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कार्तिक पूर्णिमा 2026: 24 नवंबर स्नान-दान

Rohiit Gupta· Chief Vedic Architect16 min read

Trikaal Sandesh — Direct Answer

कार्तिक पूर्णिमा 2026 मंगलवार, 24 नवंबर को है। दिल्ली में पूर्णिमा तिथि 24 नवंबर को सूर्योदय (06:54) से रात 20:23 बजे तक रहती है। गंगा स्नान और दान सुबह के समय करें, और देव दीपावली का दीपदान प्रदोष काल में, शाम 17:20 से 20:02 के बीच करें। भद्रा (विष्टि करण) सुबह 10:05 तक रहेगी।

Deep Dive Analysis

कार्तिक पूर्णिमा 2026 की तारीख और पूर्णिमा का समय

कार्तिक पूर्णिमा 2026 मंगलवार, 24 नवंबर को मनाई जाएगी। दिल्ली NCR के पंचांग में कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा 24 नवंबर को सूर्योदय के समय चल रही है और रात 20:23 बजे समाप्त होती है। इसलिए गंगा स्नान, दान और पूजा 24 नवंबर को सुबह से की जा सकती है और देव दीपावली का दीपदान शाम को। 25 नवंबर को सूर्योदय पर कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा है, इसलिए पर्व उसी दिन नहीं माना जाता। नवंबर की अन्य तिथियों के लिए पूर्णिमा कब है 2026 और अपने नगर का मिलान मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर से देखें। आगे के व्रतों के लिए मोक्षदा एकादशी 2026 भी पढ़ें।

कार्तिक पूर्णिमा के नाम: त्रिपुरारी पूर्णिमा, देव दीपावली और महाकार्तिकी

इस पर्व को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि कथा के अनुसार शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर का वध किया था। वाराणसी और उत्तर भारत में इसे देव दीपावली कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन देवता गंगा तट पर दीपोत्सव मनाने उतरते हैं। कृत्तिका नक्षत्र का योग होने पर इसे महाकार्तिकी भी कहा जाता है। नाम अनेक हैं, पर भाव एक है: स्नान, दीपदान और दान के माध्यम से कार्तिक मास की साधना का समापन। इसके कुछ दिन पहले की दीपावली का विवरण धनतेरस 2026 और भाई दूज 2026 में है।

24 नवंबर 2026 का पंचांग: दिल्ली NCR के पांचों अंग

सूर्योदय के समय 24 नवंबर को पूर्णिमा तिथि है (शुक्ल पक्ष) और वह 20:23 बजे तक रहती है। नक्षत्र कृत्तिका है और 23:25 तक रहेगा, योग परिघ है (16:05 तक) और करण विष्टि यानी भद्रा है (10:05 तक)। सूर्योदय 06:54 और सूर्यास्त 17:20 है। यह गणना त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन से, लाहिड़ी अयनांश और दिल्ली NCR के निर्देशांक पर की गई है। शहर बदलने पर समय में कुछ मिनट का अंतर आ सकता है, इसलिए अंतिम मिलान स्थानीय पंचांग से कर लें।

25 नवंबर 2026 का पंचांग: पूर्णिमा के बाद का दिन

25 नवंबर को सूर्योदय के समय कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा है और वह 16:50 तक रहती है। नक्षत्र रोहिणी (पद 2) है और 20:36 तक रहेगा, योग शिव है (11:59 तक) और करण कौलव है। सूर्योदय 06:55 और सूर्यास्त 17:20 है। चूंकि इस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा नहीं है, कार्तिक पूर्णिमा का स्नान और दान 24 नवंबर को ही माना जाएगा। 25 नवंबर की सुबह जिन लोगों को सुविधा हो, वे अपनी साधना या स्नान सहज रूप से आगे बढ़ा सकते हैं, पर पर्व की तिथि 24 नवंबर ही रहती है।

