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गोवर्धन पूजा 2026: 10 नवंबर समय और विधि

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect16 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार, 10 नवंबर को है। दिल्ली में प्रतिपदा तिथि 10 नवंबर को सूर्योदय (06:43) से दोपहर 14:00 बजे तक रहती है, इसलिए गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का भोग 14:00 से पहले करना सबसे सुविधाजनक है। प्रातःकाल का समय 06:43 से 08:51 तक है, और राहु काल दोपहर बाद 14:45 से 16:05 रहेगा।

Deep Dive Analysis

गोवर्धन पूजा 2026 की तारीख और प्रतिपदा का समय

गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार, 10 नवंबर को मनाई जाएगी। दिल्ली NCR के पंचांग में कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा 9 नवंबर की अमावस्या के बाद 10 नवंबर को सूर्योदय के समय चल रही है और दोपहर 14:00 बजे समाप्त होती है। इसलिए पूजा का मुख्य समय सुबह से दोपहर 14:00 तक है। दिवाली की शाम का लक्ष्मी पूजन 8 नवंबर को होता है, उस दिन का क्रम नरक चतुर्दशी 2026 में देखें। अपने नगर का मिलान मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से कर लें।

गोवर्धन पूजा के नाम: अन्नकूट और बलि प्रतिपदा

इस पर्व को अन्नकूट भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान को अन्न के पहाड़ जैसा भोग लगाया जाता है। कई क्षेत्रों में इसे बलि प्रतिपदा भी कहते हैं। नाम अलग हैं पर भाव एक है: प्रकृति, अन्न और गोवंश के प्रति कृतज्ञता। दीपावली के पांच दिन के क्रम में यह चौथा दिन है और धनतेरस से इसकी शुरुआत होती है, जिसे धनतेरस 2026 में समझाया गया है। इस पर्व की खासियत यह है कि इसमें किसी महंगे अनुष्ठान की ज़रूरत नहीं, साधारण अन्न और गोबर भी पूजा का आधार बन जाते हैं। शुभ कार्यों की तिथि के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर देखें।

10 नवंबर 2026 का पंचांग: दिल्ली NCR के पांचों अंग

सूर्योदय के समय 10 नवंबर को प्रतिपदा तिथि है (शुक्ल पक्ष) और वह 14:00 बजे समाप्त होती है। नक्षत्र विशाखा (पद 4) है और 09:19 तक रहेगा, योग शोभन है (11 नवंबर 03:09 तक) और करण बव है (14:00 तक)। सूर्योदय 06:43 और सूर्यास्त 17:26 है। गणना त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन से, लाहिड़ी अयनांश और दिल्ली NCR के निर्देशांक पर की गई है। यदि आप किसी दूसरे शहर में हैं तो समय में कुछ मिनट का अंतर संभव है, इसलिए स्थानीय पंचांग से अंतिम मिलान कर लें।

9 नवंबर 2026 का पंचांग: दिवाली के बाद की अमावस्या

9 नवंबर को सूर्योदय पर अमावस्या चल रही है और वह 12:32 बजे तक रहती है। नक्षत्र स्वाति (पद 4) है और 07:24 तक रहेगा, योग सौभाग्य है और करण नाग है। चूंकि सूर्योदय के समय प्रतिपदा नहीं है, गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को नहीं बल्कि 10 नवंबर को की जाएगी। अमावस्या के स्नान-दान और पितृ-स्मरण के लिए 9 नवंबर की सुबह उपयुक्त रहती है, जिसका सामान्य विवरण अमावस्या कब है 2026 में मिलेगा। यह क्रम दिवाली के बाद के दिनों को स्पष्ट रखता है, और आगे के व्रतों का क्रम मोक्षदा एकादशी 2026 तक देखा जा सकता है।

