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सिंह राशि: स्वभाव, स्वामी, खूबियाँ व उपाय

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect16 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

सिंह राशि वैदिक ज्योतिष की पाँचवीं राशि है। इसका स्वामी सूर्य है और इसमें मघा, पूर्वा फाल्गुनी तथा उत्तरा फाल्गुनी का पहला चरण आता है। सिंह के लोग आत्मविश्वासी, उदार और नेतृत्वशील माने जाते हैं। इनका असली फल कुंडली में सूर्य की स्थिति, लग्न और दशा से तय होता है।

Deep Dive Analysis

सिंह राशि क्या है: सबसे पहले यह समझें

सिंह राशि वैदिक ज्योतिष की पाँचवीं राशि है, जो कालपुरुष की कुंडली में पंचम भाव की राशि मानी जाती है।[1] इसका स्वामी सूर्य है, और सूर्य ही ग्रहों में राजा कहा गया है।[5] जब आपके जन्म के समय चंद्रमा सिंह में हो, तब आपकी जन्म राशि सिंह कहलाती है। यह पेज सिंह राशि का स्वभाव, स्वामी, नक्षत्र, शरीर, करियर, रिश्ते और उपाय एक जगह समझाता है। अपनी राशि पक्की करने के लिए फ्री राशि कैलकुलेटर चलाएँ।

सिंह राशि कुंडली में कहाँ आती है

बृहत् पराशर होरा शास्त्र बारह राशियों को मेष से मीन तक गिनाता है, और सिंह का स्थान पाँचवाँ है।[1] राशि चक्र में सिंह 120 अंश से 150 अंश के बीच फैली है। इसके ठीक पहले कर्क और ठीक बाद कन्या आती है। राशियों की पूरी पृष्ठभूमि राशि चक्र की जानकारी में मिलती है।

पाँचवीं राशि होने से परंपरा सिंह को बुद्धि, संतान, विद्या और प्रतिष्ठा के भाव से जोड़कर पढ़ती है। भावों की यह बनावट कुंडली के भाव पेज पर सरल भाषा में समझाई गई है।

जन्म राशि और लग्न में फर्क

जन्म राशि का आधार चंद्रमा है। लग्न का आधार वह राशि है जो आपके जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदित हो रही थी। इसलिए किसी की जन्म राशि सिंह और लग्न तुला भी हो सकता है, और दोनों के फल अलग पढ़े जाते हैं।

अगर आप सिर्फ अख़बार की राशि जानते हैं, तो पहले अपना लग्न कैसे जानें पढ़ें और फ्री लग्न कैलकुलेटर चलाएँ। लग्न और चंद्र राशि का अंतर भी साथ में देखना उपयोगी है।

सिंह राशि के तीन नक्षत्र

सिंह में मघा के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तरा फाल्गुनी का पहला चरण आता है। मघा का स्वामी केतु है, पूर्वा फाल्गुनी का शुक्र और उत्तरा फाल्गुनी का सूर्य।

इसीलिए एक ही सिंह राशि के लोगों में गहरा अंतर दिखता है। मघा वाले परंपरा और कुल-गौरव से जुड़े दिखते हैं, पूर्वा फाल्गुनी वाले रस और सुख की ओर झुकते हैं। सभी 27 नक्षत्रों की सूची नक्षत्र लिस्ट: स्वामी और राशि में है, और अपना नक्षत्र फ्री नक्षत्र कैलकुलेटर से निकल जाता है।

सिंह राशि के नाम के अक्षर

जन्म राशि से नामकरण की परंपरा चंद्र के नक्षत्र-चरण पर चलती है। मघा के चरणों के अक्षर मा, मी, मू, मे माने जाते हैं। पूर्वा फाल्गुनी के अक्षर मो, टा, टी, टू हैं, और उत्तरा फाल्गुनी के पहले चरण का अक्षर टे।

