पुष्य नक्षत्र: अर्थ, स्वभाव, करियर, विवाह
Trikaal Sandesh — Direct Answer
पुष्य 27 नक्षत्रों में आठवां है और निरयण कर्क राशि में 3°20' से 16°40' तक फैला है। इसके दशा-स्वामी शनि हैं और अधिदेवता बृहस्पति। बृहत्संहिता पुष्य में जन्मे को शांत-चित्त, सौभाग्यशाली, विद्वान, धनी और धार्मिक बताती है। अपना नक्षत्र [फ्री नक्षत्र कैलकुलेटर](/calculators/free-nakshatra-calculator) से देखें।
Deep Dive Analysis
पुष्य नक्षत्र एक नज़र में
पुष्य आठवां नक्षत्र है और पूरा निरयण कर्क राशि के भीतर, 3°20' से 16°40' तक आता है। इसके स्वामी शनि हैं, अधिदेवता बृहस्पति हैं और इसका भाव है पोषण, स्थिरता और समझदारी। बृहत्संहिता पुष्य में जन्मे जातक को एक पंक्ति में बताती है: शांत-चित्त, सौभाग्यशाली, विद्वान, धनी और धर्मपरायण।[1] इस पेज में हम देखेंगे कि असली कुंडली में इसका मतलब क्या है: स्वभाव, करियर, धन, विवाह, शनि दशा, मुहूर्त और सरल उपाय। अगर बस इतना जानना है कि चंद्रमा यहां है या नहीं, तो फ्री नक्षत्र कैलकुलेटर कुछ सेकंड में बता देता है और जन्म नक्षत्र कैसे पता करें गाइड गणना समझाती है। नवजात शिशु के पक्ष के लिए पुष्य नक्षत्र और संतान जन्म पढ़ें।
वैदिक ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र क्या है?
नक्षत्र निरयण राशिचक्र का 13°20' चौड़ा एक हिस्सा है, जिसका नाम उस तारा-समूह पर रखा गया है जिससे चंद्रमा गुज़रता है। कुल 27 नक्षत्र हैं। पुष्य का अर्थ है पोषण, और इसे सबसे शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। आपका जन्म नक्षत्र वह है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, और यही स्वभाव, रिश्तों और शुरुआती दशा को रंग देता है। पृष्ठभूमि के लिए नक्षत्र गाइड और चंद्र राशि गाइड पढ़ें। राशि कैलकुलेटर राशि बताता है और नक्षत्र उसमें बारीकी जोड़ता है।
पुष्य नक्षत्र के अंश और राशिचक्र में स्थान
पुष्य निरयण कर्क में 3°20' से 16°40' तक है, यानी 360° के चक्र पर 93°20' से 106°40'। यह पूरी तरह एक ही राशि, कर्क, में पड़ता है, इसलिए पुष्य का हर चंद्रमा कर्क का चंद्रमा है, और कर्क चंद्रमा की अपनी राशि है। इससे पहले पुनर्वसु आता है और बाद में आश्लेषा। निरयण और सायन स्थिति में आज लगभग 24 अंश का अंतर है, इसलिए सिर्फ सूर्य राशि की तालिका काफी नहीं, और जन्म कुंडली कैलकुलेटर चाहिए। बारह राशियां राशि गाइड में देखें।
पुष्य नक्षत्र का स्वामी ग्रह: शनि और उसकी दशा
विंशोत्तरी में पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद के स्वामी शनि हैं। कृत्तिका से शुरू होकर दशा-स्वामी सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र के क्रम में चलते हैं और 27 नक्षत्रों पर तीन बार दोहराए जाते हैं।[5] इस तरह पुष्य कृत्तिका से छठा नक्षत्र है, इसलिए पुष्य के चंद्रमा वाला जातक शनि की दशा से जीवन शुरू करता है। पूरी महादशा 19 साल की होती है, फिर बुध, केतु और शुक्र आते हैं। सिस्टम समझने के लिए महादशा गाइड पढ़ें, अपनी शुरुआत दशा कैलकुलेटर से निकालें और उप-अवधियों के लिए प्रत्यंतर दशा कैसे निकालें देखें।
पुष्य नक्षत्र के देवता: देवताओं के गुरु बृहस्पति
बृहत्संहिता नक्षत्रों के अधिपति देवताओं को क्रम से गिनाती है और आठवें नक्षत्र पुष्य के लिए जीव, यानी बृहस्पति, देती है।[2] मुहूर्त चिंतामणि में भी यही क्रम मिलता है।[3] बृहस्पति देवताओं के शिक्षक हैं, ज्ञान, सलाह और सही आचरण के स्वामी। इसी से पुष्य का अनोखा मेल बनता है: शनि संरचना और धैर्य देते हैं, जबकि गुरु बुद्धि और देखभाल, इसलिए इस तारे को पोषक कहा जाता है। इसका परंपरागत प्रतीक गाय का थन है, यानी निरंतर देने का चित्र। देवता-विषय ग्रहों से कैसे जुड़ते हैं, यह ग्रह गाइड में देखें।
