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सोमवती अमावस्या 2026: 9 नवंबर, पूजा विधि

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect14 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

सोमवती अमावस्या 9 नवंबर 2026 को पड़ेगी। दिल्ली में अमावस्या तिथि सोमवार दोपहर 12:32 बजे तक है, इसलिए स्नान, दान और पूजा का श्रेष्ठ समय सुबह 6:42 से 12:32 के बीच रहेगा। इस दिन पीपल परिक्रमा और पितृ तर्पण की परंपरा है। राहुकाल सुबह 8:02 से 9:23 तक रहेगा।

Deep Dive Analysis

सोमवती अमावस्या 2026 कब है: तारीख और समय

सोमवती अमावस्या तब कहलाती है जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़े। वर्ष 2026 में यह संयोग सोमवार 9 नवंबर को बन रहा है। दिल्ली के पंचांग में सूर्योदय सुबह 6:42 पर होता है और उस समय अमावस्या तिथि चल रही होती है। तिथि दोपहर 12:32 बजे समाप्त होती है। इसलिए व्रत, स्नान और दान का कर्म इसी अवधि में करना श्रेष्ठ माना जाता है। अपने शहर का सटीक समय देखने के लिए पंचांग खोलें और मुहूर्त की गणना का तरीका समझने के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर गाइड पढ़ें।

दिल्ली का पंचांग: 9 नवंबर 2026 एक नज़र में

सोमवार 9 नवंबर 2026 के आँकड़े हमारे आज का पंचांग टूल से लिए गए हैं, जो स्विस एफेमेरिस पर चलता है। दिल्ली में सूर्योदय 6:42 और सूर्यास्त शाम 5:26 पर है। अमावस्या तिथि और नाग करण दोनों दोपहर 12:32 तक हैं। नक्षत्र स्वाति सुबह 7:24 तक रहता है और उसके बाद विशाखा आता है। सौभाग्य योग 10 नवंबर को रात 2:57 तक चलेगा। सूर्य और चंद्र दोनों तुला राशि में लगभग 22 अंश पर हैं। यही आँकड़े आप अपने शहर के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से निकाल सकते हैं।

सोमवती अमावस्या का अर्थ: सोमवार और अमावस्या का मेल

सोम का अर्थ चंद्रमा है और सोमवार चंद्र का वार है। अमावस्या वह तिथि है जब सूर्य और चंद्र एक ही राशि और लगभग एक ही अंश पर होते हैं, यानी चंद्र की कला सूर्य के प्रकाश में समा जाती है। इस प्रकार सोमवती अमावस्या में चंद्र के अपने वार पर चंद्र का अदृश्य रूप मिलता है। परंपरा इसे पितृ-स्मरण और शिव-आराधना का विशेष अवसर मानती है। तिथि की गणना कैसे होती है, यह जानने के लिए आज कौन सी तिथि है लेख देखें।

ज्योतिष की दृष्टि से सोमवती अमावस्या

ज्योतिष में अमावस्या पर चंद्र को बलहीन माना जाता है क्योंकि वह सूर्य के अत्यंत समीप होता है। चंद्र मन, माता और भावनाओं का कारक है, इसलिए कई लोग इस दिन मन के भारी या अस्थिर होने की बात कहते हैं, पर यह कोई निश्चित नियम नहीं है। कुंडली में चंद्र की स्थिति हर व्यक्ति में अलग होती है। मन और चंद्र-शनि-राहु के संबंध पर विस्तार से मानसिक स्वास्थ्य और वैदिक ज्योतिष में पढ़ें। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए राशि कैलकुलेटर उपयोगी है।

क्या शास्त्र में सोमवती अमावस्या का श्लोक मिलता है

ईमानदारी से कहें तो हमने अपने शास्त्र-पुस्तकालय में सोमवती अमावस्या के नाम से कोई प्रमाणित श्लोक नहीं पाया। इसलिए इस लेख में व्रत-विधि, पीपल परिक्रमा और कथा को लोक-परंपरा और प्रचलित व्रत-कथाओं के रूप में लिखा गया है, किसी श्लोक के हवाले से नहीं। तिथि, नक्षत्र और राहुकाल की गणना पंचांग-गणित पर आधारित है। हम कोई श्लोक संख्या अनुमान से नहीं लिखते। परंपरा और गणित का यह भेद समझना ज़रूरी है। हमारी कार्यपद्धति के बारे में संस्थापक का परिचय पृष्ठ पर पढ़ सकते हैं।

