैं, चंद्र पाँचवें भाव यानी प्रेम के स्वामी हैं और सूर्य छठे के। चंद्र की दशा में भावनात्मक जुड़ाव और पसंद का प्रश्न सामने रहता है, मंगल की दशा में परिवार की सहमति और भाग्य का साथ अहम होता है, और सूर्य की दशा में काम और सेवा के माहौल से रिश्ते की चर्चा बन सकती है। इन दशाओं की तारीख़ें दशा कैलकुलेटर से निकालें और मंगल महादशा भी पढ़ें।

शनि, राहु और केतु की दशा में रिश्ते

मीन राशि के लिए शनि की दशा उन्नीस वर्ष, राहु की अठारह और केतु की सात वर्ष की गिनी जाती है। शनि की दशा में रिश्ते धीमे पर टिकाऊ बनते हैं, और मित्रों या दूर के स्थान से जुड़े हो सकते हैं। राहु की दशा में अलग पृष्ठभूमि के रिश्ते, प्रेम विवाह या अचानक परिचय ज़्यादा दिखते हैं, जबकि केतु की दशा में अनासक्ति का भाव आ सकता है। इन्हें झुकाव समझें, निश्चित फल नहीं, क्योंकि भाव-स्थिति बदलते ही परिणाम बदल जाता है। राहु की दशा का विस्तार राहु महादशा के प्रभाव में और केतु का केतु महादशा और वैराग्य में मिलेगा।

गोचर कैसे गिनें: मीन चंद्र राशि से

गोचर यानी ग्रहों की आज की चाल को जन्म की चंद्र राशि से गिना जाता है, और विवाह के समय में मुख्य भूमिका धीमे ग्रहों गुरु और शनि की होती है। फलदीपिका के गोचर नियम में गुरु दूसरे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें स्थान पर, तथा शनि और मंगल तीसरे, छठे और ग्यारहवें स्थान पर शुभ माने गए हैं[2]। मीन के लिए गुरु का पाँचवाँ भाव कर्क, सातवाँ भाव कन्या और ग्यारहवाँ भाव मकर इस सूची में आते हैं, जबकि शनि के लिए तीसरा भाव वृषभ, छठा सिंह और ग्यारहवाँ मकर है। शनि की राशि बदलने की सटीक तिथियाँ शनि गोचर 2027 की तारीख़ें में और विस्तृत फल शनि गोचर 2027 की पूरी गाइड में देखें।

साढ़ेसाती और शादी: मीन राशि के लिए क्या मायने

शनि इस समय मीन में हैं, यानी आपकी जन्म राशि पर, इसलिए साढ़ेसाती चल रही है। मीन राशि की साढ़ेसाती शनि के कुंभ यानी बारहवें भाव में आने से शुरू हुई और मेष यानी दूसरे भाव से निकलने पर पूरी होगी, और अभी इसका बीच का चरण चल रहा है। साढ़ेसाती का मतलब शादी पर रोक नहीं, बल्कि निर्णयों में ज़्यादा परिपक्वता और धैर्य की माँग है। बहुत से लोगों के रिश्ते इस दौर में भी तय होते हैं, क्योंकि समय केवल शनि से नहीं, दशा और गुरु की दृष्टि से भी बनता है। पूरी तस्वीर के लिए मीन राशि साढ़ेसाती, साढ़ेसाती हमेशा बुरी होती है क्या और साढ़ेसाती में करियर, धन, स्वास्थ्य और विवाह पढ़ें।

गुरु का पाँचवें भाव कर्क में गोचर: 31 अक्टूबर 2026 तक

गुरु अभी कर्क में है, जो मीन से पाँचवाँ भाव है, और 31 अक्टूबर 2026 के आसपास सिंह में चला जाता है। फलदीपिका गोचर में गुरु को पाँचवें भाव में शुभ गिनती है[2], और इस भाव में अच्छे लोगों से मेल और अनुकूलता का फल कहती है[3]। कर्क गुरु की उच्च राशि है, और यहाँ से उनकी नवम दृष्टि आपकी जन्म राशि मीन पर पड़ती है, जहाँ अभी शनि बैठे हैं। ग्रंथ का सामान्य नियम है कि कठिन फल देने वाला ग्रह शुभ ग्रह से देखा जाए तो निष्फल कहा गया है[5], इसलिए साढ़ेसाती के बीच भी यह समय रिश्ते की पहल के लिए बुरा नहीं। इस राशि का गुरु-गोचर पन्ना गुरु गोचर 2026: मीन राशि में है।