गंगा स्नान और दान का समय

24 नवंबर को प्रातःकाल 06:54 से 08:59 तक है और उसके बाद संगव काल 08:59 से 11:04। स्नान और दान का सबसे सहज समय प्रातःकाल है, जब मन और शरीर दोनों ताज़ा रहते हैं। भद्रा 10:05 तक है और यमगंड 09:30 से 10:48 तक, इसलिए यदि आप स्नान के बाद पूजा-आरंभ करना चाहते हैं तो 10:48 के बाद का समय सुविधाजनक रहेगा। स्नान और दान पर भद्रा का प्रतिबंध नहीं माना जाता, यह मुख्यतः नए शुभ आरंभ और होम जैसे कर्मों के लिए सावधानी का संकेत है। पूर्णिमा रात 20:23 तक है, इसलिए दान पूरे दिन किया जा सकता है। अपनी चंद्र राशि जानने के लिए राशि कैलकुलेटर देखें।

24 नवंबर के अशुभ काल: राहु काल, यमगंड और गुलिक

24 नवंबर को राहु काल 14:43 से 16:01, यमगंड 09:30 से 10:48 और गुलिक काल 12:07 से 13:25 रहेगा। अभिजित मुहूर्त 11:46 से 12:27 है, जो आंशिक रूप से गुलिक काल से टकराता है, इसलिए नई वस्तु की खरीद या नए आरंभ के लिए इसे आदर्श नहीं माना जाएगा। पूजा-पाठ, कथा और दान इन कालों में रोके नहीं जाते, केवल नए आरंभ से बचना बेहतर है। हमारी पद्धति इन कालों को बाधा नहीं, सावधानी का संकेत मानती है। अपने शहर के सही काल के लिए शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर देखें।

भद्रा और कार्तिक पूर्णिमा: क्या सावधानी रखें

भद्रा, यानी विष्टि करण, 24 नवंबर की सुबह 10:05 तक रहेगी। परंपरा में भद्रा के समय नए शुभ कार्य, जैसे गृह-प्रवेश, मुंडन या नया आरंभ, टाले जाते हैं, पर स्नान, जप, दान और कथा-श्रवण पर कोई रोक नहीं मानी जाती। इसलिए गंगा स्नान और दान सुबह किया जा सकता है, जबकि हवन या नई खरीदारी का समय 10:05 के बाद रखना बेहतर है। यदि आपको दुविधा हो तो प्रदोष काल (17:20 से 20:02) की पूजा आराम से भद्रा के बाद आती है, इसलिए शाम की साधना में किसी चिंता की आवश्यकता नहीं है। पिछली पूर्णिमा का क्रम शरद पूर्णिमा 2026 में देखें।

देव दीपावली: प्रदोष काल में दीपदान

देव दीपावली का दीपदान प्रदोष काल में किया जाता है, और 24 नवंबर को दिल्ली में यह 17:20 से 20:02 तक है। इस समय पूर्णिमा तिथि 20:23 तक है, यानी पूरा प्रदोष काल पूर्णिमा के भीतर आता है। घर के मुख्य द्वार, तुलसी चौरा, पूजा स्थल और छत या बालकनी पर घी या तेल के दीये जलाएं। जो लोग गंगा या यमुना तट पर नहीं जा सकते, वे जल से भरे पात्र में दीप तैराकर या घर के पास किसी जलाशय पर दीप रखकर भाव पूरा कर सकते हैं। दीपदान की संख्या से अधिक महत्व श्रद्धा और स्वच्छता का है। दीपदान के सरल उपाय के लिए उपाय कैलकुलेटर उपयोगी है।