गोवर्धन पूजा का समय: प्रातःकाल और अपराह्न से पहले

10 नवंबर को प्रातःकाल 06:43 से 08:51 तक है, संगव काल 08:51 से 11:00 और मध्याह्न 11:00 से 13:08। प्रतिपदा 14:00 को समाप्त होती है, इसलिए पूजा और भोग इन्हीं खंडों में कर लेना सबसे निरापद है। अभिजित मुहूर्त 11:43 से 12:25 है और वह गुलिक काल (12:04 से 13:24) से आंशिक रूप से टकराता है, इसलिए यदि समय की सुविधा हो तो पूजा 08:51 से 11:00 के बीच रखना सरल रहता है। जो परिवार शाम को अन्नकूट करते हैं, वे सुबह संकल्प और दीप से पूजा का आरंभ अवश्य कर लें।

10 नवंबर के अशुभ काल: यमगंड, गुलिक और राहु काल

10 नवंबर को यमगंड 09:23 से 10:44, गुलिक काल 12:04 से 13:24 और राहु काल 14:45 से 16:05 रहेगा। राहु काल प्रतिपदा की समाप्ति के बाद आता है, इसलिए पूजा के समय पर उसका सीधा असर नहीं पड़ता। यमगंड और गुलिक के समय पूजा-पाठ बंद करने की आवश्यकता नहीं है, केवल नई वस्तु की खरीद या नए आरंभ को टालना है। इन कालों के बारे में हमारी पद्धति यह है कि इन्हें बाधा नहीं, सावधानी का संकेत मानें। अपने शहर के सटीक काल के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर देखें।

कथा: कृष्ण, इंद्र और गोवर्धन पर्वत

कथा के अनुसार ब्रजवासी हर साल इंद्र की पूजा करते थे। कृष्ण ने उन्हें समझाया कि वर्षा और चारा गोवर्धन पर्वत और गोवंश से मिलता है, इसलिए कृतज्ञता उन्हीं के प्रति होनी चाहिए। इंद्र के क्रोध से मूसलाधार वर्षा हुई तो कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर पूरे ब्रज को आश्रय दिया। सात दिन बाद इंद्र का अभिमान टूटा। कथा का सार अहंकार से अधिक कृतज्ञता और सामूहिक रक्षा का संदेश है, और यही संदेश आज पर्यावरण और अन्न के सम्मान के रूप में दिखता है। समृद्धि के ज्योतिषीय आधार के लिए धन योग और धन-वृद्धि का समय पढ़ें।

गोवर्धन पूजा की सरल विधि

पूजा-स्थल को स्वच्छ करके गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं, उसके पास गाय, ग्वाल-बाल और पेड़ की छोटी आकृतियां रखें। पर्वत पर दीप, रोली, चावल, पुष्प और खील-बताशे अर्पित करें। फिर अन्नकूट का भोग लगाएं और परिवार के साथ आरती करें। अंत में गोवर्धन की परिक्रमा सात बार करने की परंपरा है, जो घर में हाथ से भी की जा सकती है। फ्लैट में रहने वाले परिवार गोबर की जगह चावल के आटे या रंगोली से पर्वत की आकृति बना सकते हैं। पूरी पूजा 30 से 40 मिनट में हो जाती है। अपने लिए सरल उपाय उपाय कैलकुलेटर से भी जांच सकते हैं।

अन्नकूट का भोग: क्या बनाएं और कैसे अर्पित करें

अन्नकूट में चावल, कढ़ी, पूरी, कई प्रकार की सब्ज़ियों का मिश्रण, मिठाई और मौसमी फल सजाए जाते हैं। परंपरा में सब्ज़ियों की संख्या अधिक रखने का रिवाज़ है, पर घर में सामर्थ्य अनुसार पांच या सात व्यंजन भी पर्याप्त हैं। भोग लगाने के बाद उसे परिवार, पड़ोसियों और ज़रूरतमंदों में बांटना अन्नकूट का सबसे बड़ा फल माना जाता है। भोजन को व्यर्थ न करें और बचा हुआ प्रसाद गोवंश या पक्षियों को दें। जो लोग उपवास पर हैं, वे भोग केवल अर्पित करके हल्का सात्त्विक भोजन ही लें। अपनी चंद्र राशि के लिए राशि कैलकुलेटर देखें।