गुरु का छठे भाव सिंह में गोचर: 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027

31 अक्टूबर 2026 को गुरु सिंह में जाकर मीन से छठे भाव में आते हैं। फलदीपिका छठे भाव के गुरु को विवाद, संबंधियों की खींचतान और स्वास्थ्य की चिंता से जोड़ती है[3], और यहाँ से गुरु की दृष्टि मीन पर नहीं पड़ती, जबकि शनि अब भी जन्म राशि पर हैं। इसलिए लगभग तीन महीने का यह दौर सबसे सतर्क रहने का है: रिश्ते की बातचीत में पारिवारिक मतभेद उभर सकते हैं, और स्वास्थ्य का ध्यान रखना ठीक रहता है। यह कोई रोक नहीं, बस जल्दबाज़ी से बचने की सलाह है। 13 दिसंबर 2026 को गुरु सिंह में वक्री होते हैं और 25 जनवरी 2027 को कर्क लौटते हैं। पूरा चक्र गुरु गोचर 2027 में देखें।

गुरु की पाँचवें भाव में वापसी: 25 जनवरी से 26 जून 2027

वक्री गुरु 25 जनवरी 2027 को कर्क में वापस आते हैं, 13 अप्रैल 2027 को सीधी चाल पकड़ते हैं और 26 जून 2027 तक कर्क में ही रहते हैं। इन लगभग पाँच महीनों में गुरु दोबारा आपके पाँचवें भाव में हैं, जिसे फलदीपिका शुभ गिनती है[2], और उनकी नवम दृष्टि फिर मीन पर है। इसलिए साढ़ेसाती के इस दौर की यह सबसे सहारे वाली खिड़की मानी जा सकती है, ख़ासकर 3 जून 2027 तक जब शनि मीन में ही हैं। इस दौरान रिश्ते की बात आगे बढ़ाने के लिए जनवरी 2027 विवाह मुहूर्त और फरवरी 2027 विवाह मुहूर्त भी देखे जा सकते हैं।

शनि का जन्म राशि मीन पर गोचर: 3 जून 2027 तक

शनि अभी मीन में वक्री हैं, 11 दिसंबर 2026 को मार्गी होते हैं और 3 जून 2027 के आसपास तक जन्म राशि पर रहते हैं। फलदीपिका शनि, सूर्य, मंगल और गुरु के जन्म राशि, आठवें और बारहवें भाव के गोचर को स्वास्थ्य की चिंता, स्थान-परिवर्तन और धन-क्षय से जोड़ती है[14]। इसे डर की तरह नहीं, सावधानी की सलाह की तरह पढ़ें: स्वास्थ्य और खर्च का हिसाब रखें और बड़े फ़ैसले परिवार के साथ बैठकर लें। शनि की धीमी चाल का फल भी धीरे मिलता है, इसलिए रिश्ते की बात में समझदारी जल्दबाज़ी से बेहतर है। साढ़ेसाती के इस हिस्से का पूरा क्रम शनि गोचर 2027 की पूरी गाइड में दिया है।

शनि का दूसरे भाव मेष में प्रवेश: 3 जून 2027 से

3 जून 2027 के आसपास शनि मेष में जाते हैं, जो मीन से दूसरा भाव है, यानी साढ़ेसाती का अंतिम चरण शुरू होता है। फलदीपिका शनि के दूसरे भाव के गोचर को धन और संतान से जुड़े मामलों में सावधानी से जोड़ती है[4]। दूसरा भाव परिवार का भी है, इसलिए विवाह की बात में परिवार से खुली बातचीत और ख़र्च की साफ़ योजना काम आती है। 9 अगस्त 2027 को शनि वक्री होते हैं, 20 अक्टूबर 2027 को फिर मीन लौटते हैं, 24 दिसंबर 2027 को मार्गी होते हैं और 23 फ़रवरी 2028 को दोबारा मेष में जाते हैं। शनि के मेष में नीच होने की चर्चा मेष में शनि नीच 2027 में है।

