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भाई दूज 2026: 11 नवंबर तिलक मुहूर्त, विधि

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect16 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

भाई दूज 2026 बुधवार, 11 नवंबर को है। दिल्ली में द्वितीया तिथि 11 नवंबर को सूर्योदय (06:44) से 15:53 बजे तक रहती है। तिलक का अपराह्न समय 13:08 से 15:16 है, पर राहु काल 12:04 से 13:24 तक होने के कारण 13:24 से 15:16 का समय सबसे सहज है। बहन भाई को तिलक लगाकर यमुना-यम की परंपरा निभाती है।

Deep Dive Analysis

भाई दूज 2026 की तारीख और द्वितीया का समय

भाई दूज 2026 बुधवार, 11 नवंबर को मनाई जाएगी। दिल्ली NCR के पंचांग में कार्तिक शुक्ल द्वितीया 10 नवंबर को 14:00 बजे आरंभ होती है और 11 नवंबर को 15:53 बजे समाप्त होती है। 11 नवंबर को सूर्योदय के समय द्वितीया चल रही है और अपराह्न काल पूरी तरह इसी तिथि में आता है, इसलिए भाई दूज इसी दिन मानी जाती है। गोवर्धन पूजा एक दिन पहले, यानी 10 नवंबर को है, जिसका विवरण गोवर्धन पूजा 2026 में है। अपने नगर का मिलान मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से कर लें।

भाई दूज के नाम: यम द्वितीया और भ्रातृ द्वितीया

भाई दूज को यम द्वितीया और भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है। यम द्वितीया नाम यम और उनकी बहन यमुना की कथा से आता है, और भ्रातृ द्वितीया का अर्थ है भाई की द्वितीया। दक्षिण भारत में इसे यम द्वितीया, बंगाल में भाई फोंटा और महाराष्ट्र में भाऊ बीज के रूप में मनाया जाता है। रूप अलग हैं पर भाव एक है: भाई की दीर्घायु और बहन के स्नेह की कामना। दीपावली के पांच दिन के उत्सव का यह अंतिम दिन है, जिसकी शुरुआत धनतेरस 2026 से होती है। इससे पहले शरद पूर्णिमा का क्रम शरद पूर्णिमा 2026 में है।

11 नवंबर 2026 का पंचांग: दिल्ली NCR के पांचों अंग

सूर्योदय के समय 11 नवंबर को द्वितीया तिथि है (शुक्ल पक्ष) और वह 15:53 बजे तक रहती है। नक्षत्र अनुराधा (पद 4) है और 11:38 तक रहेगा, योग अतिगंड है (12 नवंबर 03:40 तक) और करण कौलव है (15:53 तक)। सूर्योदय 06:44 और सूर्यास्त 17:25 है। यह गणना त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन से, लाहिड़ी अयनांश और दिल्ली NCR के निर्देशांक पर की गई है। शहर बदलने पर समय में कुछ मिनट का अंतर आ सकता है, इसलिए अंतिम मिलान स्थानीय पंचांग से कर लें। रोज़ का समय मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर पर भी देखा जा सकता है।

10 नवंबर बनाम 11 नवंबर: भाई दूज किस दिन?

द्वितीया 10 नवंबर को 14:00 बजे से शुरू हो जाती है, इसलिए कुछ लोग दुविधा में रहते हैं। पर भाई दूज का तिलक अपराह्न काल में किया जाता है, और 10 नवंबर का अपराह्न (13:08 से 15:17) 13:08 से 14:00 तक प्रतिपदा में और 14:00 से 15:17 तक द्वितीया में बंटा है। दूसरी ओर 11 नवंबर का पूरा अपराह्न (13:08 से 15:16) द्वितीया के भीतर है। इसी कारण दिल्ली के पंचांग में भाई दूज 11 नवंबर को निर्धारित है। यदि आपके शहर में समय थोड़े अलग हों तो स्थानीय पंचांग देख लें। अमावस्या और प्रतिपदा के क्रम के लिए अमावस्या कब है 2026 देखें।