शास्त्र पुष्य में जन्मे लोगों के बारे में क्या कहते हैं
बृहत्संहिता अपने नक्षत्र-जातक अध्याय में पुष्य में जन्मे व्यक्ति को शांत-चित्त, सौभाग्यशाली, मनोहर, विद्वान, धनी और धर्म में रत बताती है।[1] पूरी सूची में यह सबसे कोमल वर्णनों में से एक है। मुहूर्त चिंतामणि हस्त, अश्विनी, पुष्य और अभिजित को क्षिप्र और लघु नक्षत्र मानती है, जो व्यापार, भोग, ज्ञान, आभूषण और शिल्प-कला के लिए अच्छे हैं।[4] इन्हें प्रवृत्ति समझें, गारंटी नहीं। तारा स्वाद देता है, नतीजा पूरी कुंडली से बनता है। पड़ोसी तारों से तुलना के लिए रोहिणी नक्षत्र और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र पढ़ें।
पुष्य नक्षत्र का व्यक्तित्व और स्वभाव
जिनका चंद्रमा यहां होता है, वे देखभाल करने वाले, भरोसेमंद और उम्र से ज़्यादा परिपक्व होते हैं। उन्हें व्यवस्था पसंद है, वे अच्छे श्रोता होते हैं और अक्सर वही व्यक्ति बनते हैं जिस पर बाकी लोग टिकते हैं। शनि गंभीरता जोड़ते हैं और कर्क की भावना कोमलता, इसलिए वे व्यावहारिक भी होते हैं और संवेदनशील भी। परिवार, परंपरा और सुरक्षा उन्हें प्रिय है, अव्यवस्था नहीं। कमज़ोरी यह है कि वे बहुतों का बोझ अकेले उठा लेते हैं। पूरा व्यक्तित्व लग्न, चंद्र भाव और दृष्टि पर भी टिका है, इसलिए इन गुणों को कुंडली कैसे देखें और कुंडली के 9 ग्रह से परखें।
पुष्य नक्षत्र की ताकतें
मुख्य ताकतें हैं भरोसा, पोषण की प्रवृत्ति, समझदारी, धैर्य और कर्तव्य-बोध। यह देखभाल करने वालों, शिक्षकों, सलाहकारों और स्थिर संस्थाएं बनाने वालों का तारा है। कई पुष्य चंद्रमा सीखने में अच्छे होते हैं, ऐसी दिनचर्या पसंद करते हैं जो विकास दे और घर को स्थिर रखे। पैसे की आदतें प्रायः समझदार रहती हैं। इसी तारे के भीतर गुरु का उच्च बिंदु है, इसलिए गुरु की शुभ स्थिति स्वभाव को और मज़बूत करती है, इसे गजकेसरी योग और धन योग में जांचें। इन ताकतों को काम और घर में जान-बूझकर इस्तेमाल करें।
पुष्य नक्षत्र की कमज़ोरियां और संतुलन
देने वाले तारे की छाया है ज़रूरत से ज़्यादा देना। कुछ लोग चिंतित देखभालकर्ता बन जाते हैं, पुरानी आदतें पकड़े रहते हैं, ना कहना मुश्किल पाते हैं या सुरक्षा को लेकर चुपचाप चिंता करते हैं। शनि बिना आराम के कर्तव्य ढोने की आदत जोड़ते हैं। संतुलन छोटा और व्यावहारिक है। उपाय: शनिवार की शाम एक कागज़ पर लिखें कि इस हफ्ते किस बात को ना कहेंगे और एक काम सिर्फ अपने लिए करेंगे। यह 11 शनिवार करें, खर्च कुछ नहीं। यह देने वाले चंद्रमा को अपनी ऊर्जा बचाना सिखाता है। हर हफ्ते किसी भरोसेमंद से एक खुली बात भी जोड़ें। चिंता के पीछे चंद्र, शनि, राहु अक्ष को मानसिक स्वास्थ्य गाइड में पढ़ें।
पुष्य नक्षत्र के चरण और नवांश
हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं, हर एक 3°20' का, और हर चरण एक नवांश राशि में आता है। पहला चरण कर्क के 3°20' से 6°40' तक है और सिंह नवांश में आता है, दूसरा कन्या, तीसरा तुला और चौथा वृश्चिक में। सिंह आत्मविश्वास जोड़ता है, कन्या विश्लेषण और सेवा, तुला संतुलन और साझेदारी, वृश्चिक गहराई और तीव्रता। चरण बताता है कि पोषण देने वाला कर्क-शनि आधार किस रूप में दिखता है, और यह D9 में चंद्रमा के बल के लिए सबसे ज़रूरी है। वह चार्ट कैसे काम करता है, यह नवांश चार्ट गाइड में और ग्रह-गरिमा के नियम ग्रह गरिमा गाइड में देखें।