स्नान का मुहूर्त: सुबह कब करें

परंपरा में अमावस्या का स्नान सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में श्रेष्ठ माना जाता है और फिर तिथि रहते कभी भी किया जा सकता है। 9 नवंबर को दिल्ली में सूर्योदय 6:42 पर है और तिथि 12:32 तक है। जो गंगा या यमुना तट पर नहीं जा सकते, वे घर पर जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। सुबह 6:42 से 8:02 तक का समय राहुकाल से पहले का साफ़ खंड है। राहुकाल कैसे निकलता है, यह राहुकाल कैसे निकालें में समझाया गया है।

पूजा और दान का समय: राहुकाल, यमगंड और गुलिक बचाकर

दिल्ली में 9 नवंबर को राहुकाल सुबह 8:02 से 9:23, यमगंड 10:43 से 12:04 और गुलिक दोपहर 1:24 से 2:45 तक रहेगा। तिथि 12:32 पर समाप्त हो जाती है, इसलिए गुलिक का समय व्रत-कर्म में आता ही नहीं। शुभ आरंभ के लिए तीन साफ़ खंड बनते हैं: 6:42 से 8:02, 9:23 से 10:43 और 12:04 से 12:32। अभिजित मुहूर्त 11:42 से 12:25 है, जिसका बाद वाला भाग 12:04 के बाद यमगंड से मुक्त है। इसी दिन का चौघड़िया भी साथ में जाँचें।

पूजा सामग्री की सूची

पूजा के लिए ज़्यादा सामान की ज़रूरत नहीं पड़ती। परंपरा में जल का लोटा, गंगाजल, पीपल के वृक्ष के लिए कच्चा सूत या मौली, फल या मिठाई, दीपक और घी, रोली, चावल, फूल और धूप रखे जाते हैं। शिव पूजा के लिए बेलपत्र और कच्चा दूध जोड़ सकते हैं। परिक्रमा के लिए 108 छोटी वस्तुएँ जैसे चने, मूँग या फल गिनकर अलग रख लें। दान के लिए अनाज, वस्त्र या भोजन पहले से अलग निकाल लें, ताकि तिथि के भीतर निकलना न पड़े। मुहूर्त की योजना के लिए शुभ मुहूर्त देख लें।

सोमवती अमावस्या पूजा विधि: चरण-दर-चरण

सबसे पहले सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और मन में अपने संकल्प को शांत रूप से दोहराएँ। घर के पूजा-स्थान पर दीपक जलाकर इष्टदेव और शिव का स्मरण करें। फिर तय किए गए साफ़ खंड में पीपल के पास जाएँ, जल अर्पित करें और परिक्रमा करें। लौटकर पितरों के नाम से जल का तर्पण करें और अपनी श्रद्धा अनुसार दान दें। व्रत रखना अनिवार्य नहीं है, स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार भी चलता है। पूरे दिन क्रोध, कटु वचन और अनावश्यक विवाद से बचना ही असली अनुशासन माना गया है। अमावस्या कब है 2026 में पूरे वर्ष की तारीखें मिलेंगी।

पीपल परिक्रमा: 108 बार का नियम

सोमवती अमावस्या की सबसे प्रचलित परंपरा पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा है। विवाहित महिलाएँ इसे पति की दीर्घायु और परिवार के कल्याण की कामना से करती हैं। प्रचलित विधि में हर परिक्रमा के बाद एक वस्तु जैसे चना, मूँग या फल वृक्ष के पास रखा जाता है और अंत में उसे दान कर दिया जाता है। जो 108 बार न चल सकें, वे 11 या 21 परिक्रमा श्रद्धा से कर सकते हैं। यह लोक-परंपरा है, किसी श्लोक पर आधारित नहीं, और इसे शारीरिक क्षमता के भीतर ही करें। पितृ-संबंधी भावना के लिए अमावस्या तर्पण उपाय भी देखें।