तिलक का शुभ समय: 13:24 से 15:16

11 नवंबर को अपराह्न काल 13:08 से 15:16 तक है, और इसी में तिलक करना श्रेष्ठ माना जाता है। पर इसी दिन राहु काल 12:04 से 13:24 तक है, इसलिए 13:08 से 13:24 का छोटा हिस्सा छोड़कर 13:24 से 15:16 के बीच तिलक करना सबसे सहज रहता है। यह समय द्वितीया तिथि (15:53 तक) के भीतर भी है। यदि भाई-बहन दोपहर में एक साथ नहीं हो सकते तो प्रदोष काल (17:25 से 20:04) में भी सरल रूप से तिलक किया जा सकता है, पर उस समय द्वितीया समाप्त हो चुकी होती है, इसलिए प्राथमिकता अपराह्न को दें।

11 नवंबर के अशुभ काल: राहु काल, यमगंड और गुलिक

11 नवंबर को राहु काल 12:04 से 13:24, यमगंड 08:04 से 09:24 और गुलिक काल 10:44 से 12:04 रहेगा। अभिजित मुहूर्त 11:43 से 12:25 है, पर वह 12:04 तक गुलिक काल और उसके बाद राहु काल से ढका है, इसलिए इस दिन अभिजित को तिलक के लिए आदर्श नहीं माना जा सकता। ये काल रोक नहीं, सावधानी के संकेत हैं और इनमें भोजन, मिलन और पूजा-पाठ की मनाही नहीं है। केवल नए आरंभ या उपहार देने जैसे कार्यों के लिए इन समयों से बचें। समय के सही मिलान के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर देखें।

कथा: यम और यमुना का मिलन

कथा के अनुसार सूर्य की पुत्री यमुना अपने भाई यम को बार-बार घर बुलाती थीं, पर यम व्यस्तता के कारण नहीं आ पाते थे। एक कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वे अपनी बहन के घर पहुंचे। यमुना ने तिलक लगाकर भोजन कराया और भाई का आदर किया। प्रसन्न होकर यम ने वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन के हाथ से तिलक लगवाकर भोजन करेगा, उसे अकाल भय नहीं सताएगा। इसी स्मृति में भाई दूज मनाई जाती है। कथा का सार भय नहीं, बहन-भाई के स्नेह और आदर की सुरक्षा-भावना है।

भाई दूज की पूजा-विधि: तिलक, आरती और भोजन

सुबह स्नान करके पूजा की थाली सजाएं, जिसमें रोली, अक्षत, दीप, मिठाई, नारियल और कलावा हो। भाई को चौकी पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बिठाएं, फिर रोली और चावल का तिलक लगाएं, आरती उतारें और कलावा बांधें। भाई को नारियल या मिठाई देकर भोजन कराएं। भाई बहन को उपहार देता है और उसके सुख-सौभाग्य की कामना करता है। पूरी विधि 15 से 20 मिनट में हो जाती है। जो लोग फ्लैट में हैं, वे घर में ही सरल थाली से यही क्रम निभा सकते हैं। अपने ग्रहों के अनुसार सरल उपाय उपाय कैलकुलेटर से जांचें।

पूजा थाली में क्या रखें

भाई दूज की थाली में रोली, अक्षत, एक दीया, मिठाई, पान-सुपारी, नारियल, फूल और कलावा रखा जाता है। कुछ घरों में कमल गट्टे, चांदी का सिक्का या दूर्वा भी रखी जाती है। उत्तर भारत में भाई को तिलक के बाद गोला या सूखा नारियल देने की परंपरा है। थाली की सामग्री का मूल्य महत्वपूर्ण नहीं, उसकी स्वच्छता और भाव महत्वपूर्ण है। सामग्री पहले दिन जुटा लें और दीया घी या तेल से जलाएं। यदि सब कुछ न मिले तो रोली, चावल और मिठाई ही पर्याप्त मानी जाती है। शुभ समय के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर देखें।