पुष्य नक्षत्र के नाम अक्षर: हु, हे, हो, डा
चारों चरणों के परंपरागत नाम अक्षर क्रम से हु, हे, हो और डा हैं, हर चरण के लिए एक। कई परिवार शिशु के नाम का पहला अक्षर उस चरण से चुनते हैं जिसमें चंद्रमा था। ऐसा नाम चुनें जो बोलने में आसान हो, अच्छा अर्थ रखता हो और सही अक्षर से शुरू होता हो, किसी दुर्लभ अक्षर को ज़बरदस्ती न थोपें। आपके बच्चे का चरण ठीक जन्म समय पर निर्भर है, इसलिए नक्षत्र से बच्चे का नाम टूल से पुष्टि करें और पूरी तालिका के लिए नक्षत्र अनुसार शुभ नाम अक्षर पढ़ें। नाम अक्षर परंपरा है, भाग्य का नियम नहीं।
पुष्य नक्षत्र और करियर, व्यवसाय
यह तारा पोषण और मार्गदर्शन वाले काम के अनुकूल है: शिक्षण, काउंसलिंग, चिकित्सा और नर्सिंग, पोषण, आतिथ्य, बैंकिंग, कानून, प्रशासन, समाज-सेवा, प्रकाशन और पुरोहित या सलाहकार भूमिकाएं। शनि संस्थाओं के लिए धैर्य देते हैं और गुरु सलाह के लिए बुद्धि। ये लंबे और भरोसे वाले कामों में अच्छा करते हैं, लगातार बदलाव वाले कामों में कम। अंतिम करियर तस्वीर दशम भाव और उसके स्वामी से बनती है, इसलिए दशमेश और करियर पथ, करियर भविष्यवाणी पेज और सर्वश्रेष्ठ करियर जन्म कुंडली साथ पढ़ें। विस्तृत गाइड के लिए कुंडली से करियर भविष्यवाणी देखें।
पुष्य नक्षत्र और धन
इस तारे के लिए शास्त्रीय शब्दों में धनी शामिल है, और व्यवहार में धन की शैली स्थिर, बचत-प्रधान और परिवार से जुड़ी होती है।[1] संपत्ति, बचत, शिक्षा-निधि और लंबी योजनाएं इसके स्वभाव को सट्टे से ज़्यादा जमती हैं। सावधानी यह कि सुरक्षा की चिंता व्यक्ति को ज़रूरत से ज़्यादा कसकर पकड़ने वाला बना सकती है। उपाय: हर गुरुवार दस से बीस रुपये अलग रखें और 11 हफ्ते तक किसी शिक्षक, विद्यार्थी या ज़रूरतमंद को दें। यह सस्ता है और अभाव का डर कम करता है। कुंडली में धन दूसरे, ग्यारहवें और नवम भाव से बनता है, इसलिए कुंडली में धन योग और धन भविष्यवाणी पेज देखें। गुरु और शनि मिलकर बचत और कर्ज़ बनाते हैं, यह शनि और गुरु का संबंध में समझाया गया है।
पुष्य नक्षत्र और विवाह, मिलान
अष्टकूट मिलान में पुष्य का गण देव, योनि मेष और नाड़ी मध्य है। देव गण देव और मनुष्य से सबसे सहज मिलता है, और मध्य नाड़ी का दूसरी मध्य नाड़ी से मेल नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे नाड़ी दोष बनता है। पुष्य हमारे मुहूर्त इंजन के विवाह-समारोह वाले ग्यारह नक्षत्रों में नहीं है और कई परंपराएं इसे फेरों के लिए टालती हैं, पर यह तारीख चुनने का नियम है, पुष्य में जन्मे व्यक्ति पर कोई फैसला नहीं। मिलान सिर्फ नक्षत्र से कभी न करें, क्योंकि सप्तम भाव और शुक्र उतने ही ज़रूरी हैं। पूरा मिलान कुंडली मिलान टूल से करें और कुंडली मिलान गाइड पढ़ें।
प्रेम और रिश्तों में पुष्य नक्षत्र
प्रेम में यह चंद्रमा वफादार, रक्षक और व्यावहारिक होता है। वे करके दिखाकर परवाह जताते हैं: खाना बनाना, मदद करना, योजना बनाना और साथ रहना। जोखिम है चुपचाप ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेना, जहां इतना दे दिया जाता है कि नाराज़गी जमने लगती है। जो चाहिए, उसे एक साफ वाक्य में कह देना रिश्ते को बचाता है। साथी के लिए नाटक से ज़्यादा स्थिरता और कद्र काम आती है। रास्ता प्रेम का होगा या अरेंज, यह पूरी कुंडली पर निर्भर है, इसलिए प्रेम विवाह भविष्यवाणी पेज और कुंडली में विवाह योग देखें। समय के लिए शादी कब होगी पढ़ें।
पुष्य नक्षत्र और स्वास्थ्य की प्रवृत्तियां