शिव पूजा और चंद्र के लिए सरल उपाय

सोमवार शिव का दिन माना जाता है, इसलिए सोमवती अमावस्या पर शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध और बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है। चंद्र के कारक तत्व मन और माता हैं, इसलिए माता की सेवा, सफ़ेद वस्तुओं का दान और शांत बैठकर कुछ देर मौन रखना सरल उपाय माने जाते हैं। इनका कोई भय या दबाव नहीं है और कोई चमत्कारी दावा भी नहीं। आपकी कुंडली में चंद्र के लिए कौन सा उपाय उपयुक्त है, यह उपाय कैलकुलेटर से जाँच सकते हैं।

पितृ तर्पण और पितृ दोष की भावना

अमावस्या पितृ-स्मरण की तिथि मानी जाती है। परंपरा में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल डालकर पितरों के नाम से तर्पण किया जाता है। यदि कुंडली में पितृ दोष के संकेत हैं, तो यह दिन श्रद्धा का सरल अवसर है। पर केवल अमावस्या का तर्पण किसी दोष का पक्का निदान या पक्का समाधान नहीं है। निदान कुंडली से होता है। अपनी कुंडली की जाँच के लिए पितृ दोष कैलकुलेटर और विस्तृत जानकारी के लिए पितृ दोष के उपाय पढ़ें।

दान: क्या दें और किसे दें

दान का सबसे महत्वपूर्ण नियम सामर्थ्य और श्रद्धा है। परंपरा में अनाज, दाल, वस्त्र, गुड़, काले तिल और भोजन का दान बताया गया है। सोमवार होने के कारण दूध, चावल और सफ़ेद वस्त्र का दान चंद्र से जोड़ा जाता है। दान उसी को दें जिसे सच में ज़रूरत हो, जैसे गरीब परिवार, मंदिर की सेवा या गौशाला। तिथि समाप्ति दोपहर 12:32 पर है, इसलिए दान सुबह से दोपहर के भीतर निपटा लें। कर्ज़ लेकर दान करना किसी परंपरा में आवश्यक नहीं बताया गया।

सोमवती अमावस्या की प्रचलित व्रत-कथा

लोक-कथा में एक निर्धन ब्राह्मण परिवार की कन्या का प्रसंग आता है, जिसके विवाह में बाधा थी। किसी साधु के बताने पर उसने एक विनम्र महिला की सेवा की और सोमवती अमावस्या पर पीपल की परिक्रमा की, जिससे उसका जीवन संवरा। कुछ कथाओं में भीष्म और युधिष्ठिर का संवाद भी जोड़ा जाता है, पर हमें पुस्तकालय में इसका श्लोक-संदर्भ नहीं मिला। इसलिए इसे कथा के रूप में पढ़ें, ऐतिहासिक या शास्त्रीय प्रमाण के रूप में नहीं। कथा का सार संयम, सेवा और श्रद्धा है।

सोमवती अमावस्या पर क्या करें

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान, पीपल को जल, शिव का अभिषेक, पितरों का स्मरण और दान सबसे सरल कर्म हैं। घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएँ और कुछ समय शांत बैठें। बुज़ुर्गों का आशीर्वाद लें और जिन पितरों को याद करते हैं उनके नाम से भोजन का अंश गाय या ज़रूरतमंद को दें। मन की स्थिरता के लिए पूरे दिन फ़ोन और विवाद कम रखें। अपनी राशि के अनुसार किसी विशेष उपाय की जानकारी चाहिए तो उपाय कैलकुलेटर का उपयोग करें।

सोमवती अमावस्या पर क्या न करें

परंपरा में इस दिन क्रोध, झूठ, मांस-मदिरा और किसी का अपमान टालने को कहा गया है। पीपल की डालियाँ तोड़ना या वृक्ष को हानि पहुँचाना भी वर्जित माना जाता है। राहुकाल और यमगंड में नए शुभ काम का आरंभ टालें। अमावस्या पर विवाह, गृह प्रवेश जैसे बड़े शुभ कार्य सामान्यतः नहीं रखे जाते, जिसके लिए नवंबर 2026 विवाह मुहूर्त देखकर अलग तिथि चुनें। डर या अंधविश्वास में कोई महँगा अनुष्ठान किसी के कहने पर न कराएँ।