भाई को क्या उपहार दें और बहन को क्या मिले

परंपरा में भाई बहन को वस्त्र, आभूषण या धन भेंट करता है, और बहन भाई को तिलक के साथ मिठाई, नारियल या हस्तनिर्मित उपहार देती है। उपहार का मूल्य संबंध का मापदंड नहीं होना चाहिए। आज के समय में पुस्तक, पौधा या अनुभव-आधारित उपहार भी लोकप्रिय हैं। यदि आप धन या आभूषण की खरीदारी की योजना बना रहे हैं तो उसका समय धनतेरस पर देख चुके हैं, और सोने की खरीद के नियम सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त में उपलब्ध हैं। उपहार देते समय बजट पर ध्यान रखें। वाहन या संपत्ति उपहार सोच रहे हों तो वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त और प्रॉपर्टी खरीदने का शुभ मुहूर्त देखें।

भाई दूज और रक्षाबंधन में अंतर

रक्षाबंधन में बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई रक्षा का वचन देता है। भाई दूज में बहन भाई को तिलक लगाती है और उसकी दीर्घायु और सुख की कामना करती है, जबकि भाई बहन को उपहार देकर उसके आदर का वचन देता है। रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को और भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पड़ती है। दोनों पर्व भाई-बहन के संबंध को सम्मान देते हैं, पर इनका प्रतीक अलग है: एक में धागा और दूसरे में तिलक। इसलिए भाई दूज की तैयारी रक्षाबंधन से भिन्न रखें और उसकी तिथि अलग से जांचें। पूर्णिमा की तिथियां पूर्णिमा कब है 2026 में हैं।

अनुराधा नक्षत्र और वृश्चिक का चंद्रमा

11 नवंबर की सुबह नक्षत्र अनुराधा के चौथे पद में है, जो 11:38 तक रहेगा, उसके बाद ज्येष्ठा आरंभ होता है। अनुराधा को मैत्री, निष्ठा और संबंधों में स्थिरता का नक्षत्र माना जाता है। चंद्रमा वृश्चिक राशि में है, जो भावनाओं की गहराई देता है। यह स्थिति भाई-बहन के स्नेह को शब्दों से ज़्यादा भाव में व्यक्त करने के लिए अनुकूल मानी जा सकती है। अपने जन्म-नक्षत्र का भाव जानने के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर और चंद्र राशि के लिए राशि कैलकुलेटर का उपयोग करें।

बुधवार और बुध: संवाद का ग्रह

बुधवार का स्वामी बुध है, जो वाणी, संवाद और बुद्धि का कारक है। बुध इस समय तुला राशि में लगभग 11.3 अंश पर है, जो संतुलन और संबंधों की राशि है। भाई-बहन के बीच संवाद की मिठास और पुराने मनमुटाव को सुलझाने के लिए यह एक सहज दिन माना जा सकता है। इसका उपाय भी सरल है: हरी मूंग या हरे फल का दान और बुध के बीज मंत्र ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः का 108 बार जप। जिन्हें अपनी कुंडली में बुध की स्थिति जांचनी हो, वे कमज़ोर ग्रह खोजक देख सकते हैं।

सूर्य तुला में और मंगल कर्क में: अंतिम अंश

सूर्य तुला राशि में लगभग 24.6 अंश पर है और मंगल कर्क राशि में लगभग 29.4 अंश पर, यानी राशि के अंत पर। दोनों अपनी नीच राशियों में हैं, जिसका सामान्य अर्थ है कि अधिकार, तेज़ी और क्रोध के विषयों में संयम रखना बेहतर है। भाई-बहन के बीच किसी पुरानी बात पर बहस की बजाय इस दिन मिठास को प्राथमिकता दें। उपाय सरल है: सूर्य को जल देना और लाल मसूर या गुड़ का दान करना। मंगल जल्द ही सिंह राशि में प्रवेश करने वाला है, इसलिए मंगल लगभग 12 नवंबर को सिंह में प्रवेश करेगा। ग्रहों की चाल के लिए 2027 के गोचर भी देखें।