कर्क छाती, पेट और पाचन का कारक है और शनि हड्डियों, जोड़ों और धीरे बनने वाली थकान के। इसलिए शास्त्रीय पाठक इस नक्षत्र में पाचन, अम्लता, छाती, नींद और जोड़ों की अकड़न पर नज़र रखते हैं, और चिंता में भावुक खाने पर भी। इसे नियमित देखभाल का संकेत समझें, निदान नहीं। उपाय: रात का खाना तय समय पर खाएं और सोने से दो घंटे पहले खाना बंद करें, हफ्ते में पांच रात, 40 दिन, घर पर, निःशुल्क। यह कर्क-शनि स्वभाव को पाचन और नींद शांत करके सहारा देता है। कोई असली लक्षण हो तो डॉक्टर को दिखाएं। छठे, आठवें और बारहवें भाव का पठन कुंडली में बीमारी कैसे देखें और स्वास्थ्य भविष्यवाणी पेज में समझाया है।
पुष्य नक्षत्र और पारिवारिक जीवन: संतान और माता-पिता
पुष्य पोषक है, इसलिए परिवार केंद्र में रहता है। ऐसा चंद्रमा अक्सर घर का आधार होता है, माता-पिता, बच्चों और विस्तृत परिवार की परवाह करता है और परंपराओं और त्योहारों का शौकीन होता है। संतान की असली तस्वीर पंचम भाव, उसके स्वामी और पुत्रकारक गुरु से तय होती है, इसलिए संतान जन्म भविष्यवाणी पेज और गुरु पुत्रकारक लेख पढ़ें। माता-पिता से रिश्ता कर्तव्य-भरा और स्नेहपूर्ण होता है, और शनि बड़ों के प्रति कर्तव्य जोड़ सकते हैं। इस धुरी के लिए माता-पिता संबंध पेज, माता-पिता का रिश्ता कुंडली से और शनि और पितृ दोष देखें।
जन्म कुंडली में पुष्य का चंद्रमा: भाव और गरिमा
कर्क में चंद्रमा अपनी राशि में है, जो आराम और ताकत की स्थिति है, और पुष्य में उसे शनि का अनुशासन भी मिलता है। इसका भाव सबसे ज़्यादा मायने रखता है। लग्न में यह देखभाल करने वाला, स्थिर चेहरा देता है। चतुर्थ में गर्म घर और माता से गहरा रिश्ता। सप्तम में सहयोगी जीवनसाथी। दशम में देखभाल, शिक्षा या सेवा का सार्वजनिक काम। द्वादश में एकांत या विदेश-प्रवास की ओर खिंचाव। निष्कर्ष से पहले चंद्रमा की दृष्टि और युति ज़रूर जांचें। अपना चंद्रमा देखने के लिए जन्म कुंडली कैलकुलेटर और कुंडली के 12 भाव का उपयोग करें।
पुष्य नक्षत्र और शनि महादशा
अगर आपका चंद्रमा यहां है, तो पहली महादशा शनि की होगी, और जन्म के समय शेष अवधि शून्य से 19 साल तक कुछ भी हो सकती है। दूसरी शनि महादशा सामान्य जीवन में लौटती नहीं, क्योंकि विंशोत्तरी का पूरा चक्र 120 साल का है।[5] शनि की अवधियां मेहनत, दिनचर्या और धैर्य को पुरस्कृत करती हैं और शॉर्टकट कम देती हैं। विद्यार्थी को धीमी प्रगति लग सकती है, फिर ठोस नतीजे आते हैं। भारी शनि दौर के लिए उपाय: शनिवार को घर पर तिल के तेल का एक दीपक जलाएं और हफ्ते में एक बार आवारा कुत्ते या कौवे को खिलाएं, 19 हफ्ते। यह लगभग मुफ्त है और शनि के सेवा-भाव से मेल खाता है। शनि के कर्तव्य-पक्ष के लिए शनि और पितृ दोष और मज़बूत शनि योग के लिए शश योग पढ़ें।
पुष्य में बैठे अन्य ग्रह
यहां कोई भी ग्रह स्थिर, पोषक रंग ले लेता है। गुरु का उच्च कर्क में 5 अंश पर है, जो पुष्य के भीतर पड़ता है, इसलिए यहां बैठा गुरु शास्त्रीय रूप से बहुत मज़बूत और सहायक माना जाता है।[6][7] चंद्रमा अपनी राशि में है। शुक्र और बुध गर्मजोशी और अध्ययन देते हैं। मंगल कर्क में कमज़ोर है, पर उसका सबसे नीच बिंदु इस तारे के बाहर, आगे है। शनि अपने ही नक्षत्र में सहज हैं, पर चंद्रमा की राशि में बैठे हैं, इसलिए भावनात्मक परिपक्वता मांगते हैं। राहु-केतु असामान्य आध्यात्मिक या शोध-रुचि देते हैं। हर ग्रह को भाव और गरिमा के साथ पढ़ें, जैसा ग्रह गाइड और गरिमा गाइड दिखाते हैं। राहु-केतु जांच के लिए काल सर्प दोष पेज देखें।