राहु-केतु का दिसंबर 2026 का बदलाव: राहु ग्यारहवें, केतु पाँचवें भाव में

माध्य गणना में 5 दिसंबर 2026 वह दिन है जब राहु मकर में और केतु कर्क में पहुँचते हैं, यानी दोनों अपनी पिछली राशि कुंभ और सिंह छोड़ते हैं। मीन से मकर ग्यारहवाँ भाव है और कर्क पाँचवाँ, यानी राहु इच्छाओं और मित्र-दायरे के घर पर और केतु प्रेम-पसंद के घर पर होगा। मीन राशि के लिए इसे केवल ग्रह-स्थिति मानें, असली फल जन्म कुंडली से निकलेगा। सामान्य प्रवृत्ति यह देखी जाती है कि ग्यारहवें भाव में राहु के समय सामाजिक दायरा और परिचय बढ़ते हैं, जबकि पाँचवें में केतु के समय भावनात्मक अनासक्ति आ सकती है, इसलिए खुलकर बात करें। यह जोड़ी 24 जून 2028 तक इन्हीं राशियों में रहेगी। पूरा विश्लेषण राहु केतु गोचर 2027 में है, और रिश्तों पर इसका असर राहु केतु गोचर 2026 प्यार-रिश्तों पर असर में समझाया गया है।

2026-27 की संभावित खिड़कियाँ: कब बात आगे बढ़ती है

मीन राशि के लिए आगे की तारीख़ें गोचर का खाका हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं। आज से 31 अक्टूबर 2026 तक गुरु पाँचवें भाव में है और शनि पर उनकी दृष्टि है, इसलिए पहल के लिए यह अच्छा समय है। 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक गुरु छठे भाव में है, इसलिए सतर्क रहें। 25 जनवरी से 26 जून 2027 फिर सहारे की खिड़की है। सबसे बड़ा बदलाव 26 नवंबर 2027 को आता है, जब गुरु कन्या में, यानी आपके सातवें भाव में पहुँचते हैं। फलदीपिका गुरु को सातवें भाव में शुभ गिनती है[2] और इस भाव में जीवनसाथी से सुख और संतान की प्राप्ति का फल कहती है[3]। उस समय शनि मीन में लौटे हुए रहेंगे और 23 फ़रवरी 2028 को फिर मेष में जाएँगे, इसलिए साढ़ेसाती के दौरान भी वह विवाह की मज़बूत खिड़की है। किसी भी खिड़की का लाभ दशा के साथ मिलने पर ही मिलता है, इसलिए अपनी दशा दशा कैलकुलेटर पर देख लें।

विवाह मुहूर्त 2027 कैसे चुनें

रिश्ता पक्का होने के बाद ही विवाह की तारीख़ तय होती है। इसमें गुरु और शुक्र के अस्त का समय, चातुर्मास और खरमास जैसी परहेज़ की अवधि देखी जाती है, और फिर वर-वधू की कुंडली से शुभ दिन छाँटा जाता है। साल भर की सूची के लिए विवाह मुहूर्त 2027 पन्ना खोलें, और तारीख़ चुनने का तरीका विवाह मुहूर्त 2027: शादी की तारीख़ कैसे चुनें में पढ़ें। निकट के महीनों के लिए नवंबर 2026 विवाह मुहूर्त और दिसंबर 2026 विवाह मुहूर्त देखें, और अपना निजी समय शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से निकालें।

प्रेम विवाह या अरेंज: मीन के लिए कौन सा रास्ता

मीन से पाँचवें भाव में कर्क है, जिसके स्वामी चंद्र हैं, जबकि सातवें भाव के स्वामी बुध हैं। जब पंचम और सप्तम भाव या उनके स्वामियों का आपस में संबंध बनता है तो प्रेम से विवाह की संभावना बढ़ती है, और जब दूसरे भाव यानी परिवार के घर के स्वामी मंगल और राशि-स्वामी गुरु प्रबल हों तो परिवार के सुझाए रिश्ते की ओर झुकाव रहता है। दिसंबर 2026 से केतु का पाँचवें भाव में आना भावनात्मक दूरी का संकेत दे सकता है, इसलिए रिश्ते में संवाद रखें। कोई रास्ता ग़लत नहीं। आपकी कुंडली किस रास्ते की ओर झुकती है, यह प्रेम या अरेंज विवाह कैलकुलेटर बताएगा, और प्रेम विवाह में मिलान की विधि लव मैरिज में कुंडली मिलान में है।

कुंडली मिलान: मीन राशि में किन बातों पर ध्यान दें

कुंडली मिलान केवल 36 में से अंक गिनना नहीं है। अष्टकूट के अंक आधार देते हैं, पर सप्तम भाव, दशाओं का मेल और नवांश भी परखने पड़ते हैं। मीन के स्वामी गुरु हैं, इसलिए साथी की चंद्र राशि के साथ मूल्यों और सोच का तालमेल देखना उपयोगी रहता है। साढ़ेसाती के दौर में खासकर यह देखना चाहिए कि दोनों की दशाएँ एक-दूसरे को सहारा देती हैं या नहीं। सिर्फ़ नाम से मिलान पर निर्भर न रहें, सही नतीजा जन्म विवरण से ही मिलता है। गुणों की पूरी गिनती 36 गुण मिलान की पूरी व्याख्या में समझें, जन्म विवरण या नाम से मिलान के तरीक़े जन्म तारीख से कुंडली मिलान और नाम से कुंडली मिलान में देखें, और अपनी जोड़ी कुंडली मिलान पर परखें।