स्नान की विधि: नदी में न जा सकें तो घर पर

कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदी में स्नान श्रेष्ठ माना जाता है, पर सभी के लिए यह संभव नहीं। घर पर स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल डालकर संकल्प के साथ स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद सूर्य को जल दें, तुलसी को जल अर्पित करें और अपने इष्ट का स्मरण करें। जो लोग ठंडे पानी से बचते हैं, वे गुनगुने जल का उपयोग कर सकते हैं। नियम सुविधा के लिए हैं, कष्ट के लिए नहीं। नदी तट पर जाने वाले लोग फिसलन और गहरे पानी से सावधान रहें और बच्चों को अकेले पानी में न जाने दें। संकल्प का दिन चुनने के लिए मुफ्त जन्म कुंडली बनाएं।

कार्तिक पूर्णिमा का दान: क्या और कितना

कार्तिक पूर्णिमा पर अन्न, वस्त्र, गुड़, तिल और घी का दान शुभ माना जाता है। सर्दी के आगमन को देखते हुए ऊनी वस्त्र या कंबल का दान भी विशेष माना जाता है। दान की राशि अपनी सामर्थ्य के भीतर रखें, क्योंकि परंपरा में भाव को मूल्य से ऊपर रखा गया है। किसी ज़रूरतमंद या मंदिर में सीधे दान करें और बिल या रसीद अवश्य रखें। जिनके पास बजट कम हो, वे एक व्यक्ति को भोजन कराकर भी यही भाव पूरा कर सकते हैं। समृद्धि के ज्योतिषीय आधार के लिए धन योग और धन-वृद्धि का समय पढ़ें।

सत्यनारायण कथा और विष्णु पूजन

कार्तिक पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा और विष्णु पूजन की परंपरा है। पूजा में पीले वस्त्र, तुलसी-पत्र, पंचामृत और केले के पत्ते या फल का उपयोग किया जाता है। कथा के बाद प्रसाद बांटा जाता है और परिवार के साथ आरती की जाती है। यदि आप कथा पूरी नहीं कर सकते तो विष्णु सहस्रनाम या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जप कर लें। पूजा के लिए प्रदोष काल या प्रातःकाल दोनों उपयुक्त हैं, पर सुबह की पूजा के लिए भद्रा समाप्त होने (10:05) के बाद का समय सहज रहेगा। एकादशी के पर्वों का क्रम एकादशी व्रत 2026 में देख सकते हैं।

त्रिपुरारी पूर्णिमा की कथा: शिव और त्रिपुरासुर

कथा के अनुसार तारकासुर के तीन पुत्रों ने तपस्या से तीन अभेद्य पुर, यानी त्रिपुर, प्राप्त किए और देवताओं को पीड़ित करने लगे। देवताओं की प्रार्थना पर शिव ने एक ही बाण से तीनों पुरों को भस्म किया और वे त्रिपुरारी कहलाए। देवताओं ने हर्ष से दीप जलाए और इसी स्मृति में देव दीपावली मनाई जाती है। कथा का सार यह है कि अहंकार चाहे कितना सुरक्षित लगे, धर्म और संयम के सामने वह टिकता नहीं। यही संदेश आज दीपदान के रूप में मन के अंधकार को दूर करने की प्रेरणा देता है। मन की शांति के ज्योतिषीय पहलू के लिए चंद्र-शनि-राहु की धुरी पढ़ें।

कृत्तिका नक्षत्र और महाकार्तिकी

24 नवंबर को सूर्योदय पर नक्षत्र कृत्तिका है और रात 23:25 तक रहेगा। कृत्तिका को अग्नि और शुद्धिकरण का नक्षत्र माना जाता है, और इसी नक्षत्र के नाम पर कार्तिक मास का नाम है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर कृत्तिका का योग होने पर पर्व का महत्व और बढ़ जाता है, जिसे महाकार्तिकी कहा गया है। इसका सरल अर्थ है कि दीपदान और स्नान जैसे शुद्धिकारक कर्म इस दिन विशेष फलदायी माने जाते हैं। अपने जन्म-नक्षत्र के लिए नक्षत्र कैलकुलेटर और राशि के लिए राशि कैलकुलेटर देखें।