पुष्य नक्षत्र मुहूर्त: इसे शुभ क्यों कहा जाता है
मुहूर्त चिंतामणि पुष्य को क्षिप्र और लघु नक्षत्रों में रखती है, जो व्यापार, भोग, ज्ञान, आभूषण और शिल्प-कलाओं के लिए अच्छे हैं।[4] इसीलिए पुष्य पढ़ाई शुरू करने, उपयोगी वस्तुएं खरीदने और व्यापार शुरू करने के लिए लोकप्रिय है। लोक-प्रचलन में गुरुवार को पड़ने वाला पुष्य गुरु पुष्य और रविवार को रवि पुष्य कहलाता है, और दोनों शुरुआत के लिए मज़बूत दिन माने जाते हैं। फिर भी अच्छे नक्षत्र के साथ अच्छी तिथि, वार और लग्न चाहिए। विवाह-समारोह के लिए पुष्य प्रायः टाला जाता है, वहां दूसरा तारा चुनें। आज का आकाश पंचांग पेज पर देखें और तारीख शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से तय करें। पूरा फिल्टर शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर गाइड में है।
पुष्य नक्षत्र और गुरु का संबंध
पुष्य के स्वामी शनि हैं, पर अधिदेवता बृहस्पति हैं और गुरु इसी में उच्च होते हैं, इसलिए यह तारा दशा-स्वामी के संकेत से ज़्यादा गुरु से आकार लेता है। जब गुरु कर्क में गोचर करते हैं या जन्म के चंद्रमा को देखते हैं, तब वृद्धि, ज्ञान और पारिवारिक खुशी आसानी से आ सकती है। जब शनि चंद्रमा से पिछली राशि, चंद्रमा की अपनी राशि या अगली राशि में गोचर करते हैं, तब साढ़ेसाती का दौर धैर्य मांगता है। साढ़ेसाती के उपाय में उपाय क्रम से हैं, अपनी स्थिति साढ़ेसाती कैलकुलेटर से जांचें, और सहायक पक्ष गुरु गोचर पेज में है। संदेश संतुलन का है, डर का नहीं।
पुष्य नक्षत्र के उपाय: सरल और व्यावहारिक
इस नक्षत्र के उपाय तभी चलते हैं जब सरल हों। उपाय 1: गुरुवार सुबह केले या पीपल के पौधे में जल चढ़ाएं और तीन परिक्रमा करें, 11 गुरुवार, निःशुल्क। यह तारे के बृहस्पति पक्ष को सहारा देता है। उपाय 2: शनिवार शाम जलते दीपक के पास दस मिनट बैठकर किसी सम्मानित पुस्तक का एक पन्ना पढ़ें, 19 हफ्ते, बिना खर्च। यह शनि-शासित मन को स्थिर करता है। उपाय 3: गुरुवार को किसी ज़रूरतमंद को सादा भोजन या दूध दें, हफ्ते में एक बार, 11 हफ्ते, दस से बीस रुपये में। इनमें से एक चुनें, सारे नहीं। पहले कदम के रूप में महंगे रत्न न पहनें, पहले चल रही दशा और ग्रह-बल जांचें। चंद्रमा को शांत रखने के लिए कुंडली में कमज़ोर ग्रह कैसे पता करें पढ़ें।
कैसे जांचें कि आपका चंद्रमा पुष्य में है
आपको जन्म की ठीक तारीख, समय और स्थान चाहिए। उन्हें फ्री नक्षत्र कैलकुलेटर में डालें और चंद्रमा की पंक्ति देखें। अगर चंद्रमा कर्क के 3°20' से 16°40' के बीच है, तो आपका जन्म नक्षत्र पुष्य है। जन्म समय में कुछ मिनट की चूक भी चंद्रमा को इतना खिसका सकती है कि चरण, और कभी-कभी तारा ही, बदल जाए, इसलिए पहले समय पक्का करें, देखें जन्म समय की शुद्धता। फ्री टूल और मानवीय पठन में फर्क के लिए फ्री कुंडली कितनी सही होती है पढ़ें। लग्न जानने के लिए मेरा लग्न क्या है देखें और मेरी जन्म कुंडली खोलें।
पुष्य बनाम पुनर्वसु और आश्लेषा
कर्क क्षेत्र के तीन तारे अक्सर आपस में मिल जाते हैं। पुनर्वसु के स्वामी गुरु हैं और वह मिथुन के 20°00' से कर्क के 3°20' तक है, स्वभाव हल्का और आशावादी। पुष्य के स्वामी शनि हैं, पूरी तरह कर्क में, स्थिर और पोषक। आश्लेषा के स्वामी बुध हैं, 16°40' से 30°00' कर्क तक, और अधिक तीखा तथा गुप्त। बृहत्संहिता पुष्य को शांत, विद्वान और धनी जैसे कोमल गुण देती है।[1] अन्य शनि तारों के नवजात पेज देखें: अनुराधा और रेवती। फर्क करने के लिए राशि नहीं, चंद्रमा का अंश देखें।