मांगलिक और मीन: मंगल दूसरे और नौवें भाव के स्वामी

मीन के लिए मंगल दूसरे और नौवें भाव के स्वामी हैं, यानी परिवार और भाग्य के। मांगलिक होने का अर्थ केवल इतना है कि जन्म कुंडली में मंगल कुछ विशेष भावों में है, और इसका असर लग्न, चंद्रमा और शुक्र से भी परखा जाता है। राशि सुनकर निष्कर्ष निकालना भ्रम है, और अधिकांश मामलों में परिहार भी मौजूद होते हैं। पहले अपनी स्थिति जाँचें। इसके लिए मांगलिक दोष कैलकुलेटर चलाएँ, और मांगलिक और गैर-मांगलिक का विवाह तथा मांगलिक दोष के मिथक पढ़ें।

जीवनसाथी की दिशा: सप्तम भाव कन्या क्या कहता है

फलदीपिका में जीवनसाथी की दिशा तीन चीज़ों की राशि से पढ़ी गई है, यानी सातवें भाव में बैठा ग्रह, सप्तमेश और शुक्र[13]। राशियों की दिशा इस तरह मानी जाती है: पूर्व में मेष, सिंह, धनु, दक्षिण में वृषभ, कन्या, मकर, पश्चिम में मिथुन, तुला, कुंभ और उत्तर में कर्क, वृश्चिक, मीन। मीन के लिए सप्तम भाव कन्या है, जो दक्षिण दिशा का संकेत है, और सप्तमेश बुध की कुंडली वाली राशि से इसकी पुष्टि या बदलाव होता है। मीन वालों के लिए दक्षिण का संकेत एक सुराग है, बंधन नहीं। कुंडली पढ़ने का क्रम कुंडली कैसे देखें, स्टेप बाय स्टेप में समझें।

उपाय 1: गुरुवार को पीली वस्तु का दान

क्या करना है: गुरुवार को थोड़े पीले चावल, केले या बेसन के लड्डू किसी मंदिर या ज़रूरतमंद को दें। कब: गुरुवार सुबह। कितने का: 20 से 40 रुपये। कितने दिन: लगातार 11 गुरुवार। आपके लिए क्यों: गुरु आपकी राशि के स्वामी हैं, और फलदीपिका की यही बात इस उपाय से जुड़ती है कि प्रतिकूल ग्रहों के लिए जप, सत्कर्म, व्रत, दान और वंदन से शांति कही गई है[10]। सावधानी: दान श्रद्धा से करें, इसे कोई लेन-देन न समझें। ग्यारह गुरुवार पूरे होने पर एक बार अपनी चल रही दशा फिर से जाँच लें।

उपाय 2: शनिवार को बुज़ुर्गों या कर्मचारियों की सेवा

क्या करना है: शनिवार को किसी बुज़ुर्ग को भोजन कराएँ या घर के सहायक कर्मचारी की कोई ज़रूरत पूरी करें। कब: शनिवार शाम। कितने का: 30 से 50 रुपये या सिर्फ़ समय। कितने दिन: लगातार 9 शनिवार। आपके लिए क्यों: साढ़ेसाती में शनि धैर्य और सेवा से शांत माने जाते हैं, और आपकी राशि पर उनका गोचर चल रहा है। सावधानी: कोई कठोर व्रत लेने की ज़रूरत नहीं, जो आराम से निभ सके वही करें। उपाय चुनने में उपाय कैलकुलेटर की मदद ले सकते हैं, और साढ़ेसाती के और उपाय साढ़ेसाती के उपाय में हैं।

उपाय 3: बुधवार को विद्यार्थी को कलम-कॉपी

क्या करना है: बुधवार को किसी ज़रूरतमंद विद्यार्थी को कलम, कॉपी या किताब दें। कब: बुधवार सुबह। कितने का: 20 से 40 रुपये। कितने दिन: लगातार 9 बुधवार। आपके लिए क्यों: बुध आपके सप्तमेश हैं और ज्ञान तथा बातचीत के कारक हैं, इसलिए रिश्ते में संवाद की स्पष्टता के लिए यह सहज उपाय रखा गया है। सावधानी: यह किसी डर पर आधारित नियम नहीं, केवल सेवा है, और दान दिखावे के लिए न हो। बुध की दशा पर बुध महादशा भी पढ़ें।