गुरु नानक जयंती और कार्तिक पूर्णिमा

सिख परंपरा में गुरु नानक देव जी की जयंती, यानी प्रकाश पर्व, कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन गुरुद्वारों में कीर्तन, लंगर और नगर कीर्तन होते हैं, और सेवा, समानता और सत्य का संदेश दोहराया जाता है। हिंदू और सिख दोनों परंपराओं में यह दिन दान, सेवा और प्रकाश से जुड़ा है, जो इसे समन्वय का सुंदर अवसर बनाता है। यदि आप इस दिन लंगर या किसी सामूहिक सेवा में सहभागी होना चाहें तो यह आपके स्नान और दान के संकल्प का स्वाभाविक विस्तार हो सकता है। आगे की तिथियों के लिए अमावस्या कब है 2026 भी देखें।

सूर्य वृश्चिक में: कार्तिक मास का आकाश

24 नवंबर को सूर्य वृश्चिक राशि में लगभग 7.7 अंश पर है। वृश्चिक मंगल की राशि है और गहराई, संकल्प और रूपांतरण का भाव रखती है। इसका सरल अर्थ यह है कि पर्व पर लिए गए संकल्प, जैसे दान की नियमितता या संयम, इस समय अधिक स्थायी रहते हैं। सूर्य को प्रातः जल देना और आदित्य हृदय या गायत्री मंत्र का पाठ इस ऊर्जा को स्थिर करता है। सूर्य के बीज मंत्र ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः का जप कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी के रूप में भी इस दिन उपयोगी माना जा सकता है। ग्रहों की चाल के लिए 2027 के गोचर देखें।

मंगल और गुरु सिंह में, शुक्र तुला में

मंगल सिंह राशि में लगभग 5.1 अंश पर है, यानी नीच राशि कर्क से निकल चुका है। गुरु सिंह में लगभग 2.2 अंश पर है, और शुक्र तुला में लगभग 0.6 अंश पर अपनी स्वराशि में आ चुका है। इन तीनों की स्थिति पर्व के लिए अनुकूल मानी जा सकती है: मंगल का साहस, गुरु का विवेक और शुक्र का सुख-संतुलन। इसका सरल अर्थ है कि दान, पूजा और परिवार के साथ बिताया समय सहज रहेगा। गुरु के आगे के मार्ग के लिए गुरु गोचर 2027 और शुभ योग के लिए गजकेसरी योग देखें।

शनि मीन में, राहु कुंभ में, केतु सिंह में: दिसंबर से पहले की धुरी

नवंबर के अंत में शनि मीन में लगभग 13.9 अंश पर है, राहु कुंभ में लगभग 0.6 अंश पर और केतु सिंह में लगभग 0.6 अंश पर। राहु-केतु दिसंबर की शुरुआत में मकर-कर्क की धुरी पर पहुंचेंगे, इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के संकल्प में आने वाले वर्ष की योजना जोड़ना अच्छा रहेगा। यह कोई अशुभ संकेत नहीं, केवल बदलाव की सूचना है। इसका अर्थ है कि जीवन के कुछ विषय नया रूप ले सकते हैं और शांत योजना ही सबसे अच्छा उपाय है। विस्तार के लिए राहु-केतु गोचर 2027 और ग्रहण 2027 कब है पढ़ें।

मंगलवार और मंगल: दिन का स्वामी

24 नवंबर मंगलवार है, इसलिए दिन का स्वामी मंगल है, जो साहस, ऊर्जा और संकल्प का कारक है। पूर्णिमा की चंद्र-ऊर्जा और मंगल की अग्नि-ऊर्जा का मेल इस दिन के स्नान और दीपदान को प्रभावी बनाता है। जिनकी कुंडली में मंगल कमज़ोर हो, वे इस दिन लाल मसूर या गुड़ का दान और हनुमान चालीसा का पाठ कर सकते हैं। मंगल के बीज मंत्र ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः का 108 बार जप भी सहायक है। नए व्यापार के लिए नया बिज़नेस मुहूर्त कैलकुलेटर देखें। अपनी कुंडली की ग्रह-स्थिति जांचने के लिए कमज़ोर ग्रह खोजक देखें।