अगर आपका नाम इन अक्षरों से शुरू होता है, तो सिंह राशि की संभावना है, पर यह केवल अनुमान है। पक्की पुष्टि जन्म-समय से बनी कुंडली से होती है। नाम से राशि जानने की सीमा वाला पेज इसी अनुमान की हद समझाता है, और शिशु-नाम के लिए नक्षत्र से शुभ नाम अक्षर देखा जा सकता है।

स्वामी सूर्य: सिंह की असली पहचान

बृहत् पराशर सिंह को सूर्य-अधिपति राशि बताता है।[3] सूर्य को वहाँ सबकी आत्मा कहा गया है।[4] यानी सिंह का स्वभाव केवल रौब का नहीं, पहचान, आत्म-सम्मान और नेतृत्व की भावना का है।

पर फल सूर्य की कुंडली-स्थिति पर टिका है। सूर्य किस भाव में है, कितने अंश पर है, अस्त या पीड़ित तो नहीं, यह जाँचना ज़रूरी है। ग्रहों की बुनियाद ग्रहों की पहचान में मिलती है।

सूर्य की स्वराशि और मूलत्रिकोण

ग्रंथ के अनुसार सूर्य की मूलत्रिकोण राशि सिंह है। पहले बीस अंश मूलत्रिकोण के हैं और शेष अंश स्वराशि के।[9] इसलिए सिंह राशि में सूर्य को बहुत मज़बूत स्थान माना जाता है।

व्यवहार में इसका मतलब यह है कि जिनकी कुंडली में सूर्य सिंह में अच्छे अंश पर हो, उनमें आत्मविश्वास और अधिकार की ठोस नींव दिखती है। अंश की जाँच के लिए फ्री जन्म कुंडली कैलकुलेटर देखें।

सूर्य की उच्च और नीच राशि

सूर्य मेष में उच्च का माना गया है।[7] ग्रंथ में परम उच्च बिंदु दस अंश बताया गया है, और नीच राशि उच्च से सातवीं यानी तुला होती है।[8] इसलिए तुला का सूर्य कमज़ोर और मेष का सूर्य बलवान पढ़ा जाता है।

पर नीच या उच्च होना अकेला फैसला नहीं देता। भाव, दृष्टि और भंग के नियम साथ में देखने पड़ते हैं। इस विषय को ग्रह की उच्च-नीच स्थिति पेज पर विस्तार से समझाया गया है।

शास्त्र के अनुसार सिंह का रूप और स्वभाव

श्लोक सिंह को सत्त्व गुण वाली, चौपाया, क्षत्रिय वर्ण की और वन से जुड़ी राशि बताता है। साथ ही इसे शीर्षोदया, भारी देह वाली, पीत-श्वेत रंग की, पूर्व दिशा से जुड़ी और दिन में बलवान कहा गया है।[3]

ये पुराने प्रतीक हैं। इनका सार यह है कि सिंह स्थिर, गरिमामय और सामने आकर नेतृत्व करने वाली राशि है। इसे शब्दशः नहीं, प्रतीक की तरह पढ़ना चाहिए।

शीर्षोदया और क्षत्रिय का मतलब

शीर्षोदया वह राशि है जो उदय के समय सिर की ओर से ऊपर उठती है। क्षत्रिय वर्ण का अर्थ है रक्षा, साहस और शासन का भाव। दोनों संकेत मिलकर सिंह को सीधे, प्रत्यक्ष और खुले ढंग से काम करने वाली राशि दिखाते हैं।

यानी सिंह वाले अक्सर बात छिपाकर नहीं, सामने रखकर चलते हैं। यह बारीकी पूरी कुंडली की जाँच का एक हिस्सा है, अकेला फैसला नहीं।

शरीर में सिंह का स्थान

बृहत् पराशर राशियों को कालपुरुष के अंगों से जोड़ता है। क्रम में गिनने पर सिंह का स्थान क्रोड है, यानी छाती और पेट के आगे का भाग।[2] लोक-परंपरा सिंह को हृदय और पीठ से भी जोड़ती है।