उपाय की सीमा: क्या न करें और रत्न के बारे में

ऊपर के उपाय आज ही शुरू हो सकते हैं और इनका ख़र्च बहुत कम है। रत्न पहला उपाय नहीं है, क्योंकि वह महँगा है और ग़लत रत्न उलटा असर कर सकता है, और साढ़ेसाती के दौर में तो नीलम जैसे रत्न बिना जाँच के कभी न पहनें। फलदीपिका के अनुसार ग्रह उस व्यक्ति पर सदा अनुग्रह रखते हैं जो हिंसा से दूर, संयमी और धर्म की कमाई वाला हो[11], इसलिए आचरण को उपाय से ऊपर रखें। रत्न जानना चाहें तो पहले कुंडली से जाँच करें और रत्न सूटेबिलिटी कैलकुलेटर देखें, जबकि लग्न के लिए अलग सूची मीन लग्न के लिए सबसे अच्छे रत्न में है। अगर कोई कहे कि अमुक पूजा न हुई तो शादी रुक जाएगी, तो वह डर का दावा है, ग्रंथ की भाषा नहीं।

मिथक और सच: मीन राशि और शादी

मिथक: साढ़ेसाती में शादी नहीं हो सकती। सच: साढ़ेसाती धैर्य और परिपक्वता की माँग है, रोक नहीं, और विवाह का समय दशा, सप्तमेश और गुरु की दृष्टि से भी बनता है। मिथक: मीन राशि वाले बहुत भावुक होते हैं, इसलिए उनके रिश्ते टिकते नहीं। सच: भावुकता संबंध की गहराई भी है, और टिकाव आपकी परिपक्वता और सप्तमेश बुध की स्थिति पर निर्भर है। मिथक: गुण मिलान के अंक कम आए तो विवाह असंभव है। सच: गुण एक आधार हैं, पूरा निर्णय सप्तम भाव और दशा से होता है। मीन राशि से जुड़े इन भ्रमों का शास्त्रीय उत्तर कुंडली में विवाह योग और शादी कब होगी: कुंडली से विवाह का समय में विस्तार से है।

आज क्या करें: तीन कदम और अपनी खिड़की निकालें

पहला कदम है अपना सही जन्म समय और स्थान पक्का करना, क्योंकि चंद्रमा तेज़ चलता है और बिना सही समय के नवांश और सप्तमेश नहीं निकलते। दूसरा कदम है शादी कब होगी कैलकुलेटर पर साढ़ेसाती के साथ अपनी दशा का तालमेल देखना। तीसरा कदम है गुरुवार, शनिवार या बुधवार में से कोई एक सरल उपाय अपनाना। अगर कुंडली समझने में मुश्किल हो तो शादी का मार्गदर्शन पन्ने से संपर्क करें, और ऑनलाइन सलाह का तरीका ऑनलाइन विवाह ज्योतिषी में पढ़ें। यह लेख रोहित गुप्ता, मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट, ने लिखा है, जो 16 से अधिक वर्षों से पराशरी पद्धति और स्विस एफेमेरिस से कुंडली पढ़ते हैं।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

चंद्र राशि
जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। गोचर का फल इसी से गिना जाता है।
सप्तम भाव
कुंडली का सातवाँ घर, जो जीवनसाथी, विवाह और साझेदारी का भाव है।
सप्तमेश
सातवें भाव की राशि का स्वामी ग्रह। विवाह के समय और स्वभाव का मुख्य सूचक माना जाता है।
साढ़ेसाती
चंद्र राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में शनि के गोचर का लगभग साढ़े सात वर्ष का दौर।
गोचर
ग्रहों की आज की चाल। इसे जन्म की चंद्र राशि से गिनकर समय का फल देखा जाता है।
नवांश
राशि का नौवाँ हिस्सा। विवाह की गहराई और जीवनसाथी का स्वभाव नवांश कुंडली से परखा जाता है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    सर्वेषु लग्नेष्वपि सत्सु चन्द्रलग्नं प्रधानं खलु गोचरेषु । तस्मात्तदृक्षादपि वर्तमानग्रहेन्द्रचारैः कथयेत्फलानि ॥१॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 1

    गोचर के फल में चंद्र लग्न यानी चंद्र राशि प्रधान है, और उसी राशि से चल रहे ग्रहों के आधार पर फल कहे जाते हैं।

    For transit results the Moon sign is primary, and results are told from the Moon sign by the planets currently moving.