उपाय 1: प्रदोष में दीपदान, पांच पंक्तियों में

यह उपाय घर में प्रकाश और सकारात्मकता की भावना को स्थिर रखता है।

क्या: घी या तेल के पांच, ग्यारह या इक्कीस दीये, मुख्य द्वार, तुलसी और पूजा स्थल पर। कब: 24 नवंबर 2026 को प्रदोष काल में, 17:20 से 20:02 के बीच। कितने का: लगभग 50 से 150 रुपये के दीये और तेल। कितने दिन: केवल पूर्णिमा की शाम, और चाहें तो मार्गशीर्ष मास में हर शाम एक दीया। आपके लिए क्यों: जिन्हें मन में बेचैनी या अंधकार जैसा भाव रहता है, उनके लिए यह शांत करने वाला है।

सावधानी: दीये हवा और बच्चों से सुरक्षित जगह पर रखें और जल के पास दीप रखते समय फिसलन का ध्यान रखें।

उपाय 2: अन्न और ऊनी वस्त्र का दान, पांच पंक्तियों में

सर्दी की शुरुआत में यह दान सबसे व्यावहारिक और पुण्यदायी माना गया है।

क्या: अन्न, गुड़, तिल या ऊनी वस्त्र किसी ज़रूरतमंद को देना। कब: 24 नवंबर की सुबह, स्नान के बाद, प्रातःकाल 06:54 से 08:59 के बीच। कितने का: लगभग 200 से 700 रुपये की सामग्री। कितने दिन: एक दिन, और चाहें तो मार्गशीर्ष मास में सप्ताह में एक बार। आपके लिए क्यों: जिन्हें खर्च और बचत में संतुलन बनाने में कठिनाई होती है, उनके लिए यह उदारता और अनुशासन दोनों सिखाता है।

सावधानी: दान अपनी सामर्थ्य के भीतर करें और सामग्री स्वच्छ तथा उपयोगी रखें।

उपाय 3: विष्णु-शिव स्मरण और जप, पांच पंक्तियों में

त्रिपुरारी और विष्णु दोनों की स्मृति में किया गया सरल जप इस दिन मन को स्थिर करता है।

क्या: ॐ नमः शिवाय और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय में से किसी एक का 108 बार जप। कब: प्रदोष काल में, 17:20 से 20:02 के बीच, या सुबह भद्रा और यमगंड के बाद, 10:48 से। कितने का: कोई खर्च नहीं, केवल माला। कितने दिन: एक दिन, चाहें तो अगले एक माह रोज़ 11 बार। आपके लिए क्यों: जिन्हें निर्णय या भविष्य को लेकर अनिश्चितता रहती है, उन्हें इससे स्थिरता मिलती है।

सावधानी: जप शांत स्थान पर करें, दबाव में नहीं, और बीमार या थके होने पर मानसिक जप ही पर्याप्त है।

किन्हें स्नान और व्रत में सावधानी रखनी चाहिए

ठंड में बुज़ुर्ग, हृदय रोगी और छोटे बच्चे ठंडे जल से सीधे स्नान की जगह गुनगुने जल का उपयोग करें। नदी में स्नान करने वाले प्रवाह, फिसलन और भीड़ का ध्यान रखें। उपवास रखने वाले मधुमेह या अन्य रोग में चिकित्सक की सलाह अनुसार चलें। दीपदान के समय खुली लौ से कपड़ों और पर्दों को दूर रखें। यह सावधानी भय के लिए नहीं, पर्व को सहज और सुरक्षित बनाने के लिए है। जिन्हें अपने लिए उपयुक्त उपाय चुनना कठिन लगे, वे उपाय कैलकुलेटर और कमज़ोर ग्रहों के लिए कमज़ोर ग्रह खोजक देख सकते हैं।