शुक्र कन्या में वक्री और गुरु सिंह में

शुक्र कन्या राशि के लगभग 28.8 अंश पर वक्री है, जो संबंधों में सावधानी से व्यवहार करने का संकेत देता है। गुरु सिंह में लगभग 1.2 अंश पर है, जो परिवार, बच्चों और विवेक की राशि है। दोनों का सरल अर्थ यह है कि भाई-बहन के संबंध में दिखावे की बजाय सच्चे भाव को महत्व दें। उपाय के रूप में परिवार में सब एक साथ भोजन करें और बुज़ुर्गों का आशीर्वाद लें। गुरु के आगे के मार्ग के लिए गुरु गोचर 2027 देखें, और शुभ गुरु-चंद्र मेल के लिए गजकेसरी योग पढ़ें।

कुंडली में भाई-बहन का भाव: तीसरा और ग्यारहवां

ज्योतिष में तीसरा भाव छोटे भाई-बहन, साहस और संवाद का भाव है और ग्यारहवां भाव बड़े भाई-बहन और लाभ का भाव माना जाता है। मंगल को भाई-बहन का कारक माना जाता है। यदि इन भावों या ग्रहों पर पाप प्रभाव हो तो भाई-बहन के बीच दूरी या मतभेद की संभावना बनती है। पर इसका समाधान पर्वों के स्नेह, संवाद और छोटे उपायों से हो सकता है। अपनी कुंडली में ये भाव देखने के लिए मुफ्त जन्म कुंडली बनाएं। धन-संबंधी भाव के लिए धन योग भी पढ़ें।

राहु कुंभ में और केतु सिंह में: परिवार की योजना

नवंबर 2026 में राहु कुंभ में और केतु सिंह में है, और दिसंबर की शुरुआत में यह धुरी मकर-कर्क में बदलेगी। इसका पर्व पर कोई सीधा अशुभ अर्थ नहीं है, केवल यह संकेत है कि आने वाले वर्ष में परिवार और संबंधों के विषय कुछ नए रंग लेंगे। इसलिए भाई दूज के मिलन में आने वाले वर्ष की पारिवारिक योजना, जैसे साझी ज़िम्मेदारी या संपत्ति की बातचीत, को शांत भाव से रखना अच्छा रहेगा। बदलाव का विस्तार राहु-केतु गोचर 2027 में और ग्रहणों का ग्रहण 2027 कब है में है।

दूर रहने वाले भाई-बहन कैसे मनाएं

यदि भाई या बहन दूसरे शहर या देश में हैं तो तिलक की रस्म वीडियो कॉल पर भी निभाई जा सकती है। बहन अपने स्थान पर थाली सजाकर संकल्प के साथ तिलक की मुद्रा करती है और भाई अपने स्थान पर वही भाव रखता है। उपहार और मिठाई ऑनलाइन भेजी जा सकती है, पर इसके लिए पहले से समय निर्धारित करें ताकि अपराह्न 13:24 से 15:16 के बीच वीडियो कॉल हो सके। जिनके लिए यह संभव नहीं, वे डाक या कूरियर से रोली-चावल की छोटी थैली भेजकर भी परंपरा निभा सकते हैं। शुभ घड़ी तय करने के लिए लकी डे कैलकुलेटर देखें।