सोमवती अमावस्या और सामान्य अमावस्या में अंतर

हर महीने अमावस्या आती है, पर वह सोमवार को कभी-कभार ही पड़ती है। सामान्य अमावस्या पितृ-स्मरण और दान की तिथि है। सोमवती अमावस्या में उसी कर्म में शिव-आराधना और पीपल परिक्रमा की परंपरा जुड़ जाती है। इसलिए इसे विशेष माना जाता है, पर यह तिथि का महत्व बढ़ाने वाली परंपरा है, कोई अलग गणितीय स्थिति नहीं। इस महीने की अमावस्या की जानकारी इस महीने की अमावस्या कब है में दी गई है।

स्वाति और विशाखा नक्षत्र का संदर्भ

9 नवंबर 2026 को सुबह 7:24 तक चंद्र स्वाति नक्षत्र में है, जिसके स्वामी राहु हैं, और उसके बाद विशाखा में आता है, जिसके स्वामी गुरु हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि दिन अच्छा या बुरा तय हो गया। नक्षत्र केवल पृष्ठभूमि बताता है कि उस समय चंद्र कौन सी ऊर्जा के संकेत में है। अपने जन्म नक्षत्र और दशा की जाँच के लिए मुफ़्त दशा कैलकुलेटर देखें। पंचांग का ज्ञान तब काम आता है जब उसे कुंडली के साथ पढ़ा जाए।

कुंडली में कमज़ोर चंद्र हो तो इस दिन क्या ध्यान रखें

यदि आपकी कुंडली में चंद्र नीच, पाप-ग्रह से पीड़ित या अस्त है, तो अमावस्या के आसपास मन थोड़ा बोझिल लग सकता है। ऐसे में अधिक नींद, समय पर भोजन, पानी और माता से बात करना सहायक हो सकता है। रत्न या महँगे उपाय बिना कुंडली देखे न लें। चंद्र की सही स्थिति जानने के लिए जन्म-विवरण से विश्लेषण ज़रूरी है। पिछले जन्मों के कर्म-संदर्भ की गहरी पड़ताल के लिए कार्मिक पृष्ठभूमि पठन देख सकते हैं।

क्या अमावस्या पर शुभ कार्य वर्जित हैं

सामान्य परंपरा में अमावस्या विवाह, गृह प्रवेश और नए व्यवसाय के आरंभ के लिए नहीं चुनी जाती। इसके बजाय यह साधना, दान और पितृ-स्मरण की तिथि है। जिन्हें अपने कार्य के लिए शुभ दिन चाहिए, वे अलग तारीख देखें। देव उठनी एकादशी के बाद शुभ कार्यों का क्रम खुलता है, जिसकी जानकारी देव उठनी एकादशी 2026 और तुलसी विवाह 2026 में है। किसी भी निर्णय के लिए लकी डे कैलकुलेटर भी देखें।

व्रत के साथ स्वास्थ्य का ध्यान

व्रत भक्ति का साधन है, शरीर पर बोझ नहीं। मधुमेह, गर्भावस्था, रक्तचाप या किसी दवा पर निर्भर लोग निर्जल व्रत न रखें और चिकित्सक की सलाह मानें। फलाहार, पानी, नारियल पानी और सादा भोजन पर्याप्त है। बुज़ुर्गों को लंबी परिक्रमा के लिए अकेले न भेजें। श्रद्धा का माप कष्ट से नहीं होता, और कोई भी ग्रह या तिथि आपसे आपके स्वास्थ्य की कीमत पर साधना नहीं माँगती।

अगली सोमवती अमावस्या कब पड़ेंगी

हमारे अमावस्या संबंधी लेख की सूची के अनुसार 2026 के बाद अगली सोमवती अमावस्याएँ 8 मार्च 2027, 2 अगस्त 2027 और 27 दिसंबर 2027 को आती हैं। शहर और पंचांग की गणना पद्धति के अनुसार तिथि एक दिन आगे-पीछे दिख सकती है, इसलिए व्रत से कुछ दिन पहले अपने शहर के लिए पंचांग में तिथि की पुष्टि कर लें। पूरे वर्ष की अमावस्याओं का क्रम अमावस्या कब है 2026 में देखा जा सकता है।