  2. [2]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    सूर्यः षट्त्रिदशस्थितस्त्रिदशषट्सप्ताद्यगश्चन्द्रमाः जीवस्त्वस्ततपोद्विपञ्चमगतो वक्रार्कजौ षट्त्रिगौ । सौम्यः षट्स्वचतुर्दशाष्टमगतः सर्वेऽप्युपान्त्यस्थिताः शुक्रः खास्तरिपून्विहाय शुभदस्तिग्मांशुवद्भोगिनौ ॥२॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 2

    गोचर में गुरु चंद्र राशि से 2, 5, 7, 9 और 11वें भाव में शुभ है। शनि और मंगल 3, 6 और 11वें भाव में शुभ माने गए हैं।

    In transit Jupiter is favourable in the 2nd, 5th, 7th, 9th and 11th from the Moon, and Saturn and Mars in the 3rd, 6th and 11th.

  3. [3]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    पुत्रोत्पत्तिमुपैति सज्जनयुतिं राजानुकूल्यं सुते षष्ठे मन्त्रिणि पीडयन्ति रिपवः स्वज्ञातयो व्याधयः । यात्रां शोभनहेतवे वनितया सौख्यं सुताप्तिं स्मरे मार्गक्लेशमरिष्टमष्टमगते नष्टं धनैः कष्टताम् ॥१९॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 19

    गुरु पाँचवें भाव में सज्जनों का साथ और अनुकूलता, छठे में शत्रु, संबंधियों और रोग से कष्ट, और सातवें में पत्नी से सुख, शुभ कार्य के लिए यात्रा और संतान का लाभ देता है।

    Jupiter in the 5th gives good company and favour, in the 6th trouble from enemies, relatives and illness, and in the 7th happiness from the wife, journeys for good purposes and children.

  4. [4]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    रोगाशौचक्रियाप्तिं धनसुतविहतिं स्थानभृत्यार्थलाभं स्त्रीबन्ध्वर्थप्रणाशं द्रविणसुतमतिप्रच्युतिं सर्वसौख्यम् । स्त्रीरोगाध्वावभीतिं स्वसुतपशुसुहृद्वित्तनाशामयार्तिं जन्मादेरष्टमान्तं दिशति पदवशेनार्कसूनुः क्रमेण ॥२२॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 22

    शनि के गोचर का फल जन्म राशि से आठवें तक क्रम से कहा गया है, और दूसरे भाव में धन और संतान की हानि गिनाई गई है।

    Results of the Saturn transit are listed house by house from the Moon sign, and in the 2nd house loss of wealth and children is listed.

  5. [5]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    असत्फलः सौम्यनिरीक्षितो यः शुभप्रदश्चाप्यशुभेक्षितश्च । द्वौ निष्फलौ द्वावपि खेचरेन्द्रौ यः शत्रुणा स्वेन विलोकितश्च ॥३०॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 30

    जो ग्रह बुरा फल देने वाला हो और शुभ ग्रह से देखा जाए, तो वह निष्फल कहा गया है। इसी तरह शुभ फल वाला ग्रह पाप दृष्टि से निष्फल होता है।

    A planet giving a bad result that is aspected by a benefic, and one giving a good result aspected by a malefic, both become ineffective.

  6. [6]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    स्त्रीसंख्यां मदगैर्ग्रहैर्मृतिमसत्खेटैश्च सद्भिः स्थितिं द्यूनेशे सबले शुभे सति वधूः साध्वी सुपुत्रान्विता । पापोऽपि स्वगृहं गतः शुभकरः पत्न्याश्च कामस्थितो हित्वा षड्व्ययरन्ध्रपान्मदनगाः सौम्यास्तु सौख्यावहाः ॥६॥
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्रभावो नाम दशमोऽध्यायः · श्लोक 6

    सप्तमेश बलवान और शुभ दृष्ट हो तो जीवनसाथी सुशील और अच्छी संतान से युक्त बताया गया है।

    If the 7th lord is strong and well placed the spouse is virtuous and blessed with good children.