जिनके भाई या बहन नहीं हैं

यदि किसी के भाई या बहन नहीं हैं तो वे चचेरे, ममेरे, मौसेरे या मुंहबोले भाई-बहनों के साथ यह पर्व मना सकते हैं। कई परिवार मित्रों को भी इसी भाव से तिलक लगाकर इस दिन को सम्मान देते हैं। जो लोग अकेले हैं, वे इस दिन किसी ज़रूरतमंद को भोजन कराकर या किसी अनाथालय में मिठाई देकर यम द्वितीया की भावना निभा सकते हैं। पर्व का मूल अर्थ संबंधों का आदर है, इसलिए रिश्तों के नाम से अधिक उनके भाव को प्राथमिकता दें। इस भाव से किया गया कार्य भी शुभ माना जाता है।

उपाय 1: तिलक और आरती, पांच पंक्तियों में

यह उपाय भाई-बहन के संबंध में सुरक्षा और स्नेह की भावना को मज़बूत करता है।

क्या: रोली-चावल का तिलक, आरती और भाई को मिठाई खिलाना। कब: 11 नवंबर 2026 को अपराह्न 13:24 से 15:16 के बीच। कितने का: रोली, चावल, दीया और मिठाई मिलाकर लगभग 100 से 300 रुपये। कितने दिन: केवल एक दिन, और चाहें तो हर माह की द्वितीया पर फोन पर हाल-चाल पूछें। आपके लिए क्यों: जिनके भाई-बहन से दूरी बनी है, उनके लिए यह पहल का सरल अवसर है।

सावधानी: तिलक के बाद दीया सुरक्षित रखें, बच्चों को लौ से दूर रखें और मधुमेह वाले भाई-बहन के लिए मिठाई सीमित रखें।

उपाय 2: बुध के लिए हरी मूंग का दान, पांच पंक्तियों में

बुधवार को पड़ने वाली भाई दूज पर यह उपाय संवाद और समझ को मधुर बनाता है।

क्या: हरी मूंग, हरे फल या हरी सब्ज़ी का दान और बुध मंत्र ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः का 108 बार जप। कब: 11 नवंबर की सुबह सूर्योदय 06:44 के बाद, यमगंड (08:04 से 09:24) के बाद का समय सुविधाजनक है। कितने का: लगभग 50 से 200 रुपये की सामग्री। कितने दिन: एक दिन, चाहें तो अगले तीन बुधवार। आपके लिए क्यों: जिन भाई-बहनों में बातचीत की कमी या ग़लतफ़हमी रहती है, उनके लिए यह उपाय सरल है।

सावधानी: दान किसी ज़रूरतमंद को ही दें और जप शांत मन से करें, दबाव में नहीं।

उपाय 3: क्षमा और मिलन का संकल्प, पांच पंक्तियों में

यह उपाय भाई-बहन के पुराने मनमुटाव को हल्का करने के लिए है और इसमें कोई खर्च नहीं होता।

क्या: तिलक के बाद एक-दूसरे से किसी पुरानी बात के लिए क्षमा मांगना और एक छोटा वादा करना। कब: 11 नवंबर को तिलक के तुरंत बाद, 13:24 से 15:16 के बीच। कितने का: कोई खर्च नहीं। कितने दिन: एक दिन, पर वादा पूरे वर्ष निभाएं। आपके लिए क्यों: जिन परिवारों में संपत्ति या पुरानी बात पर दूरी है, उनके लिए यह पहला कदम बन सकता है।

सावधानी: क्षमा दबाव में न मांगें और यदि बात बड़े विवाद की है तो उसे उसी दिन सुलझाने की जल्दबाज़ी न करें।

किन्हें पूजा में सावधानी रखनी चाहिए

जो भाई-बहन बीमार हैं या यात्रा में हैं, वे तिलक की रस्म को सरल रखें और चिकित्सक की सलाह को हर नियम से ऊपर रखें। मधुमेह वाले लोग मिठाई की मात्रा सीमित रखें। गर्भवती बहनें लंबे समय तक खड़ी रहकर पूजा न करें और आराम से बैठकर रस्म निभाएं। उपहार के रूप में सोना या महंगी वस्तुएं लेते समय बजट और ऋण का ध्यान रखें। यह सावधानी भय के लिए नहीं, पर्व को सहज बनाने के लिए है। अपनी कुंडली के लिए मुफ्त जन्म कुंडली बनाएं। संबंधों के उपाय जानने के लिए उपाय कैलकुलेटर देखें।

आम ग़लतफ़हमियां: क्या दिन चूकने से फल नहीं मिलता?