नवंबर 2026 की अन्य महत्वपूर्ण तिथियाँ

अमावस्या के बाद नवंबर में कई व्रत-पर्व आते हैं। पूर्णिमा की तिथि और समय के लिए पूर्णिमा कब है 2026 और कार्तिक पूर्णिमा के लिए कार्तिक पूर्णिमा 2026 देखें। हिंदी में जानकारी चाहिए तो कार्तिक पूर्णिमा कब है उपलब्ध है। एकादशी की सूची एकादशी व्रत कब है 2026 में है। आगे के पर्वों के लिए गीता जयंती 2026 और विवाह पंचमी 2026 भी देखें।

पितृ पक्ष और सोमवती अमावस्या: क्या संबंध है

पितृ पक्ष पितरों के लिए पूरे पखवाड़े का समर्पित समय है, जबकि सोमवती अमावस्या वर्ष में कुछ ही बार आने वाली एक तिथि है। दोनों में भाव समान है, पर विधि-विधान अलग है। पिंड दान जैसे कर्म परंपरा में पितृ पक्ष और विशेष स्थानों से जुड़े हैं। विस्तार के लिए पितृ पक्ष 2026 और पिंड दान और पितृ दोष पढ़ें। सोमवती अमावस्या पर सरल जल-तर्पण भी श्रद्धा का पर्याप्त रूप माना जाता है।

चंद्र, केतु और पितृ दोष: तीन संबंध

ज्योतिष में पितृ दोष की चर्चा सूर्य, चंद्र, राहु-केतु और नवम भाव के संदर्भ में होती है। अमावस्या पर सूर्य-चंद्र का मिलन होता है, इसलिए यह चर्चा इसी तिथि के साथ जुड़ती है। विस्तार से पढ़ें चंद्र और पितृ दोष, केतु और पितृ दोष और पितृ दोष क्या है। कारण जानने के लिए पितृ दोष के कारण भी उपयोगी है।

पितृ दोष के भ्रम और तथ्य

सोमवती अमावस्या को लेकर यह भ्रम फैलाया जाता है कि इस दिन पूजा न करने से पितृ क्रुद्ध हो जाते हैं। यह भय-आधारित बात है। श्रद्धा और स्मरण का महत्व है, किसी तिथि के छूट जाने से जीवन में आपदा नहीं आती। हम फल का कोई निश्चित दावा नहीं करते। भ्रम और तथ्य अलग करने के लिए पितृ दोष के मिथक और तथ्य पढ़ें। संतुलित और भय-रहित दृष्टि से ही उपाय चुनें।

9 नवंबर की दिन-योजना: एक सरल रूपरेखा

सुबह 6:00 से 6:42 के बीच उठकर स्नान करें। 6:42 से 8:02 के खंड में पूजा, दीप और शिव अभिषेक करें। राहुकाल 8:02 से 9:23 में परिक्रमा के बजाय शांत जप या घर के काम करें। 9:23 से 10:43 के बीच पीपल परिक्रमा और जल-अर्पण करें। यमगंड 10:43 से 12:04 में दान की सामग्री तैयार रखें और 12:04 से 12:32 के बीच दान तथा तर्पण पूरा कर लें। इसके बाद सात्विक भोजन करें। यदि आपका शहर अलग है, तो समय बदल जाएगा, इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।

परंपरा और गणित का संतुलन: हमारा दृष्टिकोण

Trikaal Vaani में हम तिथि, नक्षत्र और राहुकाल जैसी चीज़ें स्विस एफेमेरिस की गणना से देते हैं और व्रत-परंपरा को परंपरा के नाम से ही लिखते हैं। श्लोक न मिले तो हम कोई श्लोक नहीं गढ़ते। अध्यात्म की व्यापक चर्चा के लिए आध्यात्मिकता विषय देखें। पंचांग की गणना जाँचने के लिए पंचांग खोलें, और अपनी कुंडली पर आधारित सलाह के लिए संस्थापक रोहित गुप्ता के परिचय के लिए संस्थापक पृष्ठ पर जाएँ।

सारांश: 9 नवंबर 2026 के लिए याद रखने योग्य बातें

सोमवती अमावस्या 9 नवंबर 2026 को है और दिल्ली में तिथि दोपहर 12:32 तक है। स्नान, पूजा और दान तिथि के भीतर करें। राहुकाल 8:02 से 9:23 और यमगंड 10:43 से 12:04 में शुभ आरंभ टालें। पीपल परिक्रमा और पितृ तर्पण लोक-परंपरा हैं, श्लोक-आधारित नहीं। स्वास्थ्य सर्वोपरि है। अधिक सटीक समय अपने शहर के लिए पंचांग में देखें और शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर गाइड से गणना का तरीका समझें।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

