मिथुन राशि की शादी कब होगी: 2027 के योग
Trikaal Sandesh — Direct Answer
मिथुन राशि की शादी का समय सप्तम भाव धनु, उसके स्वामी गुरु, चल रही दशा और गोचर से तय होता है। 31 अक्टूबर 2026 से गुरु तीसरे भाव सिंह में आकर अपनी पाँचवीं दृष्टि से सप्तम भाव धनु को देखता है, जो विवाह की चर्चा के लिए सहायक है। सही खिड़की कुंडली से जाँचें।
Deep Dive Analysis
मिथुन राशि की शादी कब होगी: सीधा और छोटा जवाब
मिथुन राशि की शादी की कोई एक तारीख़ या तय उम्र नहीं होती। विवाह की खिड़की तब बनती है जब सप्तम भाव धनु और उसके स्वामी गुरु का बल, चल रही दशा-अंतर्दशा और गुरु-शनि का गोचर एक ही दिशा में इशारा करें। आपके लिए 2026-27 की ख़ास बात यह है कि 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक गुरु और शनि दोनों की दृष्टि सप्तम भाव धनु पर रहती है, यानी डबल ट्रांजिट की एक साफ़ खिड़की बनती है। मतलब यह कि उत्तर किसी एक दिन में नहीं, समय के इन टुकड़ों में खोजना होगा। चरण-दर-चरण तरीक़ा शादी कब होगी: कुंडली से विवाह का समय में समझाया गया है, और अपनी कुंडली का परिणाम शादी कब होगी कैलकुलेटर तुरंत दिखा देता है।
मिथुन चंद्र राशि का मतलब: लग्न नहीं, जन्म का चंद्रमा
यहाँ मिथुन राशि का अर्थ वह राशि है जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था, जो आपके लग्न से अलग भी हो सकती है। गोचर चंद्र राशि से गिना जाता है, इसलिए पहले राशि कैलकुलेटर से पक्का करें कि आपकी चंद्र राशि मिथुन है। लग्न के लिए लग्न कैलकुलेटर और नक्षत्र के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर देखें, क्योंकि मृगशिरा के अंतिम दो पाद, आर्द्रा और पुनर्वसु के पहले तीन पाद मिथुन में आते हैं। इस पेज के सारे गोचर मिथुन चंद्र राशि मानकर लिखे हैं।
सप्तम भाव धनु और स्वामी गुरु: मिथुन के लिए विवाह का केंद्र
मिथुन से गिनने पर सातवाँ घर धनु है और उसका स्वामी गुरु है। वही गुरु आपके दशम भाव मीन का भी स्वामी है, यानी सप्तम और दशम दोनों केंद्र भावों का स्वामी, इसलिए विवाह और करियर आपके यहाँ अक्सर साथ-साथ चलते हैं। पराशर के अनुसार सप्तम भाव का स्वामी स्वराशि या उच्च राशि में बैठा हो तो दांपत्य सुख पूर्ण कहा गया है[1]। गुरु धनु और मीन में अपनी राशि में और कर्क में उच्च का माना जाता है। और गहराई में जाना हो तो कुंडली में विवाह योग और सप्तम भाव कमज़ोर हो तो देरी पढ़ें।
जब लग्नेश बलवान होकर सप्तम से जुड़े
जायाभावफलाध्याय के पंद्रहवें श्लोक के अनुसार बलवान लग्नेश का सप्तम स्थान से संबंध हो तो जीवनसाथी गुणवान होता है और वंश की वृद्धि होती है[2]। यह श्लोक लग्नेश की बात करता है, राशि-स्वामी की नहीं, इसलिए अगर आपका लग्न भी मिथुन है तो उसके स्वामी बुध की राशि, बल और सप्तम भाव या गुरु से उसका संबंध साथ में देखना पड़ता है। बुध और गुरु का नैसर्गिक संबंध पूरी तरह मित्रता का नहीं गिना जाता, इसलिए इस संबंध को डर की तरह नहीं, जाँच-सूची की तरह पढ़ें। दोनों का बल कुंडली बल कैलकुलेटर और ग्रह बल कैलकुलेटर से परखें।