इसलिए सिंह राशि वालों के लिए हृदय, रक्तचाप और रीढ़ पर नज़र रखना समझदारी है। यह निदान नहीं, केवल संकेत है। शरीर की कोई भी परेशानी हो तो चिकित्सक की सलाह पहले लें, और सामान्य संकेतों के लिए फ्री स्वास्थ्य संकेत कैलकुलेटर देखा जा सकता है।

सूर्य का रूप और प्रकृति

ग्रंथ सूर्य को शहद जैसी पिंगल आँखों वाला, चौकोर देह का, शुद्ध और पित्त प्रकृति का बताता है। उसे बुद्धिमान और कम केश वाला भी कहा गया है।[6] पित्त का अर्थ यहाँ तेज और ऊष्मा का स्वभाव है।

यही कारण है कि सिंह राशि में गर्मी, तेज़ गुस्सा और जल्दी प्रतिक्रिया का रुझान अक्सर कहा जाता है। इसे साधने का तरीका संयम और धैर्य है, और सूर्य की ज़्यादा बारीकियाँ सूर्य और पितृ दोष में मिलती हैं।

सिंह राशि की खूबियाँ

सिंह के लोग अक्सर आत्मविश्वासी, उदार और दिल से बड़े होते हैं। वे जिस काम को अपना मानते हैं, उसमें पूरी ताक़त लगा देते हैं। उनकी मौजूदगी में समूह को दिशा मिलती है, और वे ज़रूरत पड़ने पर ज़िम्मेदारी अपने कंधे पर ले लेते हैं।

वफ़ादारी भी इन्हें खास बनाती है। जिसे अपना मान लें, उसके लिए खड़े रहते हैं। यह खूबी तब और निखरती है जब सूर्य कुंडली में मज़बूत हो।

सिंह राशि की चुनौतियाँ

अपनी पहचान की चिंता कभी-कभी अहं में बदल जाती है। प्रशंसा की चाह, आलोचना न सह पाना और हर जगह मुख्य भूमिका चाहना रिश्तों में दरार डाल सकता है। गुस्सा भी जल्दी उठता है और देर तक असर छोड़ता है।

इसका हल यह है कि निर्णय से पहले एक पल रुकें, और अपनी बात के साथ दूसरों की बात भी सुनें। नेतृत्व तब टिकता है जब उसमें सुनने की जगह हो।

मन और भावनाएँ: चंद्र सिंह में हो तो

जब चंद्रमा सिंह में होता है, तब मन सम्मान और अपनेपन की भूख से चलता है। ऐसे लोग भावनाओं को खुलकर और नाटकीय ढंग से भी दिखा सकते हैं। उन्हें कद्र न मिले तो भीतर चुभन बनी रहती है।

असल में इनका मन गर्मजोशी में चैन पाता है। परिवार के बीच बैठना, काम की सराहना और बड़े बुज़ुर्गों का आशीर्वाद इनकी मानसिक शांति के सहारे हैं।

वाणी और संवाद का ढंग

सिंह के लोग खुलकर और आत्मविश्वास से बोलते हैं। मंच, सभा या बैठक में अपनी बात रखना इन्हें आता है। कई बार वाणी में आदेश का स्वर भी आ जाता है।

अगर आप सिंह राशि के हैं, तो राय देते समय सामने वाले का सम्मान साथ रखें। सही बात भी आदेश की तरह कही जाए, तो असर घट जाता है।

करियर: किन क्षेत्रों में सिंह चमकती है

प्रशासन, राजनीति, प्रबंधन, मंच-कला, शिक्षण, चिकित्सा और ऐसे क्षेत्र सिंह के स्वभाव से मेल खाते हैं जहाँ नेतृत्व और प्रतिष्ठा की जगह हो। सरकारी या सम्मान वाली भूमिकाओं में भी सूर्य की भूमिका कही जाती है।

पर करियर का अंतिम निर्णय दशम भाव, उसके स्वामी और दशा से बनता है, केवल राशि से नहीं। पूरा ढाँचा कुंडली से करियर कैसे पढ़ें में है और करियर का ज्योतिषीय आकलन भी उपयोगी है।