गौ-पूजन और गोवंश की सेवा

गोवर्धन पूजा के दिन गाय का पूजन और उसे चारा खिलाना विशेष माना जाता है। सुबह गाय को तिलक लगाकर हरा चारा, गुड़ और रोटी देना सरल सेवा है। यदि घर के पास गोशाला है तो वहां चारे या हरे चारे का दान किया जा सकता है। शहर में गाय न मिले तो किसी गोशाला के लिए ऑनलाइन या सीधे दान भी इस भावना को पूरा करता है। सेवा करते समय गाय के सींग या पीछे के भाग से दूरी रखें और उसे बासी या मसालेदार भोजन न दें। कुंडली में ग्रह-स्थिति के लिए जन्म कुंडली बना सकते हैं।

गोवर्धन परिक्रमा: घर और मंदिर में

गोवर्धन परिक्रमा का अर्थ है पर्वत के चारों ओर श्रद्धा से चलना, जो ब्रज में लगभग 21 किलोमीटर की यात्रा है। जो लोग वहां नहीं जा सकते, वे घर में बनी आकृति की सात परिक्रमा करते हैं या मंदिर में गोवर्धन-शिला की परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा के समय कृष्ण के नाम का जप या गोवर्धन-स्तुति का पाठ किया जाता है। बुज़ुर्ग और बीमार लोग जगह पर बैठकर माला फेरकर भी यही भाव पूरा कर सकते हैं। यात्रा करने वालों को भीड़ के समय सावधानी रखनी चाहिए और अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। यात्रा के दिन चुनने के लिए मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर देखें।

विशाखा नक्षत्र और वृश्चिक का चंद्रमा

10 नवंबर की सुबह नक्षत्र विशाखा के चौथे पद में है, जो 09:19 तक रहेगा। विशाखा को संकल्प, लक्ष्य-साधना और दृढ़ निश्चय का नक्षत्र माना जाता है। चंद्रमा वृश्चिक राशि में है, जो भावनाओं को गहराई देता है। इसका सरल अर्थ यह है कि गोवर्धन पूजा पर लिए गए संकल्प, जैसे अन्न की बर्बादी न करना या गोसेवा की नियमितता, मन में टिकते हैं। अपने जन्म-नक्षत्र के अनुसार दिन का भाव जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर और चंद्र राशि के लिए राशि कैलकुलेटर देखें।

मंगलवार और मंगल: कर्क में नीच, अंतिम अंश

मंगलवार का स्वामी मंगल है, जो कर्क राशि में लगभग 28.9 अंश पर है। कर्क मंगल की नीच राशि है, और 28.9 अंश का मतलब है कि वह इस राशि के लगभग अंत पर है। नीच मंगल का सामान्य अर्थ है कि ऊर्जा और साहस के विषयों में थोड़ा धीमे और सोच-समझकर चलना बेहतर है। इसका सरल उपाय यह है कि पूजा के बाद लाल मसूर या गुड़ का दान करें और गोसेवा करें। इससे ऊर्जा संतुलित रहती है और दिन शांत बीतता है। मंगल के बीज मंत्र का 108 बार जप भी सहायक है। उपाय कैलकुलेटर अन्य मंत्र भी सुझाता है।

सूर्य तुला में, गुरु सिंह में: पर्व का आकाश

सूर्य तुला राशि में लगभग 23.6 अंश पर है, जो उसकी नीच राशि है। गुरु सिंह में लगभग 1.1 अंश पर है, जो पांचवें भाव की राशि है और शिक्षा, संतान और विवेक से जुड़ी है। सूर्य का नीच होना अधिकार और आत्मविश्वास के विषयों में विनम्रता मांगता है, और पूजा में सूर्य को जल देना इसका सरल संतुलन है। गुरु की स्थिति बच्चों के साथ पर्व मनाने के लिए अनुकूल मानी जा सकती है। गुरु के आगे के मार्ग के लिए गुरु गोचर 2027 और शुभ योग के लिए गजकेसरी योग देखें।