गुरु की स्थिति कैसे जाँचें
अपनी कुंडली में देखें कि गुरु किस राशि और किस भाव में है, उस पर किन ग्रहों की दृष्टि है और वह किसके साथ बैठा है। धनु और मीन उसकी अपनी राशियाँ हैं, कर्क उच्च और मकर नीच राशि मानी जाती है। जन्म कुंडली कैलकुलेटर से स्थिति सामने आ जाती है और ग्रह बल कैलकुलेटर से बल पता चलता है। राशि-बल की भाषा के लिए ग्रहों का उच्च और नीच और भावों के अर्थ के लिए ज्योतिष में बारह भाव पढ़ें। नीच गुरु अपने आप में विवाह रुकने की घोषणा नहीं है, वह केवल एक संकेत है।
शुक्र और गुरु: मिथुन की कुंडली में विवाह के कारक
पुरुष की कुंडली में पत्नी का कारक शुक्र और स्त्री की कुंडली में पति का कारक गुरु माना जाता है। मिथुन के लिए गुरु सप्तमेश भी है, इसलिए स्त्रियों के लिए सप्तमेश और कारक एक ही ग्रह बन जाता है, और गुरु की स्थिति का बल दोहरा महत्व रखता है। पुरुषों के लिए शुक्र पंचम और द्वादश भाव का स्वामी है, यानी प्रेम और शयन-सुख के भावों का, इसलिए शुक्र की दशा-अंतर्दशा प्रेम से विवाह की ओर जाते रिश्ते में विशेष दिखती है। विस्तार के लिए शुक्र अंतर्दशा में विवाह योग और गुरु महादशा: ज्ञान और विकास पढ़ें।
आज की गोचर तस्वीर: 19 अक्टूबर 2026
19 अक्टूबर 2026 को शनि मीन में वक्री है, यानी आपके दशम भाव में, लगभग 15.93 अंश पर, और 11 दिसंबर 2026 को मार्गी होगा। गुरु कर्क में है, यानी द्वितीय भाव में और अपनी उच्च राशि में, और 31 अक्टूबर की दोपहर 12:02 बजे सिंह में, यानी तृतीय भाव में, जाएगा। आपकी राशि के स्वामी बुध 24 अक्टूबर से 13 नवंबर 2026 तक वक्री रहेंगे। ये सभी गणनाएँ त्रिकाल वाणी के गोचर इंजन ने Swiss Ephemeris के आधार पर की हैं। बुध की वक्री अवधि पर बुध वक्री 2026: मिथुन राशि और तिथि-सूची शनि गोचर 2027 की तारीख़ें में है।
शनि दशम भाव में: सप्तम पर दसवीं दृष्टि
मीन आपके लिए दशम भाव है, और गोचर परंपरा में चंद्र राशि से चौथे, सातवें और दसवें स्थान के शनि को कंटक शनि कहा जाता है। यानी 3 जून 2027 तक आप पर शनि इसी श्रेणी में है, जो करियर और ज़िम्मेदारी की परीक्षा से जुड़ा माना जाता है। शनि की दसवीं दृष्टि आपके सप्तम भाव धनु पर पड़ती है, तीसरी दृष्टि द्वादश भाव वृषभ पर और सातवीं दृष्टि चतुर्थ भाव कन्या पर। इसका सीधा अर्थ है कि विवाह की बात में आय, नौकरी की स्थिरता और ज़िम्मेदारी पहले पूछे जाने वाले प्रश्न बनते हैं। इसे डर की तरह नहीं, तैयारी के संकेत की तरह पढ़ें। विस्तार के लिए 2027 के अशुभ राशि और कंटक शनि देखें।
गुरु का सिंह में आना: तीसरे भाव से सप्तम पर दृष्टि
31 अक्टूबर 2026 को गुरु सिंह में आता है, जो मिथुन से तीसरा भाव है। गोचर परंपरा में चंद्र राशि से तीसरे स्थान के गुरु को मिश्रित फल वाला माना जाता है, इसलिए अपने आप में यह कोई विशेष शुभ स्थिति नहीं गिनी जाती। पर यहाँ से उसकी पाँचवीं दृष्टि आपके सप्तम भाव धनु पर, सातवीं दृष्टि नवम भाव कुंभ पर और नौवीं दृष्टि एकादश भाव मेष पर पड़ती है, और यही दृष्टियाँ आपके लिए असली सहारा हैं। 13 दिसंबर 2026 को गुरु वक्री होता है, इसलिए निर्णय में जल्दबाज़ी न करें और पहली बातचीत को दोहराकर परखें। जुपिटर ट्रांज़िट 2026 और गुरु गोचर 2027 में विस्तार है।