सरकारी नौकरी और सूर्य

सूर्य को परंपरा में शासन और सरकार का कारक माना जाता है। इसलिए सिंह राशि वालों से अक्सर यह पूछा जाता है कि सरकारी नौकरी का योग है या नहीं। जवाब राशि से नहीं, दशम भाव, सूर्य के बल और दशा से मिलता है।

सूर्य की दशा के असर पर सूर्य महादशा और सरकारी नौकरी और सूर्य के राजयोग पर सूर्य राजयोग और सरकारी नौकरी पढ़ें। संभावनाओं की मोटी तस्वीर सरकारी नौकरी के योग में है।

धन और संपत्ति की प्रवृत्ति

सिंह राशि के लोग आमतौर पर खर्च में खुले हाथ के होते हैं। मेहमाननवाज़ी, उपहार और दिखावटी सम्मान पर पैसा लगाना इन्हें अच्छा लगता है। इसलिए बचत की अलग आदत बनाना इनके लिए समझदारी है।

धन का असली फल दूसरे और ग्यारहवें भाव तथा उनके स्वामियों से तय होता है। राशि केवल प्रवृत्ति बताती है, भाग्य नहीं। इस संदर्भ में धन की संभावना कैसे देखें पेज मदद करता है।

शिक्षा, संतान और रचनात्मकता

सिंह पाँचवीं राशि है, और पंचम भाव विद्या, संतान और रचनात्मकता का भाव है। इसीलिए सिंह के लोगों में कला, मंच और सिखाने की ओर झुकाव अक्सर दिखता है। विद्यार्थी के रूप में वे ध्यान और सराहना मिलने पर ज़्यादा खिलते हैं।

संतान का विचार पंचम भाव, गुरु और दशा के साथ होता है, केवल सिंह नाम से नहीं। परिवार के पहलुओं के लिए पारिवारिक जीवन का ज्योतिषीय आकलन देखा जा सकता है।

विवाह और रिश्तों में सिंह

रिश्तों में सिंह के लोग उदार, वफ़ादार और सुरक्षा देने वाले माने जाते हैं। वे प्रेम खुलकर जताते हैं और बदले में आदर और कद्र की उम्मीद रखते हैं। उपेक्षा उन्हें सबसे ज़्यादा चुभती है।

विवाह का निर्णय केवल राशि से नहीं होता। उसके लिए सप्तम भाव, दशा और दोनों कुंडलियों का मेल देखा जाता है। कुंडली मिलान करके ही आगे बढ़ें।

अनुकूलता: किन राशियों से तालमेल आसान

लोक-परंपरा में अग्नि तत्व की राशियाँ, यानी मेष और धनु, सिंह के साथ ऊर्जा का मेल बनाती मानी जाती हैं। वायु तत्व की राशियाँ मिथुन और तुला भी हलचल और संवाद में साथ देती गिनी जाती हैं।

ये केवल सामान्य संकेत हैं। असली अनुकूलता चंद्र नक्षत्र, गुण मिलान और दशा के मेल से बनती है। इसलिए राशि के नाम से रिश्ते का निर्णय न करें।

सिंह के तीन नक्षत्र, तीन अलग मिज़ाज

मघा के लोगों में कुल-परंपरा और सम्मान की भावना गहरी दिखती है। पूर्वा फाल्गुनी वालों में रचनात्मकता, रस और आनंद की चाह ज़्यादा होती है। उत्तरा फाल्गुनी का पहला चरण सूर्य के स्वामित्व के कारण कर्तव्य और स्थायित्व की ओर झुकता है।

इसलिए सिंह को एक ही साँचे में रखना अधूरा है। उत्तरा फाल्गुनी का विस्तृत पक्ष उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र पर है, और नक्षत्र का सारा ढाँचा नक्षत्र गाइड में समझाया गया है।