शुक्र कन्या में वक्री: अन्नकूट में विवेक

शुक्र इस समय कन्या राशि के लगभग 28.9 अंश पर वक्री है, यानी राशि के अंतिम छोर पर पहुंचा हुआ है। कन्या शुक्र की नीच राशि है, इसलिए भोजन, सजावट और खर्च में थोड़ी संयमित सोच रखना उचित है। अन्नकूट का भाव अधिकता नहीं, कृतज्ञता है, इसलिए शुक्र की यह स्थिति इस पर्व के अनुशासन से मेल खाती है। उपाय सरल है: भोग में एक सफ़ेद मिठाई रखें और उसे बांटें। अपनी कुंडली में शुक्र की स्थिति जांचने के लिए कमज़ोर ग्रह खोजक देखें।

राहु कुंभ में और केतु सिंह में: दिसंबर से पहले की धुरी

नवंबर 2026 में राहु कुंभ में और केतु सिंह में है। यह धुरी दिसंबर 2026 की शुरुआत में मकर-कर्क की ओर बदलने वाली है। इसका पर्व पर कोई सीधा अशुभ अर्थ नहीं है, केवल यह पता चलता है कि आने वाले वर्ष में धुरी बदलने से जीवन के विषय भी बदलेंगे। इसलिए गोवर्धन पूजा के संकल्प में आने वाले वर्ष की योजना जोड़ना अच्छा रहेगा। बदलाव का विस्तार राहु-केतु गोचर 2027 में और ग्रहणों का विवरण ग्रहण 2027 कब है में है।

दिवाली से गोवर्धन तक: तीन दिन का क्रम

8 नवंबर को नरक चतुर्दशी की सुबह और दिवाली की शाम होती है, 9 नवंबर को अमावस्या का स्नान-दान और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा। इस क्रम में पहले दिन भय और अंधकार से मुक्ति, दूसरे दिन कृतज्ञता और तीसरे दिन अन्न और प्रकृति के प्रति आभार का भाव आता है। धनतेरस से शुरू हुई यात्रा इसी चरण में पूर्ण होती है। यदि आपने पूर्व के दिन पूजा नहीं की है तो भी गोवर्धन पूजा अपने आप में पूर्ण है। क्रम को समझने के लिए नरक चतुर्दशी 2026 पढ़ें।

व्यापारियों के लिए अन्नकूट और नया खाता

कई व्यापारी गोवर्धन पूजा के दिन दुकान में अन्नकूट रखते हैं और नए लेखा-वर्ष की शुभ शुरुआत करते हैं। यदि आप नया व्यापार या नई शाखा शुरू करना चाहते हैं तो दिन के सामान्य शुभ समय के साथ अपनी कुंडली का मिलान भी कर लें। इसके लिए नया बिज़नेस शुरू करने का मुहूर्त और नया बिज़नेस मुहूर्त कैलकुलेटर सहायक हैं। अन्नकूट का भोग कर्मचारियों और ग्राहकों में बांटना व्यापार की सद्भावना बढ़ाने का सरल तरीका है।

प्रकृति और पर्यावरण का संदेश

गोवर्धन पूजा का सबसे प्रासंगिक संदेश प्रकृति के प्रति सम्मान है। पर्वत, गाय, अन्न और वर्षा सभी जीवन के आधार हैं, और कथा में कृष्ण इन्हीं की पूजा का आग्रह करते हैं। आज के समय में यह संदेश भोजन की बर्बादी रोकने, पौधे लगाने और जल बचाने के संकल्प के रूप में लिया जा सकता है। बच्चों के साथ गमले में तुलसी या कोई पौधा लगाना इस दिन का सुंदर रूप है। नक्षत्र के अनुसार पौधा चुनने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर देखें। तुलसी से जुड़े अगले पर्व की जानकारी तुलसी विवाह 2026 में है।