डबल ट्रांजिट: 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027
31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक मिथुन के लिए डबल ट्रांजिट बनता है: गुरु सिंह से अपनी पाँचवीं दृष्टि सप्तम भाव धनु पर डालता है, और शनि मीन से अपनी दसवीं दृष्टि उसी धनु पर डालता है। दोनों बड़े ग्रहों का एक ही भाव पर जुड़ना विवाह के प्रश्न में सबसे मज़बूत गोचर संकेतों में गिना जाता है। यही स्थिति 20 अक्टूबर से 26 नवंबर 2027 तक दोबारा बनती है, जब शनि वक्री चाल में मीन में लौटता है और गुरु अभी सिंह में है। यह खिड़की भर है, वादा नहीं, और ठोस रूप तभी लेती है जब चल रही दशा का विवाह से संबंध हो। पूरी विधि शादी कब होगी: कुंडली से विवाह का समय में है।
गुरु की वापसी: उच्च राशि कर्क में द्वितीय भाव
25 जनवरी 2027 को गुरु वक्री चाल में सिंह से वापस कर्क में, यानी अपनी उच्च राशि और आपके द्वितीय भाव में, लौटता है। 13 अप्रैल 2027 को वह मार्गी होता है और 26 जून 2027 तक वहीं रहता है। द्वितीय भाव कुटुंब का घर है, और गोचर परंपरा में चंद्र राशि से दूसरे स्थान का गुरु शुभ माना जाता है, इसलिए यह चरण परिवारों के मिलने, रिश्ता पक्का करने की बातचीत और बड़ों की सहमति के लिए सहायक पढ़ा जाता है। 26 जून 2027 को वह फिर सिंह में लौटता है और 26 नवंबर 2027 को कन्या में जाता है। वक्री गति का मतलब 2027 के वक्री ग्रह में समझाया गया है।
3 जून 2027: शनि का मेष में जाना और एकादश भाव
3 जून 2027 को सुबह लगभग 5:28 बजे शनि मीन से मेष में आता है, जो मिथुन से ग्यारहवाँ भाव है। गोचर परंपरा में चंद्र राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें स्थान के शनि को शुभ माना जाता है, इसलिए दशम का कंटक भार हटकर एकादश का लाभ-भाव आ जाता है। यहाँ से शनि की तीसरी दृष्टि आपकी चंद्र राशि मिथुन पर, सातवीं दृष्टि पंचम भाव तुला पर और दसवीं दृष्टि अष्टम भाव मकर पर पड़ती है। 9 अगस्त को वह वक्री होता है, 20 अक्टूबर 2027 को मीन में लौटता है और 23 फ़रवरी 2028 को अंतिम रूप से मेष में आता है। तिथि-विवरण शनि गोचर 2027: मेष में शनि की पूरी गाइड में है।
मंगल का गोचर: 12 नवंबर 2026 को तृतीय भाव में
12 नवंबर 2026 की रात लगभग 8:19 बजे भारतीय समय पर मंगल कर्क से सिंह में आता है, यानी आपके द्वितीय से तृतीय भाव में। गोचर परंपरा में चंद्र राशि से तीसरे स्थान का मंगल शुभ माना जाता है, और यह साहस, पहल और बातचीत को आगे बढ़ाने की ऊर्जा देता है। मंगल की दृष्टि सप्तम भाव पर सीधे नहीं पड़ती, इसलिए इसे सहायक गोचर पढ़ें, निर्णायक नहीं। मांगलिक दोष का प्रश्न जन्म कुंडली से तय होता है, गोचर से नहीं, इसलिए अपनी स्थिति मंगल दोष कैलकुलेटर से जाँचें। तिथियाँ मंगल गोचर 2026-27 में हैं।
राहु-केतु का बदलाव: 5 दिसंबर 2026