कमज़ोर या पीड़ित सूर्य हो तो सिंह का स्वभाव कैसे बदलता है

सिंह का स्वामी सूर्य अगर कुंडली में तुला में नीच हो या राहु-शनि से पीड़ित हो, तो आत्मविश्वास में उतार-चढ़ाव दिख सकता है। अहं की जगह असुरक्षा भी आ सकती है, और मान-सम्मान के प्रश्न बार-बार उठ सकते हैं।

यह कोई बुराई नहीं, एक ऐसी स्थिति है जिसे समझकर संभाला जा सकता है। सूर्य की कमज़ोरी जाँचने के लिए फ्री कमज़ोर ग्रह खोजक और कमज़ोर ग्रह पहचानने की गाइड देखें।

सूर्य अस्त या दग्ध हो तो क्या देखें

सूर्य के बहुत पास आने वाले ग्रह अस्त कहलाते हैं। लेकिन सूर्य खुद अस्त नहीं होता, इसलिए सिंह राशि की चर्चा में असली सवाल यह है कि सूर्य के साथ कौन सा ग्रह बैठा है और उसकी क्या हालत है।

अस्त ग्रह का बल घटता है और उसके कारकत्व में कमी दिख सकती है। इसकी पूरी समझ अस्त ग्रह की व्याख्या में मिलती है।

शनि और सूर्य का टकराव

सूर्य और शनि को परंपरा में एक-दूसरे का विरोधी माना जाता है। जब कुंडली में दोनों आमने-सामने हों, तो अधिकार और अनुशासन का टकराव दिख सकता है। कार्यस्थल पर बॉस या वरिष्ठ से खींचतान इसका एक उदाहरण है।

इस पैटर्न को सूर्य-शनि प्रतियुति और बॉस से टकराव में तफ़सील से समझाया गया है। हर टकराव का हल कुंडली देखकर ही निकालना चाहिए।

दशा के नज़रिये से सिंह

सिंह राशि वाले के लिए सूर्य की महादशा स्वाभाविक रूप से प्रतिष्ठा और अधिकार के क्षेत्र को छूती है। पर चल रही दशा किस ग्रह की है, इससे फल बदलता है। इसलिए पहले दशा का क्रम जानना चाहिए।

अपनी दशा देखने के लिए फ्री दशा कैलकुलेटर चलाएँ। दशा की बुनियाद महादशा क्या होती है में है, और करियर के अवसर-काल को दशा से करियर का समय पेज पर परखा जा सकता है।

गोचर: शनि और गुरु का असर

गोचर में शनि और गुरु जब सिंह राशि के आसपास से गुज़रते हैं, तब फल का रंग बदलता है। शनि की ढैया और साढ़ेसाती सिंह राशि पर अलग ढंग से काम करती हैं, इसलिए उन्हें अलग पेज पर समझना बेहतर है।

हिसाब सिंह राशि की शनि ढैया में है। आगे का पूरा साल सिंह राशि 2027 की भविष्यवाणी में देखा जा सकता है, और अपनी स्थिति फ्री साढ़ेसाती कैलकुलेटर से जाँचें। गोचर की तारीखें समय के साथ बदलती हैं, इसलिए उन्हें वहीं देखें जहाँ अद्यतन हों।

रत्न: माणिक की सही समझ

सिंह का स्वामी सूर्य है, इसलिए चलन में सिंह राशि वालों को माणिक बताया जाता है। पर शास्त्र रत्न का निर्णय लग्न, भाव-स्वामित्व और दशा देखकर करता है। राशि-रत्न की तालिका राशि रत्न चार्ट में समझाई गई है।

माणिक पहनने से पहले माणिक के फायदे और नुकसान पढ़ें और माणिक सुइटेबिलिटी चेक चलाएँ। रत्न के नियम रत्न धारण के व्यावहारिक नियम में हैं, और पूरी जाँच कुंडली के हिसाब से कौन सा रत्न में। अगर आपका लग्न सिंह है, तो सिंह लग्न के रत्न अलग से पढ़ें।