पुष्य नक्षत्र के बारे में आम भ्रांतियां
भ्रांति एक: शनि का तारा यानी कठिन जीवन। सच यह है कि शनि धीमे पर टिकाऊ फल देते हैं, और पुष्य को शास्त्र में शांत, विद्वान और धनी कहकर सराहा गया है।[1] भ्रांति दो: पुष्य हर काम के लिए अच्छा है। यह शुरुआत, पढ़ाई और व्यापार के लिए बहुत अच्छा है, पर कई परंपराएं इसे विवाह-समारोह के लिए टालती हैं।[4] भ्रांति तीन: पुष्य वाला अच्छा विवाह नहीं कर सकता। परहेज़ केवल अनुष्ठान की तारीख पर लागू है, पुष्य चंद्रमा का विवाह अच्छा हो सकता है। भ्रांति चार: नीला रत्न पहनना ही होगा। रत्न शायद ही पहला उपाय है, और सरल दिनचर्या अक्सर ज़्यादा काम आती है। हमेशा पूरी कुंडली पढ़ें। शनि को शांत और डर-रहित नज़र से देखें, और साढ़ेसाती हमेशा बुरी नहीं पढ़ें।
आगे पढ़ने के लिए सहोदर नक्षत्र
अगर यह पेज पसंद आया, तो हमारे नक्षत्र समूह के पास के तारे पढ़ें। शुरुआत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र से करें, जो हमारा गहराई से लिखा दूसरा शनि तारा है, और रोहिणी नक्षत्र से, जो चंद्र-स्वामी स्थिर तारा है। फिर तीसरे शनि तारे का नवजात पेज अनुराधा और रेवती पढ़ें। पूरे सिद्धांत के लिए नक्षत्र गाइड और चंद्र नक्षत्र और मैनिफेस्टेशन लेख देखें। यहां अक्सर काम आने वाला शनि योग शश योग में समझाया है।
त्रिकाल वाणी के साथ अपनी पुष्य कुंडली पढ़ें
नक्षत्र एक स्वाद बताता है, पर आपकी कुंडली पूरा तंत्र है। अगर आपका चंद्रमा पुष्य में है, तो अगला कदम है लग्न, चंद्रमा का भाव, चल रही दशा और सप्तम तथा दशम भाव जांचना। त्रिकाल संदेश फॉर्म पर फ्री रीडिंग से शुरू करें और उसे जन्म कुंडली कैलकुलेटर से मिलाएं। दिल्ली एनसीआर में मानवीय रीडिंग चाहिए तो दिल्ली में ज्योतिषी या कुंडली मिलान सेवा देखें। हर हफ्ते सीमित स्लॉट हैं, इसलिए समय मायने रखता हो तो जल्दी बुक करें। मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट रोहित गुप्ता की हर रीडिंग स्विस एफेमेरिस की शुद्धता और शास्त्रीय पाराशरी नियमों पर बनी है।
Apna Personalized Analysis Lein
Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:
शब्दावली · Glossary
- नक्षत्र
- निरयण राशिचक्र के 27 बराबर 13°20' हिस्सों में से एक, जो तारा-समूह के नाम पर है और जिसमें चंद्रमा किसी भी समय स्थित होता है।
- पुष्य
- आठवां नक्षत्र, जो पूरा कर्क राशि में है, जिसके स्वामी शनि और अधिदेवता बृहस्पति हैं।
- जन्म नक्षत्र
- जन्म के क्षण चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, वही, जो शुरुआती विंशोत्तरी दशा तय करता है।
- विंशोत्तरी दशा
- 120 साल की ग्रह-अवधि प्रणाली, जिसका आरंभिक स्वामी जन्म के चंद्र नक्षत्र से तय होता है।
- गुरु पुष्य
- गुरुवार को पड़ने वाले पुष्य नक्षत्र का लोकप्रिय नाम, जिसे शुरुआत के लिए मज़बूत दिन माना जाता है।
- नवांश
- नवां-भाग वर्ग चार्ट, D9, जिसमें हर नक्षत्र चरण एक राशि में आता है और ग्रह की गहरी गुणवत्ता दिखाता है।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
शान्तात्मा सुभगः पण्डितो धनी धर्मसंश्रितः पुष्ये । शठसर्वभक्षक्ष्य (भक्ष) (भक्ष्य) पापः कृतघ्नधूर्तश्च भौजंगे ।
— Brihat Samhita, अध्याय 100 — Nakshatra-jataka Adhyaya (Birth under the Nakshatras) · श्लोक 5 · sanskritdocumentsपुष्य में जन्मा जातक शांत-चित्त, सौभाग्यशाली, विद्वान, धनी और धर्म का आश्रय लेने वाला बताया गया है।
Describes the Pushya-born as calm-minded, fortunate, learned, wealthy and attached to dharma.