राहु और केतु 5 दिसंबर 2026 को राशि बदलते हैं: राहु कुंभ छोड़कर मकर में और केतु सिंह छोड़कर कर्क में आता है। मिथुन से गिनें तो राहु नौवें घर से आठवें में और केतु तीसरे घर से दूसरे में पहुँचता है। दूसरा और आठवाँ भाव मिलकर कुटुंब, वाणी, ससुराल और साझा धन की कहानी कहते हैं, और यह अर्थ गोचर की प्रचलित परंपरा से है, किसी श्लोक से नहीं। रिश्ते की बातचीत में इसका व्यावहारिक संकेत यही है कि लेन-देन, ख़र्च और परिवार की उम्मीदें शुरू में ही खुलकर तय हों। विवाह का सातवाँ भाव इस धुरी के रास्ते में नहीं आता। राहु-केतु की पूरी चाल राहु-केतु गोचर 2027 में पढ़ें।
महादशा-अंतर्दशा: मिथुन के लिए गुरु सबसे पहले
मिथुन के लिए गुरु सप्तमेश है, इसलिए गुरु की महादशा-अंतर्दशा सबसे पहले जाँचने लायक है, और उसके बाद बुध तथा शुक्र की दशाएँ। सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र या गुरु से जुड़े ग्रह की दशा में विवाह की संभावना जागती है। अपनी वर्तमान दशा दशा कैलकुलेटर से निकालें और दशा-प्रत्यंतर से समय की खिड़की में पढ़ें। दशा अनुकूल न हो तो डबल ट्रांजिट भी केवल परिचय और बातचीत तक रह सकता है, और अनुकूल हो तो वही खिड़की सगाई की ओर बढ़ सकती है।
नवांश D9 में गुरु और शुक्र की परख
नवांश D9 में गुरु और शुक्र की राशि देखें। जन्म कुंडली में गुरु कमज़ोर दिखे पर नवांश में धनु, मीन या कर्क में आ जाए, तो पठन नरम होता है। नवांश की गणना हाथ से कठिन है, इसलिए कुंडली जन्म कुंडली कैलकुलेटर में खोलें और ग्रहों का बल कुंडली बल कैलकुलेटर से परखें। केवल चंद्र राशि पढ़कर शादी कब होगी का जवाब देना अधूरा है, इसलिए इस पेज की हर बात को अपनी कुंडली से मिलाकर अपनाएँ।
मिथुन में विवाह में देरी के सामान्य कारण
देरी का अर्थ इनकार नहीं है। मिथुन राशि वालों में देर के कारण आम तौर पर ये दिखते हैं: सप्तमेश गुरु पर शनि या राहु-केतु का असर, राशि-स्वामी बुध का कमज़ोर या वक्री होना, चल रही दशा का विवाह से दूर रहना, और करियर, आय तथा परिवार की अपेक्षाओं जैसे व्यावहारिक कारण। इनमें से पहले तीन कुंडली देखकर परखे जाते हैं, जबकि आख़िरी आपकी अपनी परिस्थिति से। आगे पढ़ने के लिए सप्तम भाव कमज़ोर हो तो शादी में देरी, बेटे की शादी में देरी के कारण और उपाय और पितृ दोष और विवाह में देरी पढ़ें।
शादी की उम्र: योग के साथ वर्ष, कोई तय आयु नहीं
मिथुन राशि के लिए ग्रंथ में कोई एक आयु नहीं दी गई, पर कुछ योगों के साथ वर्ष गिनाए गए हैं। बृहत् पराशर में कहा गया है कि धनेश लाभ भाव में और लग्नेश कर्म भाव में हो तो पंद्रहवें वर्ष में विवाह होता है[3]। एक और योग में धन भाव का स्वामी लाभ भाव में और लाभ भाव का स्वामी धन भाव में हो तो तेरहवें वर्ष में विवाह कहा गया है[4]। मिथुन में धनेश चंद्र और लाभेश मंगल हैं, इसलिए इन योगों को पढ़ते समय इन्हीं दो ग्रहों की स्थिति देखनी पड़ती है। ये पुरानी सामाजिक आयु-गणनाएँ हैं, इन्हें आज योग की बनावट की तरह पढ़ें, आयु की मोहर की तरह नहीं। शादी की उम्र का भ्रम में इसकी पूरी पड़ताल है।
27 से 33 वर्ष का विवाह: ग्रंथ का एक योग