सूर्य को संतुलित करने के सरल उपाय

रत्न के बजाय पहले सरल उपाय आज़माना सुरक्षित है। सूर्य के लिए सुबह की धूप में कुछ देर बैठना और जल अर्पण परंपरा में बताए गए हैं।

उपाय: रविवार की सुबह सूर्य को जल अर्पण।

कैसे: साफ़ लोटे में जल लेकर उगते सूर्य की ओर मुख करके धीरे से अर्पित करें।

कब: रविवार की सुबह, सूर्योदय के बाद।

कितना: एक लोटा जल, रोज़ भी कर सकते हैं।

सावधानी: इसे चमत्कार न मानें और सीधे सूर्य को खुली आँखों से न देखें। कुंडली के हिसाब से और उपाय फ्री उपाय कैलकुलेटर में मिलते हैं।

सिंह और कन्या: दो पड़ोसी राशियाँ

सिंह के बाद कन्या आती है, और दोनों का स्वभाव बहुत अलग है। सिंह का स्वामी सूर्य खुलकर चमकता है, जबकि कन्या का स्वामी बुध बारीकी से परखता है। एक में नेतृत्व है, दूसरे में विश्लेषण।

दोनों को साथ रखकर पढ़ने से तस्वीर साफ़ होती है। कन्या का विस्तृत वर्णन कन्या राशि का स्वभाव और स्वामी में है, और एक और राशि की तुलना के लिए धनु राशि का स्वभाव देखें।

सिंह राशि और सिंह लग्न को अलग रखें

सिंह राशि का मतलब चंद्रमा सिंह में है, जबकि सिंह लग्न का मतलब उदित राशि सिंह है। सिंह लग्न में सूर्य लग्न का स्वामी बनता है और पूरी कुंडली की धुरी बन जाता है। राशि वालों में सूर्य चंद्र के साथी की तरह पढ़ा जाता है।

दोनों को मिलाना सबसे बड़ी भूल है। लग्न के आधार पर कुंडली कैसे पढ़ी जाती है, यह लग्न चार्ट की व्याख्या में और लग्न की परिभाषा में सरल भाषा में है।

सिंह राशि के बारे में आम गलतफहमियाँ

पहली गलतफहमी है कि सिंह राशि वाले हमेशा घमंडी होते हैं। असल में यह आत्म-सम्मान की भावना है, जो सही दिशा में ताक़त बनती है। दूसरी गलतफहमी है कि सिंह वाले कभी रोते नहीं।

तीसरी गलतफहमी है कि सूर्य हर सिंह वाले को राजा बना देता है। सूर्य का असर कुंडली में उसकी स्थिति पर निर्भर है। चौथी गलतफहमी है कि राशि से पूरा भविष्य पढ़ा जा सकता है। असल में लग्न, दशा और भाव-स्वामित्व के बिना तस्वीर अधूरी रहती है।

कुंडली की मज़बूती कैसे जाँचें

सिंह राशि होने भर से कुंडली मज़बूत नहीं हो जाती। सूर्य और चंद्र दोनों की स्थिति, लग्नेश का बल और दशा का क्रम साथ देखना पड़ता है। इसके लिए फ्री कुंडली स्ट्रेंथ कैलकुलेटर और ग्रह बल कैलकुलेटर मदद करते हैं।

शुरुआती समझ के लिए कुंडली मज़बूत है या कमज़ोर पेज भी पढ़ें।

परंपरा और शास्त्र को अलग-अलग रखकर पढ़ें

इस पेज पर जो बातें श्लोक से ली गई हैं, उन्हें अलग संख्याओं के साथ चिह्नित किया गया है। बाकी बातें लोक-परंपरा और व्यवहार के अनुभव से हैं। दोनों का मेल उपयोगी है, पर दोनों को एक ही दर्जा देना ठीक नहीं।

उदाहरण के लिए सिंह का सूर्य-अधिपति होना शास्त्र की बात है, जबकि हृदय और रीढ़ वाला संकेत लोक-परंपरा का विस्तार है। इस भेद को याद रखने से भ्रम कम होता है।