पहली धारणा है कि भाई दूज का तिलक केवल एक निश्चित क्षण में ही फल देता है, जबकि अपराह्न के पूरे समय का उपयोग किया जा सकता है। दूसरी धारणा है कि बहन के घर जाकर ही तिलक अनिवार्य है, जबकि वीडियो कॉल या डाक से भी भाव पूरा होता है। तीसरी धारणा है कि उपहार का मूल्य भाई-बहन के संबंध की गहराई तय करता है, जबकि परंपरा में भाव को सर्वोपरि माना गया है। इन भ्रमों से बचें और संबंध को प्राथमिकता दें। अपने शुभ दिन जानने के लिए लकी डे कैलकुलेटर देखें।

बच्चों के साथ भाई दूज कैसे मनाएं

बच्चों को पूजा की थाली सजाने और तिलक लगाने में शामिल करें। उन्हें यम और यमुना की कथा सरल भाषा में सुनाएं और बताएं कि भाई-बहन का संबंध एक-दूसरे की रक्षा और आदर पर टिका है। छोटे बच्चे अपने भाई-बहन के लिए हाथ से कार्ड बना सकते हैं। परिवार में बुज़ुर्गों से इस दिन की पुरानी यादें सुनना भी पीढ़ियों को जोड़ता है। पूजा 15 से 20 मिनट की रखें और उसके बाद साथ में भोजन करें। आने वाले व्रतों का क्रम एकादशी व्रत 2026 में देखा जा सकता है।

भाई दूज के बाद: देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह

भाई दूज के साथ दीपावली का पांच दिन का उत्सव पूर्ण होता है। इसके बाद कार्तिक मास के बड़े पर्व आते हैं, जिनमें देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह प्रमुख हैं, जहां से विवाह के शुभ मुहूर्तों का मौसम खुलता है। इनकी तैयारी अभी से करने पर आप बिना जल्दबाज़ी के सब निभा सकते हैं। देवउठनी एकादशी का विवरण देवउठनी एकादशी 2026 में और तुलसी विवाह का तुलसी विवाह 2026 में है। पूर्णिमा की जानकारी पूर्णिमा कब है 2026 में देखें।

पांच दिन का समापन: धनतेरस से भाई दूज तक

6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी और दिवाली, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भाई दूज: यह पांच दिनों की श्रृंखला है। हर दिन का एक भाव है: समृद्धि, प्रकाश, कृतज्ञता, प्रकृति और संबंध। यदि आपने किसी दिन की पूजा नहीं की है तो भी आगे के दिन अपने आप में पूर्ण हैं। इन सभी का विवरण हमारे पृष्ठों पर है, जैसे नरक चतुर्दशी 2026 और अमावस्या कब है 2026। संबंधों के लिए श्रद्धा और संवाद ही सबसे बड़ा उपाय हैं।

हमारी गणना की पद्धति और इस पृष्ठ की विश्वसनीयता

इस पृष्ठ की सभी तिथि, नक्षत्र और काल त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन से लिए गए हैं, जो Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश पर चलता है और दिल्ली NCR (28.6139°N, 77.209°E) के लिए गणना करता है। पांचों अंग सूर्योदय के समय पढ़े गए हैं, जो पर्व-निर्णय की प्रचलित परंपरा के अनुसार है। त्रिकाल पुस्तकालय में इस पर्व के लिए पृष्ठ-विशिष्ट श्लोक नहीं मिला, इसलिए इस लेख में कोई श्लोक-उद्धरण नहीं दिया गया। अन्य शहरों के लिए समय कुछ मिनट खिसक सकते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग से अंतिम मिलान कर लें।