बृहत् पराशर के अनुसार भाग्य भाव से सातवें स्थान पर शुक्र हो और शुक्र से सातवें पर सप्तमेश, तो विवाह तीसवें या सत्ताईसवें वर्ष में बताया गया है[5]। इसमें शुक्र का स्थान भाग्य भाव से गिना जाता है, और मिथुन के लिए भाग्य भाव कुंभ है। यह एक विशेष बनावट है, जो हर किसी की कुंडली में नहीं मिलती, और न मिलने से विवाह में कोई कमी नहीं मानी जाती। आज के समय में 27 से 33 के बीच का विवाह सामान्य है। योग को अपनी कुंडली में परखने के लिए कुंडली में विवाह योग और लड़के की शादी नहीं हो रही पढ़ें।
मित्र-मंडली और परिचय से रिश्ता
31 अक्टूबर 2026 से गुरु की नौवीं दृष्टि आपके एकादश भाव मेष पर पड़ती है, जो मित्रों, नेटवर्क और इच्छा-पूर्ति का घर है, और 3 जून 2027 से शनि भी उसी मेष में आ जाता है। इसलिए 2026-27 में मिथुन राशि वालों के लिए रिश्ते अक्सर मित्र-मंडली, सहकर्मियों या परिचितों के माध्यम से आगे बढ़ने की गुंजाइश रखते हैं। यह संकेत है, वादा नहीं, पर व्यावहारिक सलाह यह है कि अपने परिचय-दायरे को खोलें और रिश्ते की बातें परिवार के सामने सहज रखें। अपना रुझान प्रेम या अरेंज मैरिज कैलकुलेटर से समझें, साथ ही लव मैरिज और कुंडली मिलान पढ़ें।
कुंडली मिलान: मिथुन के लिए क्या देखें
कुंडली मिलान को पहला कदम मानें, आख़िरी नहीं। मिथुन के लिए नाड़ी और भकूट जाँचने के साथ यह भी देखें कि दोनों के सप्तमेश कितने बलवान हैं और दोनों की आने वाली अंतर्दशाएँ कैसे मिलती हैं। ऊँचा अंक अपने आप में संबंध की गारंटी नहीं है। शुरुआत 36 गुण मिलान समझकर करें, फिर जन्म तारीख़ से कुंडली मिलान चलाएँ, और मंगल दोष का सवाल हो तो मांगलिक और गैर-मांगलिक का विवाह पढ़ें।
गुरुवार का उपाय: सप्तमेश गुरु के लिए पाँच पंक्तियाँ
क्या करें: गुरुवार की सुबह किसी बुज़ुर्ग, शिक्षक या मार्गदर्शक को प्रणाम करें और उन्हें केले या चने की दाल जैसी पीली चीज़ भेंट करें। कब: हर गुरुवार सुबह नौ बजे से पहले। कितने का: बीस से पचास रुपये। कितने दिन: लगातार 16 गुरुवार। आपके लिए क्यों: गुरु आपका सप्तमेश है और 31 अक्टूबर 2026 से उसकी दृष्टि सीधे सप्तम भाव पर पड़ रही है, इसलिए बड़ों का आशीर्वाद इस दौर का सबसे सहज उपाय है। सावधानी: पुखराज जैसा रत्न अपने मन से न पहनें, पहले क्या मुझे पुखराज पहनना चाहिए से जाँच लें।
शुक्रवार का उपाय: प्रेम और शयन-सुख के स्वामी शुक्र के लिए
क्या करें: शुक्रवार की शाम घर में सफ़ेद फूल या थोड़े चावल रखकर दो मिनट शांत बैठें और अपने किसी प्रिय से एक अच्छी बात कहें। कब: हर शुक्रवार सूर्यास्त के आसपास। कितने का: शून्य खर्च, फूल चढ़ाएँ तो दस-बीस रुपये। कितने दिन: लगातार 11 शुक्रवार। आपके लिए क्यों: शुक्र आपके पंचम यानी प्रेम और द्वादश यानी शयन-सुख के भाव का स्वामी है, और रिश्ते की कोमलता को दिनचर्या में लाने का यह सरल तरीक़ा है। सावधानी: कोई महँगा रत्न या अनुष्ठान न ख़रीदें, और हीरा पहनने से पहले क्या मुझे हीरा पहनना चाहिए से जाँच लें।
शनिवार का संयम: दशम भाव के शनि के लिए पाँच पंक्तियाँ