बच्चों और परिवार के साथ कैसे मनाएं

बच्चों को दीये सजाने, रंगोली बनाने और प्रसाद बांटने में शामिल करें। उन्हें त्रिपुरारी की कथा सरल रूप में सुनाएं और पूछें कि हम अपने मन के किस अंधकार को दूर करना चाहते हैं। परिवार के साथ आरती और सत्यनारायण कथा सुनना पीढ़ियों को जोड़ता है। छोटे बच्चों के लिए पूजा 20 मिनट की रखें और उसके बाद दीपों की सजावट का समय दें। इस बार दीपावली के पर्वों की लंबी श्रृंखला के बाद यह एक शांत समापन है, और उस श्रृंखला का एक दिन गोवर्धन पूजा 2026 में देखा जा सकता है। पर्वों का क्रम नरक चतुर्दशी 2026 से भी देखा जा सकता है।

कार्तिक पूर्णिमा के बाद: विवाह मुहूर्तों का मौसम

देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) के साथ चातुर्मास समाप्त हो चुका होता है और कार्तिक पूर्णिमा के बाद भी विवाह, गृह-प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों के मुहूर्त खुले रहते हैं। देवउठनी एकादशी का विवरण देवउठनी एकादशी 2026 में और तुलसी विवाह का तुलसी विवाह 2026 में है। अगले वर्ष की शुरुआत के विवाह मुहूर्तों के लिए जनवरी 2027 के विवाह मुहूर्त और फ़रवरी 2027 के विवाह मुहूर्त देख सकते हैं। अपने लिए सटीक दिन जानने के लिए कुंडली के अनुसार मुहूर्त निकलवाना बेहतर रहता है।

आम ग़लतफ़हमियां: क्या स्नान न हुआ तो पुण्य नहीं?

पहली धारणा है कि नदी में स्नान न हुआ तो पर्व अधूरा रह जाता है, जबकि घर पर संकल्प के साथ किया गया स्नान भी मान्य है। दूसरी धारणा है कि भद्रा में पूजा या दान वर्जित है, जबकि भद्रा केवल नए शुभ आरंभ और होम जैसे कर्मों में सावधानी का संकेत है। तीसरी धारणा है कि दीपदान की संख्या से फल तय होता है, जबकि परंपरा में भाव और स्वच्छता को प्रधान माना गया है। इन भ्रमों से बचें। अपने शुभ दिन जानने के लिए लकी डे कैलकुलेटर देखें।

हमारी गणना की पद्धति और इस पृष्ठ की विश्वसनीयता

इस पृष्ठ की सभी तिथि, नक्षत्र और काल त्रिकाल वाणी के पंचांग इंजन से लिए गए हैं, जो Swiss Ephemeris और लाहिड़ी अयनांश पर चलता है और दिल्ली NCR (28.6139°N, 77.209°E) के लिए गणना करता है। पांचों अंग सूर्योदय के समय पढ़े गए हैं, जो पर्व-निर्णय की प्रचलित परंपरा के अनुसार है। त्रिकाल पुस्तकालय में इस पर्व के लिए पृष्ठ-विशिष्ट श्लोक नहीं मिला, इसलिए इस लेख में कोई श्लोक-उद्धरण नहीं दिया गया। अन्य शहरों के लिए समय कुछ मिनट खिसक सकते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग से अंतिम मिलान कर लें।

अपनी कुंडली के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा का समय जांचें

कार्तिक पूर्णिमा के सामान्य समय सबके लिए एक जैसे हैं, पर आपके लिए सर्वश्रेष्ठ घड़ी आपकी कुंडली के लग्न और दशा से तय होती है। अपना जन्म विवरण डालकर मुफ्त शुभ मुहूर्त कैलकुलेटर चलाइए और अपने लिए अनुकूल समय देखिए। कुंडली बनाने के लिए मुफ्त जन्म कुंडली और आने वाली दशा के लिए दशा कैलकुलेटर भी उपलब्ध हैं। शुरुआती जांच मुफ़्त है।