अपनी सिंह राशि की पुष्टि और अगला कदम

अगर आप निश्चित नहीं हैं कि आपकी राशि सचमुच सिंह है, तो जन्म तारीख, सही समय और जन्मस्थान से फ्री राशि कैलकुलेटर चलाएँ। जन्म-समय में कुछ मिनट का अंतर भी लग्न बदल सकता है, इसलिए समय सही रखें।

यह पेज रोहित गुप्ता, मुख्य वैदिक आर्किटेक्ट ने लिखा है, जो 16 वर्ष से अधिक समय से पराशरी पद्धति में कुंडली-विश्लेषण करते हैं। गणना Swiss Ephemeris पर आधारित है। पूरी कुंडली के लिए फ्री जन्म कुंडली कैलकुलेटर से शुरू करें।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

राशि
राशि चक्र का तीस अंश का एक भाग, कुल बारह में से एक।
चंद्र राशि
जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में हो, वही जन्म राशि कहलाती है।
लग्न
जन्म के क्षण पूर्वी क्षितिज पर उदित हो रही राशि।
मूलत्रिकोण
वह राशि-खंड जिसमें ग्रह स्वराशि से भी अधिक प्रतिष्ठित होकर फल देता है।
नीच
वह राशि जिसमें ग्रह का बल घटा हुआ माना जाता है।
शीर्षोदया
वह राशि जो उदय के समय सिर की ओर से उठती है।

ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources

इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।

  1. [1]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 3

    मेष से शुरू होने वाले बारह राशियों के क्रम में सिंह पाँचवीं राशि है।

    The twelve signs are listed in order from Aries, with Leo as the fifth.

  2. [2]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 4

    राशियों को क्रम से कालपुरुष के अंगों, सिर से नीचे की ओर, जोड़ा गया है।

    The signs are mapped to the limbs of Kalapurusha in order, from the head downwards.

  3. [3]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4 — राशिस्वरूपाध्याय · श्लोक 12

    सिंह सूर्य-अधिपति, सत्त्व गुण वाली, चौपाया, क्षत्रिय, वन से जुड़ी, शीर्षोदया, बड़ी देह वाली, पीले रंग की, पूर्व दिशा की और दिन में बलवान राशि है।

    Leo is lorded by the Sun, is sattvic, four-footed, of the Kshatriya class, forest-linked, rises head first, large-bodied, pale, eastern and strong by day.

  4. [4]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूपाध्याय · श्लोक 12

    सूर्य को सबकी आत्मा, चंद्र को मन, मंगल को बल और बुध को वाणी देने वाला कहा गया है।

    The Sun is described as the soul of all, the Moon as the mind, Mars as strength and Mercury as the giver of speech.

  5. [5]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूपाध्याय · श्लोक 14

    सूर्य और चंद्र राजा हैं, मंगल नेता है और बुध राजकुमार।

    The Sun and the Moon are the kings, Mars the leader and Mercury the prince.

  6. [6]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूपाध्याय · श्लोक 23

    सूर्य की आँखें शहद जैसी पिंगल हैं, देह चौकोर, स्वभाव शुद्ध और पित्त प्रधान है, वह बुद्धिमान और कम केश वाला है।

    The Sun has honey-yellow eyes, a square frame, is pure, bilious in temperament, intelligent and sparse-haired.

  7. [7]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूपाध्याय · श्लोक 49

    सूर्य आदि ग्रहों की उच्च राशियाँ क्रम से गिनाई गई हैं, जिनमें सूर्य की उच्च राशि मेष है।

    The exaltation signs of the Sun and the other planets are listed in order, beginning with Aries for the Sun.

  8. [8]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूपाध्याय · श्लोक 50

    सूर्य दस अंश तक उच्च होता है और नीच राशि उच्च राशि से सातवीं होती है, अंश वही रहते हैं।

    The Sun is exalted for ten degrees, and debilitation is the seventh sign from exaltation at the same degrees.