क्या करें: शनिवार की शाम एक दीपक जलाएँ और अपने काम की एक लंबित ज़िम्मेदारी पूरी करने का संकल्प लें। कब: हर शनिवार सूर्यास्त के बाद। कितने का: मुफ़्त, केवल दीपक का तेल। कितने दिन: लगातार 19 शनिवार। आपके लिए क्यों: शनि इस समय आपके दशम भाव में है, और वही भाव करियर की ज़िम्मेदारी का है जिससे विवाह की बात अक्सर जुड़ती है। सावधानी: अपनी क्षमता से बड़ा नियम न लें, छोटा नियम लंबे समय तक निभाना ज़्यादा कारगर है। शनि के बारे में संतुलित जानकारी क्या साढ़ेसाती हमेशा बुरी होती है में है।
मिथुन राशि के बारे में आम मिथक
पहला मिथक: दशम का शनि विवाह रोक देता है। वह करियर और ज़िम्मेदारी की परीक्षा लेता है, और 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 के बीच गुरु का साथ उसे सहारा भी देता है। दूसरा मिथक: मिथुन राशि वाले रिश्ते में अस्थिर होते हैं। कोई ग्रंथ राशि के आधार पर आचरण तय नहीं करता। तीसरा मिथक: गुरु तीसरे भाव में आया तो शादी नहीं होगी। गोचर में स्थान से ज़्यादा दृष्टि और दशा का मेल देखा जाता है। चौथा मिथक: डबल ट्रांजिट का मतलब शादी पक्की। गोचर खिड़की देता है, वादा दशा देती है। क्या मंगल दोष असली है और मंगल दोष के मिथक भी देखें।
परिवार क्या करें और क्या न करें
घरवालों के लिए तीन सीधी सलाह हैं। सबसे पहले, जिसकी शादी होनी है उससे उसकी पसंद, काम और शहर के बारे में खुलकर बात करें, कुंडली का नंबर उसके बाद आए। फिर, कोई अगर पक्की तारीख़ या भारी अनुष्ठान के बदले शादी का भरोसा दे, तो उसे पैसे देने से बचें। आख़िर में, शुभ दिन चुनने के लिए विवाह मुहूर्त 2027 और जनवरी 2027 के विवाह मुहूर्त देखें, क्योंकि गुरु-शनि की पहली साझा खिड़की 25 जनवरी 2027 तक है। जल्दबाज़ी का दबाव महसूस हो तो चट मंगनी पट विवाह के उपाय काम आएगा।
अपनी कुंडली से सही समय कैसे निकालें
यह काम तीन कदम में हो जाता है। कदम एक: जन्म की तारीख़, घड़ी का समय और शहर डालकर जन्म कुंडली तैयार करें। कदम दो: दशा कैलकुलेटर खोलकर आने वाली दो अंतर्दशाओं में देखें कि गुरु, बुध, शुक्र या सातवें भाव से कोई जुड़ाव है या नहीं। कदम तीन: शादी कब होगी कैलकुलेटर से मिला परिणाम ऊपर दी गई तिथियों से मिलाएँ, सबसे पहले 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 वाली अवधि से। जन्म-समय में कुछ मिनट की चूक भी लग्न बदल सकती है, इसलिए समय पक्का न हो तो नक्षत्र कैलकुलेटर से कम से कम अपना चंद्र नक्षत्र निकाल लें।
हम क्या नहीं कह सकते
किसी भी व्यक्ति की शादी का दिन बताना हमारे बस में नहीं है, और जो ऐसा दावा करे उससे सावधान रहें। डबल ट्रांजिट की खिड़की भी विवाह की गारंटी नहीं है, यह केवल अनुकूल समय की ओर इशारा करती है। ऊपर लिखी गोचर तिथियाँ त्रिकाल वाणी की गणना से निकली हैं, फिर भी हर मिथुन चंद्र राशि वाले पर एक जैसा फल नहीं आता, क्योंकि दशा और जन्म कुंडली हर व्यक्ति की अपनी होती है। ग्रंथ के हवाले केवल इस पेज पर दिए श्लोकों तक हैं, और उनका सरल अर्थ हमने अपनी भाषा में लिखा है। किसी बात पर संदेह हो तो शादी कब होगी का निःशुल्क परिणाम अपनी कुंडली से देखें।