Apna Personalized Analysis Lein

Yeh article general framework hai. Aapke specific chart ke according detailed analysis ke liye:

शब्दावली · Glossary

त्रिपुरारी
शिव का वह नाम जो त्रिपुरासुर के तीन पुरों के नाश की कथा से जुड़ा है।
देव दीपावली
कार्तिक पूर्णिमा की शाम का दीपोत्सव, जिसमें देवताओं के आगमन की मान्यता से दीप जलाए जाते हैं।
भद्रा
विष्टि करण की वह अवधि जिसमें नए शुभ आरंभ टालने की परंपरा है।
प्रदोष काल
सूर्यास्त के बाद का वह समय जब दिन और रात मिलते हैं, पूजा और दीपदान के लिए उपयुक्त माना जाता है।
महाकार्तिकी
कार्तिक पूर्णिमा का वह रूप जब कृत्तिका नक्षत्र का योग बनता है।

Frequently Asked Questions

कार्तिक पूर्णिमा 2026 कब है?

कार्तिक पूर्णिमा 2026 मंगलवार, 24 नवंबर को है। दिल्ली में पूर्णिमा तिथि सूर्योदय से रात 20:23 बजे तक रहती है।

कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान का शुभ समय क्या है?

दिल्ली में प्रातःकाल 06:54 से 08:59 तक स्नान और दान का सहज समय है। भद्रा 10:05 तक है, पर स्नान और दान पर रोक नहीं मानी जाती।

देव दीपावली का दीपदान कब करें?

24 नवंबर को प्रदोष काल में, यानी शाम 17:20 से 20:02 के बीच। इस दौरान पूर्णिमा तिथि 20:23 तक रहती है।

क्या कार्तिक पूर्णिमा पर भद्रा है?

हां। 24 नवंबर को विष्टि करण यानी भद्रा सुबह 10:05 तक है। नए शुभ आरंभ इसके बाद करें। स्नान, जप और दान पर रोक नहीं मानी जाती।

कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

कथा के अनुसार शिव ने इसी दिन त्रिपुरासुर के तीन पुरों का एक बाण से नाश किया था, इसलिए वे त्रिपुरारी कहलाए और यह दिन त्रिपुरारी पूर्णिमा कहा गया।

कार्तिक पूर्णिमा पर क्या दान करें?

अन्न, गुड़, तिल, घी और ऊनी वस्त्र का दान शुभ माना जाता है। अपनी सामर्थ्य के भीतर किसी ज़रूरतमंद या मंदिर को सीधे दें।

क्या नदी में न जा सकें तो घर पर स्नान मान्य है?

हां। स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल डालकर संकल्प के साथ घर पर स्नान किया जा सकता है। नियम सुविधा के लिए हैं, कष्ट के लिए नहीं।

24 नवंबर 2026 का राहु काल कब है?

दिल्ली में राहु काल 14:43 से 16:01, यमगंड 09:30 से 10:48 और गुलिक काल 12:07 से 13:25 है।

24 नवंबर 2026 को कौन-सा नक्षत्र है?

सूर्योदय के समय नक्षत्र कृत्तिका है, जो 23:25 तक रहेगा। मान्यता है कि कृत्तिका के योग में इसे महाकार्तिकी कहा जाता है।

कार्तिक पूर्णिमा के बाद शुभ कार्य कब शुरू होते हैं?

देवउठनी एकादशी (20 नवंबर) के साथ चातुर्मास समाप्त हो जाता है और उसके बाद विवाह, गृह-प्रवेश जैसे शुभ कार्यों के मुहूर्त शुरू हो जाते हैं। अपने लिए सटीक दिन कुंडली से निकलवाएं।

यह भी देखें · See also

इस हब का मुख्य पेजShubh Muhurat Calculator — 39 Ghatnayen

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