  9. [9]↑बृहत् पराशर होरा शास्त्रबृहत्पाराशरहोराशास्त्रम् · Maharishi Parashara
    — बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3 — ग्रहगुणस्वरूपाध्याय · श्लोक 51

    सूर्य की मूलत्रिकोण राशि सिंह है, बीस अंश मूलत्रिकोण के और शेष अंश स्वराशि के हैं।

    The Sun has twenty degrees of moolatrikona in Leo and the remainder is its own sign.

हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect

Frequently Asked Questions

सिंह राशि का स्वामी कौन सा ग्रह है?

सिंह राशि का स्वामी सूर्य है। बृहत् पराशर होरा शास्त्र इसे सूर्य-अधिपति राशि बताता है। सूर्य को आत्मा और राजा कहा गया है, इसलिए सिंह का स्वभाव नेतृत्व, आत्म-सम्मान और गरिमा की ओर झुका दिखता है।

सिंह राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?

सिंह में मघा के चारों चरण, पूर्वा फाल्गुनी के चारों चरण और उत्तरा फाल्गुनी का पहला चरण आते हैं। इनके स्वामी क्रम से केतु, शुक्र और सूर्य हैं, इसलिए एक ही राशि के लोगों में अंतर दिख सकता है।

सिंह राशि के नाम के अक्षर कौन से हैं?

परंपरा में मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू और टे अक्षर सिंह राशि से जुड़े माने जाते हैं। यह केवल अनुमान है, पक्की पुष्टि जन्म-समय की कुंडली से ही होती है।

सूर्य किस राशि में उच्च और नीच का होता है?

बृहत् पराशर के अनुसार सूर्य मेष में उच्च, परम उच्च दस अंश पर का होता है। उसकी नीच राशि उच्च से सातवीं यानी तुला है और अंश वही रहते हैं। फल भाव और दृष्टि पर भी निर्भर है।

क्या सिंह राशि सूर्य की अपनी राशि है?

हाँ। ग्रंथ के अनुसार सूर्य की मूलत्रिकोण राशि सिंह है। पहले बीस अंश मूलत्रिकोण में गिने जाते हैं और शेष अंश सूर्य की स्वराशि के हैं। इसलिए सिंह का सूर्य बलवान माना जाता है।

सिंह राशि वालों का करियर कैसा रहता है?

प्रशासन, प्रबंधन, राजनीति, शिक्षण, चिकित्सा और मंच-कला जैसे क्षेत्र सिंह के स्वभाव से मेल खाते हैं। पर अंतिम निर्णय दशम भाव, उसके स्वामी और चल रही दशा देखकर ही होना चाहिए।

सिंह राशि वालों को कौन सा रत्न पहनना चाहिए?

चलन में माणिक बताया जाता है क्योंकि सूर्य स्वामी है। पर शास्त्र लग्न, भाव-स्वामित्व और दशा देखकर रत्न तय करता है। इसलिए पहले कुंडली की जाँच और सुइटेबिलिटी चेक करें, फिर रत्न लें।

सिंह राशि और सिंह लग्न में क्या फर्क है?

सिंह राशि का मतलब चंद्रमा सिंह में है, और सिंह लग्न का मतलब पूर्वी क्षितिज पर सिंह उदित है। दोनों के फल अलग पढ़े जाते हैं, इसलिए इन्हें मिलाकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।

सिंह राशि वालों का स्वास्थ्य कैसा रहता है?

ग्रंथ में सिंह का स्थान क्रोड यानी छाती-पेट का आगे का भाग बताया गया है, और लोक-परंपरा हृदय और रीढ़ से भी जोड़ती है। इसलिए हृदय और रक्तचाप पर ध्यान रखना समझदारी है। यह निदान नहीं, केवल संकेत है।

सिंह राशि के लिए आसान उपाय क्या है?

रविवार की सुबह सूर्य को जल अर्पण और सुबह की धूप में कुछ देर बैठना परंपरा के सरल उपाय हैं। इन्हें चमत्कार न मानें। रत्न जैसे खर्चीले कदम से पहले कुंडली की जाँच ज़रूर करें।

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