पूजा सामग्री की सूची

गोवर्धन पूजा के लिए गोबर या मिट्टी, चौकी या स्वच्छ स्थान, रोली, चावल, पुष्प, दीप, धूप, खील-बताशे, गंगाजल और अन्नकूट के व्यंजन पर्याप्त हैं। कुछ घरों में गन्ना, सिंघाड़ा, शकरकंद और मौसमी फल भी चढ़ाए जाते हैं। फ्लैट में गोबर उपलब्ध न हो तो चावल का आटा, रंगोली या मिट्टी का छोटा टीला पर्याप्त है। सामग्री की सूची पहले दिन तैयार कर लें ताकि सुबह की पूजा बिना जल्दबाज़ी के हो। सब कुछ न जुटा पाएं तो घबराएं नहीं, दीप और श्रद्धा से की गई पूजा भी पूर्ण मानी जाती है।

उपाय 1: अन्नकूट का भोग और बांटना, पांच पंक्तियों में

यह उपाय घर में अन्न और कृतज्ञता का संतुलन बनाता है।

क्या: पांच या सात सादे व्यंजनों का भोग लगाकर उसे परिवार और ज़रूरतमंदों में बांटना। कब: 10 नवंबर 2026 को सुबह 08:51 से 11:00 के बीच भोग, और दोपहर 14:00 से पहले वितरण। कितने का: घर की सामर्थ्य अनुसार, लगभग 200 से 500 रुपये की सामग्री पर्याप्त है। कितने दिन: केवल एक दिन, और चाहें तो हर माह की प्रतिपदा पर एक व्यक्ति को भोजन कराएं। आपके लिए क्यों: जिन्हें खर्च और अन्न की बर्बादी की चिंता रहती है, उनके लिए यह अनुशासन बनाता है।

सावधानी: बचा हुआ भोजन ताज़ा रखें, बासी न बांटें और मधुमेह वाले लोग मिठाई की मात्रा सीमित रखें।

उपाय 2: गौ सेवा, पांच पंक्तियों में

गोवंश की सेवा इस पर्व का मूल भाव है और यह उपाय बिना खर्च के भी संभव है।

क्या: गाय को हरा चारा, गुड़ और रोटी खिलाना या गोशाला में चारे का दान। कब: 10 नवंबर की सुबह, प्रातःकाल 06:43 से 08:51 के बीच। कितने का: लगभग 50 से 200 रुपये का चारा या गुड़। कितने दिन: एक दिन, और चाहें तो अगले सात मंगलवार। आपके लिए क्यों: मंगल या सूर्य की कमज़ोरी महसूस करने वालों के लिए यह शांत और सुरक्षित सेवा है।

सावधानी: गाय को मसालेदार या बासी भोजन न दें और उसके पीछे के हिस्से से दूरी रखें।

उपाय 3: गोवर्धन-स्मरण और संकल्प, पांच पंक्तियों में

यह उपाय मन को स्थिर करने और वर्ष भर के संकल्प के लिए है।

क्या: गोवर्धन की आकृति के सामने बैठकर कृष्ण के नाम का 108 बार जप और एक छोटा संकल्प। कब: 10 नवंबर को पूजा के बाद, 14:00 से पहले। कितने का: कोई खर्च नहीं, केवल माला। कितने दिन: एक दिन, चाहें तो प्रत्येक प्रतिपदा पर पांच मिनट। आपके लिए क्यों: जिन्हें निर्णय लेने में अनिश्चितता रहती है, उन्हें इससे दिशा और स्थिरता मिलती है।

सावधानी: संकल्प छोटा और निभाने योग्य रखें, जैसे हर दिन एक रोटी गाय के लिए या भोजन न फेंकना।