अपनी कुंडली के अनुसार भाई दूज का समय जांचें

भाई दूज के सामान्य समय सबके लिए एक जैसे हैं, पर आपके लिए सर्वश्रेष्ठ घड़ी आपकी कुंडली के लग्न और दशा से तय होती है। अपना जन्म विवरण डालकर मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर चलाइए और अपने लिए अनुकूल समय देखिए। भाई-बहन के संबंधों की दशा देखने के लिए दशा कैलकुलेटर भी उपयोगी है। वाहन खरीद जैसे अन्य शुभ कार्यों के लिए वाहन खरीद का शुभ मुहूर्त देखें। शुरुआती जांच मुफ़्त है।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

द्वितीया
चंद्र पक्ष की दूसरी तिथि, जिस पर भाई दूज मनाई जाती है।
अपराह्न काल
दिन का चौथा खंड, जिसमें भाई दूज का तिलक करने की परंपरा है।
यम द्वितीया
भाई दूज का वह नाम जो यम और यमुना की कथा से आता है।
तिलक
माथे पर रोली और चावल से लगाया जाने वाला शुभ चिह्न।
राहु काल
दिन का वह आठवां हिस्सा (नवंबर में लगभग 80 मिनट) जिसमें नए आरंभ टालने की परंपरा है।

Frequently Asked Questions

भाई दूज 2026 कब है?

भाई दूज 2026 बुधवार, 11 नवंबर को है। दिल्ली में द्वितीया तिथि 11 नवंबर को सूर्योदय से 15:53 बजे तक रहती है।

भाई दूज पर तिलक का शुभ मुहूर्त क्या है?

दिल्ली में अपराह्न 13:08 से 15:16 है, पर राहु काल 12:04 से 13:24 होने से 13:24 से 15:16 का समय सबसे सहज है।

भाई दूज 10 नवंबर को क्यों नहीं है?

द्वितीया 10 नवंबर को 14:00 बजे आरंभ होती है, पर तिलक अपराह्न में होता है और 11 नवंबर का पूरा अपराह्न द्वितीया के भीतर है। इसलिए पर्व 11 नवंबर को माना जाता है।

भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहते हैं?

कथा के अनुसार इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे और उन्होंने वरदान दिया कि इस दिन बहन से तिलक लगवाने वाले भाई को अकाल भय नहीं सताएगा।

भाई दूज की पूजा विधि क्या है?

थाली में रोली, अक्षत, दीप, मिठाई और नारियल रखकर भाई को तिलक लगाएं, आरती करें, कलावा बांधें और भोजन कराएं। भाई बहन को उपहार देता है।

भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?

रक्षाबंधन में बहन राखी बांधती है और यह श्रावण पूर्णिमा को पड़ता है। भाई दूज में बहन तिलक लगाती है और यह कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पड़ती है।

क्या वीडियो कॉल से भाई दूज मना सकते हैं?

हां। यदि भाई-बहन दूर हैं तो अपराह्न 13:24 से 15:16 के बीच वीडियो कॉल पर तिलक की रस्म निभाई जा सकती है और उपहार भेजे जा सकते हैं।

11 नवंबर 2026 का राहु काल कब है?

दिल्ली में राहु काल 12:04 से 13:24, यमगंड 08:04 से 09:24 और गुलिक काल 10:44 से 12:04 है।

11 नवंबर 2026 को कौन-सा नक्षत्र है?

सूर्योदय के समय नक्षत्र अनुराधा (पद 4) है, जो 11:38 तक रहेगा। चंद्रमा वृश्चिक राशि में है।

भाई दूज पर कौन-सा उपाय करें?

सरल उपाय हैं: विधि से तिलक और आरती, बुध के लिए हरी मूंग का दान और पुरानी बात के लिए क्षमा का संकल्प। अपनी सामर्थ्य अनुसार कोई एक चुनें।

यह भी देखें · See also

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