सोमवती अमावस्या
वह अमावस्या जो सोमवार के दिन पड़े, जिसमें पीपल परिक्रमा, शिव पूजा और पितृ स्मरण की परंपरा है।
अमावस्या
वह तिथि जब सूर्य और चंद्र लगभग एक ही अंश पर होते हैं और चंद्र दिखाई नहीं देता।
राहुकाल
वार और सूर्योदय पर आधारित दैनिक खंड, जिसमें परंपरा नए शुभ आरंभ को टालने को कहती है।
यमगंड
दिन के आठ भागों में एक खंड, जिसे शुभ आरंभ के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
तर्पण
जल और तिल अर्पित करके पितरों का स्मरण करने की विधि।
अभिजित मुहूर्त
दिन के मध्य का लगभग 48 मिनट का खंड, जिसे अधिकांश कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।

Frequently Asked Questions

सोमवती अमावस्या 2026 में कब है?

सोमवती अमावस्या 2026 में सोमवार 9 नवंबर को है। दिल्ली में अमावस्या तिथि उस दिन दोपहर 12:32 बजे तक रहती है। अपने शहर का समय पंचांग से जाँच लें।

सोमवती अमावस्या पर स्नान और दान का समय क्या है?

दिल्ली में सूर्योदय 6:42 पर है और तिथि 12:32 तक है। स्नान सूर्योदय के आसपास और दान तिथि समाप्त होने से पहले कर लेना श्रेष्ठ माना जाता है।

9 नवंबर 2026 को राहुकाल कब रहेगा?

दिल्ली में राहुकाल सुबह 8:02 से 9:23 तक रहेगा। यमगंड 10:43 से 12:04 और गुलिक दोपहर 1:24 से 2:45 तक रहेगा। नए शुभ आरंभ इन खंडों में टालें।

सोमवती अमावस्या पर पीपल की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?

प्रचलित परंपरा 108 परिक्रमा की है। जो इतनी न कर सकें वे 11 या 21 श्रद्धा से कर सकते हैं। यह लोक-परंपरा है और स्वास्थ्य के अनुसार ही करें।

क्या सोमवती अमावस्या का व्रत रखना अनिवार्य है?

नहीं। व्रत श्रद्धा का विषय है, अनिवार्यता नहीं। स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार, जल-दान या केवल पूजा भी की जा सकती है।

क्या इस दिन विवाह या गृह प्रवेश कर सकते हैं?

सामान्य परंपरा में अमावस्या विवाह और गृह प्रवेश के लिए नहीं चुनी जाती। इनके लिए अलग शुभ तिथि देखना बेहतर है।

क्या शास्त्रों में सोमवती अमावस्या का श्लोक है?

हमें अपने शास्त्र-पुस्तकालय में इसके लिए कोई प्रमाणित श्लोक नहीं मिला। इसलिए इस लेख की विधि और कथा को लोक-परंपरा के रूप में लिखा गया है।

सोमवती अमावस्या पर पितृ तर्पण कैसे करें?

स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल डालकर पितरों के नाम से जल अर्पित करें। यह सरल श्रद्धा-कर्म है, जिसे तिथि के भीतर करें।

अगली सोमवती अमावस्या कब है?

हमारी अमावस्या सूची के अनुसार अगली तारीखें 8 मार्च 2027, 2 अगस्त 2027 और 27 दिसंबर 2027 हैं। शहर के अनुसार एक दिन का अंतर संभव है।

क्या सोमवती अमावस्या पर उपाय न करने से नुकसान होता है?

नहीं। किसी तिथि पर उपाय छूटने से कोई अनिष्ट तय नहीं होता। भय पर आधारित दावे से बचें और अपनी कुंडली के अनुसार सरल उपाय चुनें।

यह भी देखें · See also

इस हब का मुख्य पेजShubh Muhurat Calculator — 39 Ghatnayen

समूह: अपना जीवन-घटना कैलकुलेटर खोजें

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