किन्हें पूजा और परिक्रमा में सावधानी रखनी चाहिए

घुटनों या हृदय की समस्या वाले लोग लंबी परिक्रमा के बजाय घर में सात परिक्रमा करें। गर्भवती महिलाएं और वृद्धजन भारी अन्नकूट बनाने की जगह हल्का भोग लगाएं। बच्चों को गोबर से खेलने से पहले हाथ धोना सिखाएं और पूजा के बाद साबुन से हाथ धुलवाएं। गोबर के उपलों या दीयों से अग्नि का ध्यान रखें। यह सावधानी भय के लिए नहीं, पर्व को सहज और सुरक्षित बनाने के लिए है। किसी स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सक की सलाह को हर नियम से ऊपर रखें। मंगल जैसे ग्रह की कमज़ोरी के लिए कमज़ोर ग्रह खोजक देखा जा सकता है।

बच्चों और परिवार के साथ कैसे मनाएं

बच्चों को गोवर्धन की आकृति बनाने, पशुओं की मिट्टी की मूर्तियां रखने और अन्नकूट सजाने में शामिल करें। उन्हें कृष्ण और इंद्र की कथा सुनाएं और पूछें कि हम किन चीज़ों के लिए कृतज्ञ हैं। यह चर्चा बच्चों में प्रकृति और अन्न का सम्मान जगाती है। छोटे बच्चों के लिए पूजा 20 मिनट की रखें और उसके बाद खेल या रंगोली का समय दें। परिवार के बुज़ुर्गों से इस दिन की स्मृतियां सुनना भी पीढ़ियों को जोड़ता है। कार्तिक पूर्णिमा जैसे आगे के पर्वों का क्रम पूर्णिमा कब है 2026 में है। आने वाले व्रतों का क्रम एकादशी व्रत 2026 में देखा जा सकता है।

आम ग़लतफ़हमियां: क्या पूजा छूटने से अशुभ होता है?

पहली धारणा है कि गोवर्धन पूजा छूट जाए तो पूरे वर्ष अन्न की कमी रहेगी, जबकि शास्त्र-परंपरा में कोई एक दिन इतना निर्णायक नहीं माना गया है। दूसरी धारणा है कि गोबर का ही पर्वत बनाना अनिवार्य है, जबकि आटे या मिट्टी की आकृति भी मान्य है। तीसरी धारणा है कि पूजा केवल शाम को ही होती है, जबकि इस वर्ष प्रतिपदा 14:00 को समाप्त हो जाती है और सुबह की पूजा अधिक उपयुक्त है। इन भ्रमों से बचकर श्रद्धा और कृतज्ञता पर ध्यान दें। अपने शुभ दिन जानने के लिए लकी डे कैलकुलेटर देखें।

अगला दिन: 11 नवंबर को भाई दूज

गोवर्धन पूजा के अगले दिन 11 नवंबर को सूर्योदय के समय द्वितीया तिथि है, जो 15:53 बजे तक रहेगी। यही भाई दूज का दिन है और भाई को तिलक लगाने का अपराह्न काल 13:08 से 15:16 तक है। उस दिन राहु काल 12:04 से 13:24 रहेगा, इसलिए तिलक के लिए 13:24 से 15:16 का समय सबसे सहज है। भाई दूज की पूरी विधि और समय अलग पृष्ठ पर दिए जा रहे हैं। इससे पहले धनतेरस का क्रम धनतेरस 2026 में देखा जा सकता है, और देवउठनी एकादशी का विवरण देवउठनी एकादशी 2026 में है।

हमारी गणना की पद्धति और इस पृष्ठ की विश्वसनीयता

इस पृष्ठ की सभी तिथि, नक्षत्र और काल त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन से लिए गए हैं, जो Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश पर चलता है और दिल्ली NCR (28.6139°N, 77.209°E) के लिए गणना करता है। पांचों अंग सूर्योदय के समय पढ़े गए हैं, जो पर्व-निर्णय की प्रचलित परंपरा के अनुसार है। त्रिकाल पुस्तकालय में इस पर्व के लिए पृष्ठ-विशिष्ट श्लोक नहीं मिला, इसलिए इस लेख में कोई श्लोक-उद्धरण नहीं दिया गया। अन्य शहरों के लिए समय कुछ मिनट खिसक सकते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग से अंतिम मिलान कर लें।