इस मार्गदर्शन के बारे में: लेखक और स्रोत
इस पेज को रोहित गुप्ता, Chief Vedic Architect, Trikaal Vaani ने लिखा है, जो 16 से अधिक वर्षों से पराशरी ज्योतिष का अभ्यास कर रहे हैं। ग्रहों की तिथियाँ Swiss Ephemeris आधारित त्रिकाल वाणी गोचर इंजन से निकाली गई हैं, और श्लोक बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अठारहवें अध्याय, जायाभावफलाध्याय, से लिए गए हैं। ज्योतिष की शुरुआत करनी हो तो कुंडली कैसे काम करती है और ज्योतिष में बारह भाव से करें।
Apna Personalized Analysis Lein
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शब्दावली · Glossary
- सप्तम भाव
- कुंडली का सातवाँ घर, जो विवाह और साझेदारी का भाव है।
- सप्तमेश
- सातवें भाव का स्वामी ग्रह, जिसकी राशि और बल से विवाह के संकेत पढ़े जाते हैं।
- डबल ट्रांजिट
- गुरु और शनि का एक साथ किसी भाव या उसके स्वामी को छूना, जिसे समय की मज़बूत खिड़की माना जाता है।
- कंटक शनि
- चंद्र राशि से चौथे, सातवें या दसवें स्थान में शनि का गोचर, जिसे गोचर परंपरा परख और धीमी गति से जोड़ती है।
- उच्च राशि
- वह राशि जिसमें कोई ग्रह सबसे अधिक बलवान माना जाता है, जैसे कर्क में गुरु।
- नवांश
- राशि का नौवाँ विभाजन यानी D9 कुंडली, जो विवाह की बारीक जाँच के काम आती है।
ग्रंथ सन्दर्भ · Classical Sources
इस लेख के हर नियम का मूल स्रोत — ग्रंथ, अध्याय और श्लोक संख्या के साथ।
जायाभावफलं वक्ष्ये शृणु त्वं द्विजसत्तम । जायाधिपे स्वभे स्वोच्चे स्त्रीसुखं पूर्णमादिशेत्
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 1सप्तमेश अपनी राशि या उच्च राशि में हो तो जीवनसाथी का पूर्ण सुख बताया गया है।
If the 7th lord is in its own sign or exaltation, full happiness from the spouse is indicated.
लग्नेशो बलसंयुक्तः कलत्रस्थानसंयुतः । तद्।ह्भार्या सद्।ह्गुणोपेता पुत्रपौत्रप्रवर्धिनी
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 15बलवान लग्नेश सप्तम स्थान से जुड़ा हो तो जीवनसाथी गुणवान होता है और संतान-वंश बढ़ता है।
A strong lagna lord connected with the 7th house gives a virtuous spouse and thriving children and grandchildren.
धनेशे लाभराशिस्थे लग्नेशे कर्मराशिगे । अब्दे पञ्चदशे प्राप्ते विवाहं लभते नरः
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 28धनेश लाभ भाव में और लग्नेश कर्म भाव में हो तो पंद्रहवें वर्ष में विवाह कहा गया है।
Lord of the 2nd in the 11th house and lord of the lagna in the 10th: marriage in the 15th year.
धनेशे लाभराशिस्ते लाभेशे धनराशिगे । अब्दे त्रयोदशे प्राप्ते विवाहं लभते नरः
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 29धनेश लाभ भाव में और लाभेश धन भाव में हो तो तेरहवें वर्ष में विवाह कहा गया है।
Lord of the 2nd in the 11th house and lord of the 11th in the 2nd: marriage in the 13th year.