  7. [7]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    कलत्रसंस्थस्य कलत्रदृष्टेर्दशागमे वाथ कलत्रपस्य । यदा विलग्नाधिपतिः प्रयाति कलत्रभं तत्र कलत्रलाभः ॥१३॥
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्रभावो नाम दशमोऽध्यायः · श्लोक 13

    सप्तम में बैठे ग्रह, सप्तम को देखने वाले ग्रह या सप्तमेश की दशा आने पर, और लग्नेश के सप्तम राशि में गोचर करने पर विवाह का लाभ बताया गया है।

    Gain of a spouse comes in the dasha of the planet in the 7th, the planet aspecting the 7th, or the 7th lord, and when the lagna lord transits the 7th sign.

  8. [8]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    कलत्रनाथे रिपुनीचसंस्थे मूढेऽथवा पापनिरीक्षिते वा । कलत्रभे पापयुतेऽथ दृष्टे कलत्रहानिं प्रवदन्ति सन्तः ॥१५॥
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्रभावो नाम दशमोऽध्यायः · श्लोक 15

    सप्तमेश शत्रु या नीच राशि में हो, अस्त हो या पाप ग्रहों से देखा जाए, या सातवाँ भाव पाप ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो तो विद्वान दांपत्य की हानि कहते हैं।

    If the 7th lord is in an enemy or debilitated sign, combust, or aspected by malefics, or the 7th house is joined or aspected by malefics, the wise speak of harm to the marriage.

  9. [9]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    कलत्रनाथस्थितभांशकेशयोः सितक्षपानायकयोर्बलीयसः । दशागमे द्यूनपयुक्तभांशकत्रिकोणगे देवगुरौ करग्रहः ॥१४॥
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्रभावो नाम दशमोऽध्यायः · श्लोक 14

    सप्तमेश जिस नवांश में है उसके स्वामी, या शुक्र और चंद्र में जो बलवान हो, उसकी दशा में जब गुरु उस नवांश राशि से त्रिकोण में आए तब विवाह बताया गया है।

    In the dasha of the lord of the navamsha occupied by the 7th lord, or of Venus or the Moon, whichever is stronger, marriage happens when Jupiter transits a trine from that navamsha sign.

  10. [10]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    दशापहाराष्टकवर्गगोचरे ग्रहेषु नृणां विषमस्थितेष्वपि । जपेच्च तत्प्रीतिकरैः सुकर्मभिः करोति शान्तिं व्रतदानवन्दनैः ॥४९॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 49

    दशा या गोचर में ग्रह प्रतिकूल हों तो उन्हें प्रसन्न करने वाले जप, सत्कर्म, व्रत, दान और वंदन से शांति होती है।

    When planets are badly placed in dasha or transit, japa, good deeds that please them, vows, charity and reverence bring peace.

  11. [11]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    अहिंसकस्य दान्तस्य धर्मार्जितधनस्य च । सर्वदा नियमस्थस्य सदा सानुग्रहा ग्रहाः ॥५०॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 50

    जो अहिंसक है, संयमी है, धर्म से धन कमाता है और नियम में स्थिर रहता है, उस पर ग्रह सदा कृपालु रहते हैं।

    For one who is non-violent, self-controlled, earns wealth by dharma and keeps his vows, the planets are always gracious.

  12. [12]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    जायाभावफलं वक्ष्ये शृणु त्वं द्विजसत्तम । जायाधिपे स्वभे स्वोच्चे स्त्रीसुखं पूर्णमादिशेत्
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 1

    सप्तमेश अपनी राशि या उच्च राशि में हो तो जीवनसाथी का पूर्ण सुख बताया गया है।

    If the 7th lord is in his own sign or in exaltation, the full happiness of the spouse is indicated.

  13. [13]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    कामस्थकामाधिपभार्गवानामृक्षं दिशं शंसति तस्य पत्न्याः । शुक्रोऽस्तपो वा तनुनाथभांशकत्रिकोणमायाति तदा विवाहः ॥१२॥
    — फलदीपिका, अध्याय 10 — कलत्रभावो नाम दशमोऽध्यायः · श्लोक 12

    सप्तम भाव, सप्तमेश और शुक्र की राशि जीवनसाथी की दिशा बताती है, और शुक्र या सप्तमेश लग्नेश के नवांश से त्रिकोण में आए तब विवाह होता है।

    The sign of the 7th house, of the 7th lord and of Venus indicates the direction of the spouse, and marriage comes when Venus or the 7th lord reaches a trine of the navamsha of the lagna lord.