(नक्षत्रदेवता) अश्वियमदहनकमलजशशिशूलभृददितिजीवफणिपितरः । योन्यर्यमदिनकृत्त्वष्टृपवनशक्राग्निमित्राश्च ।
— Brihat Samhita, अध्याय 97 — Nakshatra-karma-guna Adhyaya (Works by Nakshatra) · श्लोक 4 · sanskritdocumentsनक्षत्रों के अधिपति देवताओं का क्रम देता है, जिसमें आठवें नक्षत्र पुष्य के लिए जीव (बृहस्पति) आते हैं।
Lists the presiding deities of the nakshatras in order, giving Jiva (Brihaspati) for the eighth star, Pushya.
नासत्यान्तकमवह्निधातृशशभृद्रुद्रादितीज्योरगा ऋक्षेशाः पितरो भगोऽर्यमरवित्वष्ट्राशुगाश्च क्रमात् । शक्राग्नी खलु मित्रशक्रनिर्ऋतिश्रोतोयपेशास्तथा गोविन्दो वसुतोयपाजचरणाहुर्बुध्यपूषाभिधाः ॥ १ ॥
— Muhurta Chintamani, अध्याय 2 — Nakshatra Prakaranam · श्लोक 1 · github-sanskrittextsनक्षत्र-देवताओं का क्रम देता है, जिसमें पुष्य के लिए जीव (बृहस्पति) शामिल हैं।
Gives the nakshatra deities in sequence, including Jiva (Brihaspati) for Pushya.
हस्ताश्विपुष्याभिजितः क्षिप्रं लघु गुरुस्तथा । तस्मिन्पण्यरतिज्ञानभूषाशिल्पकलादिकम् ॥ ६ ॥
— Muhurta Chintamani, अध्याय 2 — Nakshatra Prakaranam · श्लोक 6 · github-sanskrittextsहस्त, अश्विनी, पुष्य और अभिजित क्षिप्र और लघु नक्षत्र हैं, जो व्यापार, भोग, ज्ञान, आभूषण और शिल्प-कला जैसे कार्यों के लिए उपयुक्त हैं।
Hasta, Ashwini, Pushya and Abhijit are quick and light stars, suited to trade, enjoyment, learning, ornaments and the arts and crafts.
कृत्तिकातः समारभ्य त्रिरावृत्य दशाधिपाः । आचंकुरागुशबुकेशुपूर्वा विहगाः क्रमात्।ह्
— Brihat Parashara Hora Shastra, अध्याय 46 — Dasha Adhyaya (the Dashas) · श्लोक 12 · sanskritdocumentsकृत्तिका से आरंभ कर विंशोत्तरी दशा-स्वामी सूर्य, चंद्र, मंगल, राहु, गुरु, शनि, बुध, केतु, शुक्र के क्रम में 27 नक्षत्रों पर तीन बार दोहराए जाते हैं।
Starting from Krittika, the Vimshottari dasha lords run Sun, Moon, Mars, Rahu, Jupiter, Saturn, Mercury, Ketu, Venus and repeat three times over the 27 stars.
मेषो वृषो मृगः कन्या कर्को मीनस्तथा तुला । सूर्यादीनां क्रमादेते कथिता उच्चराशयः
— Brihat Parashara Hora Shastra, अध्याय 3 — Graha-guna-svarupa Adhyaya (Nature of the Planets) · श्लोक 49 · sanskritdocumentsसूर्य आदि ग्रहों की उच्च राशियां मेष, वृष, मकर, कन्या, कर्क, मीन और तुला बताता है, जिससे गुरु कर्क में उच्च होता है।
Lists the exaltation signs of the planets from the Sun onward: Aries, Taurus, Capricorn, Virgo, Cancer, Pisces and Libra, so Jupiter is exalted in Cancer.