भाग्याज्जामित्रगे शुक्रे तद्द्यूने दारनायके । त्रिंशे वा सप्तविंशाब्दे विवाहं लभते नरः
— बृहत् पराशर होरा शास्त्र, अध्याय 18 — जायाभावफलाध्याय · श्लोक 34भाग्य भाव से सप्तम में शुक्र और उससे सप्तम में सप्तमेश हो तो तीसवें या सत्ताईसवें वर्ष में विवाह कहा गया है।
Venus in the 7th from the 9th house and the 7th lord in the 7th from there: marriage in the 30th or 27th year.
हर सन्दर्भ त्रिकाल वाणी ग्रंथ-पुस्तकालय या प्रतिष्ठित मुक्त स्रोत से मिलाया गया · व्याख्या: Rohiit Gupta, Chief Vedic Architect
Frequently Asked Questions
मिथुन राशि की शादी कब होगी?
कोई एक तारीख़ तय नहीं होती। सप्तम भाव धनु और गुरु की स्थिति, चल रही दशा और गुरु-शनि का गोचर मिलकर खिड़की बनाते हैं। 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक दोनों की दृष्टि सप्तम भाव पर रहती है।
मिथुन राशि के लिए सप्तम भाव कौन सा है?
मिथुन से सातवाँ भाव धनु है और उसका स्वामी गुरु है। गुरु दशम भाव मीन का भी स्वामी है, इसलिए विवाह और करियर साथ-साथ पढ़े जाते हैं।
मिथुन राशि के लिए डबल ट्रांजिट कब बनता है?
पहली खिड़की 31 अक्टूबर 2026 से 25 जनवरी 2027 तक है, जब गुरु सिंह से पाँचवीं दृष्टि और शनि मीन से दसवीं दृष्टि सप्तम भाव धनु पर डालते हैं। दूसरी खिड़की 20 अक्टूबर से 26 नवंबर 2027 तक बनती है।
क्या मिथुन राशि के लिए दशम का शनि विवाह रोकता है?
नहीं। गोचर परंपरा दशम के शनि को कंटक श्रेणी में गिनती है, पर इसका अर्थ करियर और ज़िम्मेदारी की परीक्षा है। 3 जून 2027 से शनि मेष में, यानी एकादश भाव में, जाता है।
गुरु तीसरे भाव में आए तो मिथुन राशि को क्या मिलता है?
31 अक्टूबर 2026 से गुरु सिंह में, यानी तीसरे भाव में, आता है, जिसे गोचर परंपरा मिश्रित मानती है। पर उसकी पाँचवीं दृष्टि सप्तम भाव पर पड़ती है, जो विवाह की चर्चा के लिए सहायक है।
25 जनवरी 2027 के बाद मिथुन राशि के लिए क्या बदलता है?
गुरु वक्री चाल में अपनी उच्च राशि कर्क में, यानी आपके द्वितीय भाव में, लौटता है और 26 जून 2027 तक वहीं रहता है। द्वितीय भाव कुटुंब का है, इसलिए यह परिवारों के मिलने और बड़ों की सहमति का दौर माना जाता है।
क्या मिथुन राशि वाले मांगलिक होते हैं?
राशि से मांगलिक दोष तय नहीं होता। यह जन्म कुंडली में मंगल के भाव से देखा जाता है। मांगलिक स्थिति जानने के लिए मंगल दोष कैलकुलेटर चलाएँ।
मिथुन राशि की स्त्री के लिए कौन सा ग्रह देखें?
परंपरा में स्त्री की कुंडली में पति का कारक गुरु माना जाता है, और मिथुन के लिए गुरु सप्तमेश भी है। इसलिए गुरु की दशा, उसकी राशि और गोचर सबसे पहले देखें।
अपनी शादी का सही समय कैसे पता करें?
जन्म तारीख़, समय और स्थान से कुंडली बनाएँ, अगली दो अंतर्दशाओं में गुरु, बुध, शुक्र या सप्तम भाव का संबंध देखें और फिर गोचर की खिड़की से मिलाएँ। यह पूरा क्रम निःशुल्क शादी कब होगी कैलकुलेटर पर दिख जाता है।
क्या उपाय करने से शादी जल्दी हो जाती है?
कोई उपाय समय की गारंटी नहीं देता। गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार के सरल नियम केवल अनुशासन और मन की स्थिरता देते हैं, और इन्हें बहुत कम ख़र्च में किया जा सकता है।
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