  14. [14]↑फलदीपिकाफलदीपिका · Mantreshwara
    द्वादशाष्टमजन्मस्थाः शन्यर्काङ्गारका गुरुः । कुर्वन्ति प्राणसन्देहं स्थानभ्रंशं धनक्षयम् ॥३३॥
    — फलदीपिका, अध्याय 26 — गोचारफलनिर्णयाध्याय · श्लोक 33

    शनि, सूर्य, मंगल और गुरु जन्म राशि, आठवें और बारहवें भाव में हों तो स्वास्थ्य की चिंता, स्थान की हानि और धन-क्षय देते हैं।

    Saturn, Sun, Mars and Jupiter transiting the 12th, the 8th and the birth sign bring worry about health, loss of place and loss of wealth.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

मीन राशि की शादी कब होगी?

मीन राशि की शादी का समय सप्तम भाव कन्या, उसके स्वामी बुध, चल रही दशा और गोचर से तय होता है। कोई एक उम्र सब पर लागू नहीं होती। अपनी खिड़की जन्म विवरण से निकालनी पड़ती है।

मीन राशि का सप्तम भाव कौन सा है और उसका स्वामी कौन है?

मीन राशि से गिनने पर सातवाँ भाव कन्या है, जिसके स्वामी बुध हैं। कन्या बुध की अपनी और उच्च राशि है, इसलिए कुंडली में बुध की स्थिति सबसे पहले देखी जाती है।

क्या साढ़ेसाती में मीन राशि वालों की शादी हो सकती है?

हाँ, साढ़ेसाती शादी पर रोक नहीं है। वह निर्णयों में धैर्य और परिपक्वता माँगती है। विवाह का समय दशा, सप्तमेश और गुरु की दृष्टि से भी बनता है, इसलिए अपनी कुंडली देखकर ही निष्कर्ष लें।

31 अक्टूबर 2026 से गुरु का गोचर मीन राशि वालों के लिए कैसा है?

गुरु सिंह में जाकर आपके छठे भाव में आते हैं, जो मतभेद और स्वास्थ्य पर ध्यान रखने का संकेत है। 25 जनवरी 2027 को वे वक्री चाल से कर्क लौटकर फिर पाँचवें भाव में आते हैं और 26 जून 2027 तक रहते हैं।

3 जून 2027 से शनि के मेष में जाने का क्या असर है?

शनि मेष में आपके दूसरे भाव में जाते हैं और साढ़ेसाती का अंतिम चरण शुरू होता है। फलदीपिका इसे धन और संतान से जुड़े मामलों में सावधानी से जोड़ती है। परिवार से खुली बातचीत और ख़र्च की साफ़ योजना मददगार रहती है।

26 नवंबर 2027 को गुरु के सातवें भाव में आने का क्या मतलब है?

26 नवंबर 2027 को गुरु कन्या में, यानी आपके सातवें विवाह भाव में आते हैं। फलदीपिका गुरु को इस भाव में शुभ गिनती है और जीवनसाथी से सुख का फल कहती है। यह विवाह की मज़बूत खिड़की मानी जा सकती है, बशर्ते दशा साथ दे।

कौन सी दशा में मीन राशि वालों की शादी होती है?

सप्तमेश बुध, विवाह के कारक शुक्र और गुरु, तथा सप्तम में बैठे या उसे देखने वाले ग्रह की दशा-अंतर्दशा में योग ज़्यादा बनते हैं। सटीक समय आपकी कुंडली की दशा-तारीख़ों से निकलता है।

मीन राशि का विवाह किस दिशा में होगा?

फलदीपिका सप्तम भाव, सप्तमेश और शुक्र की राशि से दिशा का संकेत देती है। मीन के लिए सप्तम भाव कन्या दक्षिण की ओर इशारा करता है, पर पक्की दिशा कुंडली में बुध और शुक्र की राशि देखकर तय होती है।

मीन राशि के लिए कौन से उपाय आसान हैं?

गुरुवार को पीली वस्तु का दान, शनिवार को बुज़ुर्गों की सेवा और बुधवार को विद्यार्थी को कलम-कॉपी देना आसान उपाय हैं। इन्हें श्रद्धा से और बिना डर के करें, और रत्न, ख़ासकर नीलम, जाँच के बाद ही पहनें।

शादी का मुहूर्त कैसे निकालें?

रिश्ता तय होने के बाद गुरु-शुक्र के अस्त, खरमास और चातुर्मास जैसी अवधि देखकर वर-वधू की कुंडली से शुभ तारीख़ चुनी जाती है। साल भर की सूची विवाह मुहूर्त 2027 पन्ने पर है।

यह भी देखें · See also

इस हब का मुख्य पेजShadi Kab Hogi? कुंडली से विवाह का समय

समूह: राशि अनुसार शादी कब होगी

श्रेणी: marriage-love · marriage