अपनी कुंडली के अनुसार गोवर्धन पूजा का समय जांचें

गोवर्धन पूजा के सामान्य समय सबके लिए एक जैसे हैं, पर आपके लिए सर्वश्रेष्ठ घड़ी आपकी कुंडली के लग्न और दशा से तय होती है। अपना जन्म विवरण डालकर मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर चलाइए और अपने लिए अनुकूल समय देखिए। यदि आप सरल उपाय चाहते हैं तो उपाय कैलकुलेटर उपयोगी है, और कुंडली बनाने के लिए मुफ्त जन्म कुंडली देखें। आने वाली दशा के लिए दशा कैलकुलेटर भी उपलब्ध है। शुरुआती जांच मुफ़्त है।

Apna Personalized Analysis Lein

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शब्दावली · Glossary

अन्नकूट
अन्न के ढेर जैसा भोग, जिसमें कई व्यंजन सजाकर भगवान को अर्पित किए जाते हैं।
प्रतिपदा
चंद्र पक्ष की पहली तिथि, जिस पर गोवर्धन पूजा होती है।
परिक्रमा
किसी पूज्य वस्तु या स्थान के चारों ओर श्रद्धा से घूमना।
गौ-पूजन
गाय का तिलक, भोजन और सम्मान के साथ किया जाने वाला पूजन।
राहु काल
दिन का वह आठवां हिस्सा (नवंबर में लगभग 80 मिनट) जिसमें नए आरंभ टालने की परंपरा है।

Frequently Asked Questions

गोवर्धन पूजा 2026 कब है?

गोवर्धन पूजा 2026 मंगलवार, 10 नवंबर को है। दिल्ली में प्रतिपदा तिथि सूर्योदय से 14:00 बजे तक रहती है।

गोवर्धन पूजा का मुहूर्त क्या है?

दिल्ली में प्रातःकाल 06:43 से 08:51 तक और संगव काल 08:51 से 11:00 तक पूजा करना सुविधाजनक है। पूजा प्रतिपदा की समाप्ति 14:00 से पहले कर लें।

गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को क्यों नहीं है?

9 नवंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या चल रही है, जो 12:32 बजे तक रहती है। प्रतिपदा 10 नवंबर को सूर्योदय पर होती है, इसलिए पूजा उसी दिन की जाती है।

अन्नकूट क्या है?

अन्नकूट का अर्थ है अन्न का ढेर। इस दिन भगवान को चावल, कढ़ी, सब्ज़ियां, मिठाई और फल सहित कई व्यंजनों का भोग लगाकर उसे सबमें बांटा जाता है।

गोवर्धन पूजा में क्या किया जाता है?

गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर दीप, पुष्प और अन्नकूट अर्पित किया जाता है, आरती और परिक्रमा की जाती है और गौ-पूजन किया जाता है।

क्या गोवर्धन पूजा शाम को की जा सकती है?

इस वर्ष प्रतिपदा 14:00 को समाप्त हो जाती है, इसलिए पूजा सुबह करना अधिक उपयुक्त है। शाम को परिवार का अन्नकूट-भोज रखा जा सकता है।

10 नवंबर 2026 का राहु काल कब है?

दिल्ली में राहु काल 14:45 से 16:05, यमगंड 09:23 से 10:44 और गुलिक काल 12:04 से 13:24 है।

फ्लैट में गोवर्धन पूजा कैसे करें?

गोबर की जगह चावल के आटे, रंगोली या मिट्टी के छोटे टीले से गोवर्धन की आकृति बनाएं। दीप, पुष्प और भोग अर्पित करें और घर में ही सात परिक्रमा करें।

गोवर्धन पूजा के बाद कौन-सा पर्व आता है?

अगले दिन 11 नवंबर 2026 को भाई दूज है। दिल्ली में द्वितीया तिथि सूर्योदय पर है और 15:53 बजे तक रहती है।

गोवर्धन पूजा की कथा क्या है?

कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था। इसी स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।

यह भी देखें · See also

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