भागा दश त्रयोऽष्टाश्व्यस्तिथ्योऽक्षा भमिता नखाः । उच्चात् सप्तमभं नीचं तैरेवांशैः प्रकीर्तितम्
— Brihat Parashara Hora Shastra, अध्याय 3 — Graha-guna-svarupa Adhyaya (Nature of the Planets) · श्लोक 50 · sanskritdocumentsपरम उच्च के अंश 10, 3, 28, 15, 5, 27 और 20 बताता है, इसलिए गुरु कर्क के 5 अंश पर परम उच्च होता है, और नीच बिंदु उससे सातवीं राशि में है।
Gives the degrees of deepest exaltation as 10, 3, 28, 15, 5, 27 and 20, so Jupiter peaks at 5 degrees of Cancer, and the debilitation point is the seventh sign from it.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
पुष्य नक्षत्र क्या है और इसका स्वामी कौन सा ग्रह है?
पुष्य 27 नक्षत्रों में आठवां है, जो निरयण कर्क में 3°20' से 16°40' तक है। इसके विंशोत्तरी स्वामी शनि और देवता बृहस्पति हैं। अपना नक्षत्र [फ्री नक्षत्र कैलकुलेटर](/calculators/free-nakshatra-calculator) से जानें।
पुष्य नक्षत्र में जन्मे लोगों के मुख्य गुण क्या हैं?
बृहत्संहिता उन्हें शांत-चित्त, सौभाग्यशाली, विद्वान, धनी और धार्मिक बताती है। आज की भाषा में वे देखभाल करने वाले, भरोसेमंद, धैर्यवान और परिवार-प्रेमी होते हैं, पर ज़्यादा देने की आदत रखते हैं।
पुष्य नक्षत्र में जन्मे बच्चे के लिए कौन से अक्षर शुभ हैं?
परंपरागत अक्षर हु, हे, हो और डा हैं, हर चरण के लिए एक। ठीक जन्म समय से चरण की पुष्टि [नक्षत्र से बच्चे का नाम टूल](/calculators/free-baby-name-by-nakshatra) पर करें।
क्या पुष्य नक्षत्र विवाह के लिए अच्छा है?
पुष्य चंद्रमा का विवाह अच्छा हो सकता है, और इसका अष्टकूट देव गण, योनि मेष और नाड़ी मध्य है। विवाह-समारोह की तारीख के लिए यह तारा प्रायः टाला जाता है। पूरा मिलान [कुंडली मिलान टूल](/kundali-milan) से करें।
पुष्य नक्षत्र के लिए कौन सा करियर उपयुक्त है?
शिक्षण, काउंसलिंग, चिकित्सा, नर्सिंग, पोषण, बैंकिंग, कानून, प्रशासन और समाज-सेवा इसके पोषक, स्थिर स्वभाव को जमते हैं। पुष्टि के लिए अपनी [जन्म कुंडली](/calculators/free-janam-kundali-calculator) का दशम भाव देखें।
पुष्य चंद्रमा वाले की पहली दशा कौन सी होती है?
शनि की महादशा से शुरुआत होती है, जिसकी पूरी अवधि 19 साल है। जन्म के समय शेष अवधि चंद्रमा के ठीक अंश पर निर्भर है। इसे [दशा कैलकुलेटर](/calculators/free-dasha-calculator) से निकालें।
गुरु पुष्य और रवि पुष्य क्या हैं?
ये पुष्य नक्षत्र के गुरुवार या रविवार को पड़ने के लोकप्रिय नाम हैं, जिन्हें पढ़ाई, व्यापार या खरीदारी शुरू करने के लिए मज़बूत दिन माना जाता है। तारीख [पंचांग पेज](/panchang) पर देखें।
क्या पुष्य नक्षत्र मुहूर्त के लिए अच्छा है?
हां, शुरुआत, पढ़ाई, व्यापार और आभूषण के लिए, क्योंकि मुहूर्त चिंतामणि इसे क्षिप्र और लघु तारों में रखती है। विवाह-समारोह के लिए यह प्रायः टाला जाता है। [शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर](/calculators/free-shubh-muhurat-calculator) इस्तेमाल करें।
पुष्य नक्षत्र का सबसे सरल उपाय क्या है?
गुरुवार सुबह केले या पीपल के पौधे में जल चढ़ाएं और तीन परिक्रमा करें, 11 गुरुवार। यह निःशुल्क है। महंगे रत्न पहला कदम नहीं हैं।
पुष्य और आश्लेषा नक्षत्र में क्या फर्क है?
पुष्य के स्वामी शनि हैं, यह कोमल है और कर्क के 3°20' से 16°40' तक है। आश्लेषा के स्वामी बुध हैं, अधिक तीखा है और 16°40' से 30°00' तक है। फर्क चंद्रमा के ठीक अंश से करें।
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